dahej mukt mithila

(एकमात्र संकल्‍प ध्‍यान मे-मिथिला राज्‍य हो संविधान मे) अप्पन गाम घरक ढंग ,अप्पन रहन - सहन के संग,अप्पन गाम-अप्पन बात में अपनेक सब के स्वागत अछि!अपन गाम -अपन घरअप्पन ज्ञान आ अप्पन संस्कारक सँग किछु कहबाक एकटा छोटछिन प्रयास अछि! हरेक मिथिला वाशी ईहा कहैत अछि... छी मैथिल मिथिला करे शंतान, जत्य रही ओ छी मिथिले धाम, याद रखु बस अप्पन गाम - अप्पन बात ,अप्पन मान " जय मैथिल जय मिथिला धाम" "स्वर्ग सं सुन्दर अपन गाम" E-mail: apangaamghar@gmail.com,madankumarthakur@gmail.com mo-9312460150

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गुरुवार, 5 नवंबर 2015

रुबाई

बहैत धार हमर जिनगी आ कछेर अहाँ
सुनबै छी जिनगीक तान बेर बेर अहाँ
आँखि मूनल रहै वा फूजले रहै हमर
हमर सपनामे कएने छी घरेर अहाँ

रुबाई

कहियो तँ करेजासँ हमरा सटा क' देखियौ
हमर नैनासँ अपन नैना मिला क' देखियौ
बनि जेतै एकटा इतिहासे अमर प्रेमक
हमर प्रेमकेँ करेजामे ढुका क' देखियौ

रुबाई

विरहक हमर उपचार नै, अहाँ बिनु जीबि लए छी कहुना
देखलक कियो नै फाटल करेज, जकरा सीबि लए छी कहुना
सुखाएल नयनक ई घाट देखि लोक बूझै निसोख हमरा
कियो नै बूझै नोरक धार नयनसँ हम पीबि लए छी कहुना

रुबाई

चानक चमक बढ़ि गेल अछि
मोनक धमक बढ़ि गेल अछि
जहिया सँ हुनकर रूप देखल
गामक गमक बढ़ि गेल अछि

रुबाई

राति बीतल जाइए
मोन तीतल जाइए
हारि बैसल छी हिया
प्रेम जीतल जाइए