dahej mukt mithila

(एकमात्र संकल्‍प ध्‍यान मे-मिथिला राज्‍य हो संविधान मे) अप्पन गाम घरक ढंग ,अप्पन रहन - सहन के संग,अप्पन गाम-अप्पन बात में अपनेक सब के स्वागत अछि!अपन गाम -अपन घरअप्पन ज्ञान आ अप्पन संस्कारक सँग किछु कहबाक एकटा छोटछिन प्रयास अछि! हरेक मिथिला वाशी ईहा कहैत अछि... छी मैथिल मिथिला करे शंतान, जत्य रही ओ छी मिथिले धाम, याद रखु बस अप्पन गाम - अप्पन बात ,अप्पन मान " जय मैथिल जय मिथिला धाम" "स्वर्ग सं सुन्दर अपन गाम" E-mail: apangaamghar@gmail.com,madankumarthakur@gmail.com mo-9312460150

apani bhasha me dekhe / Translate

शिव कुमार झा टिल्लू लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
शिव कुमार झा टिल्लू लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

मंगलवार, 12 जुलाई 2016

कोना रहबै मोरङ्गमे सजना !

गीत
शिव कुमार झा टिल्लू 
*****************************
कोना रहबै सखी मोरङ्गमे सजना !

गुमकी लधने कत' कोकिल स्वरबजना 
पावसके मास नेह हहरल चुआठ सन
शीतल बयार कएल अचकेमे काठ मन
सुक्खल चिनुआर मुदा थल्हगर छै अङ्गना
कोना रहबै सखी मोरङ्गमे सजना !
कछमछमे राति दिवस आशा मे बीतय
ककरो ने सोह ककर कोन अंश तीतय
ओलती भसकि हेरि रहल पंथ तजना
कोना रहबै सखी मोरङ्गमे सजना !
अप्पन ओसार छोड़ि बनलहुँ प्रवासी
मायक गहबर बिचुकल हेरै छी काशी
आनक महल सेजू डीह लागल भरना
कोना रहबै सखी मोरङ्गमे सजना !
रहू निफिकीर आब हहरथिने मिथिला
मैथिली विरहानल मुदा हेतीने शिथिला
फुफनलद्रव तकरेसँ गढब धवल कंगना
ने तकबनि बाट रहथु कतहु हमर सजना !!!!

सोहर ( बेटी जन्म )

सोहर ( बेटी जन्म )

शिव कुमार झा टिल्लू 
**********************************
कठोर पाथरपर दूभि जनमि हरियायलि रे 

ललना सुन्न अकानक कान भ' मैथिली आयलि रे !
अचकेमे हँसल नोरक स्वर चम्पा फुलायलि रे
ललना जगतक जननि सुनयनाके' कोर सजायलि रे !
जनकक जपतप पसिझल कलिका खिलायलि रे
ललना धरतीसँ उपटि भवानीमाँ मिथिला समायलि रे !
आइ जगत के भामिनी मिथिके' हँसायलि रे
ललना जकर चरणलग जगत ओ बेटीबनि आयलि रे !
सकल जनकपुर मायक कोखि गढायलि रे
ललना जनकके' सियाधिया दानके' मान बढायलि रे !

सोहर ( जानकीक अवतार )

सोहर ( जानकीक अवतार )
शिव कुमार झा टिल्लू 
****************************
सोहर सुहासिन शोर जनकपुर नगरी हे 

ललना नृप छथि मगन विभोर भरल मोह गगरी हे !

सिया तन गहल कनकसँ सुशोभित चुनरी हे
ललना बरुहोथि जगतक माय जनक लेल सुनरी हे !
आँखि सुनयना मीठनोर अनूप बेटी सु-परी हे
ललना खिलनि मुदितभाल गोर पारथि धाय थपरी हे !
भरल सुनयनाक कोर मायक भेली दुलरी हे
ललना बँटल महलमे पटोर कटल दुःखमुंदरी हे !
घरघर हरित परोर ने अक्कत कुंदरी हे
ललना नाचल दीनक मनमोर पायस रस छिपरी हे !

रोपब कोना धान सजना ! ( गीत )

रोपब कोना धान सजना ! ( गीत )
शिव कुमार झा टिल्लू 
************************************
रुसि गेलथि पुनिदेव पुरंदर 

रोपब कोना धान सजना ! 
धान सजना हो कि धान सजना हो
रोपब कोना धान सजना
फटलै खेत निकलै छै धाही
भेल तप्पत दिनमान सजना !!
बिचड़ा मुरुझेलै धरतीमे सटलै
कोर' लगलहुँ त' जड़िएसँ कटलै
फेर विधना अकान सजना !
आगाँके' आश जड़ि रहलै
कोना कजरीके' तान सजना !!
लागल भदबा भदैयाक खेतमे
जेतै अगहनियो रौदीक पेटमे
छुटत अपटीमे प्राण सजना !
ताकी त' आँखि चोन्हराबै
भेल जीवन मलान सजना !!
कहै छलिय' हम चलि जा विदेश
दुखित पड़ल मिथिलेशक देश
उगल खगताके' चान सजना !
नोरेसँ लधबध वैदेही
छनि संकटकेँ भान सजना !!
हहर'ने धनि मेघ आसन बदलतै
पछतो बादरि हमर गां बरसतै
त' पोसब मखान धनिया !
धान जौं ने हेतै रोपबै
बैसक्खा पात पान धनिया !!

हे अचले !

हे अचले !
शिव कुमार झा टिल्लू 
************************************
अपनेक आँचरतर हिय तीतल 

पोछैत काल हम देखल नोर
विस्मित भेलहुँ ओ छल शीतल
मायक सिनेह के' कत' जोर ?
अर्णवसँ बेसी ई अथाह
कलकल टा नहि कोनो कराह
निज अंशकलेल ने आहि वेकल
सहि लेब टीस नहि करब आह
त्यागक मूरति हे देवि अचल
एकअर्थक जीवन साँझ भोर !
एकमात्र सहचरी नोर गंग
हुनके संग अपनेक अंग अनंग
सभ हास उपास कें संजोगल
ककरो आशा नहि करब भंग
संत्रास नुकयलहुँ निज हियमे
भोगब यथार्थ ने करब शोर !
भावक पुरहरि मे मात्र नेह
बिसरल संतति लेल अपन देह
हम हेरि रहल छी.. हे अचले !
बिनु सृष्टिक सुखदायिनी गेह
दुःखके' अभास विश्रांति त्रास
देवव्रते जकाँ जग लगैत गोर !

विवाह गीत ( धुन : झूमर )

विवाह गीत ( धुन : झूमर )
शिव कुमार झा टिल्लू 
******************************** 
सभसखी झूमि नाचथि जनक अंगना 

जनक अंगना हो सुनयना अंगना 
धुन लय गति रमल सगरि बजना !
शहनाई ढोलक संग खुरदक
मातु सुनयना मोहित अपलक
सियालेल साजल कनक कंगना
रभसल सभ अबोध बालक भगिना !
सीता उर्मिक नयन पोछै छथि
अपनो आहित हियसँ कनै छथि
देखि विभोर विदेह नयना
ई दानक दरस वेकल मयना !
कीर्ति मिथिके' सिया सुकन्या
भेलि जनकपुर बेटिएसँ धन्या
जें सिया तें ई मैथिली वयना
रूप अवधके' देखल हमर अयना !
हे हरि जगतक भाग्य विधाता
कर्मक फल तें भेलहुँ जमाता
भाग हमर अपनेक रचना
एहि दानक मान राखब पहुना !

महागौरी वन्दना !

महागौरी वन्दना !
शिव कुमार झा टिल्लू 
*******************************
देवि जगदम्बा पशुपतिके' भामिनी !

आठम रूप दुर्गा सोझाँमे कामिनी 
शक्ति अमोघ संग सद्यः फलदात्री
कल्मष बहारि देलहुँ माय जगतधात्री
सोखि लिय' जगके सभ जामिनी
हे माय सोखि लिय' जगके सभ जामिनी
देवि जगदम्बा पशुपतिके' भामिनी !
संताप पाप दैन्य दुःखहु ने आबै
अक्षय पवित्र पुण्य जगमे लहराबै
शंख चन्द्र कुंद फूल भाविनी
हे माता शंख चन्द्र कुंद फूल भाविनी
देवि जगदम्बा पशुपतिके' भामिनी !
एक हाथ अभय मुद्रा दोसर त्रिशूले
जगब' लेल डमरू आशीष वर मूले
असुरी मोन लेल बज्र दामिनी
हे माता असुरी मोन लेल बज्रदामिनी
देवि जगदम्बा पशुपतिके' भामिनी !
महागौरी कांतिमान गौरवर्ण रूपा
स्नेहमयी शांत मृदुल सर्जना स्वरूपा
पार्वती शिवा शक्ति नामिनी
हे उमे पार्वती शिवा शक्ति नामिनी
देवि जगदम्बा पशुपतिके' भामिनी !
*************************************
कल्मष : दोख , पीजु , एकटा नरकके' नाओं

गणपति वन्दना

गणपति वन्दना
शिव कुमार झा टिल्लू 
*********************************
आदिपूज्य गणपति गणनायक 

उमासुत सद्गुणके' अधिनायक !
मूषक वाहन कान्ति गजानन
गाणपतेय लेल सभहित साधन
गौरिसेवा लेल अष्टयाम शायक
उमासुत सद्गुणके' अधिनायक !
केतुदेव सभ जुग अवतारा
शिवमानसमे प्रणव ओंकारा
कर्ण ग्राह्य सूंढ़ बुद्धिविनायक
उमासुत सद्गुणके' अधिनायक !
सकल चराचर उदर विराजित
भोज्य मात्र नहि नेह समाहित
सुमुख भालचंद्र नमनके' लायक
उमासुत सद्गुणके' अधिनायक !
द्वादश नाम ऋद्धि सिद्धके' दाता
विद्यारम्भ आ वरन विधाता
सत रज नीति सकल गुण दायक
उमासुत सद्गुणके' अधिनायक !
क्रुद्ध रूप शनि देव ने आबथि
कपिल परशुसँ विघ्न भगाबथि
शक्ति स्वरक सर्वोत्तम गायक
उमासुत सद्गुणके' अधिनायक !
****************************
शायक : अभिलाषी

हम्मर सपना टुटलै ना ! ( गीत )

हम्मर सपना टुटलै ना ! ( गीत )

**************************************
सपनामे देखलहुँ प्रियतम 

आबि गेलथि गाम 
आहेराम आबि गेलथि गाम
अचके निन्न फुजलै ना
रामा सुन्न रे ओछौना
हम्मर सपना टुटलै ना !
दिवस शिथिल भेल राति कठुएलै
आहेराम राति कठुएलै
ओ सेहो ने कटलै ना
रामा भोर भेल नेपत्ता
सुरूज कत' सटलै ना !
कत' ओ बसथि दूरदेश
केलनि कोन धारण वेश
कत' ओ बसथि दूरदेश
कोन रूप धरलनि आहेराम
कोन रूप धरलनि
दरस सपना भेलै ना
रामा विरहके रातिटा
आब अपना भेलै ना !
आबि जाऊ हे शिव
राखब हम आब सेवि
आबि जाऊ हे शिव
गेह नेह उजड़लै आहेराम
गेह नेह उजड़लै
सगरो पिपरी फड़लै ना
आशक डगरि अलोपित
ओ त' अपने भखड़लै ना !!



शिव कुमार झा टिल्लू 



चलू शिव मिथिला धाम !

चलू शिव मिथिला धाम !
शिव कुमार झा टिल्लू 
************************************************************
दर्शन तंत्र साहित्यक जे भू ठाम ओ अछि मिथिला 

चलू शिव मिथिला धाम !
जत' विवेक विचारक नव आयाम ओ अछि मिथिला
चलू शिव मिथिला धाम !
कोशी कमला बागमती संग देखब करेहक धार औ
गंगा गण्डकी महमह भेली देखि जकर आचार औ
भारती बेटी उदयन सुत निष्काम ओ अछि मिथिला
चलू शिव मिथिला धाम !
सुग्गा जत' संस्कृत बचै ओ तन्त्रक नजरि उपासल औ
हम लड़ै छी तें ने बुझै सभ हमरा मतिछीन भासल औ
जनकनगरसँ अंगपुरि धरि अविराम ओ अछि मिथिला
चलू शिव मिथिला धाम !
विद्यापति भुवनेश्वर चंदा सन सर्जकके' खान औ
अमर मधुप आरसी सुमन सन रास ओत' दिनमान औ
ज्ञानक दीप अखण्ड, ने बुझब विराम ओ अछि मिथिला
चलू शिव मिथिला धाम !
दीनहीन साधनविहीन मुदा अछि ने पसारने हाथ औ
अप्पन अंशक दान दैत अछि याचकसँ नहि लाथ औ
कतेक अयाची साधक गामकगाम ओ अछि मिथिला
चलू शिव मिथिला धाम 

सिद्धिदात्री वंदना

कमलिनी शिवकशक्ति जगदम्बे 
अष्टसिद्धि के' अहीं अबलम्बे !
अणिमा प्राप्ति ईशित्व हे गरिमा 
प्राकाम्य लघिमा वशित्व माँ गरिमा 
चतुर्भुजा जग चहुदिशि खम्बे 
अष्टसिद्धि के' अहीं अबलम्बे !
सकल सृष्टिमे किछुओ अगम नहि
जे पकड़ल अपनेक चरण गहि 
सिंहवाहिनी सभ दुःखभंगे 
अष्टसिद्धि के' अहीं अबलम्बे !
पंकज दाहिनी अधोहस्त वश 
चरणसटल सिर चुसथि कृपारस 
कृपा बिराजथि अंग अनंगे 
अष्टसिद्धि के' अहीं अबलम्बे !
देविकृपा शिव अर्द्धनारीश्वर
विषय भोग शून्य मायक गहबर 
शान्ति अमियपद निधिक तरंगे
अष्टसिद्धि के' अहीं अबलम्बे !
यथासाध्य जप पूजन अर्चन 
हिय हेरथि माँ देखथि ने साधन 
वाकसिद्ध रमा उमा हे गंगे 
अष्टसिद्धि के' अहीं अबलम्बे !

शिव कुमार झा टिल्लू 
(Shiv Kumar Jha)