dahej mukt mithila

(एकमात्र संकल्‍प ध्‍यान मे-मिथिला राज्‍य हो संविधान मे) अप्पन गाम घरक ढंग ,अप्पन रहन - सहन के संग,अप्पन गाम-अप्पन बात में अपनेक सब के स्वागत अछि!अपन गाम -अपन घरअप्पन ज्ञान आ अप्पन संस्कारक सँग किछु कहबाक एकटा छोटछिन प्रयास अछि! हरेक मिथिला वाशी ईहा कहैत अछि... छी मैथिल मिथिला करे शंतान, जत्य रही ओ छी मिथिले धाम, याद रखु बस अप्पन गाम - अप्पन बात ,अप्पन मान " जय मैथिल जय मिथिला धाम" "स्वर्ग सं सुन्दर अपन गाम" E-mail: apangaamghar@gmail.com,madankumarthakur@gmail.com mo-9312460150

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बुधवार, 14 अगस्त 2024

गलत तो आप और हम हैं । बस समझ-समझ का फेर है

 कांग्रेस को क्यों गाली  देते हो मित्रों.? गलत तो आप और हम हैं । बस समझ-समझ  का फेर है ।

लाल बहादुर शास्त्री जी की हत्या के बाद भी कांग्रेस को सत्ता में लाया कौन था.?

हम

5000 संतो को संसद के गलियारे में गोलियों से भूनने के बाद भी इंदिरा गांधी को सत्ता किसने दी थी.?

हमने

चीन से ज्यादा सैन्य शक्ति से संपन्न होते हुए भी 1962 में अपनी लाखो हेक्टेयर जमीन चीन को लुटा देने वाली कायर कांग्रेस को सराखों पर बिठाया था किसने.?

हमने

हिन्दुओं की चुन-चुन कर नसबंदी करने वाली और मुस्लिम को अल्लाह की देन पर बच्चे पैदा करने वाली कांग्रेस को वोट देकर राज किसने करने दिया था.?

हमने

आपातकाल लगा कर जयप्रकाश नारायण जैसे लोकप्रिय जननायक को कुचलने की मुहिम चलाने वाली तानाशाह इंदिरा गांधी को कुर्सी किसने दी थी.?

हमने

भोपाल कांड में हजारों लोगों को तड़पा तड़पा कर मारने वाले एंडरसन को भगाने वाली *Rajiv Feroz Khan Gandhi* कांग्रेस को अपना माई बाप बताया किसने.?

हमने

देश की जनता के टैक्स के पैसे को बोफोर्स की दलाली में खाने वालों को गद्दी किसने दी.?

हमने

देश के संसाधनों पर पहला हक मुसलमान का है, फिर भी सपोर्ट करने वाले कौन.?

हम

प्रभु श्री राम जी को काल्पनिक कहने वाले को सपोर्ट करने वाले कौन.?

हम

सनातन को जड़ से उखाड़ कर फेंक देना ही मकसद हो फिर भी सपोर्ट करने वाले कौन.?

हम

जिसने पार्टी ने देश के टुकड़े-टुकड़े कर दिए ऐसी पार्टी को थोङे से फ्री पाने के चक्कर में सपोर्ट करने वाले कौन.?

हम

जिस पार्टी ने पूरे देश में इमरजेंसी लगाकर संविधान का गला घोंटा उसको सपोर्ट करने वाले कौन.?

हम

जिस पार्टी ने हिन्दुओं का वोट लेकर हिन्दुओं को ही समाप्त करने का लगातार कारनामा किया हुआ है फिर भी ऐसी पार्टी को सपोर्ट करने वाले कौन.?

हम

आज भी वेद-पुराणों को अपशब्द कह रहे हैं और फिर भी उन्हें सपोर्ट करने वाले कौन.?

हम

फूट डालो और राज करो के नारे लगा कर हिन्दुओं को जाता-पात में बांटकर छोड़ने वाले को सपोर्ट करने वाले कौन.?

हम

पाकिस्तान के 90 हजार सैनिकों को बेगर शर्त छोड़ा गया और अपनी देश के सेना को कोई खबर आज भी नहीं है जिन्दा है या मर गया ऐसे पार्टी को सपोर्ट करने वाले कौन.?

हम

 क्वात्रोची को खरबपति बना कर देश के सोने को गिरवी रखने की जिम्मेदार कांग्रेस के पीछे कुत्ते की तरह टुकड़े की आस में कौन जीभ लटका कर घूमता रहा.?

हम

हर्षद मेहता के सूटकेसों से प्रधानमंत्री आवास को कलंकित करने वाली कांग्रेस को और शिबू सोरेन जैसे सत्ता के दलालों को खरीदने के आरोपों में एक प्रधानमंत्री को अदालत के कटघरे में खड़े होने वाली कांग्रेस के इशारे पर बाजपेई जी की सरकार गिराने वालो को संसद में बिठाया किसने था.?

हमने

बाजपेई जैसे कर्मठ, सत्यनिष्ठ जननायक को हटाकर इस सत्ता की भूखी विदेशी औरत को देश की मालकिन बनाया था किसने.?

हमनें

2G, कोयला, दामाद राबर्ट बडेरा, बाबा रामदेव कांड, अन्ना हजारे आंदोलन जैसे एपिसोड्स को 5 सालो में ही भुलाकर आज तक के सर्वकालीन *अयोग्य राहुल गांधी को* अपना जननायक मान कर राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में देश के मुंह पर कालिख किसने पोती.?

हमने

और इतना ही क्यूं .....

कल्याण सिंह को हटाकर राम भक्तों को गोलियों से भूनने वाले मुलायम को सत्ता किसने दी थी.?

हमने

*तिलक, तराजू और तलवार* ... *इनको मारो जूते चार* ... कह कर तुम्हारे पिछवाड़े लाल करने वाली को सत्ता के शिखर पर पहुंचाया किसने.?

हमने

लालू तुम्हारे भूखे पेट को रौंद कर खुद खरबपति बन बैठा, गिरफ्तारी देने भी हाथी पर बैठ कर गया .....

और हम गाजे बाजे के साथ नाचते रहे ... पूरे बिहार में उसे, अपनी अनपढ़ पत्नी के सिवाय कोई योग्य बिहार में नहीं मिला जिसको मुख्य मंत्री बनवा देता पर फिर भी उसको अपना भाग्य विधाता मानता रहा कौन.?

हम

हिन्दुओं का त्योहार दुर्गा पूजा करने तक का अधिकार छिनने वाली, 

तारकेश्वर के महाशिव मन्दिर का चेयरमैन एक मुस्लिम  को बनाने वाली, हिन्दू विरोधी, इस्लाम परस्त, भारत विरोधी ममता बनर्जी के पीछे पीछे कुत्तों की तरह झंडा उठा कर चलता है कौन.?

हम

कर्नाटक में सरे आम गाय काट कर खाने वालों को वोट देकर सत्तासीन किया किसने.?

हमने

हजारों सिक्खों को मौत के घाट उतारने वाली कांग्रेस का चमचा कौन बना.? सिद्धू और मनमोहन सिंह जैसे रीढ़विहीन अपने ही लोगों की हत्यारी कांग्रेस को अपना मालिक किसने बनाया भाई.?

हमने

देश की सेना को श्रीलंका में भेजकर अपने ही भारत के भाईयों को मरवाने वाली कांग्रेस की तलवे चटाई कौन करता रहा.?

हम

कश्मीर से हिन्दुओं को बेदखल कर हमको अपने ही देश में शरणार्थी बनाने वाली कांग्रेस को सत्ता में बार-बार कौन बिठाता रहा.?

हम

सोनिया गांधी के 10 साल के कुशासन में एक एक करके सैकड़ों मिग लड़ाकू विमान रहस्यमय तरीके से क्रैश होते गए, 

फोर्स के पायलट मरते गए, 

पर *पैसे का रोना रोकर एक भी नया लड़ाकू विमान नहीं खरीदा गया ऐसा क्यों.?* 

*देश की सुरक्षा के साथ इतना बड़ा खिलवाड़ क्यों.?* 

वहीं दूसरी ओर गठबंधन की मजबूरी का हवाला देकर लाखों करोड़ लुटाए जाते रहे ..... 

और फिर भी राफेल राफेल चिल्लाने वाले  नेताओं की बातों में सुगंध की अनुभूति होती है किसे.?

हमें

तो इसलिए आज के बाद कांग्रेस को गाली मत दो, लालू, मुलायम, केजरीवाल और ममता को मत कोसों ..

*गलत सिर्फ हम हैं...*

*खुद का मूल्यांकन करों, खुद को नजर भर कर देखों* ।

 पार्टी के गुलाम नहीं, *देश का सेवक बनें।

 *यह मैसेज बार बार जाना चाहिए उन मरे जमीर वाले रीढ विहीन, लालची हिन्दुओं मे जो  कांग्रेस को अब भी सही मानते हैं*।

बुधवार, 31 जुलाई 2024

विचारणीय : मुसलमान कहां दोषी है

*विचारणीय : मुसलमान कहां दोषी है*  

           अभी अभी एक मामला आया था जिसमे एक आदेश जारी हुआ था कांवड़ मार्गो पर दुकानदारों को अपना वास्तविक नाम लिखने का।उसमे मैंने एक चीज नोटिस की कि कही भी दुकानदारों ने इस आदेश का बड़े स्तर पर विरोध नही किया,यहाँ तक कि मुस्लिम दुकानदार भी आसानी से इस आदेश का पालन करने लगे।उन्होंने अपनी दुकानों के बाहर,रेस्टोरेंट व ढाबो के बाहर अपने नाम लिखवा दिए।

*अगर किसी स्तर पर विरोध हुआ तो राजनैतिक स्तर पर।सबसे मजे की बात ये रही सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका किसी मुस्लिम ने दायर नही की।याचिका दायर की एसोसिएशन फ़ॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स नामक NGO ने।ओर सुप्रीम कोर्ट में इस NGO के वकील थे कांग्रेस नेता अभिषेक मनुसिंघवी।

आज इसी प्रकरण में मेरी बात एक मुस्लिम व्यापारी से हुए।मैंने उससे समुदाय विशेष स्तर पर इस आदेश का कोई विरोध न करने का कारण जाना। उसका जबाब सुनकर मैं बहुत अशांत हो गया।उसने बताया कि जनाब क्या फर्क पड़ता है नाम लिखने से । हिंदू और सिख तो हमेशा से ही उन लोगो का साथ देते हैं जो उनके  खिलाफ लड़ने के लिए उत्सुक रहते हैं  । 

*अब हमारे ख्वाजा मोइद्दीन चिश्ती साहब को ही ले लो,  उन्होंने पृथ्वीराज की बेटियों का सरेआम बलात्कार कराया और आज हिंदू उनकी मजार को चूमने को ही लालायत रहते हैं* 

अभी राममंदिर प्रकरण को ही ले ,यदि तुम्हारे हिन्दू ही राममंदिर के विरोध में खड़े नही होते तो क्या किसी मुस्लिम की हिम्मत थी जो बाबरी मस्जिद के पक्ष में खड़ा हो जाता। 

*हमारे पूर्वजों ने सिखों के गुरु गोविंद सिंह जी का सरे आम कत्ल किया, उनके बच्चों को दीवार में चुनवा दिया और आज उनकी पुश्तें हमारे तलवे चाटने को तैयार बैठी हैं ।

आपने देखा नही कैसे वो लोग अपने गुरुद्वारों में हमे नमाज अदा करवा रहे हैं।रोजा इफ्तारी करा रहे हैं। 

*साहब तुम्हारे लोग बहुत भुलक्कड़ व लालची है।चौरासी के दंगों में कांग्रेस ने सिखों का कत्लेआम करवाया और आज सिख कांग्रेस के साथ साथ मुसलमान के तलवे चाटने को ललायत है।

*मुलायम सिंह ने हिंदुओं पर गोलियां चलवाई और आज हिंदू, उसके बेटे श्री अखिलेश यादव की चरण वंदना करने को लालायत हैं उनके लिए दरे बिछा रहे हैं ।* 

इसलिए साहब कोई फर्क नहीं पड़ता । अगर मुसलमान का नेम प्लेट भी लगी  हो और हिंदू को वही आम किसी मुस्लिम दुकानदार की दुकान पर ₹5 सस्ता मिल रहा है तो वह मुसलमान से ही खरीदेगा।

   आप ही के भाई,आपके हिन्दू धर्म का हिस्सा एस.सी., एस.टी. व दलित समाज के लोग जय मीम जय भीम में इतना खो गए हैं कि उन्हें इन चीजों से कोई फर्क नहीं पड़ता। और आप पड़े हो नाम के चक्कर में। 

*हिंदू को ₹ 5 प्रति किलो अगर सब्जी सस्ती मिले तो वो किसने थूका है किसने मुता है सब भूल जाएंगे,सामान हमसे ही खरीदेंगे। 

*मैं उसकी बात सुन सन्न रह गया और ये सोचते हुए कि हिन्दुओ की बर्बादी का वास्तविक जिम्मेदार खुद हिन्दू है या मुसलमान सोचते हुए घर वापिस आ गया।*

शुक्रवार, 21 जून 2024

विद्यापति गौरव मंच के सानिंध्य में सम्पन्य भेल विश्वा योग दिवस -

  विद्यापति गौरव मंच के सानिंध्य  में सम्पन्य भेल  विश्वा योग दिवस - 

राष्ट्रीय स्वम सेवक   संघ के द्वारा संचालित  , विद्यापति नगर में , विद्यापति सखा , दुर्गा सखा , श्री राम सखा के स्वम  सेवक एवं  नगर वासी  समलित भेलाह  , एम्  झा  जी के अध्यक्षता में और विकास जी के मुख्य शिक्षक क  सहयोग

 सं नगर  वासी  योग दिवसक लाभ प्राप्त केला  , 

जाहि में मुख्य सहयोग , नीतीश जी , तपन जी , धर्मपाल जी , गोपाल जी , इतियादी  लोग  अहि  कार्य के सम्पन्य में अहम् दायुत्व  निभेला  , 













गुरुवार, 20 जून 2024

कान कटा गधा


एक बार की बात है शेर को भूख लगी तो उसने लोमड़ी से कहा - मेरे लिए कोई शिकार ढूंढकर लाओ अन्यथा ? मैं तुम्हें ही खा जाऊँगा.. 

        लोमड़ी एक गधे के पास गई और बोली - मेरे साथ शेर के समीप चलो क्योंकि वो तुम्हें जंगल का राजा बनाना चाहता है..  गधा लोमड़ी के साथ चला गया। शेर ने गधे को देखते ही उस पर हमला कर दिया और उसके कान काट लिए लेकिन गधा किसी प्रकार बच कर भागने में सफल रहा।  तब गधे ने लोमड़ी से कहा - तुमने मुझे धोखा दिया शेर ने तो मुझे मारने का प्रयास किया और तुम कह रही थी कि वह मुझे जंगल का राजा बनायेगा.. 

      लोमड़ी ने कहा - मूर्खता भरी बातें मत करो.. शेर ने तुम्हारे कान इसीलिए काट लिए ताकि तुम्हारे सिर पर ताज सुगमता पूर्वक पहनाया जा सके, समझे..आओ चलो लौट चलें शेर के पास.. गधे को यह बात ठीक लगी, इसलिए वह पुनः लोमड़ी के साथ चला गया..

शेर ने फिर गधे पर हमला किया तथा इस बार उसकी पूँछ काट ली..गधा फिर लोमड़ी से यह कहकर भाग चला - तुमने मुझसे फिर झूठ कहा, इस बार शेर ने तो मेरी पूँछ भी काट ली..

लोमड़ी ने कहा - शेर ने तो तुम्हारी पूँछ इसलिए काट ली ताकि तुम सिंहासन पर सहजता पूर्वक बैठ सको चलो पुनः उसके पास चलते हैं.. इस प्रकार लोमड़ी ने गधे को फिर से लौटने के लिए मना लिया..

इस बार सिंह गधे को पकड़ने में सफल रहा और उसे मार डाला..

        शेर ने लोमड़ी से कहा - जाओ, इसकी चमड़ी उतार कर इसका दिमाग फेफड़ा और हृदय मेरे पास ले आओ और बचा हुआ अंश तुम खा लो..

      लोमड़ी ने गधे की चमड़ी निकाली और गधे का दिमाग खा लिया और केवल फेफड़ा तथा हृदय सिंह के पास ले गई सिंह ने गुस्से में आकर पूछा - इसका दिमाग कहाँ गया?

लोमड़ी ने जवाब दिया - महाराज ! इसके पास तो दिमाग था ही नहीं..

यदि इसके पास दिमाग होता तो क्या कान और पूँछ कटने के उपरान्त भी आपके पास यह पुनः वापस आता..?

शेर बोला - हाँ, तुम पूर्णतया सत्य बोल रही हो..

यह कहानी हर उस हिंदू गधे की कहानी है जो 1000 वर्षों से अधिक समय से सभी हिंदुओं को खत्म करने के बारम्बार षड्यंत्र होने के बाद भी धर्मनिरपेक्षता में विश्वास करता है..

यह कहानी हर उस हिंदू गधे की कहानी है जो सन् 1990 में कश्मीरी पंडितों का कत्लेआम चुका है और फिर भी धर्मनिरपेक्षता में विश्वास करता है..

यह कहानी हर उस हिंदू गधे की कहानी है जो भारत के इन 7 राज्यों (लक्षद्वीप, जम्मू & कश्मीर, असम, पश्चिम बंगाल, केरल, उत्तर प्रदेश और बिहार) की तेजी से बदलती हुई डेमोग्राफी को अपनी खुली आंखों से देख रहा है किंतु फिर भी धर्मनिरपेक्षता में विश्वास करता है..

पता नहीं ये लोग उन नेताओं को बार बार वोट क्यों देते हैं जो भारत में रहकर भी भारत के दुश्मन देशों का गुणगान करते हैं, जिन्हें भारत में रहकर भी भारत माता की जय बोलने में शर्म आती है, जो हिन्दू होकर भी  सनातन और भारत का अपमान सरेआम करते है..

 बन्दे  - मातरम , भारत  माता की जय 

बुधवार, 19 जून 2024

मुस्लिमों के ग्रुप में ये चल रहा है* *हिन्दी अनुवाद नीचे पढें*

پیاری مسلمان .. ہمارا مقصد

 2040 تک ہندوستان کو اسلامی آئین بنانا ہے۔ اہم چیزیں جو ہمیں کرنے کی ضرورت ہے..

1) تمام ذات پات کے پیشوں کے کام میں ہمیں قریب سے داخل ہونا پڑتا ہے…. 

2) ہر چھوٹے کاروبار کو خود کو رکھنا چاہئے…

 3) ہندوؤں سے کچھ نہ خریدیں... 4) ہماری مسلمان لڑکیوں کو ہندو لڑکوں کے ساتھ زیادہ بات نہیں کرنی چاہیے۔

5) ہمیں اپنی لڑکیوں کے ساتھی ہندو لڑکیوں سے ملوانا چاہیے اور اچھی دوستی کرنی چاہیے اور ان کو اپنے گھر کے لڑکوں سے ملوانا چاہیے اور ان کے درمیان محبت کی ترغیب دلانا چاہیے اور انھیں اسلام قبول کر کے شادی کرنا چاہیے۔ اس سے ہندو آبادی کم ہو سکتی ہے۔

6) ہمیں اپنی دکانوں پر آنے والی ہندو لڑکیوں اور نوجوان ہندو خواتین سے رابطہ قائم کرنے کی کوشش کرنی چاہیے، ان کے درمیان محبت پیدا کرنا چاہیے اور انھیں اپنی طرف موڑنا چاہیے، انھیں آہستہ آہستہ ان کے خاندان سے دور کر دینا چاہیے، ان کی شادی ہم میں سے کسی سے کر کے بھیجنا چاہیے۔ کسی اور جگہ...

7) چونکہ ہمارے اکثر لوگوں کے پاس آٹوز ہیں، اس لیے ہمیں آٹوز میں سوار ہونے والوں کو بھی متعارف کروانا چاہیے اور ان کے فون نمبر لے کر آہستہ آہستہ ہماری طرف متوجہ ہو کر اسلام قبول کرنا چاہیے۔ 

8) ہمیں ہر میدان میں داخل ہونا چاہیے اور نوجوان ہندو خواتین کو شامل کرنا چاہیے... 

9) اگر مدد کی رقم کی ضرورت ہو تو ہم تنظیم سے اخراجات کے لیے بھیجیں گے...

10) خاص طور پر ہمارے مسلمان لڑکوں کو دیکھنے کے لیے پرکشش بنانے کی ضرورت ہے تبھی ہندو لڑکیاں ہمارے پاس آئیں گی۔ 

11) کسی ہندو لڑکی کو ہمارے پاس لانے کے لیے، ہماری مسلمان لڑکیوں کو زیادہ پیار ہونا چاہیے اور ان کے ساتھیوں کو زیادہ اکٹھا ہونا چاہیے... ہمیں ان سے دوستی کرنی چاہیے اور ان سے اس طرح رابطہ کرنا چاہیے کہ وہ ہمارے قریب ہوں۔ لڑکے...

12) ہمیں ہندو لڑکیوں کو فالو کرنے کی ضرورت ہے خاص طور پر واٹس ایپ فیس بک سوشل میڈیا کے ذریعے... ہمیں آپ کی تصاویر سے انہیں پرکشش بنانا چاہیے... ہمیں ان سے دوستی شروع کرنی چاہیے اور انہیں اپنا اسلام قبول کرنا چاہیے۔

13) ان کو ان کے گھر میں مت بتائیں کہ آپ ہم سے بات کر رہے ہیں... انہیں ان کے گھر میں ہمارے ساتھ گزرے لمحات کے بارے میں مت بتائیں۔ تب ہی وہ ہندو لڑکی ہم تک پہنچے گی۔

14) پھول، پھل، ہوٹل، چکن سینٹر، مٹن سینٹر جہاں بھی ہم اپنا کاروبار شروع کریں اور اسے ہندو لوگوں کے لیے پرکشش بنائیں، ہمیں ان سے رابطہ بڑھا کر ان جیسا بننا چاہیے، یہ ہمارا مقصد ہے۔ *آئیے کسی ہندو سے بات کرنا اپنا مقصد نہ بھولیں* *ہمیں اپنے بزرگوں کا مقصد پورا کرنا ہے* جب ہم یہ سب کریں گے تب ہی ہم اسلامی ہندوستان میں اسلامی ریاست قائم کر سکتے ہیں* *ہمارا 

ہمارا مشن اسلام کی بادشاہت ہے اور ہمارا مشن اسلام کو نہ ماننے والوں کو مارنا ہے۔

*مشن 2040*

ذاکر حسین مذہبی استاد کراچی پاکستان

 प्रिय मुस्लिम बहनों.. हमारा लक्ष्य 2040 तक भारत को एक इस्लामी संविधान बनाना है। महत्वपूर्ण चीजें जो हमें करने की आवश्यकता है.. 

1) सभी जाति पेशों के काम में हमें बारीकी से प्रवेश करना है... 

2) प्रत्येक छोटे व्यवसाय को अपना… 

3) हिंदुओं से कुछ मत खरीदो...

4) हमारी मुस्लिम लड़कियों को हिन्दू लड़कों से ज्यादा बात नहीं करनी चाहिए।

5) हमें अपनी लड़कियों को साथी हिंदू लड़कियों से मिलवाना चाहिए और अच्छी दोस्ती करके उन्हें अपने घर के लड़कों से मिलवाना चाहिए और उनके बीच प्यार को प्रोत्साहित करना चाहिए और उन्हें इस्लाम में परिवर्तित कर शादी करनी चाहिए। इससे हिंदू आबादी कम हो सकती है। 

6) हमारी दुकानों पर आने वाली हिंदू लड़कियों और युवा हिंदू महिलाओं से जुड़ने की कोशिश करनी चाहिए, उनके बीच प्यार पैदा करना चाहिए और उन्हें अपनी ओर मोड़ना चाहिए, धीरे-धीरे उन्हें अपने परिवारों से दूर कर देना चाहिए, हममें से किसी एक से शादी कर लेनी चाहिए। कहीं और... 

7) चूंकि हम में से अधिकांश के पास ऑटो हैं, इसलिए हमें ऑटो वालों से भी परिचय कराना चाहिए और उनके फोन नंबर लेकर धीरे-धीरे उन्हें इस्लाम में परिवर्तित करना चाहिए।

8) हमें हर क्षेत्र में प्रवेश करना चाहिए और युवा हिंदू महिलाओं को शामिल करना चाहिए...

9) यदि सहायता राशि की आवश्यकता होगी, तो हम संस्था को खर्च के लिए भेजेंगे... 

10) खासकर हमारे मुस्लिम लड़कों को आकर्षक दिखने की जरूरत है तभी हिंदू लड़कियां हमारे पास आएंगी। 

11) एक हिंदू लड़की को अपने पास लाने के लिए हमारी मुस्लिम लड़कियों को अधिक स्नेही होना चाहिए और उनके साथी को अधिक एकजुट होना चाहिए... हमें उनसे दोस्ती करनी चाहिए और उनसे इस तरह पेश आना चाहिए कि वे हमारे करीब हों। 

12) हमें विशेष रूप से व्हाट्सएप फेसबुक सोशल मीडिया के माध्यम से हिंदू लड़कियों का अनुसरण करने की आवश्यकता है ... हमें उन्हें अपनी तस्वीरों से आकर्षक बनाना चाहिए ... हमें उनसे दोस्ती करनी चाहिए और उन्हें अपना इस्लाम कबूल करना चाहिए। 

13) उनके घर में मत बताना कि तुम हमसे बात कर रहे हो... उनके घर में हमारे साथ बिताए पलों के बारे में उन्हें मत बताओ। तभी वह हिंदू लड़की हम तक पहुंचेगी। 

14) फूल, फल, होटल, चिकन सेंटर, मटन सेंटर जहां भी हम अपना व्यवसाय शुरू करें और इसे हिंदू लोगों के लिए आकर्षक बनाएं, हमें उनसे संपर्क बढ़ाना चाहिए और उनके जैसा बनना चाहिए, यही हमारा उद्देश्य है। *एक हिंदू से बात करने के अपने लक्ष्य को न भूलें* *हमें अपने बड़ों के लक्ष्य को पूरा करना है* जब हम यह सब करते हैं तभी हम इस्लामी भारत में एक इस्लामी राज्य स्थापित कर सकते हैं* हमारा मिशन इस्लाम का राज्य है और हमारा मिशन उन लोगों को मारना है जो इस्लाम को नहीं मानते हैं। *मिशन 2040* जाकिर हुसैन धार्मिक शिक्षक कराची पाकिस्तान  तेलुगू अनुवाद... तेलुगू ترجمہ...: 

अच्छी जानकारी। अब हमें उन सभी बिंदुओं का उपयोग करना चाहिए और मुस्लिम लड़कियों को भी इसी तरह फंसाना चाहिए। वो हमारा एक लें तो हम उनका 10 ले लें। जागो हिंदू जागो...!

मंगलवार, 18 जून 2024

आत्म -कथाये


  एक बहुत बड़ा विशाल पेड़ था। उस पर बहुत सारे हंस रहते थे। 
उनमें एक बहुत बुजुर्ग हंस था, वह बुद्धिमान और बहुत दूरदर्शी। सब उसका आदर करते ‘ताऊ’ कहकर बुलाते थे

एक दिन उसने एक नन्ही सी बेल को पेड़ के तने पर बहुत नीचे लिपटते पाया। ताऊ ने दूसरे हंसों को बुलाकर कहा, "देखो, इस बेल को नष्ट कर दो। एक दिन यह बेल हम सबको मौत के मुंह में ले जाएगी।"

एक बेफिक्र युवा हंस हंसते हुए बोला, "ताऊ, यह छोटी सी बेल हमें कैसे मौत के मुंह में ले जाएगी?"

बुजुर्ग हंस ने समझाया, 

आज यह तुम्हें छोटी सी लग रही है। धीरे धीरे यह पेड़ के सारे तने को लपेटा मारकर ऊपर तक आएगी। फिर बेल का तना मोटा होने लगेगा और पेड़ से चिपक जाएगा, तब नीचे से ऊपर तक पेड़ पर चढ़ने के लिए सीढ़ी बन जाएगी। कोई भी शिकारी सीढ़ी के सहारे चढ़कर हम तक पहुंच जाएगा और हम मारे जाएंगे।

दूसरे धनपशु हंस को यकीन न आया, _एक छोटी सी बेल कैसे सीढ़ी बनेगी

तीसरा सेकुलर हंस बोला, "ताऊ, तू तो एक छोटी सी बेल को खींचकर ज्यादा ही लंबा कर रहा है।"

एक हंस बड़बड़ाया,  यह ताऊ अपनी अक्ल का रौब डालने के लिए अंट शंट कहानी बना रहा है

इस प्रकार किसी दूसरे हंस ने ताऊ की बात को गंभीरता से नहीं लिया। इतनी दूर तक देख पाने की उनमें अक्ल कहां थी?

     समय बीतता रहा बेल लिपटते लिपटते ऊपर शाखाओं तक पहुंच गई। 

बेल का तना मोटा होना शुरू हुआ और सचमुच ही पेड़ के तने पर सीढ़ी बन गई। जिस पर आसानी से चढ़ा जा सकता था।

सबको दूरंदेशी ताऊ की बात की सच्चाई सामने नजर आने लगी। पर अब कुछ नहीं किया जा सकता था क्योंकि बेल इतनी मजबूत हो गई थी कि उसे नष्ट करना हंसों के बस की बात नहीं थी।

एक दिन जब सब हंस दाना चुगने बाहर गए हुए थे तब एक बहेलिया उधर आ निकला।

पेड़ पर बनी सीढ़ी को देखते ही उसने पेड़ पर चढ़कर जाल बिछाया और चला गया।

सांझ को सारे हंस लौट आए और जब पेड़ से उतरे तो बहेलिए के जाल में बुरी तरह फंस गए।

जब वे जाल में फंस गए और फड़फड़ाने लगे, 

तब उन्हें ताऊ की बुद्धिमानी और दूरदर्शिता का पता लगा।

सब सेकुलर ताऊ की बात न मानने के लिए लज्जित थे और अपने आपको कोस रहे थे।

ताऊ सबसे रुष्ट था और चुप चाप बैठा था।

एक हंस ने हिम्मत करके कहा, _ताऊ, हम मूर्ख हैं, लेकिन अब हमसे मुंह मत फेरो।

दूसरा हंस बोला, इस संकट से निकालने की तरकीब तू ही हमें बता सकता हैं, आगे हम तेरी कोई बात नहीं टालेंगे।

सभी हंसों ने हामी भरी तब ताऊ ने उन्हें बताया, 

"मेरी बात ध्यान से सुनो  सुबह जब बहेलिया आएगा, तब मुर्दा होने का नाटक करना। 

बहेलिया तुम्हें मुर्दा समझकर जाल से निकालकर जमीन पर रखता जाएगा, वहां भी मरे समान पड़े रहना ,

जैसे ही वह अन्तिम हंस को नीचे रखेगा, 

मैं सीटी बजाऊंगा। मेरी सीटी सुनते ही सब उड़ जाना।"

 सुबह बहेलिया आया।

 हंसों ने वैसा ही किया, जैसा ताऊ ने समझाया था।

 सचमुच बहेलिया हंसों को मुर्दा समझकर जमीन पर पटकता गया, और सीटी की आवाज के साथ ही सारे हंस उड़ गए।

बहेलिया अवाक होकर देखता रह गया। 

वरिष्ठजन घर की धरोहर हैं। वे हमारे संरक्षक एवं मार्गदर्शक है। जिस तरह आंगन में पीपल का वृक्ष फल नहीं देता, परंतु छाया अवश्य देता है। 

उसी तरह हमारे घर के बुजुर्ग हमे भले ही आर्थिक रूप से सहयोग नहीं कर पाते है, परंतु उनसे हमे संस्कार एवं उनके अनुभव से कई बाते सीखने को मिलती है।

बड़े-बुजुर्ग परिवार की शान है वो कोई कूड़ा करकट नहीं हैं, जिसे कि परिवार से बाहर निकाल फेंका जाए। आधुनिक और वामपंथी विचारधारा से मुक्त होना हमारे धर्म समाज एवं संस्कृति के लिए एक श्रेष्ठ उपाय है।

हमारा भारतवर्ष एक वृक्ष है जो हमें आश्रय देता है देशद्रोही विपक्षियों के रचें षड्यंत्र ने जगह जगह पर हमारे ने आश्रय स्थान को ऐसी विषैली वेल ने जकड़ कर रखा है, उसे सुरक्षित रखना हमारा कर्तव्य है।

-प्रस्तुतिकरण-

पं. ऋषि राज मिश्रा

(ज्योतिष आचार्य)

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।।जय जय श्री राम।।

।।हर हर महादेव।।

शुक्रवार, 19 अप्रैल 2024

वोट किसको दें समझ नहीं आए तो

● अभिनंदन की मां से पूछो! 

● कश्मीरी हिंदुओ से पूछो! 

● अयोध्या के सन्तो से पूछो! 

● कोठारी बन्धुओ की बहन से पूछो! 

● यूक्रेन में पढ़ रहे विद्यार्थियों से पूछो! 

● किसान निधि पा रहे किसानों से पूछो! 

● इसरो के वैज्ञानिकों से पूछो! 

● सीमा पर तैनात सैनिकों से पूछो! 

● काशी विश्वनाथ के भक्तों से पूछो! 

● तीन तलाक से सुरक्षित मुस्लिम औरतों से पूछो! 

● बाबा बर्फानी केदारनाथ के भक्तों से पूछो! 

● विदेशों में कमा रहे भारतीयों से पूछो! 

● उदयपुर के कन्हैया लाल के परिवार से पूछो! 

● केरल और ईशान्य भारत की पिडित जनतासे पुछो!

● राम जन्मभूमी मंदिर का सपना देखने वाले आम जनता से पुछो!

● अखंड भारत विभाजन का इतिहास लिखने वालों से से पूछो!

● 24 घंटे बिजली पाने वाले से पूछो!

● एक्सप्रेस वे का जाल बिछने से लोगों को फायदा होने वालों से पूछो!

● भारत के आर्मी से पूछो!

● सीधे अकाउंट में पैसा पा रहे लोगों से पूछो!

● कोरोना टाइम में भूखे लोगों को अब तक फ्री में राशन मिलते लोगों से पूछो!

● आयुष्मान कार्ड पाने वालों से पूछो!

● पक्का घर पाने वाले गरीबों से पूछो!

● फ्री में जिनके घर में इज़्ज़तघर बना, उनसे पूछो  ऐसे ही बहुत लोगों से पूछो! 

● कतर मे 8 सेना के पूर्व अधिकारी को मिली फांसी की सजा को माफ करवा कर मोदी जी भारत वापस लाये ,

उन 8 आफिसर के घर वालो से पूछो.

जय हिंद,

नमस्ते, कृपया इसे मुझे छोड़कर 10 हिंदू मित्रों और रिश्तेदारों के साथ साझा करें।  इस संख्या को हासिल करने में एक-एक वोट मायने रखेगा.

 इस बार 400 पार जाना क्यों जरूरी है

 लोकसभा में कुल सदस्य 543

 राज्यसभा में कुल सदस्य 238

 521 पर 2/3 बहुमत बन गया है

 राज्यसभा में एनडीए के 117 सदस्य हैं

 521-117=404

   इसलिए मैं कहता हूं कि इस बार मोदी जी को 407 सीटें दीजिए

 MODI 3.0 2024 में क्या होगा खास:

 👉 वक्फ बोर्ड को खत्म करने के लिए लोकसभा में 407 सीटें चाहिए (यह कश्मीर की धारा 370 से भी ज्यादा खतरनाक है)

 👉मोदी के पास लोकसभा में 407 सीटें होंगी तो CAA_NRC कानून लागू कर 10 करोड़ बांग्लादेशी घुसपैठियों को भगा देंगे

 👉 अगर मोदी के पास लोकसभा में 407 सीटें हो गईं तो अल्पसंख्यक आयोग खत्म हो जाएगा

 👉अगर मोदी के पास लोकसभा में 407 सीटें हैं तो पूजा स्थल कानून खत्म हो जाएगा_(हजारों हिंदू मंदिर वापस कर दिए जाएंगे/जिन्हें मस्जिद का रूप दे दिया गया था)

 👉मोदी के पास लोकसभा में 407 सीटें होंगी तो आतंकवाद की फैक्ट्री वाले मदरसों पर रोक लगाई जाएगी और समान शिक्षा कानून बनाया जाएगा

 👉 अगर मोदी के पास लोकसभा में 407 सीटें हो गईं तो केंद्र और 29 राज्य सरकारों द्वारा चलाए जा रहे 600 अल्पसंख्यक मंत्रालय, जो 77 साल से लगातार चल रहे हैं, खत्म हो जाएंगे।

 👉अगर मोदी के पास लोकसभा में 407 सीटें हैं तो सबके लिए 2 बच्चों का कानून बना देंगे_(जनसंख्या नियंत्रण कानून)

 👉 अगर मोदी के पास लोकसभा में 407 सीटें हैं तो पूरे भारत में UCC_(समान नागरिक कानून) लागू कर दिया जाएगा/ जिससे 4-4 निकाह और 3 तलाक पर रोक लग जाएगी

 👉अगर मोदी की लोकसभा में 407 सीटें हैं तो पत्थरबाजों और दंगाइयों की 100% संपत्ति जब्त कर 10 साल की सजा का प्रावधान होगा

 👉 अगर लोकसभा में मोदी की 407 सीटें होंगी तो भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी शक्ति (अर्थव्यवस्था) बनाने के लिए आईटी, मैन्युफैक्चरिंग, एआई, कृषि और इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश 100% बढ़ाया जाएगा।

 ❤️ तो दोस्तों पूरी ताकत से मेहनत करो दोस्तों इस बार बीजेपी 400 के पार जाएगी, अगर हम स्पष्ट रूप से कहें तो 407 सीटें

 देशहित में ये बदलाव बहुत जरूरी 

 *बड़े पैमाने पर हमारे समाज के हित में अग्रेषित।*🙏🏻 देश देता है सब कुछ हमें देश के लिए एक वोट देना चाहिए

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गुरुवार, 11 जनवरी 2024

हमारी खुशी किस में

      एक महिला ने अपनी किचन से सभी पुराने बर्तन निकाले। पुराने डिब्बे, प्लास्टिक के डिब्बे, पुराने डोंगे, कटोरियां, प्याले और थालियां आदि। सब कुछ काफी पुराना हो चुका था।

*फिर सभी पुराने बर्तन उसने एक कोने में रख दिए और नववर्ष पर लाए हुए बर्तन तरीके से रखकर सजा दिए।

*बड़ा ही सुंदर लग रहा था अब किचन। फिर वो सोचने लगी कि अब ये पुराना सामान भंगारवाले‌ को दे दिया तो समझो हो गया काम।

*इतने में उस महिला की कामवाली आ गई। दुपट्टा खोंसकर वो फर्श साफ करने ही वाली थी कि उसकी नजर कोने में पड़े हुए बर्तनों पर गई और बोली - बाप रे! मैडम आज इतने सारे बर्तन घिसने होंगे क्या ?

*और फिर उसका चेहरा जरा तनावग्रस्त हो गया।

*महिला बोली - अरी नहीं! ये सब तो भंगारवाले को देने हैं।

*कामवाली ने जब ये सुना तो उसकी आँखें एक आशा से चमक उठीं और फिर बोली - मैडम! अगर आपको ऐतराज ना हो तो ये एक पतीला मैं ले लूं ? (साथ ही साथ में उसकी आँखों के सामने घर में पड़ा हुआ उसका तलहटी में पतला हुआ और किनारे से चीर पड़ा हुआ इकलौता पतीला नजर आ रहा था।)

*महिला बोली- अरी एक क्यों! जितने भी उस कोने में रखे हैं, तू वो सब कुछ ले जा। उतना ही पसारा कम होगा।

*कामवाली की आँखें फैल गईं - क्या! सब कुछ ? उसे तो जैसे आज नए साल पर अलीबाबा का खजाना ही मिल गया हो।

*फिर उसने अपना काम फटाफट खत्म किया और सभी पतीले, डिब्बे और प्याले वगैरह सब कुछ थैले में भर लिए और बड़े ही उत्साह से अपने घर की ओर निकली।

*आज तो जैसे उसे चार पाँव लग गए थे। घर आते ही उसने पानी भी नहीं पिया और सबसे पहले अपना पुराना और टूटने की कगार पर आया हुआ पतीला और टेढ़ा मेढ़ा चमचा वगैरह सब कुछ एक कोने में जमा किया, और फिर अभी लाया हुआ खजाना (बर्तन) ठीक से जमा दिया।

*आज उसके एक कमरेवाला किचन का कोना भरा पूरा सुंदर दिख रहा था।

*तभी उसकी नजर अपने बहुत पुराने बर्तनों पर पड़ी और फिर खुद से ही बुदबुदाई - अब ये बेकार सामान भंगारवाले को दे दिया तो समझो हो गया काम।

*तभी दरवाजे पर एक भिखारी पानी मांगता हुआ हाथों की अंजुल करके खड़ा था- माँ! पानी दे।

*कामवाली उसके हाथों की अंजुल में पानी देने ही जा रही थी कि उसे अपना पुराना पतीला नजर आ गया और फिर उसने वो पतीला भरकर पानी भिखारी को दे दिया।

*जब पानी पीकर और तृप्त होकर वो भिखारी बर्तन वापिस करने लगा तो कामवाली बोली - फेंक दो कहीं भी।

*वो भिखारी बोला- तुम्हें नहीं चाहिए ? क्या मैं रख लूँ अपने पास ?

*कामवाली बोली - रख लो, और ये बाकी बचे हुए बर्तन भी ले जाओ और फिर उसने जो-जो भी बेकार समझा वो उस भिखारी के झोले में डाल दिया।

*वो भिखारी भी खुश हो गया।

*पानी पीने को पतीला और किसी ने खाने को कुछ दिया तो चावल, सब्जी और दाल आदि लेने के लिए अलग-अलग छोटे-बड़े बर्तन, और कभी मन हुआ कि चम्मच से खाये तो एक टेढ़ा मेढ़ा चम्मच भी था।

*आज ऊसकी फटी झोली भरी भरी दिख रही थी।*

*ये सब क्या है? सुख किसमें माने, ये हर किसी की परिस्थिति पर अवलंबित होता है।

*हमें हमेशा अपने से छोटे को देखकर खुश होना चाहिए कि हमारी स्थिति इससे तो अच्छी है। जबकि हम हमेशा अपनों से बड़ों को देखकर दुखी ही होते हैं और यही हमारे दुख का सबसे बड़ा कारण होता है..!!*

गुरुवार, 28 दिसंबर 2023

सकारात्मकता

    सकारात्मकता खुशबू की तरह है, जो हमें ही नहीं, पूरे वातावरण को महका देती है। डर और आशंकाओं को मन से निकाल कर यदि हम सकारात्मक सोचें तो हमारा पूरा परिवेश खुशियों की महक से भर जाएगा...

लोककथा है। गर्मी और थकान से हारा एक मुसाफिर एक छायादार वृक्ष के नीचे बैठ गया। संयोग से वह जिस पेड़ के नीचे बैठा, वह कल्पवृक्ष था। कथाओं में कल्पवृक्ष एक मिथक है, माना जाता है कि उसके नीचे बैठ कर जो

  कल्पना की जाए, वह फलीभूत होती है।वहां बैठकर उसने सोचा कि काश, कहीं से खाने को कुछ मिल जाता। अचानक उसके सामने भोजन अवतरित हो गया। उसने पानी के बारे में सोचा तो पानी उपस्थित हो गया। उसने पेट भरकर खाना खाया और पानी पिया..। खा-पीकर वह सोचने लगा, कहींइस पेड़ पर कोई प्रेत तो नहीं रहता,जिसने यह चमत्कार किया। उसके मन में डर बैठ गया। वह सोचने लगा कि अगर प्रेत है, तब तो वह मुझे खा जाएगा। उसने यह सोचा ही था कि पेड़ से कूदकर एक प्रेत उसे खा गया..।

हमारी लोक कथाएं हमें संदेश देने के लिए बनाई गई हैं। यह कहानी संदेश देती है कि मन में हम जैसे विचार लाएंगे, उसका वैसा ही असर होगा। यदि हम सकारात्मक सोचेंगे, तो उसकी प्रतिक्रिया भी सकारात्मक ही होगी। यह स्वयंसिद्ध बात भी है, क्योंकि अक्सर सकारात्मक रहने वाले लोगों को खुश और नकारात्मक सोच रखने वालों को अक्सर दुखी देखा जाता है।

दरअसल, हमारा मन हमारी सोच से पूरी तरह प्रभावित हो जाता है। हमारी सोच जैसी भी होती है, वह हमारे चेहरे पर, हमारे व्यवहार में, हमारे कार्र्यों में दिखने लगती है। यदि हमारे भीतर डर और आशंकाओं की आमद हो चुकी है, तो वह हमारी आंखों के जरिये, हमारे माथे की शिकन में, हमारी बातों में, हमारे कामों में दिखेंगी। हम डर और आशंकाओं को पूरी तरह जीने लगेंगे और कभी भी खुश नहीं रह पाएंगे। हमेशा हम भयभीत और नकारात्मक बने

रहेंगे। डर का प्रेत हमें वाकई धीरे-धीरे खा ही जाएगा। सिर्फ डर ही नहीं, कोई भी नकारात्मक विचार यदि हम मन में बैठा लें, तो वह हमें पूरी तरह नकारात्मक बना देता है। यह नकारात्मक छवि हमें लोगों से दूर कर देती है। वहीं सकारात्मक विचार हमें लोगों से जोड़ते हैं, दूसरों की मदद करने को प्रेरित करते हैं, हमें लोकप्रियता देते हैं और व्यक्तित्व में भी निखार लाते हैं।

हमारी सोच का प्रभाव सिर्फ हम पर नहीं, दूसरों पर भी पड़ता है। यदि नकारात्मक विचारों से हमारा मुख म्लान है, हमारे चेहरे पर गुस्सा या दुख है, तो दूसरों को भी हमारा यह रूप पसंद नहीं आता। लोग हमसे दूर भागने लगते हैं। वहीं, जब हम एक मुस्कराहट के साथ लोगों के बीच जाते हैं, तो हमारा स्वागत गर्मजोशी से होता है और हमारी सकारात्मक सोच दूसरों को प्रभावित करती है। जितने भी लोकप्रिय लोग है, उन्होंने सकारात्मक सोच से ही अपने चेहरे पर तेज पैदा किया है। दरअसल, सकारात्मक सोच हमें लोगों से जोड़कर लोकहित के काम करने के लिए प्रेरित करती है।

भारतीय दर्शन मानता है कि हमारे सभी कर्मों का कारण मन है। अच्छा या बुरा कोई भी काम करने से पहले हमें मन

से स्वीकृति लेनी पड़ती है। अमृतबिंदु उपनिषद में कहा गया है, मन एव मनुष्याणां कारणं बंधमोक्षयो: अर्थात, मन बंधन का भी कारण है और मोक्ष का भी। मन के परिष्कृत हो जाने से या उसमें सकारात्मक ऊर्जा भर जाने से स्वत: ही दया, करुणा, उदारता, सेवा, परोपकार जैसे सद्गुणों का उदय हो जाता है। हमारा मन सकारात्मक विचारों के प्रवाह

से ही परिष्कृत होता है। मन में बैठा हुआ डर हमें हमारी सोच या कल्पना के अनुसार ही फल देने लगता है। कई बार लोगों को‌ भूत-प्रेत दिखाई देने लगते हैं, जबकि वैज्ञानिक युग में उनका कोई अस्तित्व नहीं माना जाता। यह उसी सोच और कल्पना का प्रभाव है कि जो है ही नहीं, उसे भी

हम देखने लगते हैं। मनोविकारों से बचने के लिए हमें सृजनात्मक और सकारात्मक सोच अपनानी होगी। ऐसा करने से हमें सकारात्मक परिणाम प्राप्त होंगे। 

भगवानश्रीकृष्ण ने गीता में कहा है, जिसका मन वश में है, राग-द्वेष से रहित है, वह स्थायी प्रसन्नता प्राप्त करता है। जो व्यक्ति मन को वश में कर लेता है, उसी को कर्मयोगी 

कहा जाता है।

गौतम बुद्ध ने कहा था, मन को मारने से इच्छाएं नहीं मरती, इसलिए मन को मारने की नहीं, उसे साधने की जरूरत है।

मन को साधने का अर्थ यही है कि वह नकारात्मकता से प्रेरित न हो। इसका यही उपाय है कि मन को सकारात्मक विचारों की खुराक दी जाए, ताकि डर, आशंकाएं और नकारात्मक विचारों का प्रवाह रुक जाए और हम सदैव प्रसन्न, सुखी और मानवता की सेवा करने वाले बने रहें। 

मंगलवार, 24 अक्टूबर 2023

रामायण में वर्णित मुख्य स्थान

 रामायण में वर्णित मुख्य स्थान....


1. तमसानदी : अयोध्या से 20 किमी दूर है तमसा नदी। यहां पर उन्होंने नाव से नदी पार की।

2. श्रृंगवेरपुरतीर्थ : प्रयागराज से 20-22 किलोमीटर दूर वे श्रृंगवेरपुर पहुंचे, जो निषादराज गुह का राज्य था। यहीं पर गंगा के तट पर उन्होंने केवट से गंगा पार करने को कहा था। श्रृंगवेरपुर को वर्तमान में सिंगरौर कहा जाता है।

3. कुरईगांव : सिंगरौर में गंगा पार कर श्रीराम कुरई में रुके थे।

4. प्रयाग: कुरई से आगे चलकर श्रीराम अपने भाई लक्ष्मण और पत्नी सहित प्रयाग पहुंचे थे। कुछ महीने पहले तक प्रयाग को इलाहाबाद कहा जाता था ।

5. चित्रकूट : प्रभु श्रीराम ने प्रयाग संगम के समीप यमुना नदी को पार किया और फिर पहुंच गए चित्रकूट। चित्रकूट वह स्थान है, जहां राम को मनाने के लिए भरत अपनी सेना के साथ पहुंचते हैं। तब जब दशरथ का देहांत हो जाता है। भारत यहां से राम की चरण पादुका ले जाकर उनकी चरण पादुका रखकर राज्य करते हैं।

6. सतना : चित्रकूट के पास ही सतना (मध्यप्रदेश) स्थित अत्रि ऋषि का आश्रम था। हालांकि अनुसूइया पति महर्षि अत्रि चित्रकूट के तपोवन में रहा करते थे, लेकिन सतना में 'रामवन' नामक स्थान पर भी श्रीराम रुके थे, जहां ऋषि अत्रि का एक ओर आश्रम था।

7. दंडकारण्य : चित्रकूट से निकलकर श्रीराम घने वन में पहुंच गए। असल में यहीं था उनका वनवास। इस वन को उस काल में दंडकारण्य कहा जाता था। मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के कुछ क्षेत्रों को मिलाकर दंडकाराण्य था। दंडकारण्य में छत्तीसगढ़, ओडिशा एवं आंध्रप्रदेश राज्यों के अधिकतर हिस्से शामिल हैं। दरअसल, उड़ीसा की महानदी के इस पास से गोदावरी तक दंडकारण्य का क्षेत्र फैला हुआ था। इसी दंडकारण्य का ही हिस्सा है आंध्रप्रदेश का एक शहर भद्राचलम। गोदावरी नदी के तट पर बसा यह शहर सीता-रामचंद्र मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। यह मंदिर भद्रगिरि पर्वत पर है। कहा जाता है कि श्रीराम ने अपने वनवास के दौरान कुछ दिन इस भद्रगिरि पर्वत पर ही बिताए थे। स्थानीय मान्यता के मुताबिक दंडकारण्य के आकाश में ही रावण और जटायु का युद्ध हुआ था और जटायु के कुछ अंग दंडकारण्य में आ गिरे थे। ऐसा माना जाता है कि दुनियाभर में सिर्फ यहीं पर जटायु का एकमात्र मंदिर है।

8. पंचवटीनासिक : दण्डकारण्य में मुनियों के आश्रमों में रहने के बाद श्रीराम अगस्त्य मुनि के आश्रम गए। यह आश्रम नासिक के पंचवटी क्षे‍त्र में है जो गोदावरी नदी के किनारे बसा है। यहीं पर लक्ष्मण ने शूर्पणखा की नाक काटी थी। राम-लक्ष्मण ने खर व दूषण के साथ युद्ध किया था। गिद्धराज जटायु से श्रीराम की मैत्री भी यहीं हुई थी। वाल्मीकि रामायण, अरण्यकांड में पंचवटी का मनोहर वर्णन मिलता है।

9. सर्वतीर्थ : नासिक क्षेत्र में शूर्पणखा, मारीच और खर व दूषण के वध के बाद ही रावण ने सीता का हरण किया और जटायु का भी वध किया था जिसकी स्मृति नासिक से 56 किमी दूर ताकेड गांव में 'सर्वतीर्थ' नामक स्थान पर आज भी संरक्षित है। जटायु की मृत्यु सर्वतीर्थ नाम के स्थान पर हुई, जो नासिक जिले के इगतपुरी तहसील के ताकेड गांव में मौजूद है। इस स्थान को सर्वतीर्थ इसलिए कहा गया, क्योंकि यहीं पर मरणासन्न जटायु ने सीता माता के बारे में बताया। रामजी ने यहां जटायु का अंतिम संस्कार करके पिता और जटायु का श्राद्ध-तर्पण किया था। इसी तीर्थ पर लक्ष्मण रेखा थी।

10. पर्णशाला : पर्णशाला आंध्रप्रदेश में खम्माम जिले के भद्राचलम में स्थित है। रामालय से लगभग 1 घंटे की दूरी पर स्थित पर्णशाला को 'पनशाला' या 'पनसाला' भी कहते हैं। पर्णशाला गोदावरी नदी के तट पर स्थित है। मान्यता है कि यही वह स्थान है, जहां से सीताजी का हरण हुआ था। हालांकि कुछ मानते हैं कि इस स्थान पर रावण ने अपना विमान उतारा था। इस स्थल से ही रावण ने सीता को पुष्पक विमान में बिठाया था यानी सीताजी ने धरती यहां छोड़ी थी। इसी से वास्तविक हरण का स्थल यह माना जाता है। यहां पर राम-सीता का प्राचीन मंदिर है।

11. तुंगभद्रा : सर्वतीर्थ और पर्णशाला के बाद श्रीराम-लक्ष्मण सीता की खोज में तुंगभद्रा तथा कावेरी नदियों के क्षेत्र में पहुंच गए। तुंगभद्रा एवं कावेरी नदी क्षेत्रों के अनेक स्थलों पर वे सीता की खोज में गए।

12. शबरी का आश्रम :  तुंगभद्रा और कावेरी नदी को पार करते हुए राम और लक्ष्‍मण चले सीता की खोज में। जटायु और कबंध से मिलने के पश्‍चात वे ऋष्यमूक पर्वत पहुंचे। रास्ते में वे पम्पा नदी के पास शबरी आश्रम भी गए, जो आजकल केरल में स्थित है। शबरी जाति से भीलनी थीं और उनका नाम था श्रमणा। 'पम्पा' तुंगभद्रा नदी का पुराना नाम है। इसी नदी के किनारे पर हम्पी बसा हुआ है।

पौराणिक ग्रंथ 'रामायण' में हम्पी का उल्लेख वानर राज्य किष्किंधा की राजधानी के तौर पर किया गया है। केरल का प्रसिद्ध 'सबरिमलय मंदिर' तीर्थ इसी नदी के तट पर स्थित है।

13. ऋष्यमूक पर्वत : मलय पर्वत और चंदन वनों को पार


करते हुए वे ऋष्यमूक पर्वत की ओर बढ़े। यहां उन्होंने हनुमान और सुग्रीव से भेंट की, सीता के आभूषणों को देखा और श्रीराम ने बाली का वध किया। ऋष्यमूक पर्वत वाल्मीकि रामायण में वर्णित वानरों की राजधानी किष्किंधा के निकट स्थित था। ऋष्यमूक पर्वत तथा किष्किंधा नगर कर्नाटक के हम्पी, जिला बेल्लारी में स्थित है। पास की पहाड़ी को 'मतंग पर्वत' माना जाता है। इसी पर्वत पर मतंग ऋषि का आश्रम था जो हनुमानजी के गुरु थे।

14. कोडीकरई : हनुमान और सुग्रीव से मिलने के बाद श्रीराम ने वानर सेना का गठन किया और लंका की ओर चल पड़े। तमिलनाडु की एक लंबी तटरेखा है, जो लगभग 1,000 किमी तक विस्‍तारित है। कोडीकरई समुद्र तट वेलांकनी के दक्षिण में स्थित है, जो पूर्व में बंगाल की खाड़ी और दक्षिण में पाल्‍क स्‍ट्रेट से घिरा हुआ है। यहां श्रीराम की सेना ने पड़ाव डाला और श्रीराम ने अपनी सेना को कोडीकरई में एकत्रित कर विचार विमर्ष किया। लेकिन राम की सेना ने उस स्थान के सर्वेक्षण के बाद जाना कि यहां से समुद्र को पार नहीं किया जा सकता और यह स्थान पुल बनाने के लिए उचित भी नहीं है, तब श्रीराम की सेना ने रामेश्वरम की ओर कूच किया।

15. रामेश्‍वरम : रामेश्‍वरम समुद्र तट एक शांत समुद्र तट है और यहां का छिछला पानी तैरने और सन बेदिंग के लिए आदर्श है। रामेश्‍वरम प्रसिद्ध हिन्दू तीर्थ केंद्र है। महाकाव्‍य रामायण के अनुसार भगवान श्रीराम ने लंका पर चढ़ाई करने के पहले यहां भगवान शिव की पूजा की थी। रामेश्वरम का शिवलिंग श्रीराम द्वारा स्थापित शिवलिंग है।

16. धनुषकोडी : वाल्मीकि के अनुसार तीन दिन की खोजबीन के बाद श्रीराम ने रामेश्वरम के आगे समुद्र में वह स्थान ढूंढ़ निकाला, जहां से आसानी से श्रीलंका पहुंचा जा सकता हो। उन्होंने नल और नील की मदद से उक्त स्थान से लंका तक का पुनर्निर्माण करने का फैसला लिया। धनुषकोडी भारत के तमिलनाडु राज्‍य के पूर्वी तट पर रामेश्वरम द्वीप के दक्षिणी किनारे पर स्थित एक गांव है। धनुषकोडी पंबन के दक्षिण-पूर्व में स्थित है। धनुषकोडी श्रीलंका में तलैमन्‍नार से करीब 18 मील पश्‍चिम में है।

इसका नाम धनुषकोडी इसलिए है कि यहां से श्रीलंका तक वानर सेना के माध्यम से नल और नील ने जो पुल (रामसेतु) बनाया था उसका आकार मार्ग धनुष के समान ही है। इन पूरे इलाकों को मन्नार समुद्री क्षेत्र के अंतर्गत माना जाता है। धनुषकोडी ही भारत और श्रीलंका के बीच एकमात्र स्‍थलीय सीमा है, जहां समुद्र नदी की गहराई जितना है जिसमें कहीं-कहीं भूमि नजर आती है।

17.'  नुवारा एलिया' पर्वत श्रृंखला :

 वाल्मीकिय-रामायण अनुसार श्रीलंका के मध्य में रावण का महल था। 'नुवारा एलिया' पहाड़ियों से लगभग 90 किलोमीटर दूर बांद्रवेला की तरफ मध्य लंका की ऊंची पहाड़ियों के बीचोबीच सुरंगों तथा गुफाओं के भंवरजाल मिलते हैं। यहां ऐसे कई पुरातात्विक अवशेष मिलते हैं जिनकी कार्बन डेटिंग से इनका काल निकाला गया है।

श्रीलंका में नुआरा एलिया पहाड़ियों के आसपास स्थित रावण फॉल, रावण गुफाएं, अशोक वाटिका, खंडहर हो चुके विभीषण के महल आदि की पुरातात्विक जांच से इनके रामायण काल के होने की पुष्टि होती है। आजकल भी इन स्थानों की भौगोलिक विशेषताएं, जीव, वनस्पति तथा स्मारक आदि बिलकुल वैसे ही हैं जैसे कि रामायण में वर्णित किए गए है।। 

जय श्रीराम,