dahej mukt mithila

(एकमात्र संकल्‍प ध्‍यान मे-मिथिला राज्‍य हो संविधान मे) अप्पन गाम घरक ढंग ,अप्पन रहन - सहन के संग,अप्पन गाम-अप्पन बात में अपनेक सब के स्वागत अछि!अपन गाम -अपन घरअप्पन ज्ञान आ अप्पन संस्कारक सँग किछु कहबाक एकटा छोटछिन प्रयास अछि! हरेक मिथिला वाशी ईहा कहैत अछि... छी मैथिल मिथिला करे शंतान, जत्य रही ओ छी मिथिले धाम, याद रखु बस अप्पन गाम - अप्पन बात ,अप्पन मान " जय मैथिल जय मिथिला धाम" "स्वर्ग सं सुन्दर अपन गाम" E-mail: apangaamghar@gmail.com,madankumarthakur@gmail.com mo-9312460150

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सोमवार, 4 मार्च 2024

मनोजवं मारुत तुल्य वेगम जितेंद्रियम् बूद्धिमतां वरिष्ठम् वातात्मजं वानरयूथ मुख्यम् श्रीराम दूतं शरणं प्रपद्धे"

     


अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्।सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि ।। अर्थात अतुल बल के धाम, सोना के पहाड़ (सुमेरु) के जकाँ कान्तियुक्त शरीर बला, दैत्य रूपी वन के ध्वंस करवाक लेल अग्नि रूप, ज्ञानी सभक महाज्ञानी, समस्त गुण केर निधान, वानर केर स्वामी, श्री रघुनाथजी के प्रिय भक्त पवनपुत्र हनुमान जी के हम प्रणाम करै छी। हनुमान जी एकमात्र एहन देवता छैथि जे शक्तिशाली, विनम्र आ तुरंत प्रसन्न होमय बला छैथि। एतवे नहि ओ चारू युग मे उपस्थित छैथि। हिनक भक्ति करयबला के कखनो कोनो संकट नहि अबैत छैक। भक्त के कोनो भय नहि सता सकैत छैक। ब्रम्हांडपुराण के अनुसार हनुमानजी के पाँच टा भाई छलखिन जे विवाहित छलाह। नाम रहैन - मतिमान, श्रुतिमान, केतुमान, गतिमान आ घृतिमान। सभ हनुमान जी सँ छोट छलखिन आ सभ भाई के धिया पुता छलैन्ह ।ब्रह्मपुराण केर अनुसार हनुमानजी के पिता केसरी कुंजर के बेटी अंजना के पत्नी के रूप में स्वीकार कयने छलाह। अंजना बहुत सुंदर छलीह। हिनके गर्भ सँ प्राणस्वरूप वायु के अंश सँ हनुमान केर जन्म भेल छलन्हि। "मनोजवं मारुत तुल्य वेगम जितेंद्रियम् बूद्धिमतां वरिष्ठम् वातात्मजं वानरयूथ मुख्यम् श्रीराम दूतं शरणं प्रपद्धे" 

शनिवार, 24 फ़रवरी 2024

पंडित भवनाथ मिश्र उर्फ अयाची मिश्र - KIRTI NARAYAN JHA,

           


   मिथिला आदि कालहि सँ शिक्षा केर क्षेत्र में अपन अग्रणी भूमिका एहि भूमण्डल पर निवाहैत आयल अछि। कवि विद्यापति सँ मंडन मिश्र आदि अनेकों विद्या विशारद एहि धरा के गौरवशाली स्थान प्रदान करैत अयलाह अछि।                                                            एहि क्रम में पंडित भवनाथ मिश्र उर्फ अयाची मिश्र केर नाम अत्यन्त श्रद्धा पूर्वक लेल जा सकैत अछि। चौदहम शताब्दी केर उत्तरार्द्ध में मिथिला केर पवित्र धरती पर सरिसबपाही गाम में हिनक जन्म भेल छल आ जीवन भरि ककरहु सँ किछु याचना नहिं केलखिन तें ई अयाची केर नाम सँ विख्यात भेलाह।                     हिनक विद्वता केर नाम सूनि क तत्कालीन मिथिला केर नरेश स्वयं हिनका ओहिठाम पहुंच गेलाह। मुदा राजा के देखि हिनका कोनो प्रकार केर व्यवहार में परिवर्तन नहि भेलैन। दोसर दिस महाराज हिनका सभ रूप सँ आर्थिक सहायता करय चाहैत छलखिन। ओ नीक गुरूकुल बना क आचार्य केर उच्च स्थान हुनका देवय चाहैत छलखिन मुदा पंडित जी सभ टा प्रस्ताव के अस्वीकार कय देलखिन कारण ओ भोतिक आ सांसारिक सुख-सुविधा सँ कोनो सम्बन्ध नहि रखैत छलाह।                  कतवो राजा हिनका स्वास्थ्य केर सुरक्षा हेतु गाय महिष इत्यादि केर देवाक प्रयास केलखिन मुदा पंडित जी मना क देलखिन आ कहलखिन जे हमरा तीन टा अनुपम सांसारिक वस्तु अछि पाँच कठ्ठा धानक खेत, धात्री केर गाछ आ तुलसी चौरा। दू चारि मोन धान भ जाइत अछि भरि साल खेवाक लेल। धात्री गाछ सँ नित्य चारि पाँच टा धात्री (आँवला) हम खाइत छी जाहि में छप्पन भोग भोजन केर स्वाद भेटैत अछि आ तुलसी गाछ में नारायण कें नित्य जल चढवैत छी आ चरणामृत प्राप्त करैत छी अकाल मृत्यु हरणम, सर्व व्याधि विनाशनम अर्थात हमरा कोनो प्रकार केर अकाल मृत्यु केर भय अथवा रोग नहिं होइत अछि। कखनो जँ कनेक मोन उननैस बीस होइत अछि त तुलसी केर काढा पीवि लैत छी पुनः अपन अध्यापन कार्य में लागि जाइत छी। भगवान सँ सदिखन मनवैत रहैत छी जे यावत धरि जीवैत छी सतत गरीब सँ गरीब छात्र के निःशुल्क शिक्षा दान करैत रही। हमरा छात्र लोकनि प्रतीक्षा क रहल छैथि तें आदेश देल जाऊ आ ई कहि पंडित जी पुनः अध्यापन कार्य में लागि गेलाह।                                                                           ई थिक मिथिला केर स्वर्ण युग केर इतिहास। किछु लोक के इहो मान्यता छैक जे भगवान शिव स्वयं हिनक बालक शंकर के रूप में अवतार लेने रहैथि। आई मिथिला केर माटि एहन एहन महापुरुष के अपन कोखि सँ जन्म देने अछि आ अपन कोरा में खेलेने अछि...

शुक्रवार, 23 फ़रवरी 2024

उच्चैठ भगवती - KIRTI NARAYAN JHA

"या देवी सर्व भूतेषु मातृ रूपेण संस्थिता                              नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ।।.                                                                                                             


  उच्चैठ मधुबनी जिलाक बेनीपट्टी थाना मे अछि । एतय माँ भगवती के एकटा पुरान आ पैघ मंदिर अछि । ई स्थान कमतौल रेलवे स्टेशन सँ २४ कि०मी० उत्तर आ दरभंगा सँ बस सँ सीधा जूडल अछि । एहि दुर्गा मंदिरक अपन खास ऐतिहासिक महत्व अछि । एकटा पौराणिक कथाक हिसाब सँ एतय कालीदास रहैत छलाह । कालीदास पहिने महामूर्ख छलाह ।

      ओहि समय सदानंद नामक एकटा प्रसिद्ध राजा छलाह । हुनक बेटी विद्योतमा सुंदर आ गुणवती छ्लीह । विद्योतमा वियाहक लेल आयल अनेको राजा सँ वियाह करबा सँ मना दऽ देलनि आ प्रण केलनि जे ओ हुनके सँ वियाह करतीह जे हुनका सँ बेसी गुणवान हुअए । एहि सँ अपमानित भेल राजाक पंडित लोकनि बदला लेबाक लेल सोचलथि आ एकटा महामूर्खक खोज मे लागि गेलाह ।                                                                एक दिन हुनका लोकनिक नजरि कालीदास पर पड़ल, जे एकटा गाछक डारि पर बैसल छलाह आ ओकरहि काटि रहल छलाह । विद्वान लभ सोचलाह जे एहि सँ पैघ मूर्ख कतय भेटत । ओ कालीदास कें राजा सदानंदक दरबार मे लऽ गेलाह आ विद्योत्मा सँ हुनक वियाहक प्रस्ताव केलनि । पंडित लोकनि इहो कहलाह जे एखन ई मौन व्रत धाराण केने छथि आ तें इशारा मे गप्प करैत छथि ।

        विद्योत्मा दरवार मे उपस्थित भेलीह आ मौन रूप सँ प्रश्न पूछैत एकटा आँगुर उठेलीह, जेकर अर्थ भेल - ईश्वर एक छथि । कालीदास सोचलाह जे ई हमर एकटा आँखि फोड़य चाहैत अछि तँ हम हिनक दुनू फोड़ि देब आ तें ओ अपन दूटा आँगुर उठा देलनि । विद्योत्मा बुझलीह जे ई ईश्वरक दू रूप बतबैत छथि आ तें दूटा आँगुर उठेलनि अछि ।                                 पुन: दोसर प्रश्न मे विद्योत्मा अपन पाँचो आँगुर उठेलनि जेकर अर्थ भेल _ मूल तत्व ५ अछि । कालीदास सोचलाह जे ई हमरा थापड़ मारत तँ हम एकरा मुक्का मारब आ ओ पाँचों आँगुर बान्हि मुक्का देखेलनि । विद्योत्मा सोचलीह जे हिनक आशय ५ तत्व सँ मीलि कें बनल शरीर सँ अछि आ विद्योत्मा हारि मानि लेलनि ।      एवं प्रकारे कालीदास आ विद्योत्माक वियाह भेल । परंतु बाद मे वास्तविक स्थितिक ज्ञान भेला पर विद्योत्मा कालीदास कें अपमानित कऽ घर सँ निकालि देलनि ।

तत्पश्चात कालीदास विद्याध्ययनक लेल उच्चैठ पहुँचलाह आ एहिठाम रहि सभ शास्त्रक ज्ञाता भऽ गेलाह । आइयो लोक एहिठामक माँटि अपन घर लऽ जाईत अछि आ विश्वास करैत अछि जे दुर्गाक कृपा सँ हुनको घर मे कालीदास सन विद्वान जन्म लेथिन । माँ उच्चैठ भगवती सभक कल्याण करैथि एहि मंगलकामना केर संग जय माँ जगतजननी जगदम्बा 🙏

शुक्रवार, 12 जनवरी 2024

 


मैथिली कवि कोकिल विद्यापति केर रचना में शिव पार्वती केर हास्य व्यंग्य केर चर्चा बेसी भेटैत अछि यथा "नित उठि गौरी शिव के मनावथि करू बीघा दूई खेत" अथवा "गौरी दौड़ि दौड़ि कहथिन हे मोरा भंगिया रूसल जाइ" इत्यादि अनेकों रचना लिखलाह।.                                                                एहि हास परिहास केर वातावरण एवं स्थान केर संदर्भ में मधुवनी जिला केर राज राजेश्वरी मन्दिर डोकहर (दुखहर) जे मधुबनी शहर सँ बारह किलोमीटर उत्तर में बरहन बेलाही गाम के निर्जन स्थान में बिन्दुसर पोखैर के कात में अवस्थित अछि। एहि स्थान के शिव पार्वती के रमणीय स्थली के रूप में सेहो जानल जाईत अछि ।एहि ठाम केर शिव पार्वती केर मूर्ति केर भाव भंगिमा आ युगल मुद्रा एहि बात केर प्रत्यक्ष प्रमाण दैत अछि। एहि कारण सँ एहि स्थान केर नामकरण दुखहर राखल गेल जे एहि बात केर परिचायक अछि जे जाहि ठाम स्वयं देवाधिदेव महादेव आ माता पार्वती केर विलास स्थान छैन्ह ओहिठाम कोनो दुःख केर स्थान कोना भेटि सकैत छैक। एहिठाम राज राजेश्वरी के परब्रम्ह के महाशक्ति केर रूप में आदि कालहि सँ पूजा होइत आयल अछि। ऐतिहासिक तथ्य केर अनुसार जखन बुद्ध धर्म केर प्रचार प्रसार ब्राम्हण धर्म सँ प्रतिशोध लेवाक लेल जोर पकड़लकै त मूर्ति केर क्षति पहुंचेवाक आशंका सँ मूर्ति के लग केर चन्द्रभागा नदी में नुका क राखि देल गेल रहैक जे बाद में किछु दिनुका बाद पुनः अपन यथा स्थान स्थापित कऽ देल गेलैक। आई ओ भव्य स्थान श्रद्धालु केर लेल सृष्टि केर प्रलय हारी, करूणामयी, श्रृंगारिक आ ओजस्वी रूप में दुखहर बनि कऽ बिराजमान छैथि आ सतत अपन भक्त केर आशीर्वाद दैत छथिन्ह ।जँ भक्त हिनक दरवार में सत्य आ निश्छल भाव सँ उपस्थित होइत छैथि त हुनकर समस्त दुःख केर अंत आ मनोकामना अवश्य पूर्ण होइत छैन्ह। जय राज राजेश्वरी .

सोमवार, 13 मार्च 2023

MITHILAK NARI

 राम जेना पुरूषोत्तम कहावथि,                                               नारी में उत्तम सीता।                                                        मिथिलाक नारी गुणक खान छैथि,                                            माय सुनयना आ जनक पिता।.                                                लाख सुन्नराइ के एक गोराइ,                                                पहिरथि ओ सदिखन साड़ी।.                                                 केहनो समय रहय तैयो ओ                                                    बाजथि मीठ रहैथि ब्यवहारी,                                                  दुनिया में छैथि  सभ सँ सुंदर.                                                 अप्पन मिथिला के नारी।.                                              मिथिलावासी आदि काल सँ,                                                    देवी शक्ति के करैथि सम्मान,                                                       घर घर होइछ भगवती के पूजा,                                             उच्चैठ भगवती मिथिला में महान।                                     कालीदास एही मिथिला में विद्या लेल,                                 पोतलनि भगवती के मूर्ति पर कारी।.                                        दुनिया में छैथि सभ सँ सुंदर                                                  अप्पन मिथिला के नारी।.                                                 मिथिलाक नारी में विदुषी भारती,                                            न्याय करैत पति मंडन के हार मानलन्हि,                                    स्वयं शास्त्रार्थ करैत ओ एहि ठाम,                                              आदि शंकराचार्य के हराओलनि,                                             जगत जननी जानकी के त्याग एहि                                           पृथ्वी पर अछि सभ सँ भारी।                                                  दुनिया में छैथि सभ सँ सुंदर                                                   अप्पन मिथिला के नारी।.                                                      धिया पूता के जिनगी लेल,                                                         ओ छठि के कठिन ब्रत पूजा करैथि ,                                           तीन दिन धरि निराजल रहि,                                                     नित्य दिन भूखल रहि गोसाओन के पूजैथि,                                सभ जनैछ जे गोसाओन के महिमा.                                         एहि जग में अछि अनुपम न्यारी।                                              दुनिया में छैथि सभ सँ सुंदर                                                  अप्पन मिथिला के नारी।                                                       कखनो बेटी, कखनहु पत्नी,                                               कखनहु मायक रूप में भूमिका करैत,                                  परिवारक गाड़ी के अपन स्नेह सँ,                                              पटरी के पटरी सँ जोड़ैत।                                                          प्रेम आ बन्धन सँ जोड़ि कऽ सभके।                                         सफल छैन्ह हिनक कलाकारी।                                              दुनिया में छैथि सभ सँ सुंदर.                                                  अप्पन मिथिला के नारी।                                                   लखिमा ठकुराइन एहि मिथिला के,                                    विद्यापति के प्रेरणा श्रोत।                                                   महाकवि के बेसी रचना में                                                   लखिमा के स्नेह सँ ओत प्रोत।                                                कीर्ति करैथि वखान  मिथिलानी के,                                        सुन्दर सुशील आ स्वभाव गुणकारी।.                                       दुनिया में छैथि सभ सँ सुंदर                                                  अप्पन मिथिला के नारी। 


शुक्रवार, 10 मार्च 2023

मिथिलाक संस्कृति -

 मिथिलाक संस्कृति -                                                               भोरे आंगन कौआ कुचरय,                                                            पाहुन अओताह, गेल सभ जानि,                                            बड़का फूलही लोटा राखल,                                                    दलान पर भरि कऽ पानि।.                                                     आंगन दलान सभ चिक्कन भेल अछि,                                              साफ चादर चौकी पर ओछाओल,                                                              पाहुन के मिथिलाक संस्कृति में,                                            अतिथि देवो भवऽ बनाओल।.                                               मिथिला वासी मारि पीटि सँ,                                             सदिखन रहैछ, कोसो दूर.                                                        भाला गरांस के के पूछैत अछि,                                                पूरना लाठी ओहो में भूर।.                                                     भुल्ली बिलारि दूध के पाहि मे,                                                  घुमि रहल अछि भनसा घर,                                                 बौआक माय दूध औंटैत छैथि,                                               नजरि रखने एम्हर ओम्हर।.                                                 करिया कुकूर आंगन आबि कऽ,                                             आंठि कयलक अंइठारक बाटी,                                           बौआक माय ओम्हर सँ बजलीह,                                                  हे ला तऽ ओम्हर सँ मोटका लाठी।.                                      मिथिला संस्कृति में आदि काल सँ,                                          अध्यात्म के बहुत पैघ स्थान,                                                      स्वयं महादेव उगना बनि कऽ,                                                देलन्हि मिथिला वासी के वरदान।.                                     मिथिलाक बेटी सीता सन गुणगर                                              बाप जनक सन सज्जन आ संत।                                         अयाची सन संतोषी, मंडन सन गुणवंत।.                               मिथिला में मुंडन, उपनयन, ब्याह                                      संस्कारक नहि कोनो  तोड़।                                                     प्रेम, स्नेह आओर विधि ब्यवहार,                                              आन संस्कृति में लागय थोड़।.                                                 अपन संस्कृति सभ सँ उपर,                                                  एकरा नहिं कहियो बिसरू,                                                        आन संस्कृति के सेहो करू सम्मान,                                        अपन सर्वोच्च मानि आगू ससरू।.                                           कीर्ति कहैथि जँ अपन संस्कृति के,                                         हमहीं नहि करव सम्मान,                                                         कोना हमर संस्कृति आगू बढत?                                              करू सदिखन एकर सम्मान।🙏

मंगलवार, 3 जनवरी 2023

ललित बाबू के पुण्यतिथि पर विशेष -

 ललित बाबू के पुण्यतिथि पर विशेष - KIRTI NARAYAN JHA     


                    मिथिलाक विकास पुरुष स्वर्गीय ललित बाबू द्वारा आरंभ कयल गेल मिथिला आई धरि विकास केर रस्ता कें टकटकी लगौने ताकि रहल अछि ओहि भागीरथ के जे मिथिलांचलक विकास के लेल सहायक होइतेऽ! राजनैतिक आहे माहे सँ दूर कोनो पिछङल क्षेत्र के आगू बढ़यबाक बास्ते जँ कियो प्रयास करैत छैथि भले ओ कोनो राजनैतिक पार्टी कए प्रतिनिधि होइथ सभ सँ पहिने ओ सामाजिक उत्थानकर्ता मानल जएताह। एकर जीवन्त उदाहरण छलाह पूर्व रेल मंत्री स्वर्गीय ललित नारायण मिश्र।जिनकर एकटा नारा प्रसिद्ध छल जे "हम रहि अथवा नहिं रही बिहार बढि क रहत" नहि जानि केकर नजैर लागि गेलैक जे बिहार आ मिथिला आइयो बाट जोहि रहल अछि ओहि विकास पुरुष केँ।              आई कमला कोशी केर भयानक विभीषिका मिथिला वासी नहिं झेलैत रहैत। आई मिथिला पेंटिंग के बारे में जँ कियो चर्चा क रहल छैथि त ओहि मे ललित बाबू केर नाम श्रद्धा केर संग लेल जाइत अछि। झंझारपुर आ नेपाल के बीच अवस्थित वज्र देहात के रेलवे सँ जोङि कय देश के समक्ष ओहि गामक प्रतिनिधि के प्रतिनिधित्व दियावै में हिनक अद्भुत प्रयास छल। हिनक द्वारा कयल गेल काज के जँ सूचि बनाबी त हमर आर्टिकल बहुत लम्बा भ जायत संगहि हमरा विश्वास अछि जे हमरा सभ में सँ अधिकांश लोक हुनका द्वारा कयल गेल काज सँ पूर्णतया अवगत हेताह ।                                                                ई बात सत्य अछि जे किछु गोटे, हुनक विकास कार्य सँ सहमत नहिं हेताह मुदा अधिकतर मिथिला वासी हमरा हिसाबे ओहि विकासोन्मुखी मिथिलाक परिकल्पना केर क्षण स्मरण कए किछु कालक लेल रोमांचित अवश्य भ जएताह। मिथिलाक ई अभाग कही अथवा किछु आओर एहि क्षेत्र केर उपेक्षा बिहार सरकार द्वारा कैल जाएत रहल अछि। ललित नारायण मिश्र केर जन्म ०२ फरवरी १९२२ बसंत पंचमी दिन हुनक मामा गाम कुमार वाजितपुर वैशाली जिला मे भेल रहैन। कोशी कए विनाश लीला केर कारण सँ हिनक पूर्वज बलुआ बाजार में आबि क बसि गेल छल।                                                                              होनहार बिरवान के होत चिकने पात के चरित्रार्थ करैत छात्र जीवन में स्वतंत्रता आन्दोलन में कूदि गेल रहैथि आ कोशी बाबू के नाम सँ प्रसिद्ध भेल छलाह। अपन लोकप्रियता केर वदौलत जवाहरलाल नेहरू आ लाल बहादुर शास्त्री केर ई प्रिय पात्र भय गेलाह। श्रीमती इन्दिरा गाँधी हिनका पर बहुत बेसी विश्वास करैत छलीह।                                                                      किछु आलोचक केर अनुसार हिनक लोकप्रियता सँ जरि कए हिनक हत्या में हुनक हाथ छलैन्ह। मुदा ई सभ हम मिथिला वासी केर आक्रोश केर कारण अछि आ हमरा लोकनि कें ओहि विषय में चर्चा नहिं करवाक अछि। एकहि वाक्य में जँ ललित बाबू के मिथिलांचलक एकमात्र विकास पुरुष कही त अतिशयोक्ति नहि होयत। जय मिथिला। जय मैथिली 

एकटा धार्मिक प्रसंग - KIRTI NARAYAN JHA

           एकटा गाम में एकटा बूढी माता रहैत छलीह जे असगर छलीह। एक दिन गाम मे एकटा बहुत पैघ महात्मा पहुंचलाह। बूढ़ी माता हुनकर खूब स्वागत सत्कार केलखिंह। महात्मा जी जखन जाए लगलाह तऽ बूढी माता कहैत छथिन्ह जे महात्मा जी। अहाँ तऽ भगवान के बहुत पैघ भक्त छी। हमरा आशीर्वाद दियअ जे हम जे असगर रहैत छी से कियो हमरा संग रहवाक लेल भेट जाए कारण हम असगर रहैत रहैत परेशान भऽ गेलहुँ अछि। महात्मा जी हँसि कऽ अपन झोरा में सँ एकटा भगवानक मूर्ति निकाललन्हि आ बूढी माय के दैत कहलखिन्ह जे ई लियअ। ई आइ सँ अहाँ के बेटा छी। एकरा अपन बेटा जकाँ पालन पोषण करू। बूढी माय ओहि मूर्ति के खूब लार दुलार सँ पोषय लगलीह।                                                                                                                                                         एक दिन गामक किछु उकठ्ठी धिया पूता सभ एकटा मूर्ति के लार दुलार करैत देखि कऽ बूढी माता के खिझैवाक लेल बूढ़ी माता सँ कहलकै जे आइ गाम मे जंगल सँ एकटा भेड़िया घुसि गेलै अछि जे छोट छोट बच्चा के उठा कऽ लऽ जाइत छैक आ ओकरा मारि कऽ खा जाइत छैक। अहूँ अपन बच्चा पर ध्यान देबै नहिं तऽ ओकरो भेड़िया उठा कऽ लऽ जाएत।                                                                                                                                                      बूढ़ी माय साकांच भऽ गेलीह। अपन बच्चा के बचएबाक लेल भूखले पियासल भरि भरि राति डंडा लऽ कऽ पहरा देवय लगलीह। पाँच दिन आ पाँच राति बिना किछु खेने पीने आ बिना सूतने अपन बच्चाक रक्षा करवाक लेल द्वार पर डँटल छलीह।                                                                                                                                    ओहि भोली भाली बुढ़िया के भाव देखि भगवानक हृदय प्रेम आ स्नेह सँ भरि गेलैन्ह। भगवान प्रकट रूप में बूढी माताक स्नेह प्राप्त करवाक लेल सुन्दर रूप धारण कऽ कऽ वस्त्र आ आभूषण सँ सुसज्जित भऽ कऽ उपस्थित भऽ गेलाह। भगवान के पेएर के आहट पावि बूढी माता भेड़िया बूझि लाठी लऽ कऽ दौड़लीह। भगवान कहलखिन्ह जे माय। हम तऽ अहाँक बौआ छी जकर अहाँ रक्षा करवाक लेल ठाढ छी। बूढी के विश्वास नहि होइत छैन्ह। तखन भगवान कहैत छथिन्ह जे हम त्रिलोकनाथ भगवान छी। वरदान माँगू। हम अहाँक भक्ति सँ बहुत प्रसन्न छी। बूढ़ी माता के तखन एकाएक ध्यान खूजैत छैन्ह आ ओ भगवान के पेएर पर खसैत वरदान मँगैत छैथि जे हे भगवान ।हमर बच्चा के भेड़िया सँ बचा दियअ। भगवान आओर बेसी प्रसन्न भऽ जाइत छैथि आ कहैत छथिन्ह जे मैया। अहाँ हमरा संगे चलू। हम अहाँ के अप्पन धाम लऽ चलैत छी आ भेड़िया सँ डरवाक कोनो आवश्यकता नहिं छैक आ तखन बूढी माता के भगवान अपना संग लऽ जाइत छथिन्ह।                                                                                    एहि प्रकार सँ भगवान के प्राप्त करवाक लेल सभ सँ आसान तरीका छैक जे भगवान सँ बिना कोनो छल कपट के प्रेम करू जेना बूढी माता करैत छलीह। हमरा सभकें अप्पन भीतर में बैसल भगवान के अंश के काम, क्रोध लोभ मोह आ अहंकार रूपी भेड़िया सँ रक्षा करवाक चाही जाहि सँ एक न एक दिन भगवान अवश्य दर्शन देताह कारण भक्त पर कृपा केनाइ भगवान केर स्वभाव होइत छैन्ह।                                                                                                जय सियाराम ।    जय बजरंगबली