dahej mukt mithila

(एकमात्र संकल्‍प ध्‍यान मे-मिथिला राज्‍य हो संविधान मे) अप्पन गाम घरक ढंग ,अप्पन रहन - सहन के संग,अप्पन गाम-अप्पन बात में अपनेक सब के स्वागत अछि!अपन गाम -अपन घरअप्पन ज्ञान आ अप्पन संस्कारक सँग किछु कहबाक एकटा छोटछिन प्रयास अछि! हरेक मिथिला वाशी ईहा कहैत अछि... छी मैथिल मिथिला करे शंतान, जत्य रही ओ छी मिथिले धाम, याद रखु बस अप्पन गाम - अप्पन बात ,अप्पन मान " जय मैथिल जय मिथिला धाम" "स्वर्ग सं सुन्दर अपन गाम" E-mail: apangaamghar@gmail.com,madankumarthakur@gmail.com mo-9312460150

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रविवार, 27 मई 2012

गजल आई फेर पुछैय लोक हमरा अहाँ किएक उदास छि
आ हम पूछलएन हुनका सं अहाँ किएक नीरास छि

जातपातक भेदभाव कोना उत्तपन भेल मधेश में
ताहि चिंतन में हम डुबल छि अहाँ किएक नीरास छि

थरुहट अबध मिथिला भोजपुरा नै चाही मधेश के
मधेशी के चाही स्वतंत्र मधेश अहाँ किएक नीरास छि

अखंड मधेश केर विखंडन में शाषक अछि लागल
हेतै क्रूरशाषक के अवसान अहाँ किएक नीरास छि

सहिदक सपना मधेश एक प्रदेश बनबे करतै
निरंकुश शाषक मुईल जेतै अहाँ किएक नीरास छि
............वर्ण-२१..............
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

बुधवार, 23 मई 2012

रूबाई


कखनो तँ हम अहाँ केँ मोन पडिते हैब
यादिक दीप बनि करेज मे जरिते हैब
बनि सकलहुँ नै हम फूल अहाँक कहियो यै
मुदा काँट बनि नस नस मे तँ गडिते हैब

रविवार, 20 मई 2012

गजल@प्रभात राय भट्ट



गजल

भ्रम में किएक रखने छि सत्य तथ्य बताबु यौ
नै बनत मधेश तं सरकार छोइड आबू यौ

दिवा स्वप्न में भ्रमित छि जनता केर भ्रमौने छि
मातृभूमि रक्षा हेतु चिर निंद्रा सं जागु यौ

माए मधेश के छाती पर चलल हर फार
खण्ड खण्ड कोना भेल मधेश किछ तं सुनाबू यौ

आब कियो सपूत नै देत वलिदान अहि ठाम
कोना भेल नीलाम मधेश कारन देखाबू यौ

सहिद्क आत्मा के सुनलौ नै चितकार कियो
नहीं भेटल कुनु अधिकार आब नै लडाबू यौ

मधेशी गर्दन पर चलल स्वार्थक तलवार
आब अप्पन संविधान अप्पने लिख बनाबू यौ
............वर्ण-१८.............
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

बुधवार, 16 मई 2012

की हौऊ तों कमजोर भ गेलह

की हौऊ तों कमजोर भ गेलह 
नांगरी कटा क गाम बिसरलह
अप्पन भाषा आ ठाम बिसरलह
मिथिला के पहिचान बिसरलह
बैमानी पोरी पोर भ गेलह
की ............................................

तिलकोर के पाठ बिसरलह
मिथिला के ठाठ बाट बिसरलह
पेंट शर्ट आ हेट फेट में
धोती कुरता पाग बिसरलह
बिन मुद्दा के शोर भ गेलह
की.....................................
अनका लेल भरी दिन खटई  छः
बाल आ बच्चा किहरी कटयी छः
बाबु छोरी क मोम आ पोप बजय छः
तों सुनी सुनी क खूब नचय छः 
बिन बुझने तूं चोर भ गेलह
की ..........................................
कनिया मनिया जॉब करय छः
अपना पर पेटो नै भरय छः
अपने हाथे करम कुटय छः
बात बात में झगरी परई छः
एहन कोना धकलोल भ गेलह
की ..........................................
गामक शान के कतय नुकेलह
बिन सोचने सब किछ हेरेलह
बाप माय के कोना बिसरी क
अपन "आनंद" में घोर भ गेलह
की हउ.........................आनंद
एही रचना के किओ व्यक्ति अपना जीवन स नहीं जोरी इ मात्र एक टा रचना थीक| एही रचना के रचना कार आनंद झा हम स्वं छी | बिना पूछने एकर उयोग नहीं करी
जय मिथिला जय मैथिलि   

रविवार, 13 मई 2012

कोना मदर डे हैप्पी ?


आब केहन जमाना आबि गेल
बर्ख में एक्के दिन
माय कए यादि करै छी,
'मदर डे' कए नाम पर
माय कए याद करै छी
की हुनक सुखएल घा कए
काठी कय क' जगाबै छी |

हम बिसैर गेलहुँ
अपन माय कए
मुदा ओ नहि बिसरली,
जाहिखन हुनका भेटलैन्ह
सुन्दर कार्ड 'हैप्पी मदर डे' लिखल
भेलैन्ह करेजा तार-तार
नोर टघैर क'
अपन स्पर्श सँ
गाल कए छुबैत
हुनक करेजा तक चलि गेल
आ करेजा में बंद
महामाय कए कोंढ़ सँ
सोनित में डुबल शव्द निकलल
आह!
की ई हमर ओहे लाल ?
जेकरा पोसलौं खून सँ
पाललहुँ  अपन दूध सँ
अपने सुतलहुँ भिजल में
ओकरा  लगेलहुँ करेज सँ |
आई
चारि बर्ख सँ भेटल नहि
रहि रहल अछि परदेश
अपन  कनियाँ सँग
बिसरि गेल बिधवा माय कए
आई अकस्मात माय यादि  एलैह
ई सुन्दर चिट्ठी (कार्ड) पठेलक
मुदा की लिखल ?
'हैप्पी मदर डे'
बड्ड पैघ शांस लैत
हुनक मन आगु बाजल
जखन मदरे नहि हैप्पी
त' कोना
मदर डे हैप्पी
त' कोना मदर डे हैप्पी ?

जगदानन्द झा 'मनु'