dahej mukt mithila

(एकमात्र संकल्‍प ध्‍यान मे-मिथिला राज्‍य हो संविधान मे) अप्पन गाम घरक ढंग ,अप्पन रहन - सहन के संग,अप्पन गाम-अप्पन बात में अपनेक सब के स्वागत अछि!अपन गाम -अपन घरअप्पन ज्ञान आ अप्पन संस्कारक सँग किछु कहबाक एकटा छोटछिन प्रयास अछि! हरेक मिथिला वाशी ईहा कहैत अछि... छी मैथिल मिथिला करे शंतान, जत्य रही ओ छी मिथिले धाम, याद रखु बस अप्पन गाम - अप्पन बात ,अप्पन मान " जय मैथिल जय मिथिला धाम" "स्वर्ग सं सुन्दर अपन गाम" E-mail: apangaamghar@gmail.com,madankumarthakur@gmail.com mo-9312460150

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सोमवार, 24 अप्रैल 2017

तिलक के हटाबू ,एही मिथिला सँ नाम

 || दहेज़ || 
गीत 
सुनू   यौ   बरागत  हमर   अच्छी   प्रणाम  | 
 तिलक  के हटाबू  ,एही  मिथिला सँ  नाम  ||  
                     सुनू  यौ --- तिलक  के ---
कानय   कुमारि  कन्या ,  सीथे  उघारि क | 
 सिन्दूरक छी  भुखलि , कहल   पुकारि क ||  
हम    निर्धन   के  बेटी , छी धर्मक गुलाम | 
तिलक  के  हटाबू,  एही  मिथिला सँ  नाम  || 
                    सुनू  यौ --- तिलक  के ---
मिथिला में जन्म बेटिक,अभिशाप भेलआइ | 
कतेको   प्राण   हत्याक , पाप   भेल   आइ  || 
आई कतय गेल  कृष्ण ,आ कतय गेल  राम |  
तिलक   के  हटाबू, एही  मिथिला सँ  नाम  || 
                        सुनू  यौ --- तिलक  के ---
तिलक  प्रथा  मिथिला  में , जाधरि  रहत  | 
अहाँ  सभक  आँखि ,  सतत   नोरे  बहत  || 
सुख   नञि  भेटत , निन्द   होयत   हराम  | 
तिलक  के  हटाबू ,एही मिथिला सँ  नाम  || 
                       सुनू  यौ --- तिलक  के ---
 "रमण " कहैत अछि , सब सँ  सुनि  लिय  | 
एक   प्रश्न  - उत्तर  बिचारि  कउ   दिय  || 
सोन   सनक    बेटा   के , बेचै  छी    चाम  | 
तिलक  के  हटाबू ,एही मिथिला सँ  नाम  || 
                      सुनू  यौ --- तिलक  के ---
रचना कार - 
रेवती रमण झा " रमण "
ग्राम - पोस्ट - जोगियारा पतोर
आनन्दपुर , दरभंगा  ,मिथिला
मो 09997313751

शनिवार, 6 जून 2015

सभा गाछी (सौराठ सभा )


सभा गाछी (सौराठ सभा )
मधुबनी सअ मात्र 6 किलोमीटर दूर "सौराठ" गाँव् में प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ-आषाढ़ के महीना में मैथिल ब्राम्हण विवाह योग्य युवक के चयन के लेल वैवाहिक सभा के आयोजन होइत अछि जे "सभा गाछी " के नाम सअ विश्व प्रसिद्ध अछि ! 

आई काइल के युवक के लेल इ हँसी के गप्प भअ सकैत अछि ,लेकिन अहि बात के प्रबल संभावना छैक जे हुनकर पिता और बाबा के विवाह "सौराठ सभा " सअ भेल होइक ! अहि सभा में कन्या पक्ष के लोक उचित वर के तलाश में सभा में आयल वर और हुनकर परिवार सअ पूरा जानकारी लैत छैथ और विवाह के निर्णय लैत छैथ !
     


     1310 ईस्वी में मिथिला नरेश हरि सिंह द्वारा दान  के 22 बीघा जमीन जाहि पर आम , बरगद , पीपर के गाछ छल,  'सभा गाछी' शुरू भेल ! किछ वर्ष पहिने तक अहि महान सभा के बहुत सम्मान प्राप्त छल ! अहि सभा के लोकप्रियता के अनुमान अहि बात सअ लगायल जा सकय छै की 1971 में लगभग डेढ़ लाख लोग अहि सभा में आयल छलाह जे 1991 में पचास हज़ार और आब मात्र किछ सौ या हज़ार में रहि गेल अछि !कहल जाइत छैक कि जाहि साल सवा लाख लोक आबि जाइत छलैथ, अतिप्राचीन पीपर के गाछ के पात सूखि जाइत छल ! अहि ठाम के अन्य महत्वपूर्ण व्यवस्था "पंजीकरण" के अछि ! विवाह के लेल योग्य वर के चयन के बाद पञ्जीकार वर और वधु कुल के पांच और वर कुल के सात पुश्त के आपस में सम्बन्ध के जांच परताल करैत छैथ और वंशगत लेखाजोखा के बाद "सिद्धांत" लिख कअ दैत छैथ जे क़ानूनी रूप सअ विवाह के स्वीकृति मानल जाइत छैक और अहि व्यवस्था के अदालत में मान्यता प्राप्त छैक ! 
    
         तेजी सअ विलुप्त होइत अहि सभा गाछी के लोकप्रियता में कमी के लेल कोनो एक कारण नहीं भअ सकैत अछि लेकिन 'दहेज़ के अत्यधिक मांग', संपन्न और अत्यधिक पढ़ल वर्ग के परिवार के गाछी के प्रति उदासीनता , प्रशासन द्वारा सुविधा में कमी , जमीन के अतिक्रमण और आजुक युवा वर्ग के अहि सभा के प्रति नकारात्मक सोच मुख्या कारण में सअ एक अछि ! मिथिला के अहि महान संस्कृति और सम्मानित व्यवस्था के आब इ स्थिति भअ गेल अछि कि आब इ मानल जा रहल अछि कि जेकरा कतहु विवाह तय नहि होइत छैक ओ सभा गाछी आबैत छैथ !

यदि  अहा  फेस बुक यूजर छी  त जौनि करू -
https://www.facebook.com/groups/dahejmuktmithila/ 


मंगलवार, 3 मार्च 2015

दहेज मुक्त मिथिलाक चारि वर्ष पूरा: ३ मार्च - २०१५

दहेज मुक्त मिथिलाक चारि वर्ष पूरा: ३ मार्च - २०१५

   फेसबुक सँ शुरु कैल अभियान, धरातल पर उतरि बढेलक मिथिलाक शान, कहियो हिन्दुस्तानक फ्रंट पेज पर लिखेलक अपन नाम आ देलक एकटा नवज्योतिक किरणक आभान - आइ पूरा केलक यात्राक चारिम वर्ष आ लऽ रहल अछि पुन: नव संकल्प। 
चारिम वर्ष मे पूरा कैल गेल:
*स्मारिका केर प्रकाशन
*मैथिली महायात्रा केर प्रारंभ
*मुंबई मिथिला महोत्सव
सौराठ मे विमोचित 'दहेज मुक्त मिथिला' केर स्मारिका राजविराज, सहरसा, कोलकाता, कानपुर, दिल्ली, जमशेदपुर - सब ठाम अलग-अलग विमोचन आ आवश्यक अभियान-प्रचार-प्रसार आ आम अपील जे 'माँगरूपी दहेज नहिये ली - नहिये दी, बरु समान रूप सँ शिक्षा दियबैत बेटा आ बेटी सबकेँ आत्मनिर्भर बनाबी। मैथिल लेल एकमात्र आसरा विद्याधनं-सर्वधनंप्रधानम् केर सूत्र अपनाबी।' कहैत अभियान भारत व नेपालक चहुँदिशि अपन आवाज बुलंद कयलक।
    मैथिली महायात्राक शुभारंभ साईंधाम, दिल्ली सँ कैल गेल जेकर मूल उद्देश्य मिथिलाक बिखरल मोती (विभिन्न गणनीय व्यक्तित्व) केर परिचय समेटैत डायरेक्ट्रीक प्रकाशन करब अछि। अही मार्च केर आखिर तक प्रथम भाग डायरेक्ट्रीक प्रकाशन कैल जयबाक अछि। एखन धरि यात्रा दिल्ली, कोलकाता, राजविराज, सहरसा, कानपुर आ जमशेदपुर मे कैल गेल अछि। एकर अतिरिक्त जानकारी आरो-आरो ठाम सँ इमेल द्वारा प्राप्त भऽ रहल अछि। उपलब्ध तथ्यांक मुताबिक प्रथम भाग डायरेक्ट्री बहुत जल्दिये सबहक सोझाँ रहत।
  मुंबई - दहेज मुक्त मिथिला द्वारा भव्य 'मिथिला महोत्सव' - केर आयोजन कैल गेल। विभिन्न दहेज मुक्त विवाह कयनिहार केँ सम्मानित कैल गेल। दहेजक प्रकोप सँ जरि रहल समाजक विभिन्न रूप पर मिथिलाक अनेको प्रसिद्ध गायक एवं कलाकार द्वारा स्वैच्छिक प्रस्तुति देल गेल छल। संगहि विभिन्न गणमान्य नेतृत्वकर्ता आ विद्वान् तथा साहित्यकार लोकनि द्वारा एहि दिशा मे चिन्तन कैल गेल छल जे कोना हमरा लोकनि मिथिलाक बिगड़ैत स्वरूप केँ पुन: गरिमामय बना सकब।
      विदित हो जे 'दहेज मुक्त मिथिला' अपन प्रतिनिधित्व लगभग समस्त महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम मे करैत आबि रहल अछि आ स्वैच्छिक-स्वयंसेवा सँ मिथिलाक सेवा मे लागल एहि संस्थाक सदस्य सब धन्यवादक पात्र छथि।
      पाँचम वर्ष लेल 'शिकायत केन्द्र' केर स्थापनाक लक्ष्य लेल जा रहल अछि। जेकर लक्ष्य अछि: कोनो पीड़ित पक्ष बिना कोनो प्रकारक पूर्वाग्रह रखने - बिना कोनो सेल्फ-फेब्रिकेटेड स्टोरी (मनगढंत कहानी) बनेने विवाह पूर्व 'माँगल गेल दहेज'क आ कथा-वार्ता कोना शुरुआत केलहुँ, कोन स्तरक वरक इच्छा/माँग अहाँक छल, के मध्यस्थकर्ता छलाह, कथा-वार्ता मिलेबाक लेल कि सब शर्त राखल गेल, पैसा-कौड़ी या गर-गहना आ वर-वरियातीक स्वागतार्थ तथा बियाह-विदाई लेल खर्च करबाक लेल माँग कि सब कैल गेल, अहाँक स्वेच्छापूर्ण खर्च सँ बेसी कि सब जबरदस्ती लादबाक कूचेष्टा भेल, आदि समस्त व्योरा उपलब्ध कराउ, दहेज मुक्त मिथिला समुचित मध्यस्थकर्ताक भूमिका निर्वाह कय सकैत अछि।
एहि संस्थाक सदस्यता लेल सब कियो स्वतंत्र छी। अपन-अपन इलाका मे एहि अभियान केर प्रचार-प्रसार एकमात्र कार्यक्रमक क्रियान्वयन अछि।
एहि संस्थाक आधिकारिक फेसबुक ग्रुप-पेज एहि लिंक पर अछि, कृपया सदस्यता ग्रहण करी एहि ठाम ज्वाइन करैत:

संपर्क लेल: इमेल पठाबी - dmmithila@yahoo.com
सधन्यवाद,
प्रवीण नारायण चौधरी
अन्तर्राष्ट्रीय संयोजक
दहेज मुक्त मिथिला।

सोमवार, 15 सितंबर 2014

मिथिला म- मैथिलीक मौलिक अधिकारक रक्षाक लेल शुभारम्भा कलश यात्रा दहेज़ मुक्त मिथिलाक अगुवाई में डेल्ही सं

मिथिला - मैथिलीक  मौलिक अधिकारक  रक्षाक लेल  शुभारम्भ  कलश यात्रा ,  दहेज़ मुक्त मिथिलाक  अगुवाई में  देल्ही  सं
Pravin Narayan Choudhary- 
हम एक बेर फेर समस्त दिल्लीवासी गंभीर एवं प्रतिबद्ध मिथिला-मैथिली प्रेमीजन केँ हार्दिक धन्यवाद देबय चाहब जे अपने लोकनिक सहयोग सँ एतेक भव्यता संग काल्हिक कार्यक्रम संपन्न भेल। एक तऽ मानव ताहू पर सँ अनेको तरहक भौतिक भोग-व्यसन सँ रोगग्रस्त कमजोर मानसिकताक शिकार हम प्रवीण एवं समस्त आयोजन पक्ष कतेको प्रकारक त्रुटिपूर्ण प्रस्तुति केने होयब, ताहि सब लेल अपने लोकनि क्षमा करब। किछु महत्त्वपूर्ण घोषणा सब करबाक छल, किछु अभियानक जानकारी सब देबाक छल, लेकिन कार्यक्रम अपन गति मे चलि देबाक कारणे हमरा वश मे किछु नहि रहि सकल। तैँ बेर-बेर मात्र क्षमायाचना टा करब। जे किछु त्रुटि भेलैक ताहि लेल आगाँ आरो सुन्दरता संग सुधार अनैत दिन-ब-दिन बेहतरी केर दिशा मे हम सब बढब से विश्वास बढि गेल।
आयोजन पक्षक मित्र लोकनि!
    
      अहाँ सबहक ऋण सँ ऊऋण हम कहियो नहि भऽ सकब। अमरनाथजी केर निरंतर सहयोग, डिजाइनिंग सहित कार्यक्रम लेल अत्यन्त महत्त्वपूर्ण मानल जायवला सामरिक सहयोग एवं प्रखरता-ओजस्वी संचालन करैत पुन: समीक्षा तक अपनेक संग अविस्मरणीय रहल। संजीव भाइ द्वारा बौद्धिक-वैचारिक आ अतिथिक सूची निर्धारण करैत 'कमल संदेश' केर कार्यालय पर्यन्त संयोजन हेतु उपलब्ध करेनाय - ओह शब्द नहि अछि जे हम धन्यवाद कय सकी। बस, आह्लादित हृदय सँ हमर स्नेह स्वीकार करब। कौशलजी केर सह-संयोजन मानू जेना प्रवीणक दोसराइत बनि सब बागडोर सम्हारलैन, आ केहन हमर स्मृति जे अहाँक अभियान पर जे चर्चा करेबाक छल वैह मनमस्तिष्क सँ बाहर चलि गेल। लेकिन याद राखब, जगज्जननी मैथिली केर कृपा, हम अहाँक हरेक सपना केँ साकार करबाक लेल आइये आ एखनहि सँ प्रण करैत छी। किछु समय देल जाउ। पहिने सँ दिमाग मे जे सब रहल से सब शालीनतापूर्वक संपन्न भेल आ आब मिथिलाक्षर फोन्ट विकास मे यथाशीघ्र निश्चित प्रगति आनि सकब, से गछैत छी। दिसम्बर २०१४ धरि ई कार्य पूरा करबायब, अहाँ निश्चिन्त रहू। हमर 'दि बेस्ट एफोर्ट्स' एहि विन्दु पर आगामी समस्त कार्यक्रम - भ्रमण, अभियान मे ई योजना शामिल रहत। आइ प्रामिस यू! प्रकाश भाइ, मैलोरंग - अहाँक सृजनशील आ क्रान्तिकारी योजना निर्माण हमर मनक बात करैत प्रमुख अतिथिक चुनाव सुझाव मे सहयोग केलक - सहभागिता हेतु अपनेक हर प्रयास नमन योग्य भेल।
फेसबुक केँ धन्यवाद - जे भाइ नरेन्द्र मिश्र संग भेट करौने छल। भाइ अपन संस्थान 'साईंधाम' केर दर्शन करबैत गछने छलाह जे कहियो अहाँ सब मिथिला लेल एतहु अभियान संचालित करू। ओ जहिना एतेक बात कहलैन, तहिये सँ दिमाग मे चलि रहल छल। सब मित्रवर्गकेँ कहने रही जे मिथिला-मैथिली प्रति अगाध सिनेह रखनिहार नरेन्द्र भाइजी केँ हम सब जोडिकय स्वयंसेवा सँ अपन मातृभूमि-मातृभाषा सहित संस्कृति-साहित्य-समाज लेल आगू बढब। ठीक तहिना भगवतीक कृपा सँ एहि बेर संभव भेल। भाइकेँ एक बेर फोन करिते सांगोपाँग तैयार आ तत्पर रहैत सहयोग देबाक वचन देलनि। काल्हि कार्यक्रम मे हुनक स्वैच्छिक योगदान सँ कार्यक्रम स्थल, साज-सज्जा, अतिथि-सत्कार (जलपान सहित) सहयोग लेल पूरा कार्यालय एवं साईंधाम केर अधिकारीवर्ग केँ तैयार अवस्था मे उपलब्ध करौलनि। साईंधाम केँ हृदय सँ धन्यवाद आ आभार प्रकट करैत नरेन्द्र भाइजीक एतेक पैघ सहयोग प्रति बेर-बेर नमन करय चाहब।
कम समय मे सोचल एहि कार्यक्रम एकमात्र महादेव केर प्रेरणा सँ साक्षात् जगज्जननी मिथिला धिया सिया एवं गौरीक कृपा सँ संभव भेल। किछु भाइ लोकनि नहि आबि पेला। शेफालिका माय आ निवेदिता बहिन केर अनुपस्थिति बड कचोटलक। लेकिन आदित्य भूषण मिश्र संग हुनक एक मित्र स्वयं सियारूप मे आबि कार्यक्रमरूपी शिव केँ शव होमय सँ बचबैत स्वयं पूर्ण कार्यक्रम अवधि भरि लेल शक्तिस्वरूपा अन्नपूर्णा बनि विराजमान रहली आ मैथिली नहि बुझितो ओ आनन्दमग्न होइत अपनो एक प्रस्तुति हिन्दी मे पूर्ण मर्मसँ भरल प्रस्तुत केलीह। कविश्रेष्ठ मैथिलक कमी नहि रहल। मनीष झा बौआभाइ, आदित्य भाइ, नितेश कर्ण, किशन कारीगर, जगदानन्द झा मनु भाइ... रामानाथ बाबु, विमल बाबु, विजय काका, विजय जेट भाइ, संजय नागदह भाइ... मस्त वातावरण मे मैथिली जिन्दाबाद - मिथिला जिन्दाबाद होइत रहल। बिजली गूल भेलाक बाद कवि लोकनिक उत्साह एहेन चरम पर छल जे मोमबत्तीक रौशनी मे सेहो कविता वाचन चलैत रहल। अन्त मे बिजली केँ फेर आबय पडलैन।
     
अक्षय बाबु केर आलेख लेल देल समय - बहुत कमे समय मे दिन-राति एक करैत समस्त संवैधानिक सन्दर्भ पर प्रकाश दैत हम मिथिलावासीक मौलिक अधिकार पर प्रकाश देबाक एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण आलेखक प्रस्तुति ऐतिहासिक भेल। एहि विषय पर गंभीर कार्य करैत जाहि तरहें सुझाव देल गेल से मनन एवं अनुकरण योग्य अछि। डा. देवशंकर नवीन - हमरा लोकनिक मार्गदर्शक - हिनक प्रमुख आतिथ्य कार्यक्रम लेल पूर्ण चन्द्रमाक शीतल - निश्छल चाँदनीक समान छल। ऋतेशजी एवं शिशिर बाबु संग नीलमाधव चौधरी सर केर सरस प्रोत्साहित करयवला उपस्थिति आ राखल गेल आलेख पर टिप्पणी सारगर्भित छल। नाउ एण्ड देन - मिथिला मेन - दहेज मुक्त मिथिलाक प्रथम संरक्षक महोदय कृपानन्द सर केर अध्यक्षता कार्यक्रम केर पूर्णता हेतु मोहर लगेबाक काज केलक। तहिना परम आदरणीय वरिष्ठ विकासवादी अभियानी आ हमरा लोकनिकेँ सदिखन आशीर्वाद सँ प्रेरित करनिहार अखिल भारतीय मिथिला संघ केर अध्यक्ष श्री विजय चन्द्र झा केर उपस्थिति मिथिलाक भीष्म पितामह समान छल। ऋषि मलंगिया भाइ केर सहयोगी - प्रेरक वचन सँ डेग-डेग उठबैत मात्र ४ दिन मे कार्यक्रम केँ सफलता संग संपन्न कैल जा सकल। नीरज पाठक, रामचन्द्रजी, हेमन्त भाइ, प्रसुन प्रशान्त, मिहिर बाबु - हम कतेक नाम गनाउ।
दिल्ली मे आब बुझाइते नहि अछि जे अपन निजी गाम नहि हो। अहाँ सबहक उर्जा सँ हमर उर्जा हजारो गुना बढि गेल अछि। सुनील पवन जी द्वारा कलश यात्राक प्रथम चरण लेल जोश-भरल मदैद - विश्वास राखू, अहाँक हर सपना पूरा होयत आ मिथिला-मैथिली लेल ई देन कदापि कियो बिसरि नहि सकत।

बुधवार, 10 सितंबर 2014

अति आवश्यक सूचना: (समस्त मैथिल समाज संग मानव समाज लेल)


अति आवश्यक सूचना: 

(समस्त मैथिल समाज संग मानव समाज लेल)


दहेज मुक्त मिथिला एक आन्दोलन थीक जे सभक जबान पर आबि गेल अछि। निरंतर प्रयास सऽ युवा लगायत अभिभावक वर्ग में सेहो एहि आन्दोलन के सार्थकता जोर पर अछि। एहेन कोनो दिवस नहि जे केओ एहि सन्दर्भे अपन जिज्ञासा नहि पठबैथ। सभ के कहब छन्हि जे हुनका सऽ जतेक संभव होयत से सहयोग देब। हमर जबाब सदिखन एकहि:-


१. अपनेक सहज सामर्थ में जे अछि से करू।

२. जाहिठाम रहैत छी, ओहिठाम एक कार्यसमिति निर्माण करू।

३. अपने जाहि गाम के छी ओहि गामक किछु बड़-बुजुर्ग आ युवा-युवती के जोड़ैत एक समिति निर्माण करू।

४. काज बहुत रास नहि - एकदम छोट - जे - अपनेक इलाका में सम्पन्न भेल दहेज मुक्त विवाह केनिहार के सूची निर्माण करैत संस्था द्वारा सम्मान करबाक अवसर बनाउ, विवाह-योग्य वर व कन्या के परिचय संकलन करैत संस्था के वेबसाइट www.dahejmuktmithila.org पर 

प्रोफाइल निर्माण करू, एकर अलावे जे गाम या ठाम में छी ताहि ठामक धरोहर के उपेक्षा दूर करबाक लेल प्रयास करू। समिति के एक प्रमुख व्यक्ति के नाम संस्था के बैनर/पुस्तिका में प्रविष्ट करबाओ।

५. एकर अलावे अपनेक सल्लाह आ सुझाव सऽ निम्न उद्देश्य के पूर्ति तरफ ध्यान दियौक:

*समाजक मूल दुश्मन ‘लैंगिक विभेद’ अन्त करबाक अछि।

*असाक्षरता दूर करबाक अछि, खास कऽ के महिलावर्ग में पूर्ण साक्षरता के विशेष पहल करबाक अछि।

*दहेज मुक्त समाज निर्माण में दहेज के त्याग करनिहार के सम्मान जरुरी, नहि तऽ दहेज लेनिहार दहेज के स्टेटश सिम्बल मानैत समाज में प्रदूषण नित्य बढा रहल छथि आ वर्गीय विभेद के सृजन सेहो कय रहल छथि, से सावधान।

*आजुक २१म शताब्दी में दुनिया के बेटी कतेक आगू चलि गेल... लेकिन जाहि समाज में दहेज प्रथा के प्रभाव अछि, लोक बेटीके शिक्षा कम आ दहेज इन्तजाम में मजबूरी बेसी पड़ैत छथि, एहि तरहें समाज अन्य दहेज मुक्त समाज के अपेक्षा पिछड़ैत अछि।

*स्वेच्छाचार के स्वागत हो - जे अपन इच्छा सऽ नीक घर आ वर के चक्कर में घूमैत छथि आ लूटबैत छथि, हुनका पर केवल दया सऽ भरल एक दृष्टि दी आ हाथ जोड़ि ईश्वर सऽ प्रार्थना करी।

*बहुत रास तथाकथित इन्जिनियर आ एम.बी.ए./एम.सी.ए. आ आधुनिक अनेको तरहक डिग्री लैत इन्तजार में छथि जे केम्हरो सऽ केओ भोलाभाला बेटीवाला आबि किछु माल-खजाना सेहो दैथ आ घर के सुशीला-पुनीता सेहो दैथ... तदोपरान्त असलियत में लोभ के संजाल में फंसा ओहि बेटीवाला के तरह-तरह के मांग सऽ परेशान राखैथ, नहि पूरा भेला पर भोली-मुनियां के सब मिलि प्रताड़ित करैथ... एहेन समाज के दुश्मन के पहचान करू आ सतर्क करू सभके। सावधान।

*हमर सभ के प्रयास में दहेज मुक्त विवाह लेल सहजता हो ताहि के इन्तजाम कैल गेल अछि - www.dahejmuktmithila.org आ www.mithilashaadi.com, https://www.facebook.com/groups/dahejmuktmithila/ पर प्रोफाइल अपलोड/अपडेट करू - तदनुसार जोड़ी के खोजी करू। मुदा सावधान - बहुत रास ढोंगी बाजैत किछु आर आ करैत किछु आर अछि... ताहि हेतु दहेज मुक्त मिथिला के समिति संग सम्पर्क करैत मात्र अन्तिम निर्णय करू अन्यथा संस्था के जिम्मेवारी नहि होयत।

*एको शहर - एको गाम बाकी नहि हो... एहि अभियान संग जुड़य लेल अहाँके सद्‌प्रयास के जरुरैत अछि।
 


     
   https://www.facebook.com/groups/dahejmuktmithila/doc/374593335884737/ एहि पर देखू आ अपन सल्लाह सऽ एकरा आरो पुख्ता करू। 


*अपन परिवार के दहेज मुक्त बनाउ, स्वतः दुनिया दहेज मुक्त बनत। बेसी आडंबर के सेहो बहिष्कार करू। संछिप्त विवाह 

प्रक्रिया आ आवश्यक विध-व्यवहार के पालन हो। आदर्श विवाह प्रारूप सेहो उपलब्ध अछि।

सधन्यवाद!

दहेज मुक्त मिथिला परिवार

शुक्रवार, 23 मई 2014

माधवेश्वरनाथ महादेव


          सौराठ सभागाछी स्थित ई विलक्षण मन्दिर नहियो किछु तऽ ५०० वर्ष प्राचिन होयत। मिथिलाक एक राजा 'माधवेश्वर सिंह' केर नाम पर राखल गेल एहि मन्दिरक नाम 'माधवेश्वरनाथ महादेव' अछि। दहेज मुक्त मिथिला व ऐतिहासिक सौराठ सभा विकास समिति केर संयुक्त तत्त्वावधान मे ८ जनवरी, २०१२ एक बैसारक मार्फत एहि प्राचिनतम मिथिला धरोहर केर जीर्णोद्धार लेल निर्णय लेल गेल छल। एहि कार्यक वास्ते मधुबनी जिलास्तरीय एक कार्यसमिति सेहो बनेबाक भार आदरणीय शेखर चन्द्र मिश्र व हुनक वकील मित्र (मधुबनी कचहरी वकील संघ केर सचिव - नाम विस्मृति भऽ रहल अछि) पर देल गेल छल। ओहि बैसार मे प्रवीण नारायण चौधरी (नेपाल ) आ करुणा झा (दहेज़ मुक्त मिथिला अध्यक्षा नेपाल ) जी सेहो भाग लेने रहैती । बैसारक पूर्ण विवरण आ निर्णय एहि सँ पूर्व सेहो देल गेल अछि जे आइयो दहेज मुक्त मिथिलाक पुरान पोस्ट मे मौजूद अछि। माननीय विधायक फय्याज भाइ (बिस्फी विधानसभा), मधुबनी ड्योढिक बाबु कुलधारी सिंह, रहिका सँ बाबा निलाम्बर मिश्र, सौराठ सँ प्रो. सर्वेश्वर मिश्र सहित अनेको गणमान्य बुद्धिजीवी, ज्येष्ठ नागरिक, समाजसेवी आदि केर बीच भेल समस्त निर्णय छल जे हम सब स्वयंसेवा सँ एहि मन्दिरक जीर्णोद्धार करब। ताहि समय श्री निलाम्बर मिश्र तात्कालीन विधान परिषद् सभापति  -
ताराकान्त बाबु केर स्थानीय प्रतिनिधिक रूप मे तारा बाबु संग लगे हाथ बात करैत ओहि मिटींग सँ दुइ महत्त्वपूर्ण निर्णय करौने छलाह। एक, सौराठ मे 'मिथिला चित्रकला शिक्षण संस्थान' खुलेबाक आर माधवेश्वरनाथ महादेव मन्दिर केर जीर्णोद्धार लेल कला-तथा-संस्कृति मंत्रालय, बिहार सँ कार्य करेबाक पुष्टि, दुनू कार्य लेल बिहार सरकारक टोली सेहो आबि आवश्यक छानबीन करैत वचन दय चलि गेल। संस्थान आ मन्दिर दुनू कार्य हाल धरि बिहार सरकार पूरा नहि कय सकल अछि। आ एहि चक्कर मे हमरा लोकनि स्वयंसेवा सँ सेहो किछु नहि कय सकलहुँ अछि। आब ७ जुन सौराठ सभागाछी मे दहेज मुक्त मिथिलाक स्मारिका विमोचन कार्यक्रम मे पुन: एहि समस्त विषय पर वार्ता करैत आगामी योजना बनायब।

शुक्रवार, 27 सितंबर 2013

दिल्ली में सौराठ सभा लगेबाक विचार चली रहल अछि - मिथिला वासी के केहन विचार ?

सौराठ सभा दिल्लीमे चाही, 


दिल्ली मे सौराठ सभा होबाक चाही 

दहेज पेर अंकुश लगबाक चाही 
शिक्षित आ अशिक्षित सब दूलहाके
आइ एहेन बात बजबाक चाही
धिक्कार अछि ओहि माता-पिता पर जे दहेज मँगैअ
पुत्र पुत्री दुनु के जन्म द् एकरा खरिद-बिक्री मे लगैअ
प्रेम के बदला मे पाए मँगैअ 
सौराठ सन ऐतिहासिक सभा सँ 
बहुत किछु सिखबाक चाही 
हमर बाबा दादा मूर्ख रहितो 
विद्वताक परिचय देलक 
मुदा आइ पढलहवा सब 
नाम बुरौलक, धर्म डुबौलक, 
दहेज के रुपे सोन चाही, चानी चाही, रुपैया चाही,
सारा सुखक समान चाही 
वाह रे दहेज! केकरो नहि बेटी चाही
केकरो नहि पुतोहु चाही
केकरो नहि बहिन चाही
वाह रे दहेज सब के रुपैए टा चाही 
तहिला हमरा दिल्ली मे मात्र नहि 
हरेक गाउँ मे सौराठ सभा चाही 
तहिला हमरा दिल्ली मे मात्र नहि 
हरेक गाउँ मे सौराठ सभा चाही\



"सौराठ सभा चाही" रचनाकार : अजित झा, 




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रविवार, 8 सितंबर 2013

दहेज़ और ओकर कुप्रथा के निवारण


दहेज़ और ओकर कुप्रथा के निवारण

जखन कतौ दहेज़ पर सार्वजनिक चर्चा होइत अछी त देखबा में अबैत अछी जे सब केओ अपन मत शक्तिशाली ढंग सँ दहेज़ के विरोधे में राखैत छैथ | मुदा अश्चार्यक बात छैक जे दहेज़-प्रथा घटै के बदला में बढिए रहल छैक | एकर कारन इ छैक जे आरम्भे सँ हम सब अहि प्रथा के नै त ठीक जकां बुझै के प्रयास कैलियै आ ने ओकर सही निवारण कै सकलियै | फलतः जे प्रथा समाज में एक नीक उद्देश्य सँ आरम्भ कैल गेल छल से विकृत भ का दानव के रूप ल क हमरा सभक सोझां में मुह बौने ठाढ़ अछी | और हमर इ शशक्त मत अछि जे जावत तक हम सब एही प्रथा के ठीक जकां संबोधित नै करबैक तावत तक एही प्रथा के सही संसोधन नहीं कैल जा सकैत अछी | केवल वार्ता, जुलूस, और आन्दोलन सब एक अरन्यरोदने साबित भ सकैत अछी जाकर प्रमाण इ जे घत्बा के बदला इ प्रथा दिन-दिन बढिए रहल अछि |

प्राचीन समय सँ हिन्दू समाज में दहेज़ प्रथा कहियो नहीं छलैक | 'दहेज़' शब्द तक हमरा संस्कृत के उपज नहीं लागैत अछि | जतेक पौराणिक ग्रन्थ छैक कोनो में दहेज़ के वर्णन नै छैक | इ प्रथा आरम्भ भेल ब्रिटिश सरकार के कानून सँ और शनै शनै विकृत रूप धारण कै लेलक | सन १७९३ में लार्ड कार्नवालिस के समय में "परमानेंट सेटलमेंट ऑफ़ बंगाल" के नियम पारित भेलैक, जाकर फल इ भेलैक जे लोग सब के भूमि के स्वामी बनै के अधिकार भेट गलैक | एही सँ पूर्व सरकार पूरा भूमि के मालिक छलैक और लोग सब मात्र ओहि भूमि पर बसैत छल एवं ओकर उपयोग करैत छल | एही कानून सँ एक और विकृत परंपरा, जमींदारी, के प्रादुर्भाव भेलैक | एकरा बाद अंग्रेज सब एक और कानून पारित किलक जाही सँ स्त्री के संपत्ति के अधिकार सँ वंचित कै देल गेल| एकर फलस्वरूप लोग अपना बेटी के भेंट के रूप में धन, कैंचा, सोना, इत्यादी विदा काल में देबै लग्लै जाही पर केवल आ केवल स्त्री के अधिकार छलैक | कालांतर में इ व्यवस्था दहेज़ के रूप में प्रचलित भ गलैक | एखनो तक एही में कोनो दोष नहीं आयल रहैक और एक प्रकार सँ ई व्यवस्था स्त्री के बहुत हद तक आर्थिक स्वतंत्रता प्रदान करैत छलैक | 

मुदा जेना जेना लोग पश्चिमी शिक्षा प्राप्त करैत गेल और भौतिकवाद के प्रचार-प्रसार होइत गेलै, तेना तेना वर-पक्ष के तरफ सँ दहेज़ के मांग बढ़ल गेलै | अहि दिशा में भारत सरकार सेहो कम दोषी नहीं अछि | अहि प्रथा के ठीक करै हेतु भारतीय सन्दर्भ में समाधान नहीं खोजि क हमर नेता लोगनि ऊंट जक पश्चिम दिस मूड़ी उठा क पश्चिमी संधर्भ में हल निकालै के प्रयास में छोट रास्ता अप्नौलनि और दहेज़ के सोझे गैर-कानूनी बना देलखिन| फेर सँ ओहे संकट स्त्री संग लागु भ गलैक जे अंग्रेज के समय छलैक | स्त्री त पहिने सा संपत्ति के अधिकार सँ वंचित छली, आब वो स्त्री-धन सँ सेहो वंचित होमय लगली | आब दहेज़ अपन असली रूप में उजागर भेल | वर एवं वर-पक्ष के ई बात स्वाभाविक रूप सँ कचोटे लगलैन जे एक स्त्री खली हाथ हुनका घर अबैन आ अपन पति के संपत्ति में आधा के साह्भागी बनी जाय | फलस्वरूप दहेज़ के आब मांग उठे लागल और दिनों-दिन जोर पकरे लागल | दहेज़ के रूप आब विकृत होमय लागल | 

पुनः सर्वोच्य न्यायालय के एक नियम पारित भेल जकर अनुसार स्त्री के अपन पैत्रिक संपत्ति में बराबर के अधिकार भेट गेलै | बिना ई सोचने जे एकर समाज पर की असर परतैक, अनेको नियम बिना सोचने-बुझने पारित भेल गेल | फलाफल भेलैक जे दहेज़ प्रथा समाप्त होई के बदला उग्रतर होइत गेल और अंततः दानव के रूप ल लेलक |

हाले में एक और कानून संसद द्वारा पारित भ रहल अछि जकर अनुसार स्त्री के नै सिर्फ अपन पति के संपत्ति में बल्कि अपन पति के पुस्तैनी संपत्ति में सेहो हिस्सा भेटतै, डाइवोर्स लेला पर | कियो व्यक्ति अंदाज लगा सकैत छैथ जे एकर दूरगामी परिणाम समाज पर की परतैक ? कनेक कल्पना कै के देखिऔ | एकटा लड़का विवाह क क एक लड़की के अपना घर आनैत छैथ | तीन साल तक ( जे की न्यूनतम अवधि मानल गेल अछि नवका क़ानून में डाइवोर्स के लेल) ओ लड़की घर में कोहराम मच्बै छैथ | तकर बाद डाइवोर्स फाइल करैत छैथ ( जे महिला के फाइल केला सा आसानी सँ भेट जतैक) और अलग भ क अपन पति और हुनक पुरूखा के लगभग आधा संपत्ति ल क चलि दैत छैथ | जों कियो वर व वर के पिता गंभीरता सँ अहि पर विचार करैथ, त एहेन सम्भावना के देखैत की ओ अपन बालक के विवाह बिना मोट दहेज़ लेने करता? की एहेन कानून सब सँ दहेज़ के दानव और भयानक नै बनतै ? कतेक लोग हेता जे सब बात जनैत अपन आ अपन परिवार के भविष्य दाऊ पर लगेता ? हम अपन विवाह में एकौ रूपया तिलक व दहेज़ नै लेलौ | एते तक जे हम अपन विवाह के खर्च संपूर्ण रूप सँ अपने केलौ | मुदा आब हमरो एकै टा बालक अछि | और हम आई-काल्हि के हालत देख क गंभीर सोच में पड़ल छि जे अपन पुत्रक विवाह बिना मोट दहेज़ लेने केना क दबैक कोनो एहन लड़की सँ जे खली हाथ आबय और हमर संपत्ति के स्वामिनी बनी जाय ? और जहिया ओकर मोन होई तहिया हमारा बेटा सँ डाइवोर्स ल क हमर मेहनत सँ अरजल संपत्ति आधा बैंट क ल लिया | की अहि तरहक कानून दहेज़ के और प्रश्रय नै दैत छैक? सब सँ आग्रह अछि जे भावना में नै धरातल पर उतरि क सोचैथ | 

आब कानी समग्र रूप सँ हिन्दू विवाह अधिनियम, दहेज़ उन्मूलन कानून एवं स्त्री के संपत्ति के अधिकार पर ध्यान दिऔ | अगर कोनो स्त्री चाहे त अपन पैत्रिक संपत्ति में सँ अपन हिस्सा आसानी सँ ल सकैत अछि | अपन पति एवं ओकर पुस्तैनी संपत्ति में सेहो हिस्सा ल सकैत अछि | लेकिन कोनो स्त्री सँ कोनो पुरुष कोनो हाल में किछु नै हासिल क सकैत छैथ | बहुत घटना एहन होमय लगलैक अछि जाही में देखल गलैक अछि जे किछु स्त्री केवल धन के लोभ में विवाह के अपन पेशा बना लेलक अछि | संगे भाई-बहिन के सम्बन्ध में जे माधुर्य छलैक सेहो बहुत ठाम खट्टा भेल जा रहल अछि | अगर अहिना कानून बनैत रहल आ भाषण चलैत रहल त जल्दिये ओहो दिन निश्चय आयत जहिया रक्षाबंधन और भरदुतिया के पावैन सेहो उठि जायत |

तखन दहेज़ रुपी दानव के कोना समाप्त कैल जाय ? हमरा विचार सँ दहेज़ के कानूनी अधिकार घोषित क स्त्री के ओकर पैत्रिक संपत्ति के हिस्सा के बराबर दहेज़ दै के व्यवस्था कैल जाय और एकरा बाद ओकरा अपन पति के संपत्ति पर सेहो अधिकार देल जाय | मुदा पति के पुरूखा के संपत्ति पर ओकर अधिकार नै हेबाक चाही | संगे, लड़का और लड़की के पूर्ण स्वतंत्रता एवं दायुत्वा अपन विवाह के लेबक चाही | जाबे धरी माता-पिता लड़का और लड़की के विवाह ठीक करैत रह्थीन ताबे धरी दहेज़ उन्मूलन मात्र सपने त रहत |

गुरुवार, 5 सितंबर 2013

प्रिय दमुमि राष्ट्रीय अध्यक्ष महोदय,



सितम्बर ५, २०१३.

प्रिय दमुमि राष्ट्रीय अध्यक्ष महोदय,

हमरा लोकनि दहेज मुक्त मिथिला नाम परिकल्पनाकेँ सफलतापूर्वक स्थापित कयला उपरान्त अपनेक सक्षम नेतृत्वमें बेहतरी दिसि उन्मुख छी, एहि सँ हमरा लगायत सभक हृदयमें चारू कात प्रसन्नता दृष्टिगोचर भऽ रहल अछि। विगतमें सेहो हमरा लोकनि हरेक समाजमें एक जागरण अभियान रूपमें दहेज विरुद्ध स्वैच्छिक संकल्प सभाक आयोजन लेल प्रतिबद्ध रही, आब जखन हमरा लोकनिक ई संस्था समस्त भारतमें कार्य करबाक लेल पंजीकृत भऽ चुकल अछि तखन मिथिलावासी होइथ वा मिथिलेतरवासी, सभक समाजमें छोट-छोट सभा द्वारा संकल्प अभियान केँ सक्रियतापूर्वक चलेबाक आवश्यकताक पूर्ति सहजता संग वैह समाजक सक्रिय सहयोग सँ कैल जा सकैत छैक, बस हमरा लोकनि केवल लीड धरि दी। जेना महाराष्ट्रक समिति उर्जावान् लोककेर समूह सँ भरल अछि आ आगामी गणेश चतुर्थीमें पुन: समुचित बैनर सहित हमरा लोकनि जन-जागृति करय लेल जा रहल छी... तऽ एहेन में हमर प्रस्ताव ईहो अछि जे किऐक नऽ छोट-छोट संकल्प सभाक आयोजन हर जुडल सदस्य द्वारा मुंबई सहित अन्यत्र सेहो कैल जाय? एकर प्रारूप अत्यन्त सहज आ मर्मस्पर्शी होयत, केवल कोनो एक सदस्य द्वारा एक छुट्टीक दिन एक छोट सभा मार्फत कम से कम ५०-१०० परिवारक लोककेँ आमन्त्रित करैत स्वैच्छिक संकल्प करबैत दहेज विरुद्ध संकल्प ली:

१. हम माँगरूपी दहेज नहि लेब नहि देब।

२. अपन धियापुताक विवाह पर्यन्तमें माँगरूपी दहेज नहि लेब नहि देब।

३. एहेन कोनो वैवाहिक कार्यक्रम जाहिमें माँगरूपी दहेजक लेन-देन कैल गेल अछि ताहिमें सहभागी सेहो नहि होयब।

आ एहि तरहें संस्थाक सदस्यता प्रदान करैत हमरा लोकनि आगू बढैत चलब। यैह अवधारणाक अनुरूप दहेज मुक्त मिथिला अपन योगदान समाजकेँ प्रदान करैत असीम सफलता सेहो पायत आ समाजमें दहेजरूपी दानवक प्रतिकार बड पैघ स्तरतक कय सकत से आशा अछि।

कृपया अपने आ समस्त राष्ट्रीय व क्षेत्रीय कार्यकारिणी हमर एहि छोट प्रस्तावपर विचार दैत अमल करबाक लेल मुहिमकेँ गतिशीलता प्रदान करब से आत्मविश्वास अछि।

अपनेक विश्वासी,

प्रवीण नारायण चौधरी


https://www.facebook.com/groups/dahejmuktmithila/doc/374593335884737/


बुधवार, 17 जुलाई 2013

सौराठ फेर चाही - किऐक?

 सौराठ फेर चाही - किऐक?

१. दहेज मुक्त विवाह प्रोत्साहन लेल, नहि कि अपन बेटा के बेचैत ओकर भविष्य के एक अहंकारी परिवारके अहंकारी कनियांके हाथ निलामी लेल।


२. मिथिला के महान्‌ परंपरा जाहिठाम नहि सिर्फ वैवाहिक सम्बन्ध आ अधिकार निरीक्षण वा पंजियन होइत छलैक, लोक स्वतन्त्र वातावरणमें वर के चुनाव करैत छलैक बल्कि मिथिलाके लेल नव विकास के अत्यन्त महत्त्वपूर्ण चर्चा-परिचर्चा सेहो होइत छलैक। आब विद्वत्‌ सभाके रूपमें एकर संरक्षण होइक चाही।

३. हर क्षेत्रके विकास में पर्यटन आ ऐतिहासिक महत्त्वके संरक्षण अत्यन्त आवश्यक छैक, तखनहि ताहि क्षेत्र के अस्मिता के जोगायल जा सकैत छैक। नहि तऽ क्रमशः सभ महत्त्व अपन महत्ता के मरैत छोड़ि देतैक आ तेकर बाद भविष्य में समुद्र के जगह हिमालय के कल्पना केवल आभास कैल जा सकैत छैक। अतः सौराठ पर्यटन के केन्द्र बनैक चाही आ एहि लेल समस्त मैथिलकेँ प्रण लेबाक चाही। मधुबनी सऽ सटल दरभंगा, सहरसा, मधेपुरा, अररिया, पुर्णियां, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, सीतामढी, चंपारण आ समस्त मिथिला क्षेत्रमें नीक पर्यटन के विकास के संभावना छैक। एहि सभके लेल प्रथम विकास सौराठ सभके लेल दरबाजा खोलि सकैत छैक आ एहि लेल पुनः मिथिला के सशक्त समाज के प्रतिबद्ध बनबाक जरुरी अछि।

४. गुजरात में सोमनाथ महादेव स्वयं सौराठ में आबि बसलाह - एकर बहुत पैघ धार्मिक माहात्म्य सेहो छैक। लेकिन एहि लेल नहि तऽ कोनो चेतना क्षेत्रीय लोक में छन्हि जे एहि जगह के धार्मिक पर्यटन लेल विकास कैल जाय आ नहिये कोनो सरकारी पहल भऽ रहल छैक... आखिर सरकार बिना हमरा-अहाँके जगने किऐक जागत... ताहि हेतु सेहो सौराठ के सभागाछीके विकास अत्यन्त महत्त्वपूर्ण भूमिका निर्वहन करतैक।

५. दरभंगा राज क्षेत्र आ एहि संस्था द्वारा निर्मित अनेको जगह प्राचिन आ भव्य कलाकृति सभकेँ संरक्षण के संगहि अनेको एहेन महत्त्वपूर्ण धरोहर छैक जाहिके संरक्षण लेल स्वयं स्थानीय नागरिक पहिले जागैथ - प्रवासित भेल मैथिल आइ दुनिया में सगरो पसरल छथि आ क्रमशः अपन अतीत के सेहो ठुकराबैत छथि... एतेक तक जे गोसाउनि-कुलदेवता पूजन तक उठि गेल अछि... :( आ एहि सभसँ मिथिलाके गौरवमय अतीत स्वयं पिछड़ल जा रहल अछि। अतः सभागाछीके ताला खुलला सऽ एहि सभमें उल्लेखणीय परिवर्तन आ प्रवर्धन के गुंजाईश बढतैक आ मिथिलाके स्वरूप बदलतैक से विश्वास अछि।

अपने लोकनि सँ बेर-बेर निवेदन जे एहि विन्दुपर गंभीरतापूर्वक विचार करी आ मिथिलाके शुद्ध संस्करण निर्माण में सहायक बनी। विकास सेहो स्वतः पटरी पर आयत एहि विश्वास के संग समस्त जनमानसमें शुभकामना अछि।

सहयोगाकांक्षी:
दहेज मुक्त मिथिला परिवार
सौराठ सभागाछी, मधुबनी।







मंगलवार, 9 जुलाई 2013

अक्सर पूछल जायवाला प्रश्न आ उत्तर

  • अक्सर पूछल जायवाला प्रश्न आ उत्तर


    प्रिय द.मु.मि.के आगन्तुक!

    हम सभ अनुभव कयलहुँ अछि जे दहेज मुक्त मिथिला अपन स्थापना मार्च ३, २०११ सँ एखन धरिक अत्यन्त कम अवधिमें एक अन्तर्राष्ट्रीय समूह बनि गेल अछि; शनैः शनैः समयक माँग अनुरूप बहुत रास सुधार सेहो लाओल गेल अछि जाहिसँ सहभागीजनकेँ सुविधा हो। पहिले ई पूर्णतः मैथिल हेतु मात्र समर्पित छल, कालान्तरमें एतय अन्यके सहभागिता देखैत हम सभ हिन्दी आ अन्य भाषाके सेहो मिथिलाक भाषा मैथिलीके अतिरिक्त मान्यता देलहुँ।

    आब देखयमें आबि रहल अछि जे आगन्तुक एहि समूहके बारे आ एकर प्रतिबद्धता के बारे जानकारी रखबाक लेल बेसी रुचि लऽ रहल छथि। अतः आजुक आवश्यकता एक ‘अक्सर पूछऽ जायवाला प्रश्न आ उत्तर’ के अछि जाहिसँ सभक जिज्ञासा के पूर्ण समाधान हो, एतय तक जे सदस्यगण पहिले सऽ सहभागी बनल छथि हुनकहु जानकारी के अभाव देखल जाइछ, अतः ई कदम हुनकहु लेल हितकारी बनत।

    एखन एकरा अहिना छोड़ल जा रहल अछि बिना कोनो प्रश्नक - अपने अपन तरहें प्रश्न निर्माण कय सकी। या, यस्वतः संज्ञान सऽ सामान्यतया पूछल जायवाला प्रश्न हम सभ स्वयं रखैत अपने लोकनिक जानकारी लेल सभ बात राखब।

    हरिः हरः!

    प्र. १. दहेज मुक्त मिथिला के परिचय संछिप्तमें?

    उ. एक जागृति अभियान! युवा के जागरण हेतु दहेज प्रथा के बढैत प्रकोप पर चर्चा के प्रोत्साहन! दहेज नहि लेब, नहि देब... धिया-पुता में सेहो नहि लेब-देब आ ने एहेन कोनो विवाह में सहभागी बनब जतय लेन-देन भेल हो।

    प्र. २. दहेज के परिभाषा?

    उ. सब किछु पसिन पड़ल, विवाह लेल तैयार छी... मुदा स्वेच्छाचार के विरुद्ध एक-दोसर पर माँग थोपैत छी। माँग कैल कोनो वस्तुके दहेज कहल जैछ। विवाह के पूर्व-शर्तमें एहेन माँग के मात्र दहेज कहल जाइछ जे सामान्य आवश्यक माँग - जेना नीक घर-वर, नीक बोल-वचन, नीक पढल-लिखल, नीक खानदान, सुन्दर आदर्श... ई सभ माँग मानवता के पोषक माँग थीक, एकरा दहेज नहि कहल जा सकैत छैक। ई सभ भावना के माँग भेल जे हर प्राणीमें नीक प्रति आकर्षण रखैछ। वस्तुतः माँग ओ भेल जे हमर बेटी लेल हमरा चान चाही, हमरा २ गो तारा आ वृहस्पति समान गन्धर्व-राजकुमार चाही... ओम्हर जे हमरा अलखचान स्वर्गक परी पुतोहु चाही, ग्रेजुएट आ विदुषी विद्योतमा चाही.. से सभ चाही आ चाह के युद्ध में अन्त के माँग जे मुद्रा एतेक चाही... बरियाती के स्वागत एना चाही... विवाह शहरे में हो... होटल में बरियाती के ठहराव हो... आ अनेको तरहक माँग जे वास्तवमें सामनेवाला के स्वेच्छा सऽ आ क्षमता सऽ बहुत दूर के वा कर्जा करय लेल बाध्यकर हो। एहेन माँग के हम सभ दहेज मानी। अर्थात माँगरूपी द्रव्य वा वस्तु वा थोपुआ भावना के हम सभ दहेज मानी। ओ दहेज नहि भेल जे दुनू पक्ष मनमर्जी सँ अपन सन्तानके विवाह उपलक्ष्य लेन-देन करय लेल तैयार छथि, करैत छथि वा करबाक इच्छा रखैत छथि।

    प्र.३ दहेजक विरोध किया? 
    उ. दहेजक विरोध के मूल कारण जे आइ के विकसित युग में हमर समाज में अखनो बेटा आ बेटी में असमानता मानल जा रहल अछि। बेटा अगर शिक्षित आ रोजगार सँ जुरल अछि तऽ पुतोहु चाही गुणी, शिक्षित, खानदानी आ तेकर संग दहेज़ के मोट रकम आ साज-समान आधुनिक युग मुताबिक। भले बेटा डॉ. अईछ आ पुतहु सेहो डॉ. तैयो बेटा बाला लेबे करता। एकटा गरीब बाप के बेटी जे सर्वगुण संपन्न अछि, मुदा पिता के पास पाई नहि छैन तांइ ओकरा मजबूरन बेमेल वियाह के लेल बाध्य होबय परैत छैक। लोक दहेज़ के प्रतिष्ठा सऽ जोरने जा रहल छैथ। फलाँ के बेटा के एतेक देलकैक तऽ हमर बेटा कि ओकरा सऽ कम अछि? ई प्रश्न दिन ब दिन एहि दहेज़ रूपी दानव के काया बढा रहल अछि। साधारण लोक आजुक एहि आर्थिक संकट के समय में अपन निर्वहन करय में असमर्थ भऽ रहल अछि, तइ पर ई दहेजक चिंता बहुतो के जीवन के सुख-चैन के बरबाद केने अछि। आब समय आइब गेल जे समाज के सब वर्ग एहि विकराल समस्या पर चिंतन करी.   

    प्र.४ दहेज अभिशाप कोना?

    उ. दहेज के शुद्ध स्वरूप तऽ परंपरा सँ केवल आशीर्वाद आ स्वेच्छाके प्रतीक रहल, मुदा कालान्तर में लोभ, लालच आ सौदागरी के कारण आब ई माँगरूप में परिणत भऽ गेल अछि। एकर दूरगामी प्रभाव एतेक खतरनाक जे लोक बेटी पैदा तक करय में डेराइत छथि, आधुनिक विज्ञानक विध्वंसक गति सँ कोइखमें बेटीके भ्रूण केर हत्या होवय लागल अछि। एकर दोसर दुष्प्रभाव ई जे लोक सस्ता-सुभिस्ता निबटय के चक्करमें बेटीके समुचित पढाइ सँ सेहो वंचित रखैत छथि। बेटी जातिकेँ समाजिक दुत्कार के कारण मनोबल गिरल जा रहल छैक आ लिंगभेदके सभ दुष्प्रभाव सऽ समाज पिछड़ल जा रहल अछि। समाजिक सौहार्द्र आ समग्र विकास के जगह विध्वंसक विचारधारा आ अनाचार-कदाचार बढल जा रहल अछि। कतेको बेटी उपेक्षित रहलाके कारण आत्महत्या सनक कलंकी कदम तक उठा लैछ। कतेको गरीबके बेटी अपन देह के बाजार में निलाम तक करय लगैछ। हर तरहें दहेज के चलते विकास ठमैक गेल अछि आ नित्य हिंसा-अत्याचार के चलते समाजक एक सशक्त अंग नारी अवहेलना के शिकार बनि रहल छथि। एकर बुराई तऽ हम किछु मात्र गना सकल होयब, एकर बर्बरता के सीमा नहि छैक जेना बुझा रहल अछि।

    प्र.५ दहेज मुक्त मिथिला कि दहेज मुक्त विवाह लेल आवश्यक कार्य करैत छैक?

    नहि! विवाह नितान्त व्यक्तिगत विचार आ रुचिके बात थीक। एहिमें भला कोनो संस्था कोना के प्रयस करतैक! बस, ई एक मुहिम थीक जे दहेज मुक्त विवाह लेल सभ सँ अपील करत। दहेज मुक्त विवाह करनिहार के सम्मान देत। दहेज के बुराई सभ के लोकक समक्ष राखत। आजुक नव पीढी के संग चर्चा करत जे आखिर कोनो परंपरा के रूप यदि बिगैड़ जाइत छैक तखन बोझ कतेक दिन तऽ उठायल जाय! दहेज के स्वच्छ परंपरा आब मरल लाश जेकाँ वातावरण प्रदूषित केने जा रहल छैक। एहि सँ महामारी पसैर रहल छैक। एहि लाश के संस्कार करब जरुरी छैक नहि कि एकरा लऽ के राजनीति वा समाजिक सम्मानके प्रतीक ठाड़्ह करब! एहि लेल आजुक पीढी जागैथ आ अपन बड़-बुजुर्गके बुझाबैथ। बस यैह सभ तरहक जागृति पसारबाक अभियानके नाम थीक दहेज मुक्त मिथिला। जी! यदि युवा एकत्र होइत छथि तऽ स्वयंसेवाके तर्ज पर किछु कार्य जरुर करैथ। जेना महत्त्वपूर्ण परंपरा के संरक्षण! एहि में वर्तमान समय सौराठ सभा के शुद्ध स्वरूप के संरक्षण लेल प्रयास करैत छैक। देश-विदेश पसरल समस्त मैथिल आइ इहो समस्या सऽ जूझि रहल छथि, अत: एहि लेल एवं मिथिलाक सम-सामयिक समस्या पर सामूहिक चर्चा लेल सेहो एक सांस्कृतिक पर्यटन केन्द्रके रूपमें लोकवर्गकें जमा होयब जरुरी।

    प्र.  हमर बेटी/ बहिन के विवाह मे दहेज देवय परल ताइ हमहूँ दहेज लेब। ई कतेक उचित?

    उ. किछू गोटे के कहब छैन जे हमार बहिन/ बेटी के विवाह मे दहेज देवय परल ताइ दहेज लेब। आब काहू जे जदी आई हमर घर मे चोरी भ जाई त की हमहूँ दोषर के घर चोरी करी। ई की उचित? आहाँ किया दहेज गननौ? एक बेर विरोध त करू। मानाई छि दिकत होयत मुदा दहेज रूपी दानव स लड़े त परबे करत। मात्र आरोपित कय आपण जिम्मेदारी स भगव की उचित?    


मंगलवार, 5 मार्च 2013

दहेज मुक्त मिथिलाक सफलतम २ वर्ष पूरा

दहेज मुक्त मिथिलाक सफलतम २ वर्ष पूरा

दहेज मुक्त मिथिला: तेसर वर्षमें प्रवेश(विशेष प्रतिवेदन)
दहेज मुक्त मिथिला आइ ३ मार्च २०१३ तेसर वर्षमें प्रवेश पौलक - विगत दू वर्षमें उपलब्धि सामान्य सऽ सेहो निचां रहल जेना हमर अनुभूति कहि रहल अछि। असफलता-सफलताक द्वंद्वमें फँसबाक लेल नहि, लेकिन आत्मनिरिक्छण लेल ई जरुरी जे दुनू विन्दुपर समीक्छा जरुर कैल जाय।
सफलता आ असफलताक सूची:सफलता १. सौराठ सभागाछी पुन: उत्थान हो ताहि लेल सार्थक सहकार्य। २०११ व २०१२ दुनू वर्ष।
असफलता १. बहुतो युवा द्वारा गछलाके बादो सभामें नहि आबि चोरा-नुका के विवाह करब घोर असफलता आ शायद आरोपके सिद्ध करयवाला जे कहयकाल मात्र दहेजके परित्याग लेल शपथ लेल गेल लेकिन विवाह घडी चोरा-नुका कार्य करब याने अवश्य किछु संदेहास्पद व्यवहार तरफ इशारा करैत अछि।  
सफलता २. दहेज मुक्त मिथिला लेल पूर्ण प्रजातांत्रिक चुनाव अनलाइन सभा द्वारा करैत एक कार्यकारिणीक गठन।
  असफलता २. मैथिलक आम स्वभाव जे आपसमें मेलके कमी, व्यक्तिवादी बनैत मुद्दाके दरकिनार करैत केवल आपसमें घमर्थनबाजी करब तेकर खुलेआम प्रदर्शन आ विभिन्न बहाने पलायनवादी मानसिकताक प्रदर्शन। एकजूटतामें कमी, अभियानक गतिमें शिथिलता।  
सफलता ३. दहेज मुक्त मिथिला लेल वेबसाइटके निर्माण, फीचर व फेसिलिटी पर सुन्दर समझदारीक संग कार्य संचालन सँ एक कीर्तिमान स्थापित कैल गेल।  
असफलता ३. उपरोक्त वेबसाइट के समय-समयपर स्थिति-परिस्थिति अनुरूप बदलैत आम जन लेल उपयोगी बनेबाक छल, लेकिन वेब एडमिनिस्ट्रेटर राजीव झा'क व्यक्तिगत व्यस्तता वा अन्य कारणे आवश्यक आश्वासनक बावजूद कोनो कार्य पूरा नहि होयब बहुत पैघ असफलताक द्योतक, एकर समाधान लेल समुचित सहकार्य के पूर्ववत् राखब जरुरी या नहि तऽ नव वेबसाइट निर्माण लेल कदम उठेबाक आवश्यकता।  
सफलता ४. २०११ अगस्तमें विराटनगरमें संकल्प दिवस भव्यताक संग मनायल गेल - सैकडों जनसमूह दहेजक कूप्रथा विरुद्ध शपथ लेलाह। नेपालक विभिन्न एफ-एम पर अभियानक जोर-शोर सँ आवाज भेटब - हिन्दुस्तान, प्रभात खबर, जागरण लगायत नेपालक विभिन्न पत्र-पत्रिकामें अभियान प्रमुखता सँ जगह पेलक जेकर सार्थक संवाद सँ लाखों जनसमूह लाभान्वित भेल।   
असफलता ४. २०११ में दिल्लीमें राष्ट्रीय अधिवेशन करबैत सगर मिथिलामें दहेज विरुद्ध शंखघोषके महा-योजना विफल। कारण अनेक - दिल्लीमें संगठनके कोनो मजबूत रूप नहि, जे संग वैह द्रोही... आ कतेको अन्य कारण। फलस्वरूप कार्यकारिणीमें आपसी कलह आ टूट-फूट, एक नव संस्थामें एहि तरहक व्यवहार सँ कमजोरी आयब स्वाभाविक।  
सफलता ५. २०११ के दुर्गा पूजामें गाम-गाम भ्रमण आ अभियानक प्रचार।
असफलता ५. अभियानमें अपेक्छा सभ सदस्य सँ रहितो बहुतो गाम पधारल सदस्य द्वारा कोनो व्यक्तिगत प्रयास नहि कयला सँ हतोत्साहके प्रसार।
सफलता ६. २०११ दिसम्बरमें विराटनगरक अन्तर्राष्ट्रीय मंच सँ जनसमूह द्वारा दहेज मुक्त मिथिलाक अभियान प्रति समर्थन हेतु सहयोग के आह्वान, नेपालमें दमुमि निर्माण लेल करुणाजी द्वारा प्रतिबद्धता आ सफलतापूर्वक संस्थाक पंजियन कार्य पूरा। 
 असफलता ६. आन्तरिक राजनीति आ आरोप-प्रत्यारोप सँ पुन: आपसी विश्वासमें ह्रास, पंजियन उपरान्त सोचल कार्य में देरी।   
सफलता ७. सौराठ सभामें जानकी नवमी मनयबाक कार्य पूरा।  
असफलता ७. जाहि तरहक विचार गोष्ठी करेबाक नियार छल ताहिमें घोर कमी - पुन: आपसी विश्वासमें कमीके कारण तथा अनावश्यक शंका तथा गैर‍-जरुरी राजनीतिक हस्तक्छेप सँ अभियानकेँ हतोत्साहित कैल गेल। खर्चक बावजूद आवश्यक उपयोगितामें अकाल।  
सफलता ८. सौराठ सभा २०१२ में दू दिन सफलतापूर्वक सहभागिता।  
असफलता ८. सौराठ सभा २०१२ में राजनीति हस्तक्छेपके कारण शिथिलता।  
सफलता ९. दुर्गा पूजा २०१२ में पुन: गाम-भ्रमण आ सौराठ धरोहर के पुनरुत्थान संग माँगरूपी दहेजक प्रतिकार लेल प्रत्येक गाममें एक समिति निर्माण लेल अनुरोध। आगामी सौराठ सभा २०१३ तक एकर प्रतिवेदन प्रकाशन करबाक नियार।
असफलता ९. हरेक कार्य करबाक लेल समूहगत प्रयासके सार्थकता बुझबा में अधिकांश सदस्य असमर्थ आ बस केवल आपसी कट्टी-फट्टी खेल में महत्त्वपूर्ण कार्य करबा तरफ किनको ध्यान नहि होयब।
सफलता १०. राष्ट्रीय स्तर केर पंजियन लेल समस्त कागजी कार्य पूरा - दिल्लीमें आवेदन जमा। पंजियनक प्रक्रिया निरंतरतामें।
सफलता ११. सौराठ सभा २०१२ सँ दू दूल्हाक दहेज मुक्त विवाह करबाक कारणे सम्मान कार्यक्रम विराटनगर के अन्तर्राष्ट्रीय मंच सँ नेपालक उप-प्रधान तथा गृहमंत्री विजय कुमार गच्छदार द्वारा प्रशस्ति पत्र तथा उपहार प्रदान करबाक कार्यक्रम दहेज मुक्त मिथिला (नेपाल) - अध्यक्छा श्रीमती करुणा झा आ सहकार्य मैथिली सेवा समिति - विराटनगर।
असफलता ११. मधुबनीमें औझके दिन तेसर वर्षगांठ मनयबाक लेल अन्तर्विद्यालय स्तरीय वाद-विवाद प्रतियोगिता सँ युवा-पीढीक मानसिकता ऊपर आवश्यक प्रेरणा-स्थापना पर परीक्छा आ संयोजकक अनावश्यक भय तदोपरान्त पलायनवादी मानसिकताक कारणे विफलता।
आगामी योजना:
१. अप्रील २०१३ में मधुबनीमें ‌प्लस २ स्तर के परीक्छा देल छात्र-छात्रा द्वारा दहेज विषय पर वृहत् वाद-विवाद प्रतियोगिताक आयोजन।
२. कम से कम एको गाम में ५ गरीब छात्राक पढाई करेबाक लेल संस्था द्वारा गोद लेबाक प्रक्रिया।
३. नेपालमें प्रत्येक महीना विद्यालय-महाविद्यालय स्तरीय युवा-युवती द्वारा वैचारिक आदान-प्रदान तथा सी-एफएम राजविराज द्वारा रेडियो प्रसारण।
४. जानकी नवमी मनेबाक लेल दरभंगा जिलामें कार्यक्रम। सौराठ सभा तर्ज पर वैवाहिक योग्य युवा-युवतीक लेल सभा आयोजन पर समूह-बहस कार्यक्रम।
५. हरेक जिलामें किछु न किछु कार्यक्रम करबाक नियार। संयोजन लेल स्थानीय कार्यकर्ता व संरक्छक के खोज निरंतरतामें।
एवं बहुतो अन्य! ----
महत्त्वपूर्ण नोट:१. दहेज मुक्त मिथिला कोनो एनजीओ नहि छी - ई स्वस्फूर्त एवं स्वयं-सहयोगी युवा ताहू में अपन पैर पर ठाड्ह ओहेन युवा शक्ति जिनकामें किछु सार्थक कार्य करबाक लेल त्याग करबाक संग समर्पित रहबाक प्रतिबद्धता सेहो छन्हि। ताहि हेतु शुरुएमें पहाड ढाहय के सपना देखब अतिश्योक्तिपूर्ण अपेक्छा करब होयत। स्पष्ट करी जे आइ धरि लगभग लाख में खर्च कैल गेल अछि जे मात्र जनमानसमें ई चर्चा शुरु करा सकल अछि जे दहेज मुक्त मिथिला नामक अभियान जमीनपर उतरल अछि, आ जखन नामक चर्चा शुरु भेल तऽ अवश्य एकर शीघ्र सार्थक प्रभाव सेहो देखय में आयत। लेकिन दिल्ली एखनहु एहि लेल दूर अछि जे आन्दोलनमें जुडनिहार लोकके संख्या लगभग नगण्य अछि। २०१३ ई. एहि सपना के पूरा करत तेकर पूर्ण तैयारी अछि। 
२. दहेज प्रथा आ सम्बन्धित अनेको बात लेल समाजमें बहुतो तरहक भ्रम-भ्रांति पसरल अछि, ताहि सभके समाधान लेल हमरा लोकनिक शोध कार्य निरन्तरतामें अछि। एहि सभ के अध्ययन लेल निम्न लिंक सभ पर जरुर विजीट करी।  
(उदाहरणार्थ: दहेज ओ नहि जे लडकीवालाक माँग विरुद्ध माँग कैल गेल हो, बल्कि समस्त माँग जे लैंगिक विभेद उत्पन्न करैत हो आ आपसी विश्वास व स्वेच्छाचारिताक विरुद्ध हो। आदर्श विवाह केहेन हो। दहेज पर भारतीय संविधान कि कहैत अछि। समूहमें कोन लडका वा लडकी अपन विवाह दहेज मुक्त करय लेल चाहैत छथि। एहेन बहुत तरहक तथ्यांक व सैद्धान्तिक निरूपण करबाक निरन्तर प्रयास करबाक लेल हम सभ दृढ-प्रतिग्य छी।)
दहेज मुक्त मिथिला कार्यालय (भारत): ई -७५, सोम बाजार, नन्हे पार्क,नयी दिल्ली ११० ०५९,भारत।
फोन: ०९९१०६०७७२० (संतोष नारायण चौधरी ) एवं ०९३१२४६०१५० (मदन कुमार ठाकुर )।


कार्यालय (नेपाल):राजविराज - ७, सप्तरी, नेपाल।फोन: ००९७७-३१-५२२८३०.