dahej mukt mithila

(एकमात्र संकल्‍प ध्‍यान मे-मिथिला राज्‍य हो संविधान मे) अप्पन गाम घरक ढंग ,अप्पन रहन - सहन के संग,अप्पन गाम-अप्पन बात में अपनेक सब के स्वागत अछि!अपन गाम -अपन घरअप्पन ज्ञान आ अप्पन संस्कारक सँग किछु कहबाक एकटा छोटछिन प्रयास अछि! हरेक मिथिला वाशी ईहा कहैत अछि... छी मैथिल मिथिला करे शंतान, जत्य रही ओ छी मिथिले धाम, याद रखु बस अप्पन गाम - अप्पन बात ,अप्पन मान " जय मैथिल जय मिथिला धाम" "स्वर्ग सं सुन्दर अपन गाम" E-mail: apangaamghar@gmail.com,madankumarthakur@gmail.com mo-9312460150

गुरुवार, 14 दिसंबर 2017

हमहू पढ़बै (बाल कविता)

😊हमहू पढ़बै (बाल कविता)

हमहू पढ़बै
जानू ने

पाटी कीनि के
आनू ने
पैसा नै अइछ
कानू नै
हमहुँ पढ़बै
जानू ने।

सब बच्चा 
गेलै स्कूल
ई सभ ते
पुरना छै "रूल"।
हमहुँ पढ़बै
आगू बढ़बै
बाबू आब नै
करबै भूल।

गरमीक
मौसम छै बाबू
छाता कीनि के
आनू ने
हमहुँ पढ़बै
जानू ने।

खेल खेल में
पढ़बै बाबू
छुट्टी में हम
खेलवै बाबू
अहाँक कोरा
कान्हा चढ़ि के
मेला देख'
चलबै बाबू।

रंग -बिरंगक
फुकना किनबै
हमर बात 
अकानू ने
हमहुँ पढ़बै
जानू ने।

स्वाती शाकम्भरी
सहरसा

बुधवार, 13 दिसंबर 2017

श्रधेय राजकमल के प्रति काव्यांजलि

||  श्रधेय राजकमल के प्रति काव्यांजलि || 

धरती सँ
मुक्त आकाश धरि
अहाँक साहित्यिक उच्चता
समुद्र सन 
तकर गंभीरता
जीवन सन सत्यता
मृत्यु सन यथार्थता
अहाँक साहित्यिक
इएह मूलभूत
उत्स थीक
अहाँक शब्द में
विशाल भावक
परिकल्पना
इएह तें
दर्शन थीक।
छान्हि नै
बान्हि नै
प्रवहमान भाव अछि
छाँटल नै
काढल नै
परम्पराक साँच पर
गढल नै
थाहि थाहि
चढल नै।
जिनक सहजहिं
स्वभाव अछि
दल दल मे
जे नै धँसल
सएह भेलखिन
राजकमल।
 

स्वाती शाकम्भरी
(Swati Shakambhari)
सहरसा।

सोमवार, 11 दिसंबर 2017

भगवान

हे "भगवान", करू कल्याण
नाम'क जल्दी हो समाधान


'मिथिला' पेंटिंग हमर शान
'मधुबनी' सँ अछि पहचान
दुनु अछि मैथिल केर आन
फेर किया भेल छि परेशान
हे "भगवान", करू कल्याण

जँ इच्छा बढि जाय सम्मान
त'अ एतबे राखै जाऊ ध्यान
हरेक बाजार में होई 'दुकान'
"पेंटिंग" भेटए जाहि 'स्थान'
हे "भगवान", करू कल्याण

मुदा छोरि क ओकर ध्यान
नाम के ल करि खींचातान
सब अपने छी कोई नै आन
मिल बढाबि 'मिथिला' मान
हे "भगवान", करू कल्याण

"देव"क अछि अनुपम बरदान
'पेंटिंग' केर विश्व स्तर पहचान
हमरा सबहक अछि अरमान
सबके घर में ई होइ बिद्यमान
हे "भगवान", करू 'कल्याण'
रचनाकार -

Mahadev Mandal
11/12/2017

शनिवार, 9 दिसंबर 2017

हमर मिथिला



|| हमर  मिथिला || 



हम  त  मैथिल  छी , मिथिला लय जान दैत  छी  | 
एहि   अन्हरिया   में  , पूनम   के  चान  दैत   छी || 
जागू - जागू  यौ   मैथिल  भोर  भय गेल 
 हमर मिथिला केहन अछि  शोर भय गेल 
सूतल      संध्या   के    जागल   विहान     दैत   छी |
हम   त  मैथिल  छी , मिथिला लय  जान दैत  छी  ||
एहि बातक  गुमान , हमर मिथिला  धाम
जतय  के  बेटी  सीता , लेने  अयली  राम
मिथिला    नव     जाग्रति   अभियान   दैत      छी  |
हम   त  मैथिल  छी , मिथिला लय  जान दैत  छी  ||
जतय   सीनूर   पीठारे     ढोरल  अड़िपन
गीत गाओल  गोसाउनिक  मुदित भेल मन
शुभ     मंडप       में     पागे    चुमान    दैत       छी  |
हम   त  मैथिल  छी , मिथिला  लय  जान दैत  छी  ||
कवि  कोकिल  विद्यापति  चंदा झा छलैथ
गार्गी   मंडन   लखिमा    अनेको       भेलैथ
"रमण  " पग  - पग पर  पाने  मखान  दैत  छी  |
हम   त  मैथिल  छी , मिथिला लय  जान दैत  छी  ||
रचनाकार -
रेवती रमन झा "रमण "
मो -  9997313751 





मंगलवार, 28 नवंबर 2017

विद्यापति के गाम बौआ

        ।। विद्यापति के गाम बौआ ।।   

    


                    
  इहय  ग्राम  विसपी,   विद्यापति  के  गाम  बौआ ।
               
  एहि माटि के तिलक करु,छूबि क प्रणाम बौआ ।।
                
   एहि   ठाम गीतक  त्रिवेणीक  धारा
                   
सम्पत्ति मध्य मात्र बाँसक पिटारा
                  
 हिनकहि  चरण जे छूबि लेली गंगा
                
 अतय  शम्भू- उगना  बनल   छथि  गुलाम  बौआ।
                 
  इहय  ग्राम  विसपी,  विद्यापति  के  गाम  बौआ ।।
                 
एहि पूण्य माटि सँ  सीया बहरयली
               
  राजा  जनक केर   कन्या कहयली
                 
इहय पवित्र भूमि, इ थीक मिथिला
       
    एहिठाम   दशरथ   के    पुत्र   एला  राम   बौआ ।
              
 इहय  ग्राम  विसपी,  विद्यापति  के  गाम बौआ ।।
                 

बिना याचना   केर अयाचीक  जीवन
                
  अतय छली लखिमा,अतय छला मंडन
                 
अपूर्ण पाँच बर्षहि में पूर्ण भेला शंकर
           
  कविवर   चन्दाक  देखू   पूण्य -  धाम   बौआ ।
             
  इहय ग्राम विसपी,  विद्यापति के गाम बौआ ।।
                 
साँझ  में  संझा , आ  प्रात   पराती
                  
माटिक  पातिल  में , चौमुख  बाती
                  
मंगल  कलश  पर  आमक  पल्लव
         
गोवर  सँ  नीपल  आ  अडिपन  ललाम बौआ ।
       
     इहय  ग्राम विसपी, विद्यापति  के गाम बौआ ।।
                      
         
       
  " रचनाकार "
         रेवती रमण झा " रमण "
     09997313751