मंगलवार, 18 जुलाई 2023
रविवार, 16 जुलाई 2023
कौन कहता है की कांग्रेस ने पिछले 65 सालों में कुछ काम नही किया ?
इतिहास ज्ञात होना चाहिए -: अधाधुंध कांग्रेस की आलोचना करते जाना ठीक नहीं है। कांग्रेस की उपलब्धियां भी जाननी चाहिए और देखिए।
कौन कहता है की कांग्रेस ने पिछले 65 सालों में कुछ काम नही किया ? बहुत किया, लेकिन मुसलमानों के लिए ?
• पाकिस्तान बनाया, मुसलमानों के लिए,
• बांग्लादेश बना, मुसलमानों के लिए,
• धारा ३७० लागू हुई, मुसलमानों के लिए।
• अल्पसंख्यंक बिल आया, मुसलमानों के लिए।
• मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड बना, मुसलमानों के लिए।
• अल्पसंख्यंक मंत्रालय बना, मुसलमानों के लिए।
• वक़्फ़ बोर्ड बनाया, मुसलमानों के लिए।
• अल्पसंख्यंक विश्वविद्यालय बना, मुसलमानों के लिए।
• देश का बंटवारा धार्मिक आधार पर हुआ, मुसलमानों के लिए।
• Places of worship Act लाये, मुसलमानों के लिए।
• Anti communal violence bill दो बारी संसद में पेश किया परंतु BJP ने पास नहीं होने दिया, वो बिल भी मुसलमानों के लिए और कहीं अगर यह बिल पास हो जाता तो हिंदुओं को ख़त्म होने में मात्र 10 साल लगते ? यदि किसी को कोई शक हो तो google पर जाकर पढ़ सकता है। • देश को चुपचाप इस्लामिक देश बनाने की तैयारी कांग्रेस ने की थी, और हिंदूओं के लिए सिर्फ आरक्षण दिया, ताकि हिंदू समाज सदा आपस मे लड़ता रहे और कभी गजवा-ए-हिन्द को समझ ही न पाये ।
हिंदूओं को दुय्यम, दोयम ( second rate citizen) नागरिक बनाने के लिए - हिंदू कोड बिल लाये, तो वो भी मुसलमानों के लिए,
कभी - कभी मन करता है कि पोस्ट ही ना करूं ? फिर ख्याल आता है कि पढेगा भारत, तभी तो कांग्रेसियों की छाती पे चढ़ेगा भारत ? इस पोस्ट को पढ़कर कुछ समझ आया तो अधिक से अधिक लोगों तक क्या पोस्ट पहुंचने में सहयोग करें।
जय श्री राम राधे राधे गोविन्दा
शनिवार, 1 जुलाई 2023
बुधवार, 14 जून 2023
ऐना कियाक ?
आइ भोरे भोर हम चिरपरिचित मिथिला-मैथिलक नेतृत्व जीक आग्रह पर हुनक पोती के उच्च शिक्षा हेतु मार्गदर्शन देबाक हेतु हुनक घर पहुँचलहुँ। घरक लहजा देखि दंग रहि गेलहुँ। घरक सात सदस्य में सँ एक्को गोट सदस्य केँ मैथिली बजैत नहिं पयलहुँ। सब के सब अंग्रेजी किंवा हिन्दी में बात कयलन्हिं। हम बीच-बीच में मैथिली बाजि अप्पन मैथिल होबाक परिचय देबऽ चाहलहुँ। मुदा हमर प्रयास बेकार भऽ गेल। स्वयं हमर सबहक मिथिलाक नेतृत्व जी बजलाह : " मैथिली नहिं अंग्रेजी में बुझाबक प्रयास करियौन। इ सब मैथिली नहिं जनैत छथीन्ह।"
हमर मन बड्ड व्यथित भऽ गेल। नहिं रहल गेल। पुछि बैसलयन्हि जे - ऐना कियाक ? आहाँ सनक मैथिली अनुरागी कियाक अपना बाल बच्चा के मैथिली सँ दूर रखने छी ?
आँखिक संकेत के माध्यम सँ किछु कहलथि । शायद ओ कहऽ चाहलथि जे - चुप रहू, किछु दिन आर जीबऽ दिय। हम मजबूर छी। शपथ खाऽ कऽ कहैत छी आब हम कोनो मिथिला-मैथिलक समारोह में नहिं जायब। हम पतित छी। हमरा माँफ कऽ दिय।
ओ प्रतिष्ठित व्यक्ति रुमाल सँ आँखि पोछथि घर में भागि गेलाह। हमर आँखि में सेहो नोर भरि गेल छल। कहुना अपना के सम्हारैत जे काज लेल गेल छलहुँ से पूरा कऽ यथाशीघ्र अप्पन घर वापस आबि गेलहुँ। किन्तु एक टा प्रश्न मन में बार बार एखनहुँ घुमि रहल अछि जे ऐना कियाक ?
डाॅ माया शंकर झा 'राष्ट्रभाषा-रत्न'
राष्ट्रीय अध्यक्ष
मिथिला स्वराज्य अभियान मंच
कोलकाता
शनिवार, 10 जून 2023
मोदी कौन है ?
Binod Rai
मोदी कौन है ?
इसका जवाब एक जानकार *राजनैतिक वैद्य* ने बड़ा सुंदर समझाया।
आयुर्वेद और मेडिकल सांईस में *शहद* को अमृत के समान माना गया हैं।
लेकिन आश्चर्य इस बात का है कि शहद को अगर *कुत्ता* चाट ले तो वह मर जाता हैं।
यानी जो मनुष्यों के लिये अमृत हैं वह शहद *कुत्तों* के लिये जहर है।
शुद्ध *देशी गाय के घी* को आयुर्वेद और मेडिकल सांईस औषधीय गुणों का भंडार मानता हैं।
मगर आश्चर्य, गंदगी से प्रसन्न रहने वाली *मक्खी* कभी शुद्ध देशी घी को नहीं खा सकती।
गलती से अगर *मक्खी* देशी घी पर बैठ कर चख भी ले तो वो तुरंत तड़प तड़प कर वहीं मर जाती है।
आर्युवेद में *मिश्री* को भी औषधीय और श्रेष्ठ मिष्ठान्न माना गया हैं।
लेकिन आश्चर्य, अगर *गधे* को एक डली मिश्री खिला दी जाए, तो कुछ समय में उसके प्राण पखेरू उड़ जाएंगे।
यह अमृत समान श्रेष्ठ मिष्ठान, मिश्री *गधा* कभी नहीं खा सकता हैं।
*नीम* के पेड़ पर लगने वाली पकी हुई निम्बोली में कई रोगों को हरने वाले औषधीय गुण होते हैं।
आयुर्वेद उसे *"उत्तम औषधि"* कहता हैं।
लेकिन रात दिन नीम के पेड़ पर रहने वाला *कौवा* अगर निम्बोली खा ले तो उस कौवे की मृत्यु निश्चित है।
मतलब, इस धरती पर ऐसा बहुत कुछ हैं... जो हमारे लिये अमृत समान हैं, गुणकारी है, औषधीय है...
पर इस धरती पर ऐसे कुछ जीव ऐसे भी हैं जिनके लिये वही *अमृत... विष है।*
*मोदी वही गुणकारी अमृत औषधि है।*
लेकिन कुत्तों *(आतंकवादी-दंगाई),*
मक्खियों *(देशद्रोही-गंदगी),*
गधों *(वामपंथी सोच-राजनैतिक मूर्ख)*
और
कौवों *(स्वार्थी कपटी मीडिया)* आदि के लिये... विष समान है।
इसलिये यह कुछ तत्व इतने भयभीत है
*आपसे निवेदन करता हूं इस पोस्ट को सभी ग्रुप मे भेजिये | सादर धन्यवाद
*देश सर्वोपरि हे थोड़ा समय निकालकर पोस्ट जरूर पढ़ें। "मोदी हैं तो मुमकिन है।
"योगी है तो हड़कंम्प है |




































