शुक्रवार, 27 सितंबर 2019
मंगलवार, 24 सितंबर 2019
हे अम्बे आइ कीय भेलौ उदास ।।। गीतकार - रेवती रमण झा "रमण"
|| अम्बे आइ कीय भेलौ उदास ||
नवोरूप धरि आहे अयलौ नवदुर्गे
नवो दिन कयलहुँ वास ।
हे अम्बे आइ कीय भेलौ उदास ।।
जग कल्याणी आहे दुःख हरनी
जगत जननी आहे सुख करनी
ममतामयी मैया कोना बिसरबै
एक अहींक अछि आश ।
हे अम्बे आइ कीय भेलौ उदास ।।
चहल पहल मैया नवो दिन केलिअई
अपन कृपा चहुँ दिश बरसेलिअइ
अपन दया केर वर वारिधि सँ
पूरल सबहक आश ।
हे अम्बे आइ कीय भेलौ उदास ।।
भव विपदा सँ जीवन घायल
देखू "रमण" शरण अछि आयल
महिषासुर मर्दिनी मैया पुनि
आयब आसिन मास ।
हे अम्बे आइ कीय भेलौ उदास ।।
गीतकार
रेवती रमण झा "रमण"
नवोरूप धरि आहे अयलौ नवदुर्गे
नवो दिन कयलहुँ वास ।
हे अम्बे आइ कीय भेलौ उदास ।।
जग कल्याणी आहे दुःख हरनी
जगत जननी आहे सुख करनी
ममतामयी मैया कोना बिसरबै
एक अहींक अछि आश ।
हे अम्बे आइ कीय भेलौ उदास ।।
चहल पहल मैया नवो दिन केलिअई
अपन कृपा चहुँ दिश बरसेलिअइ
अपन दया केर वर वारिधि सँ
पूरल सबहक आश ।
हे अम्बे आइ कीय भेलौ उदास ।।
भव विपदा सँ जीवन घायल
देखू "रमण" शरण अछि आयल
महिषासुर मर्दिनी मैया पुनि
आयब आसिन मास ।
हे अम्बे आइ कीय भेलौ उदास ।।
गीतकार
रेवती रमण झा "रमण"
शनिवार, 14 सितंबर 2019
तर्पण मन्त्र -TARPAN MANTRAS
आवाहन: दोनों हाथों की अनामिका (छोटी तथा बड़ी उँगलियों के बीच की उंगली) में कुश (एक प्रकार की घास) की पवित्री (उंगली में लपेटकर दोनों सिरे ऐंठकर अंगूठी की तरह छल्ला) पहनकर, बाएं कंधे पर सफेद वस्त्र डालकर दोनों हाथ जोड़कर अपने पूर्वजों को निम्न मन्त्र से आमंत्रित करें
'ॐ आगच्छन्तु मे पितर एवं ग्रहन्तु जलान्जलिम'
ॐ हे पितरों! पधारिये तथा जलांजलि ग्रहण कीजिए।
तर्पण: जल अर्पित करें
निम्न में से प्रत्येक को 3 बार किसी पवित्र नदी, तालाब, झील या अन्य स्रोत (गंगा / नर्मदा जल पवित्रतम माने गए हैं) के शुद्ध जल में थोडा सा दूध, तिल तथा जावा मिला कर जलांजलि अर्पित करें।
पिता हेतु --
(गोत्र नाम) गोत्रे अस्मतपिता पिता का नाम शर्मा वसुरूपस्त्तृप्यतमिदं तिलोदकम (गंगा/नर्मदा जलं वा) तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः तस्मै स्वधा नमः।
------. गोत्र के मेरे पिता श्री वसुरूप में तिल तथा पवित्र जल ग्रहण कर तृप्त हों।
तस्मै स्वधा नमः तस्मै स्वधा नमः तस्मै स्वधा नमः।
उक्त में अस्मत्पिता के स्थान पर अस्मत्पितामह पढ़ें --
पिता के नाम के स्थान पर पितामां का नाम लें ----
माता हेतु तर्पण -
(गोत्र नाम) गोत्रे अस्मन्माता माता का नाम देवी वसुरूपास्त्तृप्यतमिदं तिलोदकम (गंगा/नर्मदा जलं वा)
तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः तस्मै स्वधा नमः।
........... गोत्र की मेरी माता श्रीमती ....... देवी वसुरूप में तिल तथा पवित्र जल ग्रहण कर तृप्त हों। तस्मै स्वधा नमः तस्मै स्वधा नमः तस्मै स्वधा नमः।
निस्संदेह मन्त्र श्रद्धा अभिव्यक्ति का श्रेष्ठ माध्यम हैं किन्तु भावना, सम्मान तथा अनुभूति अन्यतम हैं।
जलांजलि पूर्व दिशा में 16 बार, उत्तर दिशा में 7 बार तथा दक्षिण दिशा में 14 बार अर्पित करें
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संक्षिप्त पितृ तर्पण विधि:
पितरोंका तर्पण करनेके पूर्व इस मन्त्र से हाथ जोडकर प्रथम उनका आवाहन करे -
ॐ आगच्छन्तु मे पितर इमं गृह्णन्तु जलान्जलिम ।
(पिता के लिये)
अमुकगोत्रः अस्मत्पिता अमुक (नाम) शर्मा वसुरूपस्तृप्यतामिदं तिलोदकं (गंगाजलं वा) तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः ।
(माता के लिये)
अमुकगोत्रा अस्मन्माता अमुकी (नाम) देवी वसुरूपा तृप्यतामिदं तिलोदकं तस्यै स्वधा नमः, तस्यै स्वधा नमः, तस्यै स्वधा नमः ।
जलांजलि पूर्व दिशा में 16 बार, उत्तर दिशा में 7 बार तथा दक्षिण दिशा में 14 बार अर्पित करें
शुक्रवार, 13 सितंबर 2019
गुरुवार, 5 सितंबर 2019
विधवा विवाह - ममता झा
विधवा विवाह
विधवा शब्द एकटा श्राप जकाँ लगईया।ई शब्दे झकझोरने अई।पहिने त छुत जकाँ व्यवहार कैल जायत रहै।लोग एना विधवा के देखईत छल जेना ओ कते पैघ गुनाहगार हुए।आब कनिक लोग जागरूक भेल अई।विधवा के जीवन सुरक्षित कर के लेल ,सबस बात विचार करी क ,फेर स विवाह केनाई उचित मानल गेल।
कोनो आदमी मृत्यु के कालचक्र मे कहिया परत ई बात क्यो नई जानंई या| स सिर्फ भगवाने टा जनईत छईथ|जन्म-मृत्यु हुनके हाथ मे अई ,तखन नारी कोना दोषी भेल|नारी के हम दुत्काइर आ बाइज क अबला बना दई छी,जखन की ओकर कोनो गल्ती नै|
ई बात त सब जानई छी कि जई नारी के पति गुजैर गेल ओकरा पर आसमान टुट बला विपत्ति पईर गेल |ओई स्थिति मे ई समाज ओई नारी के संतावना देव के बदले ओल सनक बोल कहई छैथ| ई त भेल लोग,समाज आ परिवारक विचार विधवा के लेल |किछुए घर मे मान -सम्मान भेटईत अई विधवा के|हम एकटा सिनेमा देखने रही प्रेम रोग ओई मे जे विधवा के दुर्दशा देखलौ रौगटा सिहईर गेल |समाज मे मिडिया के असर बेसी परइया|विधवा के देख समाज के त छोडू परिवारो के नियत खराब भ जैत अई |ओकरा (विधवा)अनेको उप नाम डायन ,चुडैल,कुलकलंकनि सन अनेको नाम स पुकारैत छैथ|ई सब दोष के देखैत हमरा हिसाब स विधवा विवाह बहुत जरूरी अई उम्र के हिसाब स| ऑगुर उठेनाइ आसान अई सहयोग केनाई मुस्किल |हमसब मिल क संकल्प करी त काज आसान होयत विधवा के सहयोग कर मे|
विवाह कम उम्र के विधवा के लेल ,सबमिल क योग्य वर स पुनरविवाह कराबी | दोसर स्थिति,अगर विवाह के १५/२०साल भ गेल छइन आ बच्चा छइन त बच्चो के विचार जरूरी अई|दुनू तैयार विवाह कर मे कोनो हर्ज नै|कारण बच्चा के परवरिश कर मे अनेक तरहक कठिनाई अबई छै जीवन मे||पढाई लिखाई महग तकर बादो अनेक तरहक दिक्कत बच्चा के निक नागरिक बनाब मे|इयाह सब कारणे जीवन साथी के जरूरत |
तेसर समय ५०स६० अई| अई उम्र मे अगर क्यो विधवा होई छैत त हमर हिसाब स हुनक धिया पुता के पढाई लिखाई ,विवाह दान सब भ जाइ छै|अई अवस्था मे अगर क्यो मनोनुकुल साथी भेटै त कोनो हर्ज नै|ओना अई अवस्था में लोग अध्यात्म स जुडी जाइया |अपन बाल बच्चा कमायो लागई छई|अगर बच्चा माय के भरण पोषण कर के लेल स्वेछा स तैयार छै तखन विवाह जरूरी नई अई|एखुनका अवस्था सबस विचित्र ,सब बेटा अगर लाईक रहितै त बृद्धा आश्रम के की जरूरत |ओहन स्थिति मे नारी स्वतंत्र छइथ अपन खुशी के अनुसार निर्णय लेब के लेल|हुनक जे निर्णय हेतइन से समाज आ परिवार के मान्य हेबाक चाहि|इयाह हमर ईक्छा|
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