dahej mukt mithila

(एकमात्र संकल्‍प ध्‍यान मे-मिथिला राज्‍य हो संविधान मे) अप्पन गाम घरक ढंग ,अप्पन रहन - सहन के संग,अप्पन गाम-अप्पन बात में अपनेक सब के स्वागत अछि!अपन गाम -अपन घरअप्पन ज्ञान आ अप्पन संस्कारक सँग किछु कहबाक एकटा छोटछिन प्रयास अछि! हरेक मिथिला वाशी ईहा कहैत अछि... छी मैथिल मिथिला करे शंतान, जत्य रही ओ छी मिथिले धाम, याद रखु बस अप्पन गाम - अप्पन बात ,अप्पन मान " जय मैथिल जय मिथिला धाम" "स्वर्ग सं सुन्दर अपन गाम" E-mail: apangaamghar@gmail.com,madankumarthakur@gmail.com mo-9312460150

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बुधवार, 5 फ़रवरी 2020

छौड़ी छलक छुरी छल ।। रचनाकार - रेवती रमण झा "रमण"


   छटपटाइत छातीक  छिहुलैत
   छोटछीन छौड़ीक छवि
   छिरिआयल छाताक छाँहे छल
   छानविन छनैत छुब्ध छी
   छिटकैत छल , छल छुपकल
   छिटने छल छाउर
   छन्नेक छवि छटा छटायल
   छौड़ी छलक छुरी छल ।।

       रचनाकार
रेवती रमण झा "रमण"

मंगलवार, 4 फ़रवरी 2020

शव्दानुप्रास अलंकार ।। "चमचाक चालि" रचनाकार - रेवती रमण झा "रमण"


                                                              !! चमचाक चालि !!
                                                                     

चतरल   चहुँ   चमचाक  चाइल
चटपट चक्षुक चमत्कारे चिन्हैत
चाहक  चुसकीए   चुसि - चुसि
चिल्हक      चोंखगर       चोंचें
चियारैत     चमड़ी    चिबाबैत
चंडाल        चोभि    -    चोभि
चमडीक    चुम्बकीय    चटक
चानक     चादरि    चिन्हाबैत
चमकैत     चपलाक    चमके
चुपचाप         चित           के
चहटगर    चटकार    चटाबैत
चितासनक   चादरि   चढ़बैत
चटैत         चतुर       चमचा
 चरण  चाँपि   चुट्टीक   चालि 
चतरल  चहुँ चमचाक चालि

रचनाकार
रेवती रमण झा "रमण"

बुधवार, 29 जनवरी 2020

!!बजाकS बीणा हे शारदे !! गीतकार - निशान्त झा "रमण"


   !! बजाकS बीणा हे शारदे !!




 
 करू इजोर अइ दास के जिनगी
 बजाकs  बीणा  हे  शारदे ।
 काटैत अहुरिया बयस बीत गेल
 आबो सुने हमर पुकार गे ।।
                               करू इजोर अइ ......
 तोरे महिमा ऋषी  मुनी गाबैत
 भेल अलंकृत वेदक सार गे ।
 सेवलउ सदिखन द्वार तोहर माँ
 हमरा ने दोसर कियो आर गे ।
                                 करू इजोर अइ ......
 जरबियो एकबेर ज्ञानक बाती
 माँ चहुंदिश भेल अन्हार गे ।
 बेटा फसल अइ बीच भवसागर
 सम्हार हमर आब पतवार गे ।।
                                  करू इजोर अइ ......

 गीतकार -
 निशान्त झा "रमण"

मंगलवार, 21 जनवरी 2020

हेरबरी वियाह कनपटी सिंदूर ।। रचना - कविता झा



    Date : १९,०१,२०२०
( हेरबरी वियाह कनपटी सिंदूर)
स्नेही एक शिक्षित आ
गुणी महिला छलाथी एक दिन हुनकर पुत्र एक सुंदर आ किमती जुता अनलखिन आ कहला
मां आहां लेल अनालाहू, जार छैक। मां पुछलखिन कतेके अछी बेटा बजलाह ५०००
अरे एते क महग जुता के हमरा कोन प्रयोजन
अच्छी। बेस, एक दिन हुनका अपना भाई के
बर्थडे में जायिके छल सोचलिह आई नीक दिन
अच्छी नबके जुता पहिर लैत छी। ओ पहीर ओढ़ी
भाई घर पहुंच लिह।दिन भरी खूब रमन_चमन भेल सांझ में दोसराक संगे बिदा भेलिह हरबर में
दोसर जुता जे सामने भेटलनी बिना देखने पाहिर
लेली। जखन रास्ता में रहथी त हूनका बुझायाल
जे जुता कनि dhil अच्छी, सोचलीह जे ओकर
फिता खियिल गेल हेताई।घर पहुंच स पहिने जखन ओ फीता बनहलेल पैर दिस तकैत छैथ त
जा ई त हुनाकर ओ जूते नहि जे बेटा अनिक देने
छलखिन। बहुत आश्चर्य भेलनी मुदा एखन केना
किछु बजतिह संग में दोसर कियो छलाह। घर आबि सब स पही ने जुता नुकाक रखालिह फेर
भाभी के फोन केली। भाभी हिनकर जुता के ओरिया क रखलिह आ जीनकर जुता रहनी हुनाका अपन सैंडिल दय राजस्थान बिदा केलिह
 एकरे कहैत अछी हरबरी बियाह कनपटी सिंदूर।
                            कविता झा।🙏