dahej mukt mithila

(एकमात्र संकल्‍प ध्‍यान मे-मिथिला राज्‍य हो संविधान मे) अप्पन गाम घरक ढंग ,अप्पन रहन - सहन के संग,अप्पन गाम-अप्पन बात में अपनेक सब के स्वागत अछि!अपन गाम -अपन घरअप्पन ज्ञान आ अप्पन संस्कारक सँग किछु कहबाक एकटा छोटछिन प्रयास अछि! हरेक मिथिला वाशी ईहा कहैत अछि... छी मैथिल मिथिला करे शंतान, जत्य रही ओ छी मिथिले धाम, याद रखु बस अप्पन गाम - अप्पन बात ,अप्पन मान " जय मैथिल जय मिथिला धाम" "स्वर्ग सं सुन्दर अपन गाम" E-mail: apangaamghar@gmail.com,madankumarthakur@gmail.com mo-9312460150

शनिवार, 12 जून 2021

गाय से जुड़ी कुछ रोचक जानकारी ।


1. गौ माता जिस जगह खड़ी रहकर आनंदपूर्वक चैन की सांस लेती है । वहां वास्तु दोष समाप्त हो जाते हैं । 

2. गौ माता में तैंतीस कोटी देवी देवताओं का वास है ।

3. जिस जगह गौ माता खुशी से रभांने लगे उस देवी देवता पुष्प वर्षा करते हैं । 

4. गौ माता के गले में घंटी जरूर बांधे ; गाय के गले में बंधी घंटी बजने से गौ आरती होती है । 

5. जो व्यक्ति गौ माता की सेवा पूजा करता है उस पर आने वाली सभी प्रकार की विपदाओं को गौ माता हर लेती है । 

6. गौ माता के खुर्र में नागदेवता का वास होता है । जहां गौ माता विचरण करती है उस जगह सांप बिच्छू नहीं आते । 

7. गौ माता के गोबर में लक्ष्मी जी का वास होता है । 

8. गौ माता के मुत्र में गंगाजी का वास होता है । 

9. गौ माता के गोबर से बने उपलों का रोजाना घर दूकान मंदिर परिसरों पर धुप करने से वातावरण शुद्ध होता है सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। 

10. गौ माता के एक आंख में सुर्य व दूसरी आंख में चन्द्र देव का वास होता है । 

11. गाय इस धरती पर साक्षात देवता है । 

12. गौ माता अन्नपूर्णा देवी है कामधेनु है । मनोकामना पूर्ण करने वाली है । 

13. गौ माता के दुध मे सुवर्ण तत्व पाया जाता है जो रोगों की क्षमता को कम करता है। 

14. गौ माता की पूंछ में हनुमानजी का वास होता है । किसी व्यक्ति को बुरी नजर हो जाये तो गौ माता की पूंछ से झाड़ा लगाने से नजर उतर जाती है । 

15. गौ माता की पीठ पर एक उभरा हुआ कुबड़ होता है । उस कुबड़ में सूर्य केतु नाड़ी होती है । रोजाना सुबह आधा घंटा गौ माता की कुबड़ में हाथ फेरने से रोगों का नाश होता है । 

16. गौ माता का दूध अमृत है। 

17. गौ माता धर्म की धुरी है। गौ माता के बिना धर्म कि कल्पना नहीं की जा सकती ।

18. गौ माता जगत जननी है।

19. गौ माता पृथ्वी का रूप है। 

20. गौ माता सर्वो देवमयी सर्वोवेदमयी है । गौ माता के बिना देवों वेदों की पूजा अधुरी है । 

21. एक गौ माता को चारा खिलाने से तैंतीस कोटी देवी देवताओं को भोग लग जाता है । 

22. गौ माता से ही मनुष्यों के गौत्र की स्थापना हुई है । 

23. गौ माता चौदह रत्नों में एक रत्न है । 

24. गौ माता साक्षात् मां भवानी का रूप है । 

25. गौ माता के पंचगव्य के बिना पूजा पाठ हवन सफल नहीं होते हैं । 

26. गौ माता के दूध घी मख्खन दही गोबर गोमुत्र से बने पंचगव्य हजारों रोगों की दवा है । इसके सेवन से असाध्य रोग मिट जाते हैं । 

27. गौ माता को घर पर रखकर सेवा करने वाला सुखी आध्यात्मिक जीवन जीता है । उनकी अकाल मृत्यु नहीं होती । 

28. तन मन धन से जो मनुष्य गौ सेवा करता है । वो वैतरणी गौ माता की पुछ पकड कर पार करता है। उन्हें गौ लोकधाम में वास मिलता है । 

28. गौ माता के गोबर से ईंधन तैयार होता है । 

29. गौ माता सभी देवी देवताओं मनुष्यों की आराध्य है; इष्ट देव है । 

30. साकेत स्वर्ग इन्द्र लोक से भी उच्चा गौ लोक धाम है।

31. गौ माता के बिना संसार की रचना अधुरी है ।

32. गौ माता में दिव्य शक्तियां होने से संसार का संतुलन बना रहता है । 

33. गाय माता के गौवंशो से भूमि को जोत कर की गई खेती सर्वश्रेष्ट खेती होती है । 

34. गौ माता जीवन भर दुध पिलाने वाली माता है । गौ माता को जननी से भी उच्चा दर्जा दिया गया है । 

35. जहां गौ माता निवास करती है वह स्थान तीर्थ धाम बन जाता है । 

36. गौ माता कि सेवा परिक्रमा करने से सभी तीर्थो के पुण्यों का लाभ मिलता है । 

37. जिस व्यक्ति के भाग्य की रेखा सोई हुई हो तो वो व्यक्ति अपनी हथेली में गुड़ को रखकर गौ माता को जीभ से चटाये गौ माता की जीभ हथेली पर रखे गुड़ को चाटने से व्यक्ति की सोई हुई भाग्य रेखा खुल जाती है । 

38. गौ माता के चारो चरणों के बीच से निकल कर परिक्रमा करने से इंसान भय मुक्त हो जाता है । 

39. गाय माता आनंदपूर्वक सासें लेती है; छोडती है । वहां से नकारात्मक ऊर्जा भाग जाती है और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है जिससे वातावरण शुद्ध होता है । 

40. गौ माता के गर्भ से ही महान विद्वान धर्म रक्षक गौ कर्ण जी महाराज पैदा हुए थे । 

41. गौ माता की सेवा के लिए ही इस धरा पर देवी देवताओं ने अवतार लिये हैं । 

42. जब गौ माता बछड़े को जन्म देती तब पहला दूध बांझ स्त्री को पिलाने से उनका बांझपन मिट जाता है । 

43. स्वस्थ गौ माता का गौ मूत्र को रोजाना दो तोला सात पट कपड़े में छानकर सेवन करने से सारे रोग मिट जाते हैं । 

44. गौ माता वात्सल्य भरी निगाहों से जिसे भी देखती है उनके ऊपर गौकृपा हो जाती है । 

45. गाय इस संसार का प्राण है । 

46. काली गाय की पूजा करने से नौ ग्रह शांत रहते हैं । जो ध्यानपूर्वक धर्म के साथ गौ पूजन करता है उनको शत्रु दोषों से छुटकारा मिलता है । 

47. गाय धार्मिक ; आर्थिक ; सांस्कृतिक व अध्यात्मिक दृष्टि से सर्वगुण संपन्न है । 

48. गाय एक चलता फिरता मंदिर है । हमारे सनातन धर्म में तैंतीस कोटि देवी देवता है । हम रोजाना तैंतीस कोटि देवी देवताओं के मंदिर जा कर उनके दर्शन नहीं कर सकते पर गौ माता के दर्शन से सभी देवी देवताओं के दर्शन हो जाते हैं । 

49. कोई भी शुभ कार्य अटका हुआ हो बार बार प्रयत्न करने पर भी सफल नहीं हो रहा हो तो गौ माता के कान में कहिये रूका हुआ काम बन जायेगा । 

50. जो व्यक्ति मोक्ष गौ लोक धाम चाहता हो उसे गौ व्रती बनना चाहिए । 

51. गौ माता सर्व सुखों की दातार है । 

हे मां आप अनंत ! आपके गुण अनंत ! इतना मुझमें सामर्थ्य नहीं कि मैं आपके गुणों का बखान कर सकूं ।

अगर आपको पोस्ट अच्छा लगा तो अपने मित्रो तक इसे जरूर पहुचाये

जय श्रीकृष्णा 

बुधवार, 9 जून 2021

बेरसाइतिक पूजा , साभार : सुश्री सीमा झा (mithilasanskar)

 बेरसाइतिक पूजा (नव विवाहित कनिया )

साभार : सुश्री सीमा झा (mithilasanskar)
सामाग्री –
1. बियैन-8 टा
2. डाली -8 टा
3. बोहनी-1
4. अहिवात
5. उड़ीदक दालि के बङ-14
6. सुतरी
7. सरवा -२
8. मईटक नाग-नगीन
9. केरा क पात
10. लावा
11. एकटा सरवा में दही
12. मुंग (फुलायल नवेद्यक वास्ते )
13. चना फुलायल
14. लाल कपङा
15. कनिया -पुतरा
16. साजी
17 अरवा चौर
18. जनॐ -एक जोङ आ गोटा सुपारी
19. फल ,फूल ,मिठाई
20. कांच हरैद ,दुईब,गोटा धनिया
21 बिन्नी (ललका कपङा में चौर,दुईब , हरैद बांधल)
22 .दूध
विधि -
एक दिन पहिने कनिया नहा धोय कए अरवा भोजन करथिन.
साँझ खन भगवती ,महादेव ,ब्राह्मण ,हनुमान आर गौरी कें गीत गावि, दुईब ,कांच हरैद ,धनिया (कनी )फेंट कए गौर बनत,जकरा ढउरल सरवा पर एकटा सिक्का पर गौरी राखि पान क पात स झापि ,पान क पातक ऊपर सिंदूरक गद्दी राखि ललका कपडा स झापि भगवति लग राखि देवेइ I
उङद दालि के फुला के १४ टा बड़ पकैल जायत ,जकरा सरेला पर सुतरी में गांथल जायत (बिना सुइया के) बड़ गुथल सुतरी के बोहनी के मुँह पर बांधल जायत I
केरा के पात पर सिन्दूर आ काजर सँ बिष-विषहारा लिखल जायत I
राति खन कनी मुंग आ बेसी बूंट (कला चना ) फुलय ल पड़तय I
वट सावित्री पूजा क दिन
नव कनियाँ नहा धो क सासुर स आयल नव कपङा पहिर के श्रृंगार कय ,खौछ लय ,भगवती क पूजा कय ,हाथ में साजी (जाही में कनिया पुतरा रहत ),आ माथ पर बोहनी (जाही में लाबा भरल रहत आ जकरा मुँह पर सुतरी में बांधल 14 टा बङ रहत )लय के भगवती के गोङ लागी सब संगे बङ क गाछ तर जेती
गाछ तर बोहनी में राखल लाबा कर के पात पर राखि देथिन आ ओही बोहनी में पानि भैर देथिन
गाछ तर अरिपन रहत ,एकटा अरिपन के ऊपर 7 टा बिअनि रहत ,आ सात टा डाली में फुलायल बूंट ,फल ,मिठाई राखल रहत
गाछ तर अहिवात जरायल जैत
एक टा डाली में चौर ,सुपारी जनऊ,पैसा फल -मिठाई राखल रहत जे पूजा के बाद पंडित क य देल जायत
आम क पात पर 60(साइठ )ठाम फुलायल मुंग आ फल -मिठाई के नवेद्य लगायल जायत
एकटा बियनि पर आ एक टा आम पर पांच टा सिन्दूर लगा बङ के गाछ के जैङ में ‍‍राखल जैत
अरिपन पर विष-विषहारा लिखल पात राखि ओही पर मईटक विष -विषहारा राखल जायत
कनिया एक टा बङ क पात केश में खोसती
सबटा ओरिआन बाद कनियाँ गौरी सबहक(सासूर बला,नहिअर बला जे राति में बनल आ विवाह बला ) आगु नवेद्य राखि फूल आ सिन्दूर लय गौरी पूजति
ओकरा बाद बिन्नी हाथ में लय जांघ तर बोहनी राखि कथा सुनति(कथा ब्लॉग में नीचां उपलब्ध भेटत )
कथा सुनला के बाद कनिया साङी के खूंट पर गाछ तर रखलाहा आम आ एक टा सिन्दूर क गद्दी ल के मौली धागा बांधैत गाछ के चारू तरफ पांच बेर घूमती
फेर गाछ तर राखल बियनि से गाछ के तीन बेर होंकैत गला मिलति
आब पुतरा के हाँथों कनिया के सिंदूरदान हेतई (कनिये करेती)
ओकरा बाद सबटा नवेद्य उसगरति ,आ विष-विषहरा के दूध लाबा चढेति
बोहनी में बांधल सबटा बङ के वायां हाथ के अंगुठा और अनामिका स तोरी के एक बेर आगु आ एक बेर पाछु फेकैत फकरा पढती-बङ लिय(पाछु ),मर दिय (आगु )
ओकरा बाद माथ पर फेर बोहनी उठेती ,हाथ में साजी लेती आ भगवती घर में एती
गाछ तर राखल डाली सेहो उठी के भगवती घर में रखायत
भगवती के गोङ लगी 7 टा अहिवाती के डाली देथिन आ सब पैघ सब के गोङ लागी आशीर्वाद लेती
कथा
एक टा गाम में एकटा ब्राह्मण अपना कनियाँ और सात टा पुत्र संगे खुशी खुशी रहेत छलाह Iहुनका घर के चौका में चिनवार लग एक टा नाग-नागिन अपन बिल बना क रहेत छल Iब्राह्मण क कनिया साँपक डरे प्रतिदिन भात पसेला क बाद ओकर गरम माँर साँप क बिल में ढारि दैत छलईथ जाहि सं साँप क सबटा पोआ(बच्चा ) सब मरि जाईत छल I निरंतर अपन पोआ सब के मरला सं क्रोधित भय नाग –नागिन एक दिन ब्राह्मण के श्राप देलखिन जे “जेना अहाँ हमार बच्चा सब के मारलउ तहिना अहाँ के वंश के सबटा बच्चा सब साँप के कटला से मरि जायत “I समयांतराल में ब्राह्मण के बङका बेटा के हर्षो- उल्लास सं विवाह भेलनि Iविवाहोपरांत ब्राह्मण बेटा कनियाँ के द्विरागमन करा अपना घर दिश बिदा भेला I रास्ता में किछु देर क वास्ते सुस्तेवा लेल एक टा वट वृक्ष क नीचा में दुनू बर कनियाँ बैसलाह Iओहि गाछ के जैङ में एकटा धोधैर चल जाहि में नाग-नागिन रहित छलईथ I नाग-नागिन धोधैर सं निकलि दुनू बर कनियाँ के डैस लेलखिन जाहि सं दुनू के मृत्यु भय गेल I ब्राह्मण क घर में दुःख के पहाङ टूटि परल I अहिना क कय ब्राहमण के छ्हो पुत्र के एक एक करि कय कसर्प-दोष सं मृत्यु भय गेलनि I ब्राह्मण –ब्राह्मणि चिंतित रहअ लगला आ अपन छोटका बेटा के हमेशा अपना आँखि के सामने रखैत छलैथ I बेटा के हमेशा झापि-तोपि के रखैत छलैथ कि कतहुँ साँप –बिच्छु ने काटि लई I ब्राह्मण क बेटा जखन पैघ भेला त धनोपार्जन हेतु घर से बाहर जेबा लेल जिद करय लगला I पहिने त हुनकर माता-पिता हुनका बाहर भेजवा लेल तैयार नई होईत छला ,फेर एही शर्त पर राजी भेला कि हमेशा अपना संगे एकटा छाता और जूता रखता I शर्त मानी ब्राह्मण बेटा घर सं बिदा भेला I जाईत-जाईत एकटा गाम लग पहुचला, गाम के बाहर एकटा धार छल ,ब्राह्मण बेटा जूता पहिर लेलथि आ धार के पार करअ लगला I तखने गाम के किछु लङकी सभहक झुण्ड सेहो धार पार करैत छल Iसब सखि सब ब्राह्मण के बेटा के जुत्ता पहिर पानि में जाईत देखि ठठहा के हंसअ लगली आ कह लगली कि – “हे देखू सखि सब केहन बुरबक छै ई ब्राह्मण बेटा पानि में जूता पहिरने अईछ “I ओहि झुण्ड में एकटा सामा धोबिन के बेटी सेहो छल से सखि सबके अपन तर्क देलखिन जे –हे सखि नई बुझलौं ,ब्राह्मण बेटा पानी में जूता एही दुआरे पहिरने ऐछ जाहि सं पनि में रहै बला साँप –कीङा ओकरा पैर मे नइ काटि लइ” I ब्राह्मण बेटा ओहि लङकी के तर्क सुनि चकित भेला I धार पार कय सब गोटा आगु बढ़ल ,धुप बेसी छल मुदा ब्राह्मण बेटा छाता अपना कांख तर दबने रहल, सब सखि सब मुँह झाँपी मुस्कुरैत रहलि आ सोचैत छलि ,जे एतेक धुप छै आ ई मानुष छत्ता कांख तर दबेने ऐछ Iबर रौउद छल आ गाम क उबर-खाबङ मैइटक रस्ता ,सब गोटा चलैत-चलैत थाईक गेल I रस्ता कात में एकटा बरका विशाल बङ क गाछ छल जकरा देख सब गोटा ओहि छाया में विश्राम करवा हेतु गाछ तर बैस रहल I ब्राह्मण बेटा जखने गाछ तर बैसला अपन कांख तर दबैल छत्ता खोइल ताइन लेलइथ I सब सखि सब फेर जोर सं हंस लागलि आ कह लागलि जे – “देखिअऊ इ मानुष के धुप छल त छत्ता कांख तर देवेने छल आ जखन गाछ तक छाया में बैसल ऐछ त छत्ता तनने ऐछ “I सामा धोबिन क बेटी जे ब्राह्मण बेटा के बार ध्यान सं देख रहल छालैथ,फेर अपन तर्क देलखिन जे –“ हे सखि सब अहाँ सब फेर नई बुझलौं ,इ ब्राह्मण बेटा गाछ पर रहै बला साँप-कीङा सं अपना क बचबै लेल गाछ तर छत्ता तनने ऐछ “I ब्राह्मण क बेटा जे बरि काल सं सामा बेटी के तर्क सुनैत छला ,ओकर बात सं ततेक प्रभावित भेला कि सोचलैथ कि अगर विवाह करब त एही चतुर कन्या सं करब Iब्राह्मण बेटा गाम क धोबिन लग गेला आ धोबिन सामा सं कहलखिन जे हम आहाँ क चतुर बेटी सं विवाह कर चाहैत छी I सामा धोबिन तैयार भय गेलि आ खुशी –खुशी दुनू के विवाह कय देलखिन I जखन विदागरी क समय आयल त सामा धोबिन कहलखिन जे –“हे बेटी हम त गरीब छी ,हमरा लग धन –दौलत किछु नहि अछि, अहाँ के हम विदागरी में कि दिय ?” सामा क बेटी ताहि पर उत्तर में कहलखिन जे –“हे माय अहाँ हमरा किछु नय मात्र कनी धान क लाबा ,कनी दूध ,बोहनी आ एक ता बियन दिय आ आशीर्वाद दिय जे हम अपना पति आ हुनकर वंश वृद्धि में सहायक होइयन I” सामा धोभिन सब चीज जे हुनकर बेटी कहलकैन ओरिआन कय क देलखिन आ आशीर्वाद दय दुनू बर कनियाँ के बिदा केलखिन Iब्राह्मण बेटा अपना कनियाँ क लय अपना गाम दिश चल लगला I चलैत-चलैत जखन दुनू गोटा थाईक गेला त विश्राम करवा लेल एक टा बङ गाछ के नीचा में रुकि गेला I सामा धोबिन क बेटी अपन माय क देल सबटा समान गाछ के निचा में राखि अपना वर संगे आराम करय लगलि I ओही बङ के जइङ में एकटा नाग अपना नागिन बिल में संगे रहैत छल Iगाछ के जैङ लग दूध, लाबा आ बोहनी में राखल पानि देखि नाग कय भूख और प्यास जागृत भय गेल आ नाग अपना बिल सं निकलि बाहर जेवाक लेल व्यग्र भ गेला I नागिन बार बार मना कर लागलैथ किन्तु नाग नइ मानलैथ आ बाहर आबि जहिना बोहनी में राखल पानी के पिबा लेल ओहि में मुहँ देलखिन, धोबिन बेटी नाग समेत बोहनी के हाथ सं पकङि अपना जाँघ तर में दाबि क राखि लेलैथ I नाग कतबो प्रयाश केलैथ निकलि न हि पेलैथI जखन बरि काल बितला क बादो नाग घुरि क नहीं अयलाह त नागिन बाहर निकललि आ देखलखिन जे नाग के त एकटा नव कनियाँ पकङने अछि I नागिन ओकरा से कहलखिन कि नाग क छोङि दिअऊ ,परन्तु सामा बेटी नइ मनलखिन I नागिन के निरंतर अनुनय –विनय क बाद धोबिन बेटी एकटा शर्त राखलखिन जे –“हे नागिन हम अहाँ के पति नाग राज के तखने छोङबनि जखन अहाँ हमरा पति आ हुनकर वंश के सर्प-दोष सं मुक्त करब संगहि हुनकर छबो भाई के जे मरि गेल छैथ के पुनः जीवित करब “ I नागिन विवश छलि धोबिन बेटी के शर्त मानवा लेल I नागिन स्वर्ग सं अमृत अनलेइथ आ ब्राह्मण के सबटा पुत्र ,पुत्रवधु के जीवित कय सर्प –दोष सं मुक्त कय सब के आशीर्वाद देलखिन I तखन जा क धोबिन बेटी नाग के छोङलखिन और अपन करनी लेल क्षमा माँगी नाग –नागिन के प्रणाम केलैथ I तखन नाग नागिन ब्राह्मण के सबटा पुत्र आ पुत्रबधु सबके आशीर्वाद दैत कहलखिन –“जेष्ठ मॉस के अमावश्या दिन विवाहित कनियाँ सब ज्यों बङ के गाछ के पूजा करति आ बिष-विषहारा के दूध लाबा चढ़ा हुनकर पूजा करती तँ हुनकर सब के सुहाग अखण्ड रहतेंन “I
नाग –नागिन सं आशीर्वाद लय ब्राह्मण क सातों पुत्र आ सातों कनिया जखन अपना घर पहूँचला त ब्राह्मण –ब्राह्मणि के प्रसन्ता के नई त कुनु ओर रहलनि न छोङ आ दुनू गोटा धोबिन सामा के बेटी के बहुत बहुत आशीर्वाद देलखिन Iओकरा बाद सब गोटा प्रसन्ता पूर्वक रहअ लगला I
समाप्त
फ़ोटो साभार : आनंद झा आ सीमा झा, राधा कुमारी, অশ্বিন ৰাজপুত