dahej mukt mithila

(एकमात्र संकल्‍प ध्‍यान मे-मिथिला राज्‍य हो संविधान मे) अप्पन गाम घरक ढंग ,अप्पन रहन - सहन के संग,अप्पन गाम-अप्पन बात में अपनेक सब के स्वागत अछि!अपन गाम -अपन घरअप्पन ज्ञान आ अप्पन संस्कारक सँग किछु कहबाक एकटा छोटछिन प्रयास अछि! हरेक मिथिला वाशी ईहा कहैत अछि... छी मैथिल मिथिला करे शंतान, जत्य रही ओ छी मिथिले धाम, याद रखु बस अप्पन गाम - अप्पन बात ,अप्पन मान " जय मैथिल जय मिथिला धाम" "स्वर्ग सं सुन्दर अपन गाम" E-mail: apangaamghar@gmail.com,madankumarthakur@gmail.com mo-9312460150

apani bhasha me dekhe / Translate

मिथिला राज्य लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
मिथिला राज्य लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

सोमवार, 2 मार्च 2015

मिथिला भसीआइए गेल तॅ ओकरा की?

   रकार तॅ पटना आ दिल्ली सचिवालय मे बिजलीक पंखा , चिल्ड एसी रूम आ स्प्रिंगदार सोफाक बीच सुतल अछि , मिथिला भसीआइए गेल तॅ ओकरा की ? कोसी सर्वनासे करैइए तॅ ओकरा की ? मैथिल भीखमंग भ अपन मैट - पैन छोइर, अपन सभ्यता ओ संस्कृति के तिलांजलि दॅ दिल्ली कलकत्ता बम्बई मे कहुना लात जुत्ता खा कहुना अपन गुजर बसर करैइए तॅ ओकरा की ? ओकरा लेखें धइन सॅन।


ओ तॅ इंडिया के फॉरेन पॉलिसी मे व्यस्त अछि। भीतरसॅ मिथिला खुकख् भ रहल अछि , लौक  कनि रहल अछि।
मुदा ओ तॅ काला धन वापसी के नाम पर पूजी पगहा बला सब के जीहजूरी मे अपसीयाँत अछि।
कि मैथिल आबो ने जागॅब ? कहिया सजग बनब अपन अधिकार लेल ?
स्वतंत्रता प्राप्तिक ५० बरखक बाद कीयो भीखक दान बुइझ मैथिली भाषा के अस्टम सूचि मे जगह दॅ देलक तॅ भेट गेल शांती ? भेट गेल संतुष्टि? 

   यद्यपि मिथिलाक इ हालत किएक से सब जनैत अछि। हमहू ..अहूँ .. नेता ..जनतों..
तैइयो मैथिल अपन दारिद्रकें सोनाक पानि चरहौल डिब्‍बा मे बंद कॅ के बिहारक प्रदर्शनिक सोकेस मे सज्बैत अछि।
खेत पथार , सभ्यता - संस्कार के डाहि कहुना अपन अस्तित्व लेल संघर्षरत छैथ.....
फाटल चिटल केथरी जोइर आ ओहि पर सुतबाक क्रम पर आब् आर कतेक दिन गुजर हेतैख ??
कि स्वर्ग सॅ सुन्दर मिथिलाधाम के स्वप्न स्वप्ने टा रहि जेतै ?

सोमवार, 25 नवंबर 2013

सफल रहल हारिस रावत के पुतला दहन - delhi

काइल सीता मैया आ सम्पूर्ण मिथिला के अपमान के विरोध में मिथिला राज्य निर्माण सेना के आवाहन पर दिल्ली और राष्ट्रिय राजधानी क्षेत्र स एकत्रित मैथिल भाई बंधू के कोटिशः धन्यवाद। करीब 2:30 पर जत्था कॉफ़ी हाउस स जंतर मंतर लेल बिदा भेल। पूरा cp सर्किल के घुमैत बाबा खरक सिंह मार्ग स होइत जत्था जंतर मंतर पहुंचल। ओतय पुलिस के भारी बंदोबस्त छल। मिरानिसे के सेनानी द्वारा जबरदस्त प्रतिरोध कैल गेल। बैरिकेड के त एक बेर तोरि देल गेल। परन्तु पुनः पुलिस और जमा भ गेल। किछु लोक के मत छल जे एतहिये पुतला दहन क देल जै। परन्तु इ हमरा सब के मंज़ूर नै छल। एक बेर जखन मिरानिसे हरीश रावत के घर पर पहुँचबाक घोषणा क देने छल तखन त जेना तेना ओतय पहुँचबाक छल। 

तखन इ निर्णय अपना में भेल जे पुलिस के चकमा द के 5-5 के संख्या में अलग अलग रूप स सेनानी सब हरीश रावत के घर पर पहुंची आ फेर अचानक धावा द दी। बस फेर की धीरे धीरे हम सब ओतय पहुँच लगलौ।
करीब 4:30 के करीब हम सब तीन मूर्ती लेन में छलौ। ओकरा बगले में प्रधानमंत्री आवास अछि। आला दर्ज़ा के सुरक्षा के इंतजाम छल। जखने हम सब हरीश रावत के घर के गेट पर पहुँचल की चारू दिस स करीब सौ पुलिस बला घेर लेलक। मुदा टखने ANI के रिपोर्टिंग टीम ओतय पहुँच गेल। ओ कवर कर लागल। फेर भिसन गर्जना भेल। नाराबाजी स पूरा क्षेत्र गुंजि गेल। और पुलिस पहुंचल। हरीश रावत के सुरक्षा में तैनात ACP के ज्ञापन देल जाइत छल की तखने सेना के लोक पुनः जोरशोर स नारा लगब लागल। बस फेर की छल ओकर गेट के सामने सेना के लोक सब ज़मीन पर बैस गेल। इ देख पुलिस दस्ता हमरा सब के अरेस्ट क लेलक। ओकरे प्रतीक्षा छल। पुलिस गारी में जखन हमरा सब के ल के निकलल पूरा रास्ता , जंतर मंतर तक, हम सब पुलिस के गारी के तिरपाल के फारि के नारा लगबैत गेलौ। जंतर मंतर पर हमरा सब के छोरी देल गेल। फेर ओतय नारेबाजी हेब लागल।
अंततः करीब 9 बजे राइत में घर के लेल बिदा भेलौ आ 11:30 बजे घर पहुंचल।
सही में काइल के दिन एतिहासिक छल। आब कोशिश इ हेबाक चाही जे जेहेन मैथिल एकता काइल भेल ओकरा कोना कायम राखल जै? आगाँ के कार्यक्रम के लेल इ एकता कोना मिथिला राज्य आन्दोलन के गति देत??
जय मिथिला जय मिरानिसे।

हरीश रावत के वयान पर मिथिलावासी सहित हिन्दू धर्म से जुड़े लोगो ने किया विरोध प्रदर्शन

नई दिल्ली जंतर मंतर सहित हरीश रावत के निवास पर रविवार को मिथिलावासी सहित अन्य ने भी किया जमकर विरोध प्रदर्शन जिसमे अखिल भारतीय मिथिला संघ, मिथिला राज्य निर्माण सेना , विस्व मैथिल परिषद् ,मिथिला सेवा समिति,अखिल भारतीय मिथिला पार्टी, जन जागृति मंच सहित कई मिथिला के संस्था एक साथ मिलकर हरीश रावत का वयान कि सोनिया गांधी भी विदेशी है और भारत में पूजी जाने बाली माता सीता भी विदेशी है इस बात पर आक्रोश जताया . रावत को ये नहीं पता कि माता सीता का भारत कि भौगोलिक क्षेत्र सीतामढ़ी के पुनौराधाम में अवतरित हुई थी / हमारे देवी देवताओं कि तुलना सोनिया गांधी से किया जाना बहुत ही शर्मनाक बात है / हरीश रावत इतिहास और रामायण जैसे ग्रन्थ का पढ़ना बहुत जरुरी है /
अभिल भारतीय मिथिला संघ के अध्यक्ष ने ज्ञापन देते हुए कहा कि वो मीडिया के सामने जिस तरह ऐसी वयान दिया उसी तरह मिडिया के सामने माफ़ी मांगे नहीं तो मिथिलावासी सहित देश कि हिन्दू धर्म जुड़े समुदाय के साथ - साथ माता सीता भी कभी माफ़ नहीं करेंगे / इसके लिए रावत को सात दिनों का समय दिया जाता है , अगर माफ़ी माँगा तो ठीक नहीं बड़े पैमाने पर जन आंदोलन किया जाएगा-
आँखों देखा हाल -  

मंगलवार, 24 सितंबर 2013

मिथिला राज्य को बनाना है


 जोड़ लगाकर मिथिला राज्य को

          बनाना है साथियों

जोड़ लगाकर मिथिला राज्य को बनाना है साथियों
खींच कर आकाश धरती पर झुकना है साथियों

चीर सीना पर्वतों का गंगा बहाना है साथियो


इतना जोड़ लगाओ कि कांप उठे दश दिशायें एक ही हुंकार से
इतना विश्वास दिला दो लोगो को जो जुड़ जाएँ आप से !
  चल पड़ो तो कोई अड़चन राह में आए नही

   अड़चनों को राह से हटना सिखा दो साथियों


                             कामयाबी ख़ुद-ब-ख़ुद चल कर आता नही अपने आप से

                          कारवाँ इतनी बड़ी बनाओ कि मंज़िल मिलें आसान से



                            मंज़िल अपना मिथिला राज्य को बनाना है साथियों !

                                          भेद-भाव को दूर भगाकर सद्-भाव फैलानी है साथियों
                                             भाव ये जन-जन के मन में जगानि है साथियो




                                                तोड़ कर इस जाति भाषा धर्म की ज़ंजीर को
                                                   मानवता को धर्म अपना बनाना है साथियों
                                                              मंज़िल अपना मिथिला राज्य को बनाना है साथियों !

भारतमें मिथिला राज्यक आन्दोलन तेज

स्पष्ट अछि जे भारतीय गणराज्यमें मिथिलाकेँ राज्यक दर्जा देबाक माँग स्वतंत्रता वर्ष यानि १९४७ ई. सँ पूर्वहिसँ कैल जा रहल अछि। पूर्वमें बौद्धिक आन्दोलन शान्तिपूर्ण प्रकृतिक आ दस्तावेजीरूप में बेसी भेल अछि। आन्दोलनमें उग्रताक नाम पर मिथिलाकेँ दू भागमें बँटल रहबाक नैतिक विरोध करैत कोनो समय नेपाल-भारत सीमा पाया तोडूबाक आन्दोलन कैल गेल, तहिना प्रधानमंत्री नेहरुकेँ घेरावके उद्देश्यसँ दर्जनों कार्यकर्ता कलकत्ता मार्च करबाक क्रममें आसनसोलमें गिरफ्तार सेहो कैल गेल। तथापि अलग राज्य के मुद्दापर उग्र आ आमजन समर्थित आन्दोलनक कोनो पूर्व प्रकरण नहि भेटैत अछि।

भारतमें राज्य निर्माणक अवधारणा:
अंग्रेजी उपनिवेशी भारतमें सक्रिय एकमात्र राजनीतिक दल भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस १९२० में निर्णय केने छल जे राज्यक संरचना भाषायी आधारपर होयत। तर्क छलैक - सहज प्रशासन आ जाति तथा धर्मके आधार पर बढि रहल पहिचानक विवादमें न्युनता लेल भाषिक पहिचान उचित होयत। यैह राजनीतिक लक्ष्यके संग राजनीतिक दल आगू बढल छल। एहि दलक प्रान्तीय समितिक गठन सेहो १९२० सँ यैह आधार पर कैल गेल। १९२७ में काँग्रेस पुन: अपन प्रतिबद्धताकेँ घोषणा भाषायी आधारपर राज्यक गठन करबाक बात कतेको बेर दोहरेलक। यैह पुनरावृत्ति १९४५-४६ के चुनावी घोषणा-पत्रमें सेहो देल गेल। लेकिन स्वतंत्रताक तुरन्त बाद काँग्रेस दुविधामें पडि गेल जे मात्र भाषाक आधारपर राज्यक गठन देशमें राष्ट्रीय एकताक हितमें नहि होयत। १७ जुन, १९४८ केँ संविधान सभाध्यक्ष डा. राजेन्द्र प्रसाद द्वारा गठित भाषायी प्रान्तीय आयोग अर्थात् डार आयोग (Linguistic Provinces Commission - aka - Dar Commission) द्वारा देल रिपोर्ट अनुरूप "the formation of provinces on exclusively or even mainly linguistic considerations is not in the larger interests of the Indian nation". कहि भाषायी आधार पर राज्यक गठनकेँ भारत राष्ट्रकेँ हितमें नहि कहि नकारल गेल। भौगोलिक अखण्डता, आर्थिक आत्म-निर्भरता आ प्रशासन संचालनक सहजताके आधार पर राज्यक गठन लेल मद्रास, बम्बइ, केन्द्रीय प्रान्त आ बरार केँ मुख्यरूपमें बनाओल जयबाक सिफारिश कैल गेल। एहि सिफारिश पर अध्ययन लेल 'जेवीपी समिति' (जवाहरलाल नेहरु, सरदार वल्लभभाई पटेल व तत्कालीन काँग्रेस अध्यक्ष पट्टाभी सितारमय्या के संयुक्त समिति) जयपुरक काँग्रेस अधिवेशन द्वारा बनल। १ अप्रील, १९४९ केँ एहि समिति द्वारा ओहि परिस्थितिमें नव प्रान्तक गठन लेल अनुकूलता नहि रहबाक निर्णय देल गेल, लकिन संगहि जनभावना यदि एहि तरहक माँग राखत तऽ प्रजातंत्र के रक्षा हेतु किछु निश्चित सीमामें रहैत भारत लेल समग्र हितकेँ ध्यान में रखैत नव राज्य गठन करबाक बात मानय जायत सेहो कहल गेल।

भीम राव अम्बेदकर एक ज्ञापनपत्र १४ अक्टुबर, १९४८ केँ डार आयोगकेँ देलाह जाहिमें भाषाक आधारपर राज्यक गठन करबाक आ विशेषरूपसँ मराठी-बहुल महराष्ट्र राज्य बम्बइ राजधानी सहित बनेबाक माँग रखलनि। राष्ट्रीय एकता लेल हुनकर सुझाव छलन्हि जे केन्द्र व राज्य दुनू के राजकाजक भाषा एकहि हेबाक चाही। तहिना के इम मुन्शी, गुजराती नेता अम्बेदकरक प्रस्तावकेँ विरोध केलैन - जे एकहि राज्यमें विभिन्न भाषा संग कोनो एकहि भाषाभाषीक राजनीतिक लक्ष्यके पोषणसँ विभेदकारी होयत जेकर समाधान संभव नहि होयत। पुन: १९५२ में तेलगु बाहुल्य क्षेत्रकेँ मद्राससँ पृथक राज्य बनेबाक माँग संग आमरण अनशन केनिहार पोट्टि श्रीरामुलु जिनक मृत्यु १६ दिसम्बर, १९५२ केँ भऽ गेल, परिणामस्वरूप १९५३ में आँध्रा राज्यक स्थापना १९५३ में भेल। आ, एकर प्रभाव-प्रतिक्रिया समस्त राष्ट्रपर भाषायी आधारपर राज्य बनेबाक माँग तेज भऽ गेल। अन्तत: सर्वोच्च अदालतकेर पूर्व जज फजल अली केर अध्यक्षतामें राज्य पुनर्गठन आयोग बनायल गेल। ई आयोग ३० सेप्टेम्बर १९५५ में अपन रिपोर्ट देलक जाहि अनुरूपे “Factors Bearing on Reorganization” अन्तर्गत स्पष्ट कहल गेल जे “it is neither possible nor desirable to reorganise States on the basis of the single test of either language or culture, but that a balanced approach to the whole problem is necessary in the interest of our national unity.“ राष्ट्रीय एकता लेल कोनो एकल भाषा या संस्कृतिक आधारपर राज्यक गठन नहि तऽ संभव अछि नहिये वाँछणीय। यैह आयोगक रिपोर्टके आधार मानि The States Reorganisation Act of 1956 बनाओल गेल, हलाँकि एहिमें आयोगक किछुए सुझाव समेटल जा सकल।

आयोगक अन्य सुझावमें किछु महत्त्वपूर्ण पाँति जे एहि ठाम उल्लेख योग्य बुझैछ:

“We do not regard the linguistic principle as the sole criterion for territorial readjustments, particularly in the areas where the majority commanded by a language group is only marginal”. यैह ओ पाँति मानल जा सकैत अछि जेकर बीज अमैथिल विद्वान् राजनीतिपूर्वक मैथिली विरुद्ध पहिने रोपि चुकल छलाह जेकर खुलाशा डा. अमरनाथ झा द्वारा कैल गेल अछि। मैथिलीकेँ षड्यन्त्रपूर्वक विद्वान् केर भाषा मनबाक, खने हिन्दीक उपभाषा मनबाक, खने मैथिल विद्वान् विद्यापति आ मिथिलाक्षरकेँ बंगालीक रूप मनबाक आदि कतेको षड्यन्त्र कैल गेल।

“We are generally in agreement with this view, but in our opinion, the mere fact that a certain language group has a substantial majority in a certain area should not be the sole deciding factor”. एहि पाँति सँ फेर भारतीयताक विरुद्ध मानू पूर्वाग्रही सोच झलैक रहल अछि, हर क्षेत्रमें एक विशिष्ट भाषा आ संस्कृति रहितो शुरुए सऽ एक परिकल्पना जे मेजरिटी आ माइनारिटी के अलग-अलग भाषारूपी राजनीतिक विभेद जानि-बुझि थोपल गेल बुझैछ।

“It should be mentioned that, owing to my long connection with Bihar, I refrained from taking any part in investigating and deciding the territorial disputes between Bihar and West Bengal, and Bihar and Orissa – S.R.C Chairman, Hon. S. Fazl Ali. एहि पाँति सँ बिहार-बंगाल, बिहार-उडीसा सीमापर टिप्पणी अछि जे आयोग अध्यक्ष अपन अनुभवक आधारकेँ सर्वोपरि मानि अनुसंधानसँ बचबाक बात केने छथि।

मिथिला कतहु सँ एहि चर्चामें नहि पडल अछि। एकर मूल कारण आर जे किछु हो, लेकिन प्रोफेसर अलख निरंजन सिंह आ प्रोफेसर प्रभाकर सिंह द्वारा प्रस्तुत शोध पत्र: Finding Mithila Between India's Centre And Periphery में उद्धृत एक निष्कर्स जे निम्न अछि एहि सँ पूर्ण सहमति आम राय बनैछ:

Sadly Dr. Lakshamn Jha and other leaders of this movement failed to connect the cause of a separate Mithila State with its entire population. Clearly, the language based call for a separate Mithila state did not stand the test of the caste-based pluralism that the region enjoys. Very clearly the Dalit and other communities that have been victim of the age old Hindu orthodoxy and ossified Brahminism distanced themselves from such Maithil identification. But, as discussed in what follows, the failure of the movement did harm the region in some ways. The article connects
Bihar’s present day flood-led destruction and the subsequent migration of people to the industrialised States of the country to the failure of Maithil movement. Thus, instead of seeking to ignite the movement on the urges of Sanskritic-Brahminical elitism, the Maithil leaders should have generated a socialist-linguist movement as the grass-root
level in favour of legitimacy.

उपरोक्त निष्कर्समें स्पष्ट कैल गेल अछि आन्दोलनकेँ आमजनतक पहुँचयसँ रोकल गेल, आन्तरिक वा बाह्य जाहि कारणसँ किऐक नहि हो... मार्गदर्शन सेहो समुचित अछि जे यथार्थक धरातलसँ जोडि जाहि जातीय विविधताक संस्कृति वास्तवमें मिथिला रहल तेकर असलियतकेँ आत्मसात् करैत राज्यक माँग सँ सर्वसाधारणकेँ जोडब आवश्यक अछि। मिथिलामें एखन धरि सामाजिक संगठन, बुद्धिजीवी संगठन या कोनो संघर्ष समिति यथार्थक धरातल सँ एहि मुद्दाकेँ मिथिला क्षेत्रक तथाकथित सीमा धरि नहि जोडि सकल अछि। नहिये एहि दिशामें कोनो राजनीतिक दल द्वारा कहियो कोनो प्रयास भेल - नहिये कोनो एहेन सांस्कृतिक क्षेत्रीय एकता लोक-जुडावकेर द्योतक लोक संस्कृति, पर्व वा परंपरा द्वारा मिथिलाक सांस्कृतिक अखण्डताकेँ कायम राखल जा सकल। सकारात्मक पहल सेहो कोनो तेहेन नहि भऽ सकल जाहि के कारण गंगा उत्तर वा दक्खिन कोनो तरहक आपसी जुडाव के विशालता बनैत।

वर्तमान सुगबुगाहट आ मिथिला राज्यक माँग लेकिन फेर तीव्र भेल जा रहल अछि। एक बेर पूर्वहिके भाँति आँध्र समान तेलंगानाक गठनके बात मिथिला सहित अनेको छोट राज्यक माँगकेँ तीव्रता प्रदान केलक अछि आ फेर दोसर बेर राज्य पुनर्गठन आयोग के स्थापनाक माँग करैत संबोधन करबाक माँग राजनीतिक परिवेशमें उठय लागल अछि। एम्हर पुरान आ नव संस्था सभ आपसी एकता करैतो राज्यक संघर्षकेँ जन-सरोकारक विषय बनाबय लेल व्यग्र देखाइत अछि। सभ सऽ मुख्य दू बात जे परिवर्तन देखय में आयल अछि - मिथिला क्षेत्र के विशालता पर कैल जा रहल अभियानकेँ आम लोक सकारात्मक रूपमें ग्रहण करय लागल अछि आ राज्य केर आवश्यकता उपेक्षा विरुद्ध स्वराज्यक स्थापना थीक सेहो बुझय लागल अछि। संगहि आब संघर्षक क्षेत्रमें नहि केवल विद्वत् बुढ-पुरान लोक टा छथि, वरन् युवा-शक्तिमें अपन संवैधानिक अधिकार प्रति जागृति सेहो प्रसार होवय लागल अछि। लिपि, भाषा, साहित्य, संस्कृति सभ किछु विलोपान्मुख होइत देखि आब राज्यक चिन्ता आम बनब स्वाभाविके छैक। तहिना जाति-पातिमें तोडब आ वोट-बैंक राजनीति टा करब नहि कि असलियतके विकास आनब, एहि सभ सँ पीडा आमजनकेँ होयब सेहो स्पष्ट अछि। स्वराज्य लेल जनयुद्ध तखनहि होइछ जखन ई देखार भऽ जाइछ जे वर्तमान प्रशासन-व्यवस्थापन कथमपि उपेक्षा दूर नहि करत, उलटा विभिन्न तरहक राजनीतिक खेलसँ क्षेत्रीय विशिष्टताके नाश करत। मिथिला राज्यक औचित्य आब जन-सरोकारके रूपमें परिणत भेल जा रहल अछि।

मंगलवार, 27 अगस्त 2013

मिथिला राजक लेल समाहरणालयक समक्ष होएत धरना

मधुबनी : मैथिल समाज आ भारतीय मिथिला राज्य संघर्ष समितिक तत्वावधानमे मिथिला राज्यक मांगक समर्थनमे 27 अगस्त केँ समाहरणालयक समक्ष धरना देल जाएत। इ जनतब दैत समाज केर सचिव प्रो. शीतलांबर झा बतौलनि जे धरनामे पूर्व मंत्री राजकुमार महासेठ, कृपानाथ पाठक, डा. बैद्यनाथ चौधरी बैजू संगे बहुतो मिथिला राज्य प्रेमी भाग लेता। (साभार : www.mithilaprime.tk)

शुक्रवार, 9 अगस्त 2013

मिथिला राज्य किऐक?

मिथिला राज्य किऐक?

Pravin Narayan Choudhary


* संवैधानिक अधिकार सम्पन्नता लेल 
* संस्कृति आ सभ्यताक संरक्षण लेल
* विशिष्ट पहिचान 'मैथिल' केर संरक्षण लेल 
* पलायन आ प्रवासक खतरा सँ मिथिलाक रक्षा लेल
* आर्थिक पिछडापण आ उपेक्षा विरुद्ध स्वराज्यसम्पन्न विकास लेल
* स्वरोजगार संयंत्र - उन्नत कृषि - औद्योगिक विकास लेल

* बाढिक स्थायी निदान लेल
* शिक्षाक खसैत स्तर में सुधार लेल
* मुफ्त शिक्षा आ शत-प्रतिशत साक्षरताक लेल
* गरीबी उन्मुलन - हर व्यक्ति लेल रोजी, रोटी आ कपडा लेल
* जातिवादिताक आइग सँ जरि रहल समाजमें सौहार्द्रता लेल
* ऐतिहासिक संपन्नताकेर द्योतक धरोहरकेर संरक्षण लेल

* पर्यटन केन्द्रकेर स्थापना, विकास व संरक्षण लेल
* यात्रा संचार के लचरल पूर्वाधारमें ललित विकास लेल
* जल-स्रोत केर समुचित दोहन लेल
* मिथिला विशेष कृषि उत्पाद केर व्यवसायीकरण लेल
* जल-विद्युत परियोजना - जल संचार परियोजना लेल
* मिथिला विशेष शिक्षा पद्धति (तंत्र ओ कर्मकाण्ड सहित अन्य विधाक) अध्ययन केन्द्र लेल

* पौराणिक मिथिलादेश समान आर्थिक संपन्नता लेल
* पौराणिक न्याय प्रणाली समान उन्नत सामाजिक न्याय व्यवस्था लेल
* जन-प्रतिनिधि द्वारा वचन आ कर्म में ऐक्यता लेल
* भ्रष्ट आ सुस्त-निकम्मा प्रशासन तथा जनविरोधी शोषणके दमन लेल
* लचरल स्वास्थ्य रक्षा पूर्वाधार में नितान्त सुधार लेल
* मुफ्त बिजली, पेयजल, शौच, गंदगी बहाव व्यवस्थापन लेल

स्वराज्य सदैव आमजन हितकारी होइछ। मिथिलाक गरिमा अपन स्वतंत्र अस्तित्व १४म शताब्दीक पूर्वार्द्ध धरि कायम रखलक। बादमें विदेशी शासककेर चंगूलमें फँसैत अपन गरिमासँ क्रमश: दूर भेल। एकर समुचित प्रतिकार लेल भारतीय गणतंत्रक विशालकाय शरीरमें आबो यदि राज्यरूपमें संवैधानिक मान्यता नहि पायत तऽ मिथिलाक सांस्कृतिक मृत्यु ओहिना तय अछि जेना एकर अपन लिपि, भाषा ओ समृद्ध लोक-परंपरा-संस्कृति आदि लोपान्मुख बनि गेल। बिना राजनीतिक संरक्षण आ समुचित प्रतिनिधित्वक प्रत्यक्ष प्रमाण ६५ वर्षक घोर उपेक्षा सोझाँमें अछि। अत: राष्ट्रीयता आ राष्ट्रवादिताक सशक्तीकरण संग-संग क्षेत्रीय संपन्नता आ सभ्यताक संरक्षण लेल मिथिला राज्य बनेनाय परमावश्यक अछि। 

शुक्रवार, 19 जुलाई 2013

मिथिला राज्य निर्माण यात्रा - २

मिथिला राज्य निर्माण यात्रा - २




२२ जुलाई सँ २६ जुलाई - सुलतानगंज (भागलपुर), तारापुर (मुंगेर), रामपुर (मुंगेर), कुमरसाइर (मुंगेर), धौरी (मुंगेर), जिलेबिया (मुंगेर), सुइया (बाँका), दण्डी आश्रम (बाँका), अभरक्खा (बाँका), कटोरिया (बाँका), इनारावरण (बाँका), गोरियारी (बाँका), दुम्मा (मोहनपुर), कलकतिया (मोहनपुर), भूत बंगला (देवघर), बाबाधाम (देवघर), वासुकीनाथधाम (जरमुंडी)।



जन-जागरणक दोसर मजबूत पहल लेल मिथिला राज्य निर्माण सेना द्वारा २२ जुलाई सँ शुरु भऽ रहल दुनियाक सभ सँ पैघ मेला आ मिथिलाक भंडार कोण कहाइवाला क्षेत्र: सुलतानगंज सँ देवघर होइत बाबा वासुकीनाथधाम धरिक यात्रा जेकरा "मिथिला राज्य निर्माण यात्रा - २" सँ संबोधित कैल जायत आ जेकरा माध्यम सँ आम मिथिलावासीमें अपन संवैधानिक अधिकार प्रति सचेतनशील बनबाक आह्वान करैत २०१४ केर चुनावमें केवल वैह नेता या दल केर समर्थन देल जाय जे अपन चुनावी घोषणा-पत्रमें मिथिला राज्यक माँगकेँ समर्थन करता - एहि तरहें धर्मयात्राक संग सत्याग्रह केर दोसर चरण आयोजन कैल जायत। एहि चरणमें पुन: मिरानिसे केर वीर अभियानी अनुप कुमार अगुवाई करता आ संगमें रहथिन दर्जनों मिरानिसे सदस्य व समर्थक। हरेक ५ किमी पर एक जनसभा तथा पर्चा-पम्पलेट वितरण करैत मेलामें पहुँचल लगभग सभ क्षेत्रक मिथिलावासी सँ अनुरोध कैल जायत जे आबो अपन अधिकार लेल सजग नहि बनब तऽ पहिचान बचेबाक दोसर कोनो उपाय नहि अछि।
जागू मैथिल! नहि तऽ पहिचान मेटि जायत।



गुरुवार, 13 जून 2013

मिथिला-परिक्रमा

मिथिला-परिक्रमा


पहिने अनशन ,तेक्कर बाद मिथिला राज्य निर्माण यात्रा आ आब "मिथिला-परिक्रमा" ; लागैइत ऐछ जे वर्ष-2013 मिथिला राज्य आन्दोलनक कार्यक्रमक क्षेत्रम सम्पूर्ण मैथिल-संस्था आ मिथिलवासी एकत्रित भक अप्पन अधिकार लेल आब आगू आय्ब रहल छैथ |
   मैथिलगण सबक उत्साह आ अप्पन मैथिल-उमंग देखक मिथिलाक राज्य निर्माण आ विकास स जुरल संस्था सब आब प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप सौं जुईर रहल छैठ, जे नीक गॅप अछि |
एहा द्वारे राज्यक् निर्माण आ विकास लेल आब "अखिल भारतीय मिथिला पार्टी" , "मिथिला-परिक्रमा" क नाम सौं मिथिला भ्रमण कयर मिथिलाम आन्दोलनक नवका अलख़ जगैताय्त्त| 
ई परिक्रमा देवोत्थान एकादशीस विवाह-पंचमी धरि (13 सितंबर स 10 नवंबर तक) चलत जॅयिमा संस्था आ सहयोगी मैथिल सब राज्यक कोन कोन म जाक मैथिल सबक़ जागरूक बनेताय्त्त |

** "मिथिला-परिक्रमाक" यात्रक-नक्शा अय प्रकार सौं आईछः :-

((बेगुसराय)) -->खगरिया-->नवगच्छिया-->कटिहार-->किशनगंज-->पूर्णिया-->अररिया-->मधेपुरा-->सहरसा-->सुपौल-->झंझारपुर ->दरभंगा-->बेनिपुर-->रोसरा-->समस्तीपुर-->महनार-->हाजीपुर-->मुजफ्फ़रपुर-->मोतिहारी-->बेतिया-->रक्सौल-->सेओहर-->सीतामढी-->पुपरी-->((मधुबनी))

** अय "मिथिला-परिक्रमा" क मुख्य विकसी-बिंदु निम्न आईछः :-

1) सम्पूर्ण मिथिला क्षेत्र मे मातृभाषक माध्यम सा 12वी कक्षा तक पढ़ौनिक व्यवस्था आ तहि म हॉस्टिल के निर्माण आ आधुनिक स्तरकशिक्षक सुविधा |
2) मैथिली सम्पूर्ण मिथिला क्षेत्रक राजकाज के भाषा आ राजकीय कार्यविधिक भाषा |
3) कृषि प्रधान क्षेत्र मिथिलक उर्वर भूमिक समुचित दोहन आ उत्पादन |
4) जलशक्तिक समुचित उपयोग आ उचित वितरनक व्यवस्था एवं जल संचय |
5) मिथिलक कृषि उत्पादपर फुड प्रोसेसिंग इंडस्ट्रीयक विशाल ढांचाक निर्माण |
6) कृषि आधारित, पत, कगत, चीनी, तम्बाकू इंडस्ट्रीयक व्यवस्थापन |
7) मिथिलक तरकारी, फल आ फुलक लेल बजारक निर्माण आ कोल्ड स्टोरेजक व्यवस्था |
8) समस्त पोखरी ,चौर आ नदी सब पर बाँध बना मत्स्यपालनक व्यवस्था |
9) बरौनी मे पेट्रोकेमिकल के परियोजनाक स्थापना आ विस्तार |
10) लौकाहा, रीगा, सुपौल, फारबिसगंज आ लौरिया मे बिजली उत्पादन केन्द्रक निर्माण |
11) कटिहार, बेगुसराय ,सहरसा आ बेतियाः म मेडिकल कॉलेज के स्थापना |
12) सब ज़िला मे ईन्जीनियिरिंग कॉलेज केस्थापना केन्द्र एवं राज्यकद्वारा |
13) भाषाई चेतना आ संस्कृतिक सुरक्षक लेल सब गम मे पुस्तकालय |
14) दर्शनयी आ पौराणिक स्थान के पर्यटन स्थलक रूप देवक व्यवस्था |
15) मिथिलाक हस्तकला, हस्‍त-करघा आ चित्रकला क बीच सामंजस्य आ रोजगार सृजन |
16) यातायताक उन्नतिक लेल मिथिला स्टेट ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन के गठन |
17) क़ृषि उत्‍पादकता बढवा लेल विभिन्न उत्पादक कृषि सोध संस्थान |
18) राज्यक शहरीकरण हेतु समस्त प्रखंड के टाउनशिपक दर्जा |
19) खेल-कुदक बढ़ावा लेल बच्चाक चयन खेल-कूद विकास प्राधिकारकगठन |
20) समस्त पंचायत मे सर्व सुविधा संपन्न हॉस्पिटलक स्थापना आ विस्तार |
21) उड्डयनक विकास लेल हवा अडडक नगरीय उपयोग आ हवा सेवक विस्तार |

ई आन्दोलनक सफलता आ समस्त मिथिलवासी आ मैथिल सब सौं सहयोगक आशा हम करै छि |
Jha Chandan

शुक्रवार, 24 मई 2013

मिथिला राज्य निर्माण यात्रा: जन सरोकार आ जन-जागृतिक अचूक मंत्र



मिथिला राज्य निर्माण यात्रा: जन सरोकार आ जन-जागृतिक अचूक मंत्र
एहि पोस्ट द्वारा रथ-यात्रा वृतान्त केँ परिकल्पना कागज पर उतारबाक प्रयास कय रहल छी जे आगामी समय में रथ-यात्री अभियानी 'मिथिला राज्य निर्माण सेना'क वीर-पुरुष लेल सेहो काजक होयत। मार्गदर्शन लेल मानचित्र पूर्व यात्रा आ जनता संग सहकार्यक आधार पर कैल जा रहल अछि।

समय भोरे ५ बजे वसुधाक ओ महत्त्वपूर्ण भूभाग जतय साक्षात् जगज्जननी सिया अवतरित भेलीह - अवतारक प्रसंग सर्वविदिते अछि जे रावणक अत्याचारी अहंके बध करबाक लेल मायारूपी जगदम्बिका सीतारूपमें जनकनन्दिनी बनि लीला कयलीह; ताहि पुनौराधाम (सीतामढी) सँ रथयात्री अपन-अपन धर्म अनुरूप ईश्वरकेँ प्रार्थना (सजदा) करैत यात्रा प्रारंभ करताह। उपस्थित जनमानसकेँ रथयात्री द्वारा संबोधन करैत सामान्य जनमानसहि सँ कोनो बुजुर्ग आ प्रभावशाली नेतृत्वकर्ता द्वारा पुनौराधामक विकास संग ओहि क्षेत्रक आम-जनताक माँग सूची सेहो प्राप्त करताह आ तदनोपरान्त यात्रा आगू बढत। पुन: सार्वजनिक महत्त्वके कोनो भूमिपर रथ रुकैत जन-जनसँ गला-मिलानी करैत, हाथ जोडि प्रार्थना करैत मिथिलाक खसैत अस्मिता आ पिछडल विकासक चर्चा करैत ओहि गाम-ठामक सरोकारक सूची ग्रहण करैत आगू बढैत चलता। हरेक ५० कि.मी. के यात्रामें कोनो एक जगह जनसभाक आयोजन कैल जायत। ओहि जनसभामें कोनो एक स्थानीय अभिभावककेर नेतृत्वमें विचार-गोष्ठी कैल जायत जेकर विषय 'भारतीय गणतंत्रमें मिथिलाक स्थापना: मिथिला राज्य निर्माण' होयत। विचार पक्ष या विपक्ष दुनू के समेटल जायत। प्रस्तावना सहित के रजिस्टर पर जनमानसकेर उपस्थिति जगह-अनुरूप, नाम, सम्पर्क आ हस्ताक्षर लेल जायत। पुन: ओहि जनसभामें एक प्रश्नावली जे विषयपर लिखित विचार लेबाक दृष्टिकोणसँ होयत ताहिपर जनमानसके प्रतिक्रिया संकलन कैल जायत, एहि पर्चीमें लोकक नाम, फोन नं. आ विचार जे मिथिला राज्य चाही वा नहि तेकर निर्णय लिखित रूपमें रहत आ गुप्त रूपमें बैलट-बक्समें संग्रहित कैल जायत जेकर गिनती यात्राक अन्तमें कैल जायत आ ओकरा जनादेश मानल जायत। तहिना रथयात्रा एक यज्ञ रूपमें सत्याग्रह थिकैक ताहि लेल सभक आर्थिक अनुदान लेल सेहो दान-पेटीक प्रयोग कैल जायत आ जिनका जे श्रद्धा हेतन्हि से योगदान देताह। मिथिला राज्य निर्माण सेनामें जे कियो सहभागी बनय लेल इच्छूक हेता आ गाम-गाममें संगठन विस्तारक आवश्यकता देखैत एहि लेल अनुरोध करैत नाम जोडल जायत। मिथिला राज्य निर्माण परिषद् के सदस्यता नाममात्र (१० रुपया) शुल्क पर्ची काटैत कैल जायत। यात्रा विश्राम कोनो मन्दिर या मस्जिद या आमजनक उपकारी स्थल पर ग्रामीणक सहयोग सँ कैल जायत। रात्रि भोजन व विश्राम सँ पूर्व सेहो विचार गोष्ठी आ उपरोक्त समस्त प्रक्रिया निरंतर रूपमें कैल जायत। जन-जन के विचार लेबाक लेल उपरोक्त प्रक्रियासँ अतिरिक्त आरो प्रभावी उपाय अपनेबाक योजना अछि। सत्याग्रही लेल कोनो बात विरोधाभासी नहि होइत छैक, समर्थन या विरोध सभ किछु एकसमान होइत छैक - ताहि हेतु विचार प्रकट करबाक स्वतंत्रता समस्त जनमानसकेँ देल जायत। सत्याग्रहीक विचार केकरो पर थोपल जयबाक या केकरो विचारधारा या सिद्धान्तक विरोध लेल कम बल्कि भारतीय संविधानमें जन-गणकेर सरोकारक बात राखब आ मिथिला समान ऐतिहासिक संस्कृतिक संरक्षण लेल राज्य निर्माण जरुरी कहि जन-जनकेँ अपन आगूक संघर्ष लेल प्रेरणा संचरण कैल जायत। पुन: दोसर दिनक कार्यक्रम जाहि सँ दोसर जिलाक यात्रा उचित समयसँ पूरा हो ताहि तरहें भोरे ७ बजे सँ नित्य प्रारंभ करैत सूर्यास्त होइत-होइत समुचित स्थानपर यात्राक रात्रि-विश्राम देल जायत। हरेक जिला सँ विभिन्न राजनीतिक दल आ समाजसेवीक समुचित सहभागिता पर विशेष बल रहत, जाहि सँ सभक विचार ग्रहण करैत एकजूट प्रयास सँ मिथिला राज्य निर्माण लेल संघर्ष जमीन पर चलत से विचार अछि।

सोमवार, 20 मई 2013

समस्त जागरुक मैथिल मित्र सँ निवेदन जे एहि महत्त्वपूर्ण मुद्दा पर जरुर ध्यानकेन्द्रित करी....





   समस्त जागरुक मैथिल मित्र सँ निवेदन जे एहि महत्त्वपूर्ण मुद्दा पर जरुर ध्यानकेन्द्रित करी....

मिथिलामें मैथिली सिनेमा लागत - १००% स्योर भऽ जाउ।
मिथिलामें मैथिलकेँ प्रथमत: रोजगार भेटत - १००% स्योर भऽ जाउ।
मिथिला क्षेत्रक कला-संस्कृतिक संरक्षण-प्रवर्धन लेल प्राथमिकता देल जायत - १००% स्योर भऽ जाउ।
मैथिली भाषा सहित विभिन्न उप-भाषाके सेहो भाषारूपमें पूर्ण विकासक काज होयत - १००% स्योर भऽ जाउ।
उद्योग, पर्यटन, कृषि, सिंचाई, स्वास्थ्य आ शिक्षा - एतेक विन्दुपर ध्यानकेन्द्रित कैल जायत - १००% स्योर भऽ जाउ।
अनावश्यक चिन्ता जे कोनो रहत से सभ दूर होयत - १००% स्योर भऽ जाउ।
लेकिन एहि सभ के लेल केवल आ केवल स्वराज्य बनौनाय जरुरी अछि। मिथिला राज्य चाही। मिथिला के अपन राजनीतिक धार होयब जरुरी। नेता वैह जे आइ अछि, लेकिन ओकरा ऊपर जे बिहार आ भारतक नेतागिरी वाला लाबी हावी छैक से खत्म होयब जरुरी छैक। ताहि हेतु भारतीय संविधानमें मिथिला राज्यके स्थापित करबाक एहि पहल में अहाँ सभ कियो शरीक होउ।
स्मृतिमें आनय चाहब - ओहि मित्रकेँ विशेषरूपेण जे विभिन्न मुद्दा में हमर नाम टैग करैत छी आ विचार चाहैत रहैत छी... से जरुर एहि आवश्यक 'सहयोग लेल अपील' पर ध्यान दी।
विशेष शुभ हो!


       सहयोग लेल अपील- 

मिरानिसेक वीर सपुत मैथिल अपन उठल डेग संग आगू बढैत रही। काज सगर मिथिला लेल लेकिन विशुद्ध स्वयंसेवा सँ करबाक प्रण पर अडिग रही। समय बहुत कम छैक, तैयारी सऽ पहाड ढाहबाक जरुरत छैक। तत्परताक संग वीरपुत्र आगू बढैत रहू। अपन योग दियौक, बाकी भार वहन करबाक लेल स्वयं परमेश्वर छथि।
संगहि फेसबुक द्वारा सेहो हरेक मैथिल संग एहि पुण्यक कार्यमें सहयोग लेल निवेदन करैत छी।
"मिथिला राज्य निर्माण यात्रामें अपनेक स्वैच्छिक सहयोग हेतु सादर अनुरोध सहित,

लेकिन एहि यज्ञमें समस्त मिथिलावासीक वांछणीय सहयोग लेल कोनो सीमा निर्धारित नहि करैत केवल स्वैच्छिक सहयोग ग्रहण करबामें हमरा कोनो हर्ज नहि बुझैत अछि। ताहि लेल हमर परिचित आ मिथिला-मैथिली प्रति सकारात्मक सोच संग अग्रसर हरेक मैथिलकेँ हम अपन मोबाइल द्वारा स्वैच्छिक सहयोग देबाक लेल अनुरोध कैल अछि।

 एकाउन्ट डिटेल: अनुप कुमार चौधरी, खाता सं.: २००७१६२२३१७, बैंक: स्टेट बैंक अफ ईण्डिया।

 अपन योगदानक पुष्टि एहि नं. ८०५१५१८६८७ (अनुपजी)केँ जरुर करी।

मिथिला राज्य निर्माण सेना - दिल्ली।"

नोट: अपनेक नजरिमें जे कियो सहयोग करय योग्य होइथ हुनका सेहो मेसेज फोरवार्ड/शेयर जरुर करी।

Pravin Narayan Choudhary
मिथिला राज्य निर्माण सेना-

गुरुवार, 28 मार्च 2013

मिथिला राज्य लेल ४ दिना अनशन





           मिथिला राज्य लेल ४ दिना अनशन: - युवा पीढी द्वारा (पृष्ठभूमि आ कार्यक्रम आयोजन: विस्तृत समीक्षा).
अनशनकारी कवि एकान्त द्वारा ४ दिनक अनशनक फैसलाक संग मिथिला राज्यक माँग प्रति युवामें चेतना जागृतिक एक महान अवसर भेटल से सोचि जनबरी ९, २०१३ केर 'कन्नारोहट कार्यक्रम'में कार्यक्रमके भव्यतापूर्व आयोजन करबाक निर्णय लेल गेल छल। कवि एकान्तक हृदयमें अनशन प्रति जिम्मेवारी आ कार्यपथ-निर्माण संग योजनाक सुन्दर निष्कर्ष निम्नरूपे कैल गेल छल: "आन्दोलन मे ऐबाक उद्देश्य इहो रहय " मिथिला राज्य लेल संघर्ष आ संघर्ष मे लागल मैथिल आ संगठन के एका "। क्रमशः एका बनय आ से होईत प्रतीत भ रहल अईछ। एहि कार्यक्रम मे जे रहथि मैथिल रहथि। अप्पन पार्टी आ बिचारधारा स उप्पर उठी के एकटा मैथिल मात्र आर किछो नहि। आरंभिक कन्नारोहट आ अप्पन अप्पन क्वाथ के बोकर्लाक उपरांत शुद्ध भय सब मैथिल सभक बिचार रहय जे एहि आन्दोलन के एक भ'य उद्देश्य लेल लाड़ल जाई। प्रवीन भाई के बैजू बाबू सँ सेहो गप्प भेलैन, ओहो आशीर्वाद देलाह आ हुनक समर्थन सेहो भेटल (प्रवीन भाई के वार्तानुरुप आ उपश्थित अमरेन्द्र भाई के कथनानुसार )। ज्ञात हो की एहि आन्दोलन के एकटा मैथिल बनि लड़बाक निर्णय के सर्प्रथम समर्थन पूज्य धनाकर बाबू आ आदरनीय रत्नेश्वर बाबू केने रहथि आ संस्थाक रूप मे AMP के पूर्णिया ईकाई केने अछि। आन्दोलन मे अनशन के एहि अध्याय के संचालन लेल प्रवीन भाई आ दिवाकर भाई मे नीक बहस आ सार्थक बर्तालाप के परिणाम सुखद रहल जे सब अप्पन अप्पन बेदना के मुखर भ' क' रखलाह आ प्रस्ताब रहल जे: * मिथिला राज्य के निर्माण आ मिथिला मैथिली मैथिल के बिकाश के आधारभूत कारक मानि आन्दोलन के आगाँ बढेबाक आवश्यकता अईछ। * समग्र मिथिला राज्य के माँग के छोड़ी, भारत मे मिथिला राज्य के माँग के लक्ष्य कयल जाई। * आन्दोलन international border के आदर करैत नेपाल स्थित अप्पन मैथिल स्वजन के लेल संबेदना के प्रति सदैब कटिबद्ध रहय, जेना नेपाल स्थित मैथिल छथि। अस्मिताक संघर्ष दुनू दिस चलि रहल अईछ। * आन्दोलन ब्यक्ति स उप्पर उठी कय हो उद्देश्य लेल हो, मैथिल के संगठित आ एकाकार करबाक माद्दा मात्र मुद्दा मे अछि आ ताहि हेतु मुद्दा भेल नायक। समस्त आन्दोलन के स्वाभाबिक प्रतिनिधित्व मिथिला राज्य निर्माण के उद्देश्य हो। * कहब बहुत आवश्यक नहि जे आन्दोलन मे समस्त मैथिल संगठन के समर्थन देबाक लेल आग्रह करबाक बिचार भेल। * उद्देश्य के साधबाक लेल Joint Committee बनेबाक प्रस्ताब भेल। * अनशन के उपरान्त मिथिला राज्य निर्माण लेल एकटा joint memorendum देबाक बिचार भेल, से हो कोना ई बिचार के बिषय रहल। * प्रवीन भाई आन्दोलन के एहि गुटनिरपेक्ष स्वरुप के अधिक स अधिक मैथिल तक पहुँचेबाक सार्थकता पर जोर देलाह। हम एतबे कहब मिथिला आ मैथिली सब मैथिलक के छी, चाहे ओ कतुको होथि, बजैत कोनो भाषा होथि मुदा ह्रदये मैथिल होथि। मिथिला राज्य के निर्माण के एहि महायज्ञ मे अप्पन भूमिका निर्धारण पर बिचार करू, इतिहास के बनबा के प्रक्रिया मे अप्पन योगदान पर बिचार करू। समय आबी गेल जे "मूक दर्शक के भुमिका के तलांजलि दय इतिहास निर्माण मे आबी, अप्पन मैथिली बचाबी, अप्पन मिथिला बनाबी" जय मिथिला !! जय मैथिली !! जय मैथिल !!" (कवि एकान्तक विचार, जनवरी १०, २०१३ फेसबुकपर)। -------------- दिल्ली सऽ वापसी करबाक क्रममें अपन विचार जे सभक समक्ष प्रेषित केने रही जनवरी ११, २०१३ केँ: "आउ दिल्ली यात्रा के समेटी। काल्हि प्रस्थान करबाक अछि, से सभक ध्यानाकर्षण महत्त्वपूर्ण विन्दु तरफ चाहब, कृपया ध्यान दी आ सहयोग हेतु वचन दी। १. कवि एकान्त द्वारा मिथिला
 राज्यके माँग लेल ४ दिनक अनशन कार्यक्रम। प्रस्तावित तारीख मार्च २२-२५, २०१३। स्थान: जन्तर-मन्तर, दिल्ली। संयोजन भार: दिवाकर बाबु। २. मैथिल युवा द्वारा मिथिला राज्य लेल वृहत धरना-प्रदर्शन कार्यक्रम। स्थान, तिथि उपरोक्त कार्यक्रम के समापन दिन घोषणा कैल जायत। संयोजन भार: सागर मिश्र। उपरोक्त कार्यक्रम १ लेल कवि एकान्तजी अपन जन-सम्पर्क दिल्ली लगायत समस्त मिथिलामें कय रहल छथि। जतेक संघ-संस्था आ सहयोगी मैथिल व्यक्तित्व सभ छथि तिनका सभसँ दिल्लीमें सभ जगह घूमि-घूमि सहयोग सदेह उपस्थिति लेल प्रथम द्वितीय सदाचार-विचार अनुरूप जे स्वेच्छा हो ताहि तरहें याचना कैल जा रहल छैक। सभकेँ अपन माटि-पानि-इतिहास आ पहचान लेल राज्य निर्माण जरुरी कहि सहयोग हेतु अग्रसर होयबाक निवेदन कैल जा रहल छैक। ई पहिल बेर हिम्मत देखौनिहार मिथिलाक युवा वर्ग सँ मैथिलीसेवी कवि थिकाह जिनका प्रति अपार समर्थन बनेबाक जिम्मा हमहुँ लेलहुँ, स्वेच्छा सँ। हम ई नहि देखय लगलहुँ जे एहिमें के-के छथि आ किनका-किनका सँ हमरा पटरी बैसैत अछि आ कि हमर सिद्धान्तके माननिहार छथि। हम केवल यैह देखलहुँ जे हम कि कय सकैत छी, आ कि करबाक अछि, कोना करब। आर ताहि अनुरूप आन्दोलनक प्रासंगिकता ऊपर समस्त मिथिला समाजमें विभिन्न मिडिया द्वारा एहि बात के प्रसार जे उपरोक्त कार्यक्रम जे मिथिलाक अस्मिता जोगेबाक लेल कैल जा रहल अछि ताहिमें सभक शुभकामना आ वाँछित सहयोग देल जाय। अही क्रममें जन-जन तक बात पहुँचय जे आइ धरि मिथिला लेल कि-कि भेल, कतेक सफलता-असफलता, आदि पर उल्लेखणीय चर्चा कराओल जायत आ बेसी सँ बेसी लोक के जोडल जायत। जोडय लेल किनको ५०० टाका के नोट पठाय वा गर्दैनमें गमछी बान्हि बलजोरी राजनीतिक रैला जेकाँ नहि आनल जायत, बल्कि समस्त मिथिला सँ जतेक कलाकार-रंगकर्मी-पेशाकर्मी-जातिय संगठनकर्मी आदि छथि तिनका सभकेँ आह्वान कैल जायत जे एक जोरदार प्रदर्शन लेल दिल्ली आबी आ भारत सरकारकेँ मजबूर करी जे मिथिला राज्य निर्माण लेल सोचैथ आ शीघ्रातिशीघ्र सम्बोधन करैथ। खाली भाषणमें बिहार राज्य द्वारा मिथिलाक विकासक बात बहुत भेल, मुदा असलियत एतबी जे दलाल-ठीकेदार-हाकिम-होशियार लेल छूद्र-लूट-खसोट के ललीपप आ आम जनतामें जातिवादिताके झगडाके अलावा मिथिलाके दोसर किछु नहि देल गेल एखन धरि। सुशासनके सरकार सेहो बस गपहि टा देलक, जमिनी सुधार बस खोखला प्रमाणित भेल। एकर सभक लेखा-जोखा कैल जाय आ केन्द्रके विशेष पर्यवेक्छक मिथिलाक जमिनी यात्रा करय आ उपेक्छा के हर संभव वैकल्पिक समाधान ताकय। मिथिलासँ आयल सांसद-विधायक सभकेँ ई सोचय पडत जे आखिर विकासक कोन गति मिथिला लेल चलल, राज्य वा केन्द्र सरकार के द्वारा। विकास लेल सेहो राज्यक निर्माण वांछणीय अछि। पहिल कार्यक्रमके सफलतापूर्वक पूरा भेला उपरान्त बस दोसर महत्त्वपूर्ण कदम यैह जे मैथिल युवा द्वारा धरना आ प्रदर्शन के संपूर्ण भार लैत आन्दोलन के ताबत निरन्तरता देल जाय जाबत मिथिला राज्य ससम्मानपूर्वक
बनि नहि जायत। हरि: हर:!" -----------
  यैह आन्दोलनक पृष्ठभूमिमें छल निम्न सोच: "मिथिलाक माँग केकरा लेल अवाञ्छित? हालहि २८ दिसम्बर, २०१२ ई. विराटनगर में आयोजित विद्यापति स्मृति पर्व समारोह २०६९ में आयल छलाह विशिष्ट अतिथि भू.पू. अररिया साँसद मा. सुखदेव पासवानजी, ओ दिल्ली रहैथ वा कतहु, लेकिन हर वर्ष एहि समारोह में अपन गरिमामय उपस्थिति सँ आम जनमानस के ओ दाकियानूस धारणा के झूठलाबैत छथि जे मैथिली आ मिथिला बस किछु उच्च जातिके माँग मात्र थीक। हमरा लिखैत हर्ष भऽ रहल अछि जे सम्माननीय अतिथि ओहि मंच सँ घोषणा कयलाह - बहुत जोर दैत बजलाह जे हम आइ यैह मंच सऽ घोषणा करैत छी जे बिहारके १८ जिला मिलाय मिथिला राज्य बनय। ओ किछु जिला के नाम तक लेलाह आ ताहिमें शामिल छल कटिहार, किशनगंज, अररिया, पुर्णिया, मधेपुरा, सहरसा, खगडिया, समस्तीपुर.... आदि। छद्म बुद्धिके पत्रकार आ बिना पेंदी के लोटा समान कतेको चुटपुट नेता एहि आह्लाद के शायद नहि बुझि सकत, लेकिन हमरा गर्व अछि सुखदेव पासवान जी पर, गर्व अछि मेहताजी (फारबिसगंज पूर्व विधायक) पर आ गर्व अछि हर ओ गूढ रहस्य बुझनिहार बुजुर्ग अनुभवी पत्रकार आ नेतापर जे मिथिलाक सम्मान लेल हर समय तैयार रहैत छथि आ हर सतह पर आवाज उठबैत छथि। तहिना नेपाल सरकार के उप-प्रधान तथा गृहमंत्री आ उपरोक्त समारोहके प्रमुख अतिथि मिथिलाक गरिमाके प्राचिनतम् कहैत संवैधानिक सम्मान हेतु वचन देलाह आ बजलाह जे बिना मिथिलाक सम्मान देने नेपाल देशके सम्मान नहि भेटतैक। ओ खूलिके बजलाह जे मधेस एक बनेनाय बहुत कारण सँ संभव नहि छैक तऽ बारा सऽ पूब झापा धरि एक राज्य बनाउ जेकर नाम मिथिला मधेस राखू, हमरा एतराज नहि अछि। ई दू घोषणा उपरोक्त मंच सँ साधारण नहि छलैक। लोक आइ-काल्हि १७ नव नाम के पाछू जमानी-दीवानी गबैत अछि, मुदा गहिराई में जाय सोचैत नहि अछि जे केवल नामकरण कैला सऽ सीमाँचल-धर्मांचल-बूरिराजान्चल-पूर्वान्चल कयला सऽ मिथिलाक गरिमा ऊपर ग्रहण नहि लगा सकैत अछि। मिथिलाक जे महासागर भूगोल, इतिहास, भाषा, साहित्य, संस्कृति, पहचान आ हरेक सन्दर्भ जे एक राज्य हेतु गणतंत्रमें पूरा करैत अछि से स्वत: प्रमाण बनि पहाड समान ठाड्ह होइछ आ भूकयवाला अदूरदर्शी लोक के सीना तानिके कहैछ जे मिथिला के सम्मान बिना तोहर कोनो मान नहि। तदापि मिथिला अवाञ्छित अछि आ एहि सत्य सँ हम सभ पाछू नहि हँटि सकैत छी। प्रश्न उठल जे अवाञ्छित अछि... तऽ केकरा लेल? आउ मंथन करी! १. जनसाधारण जनमानस: जे आइ धरि बोनि - मजदूरी करैत रोजी कमेलक, ओकरा लेल धैन सन! ओकरा तऽ लालटेन धरा दियौक आ ईशारा कय दियौक... बुझि गेलहक न... यैह छाप थिकैक। केओ दोसर दिस सऽ आयत आ गाँधीजी छाप मैन्जनके हाथमें दैत कहत जे बस एहि बेर प्रभाकर बाबु के पार लगा देबैन, छह महीना के जोगार बखारी सऽ उठा लेब। मैन्जन तैयार तऽ सभ तैयार। ओकरा लग राज्य के कि माने छैक आ कि पहचान के महत्त्व ताहि सभ सऽ सरोकार कि? तखन प्रयासो किछु नहि भेलैक अछि केकरो द्वारा जे राज्य किऐक आ तेकर सार्थक प्रभाव कोना से मानय पडत। १३३-१३४ बेर यात्रा प्रवीण केलक लेकिन ध्यान सभ दिन ओहि बकथोंथी करयवाला टा पर रहलैक। आबो यदि नजैर खुलल छैक तऽ आगू जाय किछु करय, बस! बुझबय ओहि मिथिलाक गणकेँ जे विदेह राजा जे सम्पन्नता, ऐश्वर्य, रिद्धि आ सिद्धिके संग समस्त मिथिला भूमिके शुद्ध-शिक्त रखलाह जे केरो के पात पर देवता के इहा-गच्छ - इहि-अतिष्ठ कहलापर दौडल आबय पडैत छन्हि से फेरो होयत आ अहीं सभक प्रत्यक्छ सहभागिता सँ पूर्ण समावेशी आ प्रदेश-विकास सरकार बनत जे बस मिथिले लेल सोचत। आइ धरि जे ६० वरख अहिना बहलाबैत-फुसियाबैत बिता देलक स्वतंत्र भारतमें से मिथिला बनेनहिये कल्याणक मार्ग प्रशस्त होयत। जे शिक्छा हिन्दी आ अंग्रेजीमें देबाक चलते सभक धियापुता पढाइ करबा सऽ वञ्चित रहि जाइत अछि से मातृभाषा मैथिलीमें पढेलापर सभ आराम सऽ साक्छर बनत। मजदूरी करबाक लेल दिल्ली-मुंबई नहि जाय अपन राज्यमें रोजगार भेटत। अपन खेत के पटाबय लेल उधारके दमकल नहि अलग-अलग नदी सँ चिरल अपनहि नहर होयत। पानिक कमी थोरेक न अछि, बस बेईमान व्यवस्थापन आ जाहि नामपर बिहारी नेता लूट-खसोट मचबैत अछि तेकरा नियंत्रण करबा सऽ काज होयत। आ मनमें शंका जे ब्राह्मण बडका जातिक लोक सभ ऊपर बैसि लूटत तेकर प्रतिकार बहुल्यजन कोना करैत छैक से आब ककरो सऽ छूपल नहि अछि। अत: अपन राज्य अपनहि अधिकारवाली सूत्रपर सभके जुडैत काज करबा लेल मिथिला राज्य निर्माण करू। २. मैथिली बिसरल लोक: अफसोस जे मैथिली ऊपर ततेक रास डांग मारल गेलैक, अपनो आ सहजहि बहरियो द्वारा जे रोजीके भाषा पूर्णरूपेण मैथिली नहि बनि सकल आ स्वत: लोक मैथिली बिसरय लागल। आब जे मैथिली बिसरि गेलाह तिनका लेल मिथिला राज्य के प्रासंगिकता पुन: एक उच्च बुझनुक तवका मात्र लेल बाँचल, बाकी सभ जहिना-तहिनामें खुश छथि। कोनो आत्मसम्मानके भूख नहि, जखन मैथिली बिसरा गेल, दोसर भाषा अपना लेलहुँ तऽ आब मिथिला हो, बज्जिकाँचल हो, अंग प्रदेश हो, सीमांचल हो, कोसी प्रदेश हो, झारखंड हो, दियारा प्रदेश हो या जे भी हो - सभ सऽ उत्तम बिहारहि में रहब। खूब जाति-जाति भोकरब आ कहियो लालटेन जरायब तऽ कहियो तीरे मारब, कमल तऽ फूलाइ सऽ रहल आ हाथ तऽ कहिया नऽ कटि गेल जे मिल बन्द भेने पार। अहू दिस ध्यान कि देबय पडतैक जे मैथिली भाषा हो या मैथिली के भाषिका, सभके मिथिलाक पूर्ण भाषा मानि बस ऐतिहासिक पहचान प्रति सम्मान लेल जोडय के काज करैत मिथिला निर्माण लेल एकजूट करय पडतैक। संगठन एक बेर तऽ नेताजीके डायरीमें बनैत छैक लेकिन पुन: संगठनात्मक कार्य कि करी, प्रगति कि भेल, कतेक दिन प्रखंड पर धरना भेल, कतेक गरीब के राशन उपलब्ध करबाओल गेल, कतेक विकासक काजके लेखा-जोखा लेल गेल.... सभ नदारद! आ जे स्थापित राष्ट्रीय पार्टी सभ छैक तेकरा तऽ कोन योजना अन्तर्गत कतेक पाइ निर्गत भेल आ लूटय लेल के सभ छें ताहि सऽ फूर्सते नहि, भाँडमें गेल मिथिला या बिहार या भारत या पहचान या आत्मसम्मान! ३. बिहार सरकार के कर्मचारी: मलफाइ उडबय लेल मोट तनख्वाह भेटिते यऽ आ हमरा कोन लेना-देना है ई आन्दोलन-फान्दोलन से! होत तब अच्छा है, ना होत तबो अच्छे है। एहि वर्गके जोडबाक लेल आर्थिक भार दैत आन्दोलन करय के आवश्यकता, जाबत ई वर्ग चाप महसूस नहि करतैक तऽ आन्दोलन नहि सफल होयत आ सभ दिन खाली आली-हौसे चलैत रहत। ओना कोनो कार्य लेल बुद्धिजीवी प्रकोष्ठके निर्देशन जरुरी! ४. कलेजिया विद्यार्थी: 'यार! हमरे सेन्टर पर तऽ खूब चोरी हुवा, तोरा सेन्टरपर केना हुवा?' यैह अर-दर बहस चलैत छैक कारण नागेन्दर बाबु के समय सऽ जे रोग लगायल गेल चोरी सेन्टर के तेकर दुष्परिणाम आइ धरि भोगि रहल अछि विद्यार्थी वर्ग। आदर्शता गायब छैक। धोइधफूल्ला मास्टर सब पढेतैक कि कपार बस गप लडबैत छैक, नोट लिखबैत छेक, खूब घोंकबैत छैक, पास करबैत छैक। ओ विद्यार्थी भला कि बुझय गेलैक आत्मसम्मान-संस्कृति-पहचान? तऽ झंडा धराय कार्यकर्ता एकरहि सभके बनाबय पडतैक। स्वत: धीरे-धीरे जानकारी बढैत जेतैक। काजो प्रबलताके संग आगू बढतैक। ५. मैथिलानी: 'चुल्हा फूकय सऽ फुर्सत भेटय बौआ तऽ अहाँके आन्दोलनमें आबी?....' 'धू जाउ! हुनका एहि सभ सऽ घृणा छन्हि।......' 'अहाँ सभ हमरा सभके पूछबो करैत छी?....' ईत्यादि! बस बाजिके खानापुर्ति! बाकी किछु नहि। केओ लाजे परेती तऽ केओ कुनु बहन्ने! संगठन विशुद्ध हिनकहि सभके हो आ किछु काज लेल संपूर्ण जिम्मेवारी हिनकहि सभके देल जाय तऽ सुधारक गुंजाईश छैक। बाकी हम अनुभवहीन छी एहि मामले! अपने घरवाली नहि टेरती तऽ दोसर के के पूछैत अछि। ;) एहिमें बहुत रास विन्दुपर सोचब हमरा लेल समयाभावमें नहि भऽ पायल, यदि संभव हो तऽ किछु महत्त्वपूर्ण विन्दु जरुर जोडी! हरि: हर:!" तदोपरान्त जेना सामान्यतया मैथिल द्वारा घोषित हरेक कार्यक्रममें होइत छैक जे गूट-निरपेक्ष मानितो खूब गूटबाजी आ वैमनस्यता पसारबाक नांगट खेल, किछु तहिना सकारात्मक सोच संग नियोजित एहि कार्यक्रममें भेलैक आ संवादविहीनताक कारण, एक-दोसराक पीठ पाछू कूचेष्टापूर्ण निन्दाक खेल सँ सशक्त आन्दोलनके जगह निरीह आ कामचलाउ आन्दोलन सेहो कठोर प्रतिबद्धता आ सात्त्विकताक संग २२-२५ मार्च, २०१३ केर ४ दिना अनशन अपार सफलतापूर्वक इतिहास रचैत पूरा भेल। मिथिला निर्माण में एहि आन्दोलनक भूमिका युवावर्गमें मिथिला-राज्यक माँग प्रति सचेतना जाग्रत केलक। उतार-चढाव सेहो भेल कारण हमर बात सऽ केकरो टीस आ केकरो बात-व्यवहार सऽ हमरा टीस उठब मैथिलक पुरान पहचान थीक। लेकिन जे मूल उद्देश्य छलैक से पूरा भेलैक। एक कवि सऽ अनशनकारी तीन मिथिलाक धरतीपुत्र बनि गेलाह - नमन कौशल कुमार व मनोज झा केँ जे स्वस्फुर्त आ बिना केकरो कोनो उकसाहटक एहि पवित्र आन्दोलनकेँ चारि चाँद लगा देलाह। कवि एकान्तकेँ मना केला के बावजूदो अनशनक प्रारूपपर असगर ठाड्ह राखब आ बहुत अन्तिम क्षणमें ई स्पष्ट करब जे समन्वय समिति या कार्यक्रम आयोजन हेतु एक संयुक्त कार्यदल नहि बनल, कोष निर्माण नहि भेल, के सब औता तय नहि भेल, ज्ञापन पत्र कोना बनत, कि बनत... किछु स्पष्ट नहि भेल... मिडिया सहयोग, भारत सरकारसँ वार्ता करबाक लेल प्रतिनिधि मंडल.... सभ बात लेल कोनो पूर्व योजना नहि तैयार भेल.... एतेक तक कि मंच केना बनत, साउण्ड सिस्टम, उपस्थिति पुस्तिका.... कोनो पूर्वाधार के किछुओ इन्तजाम नहि भेल... ई समस्त बात मानू जे अपने आप में कतेक भयंकर डरावनापूर्ण आ लज्जास्पद छैक... तखन दोष केकरो नहि बस अनुभवहीनता मात्र हावी बनल। अनुभवहीनता तऽ सोझाँ देखायवाला वस्तु थीक, मूल में कारक किछु आर रहल जे कोनो सार्वजनिक स्थलपर रखला सऽ हमरा सभक नुकसान अछि, बस ई बुझू जे मैथिलक आपसी मेलमें व्यक्तिगत स्वार्थक भयानक मारि अछि आ दुष्परिणाम जे गूटबाजी नहि छूटि रहल अछि। लेकिन अपन थोर-बहुत अनुभव सँ कहयमें संकोच नहि भऽ रहल अछि जे 'महादेव सर्वोपरि छथि' आ कोनो हृदय सँ विचारल कार्य पूरा करबाक लेल आइ धरि ओ स्वयं ठाड्ह होइत रहलाह छथि, ठीक तहिना कवि एकान्त पूर्व-संध्यापर विचारल योजना तहत बस माँ काली के शरणापन्न होइत अनशन स्थलपर विदा भेलाह आ बाकी अपनहि महादेव त्रिशूल नचबैत सभ कार्य अपराह्न होइत-होइत डोरिया देलखिन। दुनियामें ढिंढोरा पीटनिहार भले किछु बाजि एहि आन्दोलनक मर्मके तुच्छता आ छूद्र नाम लेल झाइल बजबैथ, मुदा काजक रहल केवल बाबा बैद्यनाथक कृपा! :) बस शरणागत भक्त लेल ओ स्वयं सेहो साक्षात् माँ पार्वती (काली) केर कृपा संग ४ दिनक अनशन मानू ४० मिनटमें तय कय देलनि। एक सऽ एक विचार कयलनि, क्रान्तिक बिगूल बाजल, नवपथ सोझाँ आयल आ आब जल्दिये निरंतरताक क्रम बनत। मिथिलाक धरतीपर - भारतक राजधानीमें - दुनू जगह तऽ कम से कम मैथिल प्रण कय लेलाह जे अपन सुसुप्त शक्तिकेँ जगायब। उपरोक्त अनशन मानू जे जाम्बवन्तजी समान हरेक सुच्चा मैथिलमें हनुमानजीक शक्तिके आभान करौलक। आब जल्दिये नव-नव घोषणा सँ पुरान संस्थाक संग नवयुवा डेग बढबैत चलताह से हमरा विश्वास अछि।

मिथिला राज्यक माँग पर कैल गेल


मिथिला लेल आगाँ कि?


एखन धरि मिथिला राज्यके माँग प्रति बहुत रास महत्त्वपूर्ण कार्य कैल गेल अछि जाहिमें मिथिलाक नक्शा प्रमाण सहित भारत सरकारके देल गेल अछि, १९४७-१९५६ भारतीय साँसदमें मिथिला राज्यक माँग पर कैल गेल बहस आ राज्य गठन आयोगके सिफारिश आदि सरकार के पास अपनहि दस्तावेजमें अछि जेकर पूरा सान्दर्भिक अध्ययन जरुर कैल गेल होयत से आशा राखी, तहिना मैथिलीक अधिकारसम्पन्नता संविधानक अष्टम् अनुसूचीमें दर्ज करैत पहिले कय देल गेल अछि, पुरातत्त्व अन्वेषण/खोज सभसँ नित्य नव आ मिथिला समर्थक बहुते रास बात सभ जे आबि रहल अछि तेकरो पूरा लेखा-जोखा रखैत मिथिला राज्यक माँग पूर्णता पौने अछि.... जरुरत यैह जे २०१४ के लोकसभा चुनावमें ई मुद्दा बनय आ ताहि लेल एक संपूर्ण मिथिलाके प्रतिनिधित्व करयवाला कार्यदल व संगठन निर्माण हो। समय बहुत कम अछि आ काज बहुत बेसी। वर्तमान जतेक संगठन मिथिला राज्य लेल काज करनिहार छी से सर्वदलीय सामूहिक बैठक करी आ संयुक्त कार्यदल गठन करी। 

<iframe width="360" height="315" src="http://www.youtube.com/embed/qVpXAAbyEmM?list=UUs0bvsIuDDXklBjG71WQJ9w" frameborder="0" allowfullscreen></iframe>

जेना हालहि एक महत्त्वपूर्ण कार्य मिथिला लेल सम्पन्न भेल - जे युवा शक्ति मानू कि आन्दोलनमें सक्रियतापूर्वक नहि जुडल छल सेहो सभ स्वयं चारि-चारि दिनक अनशन करैत क्रान्ति करबाक लेल आ बलिदान देबाक लेल तैयार अछि। युवा सभक सेहो संगठन अखण्ड मिथिला क्षेत्रक हो आ राजनीतिक मंच व युवा मंचके बीच नीक तालमेल हो तेकर व्यवस्था करब जरुरी। ताहि लेल आवश्यक आदर्श कार्यकर्ता विधान निर्माण राजनीतिक मंच द्वारा करैत युवा मंच केँ सेहो विश्वासमें लेब जरुरी अछि आ ताहि अनुरूपे मिथिलाक सेवक जोडब सेहो जरुरी अछि। सच देखल जाय तऽ माँग कायम जरुर अछि लेकिन संगठनात्मक स्तरपर काज आइ धरि नहि भेल अछि। दाबी कतबो पैघ हो मुदा काज शून्य अछि तेकर प्रमाण तथाकथित खोंखीबाज संघ-संस्थाक कोनो बैठकमें सहभागिताक अत्यंत कमजोर स्थितिमें प्रत्यक्ष देखल जा सकैत छैक। आबो यदि केवल खखसला सऽ काज चलय तऽ लागल रहू, लेकिन ईमानदार प्रयास लेल संगठनात्मक ढाँचाके मजबूत बनायब बहुत जरुरी छैक।

एहनो नहि छैक जे साफ निकम्मा संस्था सभ लागल छैक, लेकिन कमजोर आ कूपोषित बच्चा कतबो जोर सऽ चिकरतैक ओकर आवाज बहुत दूर तक नहि जेतैक। तदापि ईमानदारी सँ आपसी तालमेल बनायल जाय तऽ शीघ्र प्रभाव देखय में आबि सकैत छैक। हमर छोट अनुभव कहैत अछि जे आम जनमानस के मिथिला राज्य के परिकल्पना पता नहि छैक, राज्य होइत कि छैक सेहो पता नहि छैक... आम सऽ ऊपर पढल-लिखल युवा पर्यन्त बेसी मात्रामें गणतंत्र, राज्य, स्वराज, आदि सऽ नहि पूर्णत: तऽ अंशत: अनभिज्ञ छैक। तखन जागृति पसारबाक दृष्टिकोण सँ वर्तमान कार्यरत हरेक मजबूत संस्था अपन कर्तब्य एतबी बुझय जे जगह-जगह जनसभाके आयोजन हो आ कम से कम खर्चमें बेसी सऽ बेसी लोक एहि बात के आत्मसात करय कि अपन राज्य कि होइत छैक, आबो मिथिला राज्य नहि बनत तऽ मैथिली भाषा समान संस्कृति सेहो आखिर साँस कोनो क्षण लऽ लेत, विकास आ आर्थकि अवस्थामें सुधार जे पलायन रोकत आ आगामी पीढीकेँ मिथिला प्रति सम्मान उत्पन्न करत... ई समस्त बात के जानकारी दैत २०१४ के चुनाव में मात्र ओहि राजनीतिक दल वा नेताके समर्थन करबाक आग्रह कैल जाय जे मिथिलाक हरेक सरोकार पर ध्यान देत आ मिथिलाके सरकार निर्माण करत, आन के प्रवेश निषेध आज्ञा हरेक गाममें लगा देल जाय।

गुरुवार, 21 मार्च 2013

हर मैथिल सँ निवेदन: चली दिल्लीके जन्तर-मन्तर पर-22-25 march


व्यक्तिसँ संस्था बनैत छैक, संस्था सँ व्यक्ति नहि। कवि एकान्त मिथिलाक लाखों-करोडों युवामें संवाद संचरण कय रहल छथि आ युवाक संस्था मिथिलाक बागडोर अपन हाथमें अपन असफल मुदा तजुर्बासँ भरल पीढीक हाथे लगभग छीनि रहल छथि। परंपरा तऽ एहेन होइत छैक जे स्वयं बुजुर्ग अपन युवा पीढीकेँ युवराजक गद्दी दैत अपन असफलताक नीक आकलन-व्यकलन सँ आगू नीक करबाक लेल जागरुक करैत छैक, लेकिन अफसोस जे मिथिला लेल तेना नहि भऽ कऽ बस जहिना एका-एकी सभ कियो प्रयासमें लगलाह आ नव आश जगेलाह तहिना एहि बेर युवा पीढी सेहो बस व्यक्तिगत रूपमें बीडा उठेलाह, आ ई बीडा असगर एक व्यक्ति मात्र किऐक उठेलाह तेकर निम्न कारण छैक:

ओ समस्त संघ-संस्था आ मिथिला प्रेमीकेँ मिथिला लेल एकजूट बनबाक आह्वान करय लेल असगर व्यक्ति मात्रक नाम सँ अनशनके घोषणा कयलाह। कारण साफ छैक - जखनहि लोक गूटबाजीमें फँसल केवल मिथिलाक नाम पर ढकोसला आन्दोलन करैत छथि आ नाम बेर अपन नामक चकाचौंध देखैत छथि ताहिके कारण कवि कम से कम पहिल युवा बनि आन्दोलनमें कूदबाक प्रेरणा संचरण करय लेल आ ई संवाद सेहो देबाक लेल जे एखन धरि कोनो संस्था जखन आम जन तक पहुँच बनेनहिये नहि अछि तखन कोना केकरो क्रेडिट देल जाय, केकरो छोडल जाय... दूविधा सँ बहुत नीक जे असगरे डेग उठाबी आ तखन सभ संस्था हमरा आशीर्वाद देबाक लेल आगू आबैथ आ समस्त मिथिलासँ लोक के एहि आन्दोलन सँ हमरे संग जोडैथ। 
नकारात्मक प्रभाव: लेकिन जहिना हमेशा सऽ मैथिलक वैन रहल अछि जे खोट मात्र निकालब, संग देब वा देबाक क्षमता विकास करब नहि करब, खोट जरुर निकालब... बस तहिना पहिले तऽ खूब लेखा-जोखा आ कविकेँ पोल्हेबाक कतेको अंदरूनी खेल सभ भेल... जे संग देबाक लेल आ योजना सहित मुहिम के एहि बेर मिथिलाक जैडतक पहुँचेबाक लेल आगू डेग उत्साहके संग उठेने छलाह तिनका प्रति सेहो कतेको अनाप-शनाप प्रलापगान करैत कविके हतोत्साहित कैल गेल (जेकर पूरा विवरण ठीक होली दिन 'मिथिलाक जयचन्द' शीर्षक अन्तर्गत पढब) आ अन्ततोगत्वा जखन कवि अपन सिद्धान्त सँ नहि डिगलाह तखन सभ कियो कविपर अपन कोपके प्रयोग करब शुरु कयलाह। संग देनिहार जे सुच्चा लोक छथि ओ शुरु सऽ आखिर धरि संगे रहताह, आ जे केवल गडबडघोटालेबाज छथि ओ सभ दिन खण्डी-खण्डी खेल खेलेबे करताह। अस्तु!

सार्थक परिणामक भविष्यवाणी:

*जे कहियो नहि भेल छल से एहि बेर होयत - मिथिलाक आन्दोलनमें ई एक ऐतिहासिक पहल साबित होयत। 

*मिथिला राज्यक माँग समस्त आम मिथिलावासी लेल बनत।
*मिथिलाक सरोकार मिथिलावासी बुझताह।
*मिथिलाक हरेक अभियानी एकजूट बनताह आ बतहपनी देखेनिहार कतय फेकेता जेकर मिथिलाक आन्दोलन सँ सरोकार एकदम नहि रहत।
*६ महीना के भीतर मिथिलाक आन्दोलन लेल एक निश्चित प्रारूप बनत।
*कवि एकान्त स्वयं अपन अनेको ऐगला कार्यक्रम के घोषणा करताह।
*मिथिलाक आरो युवाशक्ति अपन मातृभूमि आ मातृभाषाक सेवार्थ एहि आन्दोलनसँ जुडताह।



उपरोक्त समस्त सुखद परिणाममें स्वार्थविहीन आन्दोलनकर्मी सफल हेताह, बाकी के जहिना होइत आयल अछि से होयत जे कतहु कोनो पूछ तक नहि हेतैन।


जय मैथिली! जय मिथिला!!

http://www.facebook.com/SeparateMithilaStateSamithi 

सोमवार, 18 मार्च 2013

चलू जंतर - मंतर देल्ही 22-25 मार्च २०१ ३


  Pankaj Jha 
चलू जंतर - मंतर  देल्ही  --
 चलू जंतर - मंतर  देल्ही  22-25 मार्च २०१ ३ 

  अधिकार रेली मे माननीय मुख्य मंत्री जी के भाषण पर गौर करू। नितीश जी अपन पूरा भाषण मे बिहारक जते समस्या गिनेला ओ सब उत्तर बिहारक (मिथिला) समस्या छल। मतलब अशपष्ट आइछ जे नितीश जी सेहो बुझइत छईथ जे मिथिला पिछरल अइछ। मुदा अखन तक आम मैथिल जिनका राहत कोश के आदत सं सरकार निकम्मा बनेवाक प्रयश करैत अइछ, ओ अखानों अपन पिछरापन स अनिभिज्ञ छईथ।
गाम मे रहनीहार राहत मे मस्त छईथ। परदेश वला के कोनो लेने देन नई छैन। एकर विरोध के करत? अपन हक के मांग के करत? पिछरल लोक के डर होई छैन, आम आदमी के बात के सुनत?, संम्पन लोक के गरज नई छैन। तखन त मिथिलाक विकाश नई होबाक मुख्य कारण येह जे हम सब समुचित ढंग स अपन बात के सरकार तक नई पाहुचा सकलौअखन कवि एकांत एक टा अनशन के घोषणा केलखिन, आब लिया आहु मे मारा मारी, बहुत युवा हिनकर समर्थन मे आयला, बहुत हिनका प्रोत्शहित सेहो केलखिन, बहुत संग मे ठार भेला, मुदा आहु मे किछू लोक अपन बुद्धिक प्रकासठा के परिचय द ई तक कहे लागला जे ले आब त कवि एकांत फइश गेला। हिनका आब पिपली लाईव बाला हाल भ गेल। काहू जे कवि एकांत की आहा के पिपली लाईव वला किरदार जांका बुरबक बुझाइत छईथ? कवि एकांत माँ मैथिली के ओ समर्पित बेट्टा छईथ जिनका स मैथिल युवा के प्रेरणा लेवक चाही। हुनक अई समर्पण,त्याग के अपन दूषित मानशिकता स गंदा करय बाला लोक के मात्र आते अनुरोध जे जदी आहा किछू कई नई सकाइत छि त आहा के कोनो हक नई जे सार्थक पहल करे बाला लोक के टाग खिची।आरे कवि एकांत एक हार के लोक छाईथ, हुनका बाली के बकरा बना देल गेल, ई सब विकृत मानसिकता स ओई सपूतक त्याग के गंदा नई करू। आहा के अते चिंता कवि एकांत के अइछ त रोकी लिय हुनक, कहियौन जे मैथिल सब आहा के ठगइत छईथ, देख लिय की जबाब भेटत।
मिथिलाक विकाश मे सब स पइघ वाधक मैथिल खुद छईथ। आपसी घिनमा-घिनौज, कही हमारा स आगा ओ नई चल जाइथ, कही हम पाछा नई रही जाई , ई मानशिकता के जा धईर त्याग हम सब नई करब, ता धईर समाज के लेल हम सब खुद श्राप बनल रहब। आ ई श्राप के फायदा नेता आ राजनीतिक दल मिथिला स उठाबैत राहत।