dahej mukt mithila

(एकमात्र संकल्‍प ध्‍यान मे-मिथिला राज्‍य हो संविधान मे) अप्पन गाम घरक ढंग ,अप्पन रहन - सहन के संग,अप्पन गाम-अप्पन बात में अपनेक सब के स्वागत अछि!अपन गाम -अपन घरअप्पन ज्ञान आ अप्पन संस्कारक सँग किछु कहबाक एकटा छोटछिन प्रयास अछि! हरेक मिथिला वाशी ईहा कहैत अछि... छी मैथिल मिथिला करे शंतान, जत्य रही ओ छी मिथिले धाम, याद रखु बस अप्पन गाम - अप्पन बात ,अप्पन मान " जय मैथिल जय मिथिला धाम" "स्वर्ग सं सुन्दर अपन गाम" E-mail: apangaamghar@gmail.com,madankumarthakur@gmail.com mo-9312460150

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रविवार, 20 मार्च 2011

बिहार द्वारा 'बिशेष राज्य का दर्ज़ा' के मांग का औचित्य..........!!


वर्ष 2000 में झारखण्ड से अलग होने के बाद बिहार एक ' विशेष राज्य का दर्ज़ा' तथा अतिरिक्त आर्थिक पैकेज की मांग करता आ रहा है. जैसा की सर्वविदित है कि राज्य के विभाजन के समय खनिज और उद्योग से भरपूर दक्षिण बिहार झारखण्ड के हिस्से में चली गयी और बिहार को मिला बाढ़, सुखा, रेत, गरीबी और बेरोज़गारी. रही सही कसर उस समय राज्य के सत्ता में काबिज़ भ्रष्ट सरकार ने पूरी कर दी. फलतः हरेक दृष्टी से बिहार एक अति पिछड़ा प्रदेश बनता चला गया.


सारी दुनिया जानती है कि बिहार हरेक साल 'बिहार की शोक' कहे जाने वाले कोशी नदी की बिभिषिका का दंश झेलती है जिससे लाखो लोग बेघर हो जाते है तथा करोडो रुपयों के जान-माल की क्षति होती है. बिहार की पूरी अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है लेकिन आये दिन बाढ़ और मौसम की मार की वजह से फसलो को काफी नकुसान होता है. वित्तीय सहायता के अभाव तथा पारंपरिक तरीके से खेती करने के चलते भी उत्पादन पर काफी फर्क पड़ता है. पिछले एक दशक में केंद्र सरकार द्वारा पेश बजट में कृषि पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया है. किसानो को इन्द्र के सहारे छोड़ दिया गया है.  अब बात करते है आधुनिक युग में विकास का एक महत्वपूर्ण वाहक बिजली की, जिसके बिना किसी भी क्षेत्र में प्रगति संभव नहीं है. इस मामले में भी जरा केंद्र के ढुलमुल रवयों पर गौर करे जहाँ बिहार को 2400  मेगावाट बिजली की जरुरत है, वह केवल 1000  मेगावाट बिजली की आपूर्ति की जा  रही है, जो जरुरत से बहुत कम है.


             राज्य सरकार के आकलन के अनुसार 1.45 करोड़ ऐसे परिवार है जो गरीबी रेखा से नीचे गुजर-बसर करते है. इन परिवारों को अनाज उपलब्ध कराने की सीधी जिम्मेदारी  केंद्र की होती है परन्तु केंद्र सरकार की उपेक्षा का आलम यह है की केवल 65 .2  लाख परिवार ही इस  सुविधा का लाभ उठा रही है बाकी 80  लाख परिवार इस सुविधा से बंचित है.अगर हम बिहार की तुलना देश के अन्य राज्यों से करे तो पाएंगे कि उद्योग और आधारभूत ढांचों के विकास में हम बाकी राज्यों से मीलो दूर है.

अगर भारत को भविष्य में एक  महान आर्थिक शक्ति बनना है तो यह जरुरी है की केंद्र देश के सभी राज्यों को एक साथ मिला कर चले तथा उन्हें जरुरत के हिसाब से वितीय सहायता प्रदान करे. जो राज्य विकास के पायदान पर काफी नीचे रह गया है उन्हें सभी तरह से सहायता करे. इसके लिए  केंद्र के सत्ता में काबिज सरकार को राजनीतिक मतभेद भुलाकर पक्षपातपूर्ण रवैया छोड़ना होगा और बिहार द्वारा किये गए 'बिशेष राज्य का दर्ज़ा' के जायज़ मांग को  जल्द से जल्द पूरा करना होगा. बिहार के सभी क्षेत्रीय राजतीनिक पार्टियों और युवाओ को भी एकजुट होना होगा तथा केंद्र सरकार पर जन आन्दोलन के जरिये दबाव डालना होगा.  


 

सोमवार, 14 मार्च 2011

A Big Question Mark on Small Cricket Teams?


There is a big question mark on the small teams of cricket game to play one day series including World Cup matches as International Cricket Council (ICC) has decided that now only 10 teams will play the next World Cup. It means that Associates Members like Canada, Ireland, Netherlands and Kenya will not able to participate in the next world cup.


Before I go ahead, let me clarify what does the Associate Member mean? In 1990's, ICC decided to promote the Cricket amongst the countries where cricket is not very popular. In that campaign, few Countries associated with International Cricket Council, but not entitled to play Test Cricket are called Associates Members.


In 1975, when the 1st World Cup was played, total 8 teams participated including 2 Associate teams East Africa and Sri Lanka. In 2003 World Cup, this number increases to 4 and in next world cup, this number becomes 6. Few countries who got chance to play as Associate members improved a lot and finally got the entitled to play Test Cricket too i.e Sri Lanka, Bangladesh etc. So far, in this world cup 2011, Ireland has really surprised  the world by defeating England in the league matches but rest of the Associate members really disappointed a lot...!


Cricket Specialist, Cricketers from all over the World have mixed reaction on this hot topic. Few people says that Associate members should be allowed to play world cup matches in future too as it will help them to improve their efficiency. But in my Opinion, These Associate teams should not be allowed to play International One day Cricket matches because in 50 over match it becomes very difficult for the weaker team to move forward and give a respectable total for the opposite team. In this format, these team may surprise in 1-2 matches, but it's impossible for them to play consistent good cricket against well established teams in complete one day series. We all know that now cricket is money game so by including these teams in Big events i.e world cup have great impact on market possibilities too. In fact, if you go to see a match where one team is an associate member, you will find a comparatively lower number of spectators witnessing the match in Stadium.


In this regard, According to my views, ICC should follow the standard in Football game made by FIFA. There should be qualifying match amongst the Associate teams before they should be allowed to play World Cup. Apart from that they should be given privilege to play 20-20 cricket so that these teams can get chance to prove themselves. 'Twenty-Twenty' cricket is the best format to promote the Cricket in all over the world as this format is very much exciting and take less time. ICC should try that this format of cricket should be included in the Olympic game in future. 


What's ur Views on this topic? Do write ur comments below this post.

शुक्रवार, 11 मार्च 2011

मेरे सपनो का बिहार.......!

हाल के कुछ बर्षो में हुए सामाजिक एवं आर्थिक परिवर्तन के बाद हर बिहारी एक नए विकसित बिहार का सपना बुनने लगा है.  मेरा भी सपना है एक नए बिहार के सृजन का, जहाँ  साक्षरता दर शत-प्रतिशत हो. जहाँ समाज का स्वरुप ऐसा हो कि सभी वर्गों के लोगो को सामान अधिकार मिले. जहाँ समाज के लोग जाति, वर्ण, रंग, भेद की संकीर्ण भावना से ऊपर उठकर आपस में भाई-चारे और सामंजस्य की भावना रखे. जहाँ माता- पिता अपने बेटा और बेटी में फर्क ना समझे  तथा  उन्हें सामान रूप से शिक्षा ग्रहण करने का अवसर दे. जहाँ राज्य के हरेक गाँव में बुनियादी सुविधाओं जैसे स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, विजली, पानी, सड़क, यातायात आदि का विकास हो. जहाँ राज्य में कानून व्यवस्था इतनी चुस्त-दरुस्त हो ताकि अपराधियों के अपराध  का फ़न हमेशा दबा रहे और लोग भयमुक्त होकर सडको पर घूम सके. राज्य में राष्ट्रीय राजमार्गो का विस्तार हो ताकि परिवहन व्यवस्था सुलभ हो सके. जहाँ राज्य में लघु एवं कुटीर उद्योग को प्रोत्साहन मिले ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगो को रोज़गार मिल सके,  साथ ही साथ राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों का ज्यादा से ज्यादा निवेश हो ताकि विकास की गति को पंख लग सके. हमें राज्य के सभी ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर को अक्षुण रखना होगा और इसे विकसित करना होगा ताकि पर्यटन उद्योग को बढ़ावा मिल सके. जहाँ राज्य के सभी जिलो में व्यावसायिक संस्थान खुले, आईटी पार्क का निर्माण हो और शौपिंग मॉल खुले. 
                                                                               इनके अलावा भ्रष्टाचार को रोकने का रोकथाम करना होगा और इसके लिए जरुरत इस बात की है की राज्य का हरेक व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी समझे तथा अपने-अपने कर्त्तव्य का निर्वाह करते हुए दुनिया के सामने बिहार का  नया  दमकता चेहरा पेश करे और खुद को 'बिहारी' कहने और कहलवाने पर गौरान्वित महसूस करे.

मै अपने सपनो को कुछ पंक्तियों के द्वारा प्रस्तुत करना चाहूँगा.........!!



प्रजातंत्र की जननी, जग को दिया अहिंसा का सन्देश,
ज्ञान का दीप जलाने वाला, विश्व का गुरु था यह प्रदेश.
बुद्ध  और महावीर ने जग को दिया अहिंसा का सन्देश, 
जग जननी जानकी माता की, जन्मभूमि है अपना यह प्रदेश.

साक्षी रहा अपना विहार, पालवंश और लिच्छवी की शान का,
साहित्य बना दर्पण, दिनकर विद्यापति के गान का.
मंगल पाण्डेय, वीर कुवर सिंह के अनुपम बलिदान का,
जीरादेई उदगम स्थल प्रथम नागरिक के सम्मान का.

पुण्य भूमि है यह, यहाँ राम ने किया अहिल्या का उद्धार,
बापू ने था ख़त्म किया चंपारण में अंग्रेजो का अत्याचार.
 जातिवाद, नक्सलवाद और घोटालो की है हमें दरकार,
हर क्षेत्र में बिहार आगे बढ़े, नेता  भी हो अगर ईमानदार.

शोषण मुक्त रहे सब जनता, मिटे भय, भूख और भ्रष्टाचार,
कहे गर्व से 'बिहारी' है हम, मेरे सपनो का यही बिहार.



पाठको से आग्रह है कि कृपया अपनी प्रतिक्रिया जरुर लिखे.
आप सभी लोगो को यह जान कर ख़ुशी होगी कि मेरे इस पोस्ट का कुछ भाग
 'हिंदुस्तान' अख़बार में दिनांक 09 मार्च 2011  को 'सौ साल के संकल्प' पृष्ठ पर प्रकाशित हुआ था(patna edition).


 मेरे और पोस्ट पढने के लिए आप मेरे ब्लॉग पर जा सकते है. उस पेज का लिंक मै आप लोगो को नीचे दे रहा हु जिसे आप खुद देख सकते है.


                       Chandan Jha Blog

बुधवार, 5 जनवरी 2011

Welcome the new & Powerful DDR4 RAM For Computer's Memory !!

Happy New Year 2011 Techies & Bloggers....!!Hope it's been a good start for all...!!


Well Friends, one good news for the people from Computer fields as well as for the Computer users. Recently, Samsung Electronics has developed the First DDR4 Dynamic RAM module. This Chips are manufactured using the 30 mm-class process and promise much higher transfer rate and lower power consumption.

                          The new DDR4 DRAM will build a greater confidence in cutting-edge green memory for mainstream application. Let's us briefly discuss the main features of DDR4 and have comparison with its earlier version.

FEATURES OF DDR4 DRAM:-

  • It can read and write the date at the rate of up to 2.13 Gb per second, which is much higher than the DDR2 & DDR3. The data transfer rate for DDR2 and DDR3 are 800 Mbps and 1.66 Gbps consecutively.
  • Less power Consumption with only 1.2 volt as compared to 1.6 volt for DDR3.
  • Around 40% reduction in power consumption as compared with DDR3 module, so useful for notebook in terms of power efficiency.
  • Higher performance for Computers
  • Eco-Friendly
This is Pretty cool news. While we certainly didn't expect Samsung to be the name that cropped up first, let's welcome it. So it's only a matter of time until we hear more on this front. Stay Tuned.....!   :-)

Comments on the post will be Appreciated and do feel free to do so....!

गुरुवार, 9 सितंबर 2010

Bihar Shining : Pragati ke Path Par Agrasit Bihar



22 मार्च 1912, बिहार स्थापना दिवस. बिहारी होने की गौरवबोध की प्रस्थान यात्रा. इसी दिन अँगरेज़ सरकार ने बिहार को बंगाल से अलग कर उड़ीसा के साथ एक अलग राज्य के रूप में मान्यता देकर हमें 'बिहारी' होने का गौरव प्रदान किया.

हाल में ही बिहार सरकार ने २२ मार्च को 'बिहार दिवस' पुरे प्रदेश सहित सम्पूर्ण विश्व में खूब धूम-धाम से मनाया. राज्य भर में आयोजित समारोहों , झाकियों के अवाले पटना के ऐतिहासिक गाँधी मैदान में आयोजित विशाल प्रदर्शनी में बिहार के गौरवशाली अतीत एवं वर्तमान विकास को दिखाया गया. केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (CSO) के अनुसार बिहार 11 .05 फीसदी विकास दर के साथ दूसरा सबसे तेज़ विकसित होने वाला प्रदेश बन गया है. यह सचमुच में नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार का अभूतपूर्ण कारनामा है.

इतिहास साक्षी है की अतीत से ही बिहार चक्रवर्ती सम्राटो, शिक्षा एवं विकास का केंद्र रहा है. बिहार के विकास पर सूर्यग्रहण लगने की शुरुआत मुगलकालीन शासन द्रारा इन्हें कमज़ोर करने से हुई. फिर अंग्रेजो ने इन्हें मख्खी की तरह चूसा. 70 के दशक में जाति व वर्ग विशेष के बीजो ने लगभग इन्हें गृहयुद्ध की स्थिति में धकेलकर रही सही कसर पूरी कर दी. सवर्ण भूस्वामियो की सेनाओ और दलितों के लिए संघर्ष करने वाले दलित सेनाओं के बीच खूनी संघर्ष शरु हो गया. जातिवाद की राजनीति के चलते लगातार अक्षम एवं भ्रष्ट सरकारे राज्य की सत्ता पर काबिज होती गयी फलतः नक्सलवाद को शह मिलता रहा और आये दिन नरसंहार, डकैती, लुट-पाट,चोरी और अपहरण की घटनाए आम हो गयी. 90 के दशक में राज्यमार्गो पर होने वाले लुट-पाट ने लोगो का जीना दूभर करने लगा. लोगो ने रात में यात्रा करना बंद कर दिया. व्यवसायी वर्ग अपना व्यवसाय के लिए दुसरे राज्यों में पलायन करने लगे. अपहरण सूबे का एकमात्र फलता-फूलता उद्योग बन गया. कानून - व्यवस्था का कोई नामोनिशान नहीं था. चारो तरफ अराजकता का माहौल था. इन्ही वजहों से बिहार की छवि बाहर के राज्यों में खराब होने लगी. यहाँ तक की बिहार के लोग अपने आप को 'बिहारी' कहने और कहलाने में अपमानित महसूस करने लगे. लालू सरकार द्वारा किये गए अनेक घोटालो जैसे चारा घोटाला आदि ने स्थिति को और बदतर कर दिया. और यह सिलसिला 2005 तक राबरी देवी सरकार के विघटन तक चलता रहा.

2005 में जब नीतीश कुमार ने राज्य की बागडोर संभाली तो राज्य में सब जगह अराजकता और अव्यवस्था का आलम था. उनके सत्ता में आने के बाद लोगो की उम्मीदे जगी. पिछले चार साल में मौजूदा सरकार ने 'जंगल राज्य' को खत्म कर 'कानून राज्य' स्थापित करने की भरसक कोशिश की है. जिन्हें मै विभिन्नं समाचार पत्रों में प्रकाशित अब तक के दिए गए तथ्यों के आधार पर नीचे बता रहा हूँ.

अब जरा इन आंकड़ो पर गौर करे. 2004 में जहाँ फिरौती और अपहरण के 400 से अधिक मामले दर्ज किये गए थे, वही 2008 में यह संख्या घटकर 66 रह गयी तथा डकैती की संख्या 1287 से घटकर 640 हो गयी. अब आर्म्स एक्ट को सख्ती से लागू किया गया है. स्पीडी ट्रायल के जरिये 42 हज़ार अपराधियों को अब तक सजा मिल चुकी है. राज्य सरकार ने सीबीआई के रिटायर्ड अफसरों को रखकर "स्पेशल विजिलेंस यूनिट " बनायीं है जिनका काम राज्य में फैले भ्रस्टाचार तथा उनमें लिप्त रिश्वतखोरों को कानून के दायरे में लाना है. अब तक 300 से अधिक भ्रष्ट लोकसेवको के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गयी है और इनमे डीजी, डीएम और सेक्रेट्री स्तर अधिकारी तक को नहीं बक्शा गया है. अब बिहार देश का पहला राज्य हो गया है, जहाँ भ्रष्ट तरीको से अर्जित संपत्ति की जब्ती होगी और इन संपत्ति का उपयोग सार्वजनिक कार्यो में होगा.

आप लोगो को यह सब बताकर मै भ्रस्टाचार ख़त्म और अपराध ख़त्म होने का ढिंढोरा नहीं पीट रहा हूँ बल्कि इतना बताना चाह रहा हूँ कि स्थिति काफी सुधरी है. लेकिन अभी और सुधार की आवश्यकता है जिनपर मै नीचे प्रकाश डालूँगा.


अब जरा इन पर गौर करे. अभी तक राज्य में 6800 किलोमीटर नयी सड़के बनायी गयी है. 1600 नए पुलों का निर्माण किया गया है. जिससे यात्रा करना सुलभ हुआ है. इनके अलावे अन्य बुनियादी सुविधाओं जैसे शिक्षा, कृषी और अन्य कल्याणकारी योजनाओ पर भी ध्यान दिया जा रहा है. सयुंक्त रास्त्र संघ की संस्था ' यूनिसेफ ' ने भी माना है की पिछले चार वर्षो में प्राथमिक शिक्षा में बिहार ने काफी तरक्की की है. विशेषतः लडकियों को स्कूल जाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है तथा इनके लिए उन्हें काफी तरह की सुविधाए दी जा रही है. एयरटेल बिहार-झारखण्ड के सीइओ (CEO) के अनुसार बिहार के विकास ने दूरसंचार कंपनियों को खूब उत्साहित किया है. आज बिहार में 10 से ज्यादा मोबाइल कम्पनिया काम कर रही है और यह राज्य देश की दूरसंचार कंपनियों के लिए हॉट-स्पाट बन गया है. बिहार के बदलते कानून और विधि व्यवस्था की स्तिथि को देख कर बहुरास्ट्रीय कंपनिया भी निवेश का मन बना रही है.


कई लोगो को यह पढ़ कर संदेह हो रहा होगा लेकिन ये हकीकत है. प्रसिद्ध अर्थशास्त्री स्वामीनाथन अस अय्यर भी अपनी बिहार यात्रा के बाद यह मानने लगे है की बिहार में बदलाव चमत्कारिक है. साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है की 11 प्रतिशत की विकास दर क्षणिक है और इनका बने रहना इस बात पर निर्भर करता है की आगामी विधान सभा चुनाव के बाद चयनित सरकार इसे कायम रख पाती है या नहीं.

अब मै कुछ विन्दुओ की और सबका ध्यान आकर्षित करना चाहूँगा. पहला ये की भरसक प्रयास के बाबजूद भ्रस्टाचार जारी है. पहले यह खुले आम लिया जाता था, लेकिन अभी ये टेबल के नीचे से चुरा- छुपा कर लिया जा रहा है. दूसरी बात यह की प्राथमिक विद्यालयों में पर्याप्त शिक्षक होने के बाबजूद पढाई नहीं हो रही है. राज्य के अन्य सरकारी संस्थानों में भी कमोवेश यही हाल है. हालाँकि इसके लिए मै सरकार की नीतियों से ज्यादा लोगो की ढुलमुल रवेये और मनोदशा को जिम्मेदार मानता हूँ. लोगो को अभी तक जैसे-तैसे काम करने की आदत थी, लेकिन अब उन्हें काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जो उन्हे हज़म नहीं हो रहा है. इसके लिए हमें अपने समाज और राज्य के प्रति अपना सोच बदलना होगा. तभी हम अपनी क्षवी बेहतर बना पायंगे.

अतः जरुरत है दुनिया को बिहार और बिहार के लोगो के प्रति अपना नजरिया बदलने का. जरुरत इस बात की भी है की हमलोग अपनी शक्ति को पहचाने तथा एकजुट होकर बिहार को भ्रस्टाचारो, अशिक्षा, जातिवाद, रूढ़ीवाद को जड़ से मिटाकर और हीन भावना से मुक्त होकर एक " खुशहाल और विकसित बिहार " का सृजन करे. गर्व से कहे की " हम बिहारी है. " तथा ऐसा कहलाने पर गौरान्वित महसूस करे क्योकि हम उस मिटटी में पैदा हुए है जहाँ गौतम बुद्ध, राजेंद्र प्रसाद, राममनोहर लोहिया आदि जैसे महापुरुष पैदा हुए थे.


अंत में मै रविन्द्र राजहंस द्वारा रचित कुछ पंक्ति दुहराना चाहूँगा.


      भविष्य के सुनहरे फ्रेम में
      नए बिहार का मुस्कराता चेहरा मढना है.
      दीवारों पर लिखे विकास के इबारत को
      आँखे खोल पढना है
      और बिहार को प्रगति के पथ पर आगे बढ़ाना है.


नोट:- सभी पाठको से आग्रह है की आप अपनी राय जरुर दे और निवंध में लिखे त्रुटियों पर ध्यान ना दे. मैंने यह निवंध जान-बुझकर हिंदी में प्रकाशित करने का फैसला किया ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इन्हें पढ़ सके और अपनी राय दे सके लेकिन इस वेबसाइट पर निवंध लिखने के दौरान काफी मुश्किल का सामना करना पड़ा और मुझे सही अक्षर खोजने में काफी दिक्कत हुई. अतः कृपया इनपर ध्यान ना दीजियेगा और ज्यादा से ज्यादा लोगो को यह पोस्ट फोरवार्ड कीजिए.


ई पोस्ट हम अपन ब्लॉग पर किछु दिन पहिने प्रकाशित केलो रहे. हमर इच्छा छल कि ज्यादा से ज्यादा लोग एकरा पढ़े ताहि से फेर स ई मंच पर एकरा प्रकाशित का रहल छि. 
हमर ब्लॉग के एड्रेस छि http://ckjha.blogspot.com/
































































Nokia Dual SIM Mobile phone C1 & C2 launched, A reality now...!!



The trusted cell phone maker Nokia has finally launched most awaited Dual SIM phone in India this month and enter the market of Dual SIM phone. Both of these phones support Long battery life, Multiple Phonebook, Large Screen and local language interface.

Features of Nokia dual SIM phone C1:-


  • Long Stand by battery life of 6 weeks
  • Call divert facility ((For diverting call from SIM 1 to SIM2 as it supports only one SIM at a time)
  • Flash Light
  • FM Radio
  • Colour Screen
  • Headphone Jack

Cons: Though 2 SIM can be inserted at the same time, but only one SIM can be activated at a time. But using Call divert facility, call can be diverted from SIM1 to SIM2.

 Expected Price: Rs 1900

 Features of Nokia dual SIM phone C2:-   
  • Better than Nokia C1 as 2 SIM card can be activated at the same time
  • VGA Camera
  • Music Player
  • FM Radio
  • Expandable memory up to 32 GB with micro SD card
  • Bluetooth
  • 3.5 mm Audio jack
  • GPRS
  • Nokia Life Tools
 Expected Price : Rs 2600



 These phones will be available in market very soon....! It's really a good news that Nokia has started producing Dual SIM phone. But still a lots of thing is to be done to compete the Dual SIM phone market as these days Mobile phone company like Micromax, Carbonn, Max, Lava offers Dual SIM phone with 3G capability at very cheap price.

   I am really expecting a Nokia Dual SIM 3G Phone (1 GSM + 1 CDMA) with at least 3 mega pixel camera soon in the market. It is well known that by the end of this year most of Mobile Operators will start offering 3G services to Costumers. Let's see when Nokia will understand the heartbeat of Young Indians.... :)