बेरसाइतिक पूजा (नव विवाहित कनिया )
गुरुवार, 18 मई 2023
बेरसाइतिक पूजा , साभार : सुश्री सीमा झा (mithilasanskar)
मंगलवार, 16 मई 2023
कलयुग के लक्षण
1. कुटुम्ब कम हुआ ---
2 सम्बंध कम हुए ----
3. नींद कम हुई. ---
4. बाल कम हुए ----
5. प्रेम कम हुआ ---
6. कपड़े कम हुए -----
7. शर्म कम हुई• ---
8 . लाज-लज्जा कम हुई----
9. मर्यादा कम हुई --
10. बच्चे कम हुए ---
11. घर में खाना कम हुआ---
12. पुस्तक वाचन कम हुआ ---
13. भाई-भाई प्रेम कम हुआ---
15. चलना कम हुआ ----
16. खुराक कम हुआ ---
17. घी-मक्खन कम हुआ---
18. तांबे - पीतल के बर्तन कम हुए---
19. सुख-चैन कम हुआ---
20. मेहमान कम हुए---
21. सत्य कम हुआ---
22. सभ्यता कम हुई ----
23. मन-मिलाप कम हुआ
24. समर्पण कम हुआ --- इतियादी .
संतान को दोष न दें... -----
बालक या बालिका को 'इंग्लिश मीडियम' में पढ़ाया...
'अंग्रेजी' बोलना सिखाया...
'बर्थ डे' और 'मैरिज एनिवर्सरी'
जैसे जीवन के 'शुभ प्रसंगों' को 'अंग्रेजी कल्चर' के अनुसार जीने को ही 'श्रेष्ठ' मानकर...
माता-पिता को 'मम्मा' और
'डैड' कहना सिखाया...
जब 'अंग्रेजी कल्चर' से परिपूर्ण बालक या बालिका बड़ा होकर, आपको 'समय' नहीं देता, आपकी 'भावनाओं' को नहीं समझता, आप को 'तुच्छ' मानकर 'जुबान लड़ाता' है और आप को बच्चों में कोई 'संस्कार' नजर नहीं आता है,
तब घर के वातावरण को 'गमगीन किए बिना'... या...
'संतान को दोष दिए बिना'...
कहीं 'एकान्त' में जाकर 'रो लें'...
क्योंकि...-------
पुत्र या पुत्री की पहली वर्षगांठ से ही,
'भारतीय संस्कारों' के बजाय
'केक' कैसे काटा जाता है ? सिखाने वाले आप ही हैं...
'हवन कुण्ड में आहुति' कैसे डाली जाए...
'मंदिर, मंत्र, पूजा-पाठ, आदर-सत्कार के संस्कार देने के बदले'...
केवल 'फर्राटेदार अंग्रेजी' बोलने को ही,
अपनी 'शान' समझने वाले आप...------
बच्चा जब पहली बार घर से बाहर निकला तो उसे
'प्रणाम-आशीर्वाद' के बदले
'बाय-बाय' कहना सिखाने वाले आप...
परीक्षा देने जाते समय ----
'इष्टदेव/बड़ों के पैर छूने' के बदले
'Best of Luck'
कह कर परीक्षा भवन तक छोड़ने वाले आप...
बालक या बालिका के 'सफल' होने पर, घर में परिवार के साथ बैठ कर 'खुशियाँ' मनाने के बदले...
'होटल में पार्टी मनाने' की 'प्रथा' को बढ़ावा देने वाले आप...
बालक या बालिका के विवाह के पश्चात्...
'कुल देवता / देव दर्शन'
को भेजने से पहले...
'हनीमून' के लिए 'फाॅरेन/टूरिस्ट स्पॉट' भेजने की तैयारी करने वाले आप...
ऐसी ही ढेर सारी 'अंग्रेजी कल्चर्स' को हमने जाने-अनजाने 'स्वीकार' कर लिया है...
अब तो बड़े-बुजुर्गों और श्रेष्ठों के 'पैर छूने' में भी 'शर्म' आती है...
गलती किसकी..?
मात्र आपकी '(माँ-बाप की)'...
अंग्रेजी International 'भाषा' है...
इसे 'सीखना' है...
इसकी 'संस्कृति' को,
'जीवन में उतारना' नहीं है...
मानो तो ठीक...
नहीं तो भगवान ने जिंदगी दी है...
चल रही है,चलती रहेगी...
आने वाली जनरेशन बहुत ही घातक सिद्द्ध होने वाली है, हमारी संस्कृति और सभ्यता विलुप्त होती जा रही है,बच्चे संस्कारहीन होते जा रहे हैं और इसमें मैं भी हूं,अंग्रेजी सभ्यता को अपना रहे
सोच कर, विचार कर अपने और अपने बच्चे, परिवार, समाज, संस्कृति और देश को बचाने का प्रयास करें...
हिन्दी हमारी राष्ट्र और् मातृ भाषा है इसको बढ़ावा दें, बच्चों को जागरूक करें ताकि वो हमारी संस्कृति और सभ्यता से जुड़ कर गौरवशाली महसूस करें..!!
गुरुवार, 16 मार्च 2023
अमेरिका में रसोई में भोजन बनाना छोड़ने का दुष्परिणाम
अमेरिका में रसोई में भोजन बनाना छोड़ने का दुष्परिणाम
अमेरिका में क्या हुआ जब घर में खाना बनाना बंद हो गया ?
1980 के दशक के प्रसिद्ध अमेरिकी अर्थशास्त्रियों ने अमेरिकी लोगों को चेतावनी कि यदि वे परिवार में आर्डर देकर बाहर से भोजन मंगवाऐंगे तो देश मे परिवार व्यवस्था धीरे धीरे समाप्त हो जाएगी।
साथ ही दूसरी चेतावनी दी कि यदि उन्होंने बच्चों का पालन पोषण घर के सदस्यो के स्थान पर बाहर से पालन पोषण की व्यवस्था की तो यह भी बच्चो के मानसिक विकास व परिवार के लिए घातक होगा।
लेकिन बहुत कम लोगों ने उनकी सलाह मानी। घर में खाना बनाना लगभग बंद हो गया है, और बाहर से खाना मंगवाने की आदत (यह अब नॉर्मल है), अमेरिकी परिवारों के विलुप्त होने का कारण बनी है जैसा कि विशेषज्ञों ने चेतावनी दी थी।
घर मे खाना बनाना मतलब परिवार के सदस्यों के साथ प्यार से जुड़ना।
*पाक कला मात्र अकेले खाना बनाना नहीं है। बल्कि केंद्र बिंदु है, पारिवारिक संस्कृति का।*
घर मे अगर कोई किचन नहीं है , बस एक बेडरूम है, तो यह घर नहीं है, यह एक हॉस्टल है।
*अब उन अमेरिकी परिवारों के बारे में जाने जिन्होंने अपनी रसोई बंद कर दी और सोचा कि अकेले बेडरूम ही काफी है?*
1-1971 में, लगभग 72% अमेरिकी परिवारों में एक पति और पत्नी थे, जो अपने बच्चों के साथ रह रहे थे।
2020 तक, यह आंकडा 22% पर आ गया है।
2-पहले साथ रहने वाले परिवार अब नर्सिंग होम (वृद्धाश्रम) में रहने लगे हैं।
3-अमेरिका में, 15% महिलाएं एकल महिला परिवार के रुप में रहती हैं।
4-12% पुरुष भी एकल परिवार के रूप में रहते हैं।
5-अमेरिका में 19% घर या तो अकेले रहने वाले पिता या माता के स्वामित्व में हैं।
6-अमेरिका में आज पैदा होने वाले सभी बच्चों में से 38% अविवाहित महिलाओं से पैदा होते हैं।उनमें से आधी लड़कियां हैं, जो बिना परिवारिक संरक्षण के अबोध उम्र मे ही शारीरिक शोषण का शिकार हो जाती है ।
7-संयुक्त राज्य अमेरिका में लगभग 52% पहली शादियां तलाक में परिवर्तित होती हैं।
8- 67% दूसरी शादियां भी समस्याग्रस्त हैं।
अगर किचन नहीं है और सिर्फ बेडरूम है तो वह पूरा घर नहीं है।
संयुक्त राज्य अमेरिका विवाह की संस्था के टूटने का एक उदाहरण है।
*हमारे आधुनिकतावादी भी अमेरिका की तरह दुकानों से या आनलाईन भोजन ख़रीदने की वकालत कर रहे हैं और खुश हो रहे हैं कि भोजन बनाने की समस्या से हम मुक्त हो गए हैं। इस कारण भारत में भी परिवार धीरे-धीरे अमेरिकी परिवारों की तरह नष्ट हो रहे हैं।*
जब परिवार नष्ट होते हैं तो मानसिक और शारीरिक दोनों ही स्वास्थ्य बिगड़ते हैं। बाहर का खाना खाने से अनावश्यक खर्च के अलावा शरीर मोटा और संक्रमण के प्रति संवेदनशील और बिमारीयों का घर हो जाता है।
शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक है।
*इसलिए हमारे घर के बड़े-बूढ़े लोग, हमें बाहर के खाने से बचने की सलाह देते थे*
लेकिन आज हम अपने परिवार के साथ रेस्टोरेंट में खाना खाते हैं...",
स्विगी और ज़ोमैटो के माध्यम से अजनबियों द्वारा पकाए गए( विभिन्न कैमिकल युक्त) भोजन को ऑनलाइन ऑर्डर करना और खाना, उच्च शिक्षित, मध्यवर्गीय लोगों के बीच भी फैशन बनता जा रहा है।
दीर्घकालिक आपदा होगी ये आदत...
*आज हमारा खाना हम तय नही कर रहे उलटे ऑनलाइन कंपनियां विज्ञापन के माध्यम से मनोवैज्ञानिक रूप से तय करती हैं कि हमें क्या खाना चाहिए...*
हमारे पूर्वज निरोगी और दिर्घायु इस लिए थे कि वो घर क्या ...यात्रा पर जाने से पहले भी घर का बना ताजा खाना बनाकर ही ले जाते थे ।
*इसलिए घर में ही बनाएं और मिल-जुलकर खाएं । पौष्टिक भोजन के अलावा, इसमें प्रेम और स्नेह निहित है।*
*इस संदेश को कम से कम पांच ग्रुप मैं जरूर भेजे*
*कुछ लोग नही भेजेंगे लेकिन मुझे यकीन है आप जरूर भेजेंगे*
सोमवार, 13 मार्च 2023
MITHILAK NARI
राम जेना पुरूषोत्तम कहावथि, नारी में उत्तम सीता। मिथिलाक नारी गुणक खान छैथि, माय सुनयना आ जनक पिता।. लाख सुन्नराइ के एक गोराइ, पहिरथि ओ सदिखन साड़ी।. केहनो समय रहय तैयो ओ बाजथि मीठ रहैथि ब्यवहारी, दुनिया में छैथि सभ सँ सुंदर. अप्पन मिथिला के नारी।. मिथिलावासी आदि काल सँ, देवी शक्ति के करैथि सम्मान, घर घर होइछ भगवती के पूजा, उच्चैठ भगवती मिथिला में महान। कालीदास एही मिथिला में विद्या लेल, पोतलनि भगवती के मूर्ति पर कारी।. दुनिया में छैथि सभ सँ सुंदर अप्पन मिथिला के नारी।. मिथिलाक नारी में विदुषी भारती, न्याय करैत पति मंडन के हार मानलन्हि, स्वयं शास्त्रार्थ करैत ओ एहि ठाम, आदि शंकराचार्य के हराओलनि, जगत जननी जानकी के त्याग एहि पृथ्वी पर अछि सभ सँ भारी। दुनिया में छैथि सभ सँ सुंदर अप्पन मिथिला के नारी।. धिया पूता के जिनगी लेल, ओ छठि के कठिन ब्रत पूजा करैथि , तीन दिन धरि निराजल रहि, नित्य दिन भूखल रहि गोसाओन के पूजैथि, सभ जनैछ जे गोसाओन के महिमा. एहि जग में अछि अनुपम न्यारी। दुनिया में छैथि सभ सँ सुंदर अप्पन मिथिला के नारी। कखनो बेटी, कखनहु पत्नी, कखनहु मायक रूप में भूमिका करैत, परिवारक गाड़ी के अपन स्नेह सँ, पटरी के पटरी सँ जोड़ैत। प्रेम आ बन्धन सँ जोड़ि कऽ सभके। सफल छैन्ह हिनक कलाकारी। दुनिया में छैथि सभ सँ सुंदर. अप्पन मिथिला के नारी। लखिमा ठकुराइन एहि मिथिला के, विद्यापति के प्रेरणा श्रोत। महाकवि के बेसी रचना में लखिमा के स्नेह सँ ओत प्रोत। कीर्ति करैथि वखान मिथिलानी के, सुन्दर सुशील आ स्वभाव गुणकारी।. दुनिया में छैथि सभ सँ सुंदर अप्पन मिथिला के नारी।
शुक्रवार, 10 मार्च 2023
मिथिलाक संस्कृति -
मिथिलाक संस्कृति - भोरे आंगन कौआ कुचरय, पाहुन अओताह, गेल सभ जानि, बड़का फूलही लोटा राखल, दलान पर भरि कऽ पानि।. आंगन दलान सभ चिक्कन भेल अछि, साफ चादर चौकी पर ओछाओल, पाहुन के मिथिलाक संस्कृति में, अतिथि देवो भवऽ बनाओल।. मिथिला वासी मारि पीटि सँ, सदिखन रहैछ, कोसो दूर. भाला गरांस के के पूछैत अछि, पूरना लाठी ओहो में भूर।. भुल्ली बिलारि दूध के पाहि मे, घुमि रहल अछि भनसा घर, बौआक माय दूध औंटैत छैथि, नजरि रखने एम्हर ओम्हर।. करिया कुकूर आंगन आबि कऽ, आंठि कयलक अंइठारक बाटी, बौआक माय ओम्हर सँ बजलीह, हे ला तऽ ओम्हर सँ मोटका लाठी।. मिथिला संस्कृति में आदि काल सँ, अध्यात्म के बहुत पैघ स्थान, स्वयं महादेव उगना बनि कऽ, देलन्हि मिथिला वासी के वरदान।. मिथिलाक बेटी सीता सन गुणगर बाप जनक सन सज्जन आ संत। अयाची सन संतोषी, मंडन सन गुणवंत।. मिथिला में मुंडन, उपनयन, ब्याह संस्कारक नहि कोनो तोड़। प्रेम, स्नेह आओर विधि ब्यवहार, आन संस्कृति में लागय थोड़।. अपन संस्कृति सभ सँ उपर, एकरा नहिं कहियो बिसरू, आन संस्कृति के सेहो करू सम्मान, अपन सर्वोच्च मानि आगू ससरू।. कीर्ति कहैथि जँ अपन संस्कृति के, हमहीं नहि करव सम्मान, कोना हमर संस्कृति आगू बढत? करू सदिखन एकर सम्मान।🙏

