dahej mukt mithila

(एकमात्र संकल्‍प ध्‍यान मे-मिथिला राज्‍य हो संविधान मे) अप्पन गाम घरक ढंग ,अप्पन रहन - सहन के संग,अप्पन गाम-अप्पन बात में अपनेक सब के स्वागत अछि!अपन गाम -अपन घरअप्पन ज्ञान आ अप्पन संस्कारक सँग किछु कहबाक एकटा छोटछिन प्रयास अछि! हरेक मिथिला वाशी ईहा कहैत अछि... छी मैथिल मिथिला करे शंतान, जत्य रही ओ छी मिथिले धाम, याद रखु बस अप्पन गाम - अप्पन बात ,अप्पन मान " जय मैथिल जय मिथिला धाम" "स्वर्ग सं सुन्दर अपन गाम" E-mail: apangaamghar@gmail.com,madankumarthakur@gmail.com mo-9312460150

शनिवार, 18 नवंबर 2017

दहेज मुक्त मिथिला के द्वारा शपथ समारोह सम्पन्य

"दहेज मुक्त मिथिला के द्वारा शपथ समारोह सम्पन्य "

      दिनांक 17- 11 -2017 के दरभंगा ज़िला के बिरौल अनुमंडल के नंदकिशोर उच्च विद्यालय सतीघाट हिरनी के प्रांगण में दहेज मुक्त मिथिला के  आयोजन मनोज शर्मा के  अध्यक्षता में कइल गेल जाहि में  भारी संख्या में युवा बच्चे और महिला सब  उपस्थित भेली ,
      सब  कियो शपथ लेला  कि आइ  से नय हम दहेज लेव आ  नय  देंब , अहि  कार्यक्रम में धनंजय झा द्वारा बतायल  गेल  की  हुंकर भाई के बियाह  बिना दहेज के  करबऑल  जा रहल  अच्छी ,  दहेज मुक्त मिथिला के ब्रांड एंबेसडर अंतर्राष्ट्रीय धावक श्री आर० के ०दीपक के द्वारा हुनका  सम्मानित करैक  घोषणा  कइल गेल  आ  साथे - साथ इहो  बतायल गेल की  प्रति माह अहि  कार्यक्रम के  बैठक  कइल जयात ,और सदस्य के  संख्या बढ़ाबै  पर  सेहो जोर देल जाइत ,  श्री मनोज शर्मा द्वारा संचालित कार्यक्रम  के , श्री संजय सिंह प्रकाश चौधरी घनश्याम चौधरी कौशल चौधरी कार्तिक रोशन झा, मनीषा भारती, आशीष मनीष, रंजीत कुमार नुनू आ  अन्य कार्यकर्ता सब मिल संबोधित  केला ,  
       कार्यक्रम में नैना कुमारी के द्वरा दहेज भगाओ बेटी बचाओ पर गीत और कौशल किशोर जी  कविता के माध्यम से लोग सब के  दहेज हमर समाज के लेल  अभिशाप  अछि , सब के  मिलके  अहि  कुप्रथा  के  मिटनैय  के  संकल्प लेबाक  चाहि अहि  कार्यक्रम में 95 वर्षीये राम सिंहासन मंडल जी के  सम्मानित कयल गेलन 


मिथिलाक शान - उज्जवल कुमार झा

दरभंगा अईछ मिथिलाक शान 
    जई मे बसैत अछि हमर प्राण
 स्वर्ग स सुन्दर ग्राम अछि हमर
     जेकरा कहैत मिथिलाक शान
नाम अछि ओकर बसुआरा गाम 
     जई स उखरल उज्जवल नाम
 करैत अहाँ सबके प्रणाम 
     कहू अहाँ किछू कहब की
कहब की हम देखने छी हाँ यो 
       हम बजै छी उज्जवल जी
 ओलक सब्जी खा क रहै छी 
        हमरा लग की बात छोड़ई छी
  अहाँ करी ओल पसंद
       तै नई करैत अछी महिला तंग
  आइब देखू बसुआरा गाम 
             स्वर्ग स सुन्दर अछि ई गाम 
 जई मे होईत अछि राजा आम 
             अहाँ खाईत छी अमावट
   हमरा लग की करब जमावट
            हम करै छी वर्णन शेष
        पूरा मिथिला दिअ संदेश ।।
                           
                            -:-
लेखक -

नाम - उज्जवल कुमार झा 
पिता का नाम- श्री शम्भू नाथ झा 
पता- बसुआरा दरभंगा बिहार 
पुरस्कार-  ऑल इंडिया राइटिंग कम्पीटीशन्स 
(पेन इट टू विन इट जनवरी  2017) 
के विजेता, और  प्रतिभा सम्मान विजेता 

शनिवार, 11 नवंबर 2017

हम मूर्ख समाजक वाणी छी

|| हम  मूर्ख  समाजक वाणी छी || 
हम  मुर्ख समाजक वाणी  छी  | 
ज्ञाता जन छथि सदय कलंकित 
हमहीं  टा    बस   ज्ञानी    छी || 
                     हम  मुर्ख ---  || 
रामचंद्र    के   स्त्री    सीता  
तकरो      कैल    कलंकित  | 
कयलनि डर सं अग्नि परीक्षा 
भेला    ओहो    शसंकित    || 
एक्कहि  ठामे  गना दैत  छी 
सुर   नर   मुनि  जे   ज्ञानी | 
हम कलंकित सब  के कयलहुँ 
देखू      पलटि     कहानी  ||  
बुद्धिक-बल   तन  हीन  भेल 
बस आप  नौने  सैतानी छी | 
                  हम  मुर्ख ---|| 
बेटा  वी. ए. बैल हमर अछि 
हम   फुइल    कय  तुम्मा  | 
नै  केकरो  सँ  हम  बाजै छी 
बाघ   लगै    छी    गुम्मा  || 
अनकर  बेटा   कतबो बनलै 
 रहलै       त         अधलाहे | 
अगले    दिन उरैलहुँ  हमहीं 
कतेक    पैघ     अफवाहे  || 
अपनहि मोने,अपने उज्ज्वल 
बस   हम   सब  परानी  छी | 
                   हम  मुर्ख ---  ||   
बाहर  के कुकरो  नञि पूछय 
गामक       सिंह       कहबी  | 
परक    प्रशंसा  पढ़ि  पेपर में 
मूँह    अपन     बिचकावी   || 
सदय इनारक फुलल  बेंग सन 
रहलों        एहन        समाज  |
आनक   टेटर  हेरि  देखय लहुँ 
अप्पन       घोलहुँ       लाज | | 
अधम मंच  पर बैसल हम सब 
पंडित  जन  मन  माणि  छी | 
                        हम  मुर्ख --- ||  
गामक    हाथी  के  लुल्कारी  
जहिना      कुकर     भुकय  | 
बाहर   भले  देखि कय हमर 
प्रभुता    पर   में     थुकय  || 
अतय   सुनैने  हैत ज्ञाण की 
वीघर  छी   कानक     दुनू  |
 कोठी  बिना अन्न केर बैसल 
ओकर     मुँह    की    मुनू  || 
हम  आलोचक   पैघ सब सँ 
हमहीं     टा      अनुमानी  || 
                 हम  मुर्ख --- || 
माली  पैसथि  पुष्प  वाटिका 
सिंचथि        तरुवर       मूल | 
पंडित   पैसथि  पुष्प  वाटिका 
लोढथि      सुन्दर      फूल  | | 
लकरिहार  जन  लकड़ी  लाबय 
चूइल्ह       जेमबाय      गामें  |
 सूअर    पैसय    पुष्प  वाटिका 
विष्ठा         पाबय       ठामे  || 
जे अछि  इच्छु  जकर तेहन से 
दृष्टि      ताहि    पर     डारय | 
मूर्खक  हाथ  मणि अछि पाथर 
ज्ञानी       मुकुट      सिधारय  || 
"रमण " वसथु जे एहि समाज में 
मर्दो    बुझू      जनानी      छी  | 
हम   मुर्ख समाजक  वाणी  छी 
                       हम  मुर्ख ---|| 
 रचनाकार -:


रेवती रमन झा "रमण " 
गाम- जोगियारा पतोंर दरभंगा ।
मो - 9997313751 

मंगलवार, 7 नवंबर 2017

पावन हमर ई मिथिला धाम

|| पावन हमर ई मिथिला धाम || 

हनुमंत  एक    बेर  आबि के   देखियो 
पावन      हमरो    मिथिला    धाम   | 
अपन    सासुर     में  बैसल      छथि 
अहाँक      प्रभु      श्री            राम  || 
                              हनुमंत एक बेर ----
  जनम - जनम तप ऋषि -मुनि कयलनी 
नञि           पुरलनी        अभिलाषा  | 
 चहुँ     दिश   सरहोजि  सारि  घेरि कउ 
कयने           छन्हि          तमसा  ||  
                                हनुमंत एक बेर ----
वर     हास - परीहास    कुसुम - कली 
छाओल           ऋतु         मधुमासे  | 
सात    स्वर्ग - अपवर्ग  कतौ   नञि 
एहन           मधुर           उपहासे  || 
                            हनुमंत एक बेर ----
एकहि   इशारे ,    नाचि रहल छथि 
बनि        कय       जेना      गुलाम |
"रमण "   सुनयना सासु  मुदित मन 
शोभा        निरखि          ललाम ||   
                        हनुमंत एक बेर ----

रचित -
रेवती रमन झा "रमण "
मो - 9997313751 




अगहन मास -

 ।। अगहन मास ।।


आयल    अगहन   सेर   पसेरी
मूँसहुँ         बीयरि       धयने।
     जन  बनि हारक मोनमस्त अछि
    लोरिक      तान         उठौने ।।  

भातक दर्शन पुनि पुनि परसन
होइत        कलौ    बेरहटिया ।
भोरे  कनियाँ  कैल   उसनियाँ 
परल      पथारक     पटिया ।।

   फटकि-फटकि खखड़ा मुसहरनी
खयलक      मुरही        चूड़ा ।
नार पुआरक कथा कोन अछि
वड़द    ने     पूछय     गुड़ा ।।

चारु    कात   धमाधम   उठल
जखनहि    उगल     भुरुकवा ।
 साँझक साँझ परल  मुँह  फुफरी
तकरो      मुँह     उलकुटवा ।।

रचयिता
रेवती रमण झा "रमण"
मो - 9997313751