dahej mukt mithila

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मंगलवार, 12 जुलाई 2016

कोना रहबै मोरङ्गमे सजना !

गीत
शिव कुमार झा टिल्लू 
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कोना रहबै सखी मोरङ्गमे सजना !

गुमकी लधने कत' कोकिल स्वरबजना 
पावसके मास नेह हहरल चुआठ सन
शीतल बयार कएल अचकेमे काठ मन
सुक्खल चिनुआर मुदा थल्हगर छै अङ्गना
कोना रहबै सखी मोरङ्गमे सजना !
कछमछमे राति दिवस आशा मे बीतय
ककरो ने सोह ककर कोन अंश तीतय
ओलती भसकि हेरि रहल पंथ तजना
कोना रहबै सखी मोरङ्गमे सजना !
अप्पन ओसार छोड़ि बनलहुँ प्रवासी
मायक गहबर बिचुकल हेरै छी काशी
आनक महल सेजू डीह लागल भरना
कोना रहबै सखी मोरङ्गमे सजना !
रहू निफिकीर आब हहरथिने मिथिला
मैथिली विरहानल मुदा हेतीने शिथिला
फुफनलद्रव तकरेसँ गढब धवल कंगना
ने तकबनि बाट रहथु कतहु हमर सजना !!!!

सोहर ( बेटी जन्म )

सोहर ( बेटी जन्म )

शिव कुमार झा टिल्लू 
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कठोर पाथरपर दूभि जनमि हरियायलि रे 

ललना सुन्न अकानक कान भ' मैथिली आयलि रे !
अचकेमे हँसल नोरक स्वर चम्पा फुलायलि रे
ललना जगतक जननि सुनयनाके' कोर सजायलि रे !
जनकक जपतप पसिझल कलिका खिलायलि रे
ललना धरतीसँ उपटि भवानीमाँ मिथिला समायलि रे !
आइ जगत के भामिनी मिथिके' हँसायलि रे
ललना जकर चरणलग जगत ओ बेटीबनि आयलि रे !
सकल जनकपुर मायक कोखि गढायलि रे
ललना जनकके' सियाधिया दानके' मान बढायलि रे !

सोहर ( जानकीक अवतार )

सोहर ( जानकीक अवतार )
शिव कुमार झा टिल्लू 
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सोहर सुहासिन शोर जनकपुर नगरी हे 

ललना नृप छथि मगन विभोर भरल मोह गगरी हे !

सिया तन गहल कनकसँ सुशोभित चुनरी हे
ललना बरुहोथि जगतक माय जनक लेल सुनरी हे !
आँखि सुनयना मीठनोर अनूप बेटी सु-परी हे
ललना खिलनि मुदितभाल गोर पारथि धाय थपरी हे !
भरल सुनयनाक कोर मायक भेली दुलरी हे
ललना बँटल महलमे पटोर कटल दुःखमुंदरी हे !
घरघर हरित परोर ने अक्कत कुंदरी हे
ललना नाचल दीनक मनमोर पायस रस छिपरी हे !

रोपब कोना धान सजना ! ( गीत )

रोपब कोना धान सजना ! ( गीत )
शिव कुमार झा टिल्लू 
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रुसि गेलथि पुनिदेव पुरंदर 

रोपब कोना धान सजना ! 
धान सजना हो कि धान सजना हो
रोपब कोना धान सजना
फटलै खेत निकलै छै धाही
भेल तप्पत दिनमान सजना !!
बिचड़ा मुरुझेलै धरतीमे सटलै
कोर' लगलहुँ त' जड़िएसँ कटलै
फेर विधना अकान सजना !
आगाँके' आश जड़ि रहलै
कोना कजरीके' तान सजना !!
लागल भदबा भदैयाक खेतमे
जेतै अगहनियो रौदीक पेटमे
छुटत अपटीमे प्राण सजना !
ताकी त' आँखि चोन्हराबै
भेल जीवन मलान सजना !!
कहै छलिय' हम चलि जा विदेश
दुखित पड़ल मिथिलेशक देश
उगल खगताके' चान सजना !
नोरेसँ लधबध वैदेही
छनि संकटकेँ भान सजना !!
हहर'ने धनि मेघ आसन बदलतै
पछतो बादरि हमर गां बरसतै
त' पोसब मखान धनिया !
धान जौं ने हेतै रोपबै
बैसक्खा पात पान धनिया !!

हे अचले !

हे अचले !
शिव कुमार झा टिल्लू 
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अपनेक आँचरतर हिय तीतल 

पोछैत काल हम देखल नोर
विस्मित भेलहुँ ओ छल शीतल
मायक सिनेह के' कत' जोर ?
अर्णवसँ बेसी ई अथाह
कलकल टा नहि कोनो कराह
निज अंशकलेल ने आहि वेकल
सहि लेब टीस नहि करब आह
त्यागक मूरति हे देवि अचल
एकअर्थक जीवन साँझ भोर !
एकमात्र सहचरी नोर गंग
हुनके संग अपनेक अंग अनंग
सभ हास उपास कें संजोगल
ककरो आशा नहि करब भंग
संत्रास नुकयलहुँ निज हियमे
भोगब यथार्थ ने करब शोर !
भावक पुरहरि मे मात्र नेह
बिसरल संतति लेल अपन देह
हम हेरि रहल छी.. हे अचले !
बिनु सृष्टिक सुखदायिनी गेह
दुःखके' अभास विश्रांति त्रास
देवव्रते जकाँ जग लगैत गोर !