dahej mukt mithila

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शनिवार, 28 सितंबर 2013

ककरा कहबई के सुनतै सब लागई बहिर अकान सन


ककरा कहबई के सुनतै सब लागई बहिर अकान सन -

ककरा कहबई के सुनतै, सब लागई बहिर अकान सन
आब बुझैया भारतक हालत, भ गेल छै कंगाल सन
चुनाव लड़ई लेल ठाढो होई छै, सबटा चोर उच्चका सन
ककरा राखु, ककरा छोरु, विधिना भ गेल वाम सन
मोन त होईया, तेना हटाबी, मडुआ सन किछु पटुआ सन
ककरा कहबई के सुनतै, सब लागई बहिर अकान सन 

स्वतंत्रत भेला पर देश ख़ुशी भेल, ख़ुशी होयते फेर दुखी भेल
नहि बितल किछुओ दिन, देश दू भाग तत्क्षण बटी गेल
बटिते देरी खून खारापा, कतेक मरि गेल कतेक कटी गेल
ख़ुशी के आँशु दुखी में बटी गेल, कतेक घर के नामोनिशान जे मिटी गेल
देश के किछु भागक हालत, भ गेल छल श्मशान सन
ककरा कहबई के सुनतै, सब लागई बहिर अकान सन 

माछ भात के बात त छोडू, सागक नै अछि कोनो जोगार
देशक हालत एहन अछि केने, मंहगी चढ़ल अछि बीचे कपार
बाज़ार आ हाटक नामे सुनि क, पकडैत छि अपन कपार
नेता आ राजनेता सब के, नै छनि किनको एकर विचार
इ सब सोची माथ काज नै करैया, भ गेल छि सुन्न अकान सन 
ककरा कहबई के सुनतै, सब लागई बहिर अकान सन 

पहिले जे छल देशक हितगर, नाम ओकर छल सेनानी
आब कियो छथि एही तरहक ? जकर होई कियो दीवानी
हिनकर सबहक हालत देखि क, मोन करैया खूब कानी
अपना लेल इ सब खूब कमेला, जनता चाहे भरै पानी
आब कहु मोन केहन लगैया ? लगैया उजरल बांग सन
ककरा कहबई के सुनतै, सब लागई बहिर अकान सन 

संजय कुमार झा 
"नागदह"

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मंगलवार, 24 सितंबर 2013

एक जुट होउ मिथिलावासी, तखनहि बनत मिथिला राज्य



एक जुट होउ मिथिलावासी, 

तखनहि बनत मिथिला राज्य!

आ नहीं,

 त अपने में होईत रहु विभाज्य !!

आ करैत रहु,

 हमरा चाही मिथिला राज्य !

हमरा चाही मिथिला राज्य, 

हमरा चाही मिथिला राज्य !!

मिथिला के भविष्य त,

 उठाये लेने छथि जगदीश !

आबो त सब मिलि - जुलि क, 

हाथ जोड़ी नवाऊ शीश !!

जतेक संघ आ पार्टी, 

सब अपने -अपने करैत रहु तीन - पांच !

ऐना जां करैत रहब,

 त कखनो नै मिळत घांच !!

बेसी हम की कहु----, 

अपने सब छि बड्ड बुझनुक !

कनी ओहो-----, कनी तोंहू----,  

कनि कनिक सब झुक !!

जे सब एही काज में झुकबहक,

 तकरे नाम उठ त !

आ नहि----, 

त सबटा कबिलपंथी घुसरि जे त !!

एतै कियो वीर बहादुर, 

सब के कर जोड़ी निहोरा करत !

आ मिथिला के लोक के------,

 एक जुट करैत, राज्य बनेबे टा करत !!

फेर पुछै छि----,

 बात बुझै छि ----? 

केना बनेबई मिथिला राज्य !

एक जुट होउ मिथिलावासी, 

तखनहि बनत मिथिला राज्य !! --3  


संजय कुमार झा

 "नागदह" 

सोमवार, 23 सितंबर 2013

दहेज़ प्रथा

दहेज़ प्रथा   
इस बीमारी का तुम भी
शिकार तो हुई थी
नाना जी के लिए तुम भी
तो भार बनी थी
जरा सोचो तुम
उस समय हाल क्या हुयी थी
नाना नानी का हाल भी
बदहाल तो हुयी थी 
धुप भी यही था
छाव भी यही थी
रास्ते में कंकर भी
अबसे बड़ी थी 
जब आते थे थककर
वो रिश्ता को खोजकर
ना कहते ही आपका
हाल क्या हुई थी 
आप नारी हो
नारी की कीमत तो समझो 
पिताओ की मन की
पीड़ा तो समझो
इस बीमारी को भगाओ माँ
काली तुम बनकर 
मिटादो दहेजो की
लालच को डटकर 
तुम्ही से तो लोगो को
प्रेरणा मिलेगी
दहेज़ की बीमारी
दूर तो भगेगी
बेटी के होने पर
चिंता ना होगी
चारो तरफ
खुशिया ही खुशिया मनेगी 
संजय कुमार झा "नागदह" २५@०५@२०१३ 

रविवार, 22 सितंबर 2013

उठो मिथिला के अमर सपूतो


उठो मिथिला के अमर सपूतो
 पुनः मिथिला का निर्माण करो,

जन-जन के जीवन में फिर से नई स्फूर्ति, नव प्राण भरो,
नया प्रात है नई बात है नई किरण है ज्योति नई है,
नई उमंगें नई तरंगे नई आस है साँस नई है,
युग-युग के मुरझे सुमनों में नई-नई मुसकान भरो,
उठो मिथिला के अमर सपूतो 
पुनः मिथिला का निर्माण करो !

डाल-डाल पर बैठ विहग कुछ नए स्वरों में गाते हैं,
गुन-गुन-गुन-गुन करते भौरे मस्त हुए मँडराते हैं,
नवयुग की नूतन वीणा में नया राग नवगान भरो,
कली-कली खिल रही इधर वह फूल-फूल मुस्काया है,
धरती माँ की आज हो रही नई सुनहरी काया है,
नूतन मंगलमयी ध्वनियों से गुंजित जग-उद्यान करो,
उठो मिथिला के अमर सपूतो 

पुनः मिथिला का निर्माण करो !

माँ दुर्गा और माँ जानकी का पावन मंदिर, यह संपत्ति तुम्हारी है,
तुम में से हर बालक इसका रक्षक और पुजारी है,
शत-शत दीपक जला ज्ञान के, नवयुग का आह्वान करो,
जन-जन के जीवन में फिर से नई स्फूर्ति, नव प्राण भरो,
उठो मिथिला के अमर सपूतो

 पुनः मिथिला का निर्माण करो !