dahej mukt mithila

(एकमात्र संकल्‍प ध्‍यान मे-मिथिला राज्‍य हो संविधान मे) अप्पन गाम घरक ढंग ,अप्पन रहन - सहन के संग,अप्पन गाम-अप्पन बात में अपनेक सब के स्वागत अछि!अपन गाम -अपन घरअप्पन ज्ञान आ अप्पन संस्कारक सँग किछु कहबाक एकटा छोटछिन प्रयास अछि! हरेक मिथिला वाशी ईहा कहैत अछि... छी मैथिल मिथिला करे शंतान, जत्य रही ओ छी मिथिले धाम, याद रखु बस अप्पन गाम - अप्पन बात ,अप्पन मान " जय मैथिल जय मिथिला धाम" "स्वर्ग सं सुन्दर अपन गाम" E-mail: apangaamghar@gmail.com,madankumarthakur@gmail.com mo-9312460150

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बुधवार, 27 नवंबर 2013

२६म् अन्तर्राष्ट्रिय मैथिली सम्मेलन मे उठल आवाज

२६म् अन्तर्राष्ट्रिय मैथिली सम्मेलन मे उठल आवाज
देवय पडत मिथिला राज्य
               अन्तर्राष्ट्रिय मैथिली परिषद्क २६म् अन्तर्राष्ट्रिय सम्मेलन में अलग मिथिला राज्य कऽ माँग जोरदार रुप में उठल । सम्मेलन में मैथिली भाषा के मजबुत करबा कऽ लेल सम्पूर्ण मैथिली भाषी के एक जुट भऽ आगु बढेबा के लेल आह्वान कएल गेल । अई सम्मेलन में भारत तथा नेपाल कऽ प्रतिनिधि सब के उपस्थिति छल । मुख्य अतिथी कृष्णानन्द झा कहलनि भाषा के आधार पर अलग राज्य भेटनाई मुस्किल अछि, अलग राज्य कऽ बास्ते सम्पूर्ण मापदंड के पुरा करय परत, जेकर आवश्यकता अछि । मिथिला के संस्कृति के जा धरि अन्य प्रान्त कऽ संस्कृति के संग समन्वय स्थापित नहि होइत, ता धरि, अलग राज्य बनेनाई संभव नहि अछि । जखन अपन भाषा के अन्य राज्य कऽ संग जोडल जायत तखने देश के ४० प्रतिशत आबादी स्वतः जुडि जायत ।
अन्तर्राष्ट्रिय मैथिली परिषद अध्यक्ष डा. कमलकान्त झा कहलनि जे मिथिला राज्य के माग उठल तऽ सरकार मैथिली भाषा के मान्यता देलनि । मिथिला राज्य कऽ मान्यता के वास्ते देशक सब प्रान्त कऽ लोक के आगु आबय परत । संगे ओ झारखण्ड सरकार सँ मैथिली भाषा के राज्य के द्वितीय राजभाषा के रुप में शामिल करबा कऽ माग जेहो केलनि । झारखण्ड मे मैथिली के द्वितीय राजभाषा में शामिल करबा कऽ लेल काँग्रेस के पूर्व मन्त्री कृष्णानन्द झा सँ सहयोग सेहो मागलनि । कृष्णानन्द झा अपन पुरा सहयोग देबा कऽ प्रतिबद्धता सेहो जाहिर केलनि । सम्मेलन के उद्घाटन पूर्व मंत्री कृष्णानन्द झा, अन्तर्राष्ट्रिय मैथिली परिषद कऽ अध्यष डा. कमलकान्त झा, नेपाल कऽ परिषद क अध्यक्ष करुणा झा, संस्थापक अध्यष डा. घनाकर ठाकुर, भूवनेश्वर प्रसाद गुरमैता, बैद्यनाथ मिथिला संस्कृति मंच के अध्यक्ष ओम प्रकाश मिश्र संयुक्त रुप में दीप प्रज्वलित कऽ उद्घाटन केलनि ।

नेपालक मैथिली परिषद कऽ अध्यक्ष करुणा झा कहलनि मैथिली भाषा तथा मिथिला राज्य कऽ मान्यता के लेल आन्दोलन के दौरान पाँच लोग शहीद हो गये जिनमें एक महिला भी । लेकिन इसके बाद भी नेपाल में जोर शोर से मिथिला राज्य के माग उठी रहल अछि । ओ कहलनि – अपना भाषा आ संस्कृति के पंति सब कियो के गम्भीर होब परत । मिथिला राज्य क लेल समाज के सब वर्ग के लोग के साथ लऽ कऽ चलय परत । संगे ओ अन्तर्राष्ट्रिय मैथिल महिला परिषद के गठन करबा कऽ वास्ते जोर देलनि जाई सँ अई अभियान में महिला सब के जोडय कऽ आगु बढला सँ ई अभियान बेसी प्रभावकारी होयत ।

कार्यक्रम के आयोजना बैद्यनाथ मिथिला संस्कृति मंचद्वारा कएल गेल छल । आई दु दिवसीय समारोहमें दोसर दिन पहिल सत्र में जीवकान्त झा आ मायानन्द मिश्र के श्रद्धाञ्जली सभा तथा दोसर सत्र में रंगारंग सांस्कृतिक सन्ध्या में देश विदेशक कलाकार सब द्वारा कएल गेल । अई मौका पर भूतपूर्व डिआईजी के.डी. सिंह, प्रदेश महासचिव रविन्द्र चौधरी, जमशेदपुर के श्यामल सुमन तथा सैकडो मिथिलाबासी के उपस्थिति रहल । धन्यवाद ज्ञापन बैद्यनाथ मिथिला संस्कृति मंच के अध्यक्ष ई. ओमप्रकाश मिश्र जी केलनि । अस्तु ।।


 – करुणा झा
 नेपाल 

बुधवार, 26 जून 2013

सञ्चार यात्रा नेपाल


राष्ट्रके सबसँ पुरान नगरपालिकाके रुपमे रहल राजविराज नगरपालिका विकास निर्माण लगायत सब पक्षमे पछाडी परैत जाऽरहल कहैत नगरबासीद्वारा चिन्ता व्यक्त केलक अछि । सञ्चार यात्रा नेपालद्वारा मंगलदिन राजविराजमे आयोजित सार्वजनिक सुनुवाई कार्यक्रममे बोलैत नगरबासीसभ ऐहेन चिन्ता व्यक्त केलक अछि ।
नगरपालिका सभाहलमे आयोजित कएल गेल सुनुवाई कार्यक्रममे बोलैबाला अधिकांश वक्तासभ २०१६ सालमे नगरपालिका घोष्णा भेल राजविराज नगरपालिका विकासके गतिमे पाछा परल कारण उल्टा गतिमे चलिरहल आरोप समेत लगौलक । “और नगरपालिका स्तर बृद्धि करैत अगाडी जाईके क्रममे अछि” सञ्चारकर्मी हेम शंकर सिंह कहलैन “मुदा राजविराज नगरपालिका गाविस उन्मुख भऽरहल अछि ।”
राष्ट्रके सबसँ पुरान मध्येके एक आ भारतके प्रशिद्ध शहर जयपुरके नक्सामे आधारित नगरपालिका सरसफाईके क्षेत्रमे समेत सुधार होएल नहि सकलक सिंहके आरोप अछि । हरेक बर्ष किछ न किछ कार्यक्रमके आयोजना करि नगरके विकासमे सक्रिय रहैके प्रतिबद्धता करैबाला मुदा कार्यान्वयन नहि करब प्रक्रियासँ राजविराज नगरपालिका पाछा परैत आविरहल वक्तासभ बतौलक । नगरपालिका पाता परैमे कर्मचारी मात्रके दोस नहि भऽ समग्र नगरबासीके समेत कमजोरी रहल कहैत कार्यालयके काममे नगरबासीद्वारा समेत सहयोग कर परलमे ओसभ जोड देनेछल । नगरपालिकाके स्विपर ७ बजे फोहर संकलनके लेल आबैत अछि, मुदा ९ बजे नगरके सडकमे फोहर फेकैत अछि” स्थानीय शुभचन्द्र झा कहलैन –“अहिमे कर्मचारीमे मात्र दोस दऽ के होएत ?”
कार्यक्रमके अतिथी तथा मैथिल महासंघके अध्यक्ष विष्णु मण्डल कहलैन कर्मचारीसभके रकम प्रतिके आशक्तिके कारण विकास निर्माण प्रक्रिया पाछा परल आरोप लगौलक । “ढल निकासमे भ्रष्टाचार केलक हमर संग प्रमाण अछि ? मण्डल दाबी करैत कहलेन –“अहिमे सुधार नहि आएला धरि नगरके विकास केनाके सम्भव होएत ?” कार्यालय अपनासँ नहि होएबाला काम नगरबासीके सहयोग माग करपरल मण्डल बतौलक ।
कार्यक्रमके अन्तमे बोलैत प्रमुख अतिथी तथा कार्यकारी अधिकृत देवराज चौलागा कहलैन १६ सालसँ जम्मा भेल समस्या एके बेर समाधान करैल असम्भव भेलो पर हम योजना बनाके प्रयास रत रहल बतौलक । कार्यालय भतर आ कार्यालय बाहार भी काममे विभिन्न व्यवधान रहल स्वीकारैत ओ  ओहि कारण मुलुकके ५८ टा नगरपालिका मध्ये राजविराज नगरपालिका सबसँ पाछा परल दावी समेत केलक अछि । और नगरपालिकामे कार्यकारी प्रमुख बनि जाईके लेल सोर्स लगाबैत अछि, राजविराज नगरपालिकामे सुधारके काम करैके बातावरण नहि बनल प्रति संकेत करैत चौलागाइ कहलैन “मुदा अत नहि आबैके लेल सोर्स फोर्स लगाबैत अछि । त केनाके होएत विकास ? हुनकर प्रश्न छल ।
सञ्चार यात्रा नेपालके अध्यक्ष करुणा झाके अध्यक्षतामे आयोजित सार्वजनिक सुनुवाईमे विष्णु मण्डल, पत्रकारसभ ब्यासशंकर उपाध्याय, अम्बिका दाहाल, विनयलाल कर्ण, श्रवण देव, शुभचन्द्र झा, सुधा देव, गैसस महासंघके अध्यक्ष श्यामकान्त चौधरी, पार्थो सरकार, साधना झा, नागरिक समाजके थानसिंह भन्साली, पार्वती राउत लगायतके व्यक्ति समेत बोल्ने छल ।

करुणा झा
राजविराज (नेपाल)

शुक्रवार, 8 मार्च 2013

नारी दिवसके अवसरपर अन्तरक्रिया कार्यक्रम


प्रथम  दिन -
नारी दिवसके अवसरपर अन्तरक्रिया कार्यक्रम

महिला अधिकारके वात भाषणैमे सिमित राखलाके कारण अखनो धरि महिला सभ पिछडल अवस्थामे रहल काईल वृहस्पति दिन आयोजित एक कार्यक्रमके वक्तासभ वतौने अछि । अन्तर्राष्ट्रिय नारी दिवसके अवसरमे क्रेस नेपालद्वारा सप्तरीके पातोमे आयोजित सभामे ओ सभ महिला अधिकारके वात ब्यवहारमे लागु नै भेल आ पुरुषसभ महिलाके आगा वढवैके लेल सहयोगी भुमिका नहि केलक कहैत असन्तुष्टी ब्यक्त केलैन ।
कार्यक्रममे अगुवा महिला ललिता राम–महिलाके काममे पुरुषके सहयोग नहि रहलासं ओ सभ घरेलु कामकाजे मे सिमित रहल  वतौलेन ।

      क्रेस नेपालके उपाध्यक्ष गंगाप्रसाद रामके अध्यक्षता आ मंजुला खातुनके प्रमुख आतिथ्यमे आयोजित सभामे शिक्षीका मञ्जु श्रेष्ठ प्रजनन् अधिकारके पहिल हकदार महिला रहल वतौलेन । कार्यक्रममे महिला अधिकारकर्मी जानकीदेवी सादा, दिना भद्री सामुदायिक संस्था पातोके चन्द्रीका सदा, लक्ष्मी महिला सामुदायिक संस्था भुतहीके यज्ञदेवी राम, ईन्सेक प्रतिनिधि मनोहर पोखरेल, पशुसेवा केन्द्र पातोके राजलाल पण्डित, सुखाई विश्वकर्मा लगायतके वक्तासभ मन्तब्य ब्यक्त केने छल ।

       अहिना १०३औं अन्तराष्ट्रिय नारी दिवके अवसरमे दहेज मुक्त मिथला नेपालद्धारा राजविराजमे सेहो एक कार्यक्रम भेल छल । आयोजक संस्थाक अध्यक्ष करुणा झाके अध्यक्षता आ सहायक सिडियो विश्वराज औझाके प्रमुख अतित्थ्यमे सम्पन्न कार्यक्रममे नेपाल पत्रकार महासंधके अध्यक्ष धिरेन्द्र प्रसाद साह ,सचिव राजेश झा , एकिकृत माओवादिके जिल्ला संयोजक उमेस यादव, तराई मधेस लोकन्त्रीक पार्टीके रामप्रित यादव , सदभाबना पार्टिके किशोर कुमार यादव, नागरिक समाजके थान सिंह भन्साली राजनिकि दलके भोगेन्द्र चौधरी, सहितके व्यक्तिसभ  मन्तव्य व्यक्त केने छल ।

कार्यक्रममे महिला हिंसा अन्त्य करैके लेल कैहनो काज करैल हमसभ तयार रहव कहैत उपस्थित राजनितिक दल, प्रसासनिक निकायके प्रतिनिधी नागरीक समाज, सञ्चारकर्मी सहितके उपस्थित सभ ६ वुदे प्रतिवद्धता पत्रमे हस्ताक्ष्ँर समेत केने अछि ।

 दोसर दिन -

१०३म. विश्व नारी दिवस मनाओल गेल

१०३म् अन्तर्राष्ट्रीय नारी दिवसके अवसरमे महिला तथा बालबालिका कार्यालय आ आबद्ध संस्थासभद्वारा आई राजविराजमे बृहद ¥याली आ सभाके आयोजना कएल गेल अछि । 
शिव मन्दिर प्राङ्गणसं निकलल ¥याली महिला हिंसा विरुद्धके नारा बाजी करैत नगरपरिक्रमा कएने छल । 
बलात्कारीके फांसि दियौं, सभहक इच्छा बेटीके शिक्षा, घरमे होमयबाला हिंसा अन्त करु लगायतके नारा सहितके ¥याली जिविस सभाकक्षमे पुगि सभामे परिणत भेल छल ।

    कार्यक्रममे महिला हिंसाके मुल कारण दहेज, डायन जोगिन प्रथा समेतके कुरिती भेल कहैत वक्तासभ ओकर अन्त हेबपलमे जोड देने छल । 

महिला तथा वालवालिका कार्यालयके प्रमुख देवकी न्यौपानेके अध्यक्षता आ सहायक सिडिओ विश्वनाथ ओझाके प्रमुख आतिथ्यमे सम्पन्न भेल कार्यक्रममे नेपाल पत्रकार महासंघ सप्तरीके अध्यक्ष धिरेन्द्र साह, दहेज मुक्ता मिथिलाकी अध्यक्ष करुणा झा, सचिव साधना झा, प.वि.उ.मा.विके प्राचार्य मिना ठाकुर, ऐट नेपालके अध्यक्ष किशोर कुमार यादव केसी आ पत्रकार चन्दन यादव समेत बाजल छल ।

ओहि कार्यक्रममे दहेज मुक्त मिथिलाके आयोजनामे दहेजके विरुद्धमे मैथिली नाटक “दहेजक परिणाम” समेत मञ्चन केने छल । बेटीके दहेज देबके बाध्यता सं कतेको गरिब बाप माई आपन बेटीके अभिश्रापके रुपमे देखैके संकेत करैत ओहिके समाप्तीके लेल बेटा सरह बेटीके भी शिक्षा आवश्यक रहल नाटकद्वारा संदेश देल गेल छल ।

नाटकमे साधना झा, भुपेन्द्र मण्डल, अनु मेहता, अन्जु यादव, प्रतिभा झा, आयूष झा, पंकज मण्डल, सन्जु यादवके व्यक्तिसभ रोचक अभिनय प्रस्तुत केने छल । 

करुना झा 
Rajbiraj-7, Saptari
Mobile No.k~ 977-9842822417
DPHO, saptari

शुक्रवार, 6 जनवरी 2012

दहेज़ मुक्त मिथिला के अभियान


Karuna Jha

दहेज़ मुक्त मिथिला


जागु मैथिल मिथिलावाशी ,
बेटी के करू सम्मान ,
भेदभाव नै बेटा बेटी में दुनु एक सामान
दहेज़ मुक्त मिथिला के अभियान .........


दहेजक लेनदेन ब्याब्हार बनल अछि ,
बिबाह ता समाज में ब्यापार बनल अछि
बेटी के दहेज़ नै सिक्छा दिऔ तखने होयत असली कन्यादान
दहेज़ मुक्त मिथिला के अभियान .......

बेटा जनामिते ख़ुशी के बहार आबिया ,
बेटी जनामिते घर में हाहाकार मचैया
गर्भे में नै ह्त्या करू ,
बेटियों अछि अपने संतान
दहेज़ मुक्त मिथिला के अभियान .........
दहेजक कारने कते पुतहु जरैया ,
कते बेटी फांसी लगा मरैया
घरक लक्ष्मी बोझ बनल अछि
बेटा के बेचिए में लोग बुझैय अपन शान
दहेज़ मुक्त मिथिला के अभियान .........

सृस्ती के निर्माणक आधार छित नारी ,
प्रेम ,त्याग , शहनशीलता के पहचान छैथ नारी
मिथिला के बेटी के कैर सम्मान ,
बढाबू अपन मिथिला के शान
दहेज़ मुक्त मिथिला के अभियान ......

बुधवार, 21 सितंबर 2011

नारी समाज की हकीकत

 
 
नारी समाज की हकीकत
करुणा झा

“नारी तुम केवल श्रद्धा हो ।
विश्वास रजत नगपग तल में
... पीयुष श्रोत सी बहा करो,
जीवन के सुन्दर समतल में”

कविवर जयशंकर प्रसाद की ये पंक्तियाँ शायद तब हीसार्थक सिद्ध हो सकती है, जब औरतों के प्रति इस समाज की सोच विकसित हो । पुरुष मानसिकता बाले इस समाज में महिलाओं की स्थिति अब भी दूसरे दर्जे की बनी हुई है । आज २१वीं सदी में भी मध्य युग की उन सडी–गली रुढियों और मान्यताओं को ढोने और पुरुषों के प्रत्येक अत्याचारों को झेलने के लिए अभिशप्त है, जिन्होंने उनकी जिंदगी नारकीय बना दी थी । महिलाओं पर दिनों दिन लगातार बढती अत्याचार की घटनाओं ने विचारशील लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि या तो कानून ठीक ढंग से अपना काम नहीं कर पा रही है अथवा महिलाओं के प्रति नजरिये में अभी बदलाव नहीं आया है । कहा जाता है – किसी देश की स्थिति को जानने का पैमाना यह है कि वहाँ की महिलाओं की स्थिति पर नजर डालें तो पताल लगता है कि उनकी हालत अब भी सोचनीय और दयनीय बनी हुई है, छेडखानी, दुराचार, दहेज, हत्या, कन्या भ्रुण हत्या, बाल विवाह, तलाक, परिवार की इज्जत के नाम पर हतया, बलात्कार, यौन शोषण आदि अनेकानेक अत्याचारों के कारण उन्हें घर और बाहर आये दिन शारीरिक और मानिसक यातनाों से गुजरना पडता है । ऐसी स्थिति मे हम कैसे कह सकते है कि महिलाएँ आगे बढ रही हैं । ऐसा नहीं है कि महिलाओं की स्थिति में बिल्कुल ही सुधार नहीं हो पाया है । आज की महिलाएं, हर क्षेत्र में पुरुष की बराबरी भी कर रही है मगर उन्हें भी समय समय पर हतोत्साहित किया जाता रहा है । लैंगिक विभेदता अभी भी हमारे समाज में इस तरह है कि महिलाएँ हर क्षेत्र में इसका शिकार बनती आ रही हैं ।
सती प्रथा, देवदासी प्रथा आदि अनेक कुरीतियाँ भी आज तक उनके पैरो की बेडियाँ बनी हुई है । तेजाब डालने, नौकरी दिलाने का झाँसा देकर विदेश भेजने या शोषण करने, धन के लिए गरीब माँ–बाप द्वारा लडकियों और महिलाओं को बेचने आदि घटनाएं भी रोजाना अखबारों की सुर्खियाँ बनी रहती है । इतना ही नही घर में होने बाली हिंसा का भी उन्हे शिकार बनना पडता है । भारत के बिहार, पश्चिम बंगाल, प्रजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान के भूस्वामियों को लडकियाँ बेची जाती है जो उनके घरों मे नौकरीयाँ बनकर घुट घुटकर जिन्दगी जीने को मजबूर है । ऐसा नहीं है कि सिर्फ भारत और नेपाल में ही महिलाओं के खिलाफ शोषण के इन रुपों का इस्तेमाल होता है । दुनियाँ भर में किसी न किसी ढंग से उनपर जुल्मों सितम ढाये जाते हैं । किर्गिस्तान में तो दुल्हन का अपहरण आम बात है । फर्क सिफ इतना है कि पहले अपहरण किया जाता था, अब कार से जबरन उसे भावी शौहर के घर ले जाया जाता है । वहाँ दुल्हन को शादी के लिए मनाने की कोशिश की जाती है । उनके नही मानने पर कुछ परिवारों में तो तब तक बंधक बनाकर रखा जाता है जब तक वह शादी के लिए रजामन्द नहीं हो जाती है । खास बात यह है कि इस काम में दुल्हन के घर बाले भी शामिल रहते हैं । इथोपिया और रुवाण्डा में तो यह प्रथा बेहद क्रुर है । परिवार की इज्जत बचाने के नाम पर दुनियाँ भर के देशों में महिलाओं की हतया का चलन काफी पुराना है । भारत, नेपालके अलावा पाकिस्तान, बंग्लादेश, अलबानियाँ, कनाडा, ब्राजील, डेनमार्क, जर्मनी, इराक, इजरायल, इटली, साउदी अरब, स्वीडेन, यूगांडा, इग्लैण्ड और अमेरिका में इस तरह की हत्याएँ होती रहती है । माता पिता की पसंद के व्यक्ति से विवाह करने से मना करने, तलाक मांगने पर महिलाओं की हत्याएँ की जाती है । तेजाब डालकर महिलाओं का चेहरा जला देने की घटनाएँ अफगानिस्तान में आम है । धाना में धार्मिक दास्ता के तहत लडकियाँ को उसके परिवारवाले मंदिरो मे भेजते है, जहाँ पुजारी उनका शोषण करता है, ओर उससे मुफ्त मे काम करवाता है ।
सवाल यह उठता है कि हमारे संविधान से स्त्री को पुरुष के बराबर का दर्जा देने और उन पर होने बाले अत्याचारों को रोकने के लिए अनेक कानुनों के रहते हुए भी इनमें कमी होने की बजाय बृद्धि ही होती जा रही है । इस समस्या का समाधान समाज के साथ खुद स्त्री को ढुंढना होगा । एक मुख्य कारण तो यह है कि सदियों की गुलाम मानसिकता के कारण महिला अब भी अपने ऊपर होने बाले अत्याचारों के खिलाफ आवाज बुलंद करने का साहस नहीं जुट पाती है । वह यह सोचकर खामोश रह जाती है कि यदि उसने कोई कदम उठाया तो उसके और उसके परिवार की मान मर्यादा और प्रतिष्ठा पर धब्बा लग सकता है । उसे यह डर भी रहता है कि जुर्म करनेबाला व्यक्ति यदि प्रभावशाली हुआ तो वह कानून की गिरफ्त से बच निकलेगा और उसका जीना मुहाल हो जायेगा ।
समय पर अत्याचार का विरोध नहीं करना जुल्म को बढावा देता है । यह सच है कि कानून की अपनी अहमियत है और उन्हे कारगर बनाये जाने की जरुरत है । लेकिन विरोध की आवाज बुलन्द करने की पहल तो नारी को ही करनी होगी । घर में होनेबाले अत्याचारों पर भी यदि वह खामोश बैठ जाती है तो उनकी यातना के सफर का अंत होनेवाला नहीं है । प्रसिद्ध शायर साहिर लुधियानवी ने अपनी एक कविता में लिखा है –

“औरत ने जन्म दिया मर्दो को
मर्दो ने उन्हें बाजार दिया
जब जी जाहा मसला कुचला
जब चाहा दुत्कार दिया”

कवि के इस कथन के संदर्भ में नारी को अपनी शक्ति का अहसास करना होगा कि यदि मर्र्दो ने उसे बाजार दिया तो संसार तो उन्होंने ही दिया है । फिर वह खामोश रहकर अत्याचार क्यों बर्दाश्त करती है । औरत किसी भी मामले में पुरुषों से कम नही है, आज भारत में  ही देखे, महिला शक्ति से भरपूर राष्ट्र है । विपक्ष में सुषमा स्वराज, राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, सोनिया गाँधी देशमें, कल्पना चावाल स्पेश में, पी.टी. उषा रेस में, ऐश्वर्या राय फेस में । फिर, क्यों न हममें भी हौसला हो बुलंदियो को छुने का । मै तो कहती हूँ कविता लिखनी चाहिए ।
“करो नयाँ संकल्प अभी तुम
गढ लो नई कहानी
या तो जीजाबाई बनो
या झाँसी की रानी”
तो फिर वो दिन दूर नहीं जब महिला सशक्तीकरण बर्ष नहीं पूरा देश ही महिला शक्ति से भरपूर होगा । अस्तु ।।