dahej mukt mithila

(एकमात्र संकल्‍प ध्‍यान मे-मिथिला राज्‍य हो संविधान मे) अप्पन गाम घरक ढंग ,अप्पन रहन - सहन के संग,अप्पन गाम-अप्पन बात में अपनेक सब के स्वागत अछि!अपन गाम -अपन घरअप्पन ज्ञान आ अप्पन संस्कारक सँग किछु कहबाक एकटा छोटछिन प्रयास अछि! हरेक मिथिला वाशी ईहा कहैत अछि... छी मैथिल मिथिला करे शंतान, जत्य रही ओ छी मिथिले धाम, याद रखु बस अप्पन गाम - अप्पन बात ,अप्पन मान " जय मैथिल जय मिथिला धाम" "स्वर्ग सं सुन्दर अपन गाम" E-mail: apangaamghar@gmail.com,madankumarthakur@gmail.com mo-9312460150

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मंगलवार, 13 सितंबर 2011


जेहन करनी तेहन भरनी @प्रभात राय भट्ट

माए बाबु केर बुझलक बैरी
घरवाली सं करैय खूब प्रीत
देखू दुनियांकें अजगुत रीत
बेर बेर कनियाक मुह निहारैय
कहि कहि कें ललमुनिया 
माए बाप काहि: कटैय
बेट्टा  बजाबैय हरमुनिया 
महलक रानी बनल अछि पुतोहू
चाकर बनल अछि  बेट्टा 
माए बाप के झोपरी में पठौलक
देलक टुटल थारी फूटल लोटा
बरखा में देह पैर टप टप पानी चुबैय 
थर थर कापी देह सिहरैय
बेट्टा पुतहु शुख शयल  करैय 
जरल परल जुठकुथ
माए बाबुके खुआबैय  
मिट मछली खुवा मलाई
घरवाली सभटा नेराबैय
तरैस तरैस माए बाबु
सिधाएरगेलाह: परलोक
कहैय बेट्टा काल कंटक टरल
मोनमें नै कनियो शोक
बौआ  लाबू एकटा सलाई
झोपरी में आब के रहत
तें दैछी आब आइग लगाई
पोता के इ सभटा देख
मोनमें उठल उद्वेग
करैय बाबा दाई संग
बीतल घटनाक खेद
अहां  किये केलों
बाबा दाई संग दुरब्यबहार
अहां केहन कपूत भेलौं
दैतछी हम धिकार.............
आब हमरो किछु करैदीय 
इ टुटल झोपरी रहैदीय 
बाबु अहां बृद्ध हयब जखने 
अहू के उठाक झोपरी में
धदेव हम तखने 
रहैदीय इ टुटल थारी फूटल लोटा
अहिं के नक्सा पैर हमहूँ  चलब
किये त हम छि अहंक बेट्टा
जेहन करनी तेहन भरनी
याह अछि दुनियाक रीत
अपना संग दुरब्यबहार देख
किये लगैय आब तित ?????????
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

शुक्रवार, 9 सितंबर 2011

दिल्ली मे प्रथम मैथिली कवि सम्मेलन 11 सितम्बर कए


दिल्ली केर प्रख्यात सामाजिक-सांस्कृतिक संस्था- मिथिलांगन पछिला किछु बरख सं नामी साहित्यकार डाक्टर ब्रजकिशोर वर्मा मणिपद्म केर जयंतीक उपलक्ष्य मे कोनो ने कोनो कार्यक्रम करैत रहल अछि। एहि अवसर पर ई संस्था नैका बनिजारा(2007),उगना हाल्ट(2008),सामा चकेवा(2009) आ पछिला बरख छुतहा घैल नाटकक बहुचर्चित-बहुप्रशंसित आयोजन कएने छल। एहि बेर मिथिलांगन मैथिली कवि गोष्ठी केर आयोजन क रहल अछि।
ओना तं मैथिली-भोजपुरी अकादमी दिल्ली मे द्विभाषिक कवि सम्मेलन आयोजित करैत रहल अछि,मुदा ई पहिल बेर अछि जे दिल्ली मे कोनो संस्था मूलतः मैथिली कवि सम्मेलन कें आयोजन ल कए उपस्थित भेल अछि। आमंत्रित कविगण छथि-बिहार सरकारक फारेंसिक विभागक पूर्व अधिकारी डाक्टर ललित कुमुद,मिथिलाक महादेवीक रूप मे मशहूर डाक्टर शेफालिका वर्मा,मशहूर रवीन्द्र-महेन्द्र जोड़ी केर श्री रवीन्द्र नाथ ठाकुर,मैथिल शुभ-संस्कार आ विधि-विधान पर गीत लिखिकए अद्वितीय काज कएनिहार श्री ब्रह्मदेव लाल दास(मिथिलांगन हिनका पर मधुचंद्रिका नामक सीडी निकालि चुकल अछि),मैथिलीक सभ पत्रिका मे छपि चुकल (अंग्रेजियो मे प्रकाशित) नामी कवि श्री शारदान्द दास परिमल,मिथिलांगनक कर्ता-धर्ता आ अपन तुरंताक लेल प्रसिद्ध श्री रवीन्द्र लाल दास सुमन,नाटककार आ स्वतंत्र पत्रकार श्री कुमार शैलेन्द्र,हिंदुस्तान मे वरिष्ठ समाचार संपादक श्री मानवर्द्धन कंठ,अमर उजाला मे कार्यरत श्री रमण कुमार सिंह,राष्ट्रीय सहारा मे कार्यरत कवि-समीक्षक श्री विनीत उत्पल,दूरदर्शन मे कार्यरत,श्री किशन कारीगर,मिथिलांगन मे शारीरिक-बौद्धिक दुनू स्तर पर अत्यन्त सक्रिय श्रीमती विनीता मल्लिक आ हालहि मे लांच भेल समाचार चैनल न्यूज एक्सप्रेस मे कार्यरत आ नवोदित सुश्री स्तुति नारायण।
स्थान रहत सत्याग्रह मंडप,गांधी दर्शन,निकट राजघाट आ समय सांझ छओ बजे।
आउ,मिथिलांगनक हकार स्वीकार कए, सभ आयुवर्गक आ बहुविधप्रतिभा संपन्न कवि लोकनि कें सुनैत मैथिली कवि-गोष्ठीक आनंद ली। 

सोमवार, 29 अगस्त 2011

आई थिक मुक्ति पर्व आउ सभ गोटे मिल क मनाऊ

काल्हि पूरा दिल्ली अन्ना क जीतक ख़ुशी म सरोबार भ के जबरदस्त जश्न में डूबल रहे....सोंसे दिल्ली आ देश एकरा एकटा पर्वक रूप में मनेलक....मुदा एक बात याद राखु काल्हि तक अहाँ जतेक भी पर्व मना लेने छी ओ नीक, मुदा आय साँझ क मनाऊ "मुक्ति पर्व".......श्रीराम सेंटर मंडी हाउस में, जाही ठाम अविनाश चन्द्र मिश्र कृत मुक्ति पर्व नाटकक मंचन हाएत....मंचन म शामिल अछि मैथिली लोक रंग (मैलोरंग) क टीम आ एकरा निर्देशित करत हमर सबहक प्रिय मित्र "प्रकाश झा जी"....त बिसरब नै आय साँझ ६:३० बजे स प्रवेश शुरू भए जाएत....

शुक्रवार, 26 अगस्त 2011

जागु - जागु यौ मैथिल

  मैथिल करू अपन मात्रिभुमिक रक्षा
जागु जागु यौ मैथिल युवा जागु
सुनु मिथिला माएक विह्वल पुकार
सोनित सं भिजल माएक आँचर
छाती पैर हुनक चलल हरक फार
सुनु हृदय विदारक माएक चीत्कार
क्रूर शाषक रहे मिथिलाक खतरा
ब्रिटिश केलक मिथिलाक चिर दू कतरा
बनौलक त्रिपक्षय सुगौली संधिक पत्रा
नेपालमें पईरगेल आधा मिथिलाक टुक्रा
बिहार नेपालमे मिथिला भेल अछि विभक्त
जागु जागु यौ मैथिल मिथिला माएक भक्त
कोना खेलब यौ मैथिल मिथिलाक कोरामें
माएक आँचर डुबल अछि नोरक अश्रुधारामें
बिहार में मैथिलके देख्बैय बिहारी लाठी
नेपालमे देखाबैय मैथिलके पहाड़ी खोर्नाठी
केहन इ दुर्भाग्य बनल छि भाई भाई अनचिन्हार
लहू सं लतपत भेल अछि मिथिलाक मुहार
१९१६ के सन्धिमें मिथिला बाँटल गेल
आधा मिथिला नेपालमे लीज पैर चैलगेल
जनकपुरधाम अछि नेपालक अंग तोडू इ भ्रम
२०१६ में भरहल अछि सन्धिक समझौता ख़त्म
जागु जागु मैथिल करू अपन मात्रिभुमिक रक्षा
सब करी एक मिथिला एक प्रदेशक प्रतीक्षा
जय मिथिला जय मैथिल