dahej mukt mithila

(एकमात्र संकल्‍प ध्‍यान मे-मिथिला राज्‍य हो संविधान मे) अप्पन गाम घरक ढंग ,अप्पन रहन - सहन के संग,अप्पन गाम-अप्पन बात में अपनेक सब के स्वागत अछि!अपन गाम -अपन घरअप्पन ज्ञान आ अप्पन संस्कारक सँग किछु कहबाक एकटा छोटछिन प्रयास अछि! हरेक मिथिला वाशी ईहा कहैत अछि... छी मैथिल मिथिला करे शंतान, जत्य रही ओ छी मिथिले धाम, याद रखु बस अप्पन गाम - अप्पन बात ,अप्पन मान " जय मैथिल जय मिथिला धाम" "स्वर्ग सं सुन्दर अपन गाम" E-mail: apangaamghar@gmail.com,madankumarthakur@gmail.com mo-9312460150

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शनिवार, 14 जुलाई 2012

फिल्म बनेबा स समृद्घ होयत मैथिली : विधायक

फिल्म बनेबा स समृद्घ होयत मैथिली : विधायक

दरभंगा, निज संवाददाता : नगर विधायक संजय सरावगी कहलैन जे कि मैथिली में फिल्म बनेबा स मिथिलावासि केर भाषा मैथिली बेशि समृद्ध होयत। ओ शुक्र दिन राज किला स्थित भगवती कंकाली मंदिर केर समक्ष मैथिली फिल्म 'प्रेमक कहानी' के मुहूर्त म बाजि रहल छ्ल। नारियर फोरि क ओ मुहूर्त केर विधि विधान केर साथ शुरुआत केलैन आ अहि गप्प पर खुशी जाहिर केलैन जे कि स्थानीय रूपा म्यूजिक कंपनी मैथिलि फिल्म निर्माण केर दिशा म कदम उठा क्षेत्र केर लेल महत्वपूर्ण कार्य क रहल अछि। नगर विधायक फिल्म केर निर्माता टुन्ना कुमार, निर्देशक पी. कृष्णा केर साथ कैमरामैन चंद्रभूषण यादव आ अन्य कलाकार सब केर हौसला अफ़जाइ करैत कहलैन जे कि ओ मिथिला केर संस्कृति केर आ्गु करबा आ लोकप्रिय बनेबाक केर दिशा में निक उत्साह स काम करैथ हुनका सफलता जरूर भेटतैन। युवा सब केर फिल्म निर्माण म आगु एबा स मैथिली सिनेमा केर बेहतर भविष्य केर संकेत देलैन। ाहि मौका पर कलाकार साक्षी, नेहा, खुशबू आदि पर कतेको दृश्य सब सेहो फिल्माओल गेल।

समदिया - रोशन कुमर झा

मंगलवार, 24 अप्रैल 2012

SITA KER GAAM , JEKAR MITHILA ACHHI NAAM

मिथिलाक गाम घर :

जाहि ठाम सीता केर अछि गाम ,
जिनकर पाहून छैथ राम .
ओही नगरी केर भैया , 
अछि पावन मिथिला नाम .

मंडण - याची केर जतय अछि दलान यौ ,
विद्यापति केर आँगन देखू एलाह भगवान् यौ .
हुनकर उगना अछि नाम , करियौ हुनका सव प्रणाम .
ओही नगरी केर भैया ,
अछि पावन मिथिला नाम .

कमला कोसी बहई , जतय बलान यौ ,
सव दिन करी हम ओतय अस्नान यौ ,
सदिखन जपी सीता-राम , कर जोरी करै छि प्रणाम ,
ओही नगरी केर भैया ,
अछि पावन मिथिला नाम .

रविवार, 22 अप्रैल 2012

लेखनी प्रतियोगिता :

मिथिलाक गाम घर :

लेखनी प्रतियोगिता :

समस्त रचनाकार लोकनि स विनम्र आग्रह जे की " मिथिला गाम घर " द्वारा आयोजित लेखनी प्रतियोगिता म भाग ली .
लेखनी मे रचना स्वरचित हेबाक चाहि . ओ रचना कोनो ब्लॉग आ पत्रिका मे पहिने स प्रकाशित नहीं हेबाक चाहि .
लेखनी मे कथा , कविता , गीत , ग़ज़ल आ रुबाई लिखल जा सकैत अछि ?
रचना देवनागरी आ मैथिलि भासा मे हेबाक चाहि .

विजेता केर "मिथिलाक गाम घर " केर सौजन्य स प्रमाण पत्र आ १००१ टका पुरूस्कार केर रूप मे प्रदान कैल जायत .

निर्णायक मंडली - डा. शेफालिका वर्मा , डा. किशन कारीगर , प्रवीन नारायण चौधरी , हितेंद्र गुप्ता 

निर्णायक मण्डली केर फैसला सर्व मान्य रहत आ ओही पर कोनो तरहक चुनौती नहीं देल जा सकत .

धन्यवाद 
मिथिलाक गाम घर .


APNE SAB SA AAGRAH JE KI APAN RACHNA FACEBOOK KER MITHILAK GAAM GHAR GROUP PAR PATHAABI .
                                                    VAA MAIL KARI,

                                           MITHLAKGAAM@GMAIL.COM PAR 

बुधवार, 14 मार्च 2012


मिथिलाक गाम घर 



माँ जानकी केर जनम भूमि मिथिला .  जाही थाम चाकर बनी स्वयं भगवान् शिव संकर उगना रूप धरी आयल छलाह . मुदा ताहि धरती केर आजुक दीन में इ विडंबना अछि जे की अपन अधिकार केर लेल दर दर भटकी रहल अछि मुदा ओकर गुहार सून्निहार कियोक नहीं छैक .


विगत किछु दीन स मिथिला केर पैघ -पैघ मंच पर इ सुनबाक भेटल जे की बिहार सरकार के मैथिलि बीसी पर ध्यान देबाक चाहि आ मास्टर सव केर सेहो बहाल करबाक चाहि .


हम हुनका स आ समस्त मिथिला वासी स कहैक लेल चाहब जे की कखन धरी तक आधा टा सोहारी आ नून खा खा क पेट भरित रहब .


अहि गप में कोनो दू राइ नहीं अछि जे की हमरा सब गोटे केर लेल ई बद्द गर्व केर गप जे की भारत सरकार अहि भाखा केर अष्ठम सूची में मानी ललक , बिहार सरकार ओकरा लागू कैलक मुदा की माँ मैथिलि मात्र एत्बाही टा केर लेल हक़दार अछि ?


कहैक लेल ता सब कियो इ कहैत छि जे की भारते ता क नहीं अपितु सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड केर सभ्यता म स एक टा प्राचीन सभ्यता अछि मिथिला के . तखन मिथिला कियैक आध पेटू भ रहती .


असाम , बंगाल, ओरिसा . आ कतेको एहन राज्य अछि जाहि ठाम मात्र सिक्छा केर भाखा हुनक अपन भाखा छियें . मुदा मिथिला वासी मात्र बिहार सरकार द्वारा एक टा बिषय केर अपनाओल गेल पर कियक नहीं बिरोध करैत छि .


जखन भारत केर आन राज्य में भ सकैत अछि ता मिथिला आ सम्पूर्ण बिहार में एहन कियक नहीं भ सकैत अछि जे की सब टा विषय मैथिलि में होई . मैथिलि केर माध्यम बनेबाक लेल हम सुब हो - हल्ला कियैक नहीं का रहल छि ?


उठू , जागू एखन धरी तक बेसी देर नहीं भेल अछि बिहार सरकार केर बिरोध क ओकरा बता दियू जे की आब हम सब अपन अधिकार नहीं छोराब बसरते हमरा सब केर किछुओ कियक नहीं करे परत .


आबू एक साथ मिल जुली के संक्नाद करी आ बिहार सरकार केर देखा दी जे की तोरा हमर जरूरत छौक नहीं की हमरा तोरा स .

बुधवार, 29 फ़रवरी 2012


मिथिलाक गाम घर 

मैथिल बंधू सव केर नमस्कार ,

हम एक टा सरस सलिल सनक मासीक मैथिलि पत्रिका निकालबाक बारे में सोची रहल छि .
अपनेक सब सा आग्रह जे की अहि पत्रिक्का केर की नाम राखाल जाय ताहि में मदद करू .
एक टा बात अओर अपने इहो कहबाक कास्ट करू जे की अपने लोकिन अहि पत्रिका में की सामावेश कैल जाय जाहि सा पाठक सब केर पढाई में नीक लागते .

हमरा पत्रकारिता केर कोनो ताजुर्ब्बा नहीं अछि . अहि हेतु हम ओही मैथिल भाई बंधू सा आग्रह कर्बैं जे की कोनो ने कोनो पत्रिका सा जूरल होइथ से मार्ग दर्शन करी जे की पत्रिका निक्काल्बाक लेल की सब कराय पारित अछि . 

अपनेक मार्ग दर्शन करी आ माँ मिथिला केर लेल आ मैथिलि केर लेल करबाक हाम्रो अवसर दी .

सोमवार, 27 फ़रवरी 2012


मिथिलाक  गाम घर :


हमारा लग रहब : १०


मिथिलाक गाम घर :   प्रणव भारी डेग उठबैत बीदा भेल ।  किम्ह्रो कियो नहीं छलैक , नहीं त लाजे आरो मरी गेल रहित ।  पूब मूहक दर्व्वाज्जा स हटी क हवेलिक पछूआर देने अपन पछबारी टोल दिश बीदा भेल ।  मुदा बारीक पछिला गाते पर कियो टोकाल्कैक -- किताब्बे बदला बदली म डांट सुनी गेलहु च च च .....




आन्हारो म माला क स्वर चिनीह लेल किक प्रणव ।  बारीक दर्ब्बजा केर चौखट पर डार पर दूनू हाथ रखने ठाढ़ छलैक ।  ओकरा डेग आगू बढबैत देखि  फेर टोकाल्कैक --- अहू घर स अजीब सम्बन्ध छोऊ तोहर । कानी देह छोला पर हम छाती मारी देने रहियौक आ आई कने कित्ताब्ब मंगला पर बाबूजी दर्ब्बज्जे स खेहारी देल्खून । 




प्रणव तहियो कोनो उत्तर नहीं देलक  । आगू बढ़ चाहलक त माला आर लग सहटी आय्लैक --- मुदा आई चाट नहीं मार्बौक हम ।  छू ले , छु क देख ने । हल्लो नहीं करबौक । ककरो नहीं कहबैक आ ने .....




प्रणव के लागले जेना  हाथ पकरी खीची लेतैक माला । कालू चौधरीक डाट सूनी जे डेग लोथ भ गेल छलैक , फेर जोर स मारलाकैक ।  परायल परायल अपन आँगन में आबी क ठाढ़ भेल ।


दौराल हक्मैत आबैत देखि मामी टोकाल्कैक -- की भेल बौऊ ?  एना परायल कियक आय्लाहू ?
प्रणव कोनो जवाब नहीं देलकैक । की जवाब डिटेक ? चुपे रहल ।






मुदा गामक लोक चुप्प नहीं रहलैक । सभ टोल में फूस फूस , फूस फूस । फेर घोली मची गेलिक । ३ दीन भ गेलिक । झाप टॉप केने छैक , तक्का हारी भ रहल छैक ।


रूदल चौधरी त दालान में सबहक सामने पोछी बैसल्थिन --- की दन सभ सुनैत छि भाई ? मालाक कोनो पता लागल ?


कल्लू चौधरी केरव मूह लाल भ गेलें तामस स । दियादी कातक लेल रूदल के येह अवसर भेटलें  । बेटी , पूतौहक इज्जती झाप्बाक चीज थिकैक , ओकरा एना बाजार में इश्तहार नहीं बाटल जैत छैक । पूछ्बेक छलैन त एकसार में पूछी लितैथ । कोनो आन त नहीं छित रूदल , अपने पित्त्रौत्त थिकाह । बेटी सन छानी माला .....


मुदा मलाक नाम मों पारित देरी तामस्क अस्थान  लाज आ ग्लानी ल लेल्कैं । एहन बेतिक बाप भेला स आई सबहक सोझा गर्दन झुकी गेलें । जनामिते मरी गेल रहितैन तहियो एहन क्लेश नहीं होइतैन ।  बताक अभाव में  कहियो मूह मलिन नहीं भेलैन ।  माला आ शिलाक सभ दीन बेटा जाका राखाल्थिन । सासोंरो नहीं जाई परिक ते दरिद्र आ कूलिं जमे ताक्लैन जे गामे म जथा आ बासक जमीं द बसा देतीं  । मुदा माला त सभटा केर उजारी , सभ पर करिखा पोत्ति निप्पत्ता भ गेल छलैन ।




सोमना अहिल्या स्थानक मेला में बद्रीक संग देखने छलैक । मुदा बदरिया दोसरे दीन मेला स घुरी आयल ।  कतबो डेरा - धमका क कियो पूचाल्कैक , किछो नहीं गछाल्कैक । नुम्बरी पाजी आ लम्पट अछि बदरिया । ओकर थाह भेताब मुस्किल ।


मुदा  पुलकित केर ताः लागी गेल छलैन --- सभ टा बुझी गेल्याई हाउ भाई । इ बदरिया भारी हीरो अछि । छौरी के फूसिला मेला ल गेलिक आ फेर ककरो हाथ बेचीं अपने घुरी आयल ।


बेसी लोक के ई सांगत बूजेलैक । मुदा बदरिया चुप बैसे लोक नहीं छल । ओहो अपना 

शनिवार, 25 फ़रवरी 2012


मिथिलाक गाम घर :


हमारा लग रहब : ९ 


हमारा लग रहब : ओना प्रणव के देखि क हस्बाक कोनो कारण नहीं छलैक । मोटे कप्राक मुदा देह झाप्वा जोकर पाजामा - कुर्ता देह पर रहित छलैक हरदम । कपरा उघारी क बेत स देह फूल ब बाला नेंग्रा गुरूजी नहीं छलैक आब । क्लास तेअचेर मिर्ज़ा साहेब आ हेड मास्टर साहेब दुनु बार मानित छलैक ओकरा ।  क्लास में सदिखन फर्स्ट करैत छल, आ मोनिटर सेहो छल । सभ पर दाख चालिक ओकर ।  मुदा कम्मे ब्यास में शिल्ला क  जे धाख ओकर मों पर जम्लैक से अइयो छलैक । भरिसक से नहीं छलैक ।  ओकर अहंकारे ओकरा रोकैत  छलैक । दुनु बहिन स नहीं बाजबाक जे सपाट खेने छल से ओकरा बिसरल नहीं छलैक ।  गीदरक  नेरी खाय बाक सपाट खेने छल ओ ।




मुदा सप्पत तोरी देलकैक शिला एक दीन ।  मेट्रिक केर टेस्ट परीक्षा होमय बाला छलैक ।  स्कूल स घुरैत काल शिला टोकी देलकैक ओकरा -  कन्ने अप्पन अन्ग्रेज्जी केर कॉपी दिय त ?




प्रणव केर बिश्बास नहीं भेलैक जे ओकरा टोकने छलैक ।  मोड़ा लग पास आर कियो नहीं छलैक ।  तहियो पूछाल्कैक -- हमारा कहैत छि ? शिला हसल्कैक -- आर दोसर के ठाढ़ अछि अहिठाम ?




प्रणव केर ओ हस्सी आ हसित शिला नीक लाग्लैक । मुदा दुबारा सोझ देख बाक साहाश नहीं भेलैक । कॉपी द देलकैक ।




किछु दीनक बाद हिंदी के , फेर बिग्यानक कॉपी मान्ग्ल्कैक शिला ।  गप - सप होमय लगलैक कक्नो काल , दू, चारी दीन पर । मुदा प्रणव के सभ  दीन प्रतिक्छा रहे लगलैक जे फेर आई तोक्तैक । कॉपी सभ सजा क लिख लाग्लैक जे की फेर मान्ग्तैक ।




एक बेर एक सप्प्ताह धरी नहीं किछु मंगल्कैक शिला ।  प्रणव केर कोना दान लागे लगलैक ।  ओई दीन स्कूल स घर घुरैत काल वैह मांगी बैस्लक -- कने राप्पिद रेअडिंग वाला किताब देब , थे गुड एंड थे ग्रेट हमारा लग नहीं अछि ।




शीला किताब नहीं आन्ने छलैक  । ओकरा गामे पर बाजुल किक साझ में । प्रणव के नहीं जानी कियक खुसी भेलैक ।  गाम पर अपन कॉपी कित्ताब राखी साझ होइते दौराल कल्लू चौधरी केर घर दिश शिल्ला दर्ब्बजे पर ठाढ़ छलैक कित्ताब नेने ।  मोड़ा प्रनावक हाथ में कित्ताब देबाक लेल हाथ उथले छलैक की आँगन स बहराईट कल्लू चौधरी तोकल्थिन -- के अछि ? 




हम छि प्रणव , मुन्नार झांक भागीं । सक्पकाईट बाजल ओ आ शिला डरे सिकूरिक ठाढ़ भ गेल ।




एना अन्हार में कियक आयल छै , कोण काज छू ?  कालू चौधरी केर स्वर रूछ छलैन । प्रणव आरो सक्पकाईट बाजल -- कित्ताब्ब लेबे आयल रही , शिला बाजूने छली ।




चुप्प निर्लज्ज , बाजैत लाजो नहीं होइत छोऊ । आ तो की ठाढ़ छै अतए , भाग अंगना । कल्लू चौधरी गरज्लाह ।  शिला आँगन परा गेलिक । प्रणव काठ भेल ठाढ़ रहल ।  अपमान आ भय स मूह स्याह  भ गेलिक आ देग लोथ ।


एना गाछ जाका थाद्ग कियक छे ? भाग जल्दी ।  आ खबर दार  जे फेर दर्ब्बजा पर पयर देले , हाथ पयर तोरी देबौक । कल्लू चौधरी फेर गर

गुरुवार, 23 फ़रवरी 2012


मिथिलाक गाम घर :


हमारा लग रहब : ८ 


मिथिल्लक गाम घर :  बिबाहक बाद लाज दाख केर एकदम ताख पर राखी देलकैक माला । बात घाट भेट भेला पर तेना मूस्किया उठैक , ततेक आक्रामक मुद्रा में झाप्तैक जे प्रणव के पहिने स बेशी डर भ जैक ?  गाम में अधिक काल बौआइते रहित छलैक माला आ ओकर छाह स छिह काटैत रहित छल प्रणव । नहीं जानी कतेक डर पीसी गेलिक ओकरा मों में ।




मुदा शिला स्कूल जाइते रह्ल्कैक । कहूना पास करैत मेट्रिक धरी पहूची गेलिक ,  बीच में माला एक बेर द्विरागमन में नाम लेल सासुर गेलिक आ नवे दिन में घुरी क जे आय्लैक से फेर सासुर जयबाक नाम नहीं लेलकैक । बहूत रास खिस्सा पसरी गेलिक ओकरा बारे म ।  प्रणव के दोस्त महिम , सभ टा गाम के छुरा सभ , छुरे नहीं जूआँ को - बूध्बो  सभ खिस्सा में रस लेब  लाग्लैक । खिस्सा नम्रित गेलिक ।




मुदा शिल्ला दोसरे रंगक बहरेलैक । प्रणव स 2 बर्षक छोट छलैक ओ ।  माला ओकरे बतारी रहैक । मुदा देह स दुब्बरी पातरी भ ओ के शिला अपन ब्यास स पिघ लागेक ।  एकदम गंभीर आ शांत ।  पिंद्दसयाम मुदा चमकैत रंग । पातर  लाल थोर , कनेक उथल सन छोट नाक ।  पिघ पिघ दब दब करैत आखी ।  हासिक टी एकदम छोट नेना  सन भ जैक आकृति मुदा , अधिक काल थोर स थोर सटल ।  सलवार फ्रोक्क  बदला में हाई स्कूल आबैत देरी साड़ी पहीर लागल रहैक , से आर  पैघ लागेक ।




प्रणव के ओही स बेसी नीक त वैह शिला लागैत छलैक  जे ओकरा पीठ पर बेत लागला स खिल खिला क हसित छलैक । ओही शिला स ओतेक दर नहीं होइत छलैक  ओकरा । मुदा अई शांत गूम शुम  शिल्ला स ओकरा ब़र दर होइत छलैक ।  क्लास में ओकरा दिश  तकबाक साहसे  नहीं होइत छलैक ।




ओना कखनो काल  धोका धाखी स यदि ओम्हर दृष्टी चल जैक त किक बेर लागेक जेना ओ ओकरे देखि रहल छलैक आ ओकर सटल ठोर पर   कने मुस्की छलैक । मुदा फेर नीक  स dekh laa  पर लागेक जेना ओकर bharam  छलैक । ओ त ohinaa गंभीर आ शांत  छलैक आ ठोर parr ठोर saataal  छलैक  

शनिवार, 18 फ़रवरी 2012


मिथिलाक गाम घर : 


हमारा लग रहब : ७


मिथिलाक गाम घर :   प्रणव दीन भरी दूकन्हा पर सूतल रही गेल ।   रातियो क आँगन में पतिया पर परल - परल मालाक चाट आ ओकर बात ओकरा आसांत कयने रहलैक ।  नेंग्रा गुरुजी कतेको बेर बेत्त स देह फूला देने छलैक , लल्बित्थूआ स सौसे देह लहरा देने छलैक , मुदा मालाक चाट आ बातक लहरी ओही स बढ़ी क छलैक ।  कियक मारलक एना हमरा ?  मामिक देह स चिक्कन देह छैक ओकर ?  की बेशी सोंनर अछि मामी स ? आ हमर हाथ कोनो कारी खोर्नाथ अछिं जे दाग लागी जेतैक ?  बरका घरक बेटी अछि त अपना घर  ।   कोनो हम खुसामद करे गेल  छलियैक ? अपने मोछक झक्का आ तेतारिक चटनी लेल जान देत ,  हाथ - पैर जोरत आ काम निकला पर एहन एट्ठी  ?  आब हमहू मजा चखा दबाएँ दूनू बहिन केर । लाख मानों करतीह , नहीं दबाएँ तोरी के , नहीं चाद्धबानी गाछ पर । बज्बो नहीं करबैक दूनू स । दूनू एथ्लाही अछि । जेहने पढबाक में भूस्कोल , तेहने लूरी में । गोबरक चोट अछि ओ दूनू । हमरा कथीक खुसामद ? देखा दबानी आब ?  नेंग्रा गुरूजी क बाले खिल्खिलैत्त छित -- खिल्खिलाईट रहौथ । पर्बाही केकरा छैक ? जे दूनू स बाजे से गीदरक नेरी खाय ।








सट्टे नहीं बज्ल्कैक दूनू बहिन स ५ वर्ष ।   अप्पर प्रिम्मारी हाई स्कूल में आबी गेल , १० मा पास क मत्रिच्क  क तय्यार्री म लागी गेल , मुदा अपन सपाट मों रहलैक प्रणव के ।   माला त तीने वर्षक बाद स्कूल छोरी देलकैक ।  ९ वे में छलैक की बिबाह भ गेलिक । बार एकदम बूधाठ छलैक --४० या ४५ बरखक , माथक आधा केश पाकल । कारी रंग आ एक टा दात उंच  ।  कोनो बरका जाती बाला  छलैक --महादेब झा पाजी ---बाद में ओ बूझाल्कैक ।   जाती लेल ओई दरिद्र आ कुरूप वर के उठा अन्ने छलथिन ।  कतबो कियो मना कयल्कन , नाही मनाल्थिन -- पूरूखाक कतहू रूप देखल गेलिक अछि ।  आ सम्पति हम द देबैक , १००-५० बिघाक कोण गन्ना छैक ?  मुदा कहां बार के आन्लाहू अछि से ने देखू ।   महादेव झा पाज्जी -------




मुदा प्रणव के ओही बार के देखि हसी लागी गेलिक ।  जोर स हसाल ।  ईक्छा भेलैक जे की ओत्बाही जोर स हसैक जतेक जोर स ओकरा देह पर बेत लागला पर माला हसित छलैक ।  मुदा ओकर हसी बीला गेलिक ।  मों पर्लैक जे बेत लागल देह कोना ओही खिल खिल हस्सी स लहरी उठैत छलैक ।  भेलैक जे की आई माला ओहिन छात्पत्ता रहल हेतैक । एहन बार केर देखि ओकर  मोंन आ देह  अहिना छात्पत्ता रहल हेतैक ।  ओकरा मों भेलैक जे आई अपन कसम तोरी दियअ आ माला स पूछैक --- तोरो दर्द होइत छौक ?


मुदा माला हवेलिक भित्तर माला कनिया बनल बैसल छलैक । दर्ब्बज्जा पर बर्यातिक संग दत्त उंच बूधाठ बार बैसल छलैक ।   आ बेहाल आप्स्यात कालू चौधरी छलाह ।   ओकर साहश नहीं भेलैक जे भित्तर जा क कनि माला क देखैक ।  कतेक दीन धरी तक उदास रही गेल परनव ।




मोड़ा बिबाहक किछु दीनका बाद माला केर देखाल्कैक त अवाक रही गेल । बिबाहक बाद स्कूल गेनाई छोरी देने छलैक माला ।   ओई दिन मंदिर लग देखाल्कैक प्रणव त अपना पर तामस भेलैक  । अहि माला लेल उदाश छल ओ ।  ओ त जेना खुशी स आर गूद्गरी भ गेल छलैक ।  रांगल थोर आ मूह , कान आ सौसे देह गहना । जरीदार साड़ी में खुसी स चमकैत आकृति । आखी में बैह दूस्त्ता भरल हस्सी आ ओई हसी म मिल्ली गेल एक टा आमंत्रण । प्रणव के अपन भाबूकता क्रोधक संग संग लाजो भेलैक ।











शुक्रवार, 17 फ़रवरी 2012


मिथिलाक गाम घर :


हमारा लग रहब : ६


मिथिलाक गाम घर :मीना के पहिने किछु नहीं बूझल छलैक । जहिया पहिल दीन कनैत घर आयालैक प्रणव , तहिये बूझाल्कैक ओ । बिशन्पूर बाली काकी आ भोज पारौल बाली दीयादनी कहलकैक ओकरा जे कहां कसाई चैक नेंग्रा गुरूजी ।  एक बेर एक टा छौरा केर मूह में कंठ तक छारी घुसिया  देने रहैक आ एक बेर गलफर में अंगूर द चिरी देने रहैक ।मीना सूनी क डरे बेहाल भ गेल । प्रणव के स्कूल पठूनई बन्न क देलकैक ।  मुदा मुनर झा बिगरी गेल्थिन -- एना त छौरा अबन्द्द भ जायत । चारी आखर पढ़ दियौ , नहीं त हमारे जका महीश चराबिते रही जायत ईहो ।




बात मीणा केर लागी गेलिक । महीश चारा घरे - घर दूध बेचैत छलखिन मुनर झा से ओकरा पसीन्न नहीं छलैक । मुदा ओ अपने महिष किन्नी देने रहथिन । बाप कालू चौधरी के भनसिया चलतीं । भरी गाम भोज भात में मोनक मों अन्न रानिह देत छलखिन । अइयो काल्हि मुनर झा पकरा जैत छलाह । तीमन - तरकारी क लूरी तेहन्न नहीं छलैन , मुदा भात त पासा लैत छलाह , कठमस्त देह छलैन ।  मुदा से सभ मीना केर नीक नहीं लागैत छलैक ।  प्रणव स्कूल जाय्तैक , आब्बसे पध्तैक , एहन सोन सन छौरा भनसिया नहीं बनतैक , महीश नहीं चरौतैक .... किन्न्हू नहीं ...


आ प्रणव स्कूल जायत रहल , मामिक स्नेहक छाहरी तर बाधित रहल । कियो पूछैक ---- बियाह करबे प्रणब ?

झट कहैक -- हँ

--- ककरा स ।

मामी स । प्रणव सभ बेर एक्के जवाब देत छलैक । सूनी क मीना हँसा लागैत छलैक आ फेर हसित - हसित गंभीर भ दूनो हाथे ओकर मूह ध कहैत छलैक --- अब्बसे करब आहा संग बियाह । एहन राजकुमार सन बार हमारा कता भेटत ? आ फेर हसी क कहैत छलैक ? कानी जल्दी - जल्दी पिघ होऊ नहीं त बुध भ जायब हम । तखन बुधिया कनिया स वियाह कर परत ।


आ सत्ते जल्दी - जल्दी बढ़ी गेल प्रणव । १० बरखक होयते - होयते , पच्मा क्लास में पहूचैत - पहूचैत सचेस्स्ट भ गेल ओ ।   तखन मामी पूछैक --- हमारा संग बियाह करब ? आब त मोछो पमह देने जाइए ।
धत्त प्रणव एकदम लज्जा क कहैक --- मामी केर संगे कत्तौ बियाह भेलई ए।

देखू आब अपन बात बदली रहल छि आहा ? बुढिया कनिया मुदा पींड नहीं छोरत ।

आ प्रणव हँसा लागे आ हँसैत देखे जे अई पाच बरख में मामिक रंग जेना आर चमकी गेल होई , देह आर गमकी गेल होई । ओई आन्गंबाली नानी हरदम कहैक प्रणव के ---तोहर माई एहने छ्लौक , अनमन तोरे मामी सन , एहने सुनर आ एहने बूझ्नूक । प्रणव मामिक चेहरा में माई केर ताकैत बाजय ---माई बताक कतहू बियाह भेलाही ए ? आहा मामी थोरे छि हमर ---आहा त माय छि ।




आ मीना करेज स सत्तालैक  ओकरा । ओही  अस्पर्शक नरमी आ ओही देहक  सुगंध में डूबल प्रणव ठाढ़ रही जाय ।  जोर स धर्धरात मामिक छातिक स्वर ओकर कान में बजैक मुदा कोनो अर्थ नहीं लागेक ।




मुनर झा देखि लेलथिन त दाट्बो करतीं कतेक बेर --- कियैक एना दूरि क रहल छिये एकरा ?  कोनो बचा अछि आब  जे एना कोरा में लेने रहित छियैक ।




मिन्ना हस्सी क टारि दैक ।



मुदा माला त अतःतः  क देलकैक ओही दीन । कने हाथ छुआ गेलिक त सम्धानिक चाट लगा देलकैक --- सुख ने देखू । हमर देह छूता । मखानक पात स मूह पोछी आ पहिने ।



गुरुवार, 16 फ़रवरी 2012


मिथलाक गाम घर : 


गामक छठ पूजा : ४ 


मिथलाक गाम घर : सांझ खन जखन हम बाबा पोखरी पर पहून्च्लाऊ टी ओही थाम बहुतो चौरा - मारे सब बैसल छल ।  ओही सब गोते म हमर मसिऔत जेकर नाम मुकेश अछि सेहो बैसल छल । हमारा देखैत देरी ओ बाजल , भेजी मनू कहैत छल जे की अहू थाम प्रोग्ग्रामे होयत ? ई बात साचो थिक वा झूठ ? अहि गपक कोनो उतर नहीं द हम ओकरा स एकटा सवाल पोछ्लियैक । अगर अहि ठाम प्रोग्ग्राम  होयत त आहा हमारा लोकानी दिश रहब वा जगरनाथ - प्रवीन दिश ? अहि प्रश्न के सूनी मुकेश कहलक जे की देखियो भाईजी , हम ओही ठाम चंदा देबाक हेतु हामी द चुकल छि । मुदा , आहा सब जद्दी अहू ठाम प्रोग्र्रमे करब त हम अहू सब के चन्दा अवस्य देब ई हमर बचन थिक । किछो देरक उपरांत हम कहलियैक , देखू मुकेश चन्दा त हम लेबे करब आहा स मुदा हमारा लोकानी केर चन्दा स बेशी अपनेक सहयोग चाहि । मुकेश कहलक जे की भाईजी हम कोनो तरहक सहोयोग देबाक लेल सदिखन प्रस्तुत छि । ओही ठाम हम ५ गोटे निर्णय कयलोऊ जे की सब गोटे भोर में अहि बाबा पोखरी केर घाट पर ईकट्ठा होयब आ आगू की कोना होयत तकर निर्णय सर्व सम्मत स लेब ।


नहीं जानी कोना नहीं कोना अहि गपक भाझ परवीन आ जगरनाथ के लागी गेलै । ओ सब गोटे आपस में मंथन कर लागल जे की आगू की होयत । हुनका लोकिन के अहि गपक डर छलैन जे की आब हुनका लोकनिक चन्दा पूरत वा नहीं । प्रवीन केर एक टा चाचा छलखिन जिन कर नाम मोहन छलैन ओ हुनका दुनु गोटे केर ई कही निर्भीक केलकैन जे की अहि में चिंता केर कोण गप अछि । प्रविनक कथन छल जे की मोहन चा आहा गप केर नहीं बुझी रहल छियैक । ओ मोहन चा स एक टा सबाल पोछाल्कैक ? मोहन चा जिनकर - जिनकर घाट बाबा पोखरी पर होयत अछि से सब गोटे हमारा लोकानी के चन्दा कियक देत ?  मोहन चा अहि गप पर काफी चिंतित आ गंबीर भ कहलें , गप त तोहर ठीक छोऊ मुदा एकर कोनो समाधानों त नहीं अछि ।


भोर में जखन हम पाय्खाना करबाक हेतु बिडदा भेलाहू त सब गोटे हमारा बटाऊ बाबा केर दालान पर भेट भ गेलाह । हुनका सब गोटे क ५ मिनट कही हम कलम दिश बढ़ी गेलहू ।


बताऊ बाबा केर नाम त किछु आर छल मुदा सब गोटे हुनका बटाऊ कही शोर पारैत छलैन । बटाऊ बाबा नवल काका के पिताजी छलखिन आ हमर गाम वाला पिशा केर अपन छोट काका सेहो छलखिन ।


हम जखन कलम दिश स आय्लाऊ त सब गोटे बाबा पोखरी केर घाट पर भेट भ गेलाह । मनू कहलक भाईजी हम लिस्ट बना चुकल छि । हम ओकरा दिश बेशी ध्यान नहीं द हाथ में माटि ल पोखरी में हाथ मटियाब लाग्लोऊ । हाथ मतियेबाक उपरानत हम ओकरा स लिस्ट ल ओही लिस्ट केर बार गौर स देख लाग्लोऊ । लिस्ट देखबाक बाद हम मुकेश स पूचालियैक आ गप शाप करिते - करिते बताऊ बाबा के दालान पर आबी गेलहू ।

बुधवार, 15 फ़रवरी 2012


मिथलाक गाम घर :


हमरा लग रहब : ५ 

मिथलाक गाम घर :  बुध बाप के ई दुख बर्दाश्त नहीं भेलैन आ ओहो २ मॉस में अई लोक स बिदा भ गेलाह ।  तकर तेशरे मॉस प्रनावक जनम भेलैक । मुनर झा दौराल कूसूमपूर गेलाह ---चम्पाक सासूर ।  दर्बज्जो पर नहीं चाढ़ा देलखिन श्रीमंत चौधरी , चम्पक भेसूर -- साहश कोना भेल आहा के अहि गाम में पैर देबाक आहा के ?  नहीं जानी केकर पापक हमर कुलक नाम देबाक लोभ में दौराल आयल छि । २ मॉस पहिने नेना भेल आ आई खबरी देबा आयल छि । आ बिबाहक आठममॉस में नेना भेल कोना ?  अहि पाप के लाद लेल तहमर मदन के फसौने छलिऐन आहासभ । प्राण स प्रिये छलाह हमर , जिद्द मानी लेलियें । मुदा हुनके संग ओ खिस्सा खतम्म । फेर नाम लेब अहि कूलक कहियो ते जीह काटी लेब ।


अपमानित आ हताश मुनर झा घुरी क अपन गाम आय्लाह ।  ककरो किछू नहीं कहलथिन , चंपो के नहीं ।  मुदा चम्पा सब बूझी गेलिक । सौरी स बाहर नहीं भेलैक , छाठिहारो नहीं देखाल्कैक नेना के ।


मुनर झाक काकी पोसल्थिन बिन मायक नेना क ५ वर्ष । मुनर झा सभ साल सभ दौर्लाह, मुदा कोनो कन्यागत ध्यान नहीं देलकैन । ५ वर्ष बाद चम्पा क सभ गहना बेचीं २००० देलैन आ १५ सालक मीनाक बिबाह - द्विरागमन बाद अंगना आन्लैन । ३५ वर्षक मुनर झाक १५ वर्षक कनिया मीना । कमालपुर बाली कनिया --मीना । जे देखाल्कैक अकचका क रही गेल ।  कारी भुजंग , भूट आ करी मुनर झा क आँगन में एहन सों सन कनिया ।  सों सन रंग आ चन सन मूह । मुदा हाथ पैर फूल सन होयतो ओहन कोमल नहीं छलैक , एक दम सक्कात आ कर्मठ छलैक । आबैत देरी सबटा सम्म्हारी लेलकैक -- ऊज्रल घर गिरश्थी आ बिन मायक प्रणव । गहना बेचला स बाचल किछो ताका छलैन , जकरा मुनर झा हरदम डार में खोसने रहित छलाह । ताका देखा नव कनियाक मनोन करैत छलाह -- साड़ी आ गाहनाक प्रलोभन देत छलखिन ।  सभ टा टाका ल लेल्कैं मीना आ किनी देलकैन एक टा लघारी महीश । मुनर झा क चारी कंचा कमेबाक बियौत भेलैन त आखी खूज्लें । खूब म्हणत कर लागलैन-- बारी झारी आ १० कट्ठा खेत में आ महिसक पोश में ।


आ मीना ओही ऊज्रल - बिल्तल आँगन के फेर स चमका लेलैने । पोछी- पाछी, निप्पी -नापी , ओही टाटक घर के चम्कोलैन आ हर्दुम पोटा बह्बैत माती - कादो में ओन्घ्राइत प्रणव के सेहो तेल - कूर डी अपन ममता भरल हाथ स चमका देल्थिन ।


प्रणव त मामी लेल जान देब लागल । हरदम ओकरे लग सटल रहे । मुनर झा खौझैतो छलखिन । मुदा मीणा हरदम सतौने रहित छलैक अपना लग । मुनर झा क  खोजी बढ़ लागलैन आ प्रणब ६ बरखक भ गेल , त एक दीन स्कूल पठा देलकैक ओकरा । गामक अप्पर प्रिम्मारी स्कूल जकरा गामक छौरा सभ नेंग्रा गुरूजी बाला स्कूल कहैत छलैक । नेंग्रा गुरूजी क  लल्बिथूआआ छारी नामी छलैन । जकरा एक लाल बित्थूआ देत छलथिन , ७ दीन तक ओतूका मौश आ चमरी लहरित रहित छलैक आ ख्जूरक छारी हरदम हाथ में रहैत छलैन । मारी सत्त्की स देह फूला देत चलतीं ।

मंगलवार, 14 फ़रवरी 2012


मिथिलाक गाम घर :


गामक छठ पूजा :3

मिथिलाक गाम घर  :  एक दिनक गुप अछि । हम हाथ में साबुन ल बाबा पोखरी दिश अश्नान करबाक उदेश्य स बिदा भेलहु । हम जखन पोखरी केर घाट पर पहून्च्लाऊ त ओही थाम मन्नू , सोनू , आ मन्नू केर छोट भाई कपरा फिची रहल छल । ओ लोकिन कोनो दोसर मुदा पर चर्च क रहल छलाह ।  नहीं जानी कोना ने कोना छठ पाबैन केर गुप होमअ लागल ?  सोनू कहलक भेजी एक टा गप कहू ? जखन बजरंग बली ठान में ओर्चेशत्रा आओत त अहि ठाम टीवी -सीडी देखैक लेल के रहत ।
हम कहलियैक सोनू गप त तोहर १६ आन्ना ठीक छोऊ , मुद्दा हम वा तू ओही में की क सकैत छियैक ? मन्नू कहलक जे की भाईजी एना नहीं भ सकैत अछि जे की , हम हूँ सब गोते अपना घाट पर किछु छोट - चीन प्रोग्ग्रमक आयोजन करी । आयोजन त क सकैत छियैक मुद्दा मानू एक टा गप कह , सब गोते चन्दा देथूं वा नहीं ?

ताबत एक टा बृध बाबा घाट पर अछिन्जल लेबाक हेतु आयल छलैक । ओ हमारा लोकिन केर गप सूनी उत्तर देलखिन ।

भरी गाम स मंग्बाक कोण प्रायोजन , आहा लोकनी हुनके सब स  चन्दा मांग योक जिनकर - जिनकर घाट अहि पोखरी पर होइत अछि । हुनकर इ कथन सब गोते केर बार निम्मान्न लागल ।

हम सब गोते अस्नान कैलो आ अपन -अपन आँगन चली आइलाऊ । ताबत धरी अहि गप केर निर्णय नहीं भेल जे की प्रोग्ग्रमे होयत  वा नहीं ।


मानू केर घर आ हमर घर एकदम सत्ताल अछि ।  हम अपन आँगन में बैसी भोजन क रहल छलौ की मानू दालान पर स हमरा शोर कैलक । भाईजी आँगन में छि की नहीं ? हम खाइते - खाइत ओकरा चिकार्लियैक । मानू हम आंगन में छि , आब अ ने की बात अछि ? की सोचलियेक ? किछो छान चुप रहबाक बाद हम कहलियैक देख मन्नो एना काम नहीं चलताऊ, सब स पहिने एक टा काम कर । से की भाईजी  ? ओ हमारा दिश ताकैत बाजल । एक टा कागज़ - कलम ल क एक टा लिस्त्व बना जाही में ओही सब घर केर नाम हेबाक चाहि  जिनकर - जिनकर घाट बाबा पुकारी पर होयत अछि । ठीक छाई भाईजी हम राती भर में अहि काज केर संपन्न क लेब आ भिनूसर्बा में  अपनेक स भेट करब । ई गप कही मानू हमरा आंगन स चली गेल । मानू केर आंगन स गेलाक उपरान माँ हमरा समझाब - बूझाब लागली । ओ कहलें जे की देख गामक बार खाराप अछि । आहा सब काठी केर लेल अहि पचरा में परैत छि । हम माँ केर गप पर कोनो ध्यान नहीं देलऔ आ आंगन स चुप - चाप बाहर भ गेलोऊ ।

गुरुवार, 9 फ़रवरी 2012





हमरा लग रहब : ४


मिथिलाक गाम घर        मुदा मामी भरी गाम घोल मचा देल्थिन - नहीं जानी नेना कता चली गेल ? अबस्से कस्सैया गुरूजी फेर दंगौने हेतैक आ हमर नेना दुःख स बत्ताह भेल किम्ह्रो परा गेल हैत । अपनों घरे - घर ताकल्खिन । धारो काट धरी तक आयाल्खिं मामा । हुनका गेलापर ओ चुपचाप गाछ पर स उत्तरल आ अपन आँगन में जा ठाढ़ भ गेल मामिक सोझा - काहा गेल छलैन दिन भरी ? मामी केर चिंता तामस में बदली गेल छलैन । प्रणव चूप , घेत झुकोने ठाढ़ ।




अईयो मार्लाको नेंग्रा ? मामी लग आबी गेलिक ।
प्रणव जोर स मुरी झात्लक । मामिक स्वर आर तमास्सा गेलें - तखन कहा छलैह दिन भरी बहुकल प्यासल ?  अंदेशा स अखनो कोढ़ धरधरा रहल अछि ।




प्रणव बुक भेल ठाढ़ रहल ।आब मामिक बेशी चिंता भेलैक । एकदम सटी हाथ स देह छूबैत पूछाल्कैक - मों खराब छौक ?




नहीं , अहि बेर प्रनावक बोल फुत्लैक ... एक टा संगी संग धारक ओही पार चली गेल रही , ओ अपन घर बाजूने छल ।  ओताही खा लेलियाई आई । नहीं जानी कियक झूठ बाजी गेल ओ ?  मुदा मामिक जेना बिश्वास नहीं भेलैन ।   जिरह करैत पुछाल्खिं --खेने ,पिने छे टी एना मूह कियक सूखायल छोऊ?




प्रणव जबरदस्ती हसल -- दिन में जे खेलियक से की पेट में धेले अछि ?  सांझ भेलै । किछु दिय ने खाय लेल ।


ओकरा हसित देखि मामिक चिंता जेना दूर भा गेलिक ।  जलखई देलकैक आ  भानस - भात में लागी गेलैक । मुदा प्रनावक मों ओही दिन कथू में नहीं लाग्लैक ।  गर्मी मॉस छलैक ।  आँगन में पट्टिया बिछा ईजोरिया में परि रहल । हबो सिह्कैत रहैक । तहियो प्रणव कछ्मछैत रहल । ओकरा बेबे बेर मों पारित रहलैक अपन देह पर बज्रैत छरी आ आर्त्नादक स्वरके दबा पसरित खिल खिल हसी । आ तकर बाद गाल पर एक टा सम्धानल चाट आ चाटक संग आगि सन बोल - साख ने देखू , हमर देह चूताह , पहिने मखानक पात स मूह पोछी आ ।


ओना प्रनावक मूह एकदम पोछल - पाछल आ चिक्कन छलैक । भबूका गोराई आ नंगर देह । मूह कान खूब निख्रल । ममी कहैत छलथिन - रंगल- धोरल , लिखल पढ़ल मूह । टेमी स लिखल ।




ओना मुनर झाक मूह सेहो रंगले - धरौल छलैन - एकदम पकिया रंग स । कारी आ चाकर मूह । नाक सेहो चतरल । ग्स्सल बाही आ चौरा छाती में सौसे केश , एकदम कंठ धरी आ पीठ पर सेहो दुनु काट । कान आ हाथ पैरक अंगूर पर सेहो पिघ पिघ केश । मुदा माथक केश अधिक काल अस्तूरा स मूर्बा लेत छलाह । कारी - कारी झामत्गर केश छलैन , गर्मी मॉस से सौसे माथो में घम्हौरी भ जैत छलैन , मुदा छिल्बा लैत छलाह ।




मुन्नार झाक बहिन , प्रनावक माइयो एकदम गोर भभूका छलैक ।  देखबा में सेहो तेहने सून्नारी । १५ बर्ष छोट छलैक मून्नर झा स , मुदा विआह स पहिने ओकरे भेलैक , १४ हम बरख में । धनिक घर आ सूँनर वर । जमिन्न्दारक खानदान छलैक , कालू चौधरीक नोत - पात पर आयल छलखिन प्रनावक बाप । मून्नर झाक बहिन के  देखाल्खीं आ अपन जेठ भाई लंग जीद क देलखिन । कालू चौधरीक भनसियाक बेटी , मुन्नार झाक बहिन चंपा एकता बरका घर में पूत्हू बनी गेलीह -- कालू चौधरी स पैघ जमिन्दारक घर ।

मिथलाक गाम घर :




मुदा भोग नहीं भेलैन । ६ बे मासक बाद बिध्बा भ गेली । कनिए ज्वर भेलैन आ वैह काल भ गेलें । उपचार - ईलाज , झार-फूक किछुओ नहीं सुनाल्कैं आ चम्पा ५ मासक पेट नेने शीथ पोछी नैहर घुरी आय्लिः ।  घुरी नहीं आय्लिः बल्कि जबरदस्ती घर स निकाली देल गेल्ही । भसूर के मौका भेटी गेलें - अल्लछ दाइने कही नैहर स बिदा क देल्थिन ।

बुधवार, 8 फ़रवरी 2012


मिथिलाक गाम घर 


गामक छठ पूजा :२ 


मिथिलाक गाम घर : हम जखन आँगन पहून्च्लाऊ ,  ओहिठाम माँ , पापा , आर नबल काका बैसल छलैक ।हम अपन माँ स कहलियैक जे की छौरा मारे सब छठ पूजा केर चन्दा लेल आयल छैक । माँ एकही ठाम कहलें जे की हम अखन एको टा पाई नहीं देब । हमारा लग अखन एको टा पाई नहीं अछि । 


हम चुप चाप अपन कोठली में गेलौ आ पोच्केट स १०० टका केर नोट ल हुनका लोकिन केर द देलियैक ।      
१०० टका देखि उगना कहलक - जे की अपनेक नाम पर ५०० टका लिखल अछि । अहि १०० टका स काम नहीं चलत । हम कहलियैक अखन हमरा लग ५०० टका नहीं अछि । अहि १०० टका केर राखू आ बाकि ४०० टका बाद में द देब । ओ सब गोते हमरा स पाई ल दलान पर स चली गेला


हम घुरी के जखन अपन आँगन आय्लौ त नबल काका हमरा स पूछ्लैन , केतक पाई देल्हक अछि । १०० टका देलियैक आ ४०० बाद में ल जायत । नबल काका कहलें जे की हमरो नाम पर १००० टका लिखल अछि , मुदा हम नहीं देबैक । हम कहलियैक नबल का अपनेक लेल १००० टका कोण पैघ गप अछि । 


नबल का कहलें जे की पाई देबाक गप नहीं अछि । तखन कोण गप अछि ? ओ सब गोटे अहि बेर भगबती ठान में कार्यक्रम नहीं करत । हम कहलियैक भगबती थान में नहीं करत तखन कता करत ? नबल काका कहलें जे की बजरंग बलि थान में । ई गप सुनलाक उपरान्त हम कहलियैक से कोना हेतैक ? नबल का कहलें जे की हमरो समझ में नहीं आबी रहल अछि ।  तोहर आ हमार छटक घात बाबा पोखरी पर होइत अछि । तखन हम सब गोटे चन्दा कियक देबैक । हम कहलियैक , ई गप त हमरा नहीं भूझाल अछि , आब त हम हूँ बाद बाकी चन्दा नहीं देबैक ।




जगरनाथ पहिने मुंबई में रहित छल । ओही ठाम ओ कोनो सेठक बँगला पर चौकीदारी केर काम करैत छल । किछु साल पहिने ओ छोरी गाम आबी गेल छल । आ गाम्मे में रहि अपना दालान पर एक टा छोट छीन मोबाइल सर्विस सेण्टर खोली नेने छल । ओही सर्विस सेण्टर केर नाम पपू टेलिकॉम छल । ओही दूकान में विडियो कैमरा , रिचार्ज  कूपन्न , सीम कार्ड , मोबिलक बत्तेरी  , आ कैमरा स २ मिनट में खिचल फोटो भेटैत छलैक ।


जगरनाथ केर दूकान पर सदिखन चंडाल चौकरी सदिखन लागले रहैत छलैक । भोर सांझ चारी - पाच टा छौरा मारे जेकरा कोनो काम नहीं रहैत छल से ओही ठाम बैसी के तास खेलैत रहैत छल ।
ओही दूकान पर ताबत धरी मज्रेती जमाल रहैत छल , जाबित धरी ओ दूकान बंद नहीं भ जैत छल । कखनो काल क हमहू ओही चंडाल चौकरी में सामिल भ जीत छलु ।



मंगलवार, 7 फ़रवरी 2012


हमरा लग रहब: ३

मिथलाक गाम घर :  ओ हसी मालाक छलैक , शिलाक छलैक । कल्लू चौधरीक बेटी -- माला - शिला । पुरखा अई स्कूलक घर आ मैदान लेल जमींन देने छलथिन ।माटिंक ई भीत आ फूसंक चार कलुए चौधरीक दीआयोल छलैन । गुरूजी कालू चौधरीक संग हुनकर दुनु बेटियोक सरकारे कहैत छलखिन ।दुनूक सिट फ्राक लागैत छलैक - एक कात । घर स आसन आबैत छलैक ।कतेको दिन गुरूजी आपने स आसन बिछा अपन मैलका गमछा स ओकर गर्दा झारी देत छलथिन । शनि दिन के सेर भरी शनिश्चरी भेट जैत छलैन ।

गामक पूब धारक कछेर में स्चूलक घर छलैक - राधा मंदिर स पूब ।  अई मंदिरक पस्छिम्म में महादेवक मंदिर छलैक । दुनु मंदिर कलू चौधरीक पुरखा क बनाओल छलैन । तकर एबज में मंदिरक पूजेग्री अइयो हुनका सरकार कहैत छलैन ।पूजेग्रिके भाग्बानक भोग लेल दान कैल जमीन छलैक आ मंदिरक चारुकात फूलबारी , जाहि में लताम , अरर्नेबाक संग आम , लीची आ बलक गाछ सेहो छलैक । भगवानक मंदिरक भीतरी गाते पर कलू चौधरी आ हुनकर बापक फोटो सेहो टांगल छलैक ।

आ गामक बीचो - बिच कलू चौधरीक हबेली छलैन -- दूमहिला । पहिने तीन्म्हला छलैन । १९३४ केर भूकंप में ऊपरका हिस्सा धन्मना गेलें , २-३ टा जानो लेलकैन , मुदा बाकी हिस्सा अइयो सूरक्षित छलैन । पलस्तर जहा - तहा झारी गेल छलैक , मुदा हबेलिक भाब्य्ता अखनो बरकरार छलैक ।

हबेलिक आगू में एक टा बरकी फोखरी भीर पर चारुकात बसल लोक सबहक घर । किछु खपरैल आ बाकि सभ पक्का , कलू चौधरीक देयाद सभक । गामक  बाकी लोक सभ आन - आन टोल में । उतर बारि टोल आ दक्छिन बारि टोल हिनके सबहक भागिन्मानक आ पछबारी टोल में किछु दियाद आ बेशी पूर्णा जमिन्दारक लागूया - भिरूआ लोक सबहक परिबार , भनसिया - जिरातिया सभ हक़ । ओही टोल में प्रनवकमामक टाटक एक टा घर । घर में एक टा कोठी , दू चारी टा थारी - बाटी । ओश्रा पर एक टा दू चूलिहा भानासक लेल । बारी में एक टा लताम , एक टा अरर्नेवा , एक टा दारिम । आ एकटा बीजू आमक खूब झ्मत्गर गाछ  । ओही बारी में छाह तर बान्हल महिस आ करिचक टाट स घेरल आँगन में एक टा तुलसिक गाछ , बिच में आ टाटक काते - कात गेंदा आ बलिक गाछ । टाट पर किछु लती । आँगन ओसारा खूब चिक्कन , निक जेका निपल ।

अई घर - घ्रारिक अलावा मुन्नर झा के , प्रणवक मामा के , १० कट्ठा जमीं छलैन बाध में , सेहो कलू चौधरीक बापक देल  । मुन्नर झांक बाप दरबार में भनसिया छलथिन , सबा बीघा जमीं भेटल छलैन । हुनकर मुइंनाक बाद  १५ कट्ठा छिनी लेलथिन कलू चौधरी , आ आब बच्लोहो १० कट्ठा पर आँख गरल छलैन ।

मुदा दूनू बहिनिक आखी त ओही स बेसी गरल छलैक प्रणव पर । स्कूल में ५ बरख स ओकरे क्लास में छलैक दुनु , आ ओकर उपहास करबाक कोनो अवसर छोर: नहीं चाहैत छलैक । खलिए देहे स्कूल आओत प्रणव , दुनु बहिन आखी चिआर क देख्तैक  आ फेर खिल- खिला क हाश टैक । आरो किक टा छौरा खाली देहे स्कूल आबैत छलैक मुदा कहां कियो हसित छलैक ओकरापर ? मुदा माला - शिला त ओकरा हिन् भाव स ग्रस्त क देने छलैक । दुनु स परायल फिरैत छल प्रणव , मुदा ओ दुनु अरिबैध क ओकर सभ टा गतिबिधिक थिकियौने रहैत छलैक । किताब लेल मारी लागौक - त खिल - खिल , शनिश्चरी ले मारी लागौक त - त खिल-खिल

मुदा काज परला पर दुनु एक दम मोलायम बनी जैत छलैक । स्कूलक हाता में जखन मोंछ तोर्बाक हेतैक , दुनु बहिन संघी घेर लेतैक - थोरे हाम्रो लेल तोरी दे ...।  आ प्रणव सभ जीत छलैक आ कटहरक फुनगी पर चढ़ी क दुनु लेल मोंछ तोरी देत छलैक ,  स्चूलक पछोआर में जे तेत्रिक गाछ छलैक , ताहि पर चढ़ी तेतरी तोर देत छलैक । माला --- माखन सन चिकन , बाही छोआइत देरी चटाक द चाट मारी देलकैक गाल पर -- सख ने देखू , हमर देह छोटा । मखानक पात स मूह पोछी आ पहिने ।

तहियास डेरा गेल प्रणव । माला त चंथ छलैक , शिला कम नहीं ।  ओना देखबा में दूबरी - पातरी  छलैक शिला , रंगों कन्नी बर्की बहिन स कम्मे आ हाथो- पयर गूल - गूल नहीं  । पातर - छरहर  हाथ पैर , मुदा आँखी बर पिघ - पिघ , कोआ सन डग-डग करैत । पातर ठोर आ कनेक उथल सन नाक । बर्की बहिनक केश छोट-छोट मुदा घुग्रू सन , आ छोटकी के केश बर घनगर आ पिघ । लग आयला पर गम्कुआ सुगंध  लागला पर कतेको बेर प्रनवक इक्छा भेलई जे पूछैक जे की लगबैत छै केश में ?  मुदा फेर गाल पर लागल चटा मों पर्लैक आ दर भेलैक जे दोसोरो बच्लोहो गाल पर छोट्कियो तेहने चटा लगा देतैक ।

राधा कृष्णक पूबारी  कात  ठीक स्चूलक हाताक बहार दक्छिन में बरका बरक गाछ छलैक -- एकदम चतरल  । कियो ऊपर बैठिक भीतर झोज में बैसी रहय त पतों भेटनाई मुस्कील ।  बीचो बिच , ठीक जारिका सोंझ में एक टा दू कान्हा छलैक - छोट छीन असनानी चौकी जेका । जखन कखनो प्रणव उदास होइत छ्लैका एकसार सूत्बाक मों होइत छलैक , ओही दुकन्हा पर सूती रहैत छल । ओहो दिन ओताही जा परी रहल  । कतेक बेर कंबो कयलक । अपनों कोनो कारण नहीं भूझ्लैक । एकटा चाट म  कोण एहन दुनिया उनती गेलिक ? गुरूजी त सभ दिन खल्री ओदार्बे करैत छलखिन ।

१० बरखक प्रणव लेल ओही दिन मात्र एकांत में नूका क कानी लेबाक अतिरिक्क्त आर कोनो उपाय नहीं छलैक ।  गुरूजी के कहला पर एक चाटक संग २५-५० छारी सेहो सह परतैक । मामा स कहला पर सेहो किछ नहीं हेतैक । सभ टा सुनी मामा बुक बनल ठाढ़ रहथिन , कलू चौधरीक दरबाजा  पर  जा उपराग देबाक साहाश नहीं हेतैन - बच्लो -खूच्लो १० कठा ऊस्राह जमीं जे देने छाथिन सेहो छिना जय्तैन , गाम में रहब मुस्किल भ जैतन,  मामी सूनिक छाती पित्थिन, चूपो नहीं रहथिन , कलू चौधरीक समस्त खानदान के गारी सराप स तर क देथिन , मुदा अपने अंगना स , अई स निक त यह छलैक जे चाट खा क चुप - चाप बरक गाछक  दुकन्हा पर   सूतल रहे , मोनक तामस आ आगि केर मिझ्बैत रहे ।

सोमवार, 6 फ़रवरी 2012

शनिवार, 4 फ़रवरी 2012

उपन्यास हमारा लग रहब :२



मिथ्लाकगाम्घर : गामक पछ्बरिया -दक्शिन्बरिया लों पर , एक दम बाग्मतिक धार स सटल । तकर उत्तर में काची सरक आ सड़क के उत्तर स पसरल भुतहा बाढ़ । मुर्द्घत्ति में दुटा पिपरक गाछ आ एकता आमक बिशाल सुखायल गाछ छलैक ।जखन कखनो मुर्दा जराब लोक मुर्द्घती आबैत छलैक । आइ मुर्द्घती लग देने महिष लेने सरक पर जैतप्रणव सभ सब दिन सिहरी जैत छल ।झट महिसक सड़क स उत्तरी बाढ़ म तप लेत छल ।मुदा सरकक काट में बाढ़ स पहिने कल्लू चौधरीक बरका गाछी चलें - सूचा कलामी आमक । आजुक दिन अहि गाछी में मुनारा के भुत पटकी देने छलाई ।लूक्रा स चुरैल चुन -तमाकू मांगने छलैक ।भुट्टा के टी बाँही के खिहारने रहैक भूत , बान्हे पर बेहोश भ गेल छल ।रुद उगला पर चर्बाहा सभ उठा के गाम आन्ने छलैक आ घुरण मिश्र झार - फूक कैने छलथिन ।

मुदा मुर्द्घुत्ति में टी अड्डे छलैक - भूत - चुरैलक । घुरण मिश्र कहैत छलथिन सभके, जे आनाह्रिया राती में पीपर आ बराक गाछ पर भूत, जीं आसन जमौने रहित छैक आ निचा समसान में डैन - चूरानी सभ नंगते नाचैत छैक ।पेरक उनटा पंजा आ नाकियैत स्वर ।घुरण मिश्र ते महाष्ट्मिक राती सेहो समसान साधित छलाह , डैने - जोगिन बश में छलैन ।हुनके डरे गामोक बेशी लोग के तंग नहीं करैत छलैक भूत प्रीत । 

मुदा प्रणव क्र बार डर लागैत छलैक ।बेशी आन्हार में महिष नहीं खोलैत छल । झाल्फाल ईजोत भेला पर महिष खोली पहिने सरके - सरक मुर्द्घत्ति धरी आस्ते - आस्ते लाबैत छल , आ मुर्द्घत्ति लग अबिते महिष के जोर स दौरा देत छलैक बाधमे । तहियो सबटा रोइया भुलाकी जाइत छलैक । लागैत छलैक जेना कियो पछा स खेहारने आबैत होई ।

मुदा सभ स बेसी देराईट छल ओ स्कूल स ।  भूतो स बेशी रोइया भूल्कैत छलैक ओकर नेंग्रा गुरूजी के नाम स  । एकदम कसाई छलैक गुरूजी । ख्जूरक मोटका छारी स सौसे देह दागी देत छलैक,  लाल्बिथुआ स सौसे देह चकता जेका उगी जाइत छलैक , बिश्बिशाईट रहित छलैक ।  देहमे नहीं गंजी , नहीं अंगा , उघार देह , मेल- फाटल पैंट के सेहो समेटी क पोनपर चकता उगा देत छलैक ।आ ओ झंझ्नाईट देह लेने घरमे ममी स नूकाइल फिरैत छल । मामी देखिये लेत छलैक - आई फेर कसैया मार्लाकाऊ तोरा , हर हरी बज्र खसतैक ओकरा पर । गरीबक आही ज़रा देतैक निरदैया के । कोना कसाई जका नेना के मारलक -ए - हाउ देब ।   मामी ओकरा करेज स सता लैत छलैक । हाथ लागला स फूटल देह आर छान - छाना उठैत छलैक , मुदा मामी क आँखिक नोर आ देहक शीतलता सब टा छंछानी के लागले कम् क देत छलैक 

आ नाहक के डटा जाइत छलाह  बेचारे मामा । आँगन में पैर दैताही मामी बमकी उठैत छलथिन - अहाँ अहि कसैया गुरूजी के किछु कहबैक सह नहीं होइत अछि ?  सभ दिन नेना केर देह फुला देत अछि आ मौनी बाबा जेका आहा हमर बात सुनी गूम रही जाइत छि । आई नहीं जायब आहा ते हमही कहबैक ओही राक्छास के । एक टा टांग तूतले छैक , दोस्रो तोरी देबैक ।

मामी चिकारी उठैत छलीह - ओही कसयाक देवता कहैत छियैक ? कठिलेल मारैत छैक , हम नहीं भुजैत छियैक ? सनिश्चारी नहीं ल जाइत छैक तकर तामस सबक केर नाम पर उतारैत छैक । आ सबक कोना याद करौ हमर नेना ?  एक्को टा किताब छैक ?  एक टा फूट्लाहा स्लेट आ गाबिध ल क आई ५ बरख स स्कूल जाइत अछि । तहियो केक्रोस कम अछि हमर नेना ? करतीं कियो मुकाबला बाबु - भैयक नेना जिनका लग एक झोरा कॉपी - किताब रहित छैन ? आई गुरूजी क कप्पार फोरी देबैक हम एक दिन खापरी स ।

प्रनाव्के खापरी स कपार फोर्बाक बात पर हशी लैग जैत छलैक । आ ओकरा हसित देखि मामियो केर क्रोध बिला जाइत छलैन । ओहो हँसा लागैत छलथिन । मामा मौका देखि किम्ह्रो सासरी जाइत छलाह ।

मुदा मामी ओकरा नहीं छोरैत छलैक ।  अपने हाथे कहा - पीआ संग सूता लैत छलैक । बहूत रास खिस्सा सब कहैत छलैक ,  मनियार्बा दैत्य वाला , हक्काली डैने ।   मुदा प्रणव के निन्न नहीं होइत छलैक --
" सुगी रानी क खिस्सा कहू मामी "
आ मामी कहैत छलैक 

सुगी रानी सुगी रानी कता जाइत छि ?
साईं पूत मारलक-इ रूसल जाइत छि ।।
हमारा लग रहब? 
रहब ने कियक ? 
खाय की देब ?
सूखा रोटी     ।
सूताय की  देब ......?
शितलपाती । 


सुगी रानी नहीं रूकैत छलीह  , सूखा न्रोती खेनाई आ शीतल पाती पर सूत्नाई हुनका मंजूर नहीं होइत छलैन  । मुदा मामी क संगे शीतल पाती पर परल प्रणव सूखा रोटी  खा क सुगी रानी क खिस्सा सुनैत सूती रहित छल । निभेर सूतैत छल आ झाल्फाल ईजोत में महिष खोली भूता बाढ़ में निकली जाइत छल ।

बाढ़ स घुरी पोखरी स नहा आबैत छल आ हाथ में सिलेट गाबिश ल मामिक कहैत  छलैन - स्कूल जैत छि मामी ।

मामी दौरी क बहार आबैत छलथिन आ ओकर पैंटक पोच्केट में  कहियो मकैक लाबा , कहियो तम्हा चूर , आ कहियो - कहियो मुरही डी देत छलथिन आ ओ फाकैत - फकैत स्कूल दिश दौरी जाइत छल ।

मुदा कोनो कोनो दिन ओ दू बेर - तीन बेर चिचियैत छल -मामी , जाइत छि  । मुदा मामी घर स नहीं बहरैत छलथीं । ओ भुजी जाइत छल आ फेर चिचिआक कहैत छल - आई हम जलखई नहीं करब , भूख नहीं अछि ।

मुदा स्कूल स घुर्लो पर  मामी सामने नहीं आबैत छलथिन । 

एक टा मौनी ल क प्रणव दौरिक चुनु के पूताहू लग चल जाइत छल - थोरे मुरही दे चुनु के पुतहु ।

चुनुक पुतहु मोलायम स्वर में कहैत छलैक - कोनो बेचा हाउ बौउआ  ?

नहीं आई किछु नहीं अछि  । ओहिना दे  । दोसर दिन डी देबौक  । मामी के नहीं कहिय्हिक । प्रणव कने  आधिकार स  कहैत छलैक  ।   चुन्नू के पूताहू ओकरा मानित छलैक  ।  अपन छोटकी मौनी स २-३ मौनी मुरही देत छलैक आ प्रणव भागी केर आँगन आबैत छल  ।   तखन मामी घुरी के ताकैत छलैक ओकरा दिश   ।  मुदा दुनु आखी नोर स भरल ।  भट-भट खस लगैत छलैक ओकरा अपने हाथे मुरही खुआबैत काल   ।


मुदा गुरूजी के कनियो दया - माया नहीं होइत छलैक ओकरा देंगाबैक काल ।  सनी दीन के सभ चटिया लाइन में ठाढ़ होइत छलैक  ।  एक टा चटिया आगू - आगू पढैत छलैक आ सभ दोहराबैत छलैक :- 


गणेश जी महराज चधिये   तुरग 
नौ सौ मोती झलके अग
एक मोती हरी तालम ताला 
गुरु प्धाबे पंडित वाला 
पंडित वाला देहु आशीष 
जियो लरका  लाख बारिश ।

मुदा गुरूजी लाख बर्ष जीबाक आशीष देबाक बदला ख्जूरक मोटका छारी ल लाइन में ठाढ़ चटिया हक़ मूह  देखैत नेंग्रा टांग के इम्हर स उम्हर घिसियाबैत छलैक  ।  जिनकर सनिश्चारी कम् रहलें हुनका चाट १ छारी -ठीक से पढो  । आ प्रणव लग आबी आखी रंगी जाइत छलैन --सभ सनिक वैह हाल  । ने एको टा पाई  , नहीं एक्को कंमा चऊर । लाइन स घिची लैत छलथिन बाहर आ चटचट छारी मारी देह फूला देत छलथिन - ठीक से लाइन में खरा होना नहीं आता है  ? उचारण एकदम भ्रस्त  । कॉपी किताब कहा है  ?  असहाय मारी खेत प्रणव आ डेरेल ठाढ़ बाकी चटिया सभ । मुदा दू गोते खिल्खिलाके हसित छलैक । प्रणव के मारी लागला पर सभ दीन । जेना बार आनंद आबी रहल होई । खिल-खिल-खिल-खिल ।

गुरूजी के साहश नहीं छलैन जे दुनु के तोक्त्हीं -- एना हसित कियैक छे ? उघार देह पर अनवरत छारी बरिसित छलैक --चट -चट आ दुनु  छुरी लगातार हसित छलैक -खिल-खिल...खिल-खिल ।



मिथिलाक गामघर: upanyaas : hamaraa lag rahab

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मिथिलाक गामघर: किस्सा पिहानी
ननदी भौजी
पदुमा परम खीण आ चिंतित भ...
: किस्सा पिहानी ननदी भौजी पदुमा परम खीण आ चिंतित भेल अपन आँगन में आय्लिः ।अपन भौजी से बिना किछु कहने , पुबरिया घर में पीसी गेलीह ।...