dahej mukt mithila

(एकमात्र संकल्‍प ध्‍यान मे-मिथिला राज्‍य हो संविधान मे) अप्पन गाम घरक ढंग ,अप्पन रहन - सहन के संग,अप्पन गाम-अप्पन बात में अपनेक सब के स्वागत अछि!अपन गाम -अपन घरअप्पन ज्ञान आ अप्पन संस्कारक सँग किछु कहबाक एकटा छोटछिन प्रयास अछि! हरेक मिथिला वाशी ईहा कहैत अछि... छी मैथिल मिथिला करे शंतान, जत्य रही ओ छी मिथिले धाम, याद रखु बस अप्पन गाम - अप्पन बात ,अप्पन मान " जय मैथिल जय मिथिला धाम" "स्वर्ग सं सुन्दर अपन गाम" E-mail: apangaamghar@gmail.com,madankumarthakur@gmail.com mo-9312460150

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बुधवार, 12 अक्टूबर 2011


हमर मोनक अहीं गूगल अहीं युआरेल छि

अहींक प्रेमक स्क्रैप सौं हमर भरल गीमेल छि !

ऑरकुट पर मुँह ठोर अइछ कने दोसर रंग


फेसबुक पर तेसरे रंग इ कोन खेल छि !

पोप केलक मेसेज अहाँ बीजी भ गेल छि !

आईटी सन सैद्खन अपडेटेड अहाँक स्टेटस


विन्डोजक प्रोसेसर में अहाँ एप एन्ड्रोआईड छि !

नेटवर्कक् अई माया सौं तरंगित अइ तन मन

अहीं जिनगीक प्रोग्रामक सॉफ्टवेर भ गेल छि !

स स्नेह



विकाश झा


विडियो में चैट खातिर लेलौं हम थ्री गी

शनिवार, 14 मई 2011

हमर किछु रुबाई

१.
सगर जिनगीक तोरा सौं मीत जोरलौं,
एक दोसरक बेगरता सौं प्रीत जोरलौं
गरबहिंयाँ द दुनु गोटे बन्हलौं सिनेहके
तोहर नेहक गिलेबा सौं भीत जोरलौं

२.
"दहेज़ ब्यथा पर एकटा रुबाई"
कोना कहू कहितो ई लाज होईया ,
बिनु टाका कूटमैतीक ने काज होईया,
सेहनता अई बेटी महफा में बैसती,
किये मैथिल भेलौं ई संताप होईया !

३.
यौवन मचान सन गात सोनलत्ती छऊ,
काया कनोजैर सन घाम धूपबत्ती छऊ,
रसगर ठोर तोहर तोरलक सबूर के ,
मातल आँखी बुझ जरदाक पत्ती छऊ
4

आहाँ रूपक भेरियाधसान लागल अई,
छोरा संग बुढबोक आन जान लागल अई
आबो समेटू अपन भाभट दसगरदा
आँगन में घट्कक दलान लागल अई !

5
जिनगी अमोल तोहर कोंख भेटल माँ,
तोरे आँचर में हमरा भरोस भेटल माँ,
सब आफद अनेरे उरल कपूर सन ,
तोहर ममता के जखने बसत भेटल माँ

6
ईशा आ पैगम्बरक झगरा सुनलौं,
अन्हरा जिहाद के फतबा सुनलौं,
सुनलौं निछा गेलई लादेन परसु ,
आई फेर केदन लादेन भेल इ की सुनलौं !
7

हुनक सोह टीसईया काँट बबूर जेना ,
आँईख भिजैईया तारी खजूर जेना ,
हुनके रूपक चिप्पी लगेलौं करेज में,
वो अघाई छईथ कछहरिक हजूर जेना !

सोमवार, 18 अप्रैल 2011

नजैर

नजैर

नजैर
बचा क नजैर सँ देखइ छि ,
देखि ने आहाँ डेरा क देखइ छि !

जखनो देखइ छि मुदा नबे लगइ छि,
तैं नित नजैर सँ नुका क देखइ छि !

सोझा मैं अबितौं बाटे तकैई छि ,
नजैर में अहींक छाहीं देखइ छि !

नजरे सौं सबटा खेरहा करैईत छि,
चप्पे मुदा हम सबटा देखइ छि !

आहाँ रूपक किताबो पढ़ई छि,
जुनी सोंचू गलत नजर सौं देखइ छि!

सनेहक आपेक्षि

विकाश झा

शुक्रवार, 11 फ़रवरी 2011

गाम आबी जाऊ

बसंतक आगमन भेल अछी,
धानक सीस जेना आमक मज्जर ,
फगुआ सेहो लकचियागेल ,
हम त कहब !!!
अहि बेर छुट्टी मैं गाम आबी जाऊ ,
दालान पर कोटपिस आ २८ खेलब ,
आ संगे मालदह आ किसुन्भोग क स्वाद ,
सहर मैं त कारबिदेक गंद सुन संतोस कर परत ,
आ बिसेस इ जे !!!!!!
कनिया काकी बाट तकैत तकैत नोरा गेली ,
तैं गाम आबी जाऊ !!!!!!!

***स स्नेह .....विकाश झा ***