dahej mukt mithila

(एकमात्र संकल्‍प ध्‍यान मे-मिथिला राज्‍य हो संविधान मे) अप्पन गाम घरक ढंग ,अप्पन रहन - सहन के संग,अप्पन गाम-अप्पन बात में अपनेक सब के स्वागत अछि!अपन गाम -अपन घरअप्पन ज्ञान आ अप्पन संस्कारक सँग किछु कहबाक एकटा छोटछिन प्रयास अछि! हरेक मिथिला वाशी ईहा कहैत अछि... छी मैथिल मिथिला करे शंतान, जत्य रही ओ छी मिथिले धाम, याद रखु बस अप्पन गाम - अप्पन बात ,अप्पन मान " जय मैथिल जय मिथिला धाम" "स्वर्ग सं सुन्दर अपन गाम" E-mail: apangaamghar@gmail.com,madankumarthakur@gmail.com mo-9312460150

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गुरुवार, 9 अप्रैल 2015

अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली कवि सम्मेलन-२०१५: सहभागिताक ताजा अपडेट - विराट नगर

अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली कवि सम्मेलन-२०१५:  सहभागिताक ताजा 

अपडेट - विराट नगर

भारत सँ मुख्य अतिथि सुप्रसिद्ध गीतकार सियाराम झा सरस राँची सँ, जमशेदपुर सँ श्यामल सुमन आबि रहला अछि। संग मे १ गोट कवि आरो अयबाक जानकारी करौलनि अछि।
दरभंगा सँ परम आदरणीय कवि व अभियानी शिरोमणि डा. बुचरु पासवान, डा. मंजर सुलेमान, प्रो. उदय शंकर मिश्र, रामकुमार झा, चन्द्रेश, चन्द्रमोहन झा परबा, चन्द्रशेखर झा बुढाभाइ सेहो आबि रहला अछि।
एहि सँ पहिनहि महान हास्य कविसम्राट जयप्रकाश जनक आ महाभियानी कवि मणिकान्त झा संग अशोक मेहता आदि सेहो आबि रहला अछि।
सहरसा सँ अरविन्द मिश्र निरज, स्वाति शाकम्भरी, रामचैतन्य धीरज, भोगेन्द्र शर्मा निर्मल, सुभाषचन्द्र झा, किसलय कृष्ण, शैलेन्द्र शैली पहिनहि पुष्टि कैल सूची मे छथि।
पटना विश्वविद्यालय, मैथिली विभागक शोधार्थी - नरेश कुमार, विनीत कुमार लाल, रमण कान्त चौधरी, सरोज मंडल, पुरुषोत्तम चौधरी, रश्मि कुमारी, संजीब कुमार, संजय कुमार पासवान, श्याम रूप चौधरी आबि रहला अछि।
भागलपुर विश्वविद्यालय, मैथिली विभागक शोधार्थी - पंकज कुमार आ निक्की प्रियदर्शिनी आबि रहला अछि।
मिथिला विश्वविद्यालय, मैथिली विभागक शोधार्थी - सुरेश पासवानक नेतृत्व मे आबि रहला अछि, पूर्ण सूची प्रतिक्षीत...!
सुपौल सँ कवि अरविन्द ठाकुर आबि रहला अछि।
पटना सँ कमल मोहन चुन्नूक संग पंकज जी आबि रहला अछि।
मधुबनी सँ दीप नारायण विद्यार्थी आबि रहला अछि।
राजविराज सँ करुणा झा, मीना ठाकुर, साधना झा, श्याम सुन्दर यादव पथिक, देवेन्द्र मिश्र, शुभचन्द्र झा, विद्यानन्द बेदर्दी, निराजन झा, सत्येन्द्र नाथ चौधरी अयबाक पुष्टि केलनि अछि।
लहान सँ अर्जुन प्रसाद गुप्ता दर्दीला, नारायण मधुशाला, जीबछ यादव उदासी, प्रिन्स मेहता आबि रहला अछि।
जनकपुर सँ विजय दत्त मणि, काशीकान्त झा, प्रेम विदेह ललन, दिगम्बर झा दिनमणि सहित अपुष्ट आरो कवि लोकनि आबि रहला अछि।
रौतहट सँ श्याम शेखर झा आबि रहला अछि।
काठमांडु सँ धीरेन्द्र प्रेमर्षि स्वयं आयोजक ११ तारीख समय सँ पहुँचबाक पुष्टि कएलनि अछि। मुख्य अतिथि प्राज्ञ परिषद् सदस्य, नेपाल संगीत तथा नाट्य प्रज्ञा प्रतिष्ठान - श्री रमेश रंजन - मिथिलाक चेतन भगत छथिये।
दुबइ सँ प्रभात राय भट्ट नेपाल आबि कार्यक्रम मे सहभागी बनता। अनलाइन कतार सँ विन्देश्वर ठाकुर आ अशरफ राइन, दुबइ सँ भोगेन्द्र राज साह आदि केर प्रस्तुति संभव होयत। तहिना आरो किछु भारत तथा नेपाल सहित अन्य देश सँ अनलाइन प्रस्तुति हेबाक संभावना अछि। कार्यक्रम लाइव स्ट्रीमिंग मार्फत सब देश मे अनलाइन देखल जा सकत।
विराटनगर सँ दयानन्द दिग्पाल यदुवंशी, अजित झा, कर्ण संजय, राम नारायण सुधाकर, आदि रहबे करता।
झापा सँ कन्दर्प नारायण लाल सेहो औता। मुदा हिनकर फोन कतेको बेर लगेलाक बादो लागि नहि रहल अछि। मैसेज द्वारा जानकारी देल गेल छनि।
कविक अतिरिक्त अभियानी लोकनिक सहभागिता:
पुर्णियाँ सँ गिरिन्द्रनाथजी आ चिन्मयजी औता। आरो अपुष्ट सहभागिताक अपेक्षा अछि।सहरसा सँ कन्हैयाजी, कुमार आशीष, सुभाषचन्द्र झा, महिषी (सहरसा) सँ अमित आनन्द, आदरणीय अभिमन्यु खाँ, कुन्दन मिश्र, विजय महापात्रा, सुमन समाज, दिलीप कुमार चौधरी, दरभंगा सँ श्याम सुन्दर झा, वैद्य ओ. पी. महतो, मुजफ्फरपुर सँ ९९% संभावनाक संग संजय मिश्रा जी....
कानपुर सँ मिथिलाँचल महासभाक प्रतिनिधि आदरणीय रवि नाथ बाबु, अनिल भाइ व अमित भाइ आबि रहला अछि।
दिल्ली सँ कवि विमलजी मिश्र, अखिलेशजी, अमर नाथ बाबु, संजीव सिन्हा जी आ कौशल कुमार जी - तहिना सहरसा-दिल्ली संयुक्त केर प्रतिनिधित्व करैत आदरणीय विमल कान्त बाबु सेहो दिल्ली सँ आबि रहला अछि।
मधुबनी सँ पवन नारायण, शुभ नारायण झा, संगीत टोलीक संग आबि रहला अछि।
साईंचरण फिल्म्स केर प्रतिनिधि आ अभियानी भाइ रमानाथ झा मैथिली फिल्म्स केर विषय पर प्रस्तुतिक संग आबि रहला अछि।
एकर अतिरिक्त अहाँ सब कियो आबिये रहल छी, मुदा पुष्टि अवश्य करू जे व्यवस्था मे कोनो त्रुटि नहि हो। 

विशेष - संपर्क नंबर -
प्रवीण नारायण चौधरी - ९८५२०२२९८१, 
डा. सुरेन्द्र नारायण मिश्र - ९८४२०७७५५५,
 डा. एस. एन. झा - ९८४२०२३७३८

सोमवार, 2 मार्च 2015

मिथिला भसीआइए गेल तॅ ओकरा की?

   रकार तॅ पटना आ दिल्ली सचिवालय मे बिजलीक पंखा , चिल्ड एसी रूम आ स्प्रिंगदार सोफाक बीच सुतल अछि , मिथिला भसीआइए गेल तॅ ओकरा की ? कोसी सर्वनासे करैइए तॅ ओकरा की ? मैथिल भीखमंग भ अपन मैट - पैन छोइर, अपन सभ्यता ओ संस्कृति के तिलांजलि दॅ दिल्ली कलकत्ता बम्बई मे कहुना लात जुत्ता खा कहुना अपन गुजर बसर करैइए तॅ ओकरा की ? ओकरा लेखें धइन सॅन।


ओ तॅ इंडिया के फॉरेन पॉलिसी मे व्यस्त अछि। भीतरसॅ मिथिला खुकख् भ रहल अछि , लौक  कनि रहल अछि।
मुदा ओ तॅ काला धन वापसी के नाम पर पूजी पगहा बला सब के जीहजूरी मे अपसीयाँत अछि।
कि मैथिल आबो ने जागॅब ? कहिया सजग बनब अपन अधिकार लेल ?
स्वतंत्रता प्राप्तिक ५० बरखक बाद कीयो भीखक दान बुइझ मैथिली भाषा के अस्टम सूचि मे जगह दॅ देलक तॅ भेट गेल शांती ? भेट गेल संतुष्टि? 

   यद्यपि मिथिलाक इ हालत किएक से सब जनैत अछि। हमहू ..अहूँ .. नेता ..जनतों..
तैइयो मैथिल अपन दारिद्रकें सोनाक पानि चरहौल डिब्‍बा मे बंद कॅ के बिहारक प्रदर्शनिक सोकेस मे सज्बैत अछि।
खेत पथार , सभ्यता - संस्कार के डाहि कहुना अपन अस्तित्व लेल संघर्षरत छैथ.....
फाटल चिटल केथरी जोइर आ ओहि पर सुतबाक क्रम पर आब् आर कतेक दिन गुजर हेतैख ??
कि स्वर्ग सॅ सुन्दर मिथिलाधाम के स्वप्न स्वप्ने टा रहि जेतै ?

शनिवार, 21 फ़रवरी 2015

मातृभाषा दिवश

मातृभाषा दिवशकेँ शुभ अवसर पर देश विदेशमे रहयवाला सभ भाषा–भाषी मित्र लोकनिमे हार्दिक मंगलमय शुभकामना व्यक्त करैत छी । अपन मातृभाषाकेँ बचाएब हमरासभक परम कर्तव्य अछि 


21 फरवरी के मनाबु अप्पन 'मातृ भाषा दिवस'
मिथिला धरोहर : 21 फरवरी यानी कि मातृ भाषा दिवस .. अंहा मे सँ बहुते कम लोग के पता होयत कि आय कोन दिन अछि। आधहा सँ ज्यादा लोग के तऽ फरवरी खाली वैलेंनटाइन डे कs लेल याद रहैत अछि।
आय के दिन अपन माँ भाषा के सेलिब्रेट करैय के अछि। आय के दिन अंहा अपन मातृ भाषा चाहे मैथिलि, अंगिका, भोजपुरी, मगही, वजिजका, जे भी होय ओकरा सेलिब्रेट कऽ सकय छि। कियाकि विविध भाषा के अय मोति के पिरोये कऽ भारत देशक एकता के माला बनय अछि, जय मे प्रेमक धागा होयत अछि।
हिंदी दिवस : हर हिंदुस्तानी के आवाज हिंदी..
मुदा बदलैत परिवेश मे जतय आय लोग के लेल वक्त नय अछि ओतय आय लोग सव भाषा के खिचड़ी कऽ देलक अछि। अंहा अपन आस-पासक लोगक बात पर गौर करव तऽ अंहा पैव जे आय शायदे ही कुनो एहन पुरूष औऱ महिला हैत जे कि शुद्ध भाषा के प्रयोग करैत होयत..जेना कि हिंदी बाजैत समय अंग्रेजी के प्रयोग, मैथिलि बाजैत हिंदी आ इंग्लिश शब्दक प्रयोग।
आय तऽ लोग महिलाओं सँ बात करैत कहैत अछि. आप खा रहे हो..या फेर बड़े सँ बात करैत समयो तू-तड़ाके क प्रयोग करैत अछि जेना कि तू खा ले, आप निकलो वगैरह..वगैरह।
दोसर अहम बात जे आय-काइल हर जगह अछि ओ अछि अंग्रेजी के बोलबाला। भौतिकतावादी युग मे स्टेटस मेंटेन करय के चक्कर मे हम विदेशी भाषा के तऽ तेजी सँ अपना रहल छि कियाकि इ बेहद जरूरी अछि, मुदा अपन पहचान ऑउर अपन मातृभाषा के बिसरैत जा रहल छि।
आय अगर मिथिलांचल दंपति दिल्ली, पुणे ऑउर बैंगलोर मे रहैत अछि तऽ हुनका बच्चा के मैथिलि नय आवैत अछि कियाकि ओ अपन बच्चा के कखनो मैथिलि बाजनय सिखेवे नय केलक, अगर बच्चा कखनो काल नकल करैतो अछि तऽ डांट-फटकार परैत अछि कियाकि हुनका लागैत यऽ जे कि हमर बच्चा मातृभाषा सीखे कs की करत ओकरा अंग्रेजी एवा चाहि कियाकि इहे सँ ओ स्मार्ट कहलैत जहनकि अपन क्षेत्रीय भाषा बाइज के पिछडल लागत।
इ सवटा लोगक ग्रसित मानसिकता कऽ सबूत अछि जेकर कारणे आय हमार क्षेत्रीय भाषा के ओ बढ़ावा नय मिलैत अछ जे कि अंग्रेजी कs मिल रहल अछ। हम देशक आन-बान ऑउर शानक बरकरार राखय के लेल कसम तऽ खाइत छि मुदा की मातृभाषा के अनदेखा कऽ के हम वाकई मऽ अपन सप्पत निभा रहल छि।
जय  मैथिलि  जय  मिथिला 

शनिवार, 11 अक्टूबर 2014

मिथिलाक्षर साक्षरता अभियान


Shekhar Mishra
·     मिथिलाक्षर साक्षरता अभियान प्रारम्भ भेल , काल्हि मधुबनी जिला मुख्यालय स्थित श्री ज्योति रमण झाजीक आवास पर, जेकर अध्यक्षता कैलन्हि श्री जीवछ झा भा.प्र.से. ई पवित्र संकल्प प्राय: मिथिलाराज्य अभियानक दिशा मे एक निर्णायक मोड़ सिद्ध होयत.

शनिवार, 20 सितंबर 2014

दिल्लीमे मिथिला-मैथिलीक उन्नयन


दिल्लीमे मिथिला-मैथिलीक उन्नयन
उन्नयन यानि एहेन काज जाहि सँ उन्नति हो -     
       
   निस्सन्देह पैछला सप्ताहान्त १३ सितम्बर दिल्लीक साईंधाम मे आयोजित 'मैथिली महायात्रा शुभारंभोत्सव - २०१४' सँ लगातार दिल्ली मे 'मैथिली-मिथिला' केर उन्नति हेतु एक सऽ बढिकय एक कार्यक्रमक आयोजन कैल गेल अछि। बस एक सप्ताहक भीतर दुइ अति महत्त्वपूर्ण आयोजन सम्पन्न भेल अछि।
    
१५ सितम्बर लोधी रोड सभागार मे मैथिली फिल्म 'हाफ मर्डर' केर स्क्रीनींग शो केर आयोजन कैल गेल। तहिना मिथिला मिरर - मैथिली केर राष्ट्रीय न्युज पोर्टल द्वारा काल्हि वार्षिकोत्सव केर रूप मे 'विशिष्ट सम्मान समारोह - २०१४' केर सफलतापूर्वक आयोजन कैल गेल जाहि मे दर्जनो मैथिली-मिथिला विशिष्ट योगदानकर्ताकेँ सम्मानित कैल गेलनि।
           मिथिला प्राचिनकाल सँ विद्यागाराक रूप मे प्रसिद्ध रहल अछि। आइ जखन शिक्षा प्राप्ति लेल मिथिला केन्द्रक विकेन्द्रीकरण होइत उनटे मिथिला पिछडल आ उपेक्षित क्षेत्र मे गानल जाइत अछि तैयो एहि ठामक शिक्षित व्यक्तित्व दुनिया भरि मे अपन प्रतिभा सँ शिक्षाक प्रसार मे पूर्ववत् लागल छथि। ई कहब अतिश्योक्ति नहि होयत जे दुनियाक सबसँ प्रसिद्ध होवार्ड विश्वविद्यालय या कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय सँ लैत हर देश केर प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान मे मैथिलक उपस्थिति ओहिना अछि जेना भारतक विभिन्न लब्धप्रतिष्ठित विश्वविद्यालय व शिक्षण संस्थानमे मैथिल शिक्षक केर उपस्थिति विद्यमान अछि। मैथिल कतहु रहैथ, अपन विद्या आ उच्च संस्कार सँ ओहि समाज केँ नहि मात्र पारंपरिक शिक्षा प्रदान करैत छथि, वरन् भाषा-संस्कृति आ संस्काररूपी व्यवहारिक शिक्षा सेहो ओ अपन लोकपावैन व भिन्न-भिन्न आयोजनक मार्फत मानव समुदाय केँ दैत रहैत छथि। विगत किछु सौ वर्ष मे जखन मिथिलादेश टूटैत-टूटैत आब मात्र 'मिथिलाँचल' नामक क्षयशील भूत रूप मे जीबित अछि ताहि विपन्न समय मे फेर टुकधुम-टुकधुम लोकजागृति अपन 'सनातन शक्ति' केँ स्मृति मे आनि पुरखा नैयायिक गौतम, मीमांसक जैमिनी, सांख्य-उद्भेदक कपिल ओ जीवन‍-आचारसंहिता निर्माता याज्ञवल्क्य सहित नव्य-नैयायिक वाचस्पति एवं बच्चा झा केर त्यागपूर्ण कीर्ति मिथिलाकेँ फेर सँ जियेबाक लेल वचनबद्ध बनि रहल छथि। सलहेश, लोरिक आ दीनाभद्रीक जनसेना फेर सँ फाँर्ह बान्हि रहल छथि। विद्यापति, मंडन, अयाची, चन्दा झा आ सब विभूति बेरा-बेरी अपन-अपन शक्ति ओ सामर्थ्यक संग पुन: मिथिला केँ बचेबाक लेल पृथ्वीलोक मे पदार्पण कय चुकल छथि।
        राजकीय शक्ति नहि जानि कोन विद्रोही षड्यन्त्रक कारणे मिथिला-मैथिली केँ एना उपेक्षित केने छथि जेना एकरा जीबित रहला सँ अन्य सबहक नाश भऽ जेतैक या रहस्य अन्जान अछि, शोधक विषय छैक जे आखिर केन्द्र या राज्य केर कोन एहेन मजबूरी छैक जे भारतक अभिन्न हिस्सा मिथिला केँ संविधान द्वारा कोनो सम्मान सही समय पर नहि दैत छैक। मैथिली भाषा सँ पुरान दोसर कोनो साहित्यसंपन्न भाषा नहि, मुदा राजनीति मनसाय केहेन जे स्वतंत्रता प्राप्तिक ५६ वर्षक बाद एकरा संविधानक आठम अनुसूची मे स्थान देल गेलैक।    
मिथिला बज्जि-संघ केर रूप मे पहिल गणतंत्रक अनुपम उदाहरण विश्व केँ देलक आइ ओ भारतीय संघ केर हिस्सा नहि बनि सकल अछि। मैथिली आठम अनुसूची मे स्थान प्राप्त केलक, ओम्हर बिहार राज्य मे मैथिलीक पढाई खत्म करबाक लेल अनिवार्य विषय सँ ऐच्छिक बनायल गेल, फेर शिक्षक केर नियुक्ति नहि करैत मैथिली सँ पूर्णरूपेण विच्छेद कैल गेल आ मैथिली भाषा मे पठन-पाठनकेँ प्रोत्साहन देबाक ठाम पर उनटा हतोत्साहित करबाक विद्वेषपूर्ण वातावरण बनायल गेल। क्षेत्रक आर्थिक उपेक्षाक चर्चा कि करू जतय सँ लोक बिना प्रवास पर गेने अपन पेटो नहि पोसि सकैत अछि। मिथिलाक उर्वरापन बाढि आ सुखार सँ जतेक बर्बाद नहि भेल ताहि सँ बड बेसी बर्बादी एतय राजनीतिक माहौल मे आपसी जातिवादी मनमुटाव सँ लोक खेत मे काज तक केनाय छोडि देलक ताहि सँ बर्बादी बेसी भेल। अछैत उर्वरापन जँ जमीन मे बाँझपन केर प्रवेश देल जाय तऽ लक्ष्मी किऐक नहि रुसती?   
         प्रवास अत्यधिक दिल्ली मे केन्द्रित बुझाइत अछि। मैथिलक बौद्धिक क्षमता आइये नहि, मुगलकाल मे सेहो ओतबे प्रखर छल तैँ ओहि समयक राजधानीक्षेत्र ब्रज-मथुरा-पुरानी दिल्ली मे सेहो रहल छलाह। बाद मे ब्रिटिशकाल मे कलकत्ता आ आब स्वतंत्र गणतांत्रिक भारत मे राजधानी दिल्ली मे हिनका लोकनिक वर्चस्व केँ नकारल नहि जा सकैत अछि। विधानसभा, लोकसभा, विधान-परिषद्, राज्यसभा, राज्यभवन - सबठाम मैथिल केर पहुँच बनि गेल अछि। तैँ कहब जे एतेक महत्त्वपूर्ण जगह पर पहुँचल लोक मैथिली वा मिथिलाक कल्याण निमित्त तत्पर छथि तऽ सरासर गलत होयत। ओ सब एहि प्रति पूर्ण बेईमान छथि। लेकिन वर्तमान प्रक्रिया यानि 'आम मैथिल जागरण' सँ आब कुम्भकरणी निन्न टूटि रहल छन्हि। निस्सन्देह आब इहो सब दिल्ली मे सेमिनार, गोष्ठी आ विद्वत् सभा कय रहल छथि। बहुत जल्दी ई सब 'जनसभा' मे परिणति पाओत से विश्वास राखू। साहित्यिक संस्कार जखनहि समाज मे अपन ओजरूपी बीज केँ छीटैत छैक, तऽ अंकुरा सीधे क्रान्तिरूपी गाछ केर जन्म दैत छैक। प्रजातंत्र मे प्रजाक महत्त्व सर्वोपरि रहलैक अछि। एहि मादे मैथिल अभियानी लोकनि धन्यवादक पात्र छथि जे भाषा-संस्कृति, सिनेमा, पत्रकारिता सहित समाजक उन्नयन संग मैथिली-मिथिलाक उन्नयन लेल डेग निरन्तर बढा रहल छथि। धन्यवाद दिल्ली!
        
   काल्हिये सम्पन्न मिथिला मिरर केर वार्षिकोत्सव मे एक सऽ बढिकय एक व्यक्तित्व केर पहिचान कैल गेल, हुनकर विशिष्ट योगदान हेतु विशिष्ट सम्मान विभिन्न विशिष्ट नेतृत्वकर्ताक हाथें सौंपल गेल, विवरण निम्न अछि।
१. श्री महेंद्र मलंगिया, मैथिलीक विराट नाट्य लेखन कें मैथिली नाट्य लेख क्षेत्र में
२. श्री विजय चंद्र झा दिल्ली मे मिथिला-मैथिलीक लेल समाज सेवा मे
३. श्री ए. एन. झा चिकित्साक क्षेत्र में वर्तमान मे देशक सब सँ पैघ न्युरोसर्जन आ मेदांता मेडिसिटी अस्पतालक विभागाध्यक्ष
४. डा. शेफालिका वर्मा मैथिली साहित्य लेखन
५. श्री संजय कुमार झा भारतीय प्रशासनिक सेवाक क्षेत्र में वर्तमान में चीफ विजिलेंश कमिश्नर वित्त मंत्रालय भारत सरकार
६. श्री आर. डी. वर्मा व्यवसायक क्षेत्र मे चेरयमैन वीएचआर ग्रुप
७. श्री प्रकाश झा मैथिली रंगमंचक निर्देशन मे
८. श्री कौशल कुमार मैथिली फोन्ट्स (मिथिलाक्षर युनिकोड) निर्माणक क्षेत्र मे
९. श्री संजय सिंह फिल्म आ थियेटर, फिल्म गैंग आॅफ वासेपुर में फज़लू भैया आओर फिल्म राॅकस्टार मे रणबीर कपुरक संग आ देशक श्रेष्ठतम रंगमंच सँ जुडल, राष्ट्रीय नाट्य अकादमी सँ पासआउट,
१०. श्री बिमल कांत झा, सहरसा मे मिथिला-मैथिलीक लेल सतत सेवा प्रदान करनिहार एक प्रतिबद्ध व्यक्तित्व वर्तमान दिल्ली सरकार मे रजिस्ट्रारक पद पर कार्यरत,
११. श्री विष्णु पाठक मूल रूप सँ बेगुसराय निवासी आ समाजसेवाक क्षेत्र मे आगु रहनिहार,
१२. श्रीमती अनिता झा मूल सं बलाइन मधुबनीक रहनिहाइर आ खानदानी मिथिला पेंटिंग सँ जुड़ल आ करीब 200 सं बेसी लोक केँ प्रशिक्षण देनिहाइर, हिनकर कीर्ति फ्रांसक तत्कालिन राष्ट्रपति निकोलस सर्कोजी द्वारा प्रशंसित-स्वीकृत, शीला दीक्षित, नीतीश कुमार, दिल्ली मेट्रो द्वारा सेहो प्रशंसित-स्वीकृत, मूल रूप सँ तांत्रिक-पद्धति पर आधारित पेंटिंग मे महारात हासिल,
१३. श्री मेराज सिद्दिकी मैथिली भाषाक लेल अग्रसर मुस्लिम युवा आ अंतरराष्ट्रीय दरिभंगा फिल्म महोत्सवक जनक
१४. श्री किसलय कृष्ण मैथिली फिल्म आ पत्रकारिता
१५. श्रीमती आशा झा टीवी एंकर वर्तमान में प्रतिष्ठित समाचार चैनल न्यूज़ नेशन में कार्यरत
१६. श्री विश्व मोहन झा मीडिया आओर विज्ञापनक क्षेत्र मे
जय मिथिला - जय जय मिथिला!!
हरि: हर:!!

शुक्रवार, 29 नवंबर 2013

हरिश रावत जि मांफि मंगला...सब संगठन के प्रतिनिधि के सामने मांफि मंगला.

हरिश रावत जि मांफि मंगला...सब संगठन के प्रतिनिधि के सामने मांफि मंगला. Rajesh Jha - आई हरीश रावत सीता मैया पर देल बयान के खंडन केला। मिथिला राज्य निर्माण सेना , अखिल भारतीय मिथिला संघ,जन जागृति मंच और अन्य सहयोगी मैथिल संस्था के प्रतिनिधी के सामने खंडन केला। संगही मिथिला राज्य मांग के समर्थन केला और मिरानिसे के द्वारा कखनो भी कार्यक्रम केला पर आबय के सहमति सेहो देला। ओ पहिनेही मीडिया के अपन बयान के खंडन के कॉपी भेज देने छला है

गुरुवार, 21 नवंबर 2013

आब नै चुप रहव - चल्लू डेल्ही

मिथिला राज्य निर्माण सेना केर द्वारा २४ नवम्बर क दिन के २ बजे कॉफ़ी हाउस दिल्ली स हरीश रावत के घर तक जत्था मार्च करत और हरीश रावत के घर के सामने हरीश रावत के पुतला दहन करत तथा अपन विरोध दर्ज करत | सब मैथिल भाई बहिन और मिथिला संस्था स आग्रह जे बेसी स बेसी संख्या में आबि क अपन घोर विरोध दर्ज करी | दिल्ली में रहै वाला सब मैथिल स आग्रह जल्दी स संपर्क करू और अई आंदोलन में अपन सहयोग करू | राजेश झा-08607817171 संजय कुमार- 09910644894 कमलेश मिश्र - 9560437000 , मदन ठाकुर -9312460150  , 
ई एहन  शब्द बजल कोनो -? 
   


























चमचागिरी आ चाटुकारिता के एकटा सीमा होइत अछि , हद भा गेल सीता मैया के सेहो ई विदेशी मूल के कहि रहल अछि , सर्वविदित अछि अदौकाल सं जकर प्रमाणिक इतिहास अछि जे माँ सीताक जन्म सीतामढ़ी जिला अंतर्गत पुनौरा धाम मे भेल अछि , तिनका विदेशी मूल के कही एकर तुलना सोनिया गाँधी से क रहल छथि ई पाखान्द्शिरोमानी हरीश रावत , रावत जी ज क इतिहास पदु आ अपन वक्तव्य के वापस लिय , सरिपहुं ई हरेक मैथिलक मुहं पर थापर समान थिक जे हमर धरोहर माँ समान सीता मैया के सोनिया सन महिला सं तुलना कायल गेल अछि | एकरा हम व्यक्तिगत रूपेण अपन संस्था मिथिला राज्य निर्माण सेना के तरफ सं घोर निंदा करैत छी , अगर अहाँ सब हमरे जकाँ लागैत अछि त आऊ coffe हाउस रवि दिन २ बजे अपरान्ह आ एही कुकृत्य के लेल हरीश रावत के पुतला दहन कायल जाय आ हिनका ई वक्तव्य के वापस लेबा पर मजबूर करू |

एहन चमचा शिरोमणि के की कायल जाय ,
कालिख पोअति चुगला बनायल जाय ,
आऊ सब मिलि एकर पुतला दहन करी ,
मैथिल होयबाक किछु त स्वाभिमान करी ,
जा तक रहत एहन एहन लोक जेना की रावत ,
मैथिलि अपमानित होइत रहत ....... तावत
आऊ सब मिलि देखाऊ अपन त|गत | 

Calling Mata Sita a foreigner by Sh. Harish Rawat, a Congress leader shows the fall of knowledge and intellectual levels of our leaders. It seems that he doesn't has a basic knowledge of Indian history. The Ramayana Period in Pauranic history has not any concept of Nepal. The birth place of Sita is Sitamrhi, a District town of Bihar, which Sh. Rawat would not be knowing I am sure. Sh Rawat has hurt the sentiment of crors of people. I strongly condemn his statement, calling Mata Sita a foreigner. He should apologies for his crime.

हरिश रावत तोहर ओकात कि छउ तकर थाह तोरा 24 के पता चलतउ । माता सिताके अपमानित कैला के बाद रावण एहन प्रतापि राजाके नाश भ गेल तु कोन खेत के मूली छे रे रावत...24 november ke din ke 2 bje Coffee house,CP Delhi enay nay bisru.....CP s harish Rawat ke ghar tak march kel jet ekar bad putla Dahan-

हिन्दू धर्म के ठेकेदार और ठीकेदारी लेने वाली संगठने चुप क्यूँ हैं l क्या उन्हें काठ मर गया है, या संज्ञा सुन्यता मे है ?

आखिर राम की राजनीति चमकाने वाले और इलेक्शन के समय ८४ कोशी यात्रा करनेवालों की जड़ता कब टूटेगी ?

माता सीता का यह अपमान, कब तक सहेगा हिंदुस्तान ?
 ऐसे नेता देश को क्या विकास के राह पर ले कर जाएंगे जिनको इतिहास पता ही नहीं है, सीता माता विदेशी कैसे?????
जब सीता माता थी तब इंडिया, भारत, हिंदुस्तान, या नेपाल ही नहीं बना था, उस समय तो मिथिला राज्य हुआ करता था, क्या सही में अज्ञानी नेताओ के संख्या जयादा होगया है इस देश में ?

कांग्रेस के हरीश रावत ने आज मुझे अर्थात बिहार खास कर मिथिला की बेटी को विदेशी कहा है। तिरहुत सरकार लक्ष्‍मेश्‍वर सिंह ने कांग्रेस को पहला दान देकर सही में रावत जैसे लोगों को देशभक्‍त बना दिया।

कानी कानी दुःख कतेक कहियौ रौ मिथिला के ललना
रावण बनी दुःख रावत देलकौ कि तू सब रहबै अहिना ?
जौ बुझैत छै माता हमरा एक जूट हो तू सब
छौ तोरा बुझ हमरे सप्पत एक जूट हो तू सब

२४ नवम्बर क दिन के २ बजे कॉफ़ी हाउस से हरीश रावत के घर तक जत्था मार्च करत और हरीश रावत के घर के सामने अपन विरोध दर्ज करत | सब मैथिल भाई बहिन और मिथिला संस्था स आग्रह जे बेसी स बेसी संख्या में आबि क अपन घोर विरोध दर्ज करी | 
Gopal Jha हरीश को इतिहास की जानकारी लेनी होगी की जहां माता सीता का जन्म हुआ वह स्थान आज भी भारत में है सत्ता के नशे में झूठ बोलने से सच नहीं हो जाती माता सीता का जन्म सीतामढ़ी में है और मैं सीतामढ़ी वासी होने के नाते इस बयान का घोर निंदा करता हूँ


ई कांग्रेस त मैथिला के खा गेलभाई 1.अंग्रेज मिथिलाक दू भाग मे बटलक ,आजादि के बाद cong. सरकार अङि मुद्दा पर चूप रहल..2.नेपाल स हर साल जे पईन छोरल जोईत अछि जहि स मिथिला मे हर साल भंयकर बाईढ आवैत अछि cong.के देन छि 3.आब राबत कहैत अछि जे सिता माता बिदेसी छलिह..
आब  कहु  कि -२  सुनई लेल  बांकी  अच्छी - ? 
आब नै  चुप रहव - चल्लू डेल्ही 

गुरुवार, 13 जून 2013

मिथिला-परिक्रमा

मिथिला-परिक्रमा


पहिने अनशन ,तेक्कर बाद मिथिला राज्य निर्माण यात्रा आ आब "मिथिला-परिक्रमा" ; लागैइत ऐछ जे वर्ष-2013 मिथिला राज्य आन्दोलनक कार्यक्रमक क्षेत्रम सम्पूर्ण मैथिल-संस्था आ मिथिलवासी एकत्रित भक अप्पन अधिकार लेल आब आगू आय्ब रहल छैथ |
   मैथिलगण सबक उत्साह आ अप्पन मैथिल-उमंग देखक मिथिलाक राज्य निर्माण आ विकास स जुरल संस्था सब आब प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप सौं जुईर रहल छैठ, जे नीक गॅप अछि |
एहा द्वारे राज्यक् निर्माण आ विकास लेल आब "अखिल भारतीय मिथिला पार्टी" , "मिथिला-परिक्रमा" क नाम सौं मिथिला भ्रमण कयर मिथिलाम आन्दोलनक नवका अलख़ जगैताय्त्त| 
ई परिक्रमा देवोत्थान एकादशीस विवाह-पंचमी धरि (13 सितंबर स 10 नवंबर तक) चलत जॅयिमा संस्था आ सहयोगी मैथिल सब राज्यक कोन कोन म जाक मैथिल सबक़ जागरूक बनेताय्त्त |

** "मिथिला-परिक्रमाक" यात्रक-नक्शा अय प्रकार सौं आईछः :-

((बेगुसराय)) -->खगरिया-->नवगच्छिया-->कटिहार-->किशनगंज-->पूर्णिया-->अररिया-->मधेपुरा-->सहरसा-->सुपौल-->झंझारपुर ->दरभंगा-->बेनिपुर-->रोसरा-->समस्तीपुर-->महनार-->हाजीपुर-->मुजफ्फ़रपुर-->मोतिहारी-->बेतिया-->रक्सौल-->सेओहर-->सीतामढी-->पुपरी-->((मधुबनी))

** अय "मिथिला-परिक्रमा" क मुख्य विकसी-बिंदु निम्न आईछः :-

1) सम्पूर्ण मिथिला क्षेत्र मे मातृभाषक माध्यम सा 12वी कक्षा तक पढ़ौनिक व्यवस्था आ तहि म हॉस्टिल के निर्माण आ आधुनिक स्तरकशिक्षक सुविधा |
2) मैथिली सम्पूर्ण मिथिला क्षेत्रक राजकाज के भाषा आ राजकीय कार्यविधिक भाषा |
3) कृषि प्रधान क्षेत्र मिथिलक उर्वर भूमिक समुचित दोहन आ उत्पादन |
4) जलशक्तिक समुचित उपयोग आ उचित वितरनक व्यवस्था एवं जल संचय |
5) मिथिलक कृषि उत्पादपर फुड प्रोसेसिंग इंडस्ट्रीयक विशाल ढांचाक निर्माण |
6) कृषि आधारित, पत, कगत, चीनी, तम्बाकू इंडस्ट्रीयक व्यवस्थापन |
7) मिथिलक तरकारी, फल आ फुलक लेल बजारक निर्माण आ कोल्ड स्टोरेजक व्यवस्था |
8) समस्त पोखरी ,चौर आ नदी सब पर बाँध बना मत्स्यपालनक व्यवस्था |
9) बरौनी मे पेट्रोकेमिकल के परियोजनाक स्थापना आ विस्तार |
10) लौकाहा, रीगा, सुपौल, फारबिसगंज आ लौरिया मे बिजली उत्पादन केन्द्रक निर्माण |
11) कटिहार, बेगुसराय ,सहरसा आ बेतियाः म मेडिकल कॉलेज के स्थापना |
12) सब ज़िला मे ईन्जीनियिरिंग कॉलेज केस्थापना केन्द्र एवं राज्यकद्वारा |
13) भाषाई चेतना आ संस्कृतिक सुरक्षक लेल सब गम मे पुस्तकालय |
14) दर्शनयी आ पौराणिक स्थान के पर्यटन स्थलक रूप देवक व्यवस्था |
15) मिथिलाक हस्तकला, हस्‍त-करघा आ चित्रकला क बीच सामंजस्य आ रोजगार सृजन |
16) यातायताक उन्नतिक लेल मिथिला स्टेट ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन के गठन |
17) क़ृषि उत्‍पादकता बढवा लेल विभिन्न उत्पादक कृषि सोध संस्थान |
18) राज्यक शहरीकरण हेतु समस्त प्रखंड के टाउनशिपक दर्जा |
19) खेल-कुदक बढ़ावा लेल बच्चाक चयन खेल-कूद विकास प्राधिकारकगठन |
20) समस्त पंचायत मे सर्व सुविधा संपन्न हॉस्पिटलक स्थापना आ विस्तार |
21) उड्डयनक विकास लेल हवा अडडक नगरीय उपयोग आ हवा सेवक विस्तार |

ई आन्दोलनक सफलता आ समस्त मिथिलवासी आ मैथिल सब सौं सहयोगक आशा हम करै छि |
Jha Chandan

गुरुवार, 28 मार्च 2013

मिथिला राज्य लेल ४ दिना अनशन





           मिथिला राज्य लेल ४ दिना अनशन: - युवा पीढी द्वारा (पृष्ठभूमि आ कार्यक्रम आयोजन: विस्तृत समीक्षा).
अनशनकारी कवि एकान्त द्वारा ४ दिनक अनशनक फैसलाक संग मिथिला राज्यक माँग प्रति युवामें चेतना जागृतिक एक महान अवसर भेटल से सोचि जनबरी ९, २०१३ केर 'कन्नारोहट कार्यक्रम'में कार्यक्रमके भव्यतापूर्व आयोजन करबाक निर्णय लेल गेल छल। कवि एकान्तक हृदयमें अनशन प्रति जिम्मेवारी आ कार्यपथ-निर्माण संग योजनाक सुन्दर निष्कर्ष निम्नरूपे कैल गेल छल: "आन्दोलन मे ऐबाक उद्देश्य इहो रहय " मिथिला राज्य लेल संघर्ष आ संघर्ष मे लागल मैथिल आ संगठन के एका "। क्रमशः एका बनय आ से होईत प्रतीत भ रहल अईछ। एहि कार्यक्रम मे जे रहथि मैथिल रहथि। अप्पन पार्टी आ बिचारधारा स उप्पर उठी के एकटा मैथिल मात्र आर किछो नहि। आरंभिक कन्नारोहट आ अप्पन अप्पन क्वाथ के बोकर्लाक उपरांत शुद्ध भय सब मैथिल सभक बिचार रहय जे एहि आन्दोलन के एक भ'य उद्देश्य लेल लाड़ल जाई। प्रवीन भाई के बैजू बाबू सँ सेहो गप्प भेलैन, ओहो आशीर्वाद देलाह आ हुनक समर्थन सेहो भेटल (प्रवीन भाई के वार्तानुरुप आ उपश्थित अमरेन्द्र भाई के कथनानुसार )। ज्ञात हो की एहि आन्दोलन के एकटा मैथिल बनि लड़बाक निर्णय के सर्प्रथम समर्थन पूज्य धनाकर बाबू आ आदरनीय रत्नेश्वर बाबू केने रहथि आ संस्थाक रूप मे AMP के पूर्णिया ईकाई केने अछि। आन्दोलन मे अनशन के एहि अध्याय के संचालन लेल प्रवीन भाई आ दिवाकर भाई मे नीक बहस आ सार्थक बर्तालाप के परिणाम सुखद रहल जे सब अप्पन अप्पन बेदना के मुखर भ' क' रखलाह आ प्रस्ताब रहल जे: * मिथिला राज्य के निर्माण आ मिथिला मैथिली मैथिल के बिकाश के आधारभूत कारक मानि आन्दोलन के आगाँ बढेबाक आवश्यकता अईछ। * समग्र मिथिला राज्य के माँग के छोड़ी, भारत मे मिथिला राज्य के माँग के लक्ष्य कयल जाई। * आन्दोलन international border के आदर करैत नेपाल स्थित अप्पन मैथिल स्वजन के लेल संबेदना के प्रति सदैब कटिबद्ध रहय, जेना नेपाल स्थित मैथिल छथि। अस्मिताक संघर्ष दुनू दिस चलि रहल अईछ। * आन्दोलन ब्यक्ति स उप्पर उठी कय हो उद्देश्य लेल हो, मैथिल के संगठित आ एकाकार करबाक माद्दा मात्र मुद्दा मे अछि आ ताहि हेतु मुद्दा भेल नायक। समस्त आन्दोलन के स्वाभाबिक प्रतिनिधित्व मिथिला राज्य निर्माण के उद्देश्य हो। * कहब बहुत आवश्यक नहि जे आन्दोलन मे समस्त मैथिल संगठन के समर्थन देबाक लेल आग्रह करबाक बिचार भेल। * उद्देश्य के साधबाक लेल Joint Committee बनेबाक प्रस्ताब भेल। * अनशन के उपरान्त मिथिला राज्य निर्माण लेल एकटा joint memorendum देबाक बिचार भेल, से हो कोना ई बिचार के बिषय रहल। * प्रवीन भाई आन्दोलन के एहि गुटनिरपेक्ष स्वरुप के अधिक स अधिक मैथिल तक पहुँचेबाक सार्थकता पर जोर देलाह। हम एतबे कहब मिथिला आ मैथिली सब मैथिलक के छी, चाहे ओ कतुको होथि, बजैत कोनो भाषा होथि मुदा ह्रदये मैथिल होथि। मिथिला राज्य के निर्माण के एहि महायज्ञ मे अप्पन भूमिका निर्धारण पर बिचार करू, इतिहास के बनबा के प्रक्रिया मे अप्पन योगदान पर बिचार करू। समय आबी गेल जे "मूक दर्शक के भुमिका के तलांजलि दय इतिहास निर्माण मे आबी, अप्पन मैथिली बचाबी, अप्पन मिथिला बनाबी" जय मिथिला !! जय मैथिली !! जय मैथिल !!" (कवि एकान्तक विचार, जनवरी १०, २०१३ फेसबुकपर)। -------------- दिल्ली सऽ वापसी करबाक क्रममें अपन विचार जे सभक समक्ष प्रेषित केने रही जनवरी ११, २०१३ केँ: "आउ दिल्ली यात्रा के समेटी। काल्हि प्रस्थान करबाक अछि, से सभक ध्यानाकर्षण महत्त्वपूर्ण विन्दु तरफ चाहब, कृपया ध्यान दी आ सहयोग हेतु वचन दी। १. कवि एकान्त द्वारा मिथिला
 राज्यके माँग लेल ४ दिनक अनशन कार्यक्रम। प्रस्तावित तारीख मार्च २२-२५, २०१३। स्थान: जन्तर-मन्तर, दिल्ली। संयोजन भार: दिवाकर बाबु। २. मैथिल युवा द्वारा मिथिला राज्य लेल वृहत धरना-प्रदर्शन कार्यक्रम। स्थान, तिथि उपरोक्त कार्यक्रम के समापन दिन घोषणा कैल जायत। संयोजन भार: सागर मिश्र। उपरोक्त कार्यक्रम १ लेल कवि एकान्तजी अपन जन-सम्पर्क दिल्ली लगायत समस्त मिथिलामें कय रहल छथि। जतेक संघ-संस्था आ सहयोगी मैथिल व्यक्तित्व सभ छथि तिनका सभसँ दिल्लीमें सभ जगह घूमि-घूमि सहयोग सदेह उपस्थिति लेल प्रथम द्वितीय सदाचार-विचार अनुरूप जे स्वेच्छा हो ताहि तरहें याचना कैल जा रहल छैक। सभकेँ अपन माटि-पानि-इतिहास आ पहचान लेल राज्य निर्माण जरुरी कहि सहयोग हेतु अग्रसर होयबाक निवेदन कैल जा रहल छैक। ई पहिल बेर हिम्मत देखौनिहार मिथिलाक युवा वर्ग सँ मैथिलीसेवी कवि थिकाह जिनका प्रति अपार समर्थन बनेबाक जिम्मा हमहुँ लेलहुँ, स्वेच्छा सँ। हम ई नहि देखय लगलहुँ जे एहिमें के-के छथि आ किनका-किनका सँ हमरा पटरी बैसैत अछि आ कि हमर सिद्धान्तके माननिहार छथि। हम केवल यैह देखलहुँ जे हम कि कय सकैत छी, आ कि करबाक अछि, कोना करब। आर ताहि अनुरूप आन्दोलनक प्रासंगिकता ऊपर समस्त मिथिला समाजमें विभिन्न मिडिया द्वारा एहि बात के प्रसार जे उपरोक्त कार्यक्रम जे मिथिलाक अस्मिता जोगेबाक लेल कैल जा रहल अछि ताहिमें सभक शुभकामना आ वाँछित सहयोग देल जाय। अही क्रममें जन-जन तक बात पहुँचय जे आइ धरि मिथिला लेल कि-कि भेल, कतेक सफलता-असफलता, आदि पर उल्लेखणीय चर्चा कराओल जायत आ बेसी सँ बेसी लोक के जोडल जायत। जोडय लेल किनको ५०० टाका के नोट पठाय वा गर्दैनमें गमछी बान्हि बलजोरी राजनीतिक रैला जेकाँ नहि आनल जायत, बल्कि समस्त मिथिला सँ जतेक कलाकार-रंगकर्मी-पेशाकर्मी-जातिय संगठनकर्मी आदि छथि तिनका सभकेँ आह्वान कैल जायत जे एक जोरदार प्रदर्शन लेल दिल्ली आबी आ भारत सरकारकेँ मजबूर करी जे मिथिला राज्य निर्माण लेल सोचैथ आ शीघ्रातिशीघ्र सम्बोधन करैथ। खाली भाषणमें बिहार राज्य द्वारा मिथिलाक विकासक बात बहुत भेल, मुदा असलियत एतबी जे दलाल-ठीकेदार-हाकिम-होशियार लेल छूद्र-लूट-खसोट के ललीपप आ आम जनतामें जातिवादिताके झगडाके अलावा मिथिलाके दोसर किछु नहि देल गेल एखन धरि। सुशासनके सरकार सेहो बस गपहि टा देलक, जमिनी सुधार बस खोखला प्रमाणित भेल। एकर सभक लेखा-जोखा कैल जाय आ केन्द्रके विशेष पर्यवेक्छक मिथिलाक जमिनी यात्रा करय आ उपेक्छा के हर संभव वैकल्पिक समाधान ताकय। मिथिलासँ आयल सांसद-विधायक सभकेँ ई सोचय पडत जे आखिर विकासक कोन गति मिथिला लेल चलल, राज्य वा केन्द्र सरकार के द्वारा। विकास लेल सेहो राज्यक निर्माण वांछणीय अछि। पहिल कार्यक्रमके सफलतापूर्वक पूरा भेला उपरान्त बस दोसर महत्त्वपूर्ण कदम यैह जे मैथिल युवा द्वारा धरना आ प्रदर्शन के संपूर्ण भार लैत आन्दोलन के ताबत निरन्तरता देल जाय जाबत मिथिला राज्य ससम्मानपूर्वक
बनि नहि जायत। हरि: हर:!" -----------
  यैह आन्दोलनक पृष्ठभूमिमें छल निम्न सोच: "मिथिलाक माँग केकरा लेल अवाञ्छित? हालहि २८ दिसम्बर, २०१२ ई. विराटनगर में आयोजित विद्यापति स्मृति पर्व समारोह २०६९ में आयल छलाह विशिष्ट अतिथि भू.पू. अररिया साँसद मा. सुखदेव पासवानजी, ओ दिल्ली रहैथ वा कतहु, लेकिन हर वर्ष एहि समारोह में अपन गरिमामय उपस्थिति सँ आम जनमानस के ओ दाकियानूस धारणा के झूठलाबैत छथि जे मैथिली आ मिथिला बस किछु उच्च जातिके माँग मात्र थीक। हमरा लिखैत हर्ष भऽ रहल अछि जे सम्माननीय अतिथि ओहि मंच सँ घोषणा कयलाह - बहुत जोर दैत बजलाह जे हम आइ यैह मंच सऽ घोषणा करैत छी जे बिहारके १८ जिला मिलाय मिथिला राज्य बनय। ओ किछु जिला के नाम तक लेलाह आ ताहिमें शामिल छल कटिहार, किशनगंज, अररिया, पुर्णिया, मधेपुरा, सहरसा, खगडिया, समस्तीपुर.... आदि। छद्म बुद्धिके पत्रकार आ बिना पेंदी के लोटा समान कतेको चुटपुट नेता एहि आह्लाद के शायद नहि बुझि सकत, लेकिन हमरा गर्व अछि सुखदेव पासवान जी पर, गर्व अछि मेहताजी (फारबिसगंज पूर्व विधायक) पर आ गर्व अछि हर ओ गूढ रहस्य बुझनिहार बुजुर्ग अनुभवी पत्रकार आ नेतापर जे मिथिलाक सम्मान लेल हर समय तैयार रहैत छथि आ हर सतह पर आवाज उठबैत छथि। तहिना नेपाल सरकार के उप-प्रधान तथा गृहमंत्री आ उपरोक्त समारोहके प्रमुख अतिथि मिथिलाक गरिमाके प्राचिनतम् कहैत संवैधानिक सम्मान हेतु वचन देलाह आ बजलाह जे बिना मिथिलाक सम्मान देने नेपाल देशके सम्मान नहि भेटतैक। ओ खूलिके बजलाह जे मधेस एक बनेनाय बहुत कारण सँ संभव नहि छैक तऽ बारा सऽ पूब झापा धरि एक राज्य बनाउ जेकर नाम मिथिला मधेस राखू, हमरा एतराज नहि अछि। ई दू घोषणा उपरोक्त मंच सँ साधारण नहि छलैक। लोक आइ-काल्हि १७ नव नाम के पाछू जमानी-दीवानी गबैत अछि, मुदा गहिराई में जाय सोचैत नहि अछि जे केवल नामकरण कैला सऽ सीमाँचल-धर्मांचल-बूरिराजान्चल-पूर्वान्चल कयला सऽ मिथिलाक गरिमा ऊपर ग्रहण नहि लगा सकैत अछि। मिथिलाक जे महासागर भूगोल, इतिहास, भाषा, साहित्य, संस्कृति, पहचान आ हरेक सन्दर्भ जे एक राज्य हेतु गणतंत्रमें पूरा करैत अछि से स्वत: प्रमाण बनि पहाड समान ठाड्ह होइछ आ भूकयवाला अदूरदर्शी लोक के सीना तानिके कहैछ जे मिथिला के सम्मान बिना तोहर कोनो मान नहि। तदापि मिथिला अवाञ्छित अछि आ एहि सत्य सँ हम सभ पाछू नहि हँटि सकैत छी। प्रश्न उठल जे अवाञ्छित अछि... तऽ केकरा लेल? आउ मंथन करी! १. जनसाधारण जनमानस: जे आइ धरि बोनि - मजदूरी करैत रोजी कमेलक, ओकरा लेल धैन सन! ओकरा तऽ लालटेन धरा दियौक आ ईशारा कय दियौक... बुझि गेलहक न... यैह छाप थिकैक। केओ दोसर दिस सऽ आयत आ गाँधीजी छाप मैन्जनके हाथमें दैत कहत जे बस एहि बेर प्रभाकर बाबु के पार लगा देबैन, छह महीना के जोगार बखारी सऽ उठा लेब। मैन्जन तैयार तऽ सभ तैयार। ओकरा लग राज्य के कि माने छैक आ कि पहचान के महत्त्व ताहि सभ सऽ सरोकार कि? तखन प्रयासो किछु नहि भेलैक अछि केकरो द्वारा जे राज्य किऐक आ तेकर सार्थक प्रभाव कोना से मानय पडत। १३३-१३४ बेर यात्रा प्रवीण केलक लेकिन ध्यान सभ दिन ओहि बकथोंथी करयवाला टा पर रहलैक। आबो यदि नजैर खुलल छैक तऽ आगू जाय किछु करय, बस! बुझबय ओहि मिथिलाक गणकेँ जे विदेह राजा जे सम्पन्नता, ऐश्वर्य, रिद्धि आ सिद्धिके संग समस्त मिथिला भूमिके शुद्ध-शिक्त रखलाह जे केरो के पात पर देवता के इहा-गच्छ - इहि-अतिष्ठ कहलापर दौडल आबय पडैत छन्हि से फेरो होयत आ अहीं सभक प्रत्यक्छ सहभागिता सँ पूर्ण समावेशी आ प्रदेश-विकास सरकार बनत जे बस मिथिले लेल सोचत। आइ धरि जे ६० वरख अहिना बहलाबैत-फुसियाबैत बिता देलक स्वतंत्र भारतमें से मिथिला बनेनहिये कल्याणक मार्ग प्रशस्त होयत। जे शिक्छा हिन्दी आ अंग्रेजीमें देबाक चलते सभक धियापुता पढाइ करबा सऽ वञ्चित रहि जाइत अछि से मातृभाषा मैथिलीमें पढेलापर सभ आराम सऽ साक्छर बनत। मजदूरी करबाक लेल दिल्ली-मुंबई नहि जाय अपन राज्यमें रोजगार भेटत। अपन खेत के पटाबय लेल उधारके दमकल नहि अलग-अलग नदी सँ चिरल अपनहि नहर होयत। पानिक कमी थोरेक न अछि, बस बेईमान व्यवस्थापन आ जाहि नामपर बिहारी नेता लूट-खसोट मचबैत अछि तेकरा नियंत्रण करबा सऽ काज होयत। आ मनमें शंका जे ब्राह्मण बडका जातिक लोक सभ ऊपर बैसि लूटत तेकर प्रतिकार बहुल्यजन कोना करैत छैक से आब ककरो सऽ छूपल नहि अछि। अत: अपन राज्य अपनहि अधिकारवाली सूत्रपर सभके जुडैत काज करबा लेल मिथिला राज्य निर्माण करू। २. मैथिली बिसरल लोक: अफसोस जे मैथिली ऊपर ततेक रास डांग मारल गेलैक, अपनो आ सहजहि बहरियो द्वारा जे रोजीके भाषा पूर्णरूपेण मैथिली नहि बनि सकल आ स्वत: लोक मैथिली बिसरय लागल। आब जे मैथिली बिसरि गेलाह तिनका लेल मिथिला राज्य के प्रासंगिकता पुन: एक उच्च बुझनुक तवका मात्र लेल बाँचल, बाकी सभ जहिना-तहिनामें खुश छथि। कोनो आत्मसम्मानके भूख नहि, जखन मैथिली बिसरा गेल, दोसर भाषा अपना लेलहुँ तऽ आब मिथिला हो, बज्जिकाँचल हो, अंग प्रदेश हो, सीमांचल हो, कोसी प्रदेश हो, झारखंड हो, दियारा प्रदेश हो या जे भी हो - सभ सऽ उत्तम बिहारहि में रहब। खूब जाति-जाति भोकरब आ कहियो लालटेन जरायब तऽ कहियो तीरे मारब, कमल तऽ फूलाइ सऽ रहल आ हाथ तऽ कहिया नऽ कटि गेल जे मिल बन्द भेने पार। अहू दिस ध्यान कि देबय पडतैक जे मैथिली भाषा हो या मैथिली के भाषिका, सभके मिथिलाक पूर्ण भाषा मानि बस ऐतिहासिक पहचान प्रति सम्मान लेल जोडय के काज करैत मिथिला निर्माण लेल एकजूट करय पडतैक। संगठन एक बेर तऽ नेताजीके डायरीमें बनैत छैक लेकिन पुन: संगठनात्मक कार्य कि करी, प्रगति कि भेल, कतेक दिन प्रखंड पर धरना भेल, कतेक गरीब के राशन उपलब्ध करबाओल गेल, कतेक विकासक काजके लेखा-जोखा लेल गेल.... सभ नदारद! आ जे स्थापित राष्ट्रीय पार्टी सभ छैक तेकरा तऽ कोन योजना अन्तर्गत कतेक पाइ निर्गत भेल आ लूटय लेल के सभ छें ताहि सऽ फूर्सते नहि, भाँडमें गेल मिथिला या बिहार या भारत या पहचान या आत्मसम्मान! ३. बिहार सरकार के कर्मचारी: मलफाइ उडबय लेल मोट तनख्वाह भेटिते यऽ आ हमरा कोन लेना-देना है ई आन्दोलन-फान्दोलन से! होत तब अच्छा है, ना होत तबो अच्छे है। एहि वर्गके जोडबाक लेल आर्थिक भार दैत आन्दोलन करय के आवश्यकता, जाबत ई वर्ग चाप महसूस नहि करतैक तऽ आन्दोलन नहि सफल होयत आ सभ दिन खाली आली-हौसे चलैत रहत। ओना कोनो कार्य लेल बुद्धिजीवी प्रकोष्ठके निर्देशन जरुरी! ४. कलेजिया विद्यार्थी: 'यार! हमरे सेन्टर पर तऽ खूब चोरी हुवा, तोरा सेन्टरपर केना हुवा?' यैह अर-दर बहस चलैत छैक कारण नागेन्दर बाबु के समय सऽ जे रोग लगायल गेल चोरी सेन्टर के तेकर दुष्परिणाम आइ धरि भोगि रहल अछि विद्यार्थी वर्ग। आदर्शता गायब छैक। धोइधफूल्ला मास्टर सब पढेतैक कि कपार बस गप लडबैत छैक, नोट लिखबैत छेक, खूब घोंकबैत छैक, पास करबैत छैक। ओ विद्यार्थी भला कि बुझय गेलैक आत्मसम्मान-संस्कृति-पहचान? तऽ झंडा धराय कार्यकर्ता एकरहि सभके बनाबय पडतैक। स्वत: धीरे-धीरे जानकारी बढैत जेतैक। काजो प्रबलताके संग आगू बढतैक। ५. मैथिलानी: 'चुल्हा फूकय सऽ फुर्सत भेटय बौआ तऽ अहाँके आन्दोलनमें आबी?....' 'धू जाउ! हुनका एहि सभ सऽ घृणा छन्हि।......' 'अहाँ सभ हमरा सभके पूछबो करैत छी?....' ईत्यादि! बस बाजिके खानापुर्ति! बाकी किछु नहि। केओ लाजे परेती तऽ केओ कुनु बहन्ने! संगठन विशुद्ध हिनकहि सभके हो आ किछु काज लेल संपूर्ण जिम्मेवारी हिनकहि सभके देल जाय तऽ सुधारक गुंजाईश छैक। बाकी हम अनुभवहीन छी एहि मामले! अपने घरवाली नहि टेरती तऽ दोसर के के पूछैत अछि। ;) एहिमें बहुत रास विन्दुपर सोचब हमरा लेल समयाभावमें नहि भऽ पायल, यदि संभव हो तऽ किछु महत्त्वपूर्ण विन्दु जरुर जोडी! हरि: हर:!" तदोपरान्त जेना सामान्यतया मैथिल द्वारा घोषित हरेक कार्यक्रममें होइत छैक जे गूट-निरपेक्ष मानितो खूब गूटबाजी आ वैमनस्यता पसारबाक नांगट खेल, किछु तहिना सकारात्मक सोच संग नियोजित एहि कार्यक्रममें भेलैक आ संवादविहीनताक कारण, एक-दोसराक पीठ पाछू कूचेष्टापूर्ण निन्दाक खेल सँ सशक्त आन्दोलनके जगह निरीह आ कामचलाउ आन्दोलन सेहो कठोर प्रतिबद्धता आ सात्त्विकताक संग २२-२५ मार्च, २०१३ केर ४ दिना अनशन अपार सफलतापूर्वक इतिहास रचैत पूरा भेल। मिथिला निर्माण में एहि आन्दोलनक भूमिका युवावर्गमें मिथिला-राज्यक माँग प्रति सचेतना जाग्रत केलक। उतार-चढाव सेहो भेल कारण हमर बात सऽ केकरो टीस आ केकरो बात-व्यवहार सऽ हमरा टीस उठब मैथिलक पुरान पहचान थीक। लेकिन जे मूल उद्देश्य छलैक से पूरा भेलैक। एक कवि सऽ अनशनकारी तीन मिथिलाक धरतीपुत्र बनि गेलाह - नमन कौशल कुमार व मनोज झा केँ जे स्वस्फुर्त आ बिना केकरो कोनो उकसाहटक एहि पवित्र आन्दोलनकेँ चारि चाँद लगा देलाह। कवि एकान्तकेँ मना केला के बावजूदो अनशनक प्रारूपपर असगर ठाड्ह राखब आ बहुत अन्तिम क्षणमें ई स्पष्ट करब जे समन्वय समिति या कार्यक्रम आयोजन हेतु एक संयुक्त कार्यदल नहि बनल, कोष निर्माण नहि भेल, के सब औता तय नहि भेल, ज्ञापन पत्र कोना बनत, कि बनत... किछु स्पष्ट नहि भेल... मिडिया सहयोग, भारत सरकारसँ वार्ता करबाक लेल प्रतिनिधि मंडल.... सभ बात लेल कोनो पूर्व योजना नहि तैयार भेल.... एतेक तक कि मंच केना बनत, साउण्ड सिस्टम, उपस्थिति पुस्तिका.... कोनो पूर्वाधार के किछुओ इन्तजाम नहि भेल... ई समस्त बात मानू जे अपने आप में कतेक भयंकर डरावनापूर्ण आ लज्जास्पद छैक... तखन दोष केकरो नहि बस अनुभवहीनता मात्र हावी बनल। अनुभवहीनता तऽ सोझाँ देखायवाला वस्तु थीक, मूल में कारक किछु आर रहल जे कोनो सार्वजनिक स्थलपर रखला सऽ हमरा सभक नुकसान अछि, बस ई बुझू जे मैथिलक आपसी मेलमें व्यक्तिगत स्वार्थक भयानक मारि अछि आ दुष्परिणाम जे गूटबाजी नहि छूटि रहल अछि। लेकिन अपन थोर-बहुत अनुभव सँ कहयमें संकोच नहि भऽ रहल अछि जे 'महादेव सर्वोपरि छथि' आ कोनो हृदय सँ विचारल कार्य पूरा करबाक लेल आइ धरि ओ स्वयं ठाड्ह होइत रहलाह छथि, ठीक तहिना कवि एकान्त पूर्व-संध्यापर विचारल योजना तहत बस माँ काली के शरणापन्न होइत अनशन स्थलपर विदा भेलाह आ बाकी अपनहि महादेव त्रिशूल नचबैत सभ कार्य अपराह्न होइत-होइत डोरिया देलखिन। दुनियामें ढिंढोरा पीटनिहार भले किछु बाजि एहि आन्दोलनक मर्मके तुच्छता आ छूद्र नाम लेल झाइल बजबैथ, मुदा काजक रहल केवल बाबा बैद्यनाथक कृपा! :) बस शरणागत भक्त लेल ओ स्वयं सेहो साक्षात् माँ पार्वती (काली) केर कृपा संग ४ दिनक अनशन मानू ४० मिनटमें तय कय देलनि। एक सऽ एक विचार कयलनि, क्रान्तिक बिगूल बाजल, नवपथ सोझाँ आयल आ आब जल्दिये निरंतरताक क्रम बनत। मिथिलाक धरतीपर - भारतक राजधानीमें - दुनू जगह तऽ कम से कम मैथिल प्रण कय लेलाह जे अपन सुसुप्त शक्तिकेँ जगायब। उपरोक्त अनशन मानू जे जाम्बवन्तजी समान हरेक सुच्चा मैथिलमें हनुमानजीक शक्तिके आभान करौलक। आब जल्दिये नव-नव घोषणा सँ पुरान संस्थाक संग नवयुवा डेग बढबैत चलताह से हमरा विश्वास अछि।

मंगलवार, 24 जुलाई 2012

मिथिलाक जिला आ ओकर आबादी ।


Krishnanand Choudharyposted to मिथिलाक जिला आ ओकर आबादी ।




बिहार आ झारखण्डक निम्नोक्त जिला संभावित मिथिला राज्यक अंतर्गत अबैत अछि । जिला सभक संग ओकर जनसंख्या सेहो देल गेल अछि , जे जनगणना 2011क अंतरिम आँकड़ा पर आधारित अछि ।
* w. champaaran-3922780
* e.champaaran-5082868
* sitamadhi-3419622
* shivhar-656916
* madhubani-4476044
* muzaffarpur-4778610
* darbhanga-3921971
* vaishali-3495249
* samastipur-4254782
* supaul-2228397
* araria-2806200
* kishanganj-1690948
* madhepura-1994618
* saharsa-1897102
* purania-3273127
* khagaria-1657599
* katihaar-3068149
* begusarai-2954367
* munger-1359054
* bhagalpur-3032226
* lakhisharaai-1000717
* jamui-1756078
* baka-2029339
* godda-1311382
* saahebganj-1150038
* deoghar-1491879
* dumka-1321096
* paakur-899200
* jamtaara-790207

उपरोक्त जिला सभक जनसंख्या जोड़लाक उपरान्त मिथिलाक कुल
जनसंख्या 7,17,20,565 होइत अछि ।

शनिवार, 21 अप्रैल 2012

सहयोग लेल खाता - दहेज मुक्त मिथिला" के संस्थागत खाता के पूर्ण डिटेल


दहेज मुक्त मिथिला - एक संस्था के रूप लेलक अछि। सभ के जानकारी देबय लेल चाहब जे एहि बेर सौराठ सभा में जानकी नवमी मनेबाक विचार अछि ताहि के संग-संग अगिला सौराठ सभामें कोन तरहें सहभागी बनब ताहि विन्दुपर विभिन्न विषय पर विचार करबाक योजना अछि। एहि में के सभ आबि सकैत छी वा के सभ अपन सहयोग पठा सकैत छी से जानकारी देल जाउ।


सहयोग लेल खाता - दहेज मुक्त मिथिला" के संस्थागत खाता के पूर्ण डिटेल

खाताधारक केर नाम :- सौराठ सभा विकास समिति एवं दहेज मुक्त मिथिला

खाता नं.:- 31742944456

खाताधारक केर बैंकक नाम :- भारतीय स्टेट बैँक

खाताधारक केर बैंकक पता :- रहिका, मधुबनी, बिहार

आई एफ, एस .सी . कोड:-SBIN0005897

(used for RTGS and NEFT transactions)
(
नोट: कोष जमा केला के बाद डा. शेखर चन्द्र मिश्र जिनक फोन नंबर निचां देने छी, हुनका जानकारी अवश्य दी। आई एफ, एस .सी. कोड अई लेल की जे सहयोगकर्ता ऑनलाइन सहयोग राशी जमा करS चाही जमा S सकैत छी।)


कार्यक्रम के योजना:
. विचार गोष्ठी २८ अप्रील २०१२ - दिनके बजे सँ सभागाछी में।
. जानकी नवमी ३० अप्रील २०१२ - भिनसर बजे सँ सभागाछी में।
. विधान परिषद्सभापति तारा बाबु संग शिवनगरमें भेंटघाँट लेल प्रतिनिधि मंडल बजे उपरान्त।

धन्यवाद!

प्रवीण ना. चौधरी
दहेज मुक्त मिथिला
९१३५४६२२५१
००९७७-९८५२०२२९८१.

स्थानीय सम्पर्क:
. डा. शेखर चन्द्र मिश्र - ९२७९३४३०९०
. पं. शंभुनाथ झा - ८८०९८००६२३

दिल्ली: मदन ठाकुर - ९३१२४६०१५०