dahej mukt mithila

(एकमात्र संकल्‍प ध्‍यान मे-मिथिला राज्‍य हो संविधान मे) अप्पन गाम घरक ढंग ,अप्पन रहन - सहन के संग,अप्पन गाम-अप्पन बात में अपनेक सब के स्वागत अछि!अपन गाम -अपन घरअप्पन ज्ञान आ अप्पन संस्कारक सँग किछु कहबाक एकटा छोटछिन प्रयास अछि! हरेक मिथिला वाशी ईहा कहैत अछि... छी मैथिल मिथिला करे शंतान, जत्य रही ओ छी मिथिले धाम, याद रखु बस अप्पन गाम - अप्पन बात ,अप्पन मान " जय मैथिल जय मिथिला धाम" "स्वर्ग सं सुन्दर अपन गाम" E-mail: apangaamghar@gmail.com,madankumarthakur@gmail.com mo-9312460150

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मंगलवार, 29 मार्च 2011

अनमोल रचना@प्रभात राय भट्ट


अनमोल रचना@प्रभात राय भट्ट

रूप अहाँक लगैय चंदाचकोर अन्हार में करैछी ईजोर,
देख अहाँके मोनमें हमरा उठल हिलोर बड़ा बेजोर,

अहाँक केशक गजरा आईखक कजरा जान मारैय,
नशीली नयनक धार हमरा दिल पर वाण मारैय ,

खन खन खन्कैय कंगना छम छम बजैय पाजू,
 घुंघटा उठा सजनी हमरा संग मुस्की मुस्की बाजू,

अहाँके पबैला मंदिर मस्जिद मगैछी दुवा पढ़ैछि कलमा,
हे यै हमर गोरी गरिमा बनालू हमरा अहाँ अपन बलमा,२

चम् चम् च्म्कैछी रानी अहाँ दुतिया के चाँद सन,
गम गम गम्कैछी सुगिया अहाँ बेलीचमेलि फुल सन,

मृग नयनी अहाँक नयन ठोर लगैय रस भरल मधुशाला,
अंग अंगमें तरंग मोनमें उमंग जेना संगीतक पाठशाला,

प्रेम रस स उमरल रूप अहाँक देख भेली हम दीवाना यए,
देख अहाँ संग हमरा गोरी,जईर जईर मरैय जवाना यए,

डोली कहार लक आएब गोरी हम अहाँक अंगना
अहाँ बनब हमर सजनी हम बनब अहाँक सजना,

अहाँक रूप देखि चाँद चकोर सेहो लजागेल,
अहाँक सुन्दरताके तेज स ईन्द्रपरी सेहो झपागेल,

विधाता के रचल सजनी अहाँ छि अनमोल रचना,
अंग अंग में सजल यए अनुपम अनुराग के गहना,

हे यै हमर मोनक रानी गरिमा चलू हमर अंगना,
अहाँ बनब हमर सजनी हम बनब अहाँक सजना,२

रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

सोमवार, 28 मार्च 2011

दहेज़ प्रथा रोकबाक लेल विचार करत बिहार - सरकार...

इ समाचार सुईंन के जतेक हम खुश भेलो, शायद अहूँ ओतबे खुश होयब...आय मुंबई में एक समाचार पत्र (यशोभूमि) में एक खबर पढ्लो जाहीं सँ हमरा इ महसूस भेल जे "दहेज़ मुक्त मिथिला" के पुकार बिहार - सरकार सुईंन लेलक...बिहार सरकार आय स्वीकार केलक कि दहेज़ प्रथाक बुराई के समाप्त करबाक लेल मौजूदा उपाय के अलावा जिलाधिकारी आर पुलिस अधीक्षक के व्यापक अधिकार देबाक लेल विचार करब जरुरी अछि, किए कि अदालत में एहेंन मामला के निपटाबै में बहुत बेसी समय लागैत अछि ! समाज कल्याण मंत्री परवीन अमानुल्लाह प्रश्नोत्तर काल में विधान परिषद में कहलखिन जे बिहार में दहेज़ प्रथा रोकबाक लेल कानून लागू अछि आर अलग - अलग जिला में ओई ठामक जिला कल्याण पदाधिकारी दहेज़ निषेध अधिकारीक रूप में काज के रहल छैथ आर महिला विकास निगम के प्रबंध निदेशक के राज्य में पनपल दहेज़ निषेध अधिकारीक रूप में नियुक्त करल गेल अछि!समाज कल्याण मंत्री परवीन अमानुल्लाह कहलखिन जे दहेज़ कुप्रथा के रोकबाक लेल राज्य सरकार बहुत कार्यक्रम चले रहल छैथ आ लोग सभ के जागरूक करबाक प्रयास करल जे रहल अछि..... जितमोहन झा-

Abhay Kant Jha Deepraaj ke hindi GHAZAL -

                    ग़ज़ल

आग  से  था  खेलने  का शौक पर हम  डर गये |
मौत  को  जब  सामने देखा तो खुद ही मर गये ||

उम्र  भर  जो  साथ  देने  के  लिए  घर  से  चले,
शाम ही जो होने आयी,  थक के अपने घर गये ||

रोज़  सुबहो-शाम  मिट्टी,  खून  से  भींगी  रही,
पर हुआ बलिदान जिनका, फालतू वो सर गये ||

बोलियाँ   देते  रहे  जो  हमको  लड़ने  के  लिए,
सामने  दुश्मन दिखा तो खुद किनारा कर गये ||

भाग्य ही शायद बुरा था,  आदमी की ज़ात का,
जो  भी  बोया  पेड़  उसने,  उसके पत्ते झड गये ||

             
              रचनाकार- अभय दीपराज

शनिवार, 26 मार्च 2011

एकटा पत्र छोटका भाय के नाम.

सुने रे रानू लिखेय छौ भानु
हमर हाल छौ उत्तम,
तोहर हाल के हम नै जानी
भला करउ पुरुषोत्तम।

अपन गाम में छुटी गेलों ये,
हमर एकटा अंगा
ओ अंगा के कका लगाय के,
पठा दिए दरभंगा।

बड़की भौजी से तू कहिये
याद बहुत आबय ये,
हुनकर चक्का,सैजमन, आ तिलकौर
बड़ा भावय ये।

माय  से कहिये कानय ले नै
पूरा हेतय ईक्षा,
जल्दी हमहूँ बीडीओ बनबइ
पास करय दे परीक्षा।

मिरिया माय के हाल तू हमरा
सेहो अलग से बतहिये,
कनकिरबा कतबा टा बढलों
फोटो कोनो पठियेह।

कालेज के भए गेलों समय ये
समय के छो कनी तंगी,
माँ-बाबु ले गोर लगय छियो
घोर एबउ हम जल्दी।

प्रेम दीवाना@प्रभात राय भट्ट

by Prabhat Ray Bhatt Uyfm on Saturday, March 26, 2011 at 7:24am
प्रेम दीवाना@प्रभात राय भट्ट
 हम अहाकप्रेम दीवाना अहिं स:प्रीत करैत छी,
सुतैत जगैत उठैत बैसैत अहींक नाम रतैत छी ,
ऐसजनी अहींक नाम रतैत छी .....................२

हम अहाँक प्रेम दीवानी अहिं स:प्रीत करैत छी,
जखन तखन सद्खन सजना अहींक याद करैत छी,
ययौ सजाना अहिं के याद करैत छी.....................२ 

रोज रोज हम लिखैत छी अपन प्रेम कहानी के पोथी ,
अहाँ विन तडपैछी जेना पाईन विन तडपैय पोठी,
वित् जाईय दिन कहना राईत नए वितैय.........
अहिं के सुरता सजनी सद्खन लागल रहैया....२

हमर मोनक बात पिया अहिं सब कहिदेलौं ,
अहुं केर तड़पन पिया हम सब जाईन्गेलौं,
फटईय हिया पिया एक दोसर के प्रीत विन,
बड मुस्किल स कटैय अहाँक हमर राइत दिन,

हम अहाँक प्रेम दीवाना अहिं स प्रीत करैत छी,
सुतैत जगैत उठैत बैसैत अहिक नाम रतैत छी,
ऐ सजनी अहिक नाम रतैत छी.....................२

हम अहाँक प्रेम दीवानी अहिं सा प्रीत करैत छी,
जखन तखन सद्खन सजना अहिक याद करैत छी,
ययौ सजना अहींक याद करैत छी...................२

रचनाकार:प्रभात राय भट्ट