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मंगलवार, 31 जुलाई 2018
शनिवार, 21 जुलाई 2018
गुरुवार, 19 जुलाई 2018
शनिवार, 14 जुलाई 2018
बुधवार, 4 जुलाई 2018
मिथिला क्रान्ति सन्देश - रेवती रमण झा " रमण "
|| मिथिला क्रान्ति सन्देश ||
घायल नहिं खाली भाषा
पौरुषे भेल अछि घायल ।
क्रान्ति - वाहिनी कफन बान्हि
ललकार दैत अछि आयल ।
पराधीनहि जे रहि कS जीबैए
भाषा अनके जे सब दिन बजैए
ओ अइ रखने अपन वियर्थ जीवन
द्वारि अनकर जे सबदिन निपैए
पराधीनहि जे.......
मातृ-स्नेहके जे बिसरि गेल अइ
अपन अधिकारर्सँ जे ससरि गेल अइ
ओकर कुकुरो सं वत्तर छै जीवन
सतत् अनकर जे तीमन चटैए
पराधीनहि जे.......
की भरोसे करू संग कक्कर देतै
जे ने मायक भेलै ओकि अनकर हेतै
सुधा-सरिता बिसरि कS अपन मैथिलीक
घोरि माहुर जे अपने पिबेए
पराधीनहि जे.......
चुप मिथिला के वासी कियक भेल छी
मातृ भाषा कि अप्पन बिसरि गेल छी
दुष्ट देलक दखल यौ अहाँक घरमे
गीत देखू विजय केर गवैए
पराधीनहि जे.......
ताकू एम्हरो,ककर आँखि नोरे भरल
एक अवला बेचारी बिपति में पड़ल
"रमण" देखू अतय लाख संतति जकर
चुप करै लै ने एक्को अबैए
पराधीनहि जे रहि कS जीबैए
भाषा अनकर जे सब दिन बजैए
रचनाकार
मंगलवार, 5 जून 2018
मिथिला वासी सब मैथिल छथि - रेवती रमण झा " रमण "
||मिथिला वासी सब मैथिल छथि ||
विद्यापति केर गीत कोयलिया
गाबि रहल अछि भोरे सं ।
मिथिलावासी सब मैथिल छथि
सुनू कहैत अछि जोरे सं ।।
मिथिला वासी....
कुलदेवी चिनुआरे बैसलि
कुल पर ध्यान धेने छथि ।
अचरी मौर माथ पर राजित
गुड़हल फूल लेने छथि ।।
जय-जय भैरवि असुर भयावनि
सुनिते अयलहुँ ओरे सं ।।
मिथिला वासी....
वर सोहर समदाउन नचारी
बटगवनी अछि जन - जन में ।
उगना दास दिगम्बर भोला
छथि मिथिला के कण-कण में ।।
विद्यापति विरहिनिक व्यथा के
सबटा लिखलनि नोरे सं ।।
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