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(एकमात्र संकल्‍प ध्‍यान मे-मिथिला राज्‍य हो संविधान मे) अप्पन गाम घरक ढंग ,अप्पन रहन - सहन के संग,अप्पन गाम-अप्पन बात में अपनेक सब के स्वागत अछि!अपन गाम -अपन घरअप्पन ज्ञान आ अप्पन संस्कारक सँग किछु कहबाक एकटा छोटछिन प्रयास अछि! हरेक मिथिला वाशी ईहा कहैत अछि... छी मैथिल मिथिला करे शंतान, जत्य रही ओ छी मिथिले धाम, याद रखु बस अप्पन गाम - अप्पन बात ,अप्पन मान " जय मैथिल जय मिथिला धाम" "स्वर्ग सं सुन्दर अपन गाम" E-mail: apangaamghar@gmail.com,madankumarthakur@gmail.com mo-9312460150

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मंगलवार, 19 जनवरी 2016

अन्तरराष्ट्रिय मैथिली परिषद तथा मिथिला राज्य संघर्ष समिति- मंत्री जी से राखला मांग


अन्तरराष्ट्रिय मैथिली परिषद तथा मिथिला राज्य संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष शैलेन्द्र मिश्रा केर नेतृत्वमे एकटा प्रतिनिधिमण्डल  के केन्द्रिय संस्कृति आ  पर्यटन तथा नागरिक उड्डयन मंत्री माननीय डा महेश शर्मा जी सँ भेंट क नोएडा मे एकटा भव्य मिथिला भवन केर निर्माण हेतु  आ  एकटा मुख्य मार्ग , महाकवि विद्यापति मार्ग के नाम  करबाक माङ तथा दरभंगा एयरपोर्ट के राष्ट्रीय मान्यता सङ नियमित हवाइ सेवा शुरु करबाक घोषणा करबाक माङ केलनि। 
      पूरा ज्ञापन पढलाक बाद माननीय मंत्रीजी आश्वासन देलनि जे उपरोक्त सभ माङपर हमर मंत्रालय अतिशीघ्र कारवाइ करत। मंत्रीजी कहलनि जे नोएडामे अतिशीघ्र एकटा भव्य मिथिला भवन केर निर्माण काज शुरु कएल जायत जे कि बहुद्देशीय भवन होयत। प्रतिनिधिमण्डलमे शैलेन्द्र मिश्रा, संग डा सतीशचन्द्र झा, चन्दन कुमार झा, धीरेन्द्र त्रिपाठी, कमलेश चौधरी आ सौरभ कुमार चौधरी आ अनेको ब्यक्ति उपस्थति  छला।  जय मिथिला जय मैथिली।


शैलेन्द्र मिश्रा- 
Shailendra Mishra

नॉएडा 

शनिवार, 11 अक्टूबर 2014

मिथिलाक समाद मैथिलि में

मिथिलाक  समाद मैथिलि में
                                                                        
Pravin Narayan Choudhary 

शुक्रवार, 10 अक्टूबर 2014

मिथिलाक समस्या


मिथिलाक समस्या

 
  निश्चित रुप सँ आई मिथिला कमजॊर अछि! कॊनॊ जाति जखन अंधकार , गरिबी आ गंदगी मॆ रहत! ऒकर जनता असंगठित छैक! एहि बातक अनुभव प्राप्त करबाक पद्धति मंद छैक ,मुदा ऒ कार्य दिश अवश्य बढी रहल अछि!

डा. लक्ष्मण झा - 
     मिथिला एक गॊट राज्य बनै इ मांग भारतक आजाद भॆला कॆ साथॆ शुरु भॆलै! मुदा अहि दिशा मॆ अखन धरि कॊनॊ ठॊस परिणाम नहि आयल अछि! 26 जूलाई 1953 क दरभंगा कॆ टाँउन हाँल मॆ मिथिला प्रांतिय सम्मॆलन आयॊजिद भॆल,ताहि मॆ सर्वसम्मति सँ मिथिला प्रांतक निर्माणक पक्ष मॆ प्रस्ताव स्वीक्रत भॆल छलैक!

मिथिला समस्त भारतवर्ष मॆ सब सँ प्राचीन संप्रभूता संपन्न राज्य रहल अछि! प्रान्त ऒ प्रदॆशक कॊन कथा,एतय कम सँ कम पांच हजार वर्ष सँ राजतंत्र,गणतंत्र आ वाद मॆ साम्राज्यक अन्तर्गत शासन रहल अछि!समस्त दुनिया मॆ मिथिलाक  गणतंत्रात्मक शासन प्रणाली सभ सँ अधिक प्रचीन अछि!

    मैथिली साहित्यक इतिहास कम सँ कम एक हजार वर्षक छैक! एतॆक गौरवशाली प्राचीन संस्क्रति एवं परंपराक प्राप्तकॆ निहार क्षॆत्र कतौ अंधकार मॆ पड़ल रहय! दॆशक आजुक राजनीतिक नॆता लॊकनिक उपॆक्षा सँ एहि क्षॆत्रक ई स्थिति भ गॆल अछि!  तथ्य त ई इंगित करैया जॆ राज्यक मांग लॊकतांत्रिक आ संवैधानिक छै! उत्तर मॆ हिमालय सँ दक्षिण मॆ गंगा तक सॊलह यॊजन चौसठी कॊस चाकर आ पूव मॆ महानंदा सँ पच्क्षिम मॆ गंडकी नारायणी तक 24 यॊजन‍ छियानवॆ कॊस(6150 वर्ग कॊस अथवा 25000 वर्ग मील विस्त्रित दू कॊटी जनसंख्या छॊट कॊना भॆल? विश्‍व संध मॆ 63 गॊट राष्ट्र जनसंख्या मॆ आ 18 गॊट विस्तार मॆ मिथिला सँ छॊट अछि !

     किन्तु ऎतॆ सब कॆ बादॊ राज्य निर्माण आंदॊलन पूरा जॊर नहि पकरलक! किएक त जनता कॆ बीच ई अंधविश्‍वाश पसैर गॆल छई कि मिथिला राज्य निर्माण भॆला सँ ब्राह्म्ण जाति कॆ फायदा हॆतै! मुदा वास्त‌विक‌ता त‌ ई छै मिथिला मॆ ब्राह्म‌ण‌ कॆ  ज‌न‌संख्या अन्य‌ जाति कॆ तुल‌ना मॆ न‌ग्‍ण‌ छै! कॊनॊ राज‌नितिक‌ इकाइक‌ निर्माण‌ सं ऒहिठाम‌ ब‌स‌निहार स‌ब‌ कॆ फाय‌दा हॆतै! ज‌न‌तांत्रिक‌ प‌द्ध‌ति मॆ ज‌क‌र‌ ज‌न‌संख्या अधिक‌ हॆतै सॆह‌ शास‌न‌ च‌ला स‌कैत‌ अछि! तॆं एहि संबंध‌ मॆ ब्राह्म‌ण‌ आ अब्राह्म‌ण‌ स‌वाल‌ उठौनिहा या त‌ स्वंय‌ मूर्ख‌ छिया या दॊस‌र‌ कॆ ब‌नाब‌ईत‌ छिया!

       एत‌बा न‌हि 22 दिस‌म्ब‌र‌ 1953 इ. क‌ तात्कालिक‌ प्रधान‌मंत्री ज‌वाह‌र‌ लाल‌ नॆह‌रु राज्य‌ पुन‌र्ग‌ठ‌न‌ आयॊग‌ कॆ ग‌ठ‌न‌ कॆलैन‌ अहि आयॊग‌ कॆ अध्य‌क्ष‌ भॆला सैय‌द‌ फ‌ज‌ल‌ अली आऒर‌ एम‌.प‌निक्क‌र‌ आ ह्रद‌य‌ नाथ‌ कुंज‌रु आऒर स‌द‌स्य‌ नियुक्त‌ क‌य‌ल‌ गॆलाह‌! आयॊग‌ कॆ मिथिला दिश‌ सँ सॆहॊ प्रस्ताव‌ आ संभार‌ प‌त्र दॆल‌ गॆल‌ मुदा आयॊग‌ कॆ निस्प‌क्ष‌ता आ यॊग्‍य‌ता प‌र क‌क‌रॊ विश्‍वास‌ न‌हि छ‌लै!

      जान‌कार‌ लॊक‌क‌ क‌ह‌बाक‌ त‌ एत‌ ध‌रि छैन‌ जॆ मिथिला राज्य‌क‌ निर्माण‌ मॆ स‌ब‌ सँ पैघ‌ बाधा ई छ‌लै जॆ ऒहि स‌म‌य‌ कांग्रॆस‌ जॆ कि दॆश‌ कॆ माय‌ बाप‌ छ‌ल‌ तै मॆ क्यॊ राष्ट्रिय‌ स्त‌र‌ कॆ मैथिल‌ नॆता न‌हि छ‌ल‌! मुदा राज‌नीतिक‌ कार‌ण‌ सँ अल‌ग‌ स‌माज‌ मॆ किछु सामाजिक‌ कार‌ण सॆहॊ वाधा ब‌न‌ल‌!
आजुक‌ स‌म‌य‌ मिथिलाक्ष‌र‌ अप‌न ज‌न्म‌भुमि सँ लुप्त‌ भ‌ गॆल‌ अछि! म‌धुब‌नी द‌र‌भंगा जॆ कि मिथिला कॆ ह्रद‌य‌स्थ‌ल‌ अछि ऒत‌य‌ लॊग‌ स‌ब‌ मैथिली ब‌ज‌नाय‌ हिन‌ता बुझ‌य‌ छाईथ‌!
      आब‌ ज‌रुर‌त‌ अछि एहि बात‌क‌ जॆ स‌ब‌ गॊटॆ मिल‌ क‌ स‌र‌कार‌क‌ स‌म‌क्ष‌ मिथिला राज्य‌क‌ मा‍ग‌ क‌रि! आ अप‌न‌ अस्तित्व‌ कॆ बचावी!
Mithila Today
www.mithilatoday.com

शनिवार, 19 जुलाई 2014

मिथिला राज्य किऐक?

मिथिला राज्य किऐक?

   
 भारत स्वतंत्र भेलाक बाद संघीय गणतांत्रिक राष्ट्र बनल, केन्द्र तथा राज्य सरकार द्वारा संविधान केर शासन सँ देश संचालित हेबाक निर्णय भेलैक। मिथिला भारतक अभिन्न हिस्सा आदिकालीन इतिहास, पूर्ण संस्कृति, संपन्न आ विकसित भाषा, लोकसंस्कृति, विशिष्ट पहिचान सहित केर क्षेत्र रहल अछि। इतिहास मे 'मिथिलादेश, बज्जिप्रदेश, तिरहुत, विदेहराज्य, आदि' नाम सँ सुविख्यात मिथिला केँ राज्य (प्रान्त) रूप मे मान्यता पेबाक माँग लगभग १९०५ ई. सँ कैल जाइत रहल अछि। अन्ततोगत्वा १९१२ ई. बिहार नाम सँ एक प्रान्त विभिन्न संस्कृति केँ एकत्रित रूप मे ब्रिटीश भारत मे बनल जाहि मे मिथिला क्षेत्र केँ सेहो गाँथि देल गेल।

एक तरफ बर्बर अंग्रेजी हुकुमत सँ परतंत्र भारत स्वाधीनताक संग्राम लडि रहल छल तऽ दोसर दिशि भारतीय दर्शन, मूल्य, मान्यता आ पहिचानक विशिष्टताकेँ नष्ट करबाक लेल भिन्न‍-भिन्न तरहक शासनादेश पारित होइत छल। एहि बीच मिथिलाक आदिकालीन इतिहास पर मध्यकालीन भारतक मगध सम्राज्य केर वर्चस्व केँ थोपैत बंग प्रान्त सँ इतर बिहार प्रान्त जाहि मे मिथिला, मगध, कोसल (उडीसा), झारखंड, भोजपुर केँ इकट्ठा राखल गेल। राजनैतिक रूप सँ चेतनशील जनमानस बिहार सँ अलग उडीसा आर झारखंड पाबि चुकल अछि, मुदा निरंतर संघर्षरत मिथिला विद्वान् समाज द्वारा उठायल गेल पृथक मिथिला राज्य केर माँग आइ धरि अधर मे लटकल अछि।

बिहार निर्माणक सौ वर्ष पूरा भऽ चुकल अछि। मिथिला लिपि विलुप्त, मैथिली भाषा मृत्युक कगार पर, मिथिला क्षेत्रीय पौराणिक धरोहर मटियामेट, लोकसंस्कृति पर पलायनक खतरनाक जहरीला दंश सँ लहुलुहान मिथिलावासी अपनहि सँ अपन पहिचान बदलबाक घृणित अवस्था मे प्रवेश पाबि चुकल अछि। जाहि मैथिली भाषाक ओज विश्व केर अन्य भाषा केँ सेहो समुचित मार्गदर्शन केलक, आइ वैह मैथिली विपन्न सृजनशीलता सँ रुग्ण अछि। बहुत देरी सँ भारतीय संविधान द्वारा एहि भाषा केँ सम्मान देल गेल, मुदा एहि नाममात्र सम्मान सँ क्रियात्मक योगदान हाल धरि नगण्य राखि केवल मिथिलाक पहिचान केँ नष्ट करबाक खतरनाक षड्यन्त्र बुझाइत अछि, हर तरहें मानू 'बिहारी उपनिवेशवाद' केँ जबरदस्ती मिथिला पर लादल गेल हो। समय-समय पर राजनीतिक विचार-विमर्शमे मिथिला राज्य केर निर्माण सन्दर्भ उपरोक्त चिन्ता केँ मनन कैल गेल अछि, मुदा हर बेर मिथिलाक विरुद्ध निर्णय सँ अवस्था जस केँ तस बनल अछि, बरु दिन-ब-दिन आरो बेसी चिन्तनीय बनल जा रहल अछि।

१९४७ ई. मे भारतक स्वतंत्रता प्राप्ति भेला पर स्वशासन मे प्रवेश राष्ट्र केर नीति-निर्माता राज्य गठन हेतु विचार-विमर्श शुरु केलनि। भाषा तथा भौगोलिक पहिचान केर आधार पर राज्य बनेबाक निर्णय बहुत पहिनहि सँ रहल, एहि आधार मे आरो नव नीति जेना राज्यक निर्माण जँ लोकहित मे होइ, राष्ट्रक अखण्डता पर असर नहि पडैक, जनभावना अनुरूप नव राज्य बनय; मोटामोटी एहि नीति संग नया राज्य केर निर्माणक निर्णय कैल गेल छल। भारतक विभिन्न भाग मे राज्य बनेबाक लेल आन्दोलन सबहक परिणाम जे सरकार द्वारा राज्य पुनर्गठन आयोग केर गठन कैल गेल। नव अधिनियम पास कैल गेल। किछु नव राज्य सेहो बनायल गेल। मुदा मिथिलाक माँग केँ 'जनभावना अनुरूप' नहि कहि १९५६ मे नकारल गेल। नकारबाक लेल एक महत्त्वपूर्ण कारण इहो छल जे 'मैथिली भाषा' केँ भारतीय भाषाक मान्यता प्राप्त सूची मे ताहि दिन स्थान नहि छल, माँग मात्र उच्च शिक्षित वर्ग द्वारा उठाओल गेल छल, नहि कि आम जनमानसक एहेन कोनो इच्छा अछि, बिहार मे रहितो एहि क्षेत्रक विशेष ध्यान राखल जा सकैत छैक, आदि आधार पर मिथिला राज्य अस्वीकारल गेल छल।

परिणाम सोझाँ अछि जे मिथिलावासी मैथिलीभाषी मैथिल आइ बिहारी बनि अपनहि भूमि सँ पलायन करय लेल मजबूर छथि आर मिथिलाक समस्त लोकसंस्कृति विलोपान्मुख बनि गेल अछि। लोकपलायनक विस्फोट एहि क्षेत्र लेल अभिशाप प्रमाणित भऽ चुकल अछि। एहि जहरक प्रभाव लगभग मिथिलाक मृत्यु तय कय देने अछि।

जँ मिथिला राज्य केर गठन नहि होयत तऽ एकरा बचेनाय असंभव अछि, कारण बिहार मे आर्थिक उपेक्षा सँ लैत आधारभूत संरचनाक विकास सेहो पूर्णरूपेण ठप्प पडि गेल अछि, बिहारक समस्त बजट विनियोजन मात्र पटना आ दक्षिणी बिहारक क्षेत्र मे केन्द्रित अछि। मिथिला क्षेत्र मे जेहो मिल, उद्योग, व्यवसाय आर आर्थिक आधार सब छल तेकरा क्रमश: क्षय कैल जा चुकल अछि, जे जातीय सौहार्द्रता सँ सामाजिक विकास केर स्वस्फूर्त संरचना सब छल ओ सब बिहारी जातिवादी राजनीति केर भुमरी मे चौपट भऽ चुकल अछि। आइ मिथिला लोकविहीन आ आपसी ईर्ष्या-द्वेष सँ भरल समाज संग अपन भविष्य लेल कुहैर-कुहैर कानि रहल अछि।

मिथिला राज्य एकमात्र समाधान, कारण स्वशासनक अधिकार भारतीय गणतंत्र केर संविधान द्वारा न्यायसंगत मानल गेल छैक। मिथिला क्षेत्रक भरपूर विकास लेल मिथिलाक अपन सरकार, अपन कोष, अपन योजना आ मिथिलाक अपनहि लोकनेता बनैत कल्याण कय सकैत अछि। आउ, सिलसिलेवार नजरि दी किछु महत्त्वपूर्ण विन्दु पर:

१. राज्य पुनर्गठन आयग जे भारत सरकार द्वारा गठित छलए करीब ६० साल पूर्व अपन रिपोर्ट मे कहलकैक जे मैथिली भाषा संविधानक अष्टम् अनुसूची मे दर्ज नहि अछि ताहि हेतु मिथिला राज्यक निर्माण संभव नहि अछि।

२. २२ दिसम्बर, २००३ केँ मैथिली संविधानक अष्टम् अनुसूची मे स्थान प्राप्त कएलक, तकर बाद मिथिला राज्य केर निर्माणक मार्ग संवैधानिक रूप मे प्रशस्त भऽ चुकल अछि।

३. मैथिली भाषा-भाषी जनसंख्या जकर संख्या भाषाई आधार पर बनल राज्य यथा कश्मीरी, मणिपुरी, पंजाबी, आसामी, मलयाली, कन्नड सँ बहुत बेसी अछि।

४. हमरा सबसँ बेसी भाषा बजनिहार केवल हिन्दी, उर्दू, तेलगु, मराठी, तमिल तथा बंगला भाषाभाषी अछि। एहि हिसाब सऽ संपूर्ण देश मे सातम बहुसंख्यक भाषाभाषी समूह हम सब छी। भारतीय संविधान केर अन्तर्गत प्रदत्त अधिकारक तहत त्वरित कार्रबाई कय हमरा सब अलग राज्य केर अधिकारी छी, परन्तु हमरा सबकेँ एहि अधिकार सँ वंचित राखल गेल अछि।

५. मिथिला राज्य केर पक्ष मे एकटा और महत्त्वपूर्ण विन्दु मैथिली भाषाकेँ विशिष्ट वर्णमाला अछि जे तिलकेश्वरस्थान महादेव मन्दिर २०३ AD मे वर्णित अछि। ई देश केर कुनु भाषा सँ पुरान भाषा अछि, परन्तु हिन्दी (देवनागरी) आ बंगला मिथिलाक्षर सँ बादक वर्णमाला अछि।

६. आधुनिक प्रजातांत्रिक देश केर पहिल शर्त कल्याणकारी राज्यक रूप छैक, तकर आधार प्राथमिक शिक्षा जे मातृभाषा मे हेबाक चाही। आधुनिक भारतक ओ राज्य जकर प्राथमिक शिक्षा अपन मातृभाषाक माध्यम मे छैक से सब रूपे विकसित राज्यक श्रेणीमे आबि गेल अछि। परन्तु मिथिलाक अन्दर जतय प्राथमिक शिक्षाक माध्यम हिन्दी अछि ओतय स्कूलक ड्राप-आउट देशे नहि अपितु संसार मे सबसँ बेसी अछि। ओहि ड्राप-आउट (बीच मे पढाई छोडनिहार) केँ रोकबा लेल राज्य सरकार आ केन्द्र सरकार आर्थिक प्रोत्साहन दऽ रहल छैक। लेकिन कोनो सरकार लग एकर स्थायी इलाज जे प्राथमिक शिक्षा अपन मातृभाषा मे हेबाक चाही तकर योजना नहि अछि। एकर उदाहरण बिहार सरकार द्वारा एक लाख शिक्षक केर नियुक्तिक सन्दर्भ विधान परिषद् मे शिक्षा मंत्री द्वारा निर्लज्जतापूर्वक देल स्वीकारोक्ति अछि जे मैथिली शिक्षक केर नियुक्तिक प्रावधान सरकार लग नहि अछि।

७. किछु भ्रान्ति जे भाषाई आधारपर मिथिला राज्यक गठन सँ जे हिन्दीभाषी छथि से कमजोर हेतैक, से सम्पूर्ण रूपेण भ्रामित करयवला सोच अछि। किऐक तऽ देशक आबादीक एकटा पैघ हिस्सा अगर निरक्षर आ अविकसित रहत तऽ वैश्विक शक्ति बनेक भारतक अवधारणा हास्यास्पद भऽ जायत। ठीक एकर उनटा मिथिला राज्यक गठन सँ ओकर प्राथमिक शिक्षा केर माध्यम मातृभाषा बनत, जाहि सँ मिथिलाक विकासक संग देशक विकास हेतैक।

८. आजादी केर लगभग ७० वर्ष भऽ गेल मुदा मिथिला मे एकोटा बडका औद्योगिक युनिट नहि लागल, उनटे ब्रिटिश कालक सम्पूर्ण उद्योग-धंधा बन्द कय देल गेल जकर दुष्प्रभाव ई भेल जे मिथिला सस्ता आ अकुशल श्रमिक आपूर्तिक क्षेत्र मे परिणति पाबि गेल। एहि तरहें एतुका जोन-बोनिहारकेँ देशक विभिन्न भागमे प्रवासक दौरान सब तरहक अपमान, गारि आ गंभीर शोषण केर सामना करय पडैत छैक।

९. कृषि क्षेत्र केँ एकटा व्यापक षड्यंत्रक तहत बर्बाद कएल गेल। मिथिलाक कृषिक सन्दर्भ मे राज्य सरकार आ केन्द्र सरकार केर योजना बनौनिहार एतुका प्राकृतिक-भौगोलिक अवस्था केँ नजरअन्दाज कएलन्हि। सडक तथा रेल मार्गक निर्माण एवं बाढि नियंत्रण केर नाम पर मिथिलाक मूल पूँजी जलस्रोत जे विभिन्न हिमाली नदी सँ प्राप्त होएत रहल तेकर सबहक प्राकृतिक बहाव केँ तोडि-मोडि स्वस्फूर्त जल-सिंचन, जल-भंडारण आदि केँ ध्वस्त कय देल गेल।

१०. जलस्रोतक समुचित दोहन नहि कय अदूरदर्शी योजना सँ जनहित केँ बड पैघ अप्रत्यक्ष नोकसानी देल गेल। आइ मिथिला मे भूमिगत जलस्तर तक घटि गेल अछि, मिथिला सँ मत्स्य-कृषि गायब भऽ चुकल अछि, पनबिजली, सिंचाई, सेहो सुव्यवस्थापित नहि अछि। एहि सँ जनजीवन दूरगामी प्रभाव सँ प्रभावित भेल अछि। यदाकदा प्रकृति विरुद्ध कार्य भेलाक दुष्परिणाम बाँध टूटनाय सँ जल-प्रलय केर रूप मे महाविनाशकारी बाढि तथा बाढिजनित विभिन्न प्रकोप सँ जनसमुदाय क्षति केँ भोगैत छथि।

११. १९म शताब्दी धरि मिथिला चाउरक सबसँ पैघ उत्पादक आ निर्यातक केन्द्र छल। मात्र मयानमार (वर्मा) मिथिला सँ बेसी धान उपजबैवला देश छल। तकरा एकटा सुनियोजित षड्यंत्रक तहत बर्बाद कएल गेल।

१२. आइ एतेक वृहद जनसंख्याक पालन-पोषणक आधार नहिये कृषि अछि आ नहिये उद्योग अछि। एतेक पैघ जनसंख्या पलायन लेल मजबूर अछि। अकुशल श्रमिक द्वारा भेजल गेल पैसा पर जीवन-यापन करैक लेल मजबूर अछि।

१३. एकर एकमात्र कारण राजनेता तथा अफसरशाहीक औपनिवेशिक सोच आ क्रियाकलाप अछि जकर एकटा उदाहरण मिथिलाक बैंकिंग प्रणाली अछि। क्रेडिट डिपोजिट रेशियो मे मिथिलांचलक बैंक मे जमा कएल पैसा मिथिलाक विकास मे नहि लागि कऽ मुम्बई आ दिल्लीक स्टाक एक्सचेन्ज मे जाइत अछि। एकर अर्थ अविकसित गरीब मिथिलाक लोकक पाइ विकसित राज्यक आगाँक विकास लेल खर्च कएल जाइत अछि। ई एहन निर्धन क्षेत्रक निवासीक घोर शोषणक उदाहरण अछि।

१४. मिथिलाँचलक अवाम एखन तक कोनो उग्रवाद, अतिवाद आ माओवाद सँ प्रभावित नहि भेल अछि। कि भारत सरकार एहि शांतिवादी-सहिष्णुवादी समुदायकेँ निरन्तर आर्थक शोषण सँ उग्र आन्दोलनक रास्ता पर जेबाक लेल मजबूर कय रहल अछि?

१५. सुगौली संधि (१८१६) मे मिथिलाँचलक हृदयकेँ दू फाड कऽ देलक, हलाँकि हालहि नेपाल गणतंत्र मे परिणति पाबि नव संविधान बनेबाक प्रक्रिया अन्तर्गत संघीयताक स्थापना लेल प्रयासरत अछि आ ओतहु मिथिला राज्य केर स्थापनाक माँग वर्तमान संविधान सभा द्वारा विचाराधीन अछि।

१६. पछिला संसदक विभिन्न सेशन मे ०६.१२.२०१० सँ १३.१२.२०१० तक १९२ घंटाक धरना कार्यक्रम संपन्न भेल अछि आ हाल धरि हरेक सेशनक प्रथम दिन रूटीन धरना द्वारा मिथिला राज्य केर माँग निरन्तरता मे राखल जा रहल अछि।

१७. पन्द्रहम लोकसभा अन्तर्गत दरभंगा सँ सांसद कीर्ति झा आजाद द्वारा मिथिला राज्यक माँग लेल प्राइवेट मेम्बर बिल "बिहार झारखंड रिआर्गेनाइजेशन बिल" सेहो संसदक पटल पर राखल जा चुकल अछि।

१८. सोलहम लोकसभा जे देश भरि द्वारा सांस्कृतिक राष्ट्रवाद केर विशाल समर्थन प्राप्त केलक अछि ताहि मे ५ लोकसभा सदस्य द्वारा मैथिली भाषा मे शपथ-ग्रहण करैत मिथिला राज्यक माँग केँ अग्रसर कैल गेल अछि आ दर्जनों सांसद एहि लेल अपन समर्थन स्वीकारोक्ति देने छथि।

सूचनार्थ:अखिल भारतीय मिथिला राज्य संघर्ष समिति विभिन्न मैथिली भाषा-भाषीक संगठनक समुच्चय अछि। ई तमाम राजनैतिक दल तथा समाजिक संगठन कय मिथिला राज्यक एजेन्डा पर कार्य करैक लेल आग्रह करैत अछि।

Pravin Narayan Choudhary


बुधवार, 18 जून 2014

दिल्ली मे मैथिली पठन-पाठन केँ मान्यता

दिल्ली मे मैथिली पठन-पाठन केँ मान्यता
     शिक्षारूपी तपस्याक फल 'अनुशासन' होइत छैक। अनुशासनक सर्वोत्तम आ प्राकृतिक शिक्षा मातृभाषा मे सर्वोत्कृष्ट होइत छैक। भारतीय राष्ट्रीय शैक्षणिक तथा अनुसंधान परिषद् द्वारा जाहि शिक्षा पद्धति सँ विद्यालय मे पठन-पाठन कैल जाइछ ताहि मे सर्वप्रथम 'भाषा' ज्ञान अबैत छैक, क्रमश: गणित, विज्ञान, समाजिक शिक्षा, कला (ललितकला, संगीत, गायन, नृत्य, आदि) शिक्षा, स्वास्थ्य आ शारीरिक शिक्षा प्रारंभिक अवस्था केर विषय-वस्तु होइत छैक।
दिल्ली विद्यापति सेवा संघ केर प्रयास दिल्ली शिक्षा बोर्ड, दिल्ली विधानसभा, भारतीय राष्ट्रीय शैक्षणिक तथा अनुसंधान परिषद् सहित सम्बन्धित जनसमुदाय तथा जनप्रतिनिधि सबहक संग 'भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त नागरिक न्याय' पेबाक लेल आइ दिल्ली क्षेत्र मे रहि रहल लाखों मैथिल (मैथिलीभाषी) लेल विद्यालय मे मैथिली विषय पढेबाक माँग पूरा करौलनि। कोनो माँग केँ पूरा करबाक लेल बहुत रास आधार सेहो पूरा करय पडैत छैक। जेना, मैथिली मे पढाई केकरा लेल.... कतय... कतेक संख्या... संवैधानिक आधार कि.... भाषा-विज्ञान तथा शिक्षण-प्रशिक्षण विषय सामग्री बनेनिहार विज्ञ टोलीक निर्णय कि.... विभिन्न समय मे विधायिका केर एहि दिशा मे कि कहब भेल, कि कहियो न्यायपालिका द्वारा कोनो रूलिंग देल गेल, इत्यादि। हम जानबाक प्रयास केलहुँ जे उपरोक्त संस्थान अखिल भारतीय मिथिला राज्य संयुक्त संघर्ष समिति केर सुनिश्चित अगुवाई, मार्गदर्शन आ सहयोग सँ कोना-कोना एतेक पैघ माँग केँ पूरा करौलनि, एहि संवादक संग किछु रास फोटो-कपी दऽ रहल छी जाहि सँ पाठककेँ सेहो हमरहि दृष्टि सँ समस्त आधार आ विज्ञ जानकारी ग्रहण करबाक पूरा अवसर भेटय।
संछिप्त मे, भारतीय गणराज्य जतय संविधान केर शासन अछि, ओ एहि लेल सर्वथा न्याय दैत अछि अनुच्छेद ३५०ए मे, सबकेँ मातृभाषा मे शिक्षा पेबाक अधिकार अछि। यैह आधार पर बिहार जतय मूल मिथिला अछि ताहि मे मैथिली माध्यम सँ मैथिलीभाषीकेँ पठन-पाठन लेल इन्तजाम करबाक कानूनी संघर्ष डा. जयकान्त मिश्र द्वारा उच्च आ सर्वोच्च न्यायालय सब ठाम जीतल गेल, तथापि बिहार सरकार आइ धरि कोनो खास व्यवस्थापन नहि मिला सकल अछि, बस कय रहल छी आ करबाक अछि कहैत मात्र अन्ठबैत जा रहल अछि। तहिना भिन्न-भिन्न समय मे भाषा-विज्ञान तथा विषय-वस्तु निर्माण समिति द्वारा सेहो मातृभाषा केर शिक्षा माध्यम सर्वोत्तम रहल कहल गेल अछि। भारतक अन्य-अन्य राज्य मे सेहो जे कियो मातृभाषी अपन मातृभाषाक माध्यम सँ अपन धिया-पुता केँ शिक्षा लेल विद्यालय केर व्यवस्था करौने छथि वा विद्यार्थीक संख्या अनुरूप शिक्षक केर इन्तजाम करौने छथि। एहि मामिला मे मैथिल भारतीय संविधानक मान्यता प्राप्त भाषा रहितो अपन स्वयंकेर पछता बुद्धि केर कारण पछुआयल छथि। हालहि २००३ मे संविधानक आठम अनुसूची मे एकरा सम्मानित केलाक बाद चारूकात सुरफुरी जरुर छैक मुदा जे गुदगुदी हेबाक चाही से जेना अधमरू बनि गेल छैक।
मैथिली मे पठन-पाठन हेतु पाठ्य-सामग्रीक विकास दोसर चुनौतीपूर्ण कार्य छैक। जँ हिन्दी पुस्तक केँ अनुवाद करैत मैथिली पढेबैक तऽ भाषाक ज्ञान हेतैक, मुदा मिथिला आ मैथिल अस्मिताक जानकारी केर सर्वथा अभावे रहि जेतैक जाहि सँ अपन आत्मसम्मान बढेबाक मातृभाषाक योगदान वला नीति विफल रहि जेतैक। अत: जरुरत एहि बातक छैक जे मिथिला राज्य निर्माण सेनाक प्रतिनिधि अनुप चौधरी तथा मनोज झा द्वारा पटना मे अनशन केलाक उपरान्त राज्य शिक्षा निदेशालय जाहि बातक समझौता केलकैक तेकर पाछू संघर्ष बढबैत पटना मे सेहो मैथिली केँ स्थापित करैत पाठ्य-सामग्री विकास कैल जाय। दिल्ली मे एहि माँग केँ पूरा होइते बनारस, नागपुर, मुंबई, चेन्नइ, पंजाब, राजस्थान, कलकत्ता, आसाम सहित समस्त देश मे मैथिली केँ स्थापित कैल जा सकतैक। तहिना केन्द्रिय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा सेहो मैथिली विषय केँ मान्यता देबाक कार्य शीघ्र हेतैक। ई मानल बात छैक, जखनहि अपन भाषा, अपन भेष, अपन मूल्य, अपन सिद्धान्त सँ लोक परिचित होइत अछि तखनहि ओकर आत्मसम्मान सेहो अभिवृद्धि पबैत छैक।
दिल्ली विद्यापति सेवा संघ केँ एतेक पैघ सफलता लेल धन्यवाद देनाय प्रत्येक मैथिलक फर्ज बुझा रहल अछि। अखिल भारतीय मिथिला राज्य संघर्ष समिति आ दिल्ली भरि मे पंजीकृत सैकडों संघ-संस्था संग सहकार्य करैत आगामी सर्वे मे प्रत्येक मैथिलीभाषी परिवार द्वारा अपन बाल-बालिका केँ मैथिली विषय पढेबाक लेल अनुरोध पत्र उत्तरी दिल्ली नगर निगम केर हरेक विद्यालय मे जमा हेबाक चाही। एहि सँ लाखों लोक हेतु रोजगार सेहो बढतैक। लेखक, विचारक, टंकक, मुद्रक, छापा, शिक्षक, आदि केर बड पैघ वैकेन्सी (रोजगार सूचना) निकलतैक। मैथिली रजनी-सजनी केर भाषा सँ रोजी-रोटीक भाषा बनतैक, ई मिथिलावासी लेल बड पैघ कल्याणक विषय होयत।
जय मैथिली! जय मिथिला!!

मंगलवार, 18 फ़रवरी 2014

Mathili lel samuhik upwash

२१ फरवरी , शुक्रवार  के मातृभाषा दिवश अछि  आ  अपन मातृभाषा मैथिली के मिथिला में शिक्षा में उचित अधिकार दिएबाक लेल पटना में १५ तारीख स अनशन पर बैशल छैथ भाई अनूप आ भैया मनोज।  मुदा बिहार सरकार बनल अछि बौक , बहीर। हम सभ मिथिलावाशी  एहि आन्दोलन में अपन भागीदारी कम स कम  एक दिनक सामूहिक उपवाश राखि द सकैत छी--जे जहाँ छी ओतै रहि उपवाश राखू जाहि स हिनका सभ के शक्ति भेटें। इ सामूहिक उपवाश २१ के राखल गेला।  पूरा मिथीला मिथिला राज्य निर्माण सेना के एहि अनशन में भागी बनता से आशा।  इ सूचना एस  एम एस के द्वारा अपन अपन लोक के दी आ एतेक त कम स कम हम सभ कए सकै छी। 
    जय मिथीला जय मैथिली जय मिरनिसे 

गुरुवार, 13 फ़रवरी 2014

M.R.N.S.केर आह्वान:

 
    लिपि त लुप्त भ गेल भाषा बचाउ ! दरभंगा,मधुबनी सहरसा सँ आउ ! बेगुशराय भागलपुर सँ आउ ! जाहि गामक छी ताही गाम सँ आउ ! दिल्ली मुम्बइ कलकत्ता सँ आउ ! रेल बस चाइर पहिया सँ आउ ! जेना क सम्भव हुए तेना क आउ ! 14 फरवरी सँ 23 फरवरी तक आउ ! पटना आउ ! पटना आउ ! लिपि त लुप्त भ गेल भाषा बचाउ !


  एखन बहुत रास प्रश्नक जबाब "मिथिला राज्य निर्माण सेना"क अनशन संग हिनका आ बिहार सरकारकेँ देबाक छन्हि:

1. मैथिली मे प्राथमिक शिक्षाक संवैधानिक अधिकार मैथिलीभाषीकेँ किऐक नहि देल गेल अछि?

 2. संविधानक धारा ३५०ए द्वारा निर्धारित अधिकार अनुरूप मैथिलीभाषीकेँ मैथिलीमे न्युनतम शिक्षा पेबाक अधिकारसँ बिहार सरकार किऐक वंचित रखने अछि?

3. मैथिली समान पौराणिक आ समृद्ध साहित्यसँ विभूषित भाषाकेँ संवर्धन-प्रवर्धन लेल बिहार सरकार सौतेली माय जेकाँ किऐक व्यवहार करैत अछि?

      जेना कि ज्ञात अछि जे भारतीय प्रशासनिक सेवा मे नहि सिर्फ मिथिलावासी वा बिहारी मैथिल बल्कि आनो-आनो राज्यक लोक मैथिली भाषा रखैत प्रशासनिक परीक्षाक तैयार करैत आबि रहल छथि आ आइएएस-आइएफएस आदि बनैत छथि, राज्य व देशकेँ गुणवत्तापूर्ण प्रशासन प्रदान करैत छथि... एनामे मैथिली प्रति स्वयं गृहराज्य उदासीन रहि कहीं अलग राज्यक माँगकेँ स्वयं समर्थन आ लोकभावनाकेँ भडकाबय केर काज तऽ नहि कय रहल अछि?

एखन धरि कतेक शिक्षक केर आ कतेक विद्यालयमे मैथिलीक पढाइ करायल जा रहल अछि?

केन्द्रिय स्तरसँ पूछल जेबाक अछि:

सविधानक आठम अनुसूचीमे सूचीकृत भाषा, एकर समृद्ध इतिहासक सागर रहैत वर्तमानमे उपेक्षाक हद्दपर टिप्पणी आ एहि लेल बिहार सरकारकेँ आवश्यक निर्देशन आदि...?

तहिना मिथिला क्षेत्रक विश्वविद्यालय आ काउन्सेलिंग सेक्सनसँ पूछबाक अछि:

कि कारण छैक जे मैथिली विषयमे छात्रकेँ पढबाक लेल उत्साहवर्धन नहि कैल जा रहल छैक?

आजुक विपन्न अवस्थाक सृजक केकरा मानल जाय?

पद बेसी, अभ्यर्थी कम! कोना?
निवेदक:
मिथिला राज्य निर्माण सेना

सम्पर्क:

श्याम मैथिल, अध्यक्ष - ९८७३९५३९८१
अनुप मैथिल, प्रवक्ता ओ अनशनकारी - ८०५१५१८६८७

बुधवार, 25 दिसंबर 2013

आखिर मैथिल कियाक मिथिलासन दूर ?

 आखिर मैथिल  कियाक मिथिलासन दूर  ? 

     कखनो काल इ बात के बरा कचोट होइत अइछ जे आखिर मिथिलाक सेलेब्रिटी सब मैथिलि मिथिलाक नाम स दूर किया रहs चाहैत छैथ? आन आन भाषा भाषी जेना बंगाली, मराठी, पंजाबी, तेलगु, तमिल, आसामी, ओडिया एवं प्रकारे सब प्रान्त के सेलिब्रिटी सदेव अपन भाषा आ अपन संस्कृति के सम्मान लेल आगा रहैत छैथ. अतय तक कि भोजपुरी के लेल मनोज तिवारी तक के समर्पण आ योगदान अविश्मरणीय छैन. मुदा मैथिलि के? तकर कारण कि? शायद इ त नई कि मैथिल सेलेब्रिटी आई तक मैथिलि के कारण सेलिब्रिटी नई बनला. ताई ओ मैथिलि के स्नेह रखितो मैथिलि के महत्व नई दई छैथ. तखन त जिम्मेदार हम मैथिल छी.

किछु दिन पहिने इ बात सामने आयल जे मिथिला क्षेत्र के सिनेमा हॉल मैथिलि सिनेमा लगेबा तक स मना का दई छैथ. आ भोजपुरी लेल तुरंत तैयार. इ कारण त बहुत दुखद आ चिंता योग्य अइछ.

कि इ सत्य छई कि मैथिलि सिनेमा पर टैक्स और भोजपुरी टैक्स फ्री? अगर एहन बात छई त इ चिंतन बहुत गम्भीर.

मैथिलि सिनेमा के लेल पूंजी निवेश स पूंजीपति मैथिल किया कात होई छैथ?

कि मिथिला में मैथिल के मोन स मैथिलि के प्रति स्नेह कम भ रहल अइछ? आखिर किया? कारण की? अगर अई में सच्चाई छई त माँ मैथिलि के अस्तित्व के खतराक घंटी बुझी.

कतौ कतौ इहो सुनय में आयल जे मैथिल कलाकार सब के मैथिलि के नाम पर गुमराह कायल जाइत अइछ. हुनक सहयोग लय किछु व्यक्तिगत लोक अपन निजी स्वार्थ शिद्ध सेहो करैत छैथ..

जे किछु हो सायद इ अंतिम मोका के दौर गुजैर रहल जे सब मैथिल जागौथ, सब अपन अस्मिता के रक्षा लेल आगा आबौथ, ठगना सब के चिन्ह सार्थक काज में योगदान करैथ, कियाक की आब नई जागब त पहचान मिटा जायत.

मिथिला राज्य निर्माण सेना के १९ जनवरी २०१४ के कोंस्टीटूशन क्लब, देल्ही में मैथिलि मिथिलाक अस्मिताक पर चिंतन लेल महा सभा के आयोजन में माँ मैथिलि के प्रति हम सब अपन कर्त्तव्य निर्वाहन लेल जरुर पहुंची.....अपनेक उपस्थिति आ सहयोग निश्चित माँ मैथिलि के सम्मान के लेल एक टा सकारात्मक दिशा देत.

मुम्बई