dahej mukt mithila

(एकमात्र संकल्‍प ध्‍यान मे-मिथिला राज्‍य हो संविधान मे) अप्पन गाम घरक ढंग ,अप्पन रहन - सहन के संग,अप्पन गाम-अप्पन बात में अपनेक सब के स्वागत अछि!अपन गाम -अपन घरअप्पन ज्ञान आ अप्पन संस्कारक सँग किछु कहबाक एकटा छोटछिन प्रयास अछि! हरेक मिथिला वाशी ईहा कहैत अछि... छी मैथिल मिथिला करे शंतान, जत्य रही ओ छी मिथिले धाम, याद रखु बस अप्पन गाम - अप्पन बात ,अप्पन मान " जय मैथिल जय मिथिला धाम" "स्वर्ग सं सुन्दर अपन गाम" E-mail: apangaamghar@gmail.com,madankumarthakur@gmail.com mo-9312460150

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बुधवार, 21 जून 2017

कनियाँ परिछन गीत

|| कनियाँ  परिछन  गीत || 


धीरे -  धीरे       चलियो   कनियाँ 
हम  सब   परिछन  अयलों    ना  | 
आबो      बिसरू    अपन  अंगना 
 हमरा    अंगना    अयलों    ना   || 
                    धीरे - धीरे  ------
लाउ  हे कलश जल , चरण पखारू 
अंगना     कनियाँ    अयली   ना   | 
शुभ - शुभ    गाबू   मंगल     चारु 
अंगना     कनियाँ    अयली   ना  || 
                        धीरे - धीरे  ------
  माय के बिसरू  कनियाँ ,बाबू के बिसरू 
हे   सुमिरु   सासू    जी   के   ना   | 
बिसरू        आबो     अपन     नैहर 
अहाँ     सासुर     अयलो     ना     || 
                           धीरे - धीरे  ------
महल अटारी कनियाँ  ,बिसरू भवनमा 
से      चीन्ही     लीय        ना  | 
" रमण "       टुटली         मरैया  
अहाँ      चीन्ही      लीय        ना  || 
                    धीरे - धीरे  ------

लेखक - 
रेवती रमण झा "रमण "