dahej mukt mithila

(एकमात्र संकल्‍प ध्‍यान मे-मिथिला राज्‍य हो संविधान मे) अप्पन गाम घरक ढंग ,अप्पन रहन - सहन के संग,अप्पन गाम-अप्पन बात में अपनेक सब के स्वागत अछि!अपन गाम -अपन घरअप्पन ज्ञान आ अप्पन संस्कारक सँग किछु कहबाक एकटा छोटछिन प्रयास अछि! हरेक मिथिला वाशी ईहा कहैत अछि... छी मैथिल मिथिला करे शंतान, जत्य रही ओ छी मिथिले धाम, याद रखु बस अप्पन गाम - अप्पन बात ,अप्पन मान " जय मैथिल जय मिथिला धाम" "स्वर्ग सं सुन्दर अपन गाम" E-mail: apangaamghar@gmail.com,madankumarthakur@gmail.com mo-9312460150

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बुधवार, 29 अप्रैल 2015

सीता-नवमी

सीता-नवमी











एक समय के बात थिक
त्रेता युग में राजा छलथि शिरध्वज
समस्त मिथिला में परल छल अकाल

चारु दिशा मचल छल हाहाकार
प्रजा सभ छल हकासल उदास
यज्ञ, जाप, पूजा, होमादि होमय लागल
तखन राजगुरु शतानन्दजी देलनि आदेश 
गुरुक आज्ञानुसार शिरध्वज उठि
लेलन्हि कान्हपर हर विदा भेलाह खेत
बरद जोति हरमें बन्हलनि आँतर 
लागनि पकरिते शिराउर में अभरल
हरक नाश में मटकुरी लागल छल
तखने माय वसुन्धराक कोखिसँ
उत्पन्न भेलथि पद्महस्त लेने सीता
खिलखिलाइत हँसैत मटकुर सँ बहरेली
वैशाख शुक्ल पक्षक नवमी संगहि
शुभ मंगल दिन छलैक
उत्तर फाल्गुनी नक्षत्रक योग
समूचा नगर भरि मचि गेल शोर
खुशी सँ नगरवासी झूमय लागल
हुनकहि कंठ सँ निकसलि मैथिली
सुन्दर मिठगर मैथिली भाषा बोली
वैह छथि वैदेही, जानकी, मैथिली, सीता
हुनकहि छन्हि आई जन्मदिवस
आउ समस्त मिथिलावासी मनावी
हर्षोल्लासक संग धियाक सीता नवमी ॥

मंगल शुभकामनाक संग-

 
अमरनाथ मिश्र' भटसिमरि
जय मिथिला जयति मैथिली

सोमवार, 20 अप्रैल 2015

चारि-पांति ,अमरनाथ मिश्र' भटसिमरि


चारि-पांति

चैत मास नवमी रामजी जनम लेल
बधैया बाजल अवध नगरीया
वैशाखक नवमी सीता के जनम भेल
धन्य भेलइ मिथिला नगरीया ॥


चारि-पांति

मि सँ मिठगर मैथिली भाषा

थि सँ थिकाह मैथिल मोर
ल सँ लागथि प्रियगर मानव
मिथिला में मौध चुवय ठोर


चारि-पांति

माँगल वरदान रघुवर सँ जानकी

वैकुंठ पावथि मैथिल मृत्युपरांत
राखल मान विहुँसि रघुकुल नायक
तुलसीचौड़ा तेजथि अपन प्राण ॥


चारि-पांति

चिक्कन चकेट्ठा धिम्मर पिच्छर

कोढ़िया मचाने बैसल रहैयै
गोल-गोल गुलछर्रा गलथोथर
गजधिम्मर खिल्ली बस चिबबैयै


चारि-पांति

बात के छाँटथि पौलीस मारथि

खाली टिपगर टिपथि बात
नीक निकुत सभ हिनके चाही
बस बबुआनी छन्हि काज


चारि-पांति


वैदेही सन धीया एहि जगमें
परतर करत के आन
राखल मर्यादा नैहर-सासुर
पुरुषोत्तम बनलाह राम ॥


चारि-पांति


गृहस्थी छोड़ि ठाम गमाओल
जुलूम केलनि बड्ड भारी
शहर पहुँचि पहिचान गमाओल
एहिसँ गामक नीक गोरथारी


चारि-पांति

अजब खेल संग गजब तमाशा

नगर गाम घर पसरल
कर्ज खेबाक लेल इसरी-मिसरी
सप्पत खाई लै रामेश्वर ॥



जयति मैथिली-
अमरनाथ मिश्र' भटसिमरि

  जूरि-शीतल

चइत मास विक्रम संवत एलइ
पर्यावरण सेहो स्नेह सिक्त भेलइ
आई मैथिलीक नववर्ष मनेलइ
जूरि-शीतल में सभ जुरेलइ ।

चास वास देव पितर जुरेलइ
बउवा बुच्ची संग माय जुरेलइ
बाबा मैयाँ बाबू कक्का जुरेलइ
गाछ बिरीछ आ बाट जुरेलइ ।

काँच बाँसक फुचुक्का बनलइ
थाल कोदो सँ हुरदुंग केलकइ
हुर्रा-हुर्री के कुसधुम मचलइ
आँगन तुलसी चौड़ा डाबा टंगलइ ।

टटका आओर बसिया पाबैन भेलइ
बड़ी भात दही दैलपुरी सब खेलकइ
सतुवाइन फेर सँ लवान करेलकइ
बगरा कौवा मेना खन्जनि खेलकइ ।

मिथिला मैथिली केर मान जुरेलइ
बाबाक दलान खरिहान जुरेलइ
मैथिल सभक अरमान जुरेलइ
नगर गाम घर सभठाम जुरेलइ ॥

जयति मैथिली-
अमरनाथ मिश्र' भटसिमरि