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शनिवार, 12 सितंबर 2026

चौठचन्द्र चौरचन पूजा के संपूर्ण पाठ

चौठचन्द्र चौरचन पूजा के संपूर्ण पाठ  









  14 /09/2026

     भादव शुक्ल चतुर्थी पहिल साँझ व्रती स्नान कऽ आसन पर बैसि पूजाक सब सामग्री अरिपन अनुसार दही डाली मररक खीरपूरी दीप संग कलशसथापन कय कुशक वा सोना चांदी पवित्री पहिर तेकुशा जल लय इ मंत्र पढि सामग्री संग जल छिटी स्वयं पवित्र होई छथि-

नम:! अपवित्र: पवित्रोवा सर्वावस्थां गतोपिवा।
य: स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं सवाह्याभ्यन्तर: सुचि सुचि।।
नमः! पुण्डरीकाक्ष: पुनातु।जल सिक्त करू।।

तेकुशा तील जल लय संकल्प मंत्र-

नमोऽस्यां रात्रौ भाद्रे मासि शुक्ल पक्षे चतुर्थ्यां तिथौ अमुक गोत्राया: ममाऽमुकीदेव्या: ।सकल कल्याणोत्पत्तिपूर्वक धनधान्यदि समृद्धि सकल मनोरथ सिद्ययर्थं यथाशक्ति गंधपुष्प धूपदीप ताम्बूल यज्ञोपवित वस्त्रनानाविध-नैवेद्यादिभि: रोहिणीसहित भाद्र शुक्ल चतुर्थी चंद्रपूजनं तत्कथाश्रवणं चाहं करिष्ये।

गणपत्यादि पंचदेवता पूजन-

अक्षत लय --  नमो गणपत्यादि पंचदेवता: इहागच्छत इह तिष्ठत।  (कहि पात पर एककात राखि दी।)

अर्घा में जल लय    - एतानि पाद्यादीनि एषोर्घ: नमो गणपत्यादि पंचदेवता भ्यो नम:।

फूल में चानन लगाके    - इदमनुलेपनं गणपत्यादि पंचदेवता भ्यो नमः ।

अक्षत लय      -इदमक्षतं गणपत्यादि पंचदेवता भ्यो नम:। 

फूल लय    -इदं पूष्प गणपत्यादि पंचदेवता भ्यो नम:। 

बेलपात लय    -इदं विल्वपत्रं गणपत्यादि पंचदेवता भ्यो नम:। 

दूबि लय       -इदं दुर्वादलम् गणपत्यादि पंचदेवता भ्यो नम:।

जल लय     -एतानि गंधपुष्पधूपदीपताम्बुलयथाभाग नानाविध नैवेद्यानि गणपत्यादि पंचदेवता भ्यो नम:।नैवेद्य पर। 

जल लय    -इदमाचीनीयं नमो गणपत्यादि पंचदेवता भ्यो नम:।

विधवा स्त्री तील लय  - --    नमो भगवत् भगवान श्री विष्णो इहागच्छ इह तिष्ठ। पूजा के बगल में पात पर राखू।

जल लय-एतानि पाद्यादीनि एषोर्घ: नमोभगवते श्रीविष्णवे नम:।पूजा पात पर चढादी। अहिना फूल तुलसीपात आदि सौं पंचोपचार पूजा करी।

सधवा स्त्री गौरी पूजा करथि-

अक्षत लय    -नमो गौरि इहागच्छ इह तिष्ठ।

जल लय    -एतानि पाद्यादीनि नमो गौर्ये नम:। 

चानन लय     -इदमनुलेपनं नमो गौर्ये नम:। 

सिंदुर लय    -इदं सिन्दूरमनमो गौर्ये नम:। 

अक्षत लय    -इदमक्षतं नमो गौर्ये नम:। 

फूल लय       -इदं पुष्पं नमो गौर्ये नम:।

दुबि लय      - इदं दुर्वादलम नमो गौर्ये नम:।

बेलपात लय        - इदं विल्वपत्रं नमो गौर्ये नम:। 

जल लय         -एतानि गंधपुष्पधूपदीपताम्बुलयथायदिभाग नानाविध नैवेद्यानि नमो गौर्ये नम:।नैवेद्य पर उत्सर्ग करी।  

जल लय       -इदमाचीनीयं नमो गौर्ये नम:।

चौठचन्द्र पूजा   -     अक्षत लिय-नमो रोहिणीसहित भाद्र शुक्ल चतुर्थी चंद्र  इहागच्छ इह तिष्ठ।पात पर राखू।

उजर फूल लिय         - श्वेतांबरं स्वच्छतनुं सुधांशु चतुर्भुजं हेमविभूषणाढ्यम्।वरं सुधा दिव्यकमण्डलुञ्च करैरभीतिञ्च दधानभीडे।।एष पपुष्पाञ्जलि।

जलक अर्घ्यदान     -सोमाय सोमेश्वराय सोमपतये सोमसम्भवाय गोविन्दाय नमो नम:।

एतानि पाद्यादीनि एषोऽर्घ्य: नमो रोहिणीसहित भाद्र शुक्ल चतुर्थी चंद्राय नम:।

चानन लय      -मलयाद्रिसमुद्भूतं श्रीखंडं त्रिदशाप्रियम्। सर्वपापहरं सौख्यं चंदनं मे प्रगृह्यताम्।

चानन लय      - इदमनुलेपनं नमो रोहिणीसहित भाद्र शुक्ल चतुर्थी चंद्राय नम:।

अक्षत लय       -इदमक्षतं नमो रोहिणीसहित भाद्र शुक्ल चतुर्थी चंद्राय नम:।

उजर फूल लय      - त्रैलोक्यमोदकं पुष्पं शुक्ल पुष्पं मनोहरम्।दिव्यौषधि क्षपानाथ गृह्यतां च प्रसीद मे।एतानि पुष्पाणि नमो रोहिणीसहित भाद्र शुक्ल चतुर्थी चंद्राय नम :।

बेलपात लय       -इदं विल्वपत्रं नमो रोहिणीसहित भाद्र शुक्ल चतुर्थी चंद्राय नमः।

दुबि लिय         -इदं दुर्वादलम नमो रोहिणीसहित भाद्र शुक्ल चतुर्थी चंद्राय नमः।

यज्ञोपवित लय          - सुसंस्कृतं चतुर्वेदैर्द्विजानां भूषणं वरम्।यज्ञोपवितंदेवेश कृपया मे प्रगृह्यताम्।इमे यज्ञोपविते वृहस्पतिदैवते नमो रोहिणीसहित भाद्र शुक्ल चतुर्थी चंद्राय नम :।

वस्त्र लय       - तन्तुसन्तानसम्भूतं कलाकोशलकल्पितम्। सर्वाङ्गभूषणश्रेष्ठं वसनं परिधीयताम्।।इदं वस्त्रं वृहस्पतिदैवतं नमो रोहिणीसहित भाद्र शुक्ल चतुर्थी चंद्राय नम :।

नैवेद्य             - नैवेद्यं गृह्यतां देव भर्क्ति मे ह्यचलां कुरू।ईप्सितं मे वरं देहि परत्र च परांङ्गतिम।। 

एतानि गंधपुष्प धूपदीपसदधिपक्वान्नादि नानाविध नैवेद्यानि नमो रोहिणीसहित भाद्र शुक्ल चतुर्थी चंद्राय नम :।

 पुंगीफल     ---        पूंगीफलं महद्दिव्यं नागवल्लीदलैर्युतम्। कर्पूरादिसमायुक्तं ताम्बूलं प्रतिगृह्यताम्।।एतानि ताम्बूलानि।

धूप-   ---  गन्धभारवहं दिव्यं नानावस्तुसमनवितम्। सुरासुरनरानन्दं धूपं देव गृहाण मे।। एष धूप: नमो रोहिणीसहित भाद्र शुक्ल चतुर्थी चंद्राय नम :।

कलशदीपदानम      -  मार्तण्डमण्डलाखण्डचन्द्रबिम्बाग्निदीप्तिमान्। विधात्रा देवदीपोऽयं निर्मितस्तेऽस्तु भक्तित:। एष कलशदीप: नमो रोहिणीसहित भाद्र शुक्ल चतुर्थी चंद्राय नम :।

शंख में  फल फूल दूध लय     - अत्रिनेत्रसमुद्भूत क्षीरोदार्णवसंभव।गृहामार्घ्य मया दत्तं रोहिण्या सहितप्रभो ।इदं दुग्धार्घ्यं नमो रोहिणीसहित भाद्र शुक्ल चतुर्थी चंद्राय नम :।

डाली लय चंद्र दर्शन मंत्र----

सिंह प्रसेन मवधीत्सिंहो जाम्बवताहत :! 

सुकुमारक मा रोदीस्तव ह्येष स्यमन्तक :!

प्रणाम मंत्र-

नम: शुभ्रांशवे तुभ्यं द्विजराजाय ते नम ।

रोहिणीपतये तुभ्यं लक्ष्मीभ्रात्रे नमोऽस्तु ते । ।

दही छाँछी लय प्रणाम मंत्र -

दिव्यशंखतुषाराभं क्षीरोदार्णवसंभवम्! नमामि शशिनं भक्त्या शंभोर्मुकुट भूषणम्! !

प्रार्थना मंत्र -

मृगाङ्क रोहिणीनाथ शम्भो : शिरसि भूषण ।

व्रतं संपूर्णतां यातु सौभाग्यं च प्रयच्छ मे । ।

रुपं देहि यशो देहि भाग्यं भगवन् देहि मे।

पुत्रोन्देहि धनन्देहि सर्वान् कामान् प्रदेहि मे।।

तदुपरांत स्यमन्तक मणी जाम्बवान पुत्र सुकुमार पर आधारित कथा ध्यान मग्न भय सुनि।जहिना पूजा केलहुं ओहि क्रम में बेराबेरी विसर्जन करी

विसर्जन मंत्र-

     jal lake -       नमो गणपत्यादि पंचदेवता: पूजिता: स्थ क्षमध्वं स्वस्थानं गच्छत।

विधवा     - नमो विष्णो पूजितोऽसि प्रसीद क्षमस्व।

सधवा     - नमो गौरि पूजितासि प्रसीद क्षमस्व।

नमो रोहिणीसहित भाद्र शुक्ल चतुर्थी चंद्र पूजितोऽसि प्रसीद क्षमस्व स्वस्थानं गच्छ।

दक्षिणा द्रव्य जल से सिक्त कय तील जल लय मंत्र-

नमोऽस्यां रात्रौ कृतेतद्रोहिणीसहित भाद्र शुक्ल चतुर्थी चंद्र पूजन तत्कथा श्रवण कर्म प्रतिष्ठार्थमेतावद्द्रव्य मूल्यकहिरण्यमग्निदैवतं यथानाम गोत्राय ब्राह्मणाय दक्षिणामहं ददे।कुश तील जल द्रव्य पर अर्पण कय। दक्षिणा प्रतिपन्न करी ओ स्वाच्छन्न देता।

क्षमायाचना    -- सपरिवार कलजोरी- हे चतुर्थी चंद्र हम त आहां के बच्चा छी यथासाध्य नैवेद्य फुल पान लय आहांक पुजा कयल कोनो त्रुटि लेल क्षमा करब।

तदुपरांत मड़ड उत्सर्ग कय भांगि आ प्रसाद वितरण करी।

पंडित भेट जाईथ त सर्वोत्तम नै त पिता/पती/पुत्र/भाई/कुटंब/संवंधी  से उपरोक्त विधि से पुजन कर

पं.राजीव झा

शुक्रवार, 22 मई 2026

आप रामायण पढ़ते हो न? राम जी तो किसी को नहीं मारते थे बिना वजह।

 जेल में बंद कैदी रोज़ रामायण पढ़ता था… एक दिन जेलर को पता चला कि उसने अपराध क्यों किया था।

1. सीतापुर जेल की बैरक नंबर 7  

सीतापुर जिला जेल। ऊँची दीवारें, लोहे की सलाखें और सन्नाटा। बैरक नंबर 7 में 42 कैदी थे। उन्हीं में एक था कैदी नंबर 2911 — राघव शुक्ला। उम्र 38 साल, दुबला-पतला, दाढ़ी बढ़ी हुई, आँखें हमेशा नीचे।  

राघव की पहचान थी रामायण। सुबह 4 बजे उठता, नहाकर जेल के मंदिर वाले कोने में बैठ जाता। फटी-पुरानी रामायण खोलता और पाठ करता। आवाज़ धीमी पर साफ। "मंगल भवन अमंगल हारी, द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी।"  

दूसरे कैदी हँसते। "पंडित, रामायण पढ़ने से सजा कम नहीं होगी। 20 साल काटने हैं तुझे।"  

राघव जवाब नहीं देता। पाठ खत्म करके वो रामायण को माथे से लगाता और वापस बैरक में।  

जेलर थे अविनाश सिंह। 50 साल के, कड़क अफसर। 25 साल की नौकरी में हर तरह के कैदी देखे थे। पर राघव अजीब था। न लड़ाई, न गाली, न भागने की कोशिश। बस रामायण।  

2. अपराध क्या था?  

राघव की फाइल में लिखा था — "धारा 302, हत्या। 2019 में लखनऊ के गोमतीनगर में बिल्डर विजय अग्रवाल की हत्या। पत्नी और 2 साल की बेटी के सामने गोली मारी। कोर्ट ने उम्रकैद दी।"  

जेलर अविनाश को हैरानी होती। जो आदमी रामायण पढ़ता है, वो एक परिवार के सामने खून कैसे कर सकता है? उन्होंने पुराने सिपाही शिवराम से पूछा।  

"साहब, ये आदमी कोर्ट में भी चुप था। वकील नहीं किया। खुद कहा — हाँ, मैंने मारा। बस।"  

"क्यों मारा, ये नहीं बताया?"  

"ना साहब। जज ने भी पूछा। बोला — वजह मत पूछिए। सजा दे दीजिए।"  

अविनाश की उलझन बढ़ गई।  

3. जेल में रामराज  

राघव 3 साल से जेल में था। धीरे-धीरे उसने बैरक का माहौल बदल दिया। जो कैदी गाली देते थे, वो अब धीरे बोलते। रामायण के बाद राघव सबको एक चौपाई का मतलब समझाता।  

"कर्म प्रधान विश्व रचि राखा, जो जस करहि सो तस फल चाखा।"  

"मतलब, भाई, जो करोगे वही भरोगे। गाली दोगे तो गाली मिलेगी। प्रेम दोगे तो प्रेम।"  

छोटू नाम का 19 साल का लड़का चोरी में आया था। राघव ने उसे अक्षर सिखाए। अब छोटू रामायण पढ़ लेता था।  

जेल में लड़ाई हो जाती तो वार्डन बुलाते — "पंडित को बुलाओ।" राघव दो लाइन बोलता, और मारपीट रुक जाती।  

जेलर अविनाश देखते रहते। सोचते, "अगर ये आदमी बाहर होता तो कितने घर बचा लेता। पर इसने एक घर उजाड़ दिया। क्यों?"  

4. बेटी की चिट्ठी  

2025 की मार्च। होली का दिन। जेल में कैदियों को घर से चिट्ठी मिलती है। राघव को कभी चिट्ठी नहीं आई थी।  

पर उस दिन एक लिफाफा आया। भेजने वाली — "अनन्या अग्रवाल, क्लास 6, सेंट मैरी स्कूल, लखनऊ।"  

जेलर चौंक गए। अग्रवाल... वही विजय अग्रवाल की बेटी?  

नियम था, जेलर चिट्ठी पढ़कर देते हैं। अविनाश ने लिफाफा खोला।  

*अंकल,  

आप मुझे जानते नहीं। मैं अनन्या हूँ। पापा विजय अग्रवाल की बेटी।  

मम्मा कहती हैं आपने मेरे पापा को मार दिया। पुलिस अंकल ने भी यही कहा।  

पर मैं आपसे नफरत नहीं करती।  

क्योंकि मम्मा रात को रोती हैं। वो कहती हैं, "तेरे पापा अच्छे आदमी नहीं थे।"  

नानी कहती हैं, "राघव अंकल ने तेरी जिंदगी बचाई थी।"  

मैं बहुत कन्फ्यूज हूँ।  

आप सच बताओगे? आपने पापा को क्यों मारा?  

आप रामायण पढ़ते हो न? राम जी तो किसी को नहीं मारते थे बिना वजह।  

प्लीज जवाब देना।  

अनन्या*  

अविनाश का हाथ काँप गया। उन्होंने चिट्ठी राघव को दी।  

राघव ने चिट्ठी पढ़ी। पहली बार उसकी आँखें भर आईं। उसने चिट्ठी को माथे से लगाया और जेलर से बोला, "साहब, क्या मैं इसे जवाब दे सकता हूँ?"  

"हाँ। पर पहले मुझे बताओ, सच क्या है?"  

राघव चुप रहा। फिर बोला, "साहब, कल सुंदरकांड का पाठ पूरा होगा। उसके बाद बताऊँगा। 7 साल से इस दिन का इंतज़ार कर रहा था।"  

5. सुंदरकांड और खुलासा  

अगली सुबह। जेल के मंदिर में सुंदरकांड। राघव ने पाठ किया। जेलर अविनाश भी बैठे।  

पाठ खत्म हुआ। राघव जेलर के कमरे में आया। "साहब, बैठ जाऊँ?"  

"हाँ राघव। अब बताओ।"  

राघव ने लंबी साँस ली। "साहब, मैं लखनऊ में ड्राइवर था। विजय अग्रवाल के यहाँ। 8 साल काम किया। वो बिल्डर था, पर आदमी नहीं था।"  

"मतलब?"  

"साहब, विजय अग्रवाल की बीवी यानी मिसेज कविता बहुत शरीफ थीं। बेटी अनन्या तब 2 साल की थी। पर विजय शराब पीकर दोनों को मारता था। कई बार मैंने बीच-बचाव किया। नौकरी जाने का डर था, पर चुप नहीं रह पाया।"  

"फिर एक दिन?"  

"5 मार्च 2019। होली का दिन था। विजय नशे में था। कविता मैडम ने तलाक माँगा। विजय ने कहा — 'तलाक दे दूँगा, पर पहले तुझे और तेरी बेटी को जान से मारूँगा। इंश्योरेंस का पैसा मिलेगा।'"  

राघव की आवाज भर्रा गई। "उसने पिस्तौल निकाली। मैडम डरकर कमरे में भागीं। अनन्या पालने में सो रही थी। विजय पालने की तरफ बढ़ा। बोला — 'पहले इसे निपटाता हूँ।'"  

"मैं किचन में था। सब सुन रहा था। मेरे पास कुछ नहीं था। विजय ने ट्रिगर पर उंगली रखी। साहब, उस वक्त मुझे रामायण की वो लाइन याद आई — 'परहित सरिस धर्म नहिं भाई। पर पीड़ा सम नहिं अधमाई।'"  

"दूसरों की भलाई से बड़ा धर्म नहीं। और दूसरों को दुख देने से बड़ा पाप नहीं।"  

"मैं दौड़ा। गेट के पास विजय की लाइसेंसी रिवॉल्वर पड़ी थी। मैंने उठाई। वार्निंग दी — 'साहब, रुक जाओ। बच्ची को मत मारो।' वो हँसा — 'तू ड्राइवर, मुझे रोकेगा?' उसने पालने पर गोली चला दी।"  

राघव चुप हो गया।  

"फिर?" जेलर ने पूछा।  

"फिर मैंने गोली चला दी साहब। एक गोली। सीधे छाती में। विजय वहीं गिर गया।"  

"अनन्या बच गई?"  

"हाँ साहब। गोली पालने के बगल से निकली। मैं दौड़कर अनन्या को उठाया। कविता मैडम बेहोश थीं। मैंने पुलिस को फोन किया। कहा — 'मैंने मारा है। आ जाओ।'"  

6. कोर्ट में चुप्पी क्यों?  

"राघव, तुमने कोर्ट में ये सब क्यों नहीं बताया? सेल्फ डिफेंस था। सजा कम हो जाती।"  

राघव हँसा, फीकी हँसी। "साहब, कविता मैडम की हालत खराब थी। पुलिस ने उनसे पूछा तो वो डर गईं। विजय का परिवार बहुत पावरफुल था। उन्होंने कहा — 'अगर मैं गवाही दूँगी तो ये लोग मेरी बेटी को मार देंगे।'"  

"मैंने मैडम से कहा — 'आप चुप रहो। अनन्या को बड़ा करना है। मैं संभाल लूँगा।' साहब, एक माँ को अपनी बच्ची के लिए झूठ बोलना पड़े, इससे बड़ा पाप नहीं। मैंने वो पाप अपने सिर ले लिया।"  

"पर तुम तो 20 साल के लिए अंदर हो गए।"  

"साहब, बाहर रहकर भी मैं कौन सा आजाद था? हर रात सोचता — काश 2 सेकंड पहले पहुँच जाता, तो गोली ही न चलती। जेल में कम से कम राम जी के पास हूँ।"  

7. जेलर का धर्मसंकट  

अविनाश सन्न रह गए। फाइल में "हत्या" लिखा था। पर असल में ये "रक्षा" थी।  

उन्होंने SP साहब को फोन किया। "सर, केस री-ओपन हो सकता है क्या?"  

"अविनाश, 7 साल हो गए। कोर्ट का फैसला है। अब क्या कर सकते हैं?"  

"सर, नई गवाही है। बच्ची की चिट्ठी है।"  

SP चुप। "देखता हूँ। पर उम्मीद मत रखना।"  

उधर राघव ने अनन्या को जवाब लिखा।  

*बेटी अनन्या,  

तुम्हारे पापा को मैंने मारा, ये सच है। पर क्यों मारा, ये भी सच है।  

उस दिन होली थी। रंग की जगह खून बह जाता अगर मैं न रोकता।  

तुम पालने में थी। तुम्हारे पापा नशे में थे। वो तुम्हें मारने वाले थे।  

मैंने राम जी से पूछा — क्या करूँ? उन्होंने कहा — 'बच्ची को बचा।'  

बस मैंने वही किया।  

मुझे सजा मिली। पर तुम्हें जिंदगी मिली। मुझे कोई पछतावा नहीं।  

तुम अपनी मम्मा का ख्याल रखना। खूब पढ़ना। और हाँ, रामायण जरूर पढ़ना। उसमें हर सवाल का जवाब है।  

तुम्हारा,  

राघव अंकल*  

8. कविता का आना  

चिट्ठी के 15 दिन बाद सीतापुर जेल के गेट पर एक औरत आई। साड़ी, आँखों में चश्मा, साथ में 9 साल की बच्ची।  

गेट पर एंट्री — "कविता अग्रवाल, अनन्या अग्रवाल। कैदी 2911 से मुलाकात।"  

जेलर अविनाश ने स्पेशल इजाजत दी। मुलाकात वाले कमरे में राघव आया। सामने कविता और अनन्या।  

कविता फूट पड़ी। "राघव भैया... मुझे माफ कर दो। मैंने कायरता की। आपकी जिंदगी खराब कर दी।"  

राघव ने हाथ जोड़े। "मैडम, आप माँ हो। माँ से बड़ा कोई धर्म नहीं। आपने सही किया।"  

अनन्या दौड़कर राघव के पैरों में गिर गई। "अंकल, थैंक यू। आपने मुझे बचाया।"  

राघव ने उसे उठाया, सिर पर हाथ फेरा। "बेटा, थैंक यू मत कहो। तुम खुश रहो, यही मेरी सजा काट देगा।"  

कविता ने एक फाइल निकाली। "साहब, ये मेरा बयान है। 7 साल बाद ही सही, पर अब सच बोलूँगी। कोर्ट में दूँगी। राघव भैया बेकसूर हैं।"  

9. केस री-ओपन  

कविता के बयान से हड़कंप मच गया। मीडिया में खबर — "ड्राइवर ने मालिक को क्यों मारा? 7 साल बाद खुला राज।"  

हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया। री-ट्रायल का आदेश। अनन्या भी कोर्ट में बोली, "अंकल ने मुझे बचाया। मैंने देखा था।"  

पुराने नौकरों ने भी गवाही दी — "साहब बीवी-बच्ची को मारते थे।"  

बैलिस्टिक रिपोर्ट से साबित हुआ कि पहली गोली विजय ने चलाई थी, पालने की तरफ।  

6 महीने केस चला। 2026 की जनवरी। जज ने फैसला सुनाया   

"राघव शुक्ला ने अपराध नहीं, कर्तव्य किया। सेल्फ डिफेंस और नाबालिग की रक्षा। कोर्ट इन्हें बाइज्जत बरी करती है। 7 साल की सजा के लिए राज्य सरकार मुआवजा दे।"  

कोर्ट में तालियाँ बज गईं। राघव चुप था। उसकी आँखों में आँसू थे।  

10. आजादी और रामायण  

26 जनवरी 2026। सीतापुर जेल का गेट। राघव बाहर आया। हाथ में वही फटी रामायण। सामने अनन्या, कविता, जेलर अविनाश, और पूरी बैरक नंबर 7।  

छोटू दौड़कर आया। "पंडित जी, अब कौन रामायण पढ़ाएगा?"  

राघव हँसा। "तू पढ़ाएगा। मैंने तुझे सिखाया न?"  

जेलर अविनाश ने सैल्यूट किया। "राघव, माफ करना। मैंने तुम्हें कैदी समझा। तुम तो असली जेलर हो — जिसने सबको बुराई की जेल से आजाद किया।"  

राघव ने पैर छुए। "साहब, आपने मुझे बेटी की चिट्ठी दी। वरना मैं सच लेकर मर जाता।"  

11. नया जीवन  

राघव अब लखनऊ में कविता के घर के पास ही रहता है। अनन्या उसे "बड़े पापा" बुलाती है।  

उसने "रामायण सेवा ट्रस्ट" खोला है। जेल में बंद कैदियों को रामायण बाँटता है। कानून की क्लास देता है — "सेल्फ डिफेंस क्या है, चुप रहने से क्या नुकसान है।"  

हर मंगलवार सीतापुर जेल जाता है। बैरक नंबर 7 में सुंदरकांड होता है। अब पाठ छोटू करता है।  

कविता ने कहा, "भैया, आप हमारे साथ रह लो।"  

राघव मना कर देता। "नहीं मैडम। मैं पास रहूँगा, पर साथ नहीं। दुनिया को लगना चाहिए कि आपने एहसान चुकाया। पर मैंने तो धर्म निभाया था, एहसान नहीं।"  

12. जेलर की डायरी  

अविनाश सिंह अब DIG हैं। उनकी टेबल पर एक रामायण रखी रहती है। उस पर राघव ने लिखा है —  

"साहब, वर्दी का रंग खाकी है, पर काम राम जी वाला है। सही को सही कहने से मत डरना।"  

अविनाश नए जेलरों को ट्रेनिंग देते हैं। पहला लेसन — "हर कैदी अपराधी नहीं होता। कभी-कभी वो राम होता है, जिसे सीता बचाने के लिए रावण मारना पड़ा। फर्क बस इतना है कि त्रेता में राम को राज मिला, कलयुग में जेल।"  

आखिरी चौपाई  

राघव अब भी रोज रामायण पढ़ता है। अनन्या पास बैठकर सुनती है। जब वो चौपाई आती है — "परहित सरिस धर्म नहिं भाई", अनन्या पूछती है, "बड़े पापा, इसका मतलब क्या है?"  

राघव उसकी सिर पर हाथ फेरता है। "बेटा, मतलब ये कि अगर किसी की जान बचाने के लिए तुम्हें सजा भी मिले, तो वो सजा नहीं, पूजा है।"  

अनन्या मुस्कुराती है। खिड़की से सूरज की रोशनी राघव की रामायण पर पड़ती है। 7 साल जेल की दीवारों ने जो सोना छिपा रखा था, वो अब दुनिया के सामने चमक रहा था।  

क्योंकि अपराध वो नहीं जो कानून की किताब में लिखा हो। अपराध वो है जो इंसानियत की किताब के खिलाफ हो। और राघव ने इंसानियत की किताब कभी बंद नहीं की।  


रविवार, 10 मई 2026

ॐ यज्ञोपवीत धारण एवं विसर्जन: मंत्र, विधि आ महत्व

 ॐ यज्ञोपवीत धारण एवं विसर्जन: मंत्र, विधि आ महत्व 


सनातन धर्म में १६ संस्कारक वर्णन भेटैत अछि, जकरा में 'उपनयन' यानी 'यज्ञोपवीत संस्कार' कए अत्यंत पवित्र आ अनिवार्य मानल गेल अछि। यज्ञोपवीत केवल सूतक ताग मात्र नहि अछि, बल्कि ई ज्ञान, कर्म, आ उपासना कए प्रतीक थिक। शास्त्रक अनुसार, वैदिक रीतिक संग यज्ञोपवीत धारण कएला सँ मनुष्य कए नव जन्म (द्विजत्व) भेटैत अछि।

आजुक एही आलेख में हम सब जानब वाजसनेयी आ छन्दोग पद्धति कए अनुसार यज्ञोपवीत धारण करबाक मंत्र, ओकर विधि, आ प्राचीन जनेऊ विसर्जन मंत्र कए बारे में।

 यज्ञोपवीत धारण मंत्र

जनेऊ धारण करबाक काल अपन-अपन शाखा (वाजसनेयी वा छन्दोग) कए अनुसार मंत्रक जप करबाक विधान अछि।

 वाजसनेयी पद्धति कए यज्ञोपवीत मंत्र

 ॐ यज्ञोपवीतं परमं पवित्रं प्रजापतेर्यत्सहजं पुरस्तात्।

आयुष्यमग्र्यं प्रतिमुञ्च शुभ्रं यज्ञोपवीतं बलमस्तु तेजः।।


 छन्दोग पद्धति कए यज्ञोपवीत मंत्र

ॐ यज्ञोपवीतमसि यज्ञस्य त्वोपवीतेनोपनह्यामि।

 यज्ञोपवीत धारणक शास्त्रीय विधि

जनेऊ बदलबाक समय वा धारण करबाक काल सर्वप्रथम अहि मंत्र सँ संकल्प कs विनियोग कएल जाइत अछि:

 विनियोगः

प्रजापतिऋषिर्गायत्रीछन्दो विश्वदेवा देवता यज्ञोपवीत परिधाने विनियोगः।

मंत्र: ॐ यज्ञोपवीतमसि यज्ञस्यत्वापवीते नोपनह्यामि।।

अभिमंत्रित करबाक विशेष विधि:

ऊपरोक्त मंत्र सँ अभिमंत्रित कएलाक पश्चात, हाथ में जल लs कs यज्ञोपवीत कए दुनू हाथक मध्य (बीच में) राखि, गायत्री आ सावित्री मंत्र सँ मंत्रित कए लेबाक चाही।

गायत्री मंत्र:

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ॐ

सावित्री मंत्र:

ॐ भूः ॐ भुवः ॐ स्वः ॐ महः, ॐ जनः ॐ तपः ॐ सत्यम्। ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ॐ आपो ज्योतिरसोऽमृतं ब्रह्म भूर्भुवः स्वरोम्।

नियम: एही दुनू मंत्र कए तीन-तीन बेर पढ़ि कs शुद्ध मन सँ जनेऊ धारण करी।

. प्राचीन यज्ञोपवीत विसर्जन मंत्र

जखन जनेऊ पुरान (जीर्ण) भऽ जाए, टूटि जाए वा सूतक-पातक कए बाद ओकरा बदलबाक हो, तखन पुरना जनेऊ कए उतारबाक काल एही मंत्रक जप कएल जाइत अछि:

यज्ञोपवीतं यदि जीर्णवन्तं विद्यादिवेद्यं परब्रह्मतत्त्वम्।

आयुष्यमग्र्यं प्रतिमुञ्च शुभ्रं यज्ञोपवीतं विसृजन्तु तेजः।।

चारू युग में यज्ञोपवीत कए स्वरूप

शास्त्रक अनुसार, समय (युग) कए संग यज्ञोपवीत कए धातु आ स्वरूप में परिवर्तन भेल अछि, जकर वर्णन एही श्लोक में अछि:

कृते पद्ममयं सूत्रं त्रेतायां कनकोद्भवम्।

द्वापरे रजतं प्रोक्तं कलौ कार्प्पाससम्भवम्।।

सतयुग (कृतयुग): कमल के डंटी कए सूत सँ बनल यज्ञोपवीत।

त्रेतायुग: सोनाक (कनकोद्भवम्) यज्ञोपवीत।

द्वापरयुग: चांदीक (रजतं) यज्ञोपवीत।

कलियुग: कपासीक सूत (कार्प्पाससम्भवम्) सँ बनल यज्ञोपवीत।

निष्कर्ष

यज्ञोपवीत धारण कएनाइ केवल धार्मिक कर्मकांड नहि, बल्कि ई स्वास्थ्य, सदाचार आ अनुशासित जीवनक आधार थिक। मिथिलांचल आ सनातन संस्कृतिक ई अनमोल धरोहर हमरा सब कए संस्कारवान बनबैत अछि। आशा अछि जे ई मंत्र आ विधि अहाँक दैनिक पूजा-पाठ आ संस्कारक संवर्द्धन में सहायक सिद्ध हैत।

जय मिथिला, 

अहि आलेख में शास्त्रीय आ पारंपरिक मान्यता आदि कए संकलन कएल गेल अछि। जँ अहाँ लोकनि कए कतहु कोनो त्रुटि बुझाय वा अहि विषय पर कोनो तर्कसंगत सुझाव हो, तँ कमेंट बॉक्स में अपन विचार अवश्य साझा करी ताकि एकरा आओर समृद्ध कएल जा सके।"

मंगलवार, 28 अप्रैल 2026

बिहारी एकता ज़िंदाबाद, JusticeForPandavKumar

 


Justice for Pandav Kumar 🙏

#JusticeForPandavKumar

देश के किसी भी कोने में हादसा हो, सबसे पहले जान गंवाने वाला अक्सर मेहनतकश बिहार का बेटा होता है। लेकिन दिल्ली में हुई हालिया घटना कोई साधारण अपराध नहीं—यह एक जघन्य हेट क्राइम है।

पांडव कुमार की हत्या सिर्फ इसलिए कर दी गई क्योंकि वे अपनी मातृभाषा में बात कर रहे थे।

यह सिर्फ एक व्यक्ति की हत्या नहीं,

👉 हमारी पहचान पर हमला है

👉 हमारी भाषा पर हमला है

👉 हमारे सम्मान और अधिकारों पर हमला है

अब समय आ गया है कि बिहार का हर व्यक्ति एकजुट हो!

✊ अपनी आवाज उठाइए

✊ न्याय की मांग कीजिए

✊ ऐसी घटनाओं के खिलाफ खुलकर खड़े होइए

अगर आज हम चुप रहे, तो कल किसी और पांडव कुमार की बारी होगी।

बिहारियों, जागो! अपनी पहचान और सम्मान की रक्षा के लिए एकजुट हो जाओ।

🙏 न्याय के लिए आवाज बनो, डर के लिए नहीं।

#JusticeForPandavKumar

#StopHateCrime

#BihariEkta

#DelhiPolice

#DelhiGovernment