dahej mukt mithila

(एकमात्र संकल्‍प ध्‍यान मे-मिथिला राज्‍य हो संविधान मे) अप्पन गाम घरक ढंग ,अप्पन रहन - सहन के संग,अप्पन गाम-अप्पन बात में अपनेक सब के स्वागत अछि!अपन गाम -अपन घरअप्पन ज्ञान आ अप्पन संस्कारक सँग किछु कहबाक एकटा छोटछिन प्रयास अछि! हरेक मिथिला वाशी ईहा कहैत अछि... छी मैथिल मिथिला करे शंतान, जत्य रही ओ छी मिथिले धाम, याद रखु बस अप्पन गाम - अप्पन बात ,अप्पन मान " जय मैथिल जय मिथिला धाम" "स्वर्ग सं सुन्दर अपन गाम" E-mail: apangaamghar@gmail.com,madankumarthakur@gmail.com mo-9312460150

गुरुवार, 5 अगस्त 2021

मृत्यु

 (1) प्रश्न :- मृत्यु न होती तो क्या होता ?

उत्तर :- तो बहुत अव्यवस्था होती । पृथ्वी की जनसंख्या बहुत बढ़ जाती । और यहाँ पैर धरने का भी स्थान न होता ।

(2) प्रश्न :- क्या मृत्यु होना बुरी बात है ?

उत्तर :- नहीं, मृत्यु होना कोई बुरी बात नहीं ये तो एक प्रक्रिया है शरीर परिवर्तन की ।

(3) प्रश्न :- यदि मृत्यु होना बुरी बात नहीं है तो लोग इससे इतना डरते क्यों हैं ?

उत्तर :- क्योंकि उनको मृत्यु के वैज्ञानिक स्वरूप की जानकारी नहीं है । वे अज्ञानी हैं । वे समझते हैं कि मृत्यु के समय बहुत कष्ट होता है । उन्होंने वेद, उपनिषद, या दर्शन को कभी पढ़ा नहीं वे ही अंधकार में पड़ते हैं और मृत्यु से पहले कई बार मरते हैं ।

(4) प्रश्न :- तो मृत्यु के समय कैसा लगता है ? थोड़ा सा तो बतायें ?

उत्तर :- जब आप बिस्तर में लेटे लेटे नींद में जाने लगते हैं तो आपको कैसा लगता है ?? ठीक वैसा ही मृत्यु की अवस्था में जाने में लगता है उसके बाद कुछ अनुभव नहीं होता । जब आपकी मृत्यु किसी हादसे से होती है तो उस समय आमको मूर्छा आने लगती है, आप ज्ञान शून्य होने लगते हैं जिससे की आपको कोई पीड़ा न हो । तो यही ईश्वर की सबसे बड़ी कृपा है कि मृत्यु के समय मनुष्य ज्ञान शून्य होने लगता है और सुषुुप्तावस्था में जाने लगता है ।

(5) प्रश्न :- मृत्यु के डर को दूर करने के लिए क्या करें ?

उत्तर :- जब आप वैदिक आर्ष ग्रन्थ ( उपनिषद, दर्शन आदि ) का गम्भीरता से अध्ययन करके जीवन,मृत्यु, शरीर, आदि के विज्ञान को जानेंगे तो आपके अन्दर का, मृत्यु के प्रति भय मिटता चला जायेगा और दूसरा ये की योग मार्ग पर चलें तो स्वंय ही आपका अज्ञान कमतर होता जायेगा और मृत्यु भय दूर हो जायेगा । आप निडर हो जायेंगे । जैसे हमारे बलिदानियों की गाथायें आपने सुनी होंगी जो राष्ट्र की रक्षा के लिये बलिदान हो गये । तो आपको क्या लगता है कि क्या वो ऐसे ही एक दिन में बलिदान देने को तैय्यार हो गये थे ? नहीं उन्होने भी योगदर्शन, गीता, साँख्य, उपनिषद, वेद आदि पढ़कर ही निर्भयता को प्राप्त किया था । योग मार्ग को जीया था, अज्ञानता का नाश किया था । 

महाभारत के युद्ध में भी जब अर्जुन भीष्म, द्रोणादिकों की मृत्यु के भय से युद्ध की मंशा को त्याग बैठा था तो योगेश्वर कृष्ण ने भी तो अर्जुन को इसी सांख्य, योग, निष्काम कर्मों के सिद्धान्त के माध्यम से जीवन मृत्यु का ही तो रहस्य समझाया था और यह बताया कि शरीर तो मरणधर्मा है ही तो उसी शरीर विज्ञान को जानकर ही अर्जुन भयमुक्त हुआ । तो इसी कारण तो वेदादि ग्रन्थों का स्वाध्याय करने वाल मनुष्य ही राष्ट्र के लिए अपना शीश कटा सकता है, वह मृत्यु से भयभीत नहीं होता , प्रसन्नता पूर्वक मृत्यु को आलिंगन करता है ।

(6) प्रश्न :- किन किन कारणों से पुनर्जन्म होता है ?

उत्तर :- आत्मा का स्वभाव है कर्म करना, किसी भी क्षण आत्मा कर्म किए बिना रह ही नहीं सकता । वे कर्म अच्छे करे या फिर बुरे, ये उसपर निर्भर है, पर कर्म करेगा अवश्य । तो ये कर्मों के कारण ही आत्मा का पुनर्जन्म होता है । पुनर्जन्म के लिए आत्मा सर्वथा ईश्वराधीन है ।

(7) प्रश्न :- पुनर्जन्म कब कब नहीं होता ?

उत्तर :- जब आत्मा का मोक्ष हो जाता है तब पुनर्जन्म नहीं होता है ।

(8) प्रश्न :- मोक्ष होने पर पुनर्जन्म क्यों नहीं होता ?

उत्तर :- क्योंकि मोक्ष होने पर स्थूल शरीर तो पंचतत्वों में लीन हो ही जाता है, पर सूक्ष्म शरीर जो आत्मा के सबसे निकट होता है, वह भी अपने मूल कारण प्रकृति में लीन हो जाता है ।

(9) प्रश्न :- मोक्ष के बाद क्या कभी भी आत्मा का पुनर्जन्म नहीं होता ?

उत्तर :- मोक्ष की अवधि तक आत्मा का पुनर्जन्म नहीं होता । उसके बाद होता है ।

(10) प्रश्न :- लेकिन मोक्ष तो सदा के लिए होता है, तो फिर मोक्ष की एक निश्चित अवधि कैसे हो सकती है ?

उत्तर :- सीमित कर्मों का कभी असीमित फल नहीं होता । यौगिक दिव्य कर्मों का फल हमें ईश्वरीय आनन्द के रूप में मिलता है, और जब ये मोक्ष की अवधि समाप्त होती है तो दुबारा से ये आत्मा शरीर धारण करती है ।

(11) प्रश्न :- मोक्ष की अवधि कब तक होती है ?

उत्तर :- मोक्ष का समय ३१ नील १० खरब ४० अरब वर्ष है, जब तक आत्मा मुक्त अवस्था में रहती है ।

(12) प्रश्न :- मोक्ष की अवस्था में स्थूल शरीर या सूक्ष्म शरीर आत्मा के साथ रहता है या नहीं ?

उत्तर :- नहीं मोक्ष की अवस्था में आत्मा पूरे ब्रह्माण्ड का चक्कर लगाता रहता है और ईश्वर के आनन्द में रहता है, बिलकुल ठीक वैसे ही जैसे कि मछली पूरे समुद्र में रहती है । और जीव को किसी भी शरीर की आवश्यक्ता ही नहीं होती।

(13) प्रश्न :- मोक्ष के बाद आत्मा को शरीर कैसे प्राप्त होता है ?

उत्तर :- सबसे पहला तो आत्मा को कल्प के आरम्भ ( सृष्टि आरम्भ ) में सूक्ष्म शरीर मिलता है फिर ईश्वरीय मार्ग और औषधियों की सहायता से प्रथम रूप में अमैथुनी जीव शरीर मिलता है, वो शरीर सर्वश्रेष्ठ मनुष्य या विद्वान का होता है जो कि मोक्ष रूपी पुण्य को भोगने के बाद आत्मा को मिला है । जैसे इस वाली सृष्टि के आरम्भ में चारों ऋषि विद्वान ( वायु , आदित्य, अग्नि , अंगिरा ) को मिला जिनको वेद के ज्ञान से ईश्वर ने अलंकारित किया । क्योंकि ये ही वो पुण्य आत्मायें थीं जो मोक्ष की अवधि पूरी करके आई थीं ।

(14) प्रश्न :- मोक्ष की अवधि पूरी करके आत्मा को मनुष्य शरीर ही मिलता है या जानवर का ?

उत्तर :- मनुष्य शरीर ही मिलता है ।

(15) प्रश्न :- क्यों केवल मनुष्य का ही शरीर क्यों मिलता है ? जानवर का क्यों नहीं ?

उत्तर :- क्योंकि मोक्ष को भोगने के बाद पुण्य कर्मों को तो भोग लिया , और इस मोक्ष की अवधि में पाप कोई किया ही नहीं तो फिर जानवर बनना सम्भव ही नहीं , तो रहा केवल मनुष्य जन्म जो कि कर्म शून्य आत्मा को मिल जाता है ।

(16) प्रश्न :- मोक्ष होने से पुनर्जन्म क्यों बन्द हो जाता है ?

उत्तर :- क्योंकि योगाभ्यास आदि साधनों से जितने भी पूर्व कर्म होते हैं ( अच्छे या बुरे ) वे सब कट जाते हैं । तो ये कर्म ही तो पुनर्जन्म का कारण हैं, कर्म ही न रहे तो पुनर्जन्म क्यों होगा ??

(17) प्रश्न :- पुनर्जन्म से छूटने का उपाय क्या ~है~ ?

उत्तर :- पुनर्जन्म से छूटने का उपाय है योग मार्ग से मुक्ति या मोक्ष का प्राप्त करना ।

(18) प्रश्न :- पुनर्जन्म में शरीर किस आधार पर मिलता है ?

उत्तर :- जिस प्रकार के कर्म आपने एक जन्म में किए हैं उन कर्मों के आधार पर ही आपको पुनर्जन्म में शरीर मिलेगा ।

(19) प्रश्न :- कर्म कितने प्रकार के होते हैं ?

उत्तर :- मुख्य रूप से कर्मों को तीन भागों में बाँटा गया है :- सात्विक कर्म , राजसिक कर्म , तामसिक कर्म ।

(१) सात्विक कर्म :- सत्यभाषण, विद्याध्ययन, परोपकार, दान, दया, सेवा आदि ।

(२) राजसिक कर्म :- मिथ्याभाषण, क्रीडा, स्वाद लोलुपता, स्त्रीआकर्षण, चलचित्र आदि ।

(३) तामसिक कर्म :- चोरी, जारी, जूआ, ठग्गी, लूट मार, अधिकार हनन आदि ।

और जो कर्म इन तीनों से बाहर हैं वे दिव्य कर्म कलाते हैं, जो कि ऋषियों और योगियों द्वारा किए जाते हैं । इसी कारण उनको हम तीनों गुणों से परे मानते हैं । जो कि ईश्वर के निकट होते हैं और दिव्य कर्म ही करते हैं ।

(20) प्रश्न :- किस प्रकार के कर्म करने से मनुष्य योनि प्राप्त होती है ?

उत्तर :- सात्विक और राजसिक कर्मों के मिलेजुले प्रभाव से मानव देह मिलती है , यदि सात्विक कर्म बहुत कम है और राजसिक अधिक तो मानव शरीर तो प्राप्त होगा परन्तु किसी नीच कुल में , यदि सात्विक गुणों का अनुपात बढ़ता जाएगा तो मानव कुल उच्च ही होता जायेगा । जिसने अत्यधिक सात्विक कर्म किए होंगे वो विद्वान मनुष्य के घर ही जन्म लेगा ।

।। ओ३म्।।

शुक्रवार, 23 जुलाई 2021

टाईम निकाल कर एक बार अवश्य पढ़े


``एक बड़े मुल्क के राष्ट्रपति के बेडरूम की खिड़की सड़क की ओर खुलती थी। रोज़ाना हज़ारों आदमी और वाहन उस सड़क से गुज़रते थे। राष्ट्रपति इस बहाने जनता की परेशानी और दुःख-दर्द को निकट से जान लेते।

राष्ट्रपति ने एक सुबह खिड़की का परदा हटाया। भयंकर सर्दी। आसमान से गिरते रुई के फाहे। दूर-दूर तक फैली सफ़ेद चादर। अचानक उन्हें दिखा कि बेंच पर एक आदमी बैठा है। ठंड से सिकुड़ कर गठरी सा होता हुआ ।

राष्ट्रपति ने पीए को कहा -उस आदमी के बारे में जानकारी लो और उसकी ज़रूरत पूछो।

दो घंटे बाद पीए ने राष्ट्रपति को बताया - सर, वो एक भिखारी है। उसे ठंड से बचने के लिए एक अदद कंबल की ज़रूरत है।

राष्ट्रपति ने कहा -ठीक है, उसे कंबल दे दो।

अगली सुबह राष्ट्रपति ने खिड़की से पर्दा हटाया। उन्हें घोर हैरानी हुई। वो भिखारी अभी भी वहां जमा है। उसके पास ओढ़ने का कंबल अभी तक नहीं है।

राष्ट्रपति गुस्सा हुए और पीए से पूछा - यह क्या है? उस भिखारी को अभी तक कंबल क्यों नहीं दिया गया?

पीए ने कहा -मैंने आपका आदेश सेक्रेटरी होम को बढ़ा दिया था। मैं अभी देखता हूं कि आदेश का पालन क्यों नहीं हुआ।

थोड़ी देर बाद सेक्रेटरी होम राष्ट्रपति के सामने पेश हुए और सफाई देते हुए बोले - सर, हमारे शहर में हज़ारों भिखारी हैं। अगर एक भिखारी को कंबल दिया तो शहर के बाकी भिखारियों को भी देना पड़ेगा और शायद पूरे मुल्क में भी। अगर न दिया तो आम आदमी और मीडिया हम पर भेदभाव का इल्ज़ाम लगायेगा।

राष्ट्रपति को गुस्सा आया - तो फिर ऐसा क्या होना चाहिए कि उस ज़रूरतमंद भिखारी को कंबल मिल जाए।

सेक्रेटरी होम ने सुझाव दिया -सर, ज़रूरतमंद तो हर भिखारी है। आपके नाम से एक 'कंबल ओढ़ाओ, भिखारी बचाओ' योजना शुरू की जाये। उसके अंतर्गत मुल्क के सारे भिखारियों को कंबल बांट दिया जाए।

राष्ट्रपति खुश हुए। अगली सुबह राष्ट्रपति ने खिड़की से परदा हटाया तो देखा कि वो भिखारी अभी तक बेंच पर बैठा है। राष्ट्रपति आग-बबूला हुए। सेक्रेटरी होम तलब हुए। 

उन्होंने स्पष्टीकरण दिया -सर, भिखारियों की गिनती की जा रही है ताकि उतने ही कंबल की खरीद हो सके।

राष्ट्रपति दांत पीस कर रह गए। अगली सुबह राष्ट्रपति को फिर वही भिखारी दिखा वहां। खून का घूंट पीकर रहे गए वो।

सेक्रेटरी होम की फ़ौरन पेशी हुई।

विनम्र सेक्रेटरी ने बताया -सर, ऑडिट ऑब्जेक्शन से बचने के लिए कंबल ख़रीद का शार्ट-टर्म कोटेशन डाला गया है। आज शाम तक कंबल ख़रीद हो जायेगी और रात में बांट भी दिए जाएंगे।

राष्ट्रपति ने कहा -यह आख़िरी चेतावनी है। अगली सुबह राष्ट्रपति ने खिड़की पर से परदा हटाया तो देखा बेंच के इर्द-गिर्द भीड़ जमा है। राष्ट्रपति ने पीए को भेज कर पता लगाया। 

पीए ने लौट कर बताया -कंबल नहीं होने के कारण उस भिखारी की ठंड से मौत हो गयी है।

गुस्से से लाल-पीले राष्ट्रपति ने फौरन से सेक्रेटरी होम को तलब किया। 

सेक्रेटरी होम ने बड़े अदब से सफाई दी -सर, खरीद की कार्यवाही पूरी हो गई थी। आनन-फानन में हमने सारे कंबल बांट भी दिए। मगर अफ़सोस कंबल कम पड़ गये।

राष्ट्रपति ने पैर पटके -आख़िर क्यों? मुझे अभी जवाब चाहिये।

सेक्रेटरी होम ने नज़रें झुकाकर बोले: श्रीमान पहले हमने कम्बल अनुसूचित जाती ओर जनजाती के लोगो को दिया. फिर अल्पसंख्यक लोगो को. फिर ओ बी सी ... करके उसने अपनी बात उनके सामने रख दी. आख़िर में जब उस भिखारी का नंबर आया तो कंबल ख़त्म हो गए।

राष्ट्रपति चिंघाड़े -आखिर में ही क्यों?

सेक्रेटरी होम ने भोलेपन से कहा -सर, इसलिये कि उस भिखारी की जाती ऊँची थी और  वह आरक्षण की श्रेणी में नही आता था, इसलिये उस को नही दे पाये ओर जब उसका नम्बर आया तो कम्बल ख़त्म हो गये. 

नोट : वह बड़ा मुल्क भारत है जहाँ की योजनाएं इसी तरह चलती हैं और कहा जाता है कि भारत में सब समान हैं सबका बराबर का हक़ है।

- किसी ने फ़ॉर्वर्ड किया था अच्छा लगा है इसलिए आपके साथ सांझा कर रहा हूँ।.... इतना फारवर्ड करो की लोगों की आंखें खुल जायें। 

जयभारत........

👍👍

शुक्रवार, 16 जुलाई 2021

मत-त्रय-समन्वय

मत-त्रय-समन्वय

(शंकराचार्य, रामानुजाचार्य और मध्वाचार्य)~~~~~~~~~~

ईश और आत्मा एक ही है.. दोनों चैतन्य(awareness)हैं-शंकर..

ईश और आत्मा में फल और स्वाद की तरह एक्य है तथा दोनों अग्नि और स्फुल्लिंग की तरह हैं तथा दोनों का गुणात्मक अद्वैत तथा मात्रात्मक द्वैत है-रामानुज..

ईश और आत्मा दोनों भिन्न हैं तथा उनमें सेव्य और सेवक के भाव हैं-मध्व..

वेदानुसार, ईश और आत्मा शरीर में सह-अस्तित्व में हैं(द्वा सुपर्णासयुजासखाया..)

गीतानुसार, ईश आत्मायुक्त शरीर में प्रवेश करते हैं(मानुषींतनुमाश्रितम्..)

मानव शरीर में आत्मा ईश से, धात्विक तार में विद्युद्धारा की तरह मिल जाते हैं..

आत्मा(पराप्रकृति) और शरीर(अपराप्रकृति) में प्रकृति के उभयावयव हैं..स्वामी का घर सेवक द्वारा उपयुज्य है..

विद्युत्मय धात्विक तार ही विद्युत है(अद्वैत)..

विद्युत् शक्ति का बड़ा भाग तथा तार छोटा धात्विक भाग है.. ईश आत्मा को आँख की तरह उपयोग करता है(विशिष्टाद्वैत)..

विद्युत एलेक्ट्रोन की धारा तथा तार स्फटिकों की श्रृंखला है और दोनों भिन्न हैं(द्वैतवाद)..

'त्वमेवाहम्'-शंकर का उद्घोष है..

'तवैवाहम्'-रामानुज का उद्घोष है..

'तस्यैवाहम्'-मध्व का उद्घोष है..

विद्युत्धारा और धात्विक तार की उपमा यहाँ सर्वोत्कृष्ट है..

यदि विद्युत् शक्तिगृह में हो और घर में अनेक विद्युत -रहित तार हो तो अद्वैत के अनुसार विद्युत और तार(ऊर्जा और पदार्थ) परस्पर परिवर्तनीय होने के कारण एक ही है.. यदि यह सत्य है तो विद्युतरहित तार में भी झटका देना चाहिए.. विशिष्टाद्वैत के अनुसार, विद्युत और तार अवियोज्य है-यह भी असहज प्रतीत होता है क्योंकि दोनों ही अलग और दूर हैं.. द्वैत के अनुसार विद्युत शक्तिगृह मेहो तथा धात्विक तार यहाँ घर में हो तो दोनों ही भिन्न हैं..

सर्वव्यापी विद्युत और विद्युतीकृत तार व्यावहारिक अर्थ में एकरूप हैं(शंकर)..अ-पार्थक्य के कारण वे एक ही माने जाने योग्य हैं(रामानुज)..

वेद के अनुसार ईश(चैतन्य) श्रृष्टि में प्रवेश किया(तदेवानुप्राविशत्..), किन्तु चैतन्य के सर्वत्र विद्यमान नहीं होने से ईश का प्रवेश आंशिक है.. यदि कोई घर प्रवेश करे तो वह किसी एक भाग में ही उपलभ्य है.. अतस्तु कुछ खास भक्त-जनों के अतिरिक्त,हर जीवात्मा चेतन नहीं है..

ईश चैतन्य के अतिरिक्त 'विशिष्ट ज्ञान से भी चिह्नित है जो सम्बन्धों से सम्बन्धित कहा जा सकता है..

अब समझना है कि तीनों मत एक ही स्थिति के तीन दृष्टिकोण हैं..

विद्युत-प्रबाहित तार को हर व्यवहार में तार कहना क्योंकि छूने पर आघात देता है(शंकर)..

भिन्न होते हुए भी धारा-प्रबाह की दशा में अपृथक नहीं हो सकते(रामानुज)..

शक्तिशाली सूक्ष्मदर्शी से हम एलेक्ट्रोन-धारा(विद्युत) को स्फटिक-श्रृंखला(तार) से भिन्न-भिन्न देख सकते हैं(मध्व)..

इस प्रकार तीनों मतों का पारस्परिक सम्बन्ध जो एक दूसरेके विरुद्ध नहीं होते..

पर यदि शक्ति-गृह की शक्ति तथा विद्युतरहित तार के मध्य ये त्रिमत ले आना हास्यास्पद होगा..हाँ, विद्युत के प्रबाह-योग से घर पर रखे तार में तो विजली आ ही सकती है..

ईश और आत्मा दोनों में चेतनता(awareness) है..शंकर कहते हैं-आत्मा ही ईश है.. रामानुज कहते हैं-ईश से आत्मा का पृथकत्व असम्भव है.. मध्व कहतेहैं-गुणात्मक अन्तर से ईश और आत्मा भिन्न हैं..

(भले विद्युत शक्तिगृह में हो,आपके घर के रखे अच्छे तार उच्चात्मा के तथा बोरे बाँधनेवाले तार हीनात्मा के प्रतीक हैं..

तीनों मतों में ईश 'चैतन्य(awareness) है जो ईश और आत्मा में है.. आत्मा ही ईश है(शंकर)..आत्मा से ईश का विलगाव असम्भव है(रामानुज)..भिन्न गुणों वाले होने के कारण ईश और आत्मा पृथक हैं(मध्व)..

मूलाधार यह है कि ईश चैतन्य है, चयनित आत्माओं के लिए.. श्रृष्टि में अक्रिय वस्तुओं में चेतनता नहीं है.. योजक 'ईश' को चैतन्य-तल पर युज्य आत्मा कह सकते हैं जैसे सेववाले को ऐसेव! कहते हैं..

ईश अकल्पनीय है, चेतनता कल्पनीय है.. गीतानुसार, ईश अज्ञेयहै(मां तु वेद न..)वेदानुसार भी अपरिमेय है(नैषा तर्केण..) ईश स्वशक्ति से सोच सकता है तथा उसे चेतनता की आवश्यकता नहीं है.. वह स्वयं चेतनता है..

शंकर कोपूर्वमीमांसकों, नास्तिकों, बुद्धवादियों से कहना पड़ा-आत्मा ईश है.. आत्मा है तो ईश अवश्य है.. परिणाम हुआ कि सभी नास्तिक स्वयं को अस्तित्व-मय मानकर ईश समझने लगे.. इससे नास्तिकों को आस्तिक बनने में सहायता मिली..दूसरे स्तर पर उन्हें अपना 'आत्मा' होना सिखाया गया.. शंकर नेकहा-'ईश्वरानुग्रहादेव..'(ईश बनने हेतु ईशकृपा चाहिए ही..)

मानवान्तरण के अर्थ में शंकर ने आत्मा को ईश कहा..किन्तु विरूपित अर्थ में भी सत्य यह है कि 'प्रत्येक आत्मा को ईश होने का अवसर प्राप्य है'..मानवावतार मात्र ईशेच्छा से सम्भावित होने के कारण 'भक्ति' से सम्भव नहीं है.. भक्ति पर प्रयास अवश्य हो..

रामानुज के समय भक्त-जन मानवावतार हेतु ईशोपासना में लगे थे.. उसने कहा-आप ईश के ही अंश हैं, किन्तु इस सान्त्वना से काम न चला.. अकल्पनीय ईश का कोई ज्ञात भाग(आत्मा) कैसे होगा!..रामानुज ने धीरे धीरे उन्हें शान्त किया कि ईश और आत्मा दोनों चैतन्यमय हैं..

और फिर-मध्व ने बाद में उन्हें ,समझाया कि ईश और आत्मा में द्वित्व है.. आत्मा ज्योंही ईशत्व की कामना करता है, वह भाग्य से विफल हो जाता है.. अतः अपनी ओर से ईच्छा न रखें..

विज्ञान के अनुसार-ईश्वर अकल्प्य है तथा आत्मा कल्प्य स्नायविक ऊर्जा और स।जन का भाग..आकांक्षा-रहित होकर आत्मा का 'ईश' होना सबके हेतु एक मुक्त अवसर है.. अतः, तीनों मत त्रिकालसत्य है, अन्तर मात्र प्रापक की आध्यात्मिक अवस्था की है..

शंकराचार्य को शिव, रामानुजाचार्य को विष्णु तथा मध्वाचार्य को ब्रह्मा स्वरूप स्वीकार करना ही हमारी सहृदयता है..

गुरुवार, 8 जुलाई 2021

नए मंत्रियों को बांटे गए विभाग


  अमित शाह को मौजूदा मंत्रालयों के साथ नए बने सहाकारिता मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई।

पीयूष गोयल से रेल मंत्रालय वापस ले लिया गया। वह वाणिज्य, उद्योग और कपड़ा मंत्रालय संभालेंगे।

अश्विनी वैष्णव अब रेल और सूचना प्रसारण मंत्रालय की जिम्मेदारी का निर्वहन करेंगे।

स्मृति ईरानी को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के साथ-साथ स्वच्छ भारत मिशन की जिम्मेदारी भी दी गई।

ज्योतिरादित्य सिंधिया को नागरिक उड्डयन मंत्रालय की कमान दी गई।

पुरुषोत्तम रूपाला डेयरी और फिशरीज मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालेंगे।

अनुराग ठाकुर को खेल और युवक कल्याण मंत्रालय का जिम्मा दिया गया।

गिरिराज सिंह को ग्रामीण विकास मंत्रालय की देख-रेख की जिम्मेदारी दी गई।

भूपेंद्र यादव को श्रम और पर्यावरण मंत्रालय सौंपा गया।

धर्मेंद्र प्रधान को पेट्रोलियम मंत्रालय से हटाकर शिक्षा मंत्रालय सौंपा गया।

हरदीप सिंह पुरी से नागरिक उड्डयन मंत्रालय लेकर पेट्रोलियम, शहरी विकास और आवास मंत्रालय दिया गया।

पशुपति पारस को खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई।

किरन रिजिजू को खेल मंत्रालय से हटाकर संस्कृति मंत्रालय का जिम्मा सौंपा गया।

सर्बानंद सोनोवाल को आयुष मंत्रालय के साथ-साथ उत्तर-पूर्व के मामलों की भी जिम्मेदारी दी गई।

ये हैं 30 कैबिनेट मंत्री

मंत्री मंत्रालय

राजनाथ सिंह रक्षा

अमित शाह गृह और सहकारिता

नितिन गडकरी सड़क परिवहन

निर्मला सीतारमण वित्त एवं कॉर्पोरेट मामले

नरेंद्र सिंह तोमर कृषि एवं ग्रामीण विकास

डॉ. एस. जयशंकर विदेश मंत्री

अर्जुन मुंडा अनुसूचित जनजाति कल्याण

स्मृति ईरानी महिला एवं बाल विकास

पीयूष गोयल वाणिज्य, उद्योग, उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण एवं कपड़ा

धर्मेंद्र प्रधान शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमिता

प्रह्लाद जोशी संसदीय कार्य, कोयला और खनन

नारायण राणे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम

सर्बानंद सोनोवाल बंदरगाह, पोर्ट, जलमार्ग मंत्री और आयुष

मुख्तार अब्बास नकवी अल्पसंख्यक मामले

डॉ. वीरेंद्र कुमार सामाजिक न्याय और अधिकारिता

गिरिराज सिंह ग्रामीण विकास और पंचायती राज

ज्योतिरादित्य सिंधिया नागरिक उड्डयन

रामचंद्र प्रसाद सिंह स्टील

अश्विनी वैष्णव रेल, संचार मंत्री, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी

पशुपति कुमार पारस खाद्य प्रसंस्करण उद्योग

गजेंद्र सिंह शेखावत जल शक्ति

किरण रिजिजू कानून और न्याय मंत्री

राज कुमार सिंह बिजली, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा

हरदीप सिंह पुरी पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, आवास और शहरी मामले

मनसुख मंडाविया स्वास्थ्य, परिवार कल्याण, रसायन और उर्वरक

भूपेंद्र यादव पर्यावरण, वन, जलवायु परिवर्तन, श्रम और रोजगार

महेंद्र नाथ पांडेय भारी उद्योग मंत्री

पुरुषोत्तम रूपाला मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी

जी किशन रेड्डी संस्कृति, पर्यटन और उत्तर पूर्वी क्षेत्र का विकास

अनुराग सिंह ठाकुर सूचना एवं प्रसारण, युवा मामले और खेल

स्वतंत्र प्रभार में अब सिर्फ दो राज्य मंत्री

मंत्री मंत्रालय

राव इंद्रजीत सिंह सांख्यिकी, कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय, कॉर्पोरेट मामले

डॉ. जितेंद्र सिंह विज्ञान, प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान, प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष विभाग

राज्य मंत्रियों के विभाग

मंत्री मंत्रालय

श्रीपद नाईक बंदरगाह, जहाजरानी, जलमार्ग और पर्यटन

फग्गन सिंह कुलस्ते स्टील मंत्रालय और ग्रामीण विकास

प्रह्लाद सिंह पटेल जल शक्ति और खाद्य प्रसंस्करण

अश्विनी कुमार चौबे उपभोक्ता मामले, खाद्य, सार्वजनिक वितरण, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन

अर्जुन राम मेघवाल संसदीय कार्य और संस्कृति

जनरल वीके सिंह सड़क एवं परिवहन और नागरिक उड्डयन

कृष्णपाल गुर्जर विद्युत और भारी उद्योग

रावसाहेब दानवे रेल, कोयला और खनन

रामदास आठवले सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता

साध्वी निरंजन ज्योति उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण, ग्रामीण विकास

संजीव बालियान पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन

नित्यानंद राय गृह

पंकज चौधरी वित्त

अनुप्रिया सिंह पटेल वाणिज्य और उद्योग

एसपी सिंह बघेल कानून और न्याय

राजीव चंद्रशेखर कौशल विकास, उद्यमिता, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी

शोभा करंदलाजे कृषि और किसान कल्याण

भानु प्रताप सिंह वर्मा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम

दर्शना विक्रम जार्दोश कपड़ा और रेल

वी मुरलीधरन विदेश और संसदीय कार्य मामले

मीनाक्षी लेखी विदेश और संस्कृति

सोम प्रकाश वाणिज्य एवं उद्योग

रेणुका सिंह सरुता जनजाति कल्याण

रामेश्वर तेली पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, श्रम और रोजगार

कैलाश चौधरी कृषि एवं किसान कल्याण

अन्नपूर्णा देवी शिक्षा

ए नारायणस्वामी सामाजिक न्याय और अधिकारिता

कौशल किशोर आवास और शहरी मामले

अजय भट्ट रक्षा और पर्यटन

बीएल वर्मा उत्तर पूर्वी क्षेत्र का विकास और सहकारिता

अजय कुमार गृह

देवुसिंह चौहान संचार

भगवंत खुबा नवीन, नवीकरणीय ऊर्जा, रसायन और उर्वरक

कपिल मोरेश्वर पाटिल पंचायती राज

प्रतिमा भौमिक सामाजिक न्याय और अधिकारिता

सुभाष सरकार शिक्षा

भगवत किशनराव कराद वित्त

राजकुमार रंजन सिंह विदेश और शिक्षा

भारती प्रवीण पवार स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण

बिश्वेश्वर टुडू जनजातीय मामले और जल शक्ति

शांतनु ठाकुर बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग

महेंद्रभाई मुंजापारा महिला एवं बाल विकास और आयुष

जॉन बरला अल्पसंख्यक मामले

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