dahej mukt mithila

(एकमात्र संकल्‍प ध्‍यान मे-मिथिला राज्‍य हो संविधान मे) अप्पन गाम घरक ढंग ,अप्पन रहन - सहन के संग,अप्पन गाम-अप्पन बात में अपनेक सब के स्वागत अछि!अपन गाम -अपन घरअप्पन ज्ञान आ अप्पन संस्कारक सँग किछु कहबाक एकटा छोटछिन प्रयास अछि! हरेक मिथिला वाशी ईहा कहैत अछि... छी मैथिल मिथिला करे शंतान, जत्य रही ओ छी मिथिले धाम, याद रखु बस अप्पन गाम - अप्पन बात ,अप्पन मान " जय मैथिल जय मिथिला धाम" "स्वर्ग सं सुन्दर अपन गाम" E-mail: apangaamghar@gmail.com,madankumarthakur@gmail.com mo-9312460150

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सोमवार, 1 दिसंबर 2014

मिथिला विभूति स्मृति समारोह - दिल्ली

   
                काल्हि दिनांक ३० नवम्बर दिल्लीक फिक्की अडिटोरियम मे मिथिला विभूति स्मृति समारोह भव्यताक संग मनाओल गेल। एहि कार्यक्रमक आयोजन भारतक एक सर्वथा पुरान आ मजगुत संस्था 'अखिल भारतीय मिथिला संघ' द्वारा कैल गेल। मैथिली कार्यक्रम एतेक भव्य रूप मे आयोजनक एकटा शिखर उदाहरण एकरा कहल जा सकैत अछि। जाहि तरहक गहिंर विचारधारा आ विकासवादी नीति संग कार्यक्रम केर आयोजन कैल गेल ताहि हेतु अध्यक्ष विजय चन्द्र झा व समस्त आयोजक समितिक दूरदर्शिता झलकि रहल छल। जखन कि कार्यक्रम मे मैथिलीक जे रस आ तत्त्व सामान्यतया भेटैत छैक तेकर घोर कमी बुझायल, तथापि विकासवादी परिवर्तन हेतु देखल गेल सपना मे पुरान आ पौराणिक विचारधारा तथा नीति केर प्रयोग किछु निहित व मिश्रित संदेश पठबैत प्रतीत भेल।

         कार्यक्रमक प्रमुख अतिथि भाजपा केर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, दिल्ली भाजपा केर प्रभारी एवम् राज्यसभाक माननीय सांसद श्री प्रभात झा छलाह। संगहि मिथिला-मैथिली आन्दोलनक वरिष्ठतम् पुरोधा डा. बैद्यनाथ चौधरी 'बैजु', मधुबनी सँ माननीय सांसद श्री हुकुमदेव नारायण यादव, झंझारपुर सँ माननीय सांसद श्री विरेन्द्र कुमार चौधरी, मधेपुरा (सहरसा) सँ माननीय सांसद श्री राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव, वरिष्ठ मैथिली साहित्यकार डा. गंगेश गुंजन, गुवाहाटी सँ मैथिली-मिथिला केर ध्वजावाहक श्री प्रेमकान्त चौधरी, गाँधीनगर (गुजरात) सँ डा. महादेव झा, अर्थशास्त्री एवं भारतीय अर्थ सेवा अधिकारी डा. संजीव मिश्रा, दरभंगा सँ कम्युनिस्ट पार्टी नेता तथा मैथिली-मिथिलाक वरिष्ठ सेनानी राम कुमार झा, मिथिला संस्कृतिविद् शंकर कुमार झा केर विशिष्ट आतिथ्य एवं आयोजक संस्थाक अध्यक्ष विजय चन्द्र झा केर अध्यक्षता मे संपन्न एहि भव्य कार्यक्रम केर उद्घाटन सत्र संपन्न भेल। तहिना मैथिली गीत-संगीत केर शिखरपुरुष पंडित हरिनाथ झा, मिथिलाक लता स्वरकोकिला रंजना झा एवं सुप्रसिद्ध सिने कलाकार सह गायिका अंजु झा उर्फ रंगीली भौजी द्वारा विद्यापति सांगीतिक संध्या सँ कार्यक्रमक दोसर आ अन्तिम सत्र संपन्न कैल गेल। सांगीतिक संध्यामे विशिष्ट उपस्थिति सुप्रसिद्ध कत्थक नर्तकी नलिनी चौधरीक छल।
           उद्घाटन सत्र मे उपरोक्त मंचस्थ वक्ता लोकनि द्वारा मैथिली-मिथिलाक चर्चा कम मुदा अखिल भारतीय मिथिला संघक विशाल इतिहास पर बेसी केन्द्रित देखायल। युवा शक्ति केँ पूर्ण रूप मे नकारैत काल्हिक कार्यक्रमक प्रथम सत्र 'अपन पीठ - अपनहि सँ ठोकू', 'मुन्डे-मुन्डे मतिर्भिन्ना' व 'मैथिल अहंकार केर चरम प्रदर्शन' जेकाँ लागल। एकत्रित अपार भीड विभोर छलाह, विचारमंथन सँ हृष्ट-पुष्ट मुदा मैथिली लोकगीतक अकाल सँ प्यासल दर्शक लिलोह आ हताश बुझेलाह। एक बेर तऽ एना लागल जे कविता वाचनक कोनो कार्यक्रम नहियो रहैत 'राजनैतिक प्रतिद्वंद्वी' लोकनि स्वयं ई खानापूर्ति कय देता - एहि लेल पूर्व सांसद महाबल मिश्राक तुक्का, सांसद पप्पू यादव केर हिन्दी भाषण बीच मैथिलीक फकरा आ मुख्य अतिथि प्रभात झा द्वारा पप्पुगान कवितात्मक तथा कव्वाली शैली मे युगलबंदीक बेजोड प्रस्तुति केलक।
          सांसद हुकुमदेव नारायण यादव द्वारा राखल बात जरुर मैथिल केँ अपन जैड मजगुती हेतु खेत केँ जोति-कोरि समतल बनाय कतहु पाइन खसेला सँ संपूर्ण खेत एक रंग पटेबाक उद्धरण संग अत्यन्त प्रेरणास्पद छल। मैथिली केर प्रयोग जँ हम सब अपनहि नहि करी, हरेक कामकाज लेल संवैधानिक भाषा मैथिलीक प्रयोग नहि करब तऽ भाषणे टा मे मैथिली बचेबाक ढोंग सँ कि होयत - एक महत्त्वपूर्ण चुनौती भरल संदेश देलनि सांसद यादव। अर्थशास्त्री डा. संजीव मिश्रा द्वारा देल गेल संबोधन मे मैथिली व मिथिलाक सनातन संरक्षण हेतु बाजार बनेबाक अत्यन्त प्रेरक संदेश छल। जहिना मधुबनी पेन्टिंग आइ संसार मे मिथिलाक पताका फहरा रहल अछि, तहिना आरो-आरो विन्दु पर मैथिली केर ब्रान्डिंग जरुरी अछि डा. मिश्रा कहलनि। मुख्य अतिथि द्वारा अत्यन्त भावुक संदेश देल गेल जे जाति-पाति सँ ऊपर उठि अपन भाषा व संस्कृति संग आत्मसम्मानक अनुभूति कयला सँ मिथिलाक असल विकास होयत।
          कार्यक्रम मे मंच ओ दर्शक बीच सेहो युगलबंदी होइत तखन नजरि पडल जखन मिथिला-मैथिली आन्दोलनक वरिष्ठतम अभियंता डा. बैद्यनाथ चौधरी बैजु केँ मंच पर आसन ग्रहण हेतु उद्घोषणा एवं सम्मानक घोषणा कैल गेल। एहि उद्घोषणाकक तुरन्त बाद दर्शक दीर्घा सँ युवा मैथिलक समूह 'मिथिला राज्य निर्माण सेना'क सेनानी लोकनि द्वारा 'मिथिला राज्य जिन्दाबाद', 'बैजु बाबु जिन्दाबाद' केर नारा लगायल गेल। एहि तरहक वातावरण सँ खौंझाइत सभा-अध्यक्ष विजय चन्द्र झा द्वारा आपत्ति जनायल गेल। ओ अपन उद्गार प्रकट करैत कहलनि जे कोनो जिन्दाबाद या मुर्दाबाद एहि मंचक परंपरा नहि रहल, संस्थाक नीति राज्य निर्माण प्रति अलग अछि, जाहि विचारधारा सँ डा. बैद्यनाथ चौधरी बैजु व मिथिला राज्य अभियानी लोकनि केँ बेर-बेर अवगत करायल जा चुकल अछि। जाबत मिथिलाक समस्त जनसमुदाय द्वारा एहि दिशा मे स्वीकृति नहि भेटत, ताबत धरि एहि संस्थाक आयोजन मे मिथिला राज्य पर चर्चा नहि कैल जायत। मिथिलाक सबसँ बेसी गरिमामयी संस्थाक रूप मे रहल अखिल भारतीय मिथिला संघ केर मंच सब दिन सर्वपक्षीय सम्मेलन हेतु प्रसिद्ध रहल अछि। एहि मंच पर किनको लेल जिन्दाबाद वा मुर्दाबाद करबाक परंपरा नहि रहल अछि - सेहो स्पष्ट करैत अध्यक्ष विजय चन्द्र झा 'विकास हेतु प्रतिबद्धता'क नारा मात्र संस्थाक उद्देश्य रहल से कहलनि। कतेको रास प्रधानमंत्री, कतेको रास उपराष्ट्रपति, विभिन्न दलक नेता आ मंत्री केर साझा स्थल आ कतेको दशक सँ मैथिली तथा मिथिला लेल कैल गेल अनेको महत्त्वपूर्ण कार्य मात्र लक्ष्य अछि जाहि दिशा मे सब कियो एकजुट बनबाक धारणा राखल गेल।
        सांसद पप्पू यादव द्वारा कैल गेल संबोधन मे मात्र फोटो टा मे मिथिलाक सब विभूति केँ समेटब मुदा यथार्थ मे आइयो मिथिला मे जातीय विभेद चरम पर रहबाक कठोर टिप्पणी कैल गेल। पूर्ण समावेशिक समाजक निर्माणक दिशा मे कोनो उपलब्धिमूलक कार्य नहि करब मिथिला आन्दोलनक सब सँ पैघ कमजोरी रहबाक बात स्पष्ट कैल गेल। ओ समाजक अगुआवर्ग आ ब्रह्म केँ जाननिहार ब्राह्मणक बाहुल्यता मात्र रहबाक सच पर आंगूर उठबैत चेतौनी भरल संदेश देलनि जे कथनी एवं करनी मे एकता सँ मिथिलाक पिछडापण जरुर दूर होयत। मिथिला राज्यक सपना आम जनवर्गीय सहभागिता सँ संभव होयत अन्यथा ई सपने रहि जायत।
         दर्शक-दीर्घा मे एक मिश्रित वातावरणक सृजना भेल आ बुद्धिजीवी तर्क करैत देखेलाह जे स्वयं सांसद आ सामाजिक नेतृत्वकर्ता रहैत - मिथिलाक धरतीपुत्र होयबाक आत्मगौरव सँ वंचित जे अपनहि भाषा मे नहि बाजय ओ स्वयं बेईमान होयबाक संदेश दैत अछि; मंच केँ पूर्ण रूप मे राजनीतिक ओ जातिवादी विचारधारा सँ मात्र अपन निजी स्वार्थपूर्ति आ सत्तासुख लेल आइयो पिछडल केँ पिछडल रखैत अछि। पप्पु यादवक बेवाक टिप्पणी जे उपस्थित दर्शक बीच ९५% ब्राह्मण मात्र रहबाक सच्चाई मिथिलामे विद्यमान वर्तमान सामाजिक समरसताक असल रूप प्रदर्शित करैत अछि। एकर कारण कतहु न कतहु पैछला २००-३०० वर्षक सामंतवादी युगक जहर अछि जे समाजक हर वर्ग बीच एकता नहि होमय दय रहल अछि। तर्क चलि रहल छल जे एहि बीमारी वा कमजोरी केँ दूर करबाक भार पुन: एक नेतृत्वकर्ता अपना पर नहि लय पुन: ब्राह्मणवर्ग पर किऐक दैत छथि, कि ई काज एक राजनेता व मिथिलाक धरतीपुत्रक रूप मे पप्पु यादव सहित पिछडा समाजक नेतृत्वकर्ताक अपनो नहि जे हर वर्ग केँ एकताक सूत्र मे बान्हथि? कम सऽ कम पप्पुजी जिनका मे लोक मिथिला राज्यक मुख्यमंत्री होयबाक दर्शन करैत अछि, जिनक विद्वताक चर्चा कतेको उच्चवर्गीय नेता सँ बहुत ऊपर गानल आ मानल जाइछ, तिनकर राजधर्म मे एहि तरहक जातिवादी कूचर्चा कतहु सँ शोभा नहि पबैत अछि। ओ स्वयं सशंकित छथि तऽ समाज केँ एकताक सूत्र मे केना बान्हल जा सकत? प्रश्न गंभीर अछि, मिथिला पुनर्निर्माणक एहि महान शत्रु केँ दमन जरुरी अछि। अपनहि नेता अनकर हाथे जातिवादिताक दमनपूर्ण नीति मे बिकाइत अछि, बिहार प्रति गर्व होइत छैक, मिथिला प्रति ओ स्वयं निराश अछि। एतेक तक जे पप्पूजी द्वारा देल गेल हिन्दी मे भाषण सँ कतेको लोक हूटिंग तक केलनि जेकरा अन्त मे अध्यक्ष विजय चन्द्र झा द्वारा हुनकर वात्सल्यप्रेमक भावसँ आदेश दैत संंसदभवन मे मैथिली बाजि दु-भषिया सबहक नौकरी बचेबाक बात कहि सान्त्वना देल गेल।
        मंच पर अफरातफरी सँ गंभीर दर्शक दीर्घा समारोह सँ बेसी महत्त्वपूर्ण कार्य करैत देखेलाह। आपसी घमर्थन आ बहस मे बड पैघ मर्म आबि रहल छल। जरुरत तऽ एहि बातक छैक जे ब्राह्मण केँ एकाधिकार वा मिथिला निर्माणक पेटेन्ट नहि सौंपि, मैथिली भाषा व मिथिला संस्कृति लेल स्वयं सर्जक बनि फेर सँ लोरिक, सलहेश, दीनाभद्री आदि जनवर्गीय लोकदेवता समान रक्षक बनैथ। जिनकर जे मातृभूमि अछि ओ वगैर कोनो जातीयताक भावना मात्र सच्चा मातृभूमिपुत्र बनि मिथिला निर्माण लेल सोचब तखन सनातनकालीन मिथिलाक रक्षा हेबे टा करतैक। मिथिला पुनर्निर्माणक प्रतिबद्धता प्रकट कैल जाय, एकर लोक-संस्कृतिक रक्षा कैल जाय, एकर सर्वकालीन विकास लेल पूर्वाधार निर्माणक बात हो, गैर-ब्राह्मणवर्ग केँ मिथिला-मैथिली पर जन्मसिद्ध अधिकार होयबाक स्वयंसिद्ध तथ्य प्रकट कैल जाय - एहि समस्त बातक वातावरण बनयबाक लेल मंच पर मिथिलाक पंच पाण्डव सांसदक संग जानकीरूपी रंजिता रंजन केर जिम्मेवारी राम कुमार झा द्वारा देल गेल।
           मंच उद्घोषक एवं मिथिलाक एक महान सृजनशील स्रष्टा किसलय कृष्णक जतेक प्रशंसा कैल जाय ओ कम होयत कारण एहि समारोहक असल मर्म हुनकर सुन्दर उद्घोषण द्वारा बेर-बेर सबकेँ ललकारैत रहल छल। अधिकारवादी संग नेतृत्वकर्ता पर जिम्मेवारी केँ आत्मसात करबाक उद्बोधन हुनक उद्घोषणक विशेषता छल। जखन कि आयोजन पक्ष अपन निश्चित विचारधारा सँ सीमित परिस्थिति बनबैत रहलाह तथापि कुशल उद्घोषण सँ किसलय कृष्ण नहि मात्र मंचासीन विभूति केँ परंच उपस्थित दर्शक व विभिन्न ठाम सँ आयल अन्य-अन्य विभूति लोकनि केँ सेहो तत्परता संग मिथिला पुनर्निर्माण प्रति जागृति पयबाक आह्वान कैल गेल। उद्घोषणाक क्रममे क्रमश: डा. राजेन्द्र विमल, डा. मनोरंजन झा, धीरेन्द्र प्रेमर्षि, अजित आजाद आ स्वयंरचित विभिन्न कवितांश राखि कार्यक्रम मे उपस्थित डा. देव शंकर नवीन, अक्षय कुमार चौधरी, प्रो. अमरेन्द्र झा, विमलकान्त झा, अमरनाथ झा, प्रवीण नारायण चौधरी, ललित नारायण झा, कौशल कुमार, राहुल कुमार राय, संजय झा नागदह, विमल जी मिश्र, प्रो. विद्यानन्द मिश्र, कामनानन्द मिश्र आदिक योगदानक चर्चाक संग-संग उपस्थिति हेतु स्वागत-अभिनन्दन-उद्गार प्रकट कैल गेल।
       डा. बैद्यनाथ चौधरी बैजु एहि कार्यक्रमक किछु मिश्रित प्रतिक्रियावादी माहौल सँ किछु आहत बुझेला। ओ अपन संछिप्त संबोधन मे मैथिली साहित्य ओ भाषा प्रति अगाध-अविस्मरणीय योगदान देनिहार ५ गोट 'ठाकुर' नामधारी केँ मोन पारलनि। ज्योतिरिश्वर ठाकुर, विद्यापति ठाकुर, कर्पुरी ठाकुर, ब्रज मोहन ठाकुर तथा डा. सी. पी. ठाकुर केर नाम लैत ओ समस्त दर्शक सँ समर्पित भावना सँ अपन पहिचान प्रति सतर्क रहबाक आह्वान केलनि। संगहि अखिल भारतीय मिथिला संघ द्वारा निर्धारित सब सीमा-देवाल सँ ऊपर उठि सुप्रसिद्ध मैथिली गीतकार सियाराम झा सरसक नारा 'एकमात्र संकल्प ध्यान मे - माँ मैथिली संविधान मे' कहैत वर्तमान समाधान हेतु संघर्षक नारा 'भीख नहि अधिकार चाही - हमरा मिथिला राज्य चाही' केर गर्जना कयलनि। एहि घोषणा सँ आह्लादित प्रेक्षागृह करतलध्वनि सँ गुंजायमान भऽ गेल।
          ज्ञात हो जे एहि समारोह द्वारा परंपरानुरूप एहि बेर ४ गोट स्रष्टा-अभियानी लोकनि केँ 'मिथिला विभूति सम्मान' सँ सम्मानित कैल गेल, जाहि मे श्री प्रेम कान्त चौधरी (गुवाहाटी), डा. महादेव झा (गाँधीनगर), श्री सुधिकान्त झा (नई दिल्ली) आ श्री प्रकाश झा (मैलोरंग) छथि। एहि महा-समारोहक सफलतम आयोजन हेतु दिन-राति एक कयनिहार डा. विद्यानन्द ठाकुर, ऋषि कुमार झा 'मलंगिया', प्रकाश झा, शंभुनाथ मिश्र, डा. ममता ठाकुर, राधानाथ झा, रौशन कुमार झा, संजीब झा व संस्थाक समस्त सदस्यगण सहित मैलोरंग टीम सक्रिय छलाह।
           सांगीतिक संध्याक सत्र मे कत्थक नर्तकी नलिनी चौधरी द्वारा विद्यापति गीत पर भाव नृत्यक प्रस्तुति सँ भेल। तदोपरान्त हरिनाथ झा, रंजना झा व अंजू झा केर सुमधुर विद्यापति गीत केर प्रस्तुति कैल गेल। एहि सत्रक संचालन मैथिली संगीत व मिथिला संस्कृतिक विशिष्ट जानकार विद्वान् शंकर कुमार झा द्वारा कैल गेल। कार्यक्रमक कमजोरी कही आ कि क्रान्तिकारी डेग, गीत-संगीतक प्रस्तुति बीच विद्वानक लंबा उद्बोधन आ मात्र विद्यापति-गीतक प्रस्तुति सँ आयोजित सांगीतिक संध्यामे लोक-उत्साह केर प्रत्यक्ष हत्या होइत प्रतीत भेल। स्वयं विद्यापतिक अवधारणा विरुद्ध जनवाणी यानि मैथिली लोक-गीतक एकहु टा प्रस्तुति नहि करबाक आयोजन-नीति सँ एहि सत्रक दुर्दशा भेल जेना लागल। सांगीतिक संध्या मे गीत तथा संचालन बीच सुर एवं तालक कमी सँ दर्शक-दीर्घा मे समस्त अपेक्षित जोश समाप्त प्राय भेला सँ दोसर सत्र मरहन्ना सन बनि गेल छल। अन्त-अन्त मे सब छान-पग्घा केँ तोडैत हरिनाथ झा द्वारा 'हे गे बुधनी माय', 'जुल्फीवाली कनिया कमाल करैत छी' गाबि जोश अनबाक प्रयास कैल गेल परंच ताबत धरि दर्शकदीर्घा मे मात्र सुन्दर-सुन्दर कुर्सी सब श्रोतारूप मे देखा रहल छल।
           कार्यक्रमक अन्त मे संस्थाक अध्यक्ष व मंचक अध्यक्ष द्वारा गायक हरिनाथ झा, गायिकाद्वय रंजना एवं अंजू संग मंच-संचालक किसलय कृष्ण केँ प्रतीक चिह्न दय सम्मानित कैल गेलनि, धरि समस्त म्युजिसियन लोकनि मुह तकैत छूछ सम्मान सँ विभूषित भेलाह। मैथिली मंच पर संगीत देनिहारक कोनो पूछ नहि होयबाक भावना सँ आहत कीबोर्ड पर शानदार प्रदर्शन करनिहार हँसमुख शशि मात्र अपन विहुँसैत मौन प्रतिक्रिया दैत एहि रिपोर्टक लेखक प्रवीण केँ हृदय छलनी-छलनी कय देलाह।
Pravin Narayan Choudhary 
ke  kalam san 

बुधवार, 22 फ़रवरी 2012

मैथिली मातृभाषा लेल विचार गोष्ठी -



pravin Narayan Choudhary
मैथिली मातृभाषा लेल विचार गोष्ठी - अवसर ‘अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस’ याने २१ फरबरी - २०१२

"युनेस्को द्वारा एहि दिवसके मनाबय पाछू सुन्दर माहात्म्य यैह जे बांग्लादेश के निर्माण मातृभाषा लेल खूनी आन्दोलन आ संघर्ष उपरान्त भेल - प्राकृतिक स्वरूप पर बनावटी बोझ केकरहु नहि पसिन्न पड़ैत छैक, जेना पूर्वी पाकिस्तानमें बंगला मातृभाषा ऊपर उर्दु के बोझ - अरबी के बोझ केवल इस्लाम धर्म के अनुसरणके क्रममें मान्य नहि भेल आ फलस्वरूप लोक संघर्ष कयलक आ १९७१ में युद्ध तक भेल आ तदोपरान्त बांग्लादेश के सृजन भेल।"

मैथिल संग सेहो किछु एहने दमन भऽ रहल छन्हि। क्रमशः चिन्ता बढय लागल छैक। समृद्ध इतिहास आ साहित्यके रहैत मैथिली भाषा हासिया पर जा रहल छैक। दोषी के - दोषी के - लोक चीख-पुकार आ हो-हल्ला मचा रहल छथि। केओ फल्लाँ जाइत चौपट केलक तऽ फल्लाँ एकरा पौतीमें मुनलक आदि कहैत एक-दोसर पर भाला-बरछी तानय लागल छथि; केओ राज्य-पक्षके जिम्मेदार मानैत छथि, केओ किछु तऽ केओ किछु। अफरातफरी मचल जा रहल अछि। मनुष्य अपन गलती जल्दी नहि देखैत छैक - कहबी छैक जे अपन टेटर नहि सुझैत छैक। आत्मालोचना केवल ऋषि-संत तक रहि गेलैक अछि। जनकल्याण कयनिहार लोक अक्सर आत्मालोचना करैत नवनिर्माण लेल गलतीके सुधार करैत आगू बढैत छथि। केवल गुँहाकिच्ची कयला सँ बात सम्हरैत कम छैक, बिगड़ैत अवश्य छैक। राजनीति आइ गन्दगीके पर्यायवाची केवल एहि लेल बनल छैक जे लोक दोसरके विश्वास जीतय लेल कम बल्कि तोड़य लेल आ मानमर्दन लेल मात्र प्रयोग करैत छैक। बोली-भाषणमें बड़ पैघ-पैघ बात करैत छैक, मुदा सभटा लेल दोसरेके दोषी मानैत छैक आ अपन दोष - अपन प्रतिबद्धता - अपन श्रेष्ठ प्रदर्शन आदि लेल मुँहपर माछी भिनैक उठैत छैक। ततबा अन्तर्विरोध आ दोषारोपण होइत छैक जे योगदान देनिहार के सेहो हृदयाघातकारी होइत छैक। अरे भाइ! दम छौ तऽ कऽ के देखा। दम छौ तऽ जोड़ि के देखा। खाली दोषारोपण? एहि तरहक वार्तालाप - आलाप-प्रलाप के त्याग करब बहुत जरुरी छैक। हम सीधा कहय चाहब जे कोनो दोष यदि विशेष जातिके छैक तऽ अपन योगदान कि सेहो बाजब जरुरी। यदि केकरो में कोनो कमजोरी देखलियैक तऽ स्वयं सम्हारय लेल कि कदम उठेलहुँ से जाहिर करब जरुरी। यदि जातीयता के बात करैत भाषा के पछरैत देखैत छी तऽ जातिय सौहार्द्र लेल आइ धैर कि कयलहुँ से जगजाहिर होयब बेसी जरुरी। दोष नहि छैक वा नहि हेतैक हम ताहिपर किनकहु नहि रोकि रहल छी चर्चा करय सँ, लेकिन दोष मात्र आंगूरपर गानब आ सकारात्मकता हेतु जे करनी कयलहुँ से नहि बतायब तखन अहाँ स्वयं दोषी छी। अहाँ अपन टेटर नहि देखैत खाली योगदान कयला उपरान्त नून-चीनी कय रहल छी। सावधान मैथिल! बहुत खंडी बनलहुँ। घरके तहस-नहस कयलहुँ। दोसरके योगदान के मूल्य बुझू। करनी शून्ना आ बाजब दून्ना - छोड़ू एहि प्रवृत्तिकेँ। धन्यवाद दियौक ओहि योगदानकर्ताकेँ जे अहाँक मातृभाषा के समुद्र सऽ बेसी गहिंर बनौलक। हर बातमें खाली छिद्रान्वेषी बनब एहि प्रवृत्तिके त्याग अहाँलेल एकदम जरुरी अछि। वरना अहाँ के तीक्ष्ण बौद्धिक क्षमता रहैत धोबीके कुकूर जेकाँ बिना घर ओ घाटके बीच मझधार अहाँ फँसल त्राहि-त्राहि करब आ ईश्वरके सेहो अहाँपर दया नहि औतैन। फेर सीताजी नहि अवतार लेती अहाँके धरासँ। स्मरण करू - जनकजी ओहिना नहि प्रण कयने छलाह जे हिनक विवाह एहेन पुरुष संग करायब जे ताहि शिवधनुष जेकरा सियाजी सहजरूपें बायाँ हाथ सँ उठाके पिता जनकलेल पूजा करै सऽ पहिने गाय-गोबर सऽ नीप देने छलीह। जगाउ अपन आत्मसम्मान के। सिखाउ अपन संतानके - मैथिली संग प्रेम करू - राजनीतिके शिकार जुनि बनू। ई जातीयताके बात कय के अहाँके मौलिक अधिकार हनन करय लेल केकरहु सहज अधिकार प्रदान नहि करू। भाषा आ भाषिका एक-दोसरक सम्पूरक होइछ। केओ बहुत सुसंस्कृत भाषण करैछ, केओ ततेक वैयाकरणीय नहि रहैछ। लेकिन सत्य तऽ यैह छैक ने जे कोनो भाषाके सम्पन्नता साहित्य सँ होइछ, साहित्य के दू प्रमुख स्तम्भ व्याकरण आ शब्दकोष होइत छैक। जे जतेक प्रखर से ततेक सम्पन्न! एहिमें जाति के कोनो बाधा कदापि नहि। बेशक जे अगड़ा छैक ओ अगड़ा स्वभावके कारण आगू भागैत छैक। एहि में ईर्ष्या नहि, बल्कि अनुकरण आ अपन कमजोरी संग संघर्ष करब एहि लेल प्रेरणा के संचरण करू। झगरलगौन काज कम करैछ आ झगरा लगा के अपन बन्दरबाँट करयमें लागैछ।

मैथिली भाषा के प्रवर्धन में व्यवसायीकरण के आवश्यकता देखि रहल छी। भारतमें संघ लोकसेवा आयोगमें मैथिली विषय के चुनाव करैत अमैथिल सहजरूपेण प्रशासक बनैत छथि। मैथिलीके पोषण एना भऽ रहल छैक। विभिन्न प्रकाशन सँ मैथिली लेखनके प्रकाशन भऽ रहल छैक, लेखकके मात्रामें वृद्धि एना भऽ रहल छैक। धिया-पुताकेँ भारी सऽ भारी शास्त्रोपदेश-पठन-पाठन अपन मातृभाषामें अत्यन्त सहज आ दीर्घकाल लेल हितकारी होइछ - एना मैथिली प्रति आकर्षण मैथिल में होयब स्वाभाविक छैक। मैथिलीभाषामें यदि मिडिया कार्यरत हेतैक - ५००-१००० लोककेँ प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त हेतैक, मैथिलीके पोषण आ मिडिया-विकास एना संभव हेतैक। अपन संस्कृति प्रति लोकमें जागरुकता आ संवरण हेतु प्रयास आ प्रदर्शन हेतैक, मैथिली एना आगू बढतैक। मैथिली फिल्म, मैथिली गीत, मैथिली पारंपरिक गायन-संगीत आदिके व्यवसायीकरणमें अपन हिस्साके योगदान देबैक तखन मैथिली के बढय सऽ केओ नहि रोकि सकैत छैक। आन संग देक्सीमें आन्दोलन करयलेल पाछू रहैय सऽ बहुत नीक छैक जे अपन मातृभाषा प्रति एक सटीक नीति बनबैत राज्य द्वारा उपेक्षा विरुद्ध संघर्ष करब - हिंसा व अहिंसा के तर्कबुद्धि सँ दूर केवल जायज लेल लड़बाक प्रवृत्ति आनब तखन मैथिलीके संवर्धन हेतैक, सम्मान भेटतैक। अतः मातृभाषा के सम्मान सभके लेल छैक, एहिमें केकरो ऊपर दोषारोपण करब आ अपन कर्म करयमें पाछू पड़ब साक्षात्‌ बेईमानी थिकैक, एहि बात केँ मनन करब।

राजविराजमें जल्दिये राष्ट्रीय सम्मेलन हेतैक आ एहिठामसँ मैथिली के समुचित सम्मान लेल आ आपसी एकताक लेल बिगुल बजतैक। एकर अपूर्व सफलता लेल शुभकामना देल जाउ|

शुक्रवार, 11 नवंबर 2011

साम- चकेबा पर्व


साम- चकेबा  पर्व 

के  शुभ  अबसर  पर शिव शक्ति  सोसैटी (सेक्टर ७१ नॉएडा )  दुवार साम- चकेबा  पर्व के  आयोजन , विशम्भर ठाकुर जी  के  अध्यक्षता   में  कैल  गेल  छल ,  जाही  में  विशेस  मुख्य  अतिथि  सब  समलित भेल  छलैथि जिनकर  मुख्य  उदेश  छल , बिहार  मिथिलांचल के  बिकाश और  मिथिलाक  परम परा और  धरोहर  के  सयम  रखनए , अहि साम - चकेबा पर्व के  संचलन  श्री महेश शर्मा (चेयरमेन ऑफ़ कैलाश  हॉस्पिटल )के दुरा  साम -चकेबा  मूर्ति  के  अपन  ठेहुन से  तोरैत उपरांत  मिथिलाक  परम-  परा के  निर्वाह   करैत  , अपन  मुखार बिंदी  से  मिथिलाक  अनेको  धरोहर  के  बखान  केलैथि , ओही  के  बात   आमोद झा मुजिकल  ग्रुप के  जरिया , सांस्कृतिक  कार्य-  करम  के  सुरुवात  के गेल  जाही  में  मुख्य  गायिका  अंजू झा (अंजना आर्य) सोनी  झा , कमलेश  झा , अनेको  गायक - गायिका  सब उपस्थित भेल छला ,
संस्कृत कार्य  करम  के  बाद   बिधि  पुरबका बिंदा बन और  चुगला  के  जरयाल गेल  , और समदोन  गबैत आ फेर  अगिला साल  साम- चकेबा के अबेय के गीत  गबैत  सब  माय  -  बोहीन अपन  डाला  लाके  अपन - अपन  घर-  अगन  गेली 
 नोट - 
(अहि  प्रोग्राम के  अंखि देखि हल  समाचार विस्तार पूर्वक  सबटा  शोभाग्य मिथिला  टी वी के  जरीय  , रवि   दिन  दिखोल जायद )  

बुधवार, 21 सितंबर 2011

नारी समाज की हकीकत

 
 
नारी समाज की हकीकत
करुणा झा

“नारी तुम केवल श्रद्धा हो ।
विश्वास रजत नगपग तल में
... पीयुष श्रोत सी बहा करो,
जीवन के सुन्दर समतल में”

कविवर जयशंकर प्रसाद की ये पंक्तियाँ शायद तब हीसार्थक सिद्ध हो सकती है, जब औरतों के प्रति इस समाज की सोच विकसित हो । पुरुष मानसिकता बाले इस समाज में महिलाओं की स्थिति अब भी दूसरे दर्जे की बनी हुई है । आज २१वीं सदी में भी मध्य युग की उन सडी–गली रुढियों और मान्यताओं को ढोने और पुरुषों के प्रत्येक अत्याचारों को झेलने के लिए अभिशप्त है, जिन्होंने उनकी जिंदगी नारकीय बना दी थी । महिलाओं पर दिनों दिन लगातार बढती अत्याचार की घटनाओं ने विचारशील लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि या तो कानून ठीक ढंग से अपना काम नहीं कर पा रही है अथवा महिलाओं के प्रति नजरिये में अभी बदलाव नहीं आया है । कहा जाता है – किसी देश की स्थिति को जानने का पैमाना यह है कि वहाँ की महिलाओं की स्थिति पर नजर डालें तो पताल लगता है कि उनकी हालत अब भी सोचनीय और दयनीय बनी हुई है, छेडखानी, दुराचार, दहेज, हत्या, कन्या भ्रुण हत्या, बाल विवाह, तलाक, परिवार की इज्जत के नाम पर हतया, बलात्कार, यौन शोषण आदि अनेकानेक अत्याचारों के कारण उन्हें घर और बाहर आये दिन शारीरिक और मानिसक यातनाों से गुजरना पडता है । ऐसी स्थिति मे हम कैसे कह सकते है कि महिलाएँ आगे बढ रही हैं । ऐसा नहीं है कि महिलाओं की स्थिति में बिल्कुल ही सुधार नहीं हो पाया है । आज की महिलाएं, हर क्षेत्र में पुरुष की बराबरी भी कर रही है मगर उन्हें भी समय समय पर हतोत्साहित किया जाता रहा है । लैंगिक विभेदता अभी भी हमारे समाज में इस तरह है कि महिलाएँ हर क्षेत्र में इसका शिकार बनती आ रही हैं ।
सती प्रथा, देवदासी प्रथा आदि अनेक कुरीतियाँ भी आज तक उनके पैरो की बेडियाँ बनी हुई है । तेजाब डालने, नौकरी दिलाने का झाँसा देकर विदेश भेजने या शोषण करने, धन के लिए गरीब माँ–बाप द्वारा लडकियों और महिलाओं को बेचने आदि घटनाएं भी रोजाना अखबारों की सुर्खियाँ बनी रहती है । इतना ही नही घर में होने बाली हिंसा का भी उन्हे शिकार बनना पडता है । भारत के बिहार, पश्चिम बंगाल, प्रजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान के भूस्वामियों को लडकियाँ बेची जाती है जो उनके घरों मे नौकरीयाँ बनकर घुट घुटकर जिन्दगी जीने को मजबूर है । ऐसा नहीं है कि सिर्फ भारत और नेपाल में ही महिलाओं के खिलाफ शोषण के इन रुपों का इस्तेमाल होता है । दुनियाँ भर में किसी न किसी ढंग से उनपर जुल्मों सितम ढाये जाते हैं । किर्गिस्तान में तो दुल्हन का अपहरण आम बात है । फर्क सिफ इतना है कि पहले अपहरण किया जाता था, अब कार से जबरन उसे भावी शौहर के घर ले जाया जाता है । वहाँ दुल्हन को शादी के लिए मनाने की कोशिश की जाती है । उनके नही मानने पर कुछ परिवारों में तो तब तक बंधक बनाकर रखा जाता है जब तक वह शादी के लिए रजामन्द नहीं हो जाती है । खास बात यह है कि इस काम में दुल्हन के घर बाले भी शामिल रहते हैं । इथोपिया और रुवाण्डा में तो यह प्रथा बेहद क्रुर है । परिवार की इज्जत बचाने के नाम पर दुनियाँ भर के देशों में महिलाओं की हतया का चलन काफी पुराना है । भारत, नेपालके अलावा पाकिस्तान, बंग्लादेश, अलबानियाँ, कनाडा, ब्राजील, डेनमार्क, जर्मनी, इराक, इजरायल, इटली, साउदी अरब, स्वीडेन, यूगांडा, इग्लैण्ड और अमेरिका में इस तरह की हत्याएँ होती रहती है । माता पिता की पसंद के व्यक्ति से विवाह करने से मना करने, तलाक मांगने पर महिलाओं की हत्याएँ की जाती है । तेजाब डालकर महिलाओं का चेहरा जला देने की घटनाएँ अफगानिस्तान में आम है । धाना में धार्मिक दास्ता के तहत लडकियाँ को उसके परिवारवाले मंदिरो मे भेजते है, जहाँ पुजारी उनका शोषण करता है, ओर उससे मुफ्त मे काम करवाता है ।
सवाल यह उठता है कि हमारे संविधान से स्त्री को पुरुष के बराबर का दर्जा देने और उन पर होने बाले अत्याचारों को रोकने के लिए अनेक कानुनों के रहते हुए भी इनमें कमी होने की बजाय बृद्धि ही होती जा रही है । इस समस्या का समाधान समाज के साथ खुद स्त्री को ढुंढना होगा । एक मुख्य कारण तो यह है कि सदियों की गुलाम मानसिकता के कारण महिला अब भी अपने ऊपर होने बाले अत्याचारों के खिलाफ आवाज बुलंद करने का साहस नहीं जुट पाती है । वह यह सोचकर खामोश रह जाती है कि यदि उसने कोई कदम उठाया तो उसके और उसके परिवार की मान मर्यादा और प्रतिष्ठा पर धब्बा लग सकता है । उसे यह डर भी रहता है कि जुर्म करनेबाला व्यक्ति यदि प्रभावशाली हुआ तो वह कानून की गिरफ्त से बच निकलेगा और उसका जीना मुहाल हो जायेगा ।
समय पर अत्याचार का विरोध नहीं करना जुल्म को बढावा देता है । यह सच है कि कानून की अपनी अहमियत है और उन्हे कारगर बनाये जाने की जरुरत है । लेकिन विरोध की आवाज बुलन्द करने की पहल तो नारी को ही करनी होगी । घर में होनेबाले अत्याचारों पर भी यदि वह खामोश बैठ जाती है तो उनकी यातना के सफर का अंत होनेवाला नहीं है । प्रसिद्ध शायर साहिर लुधियानवी ने अपनी एक कविता में लिखा है –

“औरत ने जन्म दिया मर्दो को
मर्दो ने उन्हें बाजार दिया
जब जी जाहा मसला कुचला
जब चाहा दुत्कार दिया”

कवि के इस कथन के संदर्भ में नारी को अपनी शक्ति का अहसास करना होगा कि यदि मर्र्दो ने उसे बाजार दिया तो संसार तो उन्होंने ही दिया है । फिर वह खामोश रहकर अत्याचार क्यों बर्दाश्त करती है । औरत किसी भी मामले में पुरुषों से कम नही है, आज भारत में  ही देखे, महिला शक्ति से भरपूर राष्ट्र है । विपक्ष में सुषमा स्वराज, राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, सोनिया गाँधी देशमें, कल्पना चावाल स्पेश में, पी.टी. उषा रेस में, ऐश्वर्या राय फेस में । फिर, क्यों न हममें भी हौसला हो बुलंदियो को छुने का । मै तो कहती हूँ कविता लिखनी चाहिए ।
“करो नयाँ संकल्प अभी तुम
गढ लो नई कहानी
या तो जीजाबाई बनो
या झाँसी की रानी”
तो फिर वो दिन दूर नहीं जब महिला सशक्तीकरण बर्ष नहीं पूरा देश ही महिला शक्ति से भरपूर होगा । अस्तु ।।

बुधवार, 13 जुलाई 2011

दहेज़ मुक्त मिथिला , पंजी भवन, सौराठ सभागाछी, मधुबनी। ph -09661042056


Pravin Narayan Choudhary ---





समय-समयपर हम पूछैत रहब - कोनो काज एसगरे नहि होइत छैक - केवल किछु सदस्यके प्रतिबद्धता सऽ एतेक पैघ आन्दोलन पृथ्वीपर सफल हेतैक से संभव नहि छैक। ताहि हेतु, अपने जतेक मित्र एहिठाम छी, यदि एको आंजुर कऽ के भीख दऽ देबैक तऽ क्रान्ति तुरन्त रंग अनतैक। भीख अहाँके अर्थके नहि चाही। अर्थके व्यवस्था एक बेर आ अनेक बेर महादेवपर छोड़ू अपने लोकनि। जिनका ...स्वेच्छा होय से सदस्यता ली, आ सदस्यताके लेल जे शुल्क बान्हल छैक से पठबैत रही। एहि सऽ अहाँके कोनो प्रभाव नहि पड़त मुदा संस्था क्रमशः मजबूत होइत रहत। सदस्यता के लेल संस्थाके जे खाता अछि से हम पुनः एतय दोहरा रहल छी:

A/C - 31742944456, STATE BANK OF INDIA, BRANCH - RAHIKA, DISTT. - MADHUBANI. BRANCH CODE- 5897.
*जौँ अपन राशि पठाबी त पठेलाक बाद 9661042056 पर अवश्य सूचना दी। श्री प्रकाश चौधरी - कोषाध्यक्ष, दहेज मुक्त मिथिला, पंजी भवन, सौराठ सभागाछी, मधुबनी।

एक आँजुर भीख:

आखिर इ एक आँजुर भीख के तात्पर्य अपने स्वयं कि लगा रहल छी...? अपनेक सदस्यता मात्र?? जी नहि!! बिलकुल नहि!! सदस्यता तऽ वैह लैथ जे इ शपथ ग्रहण करैथ कि दहेज के व्यवहार पूर्णतः बन्द। नहि लेब, आ नहि देब। तखनहि टा सदस्यता ली। अन्यथा अपनेक कोनो सहयोग दहेज मुक्त मिथिलाके नहि चाही। इ संस्थाके स्थापनाके पाछां केवल एतबी उद्देश्य छैक जे दहेज के स्वेच्छा सऽ विरोध करनिहार टा एहि में जुड़ैथ आ हुनकहि भीख याने एक आँजुर भीख सऽ इ संस्था चलौक। जानकारी दी... किछु महानुभाव जे अपना आपके पाइवाला बुझैत छथि ओ कहलखिन जे सदस्यता तऽ नहि लेब, मुदा सहयोग देब। हम सभ ओहेन मानसिकताके तुरन्त आग्रह कयल जे माफ करब, सदस्यता नहि लेब याने अहाँके एहि संस्थाके मौलिकताप्रति नैतिक समर्थन नहि भेल... तखन सहयोग केहेन देब। वर्ड्सवर्थके एक कविता अपने लोकनि पढने होयब - Sympathy  is far better than gold!  सहानुभूति सोना सऽ बहुत बेसी नीक होइछ। अवश्य! अपने केवल सहानुभूति दियौक। अपनेक गोल्ड यदि एहि संस्थामें लगतैक, तऽ एकरो घून लागि जेतैक। कारण पाइ सऽ बेसी गंदा एहि संसार में दोसर किछु नहि होइछ। कहैत छैक ने - कंचन आ कामिनी... जी, एहि दुनूके पाछां जे गेल, ओ सदा के लिये धैंसि गेल। :(

तखन एक आँजुर भीख कि तऽ?

जी!! एक आँजुर भीख याने एक मुट्ठी चाउर दे, घुरमा लगा दे!! अपने केवल प्रतिबद्ध बनियौक जे आब नहि तऽ दहेज लेब, आ नहिये दहेज देब। बेटा आ बेटी एक समान अछि। बेटीके भ्रूण हत्या नहि करबैक। बेटीके जी खोलिके शिक्षा देबैक। कतहु कन्नि नहि कटबैक। महिला ऊपर प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष अत्याचारके बन्द करबैक। स्वेच्छा सऽ कोनो लेन-देन आशिर्वाद थीक - एकरा दहेज के नाम तखनहि पड़तैक जखन लोभरूपी माँग राखल जेतैक। एहि के लेल आडंबर संग सेहो लड़य पड़तैक। शौख पूरा करू... लेकिन एहि के लेल कट्ठा-बिग्घा जुनि बेचू। यावत्‌ जीवेत्‌ सुखम्‌ जीवेत्‌ - ऋणम्‌ कृत्वा घृतम्‌ पीवेत। इ चर्वाक के जे कठोर नास्तिकवादी सोच छल एहिपर चलनाइ छोड़ै जाउ। केवल अपन प्रतिबद्धता एहि संस्थाके मौलिकता प्रति अपन नैतिक समर्थन दियौक आ जखन इ इच्छा होय जे एकर सदस्यता लेल जाय, तखनहि लेब। कार्यक्रममें सहभागी बनब। कोनो काज वास्तविकताके धरती पर करबावैय लेल सहयोग दैत रहब। एकरे बुझबैक - अपन एक मुट्ठी चाउर। पाइ लऽ के कि हेतैक?

अगिला कार्यक्रम छैक दिल्लीमें - २८ सेप्टेम्बर - एहि पर अन्तिम घोषणा कैल जायत अगिला शनिवार के। हम तऽ बाबाधाम के रास्तामें रहब, आ बाबा संग प्रार्थना करैत रहब जे अपना सभके एहि मूहिम के सफलता भेटैत रहय आ बेटी सभके मनोबल उच्च रहय। लेकिन पंकज भाइ एहि मूहिम के डोरी सम्हारैत रहता आ राघवेन्द्रजी, अभिषेक आनन्दजी, सुनीलजी, संतोषजी, आ हिनका सभ संग जुड़ल अनेको कार्यकर्ता बाबाके नाम लऽ के भीरल रहथिन आ काज आगां बढैत रहतैक - से वादा अछि। अपने लोकनि अपन प्रार्थना आ आशीर्वाद दुनू एहि मूहिम के अपार सफलताके लेल दैत रहबैक।

जय मैथिली! जय मिथिला!!

शुक्रवार, 8 जुलाई 2011

दिल्ली चलू! दिल्ली चलू!!

    
 २८ सेप्टेम्बर, २०११ - नवरात्राके पहिल दिन - एक एहेन जयन्ती पारब जाहि सँ समस्त मैथिली-मिथिलाके कार्यरत संस्था जिनक उद्देश्य भाषा, संस्कृति एवं समग्र मिथिला भूमि के कल्याण हेतु छन्हि - सभके एक प्लेटफार्मपर जोड़ैत एक एहेन अपूर्व कार्यक्रम दहेज मुक्त मिथिलाके तरफ सँ आयोजन कैल जाय जाहि के माध्यम सँ आब २१वीं शताब्दीमे...ं बेटा आ बेटी एकसमान छथि आ जन्म सँ पहिले कन्या-भ्रूण-हत्याके घोर विरोध स्वरूप दहेजरूपी दानवके अपन परिष्कृत समाजसँ दूर भगाबय लेल एकजूट आह्वान करब - जेकर संवाद नहि सिर्फ मिथिला बल्कि समस्त भारत, नेपाल, भूटान संग विश्व समुदायमें शंखध्वनि जेतैक आ लोकलज्जाके रक्षा करैत बहुतो मिथिलाके संतान एवं समग्र जनमानसमें एहि कुप्रथाके अन्त करैक स्फूरणा जगतैक।

स्थान के निर्धारण अबैवाला समयमें - जुलाई के आखिरी तक करब।

कार्यक्रमके प्रारूप:

१. मिथिला झांकी प्रदर्शनी - नगर परिक्रमा संग शुरु करैत मैथिली वा मिथिला संग जुड़ल दिल्लीमें जे कोनो प्रतीकात्मक चिह्न अछि ताहि ठाम वा एक विद्यापति के मूर्ति अनावरण करैक योजना ऊपर सेहो निर्णय करैत हुनकहि प्रतिमाके माल्यार्पण करैत कार्यक्रमके उद्‍घोष-उद्‍घाटन करब। चूँकि दिल्लीमें विद्यापतिक एहेन कोनो प्रतिमा पहिले सँ स्थापित अछि वा नहि से हमरा जानकारी नहि अछि, ताहिलेल अपने लोकनि जे दिल्ली सँ छी से एहि विन्दुपर मन्थन करैत निर्णय करी से आग्रह।

२. मिथिला खानपान स्टॅल के उद्‍घाटन जाहिठाम मिथिलाके विशिष्ट परिकार - व्यञ्जन आदिके खूबसूरत प्रदर्शनी संग सहभागी समस्त मिथिलावासीके लेल एक विशेष उत्सवके अवसर। एहिलेल खानपान सामग्रीके प्रबन्ध सेहो कोनो मैथिल द्वारा होइक चाही। एहेन स्टॅलमें आयोजक द्वारा न्यूनतम सामग्री प्रायोजित होइक आ तेकर बाद व्यवसायिक दृष्टिकोण सँ सहभागिताके संभावित संख्याके अनुसार निजी व्यवसायीके ठेका देल जाय।

३. बाल-बालिकाके कला प्रस्तुति - बाल्य नाटक, नृत्य, चित्रकला (मिथिला पेन्टिंग), मिथिलालिपि लिखनिहार बच्चाके प्रोत्साहन आ एहेन अनेक विन्दु जे केवल आ केवल बच्चा सभमें मैथिलीप्रति झुकावके बरकरार राखैक।

४. विचार गोष्ठी - विद्वान्‌ विचारक, समाज सेवी, नेतृत्वकर्ता, मिथिला आइकान, प्रवासी मिथिलावासी एवं अन्य के समूचा भारत-नेपाल एवं संभव होय तऽ अन्य देश सँ सेहो सहभागी बनबैत दहेज एवं किछु अन्य महत्त्वपूर्ण मुद्दा जाहिमें मिथिलामें पर्यटनके विकास - मिथिलावासी स्वयं नव-मिथिलाके निर्माणकर्ता आदि राखल जाय।

५. सांस्कृतिक कार्यक्रम - नृत्य, संगीत, नाटक, आदि। समूचा दिल्लीके कलाकार जे मैथिली संग जुड़ल छथि आ तदोपरान्त आवश्यकता अनुसार बाहर सऽ कलाकार के सहभागिता कराओल जाय।

६. दिल्ली सम्मेलनके सारांश - दिल्ली उद्‍घोषणा पत्र के प्रकाशन आ कार्यक्रम समापन।

उपरोक्त प्रारूप ऊपर अपन टिप्पणी आ सुधारके लेल सुझाव लेल प्रार्थना।

प्रार्थी - प्रवीण

एक पत्र मिथिलाके विद्वान्‌के नाम




आदरणीय शिवनाथ सर,-------

बहुत प्रसन्नता भेटल अपनेक फेशबुक पड़का प्रोफाइल देखि के!! अपनेक पुस्तक के माध्यम से आन्दोलनके बात पढला सऽ आरो जिज्ञासा जागल कि देखी एहेन महान्‌ शख्स जिनक आत्मविश्वास एतेक सार्थक कि पुस्तक सऽ आन्दोलन के बात करैत छथि... माँ सरस्वतीके कृपा अपने ऊपर बनल रहैन आ अपने अपन सोच आ अन्दाज दुनूमें कामयाब होइ इ प्रार्थना।
संगहि, हमरा लोकनि किछु युवा हालहि किछु मास पहिने सँ फेशबुकके पेजपर सऽ एक अति प्राचिन परंपरा जे आइ-काल्हि एकदम वीभत्स रूपमें मिथिला समाजके दीमक जेकां चटने जा रहल छैक - मिथिलामें सेहो आब सीताके जन्म लेबय सऽ पहिने ओहि धरामें दबाओल जा रहल छैक जेकर प्रभाव सऽ जनसंख्या २०११ प्रमाण स्वरूप कहि रहल अछि जे स्त्रीके संख्यामें घटाव भऽ रहल अछि। एकर प्रभाव एतबी हमरा अहाँ पर हावी अछि जे लोक अपन बेटीके पढाबैक इच्छा रखितो ओकर पढाई पर खर्च कम आ ओकरा नामके बैंक बैलेन्स बेसी बनाबैत छथि जाहि सँ विवाह कोनो नीक घरमें कराओल जा सकैक...! कतेक अनैतिक बात छैक - देखू, किछु गार्जियन बेटा आ बेटीमें कोनो फर्क बिना केने नीक सऽ नीक खर्च करैत बेटीके सेहो उच्चाधिकारी तक बनाबैत छथि, मुदा आब हिनक बेटीके लायक एक तऽ लड़का के कमी, दोसर जे यदि कोनो लड़का उच्चाधिकारी लड़की लायक भेटबो केलखिन तऽ आब ओहि त्यागी बापके लेल जे केओ जमाय बनथिन ओ व्यवस्थामें कतेक दहेज गनबेथिन आ ओ व्यवस्थाके कतय सऽ ओ बाप चुकेथिन... :(... तखन आब कि हेतैक... मजबूरीमें ओ उच्च शिक्षित बेटी अपन चुनाव स्वयं करती आ मिथिलाके बाहरो के लड़का बेसी संभव चुनि सकैत छथि जे पुनः मिथिलाके गरिमा के लेल एक चुनौती ठाड़्ह करत। हलांकि सीताजी सेहो राम संग वरण केलीह, लेकिन आबके सीता कतय ठहरती, मिथिलाके सम्मान सीताजी तऽ एहेन बना देलीह जे हमरा लोकनि गर्व करैत छी कि हुनकहि धरतीपर जन्म भेल... मुदा आजुक सीता तऽ शहर के मुँह देखिते देरी मैथिली तक बिसरि जैत छथि... कतेक दुःखद स्थिति छैक सर? सर! हमरा लोकनि आब केवल पुरनका सम्मानके भजा रहल छी, नव में हमर सभके अबस्था एहेन दरिद्री सऽ भरल रहत... कि इ नीक बात? सोची! अपने लोकनि एहि समाज के अग्रगामी निकास देनिहार व्यक्तित्व सभ थिकहुँ। यदि नहि किछु करब तऽ दोषी बनब। सभ संग किनारा कैल जा सकैछ, मुदा अपन आत्माके ज्ञान सदिखन हमरा लोकनिके कोसत।
सर! आब एहेन समय आबि गेलैक जे अपने लोकनि मिथिलाके राम मनोहर राय बनि एहि दहेजके दानव जे ताण्डव कय रहल अछि एकरा भगाउ आ ओ सुन्दर सौराठके परिकल्पना के पुनः जीवित करू। सौराठ एक नहि अनेक होइक आ मैथिल पुनः अपन गरिमाके रक्षार्थ एक बेर क्रान्ति के बिगूल बजाबैथ। हमर आग्रह!
दिल्लीमें एक कार्यक्रम रखने छी, २८ सेप्टेम्बर के! अपने दहेज मुक्त मिथिला नामक ग्रुप पर यदि नहि होइ तऽ आबी आ किछु समय हमरो लोकनिके पथ-प्रदर्शन करी, सेहो आग्रह!
अपनेक शुभेच्छूक,
प्रवीण चौधरी
कार्यकर्ता, दहेज मुक्त मिथिला

गुरुवार, 23 जून 2011

सौराठके सभा के संग दहेज मुक्त मिथिलाके संगठन विस्तार हेतु एक अभियान


सूचित करैत प्रसन्नता भऽ रहल अछि जे सुनियोजित संपूर्ण कार्यक्रम २० आ २१ जून के सौराठ सभामें दहेज मुक्त मिथिलाके तरफ सऽ करबैत आगामी समय के लेल सेहो कर्मठ सदस्य लोकनि अपन जुझारूपन सँ सौराठके सभा के लेल लगातार चिन्तन-मनन आ किछु-किछु सोच-विचार कार्यक्रम सभ प्रतिदिन करैत रहता। संगहि पंजिकारजी सभ के जीवन पर एक विस्तृत रिपोर्ट पेश करताह - आगामी समय में पंजिकारजी सभके संग एक गाम-गाम जागरण अभियान होइक से प्रयास करब आ पंजी प्रथाके महत्त्वके धूमिल होवय सँ सेहो बचायब - हलाँकि दहेज मुक्त मिथिलाके लेल इ कोनो मुद्दा नहि थिकैक... तदापि एक अमूल्य परंपराके रक्षा करय लेल आ संग-संग दहेज मुक्त मिथिलाके संगठन विस्तार हेतु एक अभियान चलायब से प्रस्ताव पारित कैल गेल।

सौराठ सभाके पुनरुत्थान हेतु दहेज मुक्त मिथिलाके प्रयास टा रहल - सौराठ ग्रामवासी एवं बहुत कारण अछि जे शायद सौराठके पुनरुत्थान के बहुत पैघ बाधक - एहि पर हमर किछु महत्त्वपूर्ण खोज अपने सभ संग शेयर करय चाहब।

सौराठ एक विकसित आ सम्पन्न गामके श्रेणीमें अछि। एहिठाम के बासिन्दा बहुत सम्भ्रान्त एवं उच्च वर्गके लोक सभ छथि। ब्राह्मण सभ में सामान्यतया एकता संभव नहि होइछ, से अति-प्रसिद्ध इ उक्ति एहिठाम चरितार्थ होइछ। ओना ८०% लोक सभ आत्मनिर्भर रहैत गाम सँ बाहर छथि आ थोड़-बहुत जे केओ छथि ओ आपसके ईरबाजीमें टूटल-फूटल-बिखरल छथि जाहि के कारण सौराठके सभा में हिनका लोकनिक न्यून सहभागिता रहैत छन्हि। एक समर्पित व्यक्तित्व डा. शेखर चन्द्र मिश्र छथि जिनक दुइ बालक जाहिमें एक नाबालग किशोर सेहो छथि - हिनकर सभक सहभागिता केवल एहि सभाके लेल काज करैत अछि... बाकी लोक सभ हिनक समर्पणके उल्टे मखौल उड़ाबैत आ अनेक बेफालतू-बदतमीज तोहमत लगाबैत एहि सभाके विरुद्ध अपन नेटवर्किंग करैत छथि - एहि के लेल जतेक अफसोस जतायब ततेक कम होयत। गामके युवक सभ सेहो एहि सभाके प्रति अत्यन्त उदासीन आ चौकपर बैसि हंसी उड़ौनै - सहभागी सभपर छिंटाकशी कसनै आ नहि जानि कतेको नकारात्मक विचार-विमर्श करैत छथि एहि सभाके कहियो पुनरुत्थान नहि होवय दैक लेल... शायद इ प्रायोजित दुष्प्रचार थीक। शायद एहिमें किछु छुद्र लोक जानिबूझि केवल शेखर बाबु संग ईरबाजी करैत हुनका सहयोग करैक बदला हुनक विरुद्ध अनेक कपोलकल्पित आरोप लगबैत बाहरो सँ कैल गेल प्रयास के कोनो सराहना नहि करैत ... एतय तक जे एक भागवत-भजन तक में सहभागी नहि बनैत एहि सभाके सभसँ पैघ दुश्मन बनल छथि।

सौराठके संग जुड़ल अछि अनेको सुप्रसिद्ध गाम जे मैथिली एवं मिथिलाके लेल कोनो ने कोनो प्रकार सऽ अपन पूर्वक योगदान लेल सेहो नामित छथि... हिनका ओहिठाम सौराठके समान मानसिक दूर्बलता बुझायल। भले ओ गाम पोखरौनी होइक, वा ओ गाम सतलक्खा, वा राँटी, मंगरौनी, लोहा, कपसिया... कोनो गामके लोकके बढि-चढि हिस्सा लैत नहि देखलहुँ। बहुत दुःखद बात लागल। कारणके खोज कयल तऽ पता चलल जे हिनका लोकनि जे एक समयमें अतिथि सत्कारके लेल सेहो अति नामित छलाह आब अतिथि देखब नहि सोहैत छन्हि। एकर आरो गहराई में देखलहुँ तऽ इ बुझायल जे आर्थिक गरीबी सँ बेसी समांग लेल झखैत मात्र बूढ-पुरान सभ केवल घरपर रहैत छथि जिनका सँ अतिथिके ओ पुरान परंपरा सत्कारवाला निर्वाह संभव नहि अछि। चलू... आब इ समस्या जायज सेहो भऽ सकैत अछि.... पहिले व्यक्तिगत जीवनके निर्वाह सभके प्राकृतिक अधिकारके बात होइछ। लेकिन समाजिक दायित्वके निर्वहन सेहो महत्त्वपूर्ण होइछ आ तेकरा हमरा लोकनि अपन छूद्रताके चक्कर में नहि छोड़ी से कामना आ जागरण अभियान लेल नारा होयत।

किछु भ्रान्ति सेहो दूर हेबाक जरुरी बुझैछ.... आब, लड़का धोती-कुर्ता-पाग पहिरि के सौराठमें आबि विवाह करय में अपन सम्मानपर चोट बुझैत छथि। जखन कि वास्तविकता सौराठ सँ विवाह भेनै एक सम्मानके बात छलैक। हलांकि एहि महत्त्वके लोक अपनहि धूमिल कयलाह... समय के माँग हेतैक... कोनो बेसी टिप्पणी बीतल बातपर केला सऽ फाइदा कि? आर एक बात, सौराठ सभामें विवाह के प्राथमिकता कदापि नहि रहल छल शुरुवात में... लेकिन इहो बात छैक जे शास्त्रार्थ एवं कोनो सान्दर्भिक विषय ऊपर समीक्षात्मक प्रस्तुति जे कोनो लड़का के विशिष्टताके बखान करैत छलैक ताहिपर लोक आकृष्ट होइत अपन परिवार वा सम्बन्धीमें कुटमैती तय करैत छलैक। क्रमशः ह्रास सभमें अबैछ... अवश्य हमरा लोकनि सेहो एहि शुद्धताके कतहु ने कतहु त्याग कयने रही आ कालान्तरमें सौराठ सभा अपन ताहि विशिष्ट रूपके छोड़ि केवल वैवाहिक सम्बन्ध मात्र लेल एक बाजारके रूप लऽ लेने छल। अति बेसी कोनो चीजके खराब होइछ। यदि सम्बन्ध के लेल सेहो मात्र प्रयोग होइत तऽ कोनो बात नहि, दहेजके खूल्ला माँग वर पसन्द भेलाके बाद कयनै आ खूलल बाजार में अपन बेटा के बेचनै यदि कोनो प्रबुद्ध समाजके सोचयपर, लिखय पर वा एतय तक जे प्रचार करयपर मजबूर कयलक कि सौराठ वरहट्टा थीक, लोक अपन बेटाके एतय बेचैत छथि... एतबा नहि, जे झरांठ सभ छलाह सेहो पाइके बले केकरो बेटीके किनयके काज सेहो करैत छथि... आदि-आदि। कतेक रास एहेन कूरीतिके प्रवेश भेल जे सौराठके आत्मा टा छोड़ि नहि जानि शरीरके कहिया नऽ दाह क्रिया एवं श्राद्ध सेहो कय देलक। :( आब, पुनः जन्म लेल तपस्याके जरुरी छैक जे करैक लेल शायद एक-दू-तीन गोटाके काज सऽ किछु संभव नहि छैक। हम तऽ कहब जे शेखर बाबु के संग यदि वैरी होय वा हुनक कोनो व्यवहार अपनेकेँ शंकास्पद बुझैत होइ तऽ हम सभ हुनका संग आग्रह करी जे एकबेर अपने सहयोग करी, आगू फलांके होवय दी आ देखी जे कि सभ होइछ.... वा प्रजातांत्रिक हिसाब सऽ चुनाव करी - समिति बनाबी, संगठन गाम-गाममें ठाड़्ह करी। शायद परिवर्तन हेतैक, पुनर्जन्म अवश्य हेतैक। मुदा एहि सभके लेल कर्मठ प्रयास जाहिमें त्यागके पूर्ण मात्रा होइक - केवल ताहि टा सँ हेतैक।

अहाँ सभ विश्वास नहि करब.... सौराठमें काज करेनिहार बहुत कम लोक आ पत्रकार के १००-२०० टाका दऽ के नाम छपबावयवाला बहुतो। अपने लोकनि शायद एहि बातपर विश्वास करब या नहि... दहेज मुक्त मिथिलाके नाम सऽ जेना कतेक पत्रकारके एलर्जी छलन्हि... कतहु नाम नहि... लेकिन अफसरशाहीके गुलाम बनैत केवल अफसरके नाम आ संवाद छापला सऽ - कर्मठ कार्यकर्ताके वा हुनक भावनाके कतहु कोनो जगह नहि देबाक धारणाके लेल वैमनस्यतापूर्ण पत्रकारिताके हम बहुत धिक्कारैत छी। अनेकों वर्ष सँ अकेले लड़ैत शेखर बाबुके संग दहेज मुक्त मिथिला दैत स्थानीय एकमात्र समर्पित कार्यकर्ता श्री प्रकाश चौधरीजी के आइ विगत २-३ महीना सँ हरेक विन्दुपर सहकार्य करैत सभाके उद्‍घाटन समारोह कराओल गेल, बाबा मन्दिरमें पूजा-अर्चनाके संग कुमारि-बटुक-ब्राह्मण भोजन, दूरके गाम कुर्सों-नदियामी-मछैता-महियाके लोक सभ आबिके पूरा सभामें बाबाके जयकार आ मिथिलाके झंकार के अलख पसारलाह... लेकिन स्थानीय स्तरके एहि प्रकारके कोनो उत्साह नहि, कोनो प्रयास नहि... धिक्कार अछि एहेन निष्क्रिय आ असमर्थ समाजके। धिक्कार अछि एहेन फरेबसँ भरल तथाकथित विकसित समाजके। धिक्कार अछि एहेन सोचके जे आपस जुड़य लेल कम आ तोड़-फोर करैक लेल बेसी सक्रिय छथि।

हम तऽ खूब प्रशंसा करब एहि फेशबुक के जे कम से कम हमरा लोकनि के एहेन नीक संवेदनशील मित्र सभ सँ संगठन बनाबयलेल प्रेरणा देलक आ बहुत नीक-नीक लोक सभ सँ भेंटघांट, दर्शन, प्रेमके आदान-प्रदान आ फोटो सेहो संग-संग खिचेलहुँ, लोक सभके खूब सेवा कयलहुँ, सभ व्यवस्थामें अपने लोकनि तत्पर रहलहुँ - राजुजी, सोनुजी, विकासजी, राकेशजी.... ताहि बीच पंकज भाइ आ कमलेश बाबुके कार्यक्रम ठीकठाक भऽ रहल अछि कि नहि तेकर चिन्ता - बुझू अपनहि हेरायल रहलहुँ। पतो नहि चलल आ रात्रिके साढेसात बाजि गेल... हमरो संगमें मिथिलाके महान्‌ विभूति श्री धीरेन्द्र प्रेमर्षि - महान्‌ समाजसेवी डा. सुरेन्द्र ना. मिश्र, श्री देवेन्द्र झा आ नेपालके अति जिज्ञासू आ मित्र पत्रकार श्री कमल रिमाल आ पूर्ण समर्पित चालक श्री काजी गुरुजी छलैथ जे एहि सभाके लेल नेपाल सँ संगहि सौराठ तक अयलाह आ धीरेन्द्र भाइजीके सुन्दर मुखारवृन्द सऽ दहेज मुक्त मिथिलाके उत्पत्ति, प्रयोजन आ प्रयोग ऊपर समीक्षा सुनि हृदय आनन्दित भेल। आरक्षी निरिक्षक महोदयके संक्षिप्त मुदा महत्त्वपूर्ण भाषण मनपर विजय प्राप्त कयलक। हुनक ओ सुन्दर उदाहरण - पक्षीके नाम नहि अछि याद मुदा कोनो अंग्रेज कविके अंग्रेजी कवितामें ताहि पक्षीके सुन्दर चर्चाजे उड़ैछ ओ आकाशके सभसे बेसी ऊँचाईमें मुदा ओकर दृष्टि सदिखन अपन उद्‍गमविन्दु पृथ्वी पर रहैछ.... बहुत पैघ सन्देश देलाह ओ समग्र मैथिल ब्राह्मणके जे एहेन वैज्ञानिक महत्त्वके वंशावली परंपरा आ वैवाहिक निर्णय के सिद्धान्तके अपनाओल एहि प्रजातिके एतेक पुरान परंपराके स्वयं इ सभ आधुनिकताके ऊँच उड़ान में परित्याग कय रहल छथि जे दुखद अछि आ ओहि पंछीके समान किछु सोच आनैत आगामी दिवसमें एकर स्वरूप पुनः अपन पुरान गरिमाके पाओत से शुभकामना हृदयके जीत लेलक। जिलाधीशजी सम्भ्रान्त एवं सशक्त रूप सऽ एकर रक्षाके लेल आह्वान सेहो कयलाह। व्यक्तिगत रूप में हुनक प्रतिबद्धता जे दहेज मुक्त मिथिलाके काज वास्तविकताके धरातलपर कराबैक लेल जे सहयोग चाही से देताह... ओह, महोदय! अहाँके हम आजीवन ऋणी रहब। आरो महत्त्वपूर्ण वक्ता लोकनि बजलाह आ संयोग सँ महादेव हमरा लोकनिक लाज अपनहि बचौलन्हि जे १०० जोड़ी विवाह करबैक लेल संकल्पित हमरा लोकनिक दहेज मुक्त मिथिलाके एको जोड़ी उपस्थिति नहि देखेलाक बाद स्वयंस्फूर्त रूपमें श्री गणपति झा जे अंधराठाड़ी सऽ जिला पार्षद सेहो छथि अपन इन्जिनियर बेटाके भरल सभामें स्टेज पर बजाके सभके समक्ष हुनक विवाहके अवस्था भेला उपरान्त बिना दहेज के करब से घोषणा करैत दहेज मुक्त मिथिलाके उद्देश्यके ऊपर अपन मोहर लगा देलाह। जय जय!! दहेजके विन्दुपर बाबुसाहेब सेहो वृद्ध मुदा खूलेआम सभके सुनबैत बजलाह जे श्रोत्रिय वंशके उदाहरण सऽ सभ केओ सिखू - दहेजके कोनो व्यवहार नहि होइछ हिनका लोकनि में.... कोनो आडंबर सेहो नहि होइछ... सौराठके जे पुरान गरिमा छल तेकरा वापस लाबैमें केवल भाषण नहि बल्कि शपथ ग्रहण करै जाउ जे अपन संतानके बेचब नहि, केकरो बेटीके घरमें लाबैक लेल शर्त नहि लगायब, बल्कि अपन कुल-खानदानके मर्यादा के रक्षा करनिहैर बेटीके पुतोहु बनाके घरमें सम्मानपूर्वक गृह-प्रवेश करायब। ग्रेट रियली!!

अगिला सालके लेल टार्गेट लेलहुँ हमरा लोकनि जे १०० दहेज मुक्त विवाह करबायब - एहि प्रतिबद्धताके रक्षा अपने लोकनिक सहयोग आ अवश्य हमर ईष्ट महादेवके कृपा सऽ संभव होयत, एतेक बात कहैत आजुक हमर इ समीक्षात्मक रिपोर्ट के विराम दैत छी।

नमः पार्वती पतये हर हर महादेव!

सोमवार, 20 जून 2011

सभके लेल सौराठ सभागाछीमें आबय लेल आमंत्रण



२० जून सँ शुरु भऽ रहल अछि - उद्‌घाटन ४ बजे अपराह्न बिहारके गणमान्य नेतागण द्वारा होयत। अपने एहि समारोहमें २० जून सँ २९ जून धरि कहियो अवश्य सहभागी बनी। दहेज मुक्त मिथिला अपन सत्याग्रह मिथिलाके दहेजक द...ानवसँ मुक्ति दिलावयलेल केवल जनमानसमें जागृति फैला के जे कोनाके दहेज आइ एक कुप्रथा बनि गेल अछि, क...ोना एकर मारि गरीबी रेखा सँ नीचां रहनिहार लोकके जान लऽ रहल छैक, कोना बेमेल शादी भऽ रहल छैक, कोना लोक पाइ के बलपर दूल्हा खरीद कय रहल अछि, दहेजमें पाओल धन-संपत्तिके कोना दुरूपयोग कैल जैछ आर कोना समाज पाछू छूटि रहल अछि एहि भ्रष्ट सामाजिक-पारंपरिक-व्यवहारसँ। समय आबि गेल अछि जे एहि बदतर परंपराक स्वरूपके बदलल जाय आर एकर शुद्ध-सात्त्विक अर्थके सकारल जाउ - स्वेच्छा आ बिन-दबावपूर्ण-माँगके देल उपहार जे कन्यापक्षके द्वारा वरपक्षके देल जैछ। एहि समाजके अनावश्यक देखावटी आ आडंबरपूर्ण खर्चके बरबादी करयबाक कोनो आवश्यकता नहि अछि। इ सभ केवल आम अपील अछि दहेज मुक्त मिथिलाक - केकरो ऊपर कोनो जबरदस्ती दबाव वा कारबाही नहि जे केकरो आत्म-स्वायत्तताके विरुद्ध होय। एकर अलावे, हम सभ पंजीकरणके विधिके कंप्युटरीकृत करैके प्रोत्साहित करब आर पंजियनके महत्त्वपूर्ण परंपराके बचेबाक लेल प्रयास सेहो। अहाँ सभके आमंत्रित करैत छी एहि आबयवाला कार्यक्रम जे प्रतिदिन १० बजे विहान सँ अपराह्न ५ बजेतक सभाकालमें होयत। आउ आ जुड़ू दहेज मुक्त मिथिलाके एहि मंचपर आर संगहि हजारों लोकके भीड़-भरल मिथिलाके सुन्दर समारोहके आनन्द लियऽ। सौराठ एहि दस दिनक लेल पर्यटनके स्थल बनैक - अपन मित्र आ स्वजन लोकनिके सेहो बजाउ, संगहि अपन विचार आ दृष्टिकोण उपरोक्त समग्र तन्त्र ऊपर बेहतरी के लेल हमरा लोकनि संग बाँटू। यदि मानी तऽ, हमरा लोकनि एहि प्रयासके आनो-आनो ठाम विस्तार दी जाहिमें दहेज मुक्त मिथिला अपने लोकनिकेँ संग-सघेबाक लेल सदैव प्रतिबद्ध अछि।

दहेज मुक्त मिथिलापंजी भवन, सौराठ सभा,
मधुबनी।
 

शनिवार, 16 अप्रैल 2011

दहेज मुक्त मिथिला (स्थानीय सौराठ विकास समिति )

उपस्थित सदस्यगण! श्रेष्ठ, मित्र एवं अनुज!!

हार्दिक स्वागत एवं अभिनन्दन!

आजुक मिटिंग निरंतरता में अछि आ आब मैथिलीके मिथिलाक चौरी सऽ निकलि दहेज मुक्त मिथिलाके एहि दलानपर अपने लोकनिक पुनः स्वागत अछि। हमरा लोकनि लगभग हर विन्दुपर चर्चा कयलहुँ आ बहुतो रास बातके निर्णय कयलहुँ। सौभाग्य हमरा लोकनिक जे एहि मिटिंगमें श्री कृपानन्द झा सर के अध्यक्षता भेटल। श्रेष्ठ संरक्षक लोकनिक सान्निध्य भेटल। मुद्दा पर आबी।

१. सौराठ सभा के पुनरुत्थान करब से निर्णय लेल।
२. दहेज मुक्त मिथिला स्थानीय सौराठ विकास समिति एवं अन्य संस्थासभ संग मिलिके सहकार्य करब से निर्णय लेल।
३. दहेज मुक्त मिथिलाके स्वतंत्र संगठन बनायब से निर्णय लेल।
४. दहेज मुक्त विवाह के प्रोत्साहन देब से निर्णय लेल।
५. संगठन विस्तारके क्रममें स्थानीय एवं बाहरी सदस्य सभ के जोड़ब से निर्णय भेल। स्थानीय जिम्मेवारी सऽ लऽ के विभिन्न जगहके जिम्मेवारी सदस्य लोकनि सहर्ष स्वीकार कयलाह, जेकर सूची अलग सऽ पेश कयल जायत।
६. सदस्यता शुल्क संरक्षक सदस्य - ५१०१/-, संस्थापक सदस्य - २१०१/-, आजीवन सदस्य ५०१/- एवं साधारण सदस्य १५१/- राखब से निर्णय लेल।
७. सौराठ उपरान्त दहेज मुक्त विवाह समग्र मिथिलावासी हेतु बिना कोनो जाति-पाँति के भेदभाव रखने केवल मैथिली भाषाभाषीके लेल भारत तथा नेपालके विभिन्न स्थानपर सभा-आयोजना करब से निर्णय लेल।
८. सदस्य सभ के-कोना सदस्यता ग्रहण करता से निर्णय लेल, जेकर अलगे लिस्ट बनाओल जायत, सदस्यता शुल्क तत्काल श्री प्रकाश चौधरीजी के खाता संख्या ११३०२५९४५०२ - खाताधारक: प्रकाश चन्द्र चौधरी, बैंक: स्टेट बैंक अफ ईण्डिया, रहिका शाखा में कैल जाय से निर्णय भेल।
९. संगठन विस्तारके क्रममें स्थानीय नागरिक सभके सदस्यता अभियान हेतु कार्यकर्ता परिचालन, प्रचार-प्रसार हेतु आवश्यक पहल एवं आगामी २२ मई के सौराठमें सौराठ विकास समिति संग मिटिंग से निर्णय भेल।
१०. सौराठके सफलता हेतु कार्यक्रम २०-२९ जून, २०११ धरि सदस्य सभके सक्रिय योगदान सऽ स्थानीय सौराठ विकास समिति संग सहकार्य करैत सभामें एक शिविर तथा मंच दहेज मुक्त मिथिलाके तरफ सऽ होयत से निर्णय भेल।

एकर अलावे अनेको विन्दुपर सभ आदरणीय सदस्य सभक विचार भेटल आ ताहि विचार के एक बेर फेर सऽ समेटैक लेल इ थ्रेड के निर्माण कयल गेल, आब अपने लोकनि अपन-अपन विचार आ मिटिंगके संस्मरणके नीचां कमेन्टके रूपमें पोस्ट करी से आग्रह करैत फोरम के खोलैत छी।

धन्यवाद! जय मैथिली! जय मिथिला!!
परवीन नारायण  चौधरी

गुरुवार, 2 दिसंबर 2010

विद्यापति स्मृति पर्व समारोह नॉएडा


समस्त  मैथिल मिथिला  वाशी के ,श्रेष्ठ गन के नमस्कार छोटका नन्हां  बोवा - बची सब के प्यार भरल  शुभ  आशीष)---

          जय  मैथिल    जय  मिथिला
समस्त मैथिल,  मिथिला वाशी  अपनेक सब गोटे  आमंतरण  छी ,
नॉएडा  स्टेडियम के प्रांगन में दिनांक -०४ - १२- २०१० के 
समय -  रात्रि समय के  ७ बजे  से भोर  तक


विद्यापति स्मृति पर्व समारोह 
 के  आयोजन कैय्ल गेल अछि ,
अहि  समारोह  में  अप्पन  मिथिला  के  जानल  - पहचानल  गायक वा गायिका  सब  भाग लेतैथ , हुनक  मनोबल  बढाबाई के लेल  , ओही में  अहूँ लोकेन अप्पन  समस्त  परिवारक संग  आबी के  हुनक लोकेन  के स्वागत  करी    संगीतक  आनंद  उठावी ,
     
   जय  मैथिल  ,  जय  मिथिल

गुरुवार, 18 नवंबर 2010

विद्यापति स्मृति पर्व समारोह काल्हि सं पटना मे

पटना काल्हि सं तीन दिन धरि मिथिला संस्कृति सं सराबोर रहत। सहभागी लोकनि मैथिली गीत-संगीतक संगहि तिलकोरक तरुआ, सकरौरी, साम आ मखानक खीर कें आनंद ल सकताह। प्रतिष्ठित मैथिली संस्था चेतना समिति के तत्वाधान में काल्हि सं 57म विद्यापति स्मृति पर्व समारोह शुरू भ रहल अछि । एहि मे मिथिला केर सांस्कृतिक संपन्नता करीब सं देखबाक अवसर भेटत।
चेतना समिति के अध्यक्ष विजय कुमार मिश्र कें कहब छन्हि जे पहिल दिनक कार्यक्रम विद्यापति भवन में आयोजित हएत। उद्घाटन करताह पूर्व मुख्यमंत्री डा. जगन्नाथ मिश्र आर पटना उच्च न्यायालय कें न्यायमूर्ति मृदुला मिश्र मुख्य अतिथि रहतीह। दोसर दिन भोरे दस बजे सं विद्यापति भवन में 'मैथिली बाल साहित्य : स्थिति एवं संभावना' विषय पर विचार गोष्ठी आयोजित हएत। दोसर दिनक मुख्य कार्यक्रम अभियंत्रण सेवा संघ के प्रांगण में हएत। तेसर दिन एही प्रांगण में भोरे दस बजे सं बाल मेला आर दुपहर तीन बजे सं आनंद मेला आयोजित हएत। तेसर दिनक मुख्य कार्यक्रम केर उद्घाटन बिहार विधान परिषद के सभापति पं. ताराकांत झा करताह। ओकर बाद अरविन्द कुमार अक्कू लिखित 'झिझिर कोना' नाटक खेलाएल जाएत जकर निर्देशन कएने छथि कौशल कुमार दास। एहि बेर त्रिलोकीनाथ मिश्र कें संस्कृत भाषा साहित्य, रामदेव झा कें मैथिली भाषा साहित्य, रमा दास कें संगीत-नृत्य-नाटक सम्मान, विमला दत्त कें मिथिला चित्रकला सम्मान, गणपति मिश्र कें विशिष्ट सम्मान, भाग्य नारायण झा कें चेतना सेवी सम्मान आर महाप्रकाश कें कीर्ति नारायण मिश्र साहित्य सम्मान देल जएतनि। एतबे नहि, डा. ताराकांत झा वियोगी कें यात्री चेतना पुरस्कार, प्रभा मेमोरियल ट्रस्ट कें सुलभ समाज सेवा आ ऋषि वशिष्ठ कें डा. महेश्वरी सिंह 'महेश' पुरस्कार सेहो देल जएतन्हि। श्री मिश्र महाकवि विद्यापति केर जयंती कें पहिल बेर राजकीय समारोह के तौर पर मनएबा लेल राज्य सरकार के प्रति आभार प्रकट कएलनि अछि। हुनकर आग्रह छन्हि जे मैथिललोकनि बेसी सं बेसी संख्या मे एहि समारोह में शामिल होथि।

फ़िल्म जगत पर अपनेक स्वागत अछि।