dahej mukt mithila

(एकमात्र संकल्‍प ध्‍यान मे-मिथिला राज्‍य हो संविधान मे) अप्पन गाम घरक ढंग ,अप्पन रहन - सहन के संग,अप्पन गाम-अप्पन बात में अपनेक सब के स्वागत अछि!अपन गाम -अपन घरअप्पन ज्ञान आ अप्पन संस्कारक सँग किछु कहबाक एकटा छोटछिन प्रयास अछि! हरेक मिथिला वाशी ईहा कहैत अछि... छी मैथिल मिथिला करे शंतान, जत्य रही ओ छी मिथिले धाम, याद रखु बस अप्पन गाम - अप्पन बात ,अप्पन मान " जय मैथिल जय मिथिला धाम" "स्वर्ग सं सुन्दर अपन गाम" E-mail: apangaamghar@gmail.com,madankumarthakur@gmail.com mo-9312460150

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शनिवार, 7 मार्च 2026

मिथिलावासी जागू, नहिं त देर भ' जायत। सम्पूर्ण मिथिला राज्य लेल संघर्ष के बिगुल बजाऊ।

 बिहार संग साजिश 


मिथिला के फेर दू फाङ करबाक केन्द्रक कुचक्र 

बिहार सँ मिथिला आ' मैथिली विरोधी नीतीश कुमार राज्य सभा जा रहल छथि। मुदा जावत बीजेपी आ' जदयू के तलाक नहिं हएत तावत मिथिला राज्य बननाय सपना रहत।

एम्हर केन्द्र सरकार बिहार आ' बंगाल के राज्यपाल एहेन शख्स के बना रहल अछि जकरा राजनीति सँ कम मतलब।  एडमिनिस्ट्रेशन आ' खुफिया विभागक गठजोङ मिथिला सँ अलग " सीमांचल " राज्य बनबय चाहैत अछि, जे केन्द्र शासित राज्य रहत।एहि राज्य मे बिहार आ' बंगाल सँ किछु किछु हिस्सा काटि कय बनायल जाइत। मतलब बिहार के 3 टुकड़ी मे बाँटल जाइत, सीमांचल, मिथिला आ' मगध।

सीमांचल सबसँ पहिने बनत । सीमांचल आ' मिथिला क्षेत्र के घोर विरोध आ' संघर्ष के कारण टूटल-फूटल मिथिला राज्य बनत। बचल हिस्सा मगध बनि के रहि जायत।

         बीजेपी आ' आर एस एस चिकेन नेक कोरिडोर के डर देखा ई कुकृत्य करय जा रहल अछि।

हमरा सम्पूर्ण मिथिला चाही, विभाजित नहिं।

       ई भनक त हमरा 2022-23 मे लागि गेल रहय जखन गृहमंत्री अमित शाह  एहि इलाका आबि सभा मे सीमांचल शब्द के महिमामंडन केने रहथि। यएह कारण छल जे अखिल भारतीय मिथिला राज्य  संघर्ष समिति के संकल्प मिथिला राज्य पदयात्रा-2023 जे दरभंगा सँ शुरू होय वाला छल ओकरा हम ( एहि पदयात्राक संयोजक ) आ' प्रो० अमरेन्द्र झा सहमति बना किशनगंज के छोट सनक गाम " करूआमणि " सँ शुरू केने रही।दरभंगा सँ शुरू होयवाला पदयात्रा नेपाल, भारत आ' बंगलादेश सँ सटल गाम करूआमणि सँ शुरू भेल। हमरा आ' हमरा पदयात्री दल के उत्साहवर्धन लेल डा० बैद्यनाथ चौधरी  बैजू, मित्र प्रो० उदय शंकर मिश्र, पं० विनोद झा दरभंगा सँ हमरा सब संग करूआमणि( जिला-किशनगंज ) आयल रहथि।एतय रात्रि विश्राम कय एहि गाम के सैकङों स्त्री-पुरुष आ' युवा संग पदयात्राक साक्षी रहथि। एहि पदयात्राक दौरान एकोटा मैथिल एहेन नहिं भेटला जे मिथिला राज्य विरोधी होइथ, अपितु हुनका ह्रदय मे दरभंगा-मधुबनी के मैथिल  सँ बेसी मिथिला आ' मैथिली बसल अछि।

      मिथिलावासी जागू, नहिं त देर भ' जायत। सम्पूर्ण मिथिला राज्य लेल संघर्ष के बिगुल बजाऊ।

"एकहिं संकल्प अछि ध्यान मे,

मिथिला राज्य हो संविधान  मे।".                                                                                                                     @Shishir Kumar Jha 

शुक्रवार, 27 फ़रवरी 2026

यज्ञोपवीत संस्कार के प्रमुख बिंदु:

 


 यज्ञोपवीत (जनेऊ) धारण करने का मुख्य मंत्र "ॐ यज्ञोपवीतं परमं पवित्रं..." है। यह मंत्र शरीर को पवित्रता, बल और तेज प्रदान करने के लिए जनेऊ धारण करते समय पढ़ा जाता है। यह एक पवित्र सूत्र है, जो ब्रह्मा, विष्णु और महेश के प्रतीक के रूप में धारण किया जाता है। 

यज्ञोपवीत मंत्र:

ॐ यज्ञोपवीतं परमं पवित्रं प्रजापतेर्यत्सहजं पुरस्तात्।

आयुष्यमग्र्यं प्रतिमुञ्च शुभ्रं यज्ञोपवीतं बलमस्तु तेजः॥

हिंदी अर्थ:

यज्ञोपवीत अत्यंत पवित्र है, जिसे प्रजापति (ईश्वर) ने स्वाभाविक रूप से सबसे पहले स्थापित किया था। यह आयु को बढ़ाने वाला, अग्रगण्य (श्रेष्ठ), शुभ्र (स्वच्छ) और पवित्र करने वाला है। हे यज्ञोपवीत, मुझमें बल (शक्ति) और तेज (ऊर्जा) प्रदान करो। 

धारण करने की प्रक्रिया (संक्षेप में):

बाय कंधे के ऊपर से और दाएँ हाथ के नीचे से जनेऊ धारण किया जाता है।

इस प्रक्रिया के दौरान ऊपर दिए गए मंत्र का उच्चारण किया जाता है। 

पुरानी जनेऊ उतारने का मंत्र:

ॐ यज्ञोपवीतं पुराणं जरजरं कश्यपोद्भवम्।

त्यजामि ब्रह्मनिर्मितं नित्यं सात्त्वगुणात्मकम्॥

अर्थ: मैं इस पुराने और जर्जर यज्ञोपवीत को त्याग करता हूँ। 

यज्ञोपवीत (जनेऊ) संस्कार, जिसे उपनयन संस्कार भी कहते हैं, हिंदू धर्म के 16 संस्कारों में से एक अत्यंत महत्वपूर्ण संस्कार है, जो बालक को ज्ञान, अनुशासन और द्विज (दूसरा जन्म) के रूप में प्रतिष्ठित करता है। यह अनुष्ठान ब्राह्मण (8 वर्ष), क्षत्रिय (11 वर्ष) और वैश्य (12 वर्ष) के लिए होता है, जिसमें गुरु गायत्री मंत्र की दीक्षा देते हैं। 

यज्ञोपवीत संस्कार के प्रमुख बिंदु:

अर्थ और महत्व: 'उपनयन' का अर्थ है 'गुरु या ज्ञान के समीप ले जाना'। यह पवित्र धागा धारण करने के बाद ही बालक को वेदों और विद्या के अध्ययन का अधिकार मिलता था, जिससे उसे 'द्विज' यानी दूसरा जन्म मिला माना जाता है।

तीन सूत्र: जनेऊ में तीन धागे होते हैं, जो ऋषि ऋण, देव ऋण और पितृ ऋण के प्रतीक हैं, जिन्हें धारण करके मनुष्य अपने कर्तव्यों का स्मरण रखता है।

विधि: यह संस्कार एक विद्वान पंडित द्वारा किया जाता है। इसमें मुंडन, गणेश पूजन, हवन, और गायत्री मंत्र का उपदेश मुख्य हैं। जनेऊ को बाएं कंधे के ऊपर और दाईं बांह के नीचे धारण किया जाता है।

उद्देश्य: इस संस्कार के बाद बालक को ब्रह्मचर्य का पालन करना होता था और यह नैतिक जीवन, विद्या अध्ययन व आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक है।

परंपरा: यह प्राचीन काल से चली आ रही एक महत्त्वपूर्ण परंपरा है, जो अब सामान्यतः विवाह के पूर्व या कम उम्र में की जाती है। 

यह संस्कार व्यक्ति को अनुशासन, जिम्मेदारी और सात्विक जीवन जीने के लिए प्रेरित करता है, जो सनातन संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है।

गुरुवार, 26 फ़रवरी 2026

शादियों में एक नई रस्म का जन्म हुआ है हल्दी रस्म।

     


 विवाह में हल्दी रस्म या फिजूल खर्ची अमीरों के चक्कर में बेचारा गरीब पीs रहा है  आज कल ग्रामीण परिवेश में होने वाली शादियों में एक नई रस्म का जन्म हुआ है हल्दी रस्म। हल्दी रस्म के दौरान हजारों रूपये खर्च कर के विशेष डेकोरेशन किया जाता है, उस दिन दूल्हा या दुल्हन विशेष पीत (पीले) वस्त्र धारण करते हैं कुछ पूर्व इस हल्दी रस्म का प्रचलन  के ग्रामीण क्षेत्रों में कहीं पर भी देखने को नहीं मिलता था, लेकिन पिछले दो-तीन साल से इसका प्रचलन बहुत तेजी से ग्रामीण क्षेत्र में बढ़ा है। पहले हल्दी की रस्म के पीछे कोई दिखावा नहीं होता था, बल्कि तार्किकता होती थी। पहले ग्रामीण क्षेत्रों में आज की तरह साबुन व शैम्पू नहीं थे और ना ही ब्यूटी पार्लर था।  इसलिए हल्दी के उबटन से घिसघिस कर दूल्हे-दुल्हन के चेहरे व शरीर से मृt चमड़ी और मेल को हटाने, चेहरे को मुलायम और चमकदार बनाने के लिए हल्दी, चंदन, आटा, दूध से तैयार उबटन का प्रयोग करते थे। ताकि दूल्हा-दुल्हन सुंदर लगे। इस काम की जिम्मेदारी घर-परिवार की महिलाओं की थी। लेकिन आजकल की हल्दी रस्म मोडिफाइड, दिखावटी और मंहगी हो गई है। जिसमें हजारों रूपये खर्च कर डेकोरेशन किया जाता है। महंगे पीले वस्त्र पहने जाते है। दूल्हा दुल्हन के घर जाता है और पूरे वातावरण, कार्यक्रम को पीताम्बरी बनाने के भरसक प्रयास किये जाते हैं। यह पीला ड्रामा घर के मुखिया के माथे पर तनाव की लकीरें खींचता है जिससे चिंतामय पसीना टपकता है।

    पुराने समय में जहां कच्ची छतों के नीचे पक्के इरादों के साथ दूल्हा-दुल्हन बिना किसी दिखावे के फेरे लेकर अपना जीवन आनंद के साथ शुरू करते थे, लेकिन आज पक्के इरादे कम और दिखावा और बनावटीपन ज्यादा होने लगा है। 

       आजकल देखने में आ रहा है कि ग्रामीण क्षेत्र में आर्थिक रूप से असक्षम परिवार के लड़के भी इस शहरी बनावटीपन में शामिल होकर परिवार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ा रहे है। क्योंकि उन्हें अपने छुट भईए नेताओं, वन साइड हेयर कटिंग वाले या लम्बे बालों वाले सिगरेट का धुंआ उड़ाते दोस्तों को अपना ठरका दिखाना होता है। इंस्टाग्राम, फेसबुक आदि के लिए रील बनानी है। बेटे के रील बनाने के चक्कर में बाप की कर्ज़ उतरने में ही रेल बन जाती है।

        ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे घरों में फिजूल खर्ची में पैसा पानी की तरह बहाया जाता है जिनके मां-बाप ने हाड़-तोड़ मेहनत और पसीने की कमाई से पाई-पाई जोड़ कर मकान का ढांचा खड़ा किया लेकिन ये नवयौवन लड़के-लड़कियां बिना समझे अपने मां-बाप की हैसियत से विपरीत जाकर अनावश्यक खर्चा करते हैं। 

        जिन परिवारों की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं हो उन परिवारों के बच्चों को मां-बाप से जिद्द करके इस तरह की फिजूल खर्ची नहीं करवानी चाहिए। आजकल काफी जगह यह भी देखने को मिलता है कि बच्चे (जिनकी शादी है) मां-बाप से कहते है आप कुछ नहीं जानते, आपको समझ नहीं है, आपकी सोच वही पुरानी अनपढ़ों वाली रहेगी, यह कहते हुए अपने माता-पिता को गंवारू, पिछड़ा, थे तो बौझ्अ बरगा हो कहते हैं। मैं जब भी यह सुनता हूं सोचने को विवश हो जाता हूं, पांव अस्थिर हो जाते हैं। बड़ी चिंता होती हैं कि आज युवा किस दिशा में जा रहे हैं।

      आज किसी को चींटी के पैरों के घूंघरू की आवाज सुनने की फुर्सत नहीं है क्योंकि सब-के-सब फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर पर खुद को बढ़ा-चढ़ाकर कर परोसते हैं, दिखावटीपन की चासनी में आकंठ डूबे हैं 

इस तरह की फिजूलखर्ची वाली रस्म को रोकने का प्रयास करें....!!!

मंगलवार, 27 जनवरी 2026

सामान्य वर्ग (General Category) कौन हैं ?

 *कौन है सामान्यवर्ग?* 

आओ बताता - हूँ ... .     


      प्रधानमंत्री जी या मुख्यमंत्री  जी ध्यान से सुनिएगा...

सामान्य वर्ग (General Category) कौन हैं ?

*सामान्य वर्ग ( भूमिहार, लाला(कायस्थ) जैन , ब्राह्मण , राजपूत , बनिया )*

जिस व्यक्ति पर एट्रोसिटी_एक्ट 89 के तहत बिना इन्क्वारी के भी कार्यवाई की जा सकती है, वो सामान्य वर्ग है‼️

जिसको जाति सूचक शब्द इस्तेमाल करके बेखौफ गाली दी जा सकती है, वो सामान्य वर्ग है‼️

देश में आरक्षित 131 लोकसभा सीटो और 1225 विधानसभा सीटो पर चुनाव नही लड़ सकता है, लेकिन वोट दे सकता है, वो सामान्य वर्ग है‼️

जिसके हित के लिए आज तक कोई आयोग नही बना, वो सामान्य वर्ग है‼️

जिसके लिए कोई सरकारी योजना न बनी हो,

वो  सामान्य वर्ग है‼️

जिसके साथ देश का संविधान भेदभाव करता है, वो सामान्य वर्ग है‼️

मात्र जिसको सजा देने के लिए NCSC और NCST का गठन किया गया वो सामान्य वर्ग है‼️

मात्र जिसे सजा देने के लिए हर जिले में विशेष SC-ST न्यायालय खोले गए हैं, वो अभागा सामान्य वर्ग है‼️

जो स्कूल में अन्य वर्गों के मुकाबले चार गुनी फीस दे कर अपने बच्चों को पढाता है, वो बेसहारा सामान्य वर्ग है‼️

नौकरी, प्रमोशन, घर allotment आदि में जिसके साथ कानूनन भेदभाव वैध है वो बेचारा सामान्य वर्ग है‼️

सरकारों व सविधान द्वारा सबसे ज्यादा प्रताड़ित किया जाने वाला वो सामान्य वर्ग है‼️

सबसे ज्यादा वोट देकर भी खुद को लुटापिटा ठगा सा महसूस करने वाला वो सामान्य वर्ग है‼️

सभाओं में फर्श तक बिछा कर एक अच्छी सरकार की चाह में आपको सत्ता सौंपने वाला वो सामान्य वर्ग है ‼️

देश हित मे आपका तन मन धन से साथ देने वाला वो सामान्य वर्ग है‼️

इतने भेदभाव के बावजूद भी,

धर्म की जय हो,अधर्म का नाश हो प्राणियों में सद्भावना हो,विश्व का कल्याण हो की भावना जो रखता है,वो सामान्य वर्ग है‼️

सबका साथ सबका विकास में हमारी स्थिती क्या है ? विचार अवश्य करें‼️

समस्त सामान्य वर्ग परिवारों की तरफ से भारत सरकार को समर्पित ...

अगर आपको उपरोक्त बातें सही लगी हो तो कम से कम 5 सामान्य वर्ग के लोगों को शेयर करें । 

ये बात माननीय प्रधानमंत्री जी ,राष्ट्रपति जी व मुख्यमंत्री जी तक अवश्य पहुँचनी चाहिए....

इस पोस्ट को लिखने व बनाने मे बहुत ही ज्यादा मेहनत (परिश्रम) लगा है, शेयर अवश्य करें। 🚩🙏🙏🙏

Jay Siya Ram 

शनिवार, 24 जनवरी 2026

जतिन दा


शरीर से मांस का एक-एक कतरा गल चुका था। पसलियां बाहर आ गई थीं। हिलने-डुलने तक की ताकत नहीं बची थी।

जब अंग्रेजों ने देखा कि यह 25 साल का लड़का टूट नहीं रहा, तो उन्होंने जबरदस्ती नाक में नली ठूंसकर दूध पिलाने की कोशिश की। वह नली खाने की नली की जगह फेफड़ों में चली गई।

दूध फेफड़ों में भर गया। वो तड़पते रहे, खून की उल्टियां करते रहे, लेकिन अनशन नहीं तोड़ा।

13 सितंबर 1929 को लाहौर जेल में एक क्रांतिकारी ने अपने प्राण त्याग दिए। 63 दिन... जी हाँ, 63 दिन तक बिना अन्न का एक दाना खाए।

इतिहास के पन्नों में अक्सर हम भगत सिंह की फांसी की बात करते हैं, लेकिन उस साथी को भूल जाते हैं जिसने भगत सिंह की बाहों में दम तोड़ा था।

आज हम बात कर रहे हैं *'यतींद्र नाथ दास' की, जिन्हें दुनिय जतिन दा*' के नाम से जानती थी।

पेशे से वो बम बनाने में माहिर थे, लेकिन उनका हथियार बना उनका अपना शरीर।

वो चाहते तो माफी मांग सकते थे, खाना खा सकते थे। लेकिन मांग सिर्फ एक थी - "भारतीय राजनीतिक कैदियों के साथ जानवरों जैसा सलूक बंद करो।"

अंग्रेजों को लगा कि भूख इसे तोड़ देगी। लेकिन उन्हें नहीं पता था कि यह शरीर मिट्टी का नहीं, फौलाद का बना है।

जब *जतिन दा* की हालत बिगड़ने लगी, तो अंग्रेजों ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं। जेल के डॉक्टर और सिपाहियों ने उन्हें दबोच लिया। नाक से नली डाली। दर्द से वो चीखते रहे, लेकिन उनका संकल्प नहीं डिगा।

उनकी शहादत की खबर जब बाहर आई, तो पूरा देश रो पड़ा था। कहा जाता है कि जब उनका शव लाहौर से कलकत्ता ले जाया जा रहा था, तो हर स्टेशन पर हजारों लोग फूल लेकर खड़े थे। कलकत्ता में उनकी अंतिम यात्रा में 6 लाख से ज्यादा लोग शामिल हुए।

सुभाष चंद्र बोस ने खुद उनके पार्थिव शरीर को कंधा दिया था।

लेकिन आज? आज कितने लोग उस 63 दिन की तपस्या को याद करते हैं?

मरते वक्त जतिन दा ने कहा था, "मैं कोई साधु नहीं हूँ, मैं बस एक साधारण इंसान हूँ जो अपने देश की गरिमा के लिए मरना चाहता है।"

आजादी चरखे से आई या बिना खड्ग-ढाल के, यह बहस का विषय हो सकता है। लेकिन यह सच है कि आजादी की नींव में जतिन दा जैसे नौजवानों की गल चुकी हड्डियां गड़ी हैं।

हमें यह आजादी खैरात में नहीं मिली, इसके लिए किसी ने अपनी जवानी के 63 दिन भूखे रहकर कुर्बान किए हैं।

हर भारतीय का कर्तव्य है कि वो जाने कि जिस हवा में वो सांस ले रहा है, उसकी कीमत क्या थी।

इस जानकारी को साझा करें ताकि आने वाली पीढ़ियां जान सकें कि असली 'हीरो' कौन थे।

यह पोस्ट केवल उन भूले-बिसरे नायकों को नमन करने के लिए है, Vande Mataram, Bharat Mata ki Jai