dahej mukt mithila

(एकमात्र संकल्‍प ध्‍यान मे-मिथिला राज्‍य हो संविधान मे) अप्पन गाम घरक ढंग ,अप्पन रहन - सहन के संग,अप्पन गाम-अप्पन बात में अपनेक सब के स्वागत अछि!अपन गाम -अपन घरअप्पन ज्ञान आ अप्पन संस्कारक सँग किछु कहबाक एकटा छोटछिन प्रयास अछि! हरेक मिथिला वाशी ईहा कहैत अछि... छी मैथिल मिथिला करे शंतान, जत्य रही ओ छी मिथिले धाम, याद रखु बस अप्पन गाम - अप्पन बात ,अप्पन मान " जय मैथिल जय मिथिला धाम" "स्वर्ग सं सुन्दर अपन गाम" E-mail: apangaamghar@gmail.com,madankumarthakur@gmail.com mo-9312460150

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सोमवार, 11 अगस्त 2014

मिथिला राजयक मांग लेल विशाल रैली : M R NS के तत्वधान में सफल रहल

मिथिला राजयक मांग लेल विशाल रैली : M R NS  के  तत्वधान  में सफल  रहल   

मिथिला राजयक मांग लेल विशाल रैली : M R NS  के  तत्वधान  में सफल  रहल  , रैली  के तयारी  में  कोनो कसर  बांकी  नै बचल   छल , जे उमीदी युवा आंदोलन  कारी  के मन में विस्वास छल से   नै  भ सकल , तयो ,रक्षाबंधन एहन  पर्व छोरी ,मूसलाधार वारिस के  परवाह  नै  करैत , हजारो  के  सांख्य  में  मैथिलि आंदोलन  कारी  ,
   मिथिला  के  रक्षा  लेल जंतर - मंतर  पर पेटकुंनिया द बैसल आ अपन मांग  अधिकार  मँगैत - भीख नै  अधिकार  चाही , हमरा मिथिला राज्य चाही     से नारा बुलंद करैत नवयुबक  आंदोलन  करी  के होसला  मजगूत  केलक ,

      कार्यकर्म के  संयोजक  - नीरज पाठक द्वारा , आ   सभा के  सञ्चालन  कमलेश मिश्रा आ शुतोष झ जी  द्वार कैयल गेल-  जाहि  में  मुख्य अतिथि  बंशीधार  मिश्रा , बिभूति मिश्रा , साबिर अली , सिया राम , मैलोरांग के निर्देशक  आ निर्माता , प्रकाश झा  , मुकेश झा   , सरसवती जिनकर मुख में  सदा विराजमान रहे छथि श्री  सुनील झ पवन , आ संगीत के

सरिता जिनका  लग समयाल  अच्छी  श्री  पवन  नारायण , संग  अनेक  मैथिल  भाई - बंधू , मिथिला राजय   मांग  के लेल  जंतर  - मंतर  पर अवि , म र न स के होसल  मजगूत  करैत  सब  कियो  , अही  आंदोलन  में  शामिल  होइयक से  जिगसा  दियोळन --

शनिवार, 19 जुलाई 2014

मिथिला राज्य किऐक?

मिथिला राज्य किऐक?

   
 भारत स्वतंत्र भेलाक बाद संघीय गणतांत्रिक राष्ट्र बनल, केन्द्र तथा राज्य सरकार द्वारा संविधान केर शासन सँ देश संचालित हेबाक निर्णय भेलैक। मिथिला भारतक अभिन्न हिस्सा आदिकालीन इतिहास, पूर्ण संस्कृति, संपन्न आ विकसित भाषा, लोकसंस्कृति, विशिष्ट पहिचान सहित केर क्षेत्र रहल अछि। इतिहास मे 'मिथिलादेश, बज्जिप्रदेश, तिरहुत, विदेहराज्य, आदि' नाम सँ सुविख्यात मिथिला केँ राज्य (प्रान्त) रूप मे मान्यता पेबाक माँग लगभग १९०५ ई. सँ कैल जाइत रहल अछि। अन्ततोगत्वा १९१२ ई. बिहार नाम सँ एक प्रान्त विभिन्न संस्कृति केँ एकत्रित रूप मे ब्रिटीश भारत मे बनल जाहि मे मिथिला क्षेत्र केँ सेहो गाँथि देल गेल।

एक तरफ बर्बर अंग्रेजी हुकुमत सँ परतंत्र भारत स्वाधीनताक संग्राम लडि रहल छल तऽ दोसर दिशि भारतीय दर्शन, मूल्य, मान्यता आ पहिचानक विशिष्टताकेँ नष्ट करबाक लेल भिन्न‍-भिन्न तरहक शासनादेश पारित होइत छल। एहि बीच मिथिलाक आदिकालीन इतिहास पर मध्यकालीन भारतक मगध सम्राज्य केर वर्चस्व केँ थोपैत बंग प्रान्त सँ इतर बिहार प्रान्त जाहि मे मिथिला, मगध, कोसल (उडीसा), झारखंड, भोजपुर केँ इकट्ठा राखल गेल। राजनैतिक रूप सँ चेतनशील जनमानस बिहार सँ अलग उडीसा आर झारखंड पाबि चुकल अछि, मुदा निरंतर संघर्षरत मिथिला विद्वान् समाज द्वारा उठायल गेल पृथक मिथिला राज्य केर माँग आइ धरि अधर मे लटकल अछि।

बिहार निर्माणक सौ वर्ष पूरा भऽ चुकल अछि। मिथिला लिपि विलुप्त, मैथिली भाषा मृत्युक कगार पर, मिथिला क्षेत्रीय पौराणिक धरोहर मटियामेट, लोकसंस्कृति पर पलायनक खतरनाक जहरीला दंश सँ लहुलुहान मिथिलावासी अपनहि सँ अपन पहिचान बदलबाक घृणित अवस्था मे प्रवेश पाबि चुकल अछि। जाहि मैथिली भाषाक ओज विश्व केर अन्य भाषा केँ सेहो समुचित मार्गदर्शन केलक, आइ वैह मैथिली विपन्न सृजनशीलता सँ रुग्ण अछि। बहुत देरी सँ भारतीय संविधान द्वारा एहि भाषा केँ सम्मान देल गेल, मुदा एहि नाममात्र सम्मान सँ क्रियात्मक योगदान हाल धरि नगण्य राखि केवल मिथिलाक पहिचान केँ नष्ट करबाक खतरनाक षड्यन्त्र बुझाइत अछि, हर तरहें मानू 'बिहारी उपनिवेशवाद' केँ जबरदस्ती मिथिला पर लादल गेल हो। समय-समय पर राजनीतिक विचार-विमर्शमे मिथिला राज्य केर निर्माण सन्दर्भ उपरोक्त चिन्ता केँ मनन कैल गेल अछि, मुदा हर बेर मिथिलाक विरुद्ध निर्णय सँ अवस्था जस केँ तस बनल अछि, बरु दिन-ब-दिन आरो बेसी चिन्तनीय बनल जा रहल अछि।

१९४७ ई. मे भारतक स्वतंत्रता प्राप्ति भेला पर स्वशासन मे प्रवेश राष्ट्र केर नीति-निर्माता राज्य गठन हेतु विचार-विमर्श शुरु केलनि। भाषा तथा भौगोलिक पहिचान केर आधार पर राज्य बनेबाक निर्णय बहुत पहिनहि सँ रहल, एहि आधार मे आरो नव नीति जेना राज्यक निर्माण जँ लोकहित मे होइ, राष्ट्रक अखण्डता पर असर नहि पडैक, जनभावना अनुरूप नव राज्य बनय; मोटामोटी एहि नीति संग नया राज्य केर निर्माणक निर्णय कैल गेल छल। भारतक विभिन्न भाग मे राज्य बनेबाक लेल आन्दोलन सबहक परिणाम जे सरकार द्वारा राज्य पुनर्गठन आयोग केर गठन कैल गेल। नव अधिनियम पास कैल गेल। किछु नव राज्य सेहो बनायल गेल। मुदा मिथिलाक माँग केँ 'जनभावना अनुरूप' नहि कहि १९५६ मे नकारल गेल। नकारबाक लेल एक महत्त्वपूर्ण कारण इहो छल जे 'मैथिली भाषा' केँ भारतीय भाषाक मान्यता प्राप्त सूची मे ताहि दिन स्थान नहि छल, माँग मात्र उच्च शिक्षित वर्ग द्वारा उठाओल गेल छल, नहि कि आम जनमानसक एहेन कोनो इच्छा अछि, बिहार मे रहितो एहि क्षेत्रक विशेष ध्यान राखल जा सकैत छैक, आदि आधार पर मिथिला राज्य अस्वीकारल गेल छल।

परिणाम सोझाँ अछि जे मिथिलावासी मैथिलीभाषी मैथिल आइ बिहारी बनि अपनहि भूमि सँ पलायन करय लेल मजबूर छथि आर मिथिलाक समस्त लोकसंस्कृति विलोपान्मुख बनि गेल अछि। लोकपलायनक विस्फोट एहि क्षेत्र लेल अभिशाप प्रमाणित भऽ चुकल अछि। एहि जहरक प्रभाव लगभग मिथिलाक मृत्यु तय कय देने अछि।

जँ मिथिला राज्य केर गठन नहि होयत तऽ एकरा बचेनाय असंभव अछि, कारण बिहार मे आर्थिक उपेक्षा सँ लैत आधारभूत संरचनाक विकास सेहो पूर्णरूपेण ठप्प पडि गेल अछि, बिहारक समस्त बजट विनियोजन मात्र पटना आ दक्षिणी बिहारक क्षेत्र मे केन्द्रित अछि। मिथिला क्षेत्र मे जेहो मिल, उद्योग, व्यवसाय आर आर्थिक आधार सब छल तेकरा क्रमश: क्षय कैल जा चुकल अछि, जे जातीय सौहार्द्रता सँ सामाजिक विकास केर स्वस्फूर्त संरचना सब छल ओ सब बिहारी जातिवादी राजनीति केर भुमरी मे चौपट भऽ चुकल अछि। आइ मिथिला लोकविहीन आ आपसी ईर्ष्या-द्वेष सँ भरल समाज संग अपन भविष्य लेल कुहैर-कुहैर कानि रहल अछि।

मिथिला राज्य एकमात्र समाधान, कारण स्वशासनक अधिकार भारतीय गणतंत्र केर संविधान द्वारा न्यायसंगत मानल गेल छैक। मिथिला क्षेत्रक भरपूर विकास लेल मिथिलाक अपन सरकार, अपन कोष, अपन योजना आ मिथिलाक अपनहि लोकनेता बनैत कल्याण कय सकैत अछि। आउ, सिलसिलेवार नजरि दी किछु महत्त्वपूर्ण विन्दु पर:

१. राज्य पुनर्गठन आयग जे भारत सरकार द्वारा गठित छलए करीब ६० साल पूर्व अपन रिपोर्ट मे कहलकैक जे मैथिली भाषा संविधानक अष्टम् अनुसूची मे दर्ज नहि अछि ताहि हेतु मिथिला राज्यक निर्माण संभव नहि अछि।

२. २२ दिसम्बर, २००३ केँ मैथिली संविधानक अष्टम् अनुसूची मे स्थान प्राप्त कएलक, तकर बाद मिथिला राज्य केर निर्माणक मार्ग संवैधानिक रूप मे प्रशस्त भऽ चुकल अछि।

३. मैथिली भाषा-भाषी जनसंख्या जकर संख्या भाषाई आधार पर बनल राज्य यथा कश्मीरी, मणिपुरी, पंजाबी, आसामी, मलयाली, कन्नड सँ बहुत बेसी अछि।

४. हमरा सबसँ बेसी भाषा बजनिहार केवल हिन्दी, उर्दू, तेलगु, मराठी, तमिल तथा बंगला भाषाभाषी अछि। एहि हिसाब सऽ संपूर्ण देश मे सातम बहुसंख्यक भाषाभाषी समूह हम सब छी। भारतीय संविधान केर अन्तर्गत प्रदत्त अधिकारक तहत त्वरित कार्रबाई कय हमरा सब अलग राज्य केर अधिकारी छी, परन्तु हमरा सबकेँ एहि अधिकार सँ वंचित राखल गेल अछि।

५. मिथिला राज्य केर पक्ष मे एकटा और महत्त्वपूर्ण विन्दु मैथिली भाषाकेँ विशिष्ट वर्णमाला अछि जे तिलकेश्वरस्थान महादेव मन्दिर २०३ AD मे वर्णित अछि। ई देश केर कुनु भाषा सँ पुरान भाषा अछि, परन्तु हिन्दी (देवनागरी) आ बंगला मिथिलाक्षर सँ बादक वर्णमाला अछि।

६. आधुनिक प्रजातांत्रिक देश केर पहिल शर्त कल्याणकारी राज्यक रूप छैक, तकर आधार प्राथमिक शिक्षा जे मातृभाषा मे हेबाक चाही। आधुनिक भारतक ओ राज्य जकर प्राथमिक शिक्षा अपन मातृभाषाक माध्यम मे छैक से सब रूपे विकसित राज्यक श्रेणीमे आबि गेल अछि। परन्तु मिथिलाक अन्दर जतय प्राथमिक शिक्षाक माध्यम हिन्दी अछि ओतय स्कूलक ड्राप-आउट देशे नहि अपितु संसार मे सबसँ बेसी अछि। ओहि ड्राप-आउट (बीच मे पढाई छोडनिहार) केँ रोकबा लेल राज्य सरकार आ केन्द्र सरकार आर्थिक प्रोत्साहन दऽ रहल छैक। लेकिन कोनो सरकार लग एकर स्थायी इलाज जे प्राथमिक शिक्षा अपन मातृभाषा मे हेबाक चाही तकर योजना नहि अछि। एकर उदाहरण बिहार सरकार द्वारा एक लाख शिक्षक केर नियुक्तिक सन्दर्भ विधान परिषद् मे शिक्षा मंत्री द्वारा निर्लज्जतापूर्वक देल स्वीकारोक्ति अछि जे मैथिली शिक्षक केर नियुक्तिक प्रावधान सरकार लग नहि अछि।

७. किछु भ्रान्ति जे भाषाई आधारपर मिथिला राज्यक गठन सँ जे हिन्दीभाषी छथि से कमजोर हेतैक, से सम्पूर्ण रूपेण भ्रामित करयवला सोच अछि। किऐक तऽ देशक आबादीक एकटा पैघ हिस्सा अगर निरक्षर आ अविकसित रहत तऽ वैश्विक शक्ति बनेक भारतक अवधारणा हास्यास्पद भऽ जायत। ठीक एकर उनटा मिथिला राज्यक गठन सँ ओकर प्राथमिक शिक्षा केर माध्यम मातृभाषा बनत, जाहि सँ मिथिलाक विकासक संग देशक विकास हेतैक।

८. आजादी केर लगभग ७० वर्ष भऽ गेल मुदा मिथिला मे एकोटा बडका औद्योगिक युनिट नहि लागल, उनटे ब्रिटिश कालक सम्पूर्ण उद्योग-धंधा बन्द कय देल गेल जकर दुष्प्रभाव ई भेल जे मिथिला सस्ता आ अकुशल श्रमिक आपूर्तिक क्षेत्र मे परिणति पाबि गेल। एहि तरहें एतुका जोन-बोनिहारकेँ देशक विभिन्न भागमे प्रवासक दौरान सब तरहक अपमान, गारि आ गंभीर शोषण केर सामना करय पडैत छैक।

९. कृषि क्षेत्र केँ एकटा व्यापक षड्यंत्रक तहत बर्बाद कएल गेल। मिथिलाक कृषिक सन्दर्भ मे राज्य सरकार आ केन्द्र सरकार केर योजना बनौनिहार एतुका प्राकृतिक-भौगोलिक अवस्था केँ नजरअन्दाज कएलन्हि। सडक तथा रेल मार्गक निर्माण एवं बाढि नियंत्रण केर नाम पर मिथिलाक मूल पूँजी जलस्रोत जे विभिन्न हिमाली नदी सँ प्राप्त होएत रहल तेकर सबहक प्राकृतिक बहाव केँ तोडि-मोडि स्वस्फूर्त जल-सिंचन, जल-भंडारण आदि केँ ध्वस्त कय देल गेल।

१०. जलस्रोतक समुचित दोहन नहि कय अदूरदर्शी योजना सँ जनहित केँ बड पैघ अप्रत्यक्ष नोकसानी देल गेल। आइ मिथिला मे भूमिगत जलस्तर तक घटि गेल अछि, मिथिला सँ मत्स्य-कृषि गायब भऽ चुकल अछि, पनबिजली, सिंचाई, सेहो सुव्यवस्थापित नहि अछि। एहि सँ जनजीवन दूरगामी प्रभाव सँ प्रभावित भेल अछि। यदाकदा प्रकृति विरुद्ध कार्य भेलाक दुष्परिणाम बाँध टूटनाय सँ जल-प्रलय केर रूप मे महाविनाशकारी बाढि तथा बाढिजनित विभिन्न प्रकोप सँ जनसमुदाय क्षति केँ भोगैत छथि।

११. १९म शताब्दी धरि मिथिला चाउरक सबसँ पैघ उत्पादक आ निर्यातक केन्द्र छल। मात्र मयानमार (वर्मा) मिथिला सँ बेसी धान उपजबैवला देश छल। तकरा एकटा सुनियोजित षड्यंत्रक तहत बर्बाद कएल गेल।

१२. आइ एतेक वृहद जनसंख्याक पालन-पोषणक आधार नहिये कृषि अछि आ नहिये उद्योग अछि। एतेक पैघ जनसंख्या पलायन लेल मजबूर अछि। अकुशल श्रमिक द्वारा भेजल गेल पैसा पर जीवन-यापन करैक लेल मजबूर अछि।

१३. एकर एकमात्र कारण राजनेता तथा अफसरशाहीक औपनिवेशिक सोच आ क्रियाकलाप अछि जकर एकटा उदाहरण मिथिलाक बैंकिंग प्रणाली अछि। क्रेडिट डिपोजिट रेशियो मे मिथिलांचलक बैंक मे जमा कएल पैसा मिथिलाक विकास मे नहि लागि कऽ मुम्बई आ दिल्लीक स्टाक एक्सचेन्ज मे जाइत अछि। एकर अर्थ अविकसित गरीब मिथिलाक लोकक पाइ विकसित राज्यक आगाँक विकास लेल खर्च कएल जाइत अछि। ई एहन निर्धन क्षेत्रक निवासीक घोर शोषणक उदाहरण अछि।

१४. मिथिलाँचलक अवाम एखन तक कोनो उग्रवाद, अतिवाद आ माओवाद सँ प्रभावित नहि भेल अछि। कि भारत सरकार एहि शांतिवादी-सहिष्णुवादी समुदायकेँ निरन्तर आर्थक शोषण सँ उग्र आन्दोलनक रास्ता पर जेबाक लेल मजबूर कय रहल अछि?

१५. सुगौली संधि (१८१६) मे मिथिलाँचलक हृदयकेँ दू फाड कऽ देलक, हलाँकि हालहि नेपाल गणतंत्र मे परिणति पाबि नव संविधान बनेबाक प्रक्रिया अन्तर्गत संघीयताक स्थापना लेल प्रयासरत अछि आ ओतहु मिथिला राज्य केर स्थापनाक माँग वर्तमान संविधान सभा द्वारा विचाराधीन अछि।

१६. पछिला संसदक विभिन्न सेशन मे ०६.१२.२०१० सँ १३.१२.२०१० तक १९२ घंटाक धरना कार्यक्रम संपन्न भेल अछि आ हाल धरि हरेक सेशनक प्रथम दिन रूटीन धरना द्वारा मिथिला राज्य केर माँग निरन्तरता मे राखल जा रहल अछि।

१७. पन्द्रहम लोकसभा अन्तर्गत दरभंगा सँ सांसद कीर्ति झा आजाद द्वारा मिथिला राज्यक माँग लेल प्राइवेट मेम्बर बिल "बिहार झारखंड रिआर्गेनाइजेशन बिल" सेहो संसदक पटल पर राखल जा चुकल अछि।

१८. सोलहम लोकसभा जे देश भरि द्वारा सांस्कृतिक राष्ट्रवाद केर विशाल समर्थन प्राप्त केलक अछि ताहि मे ५ लोकसभा सदस्य द्वारा मैथिली भाषा मे शपथ-ग्रहण करैत मिथिला राज्यक माँग केँ अग्रसर कैल गेल अछि आ दर्जनों सांसद एहि लेल अपन समर्थन स्वीकारोक्ति देने छथि।

सूचनार्थ:अखिल भारतीय मिथिला राज्य संघर्ष समिति विभिन्न मैथिली भाषा-भाषीक संगठनक समुच्चय अछि। ई तमाम राजनैतिक दल तथा समाजिक संगठन कय मिथिला राज्यक एजेन्डा पर कार्य करैक लेल आग्रह करैत अछि।

Pravin Narayan Choudhary


मंगलवार, 1 जुलाई 2014

पृथक् मिथिला राज्यक माँग हेतु एकदिवसीय कार्यक्रम

परमादरणीय मिथिलावासी,
सादर नमस्कार----
       भाईलोकनि अपने सभ सँ साग्रह निवेदन अछि जे मिथिला-मैथिली के विकास आओर क 
पृथक् मिथिला राज्यक माँग हेतु , "मिथिला विकास संगठन" दिनांक 5 जुलाई 2014 क् सुवह दस बजे दरभंगा समाहरणालय पर प्रचण्ड धरना के एकदिवसीय कार्यक्रम रखलक अछि ।

      हम समस्त मिथिलावासी के आवाहन करैत छी जे एहि कार्यक्रम में अपार जनसमूह के संग पहुँच आन्दोलन के धारदार बनाबी ।अहाँक योगदान मिथिलाक मर्यादा एवं भाषा साहित्य, सभ्यता, संस्कृति के संरक्षण आओर पृथक मिथिला राज्यक माँग के दिशा में अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करत । जय मिथिलावाशी , हरहर महादेव, जय माँ मैथिली , जय श्री हरिः
घर घर सँ आयल आवाज,
हमरा चाही मिथिला राज्य।
संयोजक त्रिपुरारी मिश्र
फोन नंबर :- +919472905825
+917546091476

मंगलवार, 20 मई 2014

मिथिला राज्य निर्माण सेना के तत्वाधान में बुद्धिजीवी सम्मलेन

मिथिला राज्य निर्माण सेना के तत्वाधान में बुद्धिजीवी सम्मलेन

 मिथिला राज्य निर्माण सेना  -  बेर - बेर जेका फेर एकटा  डेग उठेलक  जकर नाम  छल   बुद्धिजीव सम्मलेन  
       ओना त अपन मिथिला  में  बुइधिक  खजाना के  अंत नै  छैक , ओहि  में  तकनय  बड़ मुश्किल  अच्छी  , तयो  मिथिला राज्य निर्माण सेना , अपन कर्तबय से पाछू  नै  हटल ,  डेल्ही एन सी आर में  जतेक बुद्धिजीवी  या पत्रकार सब  छथि  सव के   फोन या सम्बाद के  जरिय सूचित  केला बयक्ति सब क्यों ऑयल छाला , जाहि में  लेट - सेट  धरपरायल हमहुँ  बुद्धिजीवी लोकनिक  पाछू में  बैसलो ,  हुनक सभक  मुखारविंद  सं निकलल शब्द   के  अनुसररण  करैत  बहुत निक  लागल ,  कहाबत  कोनो  खराप  नै  छैक  , बुद्धिजीवी लोक  कहैत   कियाक छै , से  आई  देखबा   में  ऑयल  । 
   सब सं पहिने  गोसइनिक  गीत - जय जय भैरवी  सं  सुरवरत  करैत , सब कियो  अपण -अपन परिचय देला ,  परिचय - पात्र  के  बाद सब  कियो  अपन - अपन  राय - बिचार  मिथिलाक  हर  विषय  वास्तु  पर  नजर  घुमेला  ,  चाहे ओ  शिक्षा  हो , बेरोजगारी , नव  युबक  शिक्ष  व  बैसायक  लेल  पलायन कियाक ,  किसान   से  लके   मजदूर  तक ,  रेल यता - यात से सरक परिवहन  तक  सब पर   बेर - बेर  हमारा  लोकनिक हरेक विसय वस्तु  पर धयान  आकर्षित करेला , जे  ई  केला  सं ई  होईत आ  ऐना  भेल  सं  ई  सब  होईत , 
एवं  प्रकारे  सब  द्रिष्टी सं  देखल  गेल त पता  लागल  जे  मिथिलाक  विकास  के नाम  पर ( o  ) जीरो  अच्छी  ओहि  o  के  १००  कोना   करी , 

       मिथिला राज्य निर्माण सेना केर प्रयास सँ मिथिलाक बुद्धिजीवी लोकनि अपन अस्मिता लेल चिन्तन करय लगलाह, वास्तविकता तऽ यैह छैक जे हर डेग पर बुद्धिमान आ विद्वान् जँ कतहु रहैत छथि तऽ ओ थीक मिथिला, मुदा  जनैतिकसचेतनाक घोर अकाल एतहि छैक, ई विडंबना नहि तऽ आर कि? हम सब देश आ विदेशक राजनैतिक परिदृश्य केर समीक्षा कय सकैत छी, मुदा अपन खसैत अस्मिता आ पहिचानविहीनता प्रति भारतीय संविधान मे सुधार नहि करा सकैत छी.... हमरा लोकनिक गट्स तखन कि मात्र आनक चाकरी लेल? लेकिन
नकारात्मकता सऽ आब डरेबाक आवश्यकता नहि छैक, मिरानिसे केर एहि महत्त्वपूर्ण प्रयासक सराहना आ प्रशंसा हेबाक चाही। नवतुरिया नीक काज कय रहल अछि। अहुँ सब सम्पर्क करैत स्वस्फूर्त इहि मुहिम मे 

गुरुवार, 13 फ़रवरी 2014

M.R.N.S.केर आह्वान:

 
    लिपि त लुप्त भ गेल भाषा बचाउ ! दरभंगा,मधुबनी सहरसा सँ आउ ! बेगुशराय भागलपुर सँ आउ ! जाहि गामक छी ताही गाम सँ आउ ! दिल्ली मुम्बइ कलकत्ता सँ आउ ! रेल बस चाइर पहिया सँ आउ ! जेना क सम्भव हुए तेना क आउ ! 14 फरवरी सँ 23 फरवरी तक आउ ! पटना आउ ! पटना आउ ! लिपि त लुप्त भ गेल भाषा बचाउ !


  एखन बहुत रास प्रश्नक जबाब "मिथिला राज्य निर्माण सेना"क अनशन संग हिनका आ बिहार सरकारकेँ देबाक छन्हि:

1. मैथिली मे प्राथमिक शिक्षाक संवैधानिक अधिकार मैथिलीभाषीकेँ किऐक नहि देल गेल अछि?

 2. संविधानक धारा ३५०ए द्वारा निर्धारित अधिकार अनुरूप मैथिलीभाषीकेँ मैथिलीमे न्युनतम शिक्षा पेबाक अधिकारसँ बिहार सरकार किऐक वंचित रखने अछि?

3. मैथिली समान पौराणिक आ समृद्ध साहित्यसँ विभूषित भाषाकेँ संवर्धन-प्रवर्धन लेल बिहार सरकार सौतेली माय जेकाँ किऐक व्यवहार करैत अछि?

      जेना कि ज्ञात अछि जे भारतीय प्रशासनिक सेवा मे नहि सिर्फ मिथिलावासी वा बिहारी मैथिल बल्कि आनो-आनो राज्यक लोक मैथिली भाषा रखैत प्रशासनिक परीक्षाक तैयार करैत आबि रहल छथि आ आइएएस-आइएफएस आदि बनैत छथि, राज्य व देशकेँ गुणवत्तापूर्ण प्रशासन प्रदान करैत छथि... एनामे मैथिली प्रति स्वयं गृहराज्य उदासीन रहि कहीं अलग राज्यक माँगकेँ स्वयं समर्थन आ लोकभावनाकेँ भडकाबय केर काज तऽ नहि कय रहल अछि?

एखन धरि कतेक शिक्षक केर आ कतेक विद्यालयमे मैथिलीक पढाइ करायल जा रहल अछि?

केन्द्रिय स्तरसँ पूछल जेबाक अछि:

सविधानक आठम अनुसूचीमे सूचीकृत भाषा, एकर समृद्ध इतिहासक सागर रहैत वर्तमानमे उपेक्षाक हद्दपर टिप्पणी आ एहि लेल बिहार सरकारकेँ आवश्यक निर्देशन आदि...?

तहिना मिथिला क्षेत्रक विश्वविद्यालय आ काउन्सेलिंग सेक्सनसँ पूछबाक अछि:

कि कारण छैक जे मैथिली विषयमे छात्रकेँ पढबाक लेल उत्साहवर्धन नहि कैल जा रहल छैक?

आजुक विपन्न अवस्थाक सृजक केकरा मानल जाय?

पद बेसी, अभ्यर्थी कम! कोना?
निवेदक:
मिथिला राज्य निर्माण सेना

सम्पर्क:

श्याम मैथिल, अध्यक्ष - ९८७३९५३९८१
अनुप मैथिल, प्रवक्ता ओ अनशनकारी - ८०५१५१८६८७

गुरुवार, 23 जनवरी 2014

मिरनिसे के जन्म एक महत्वपूर्ण विषय

          सब स पहिने दिल्ली कार्यक्रम के ले तमाम मिरानीसे सेनानी के हार्दिक शुभकामना, मिथिला राज्य के लेल प्रयास जाहि स्तर पर मिरानीसे द्वारा सम्भव अछि शायद कोनो दोसर मंच सा सम्भव नहीं अछि, पिछला एक दू साल में जे कोनो कार्यक्रम, जन जागरण और धरना प्रदर्शन वा नेतागण नेतागण संग भेट वार्ता काबिलेतारीफ छल।


      आई मिथिला नहीं सम्पूर्ण देश और विदेशो में भी अलग मिथिला राज्य के मांग (मिरानीसे) द्वारा जे उठाओल जा रहल अछि से चर्चित अछि, संगहि एक टा बात (जे गंभीर अछि) जन समर्थन, और एक आवाज पर इकठ्ठा भेनाई महत्वपूर्ण अछि (उदाहरण : - जाई जगह जगह पर अपन मिरनिसे कार्यकर्ता प्रदर्शन करबाक लेल इकठ्ठा भेल डेल्ही पुलिस द्वारा हटा देल गेल और देश के सब स महत्वपूर्ण जगह पर १४४ के बाबजूद दिल्ली c. m द्वारा अपन समर्थक संग दू दिन तक भांगरा के कार्यक्रम भेल से पूरा देश देखलक और संगहि पुलिस और तमाम केंद्र सरकार के मंत्रीगण सेहो सहभागी भेल, कारण - धरना कोनो पार्टी प्रायोजित छल ताई लेल केंद्र सरकार सेहो अपन वोट के खातिर उपयुक्त कार्यवाई करय में हमेशा बचय के कोशिश कयलक) मतलब साफ अछि जे अगर धरना प्रदर्शन राजनीतिक होयत त सरकारो गम्भीरता स एक्शन लई छै ओना अगर कोनो आम धरना होयत ता याद आबैत अछि (बाबा रामदेव के रामलीला). अलग मिथिला राज्यक मांग शायद ही कोनो पार्टी एखुनका परिदृश्य में पूर्ण रूपेण समर्थन करत।
            भाजपा सांसद कीर्ति झा जी द्वारा समर्थन स्वागत योग्य अछि, 

एक टा सुझाव/निवेदन/जनाकांक्षा … जे किया नै मिरनिसे के एक राजनीतिक रूप देल जाय लगभग सब पदाधिकारी (मिरानीसे के) एक जन प्रतिनीधि के हिसाब सा कार्यरत छि और संगहि राजनीतिक परिवेश स छि ज्यादा तकलीफ नहि होयबाक चाही कारन राजनीतिक पार्टी के अपन एजेंडा होयबाक चाही जे मिरनिसे के जन्म एक महत्वपूर्ण विषय के पूरा करबाक लेल भेल अछि (अलग मिथिला राज्य) ई प्रमुख मुद्दा होयबाक चाही जन समर्थन जरूर जरूर भेटत। जमीनी स्तर पर हर मैथिल के अई संग्राम में सहभागिता लेल उत्साहित करबाक जरुरत अछि संगहि मिथिलांचल के हरेक गाव और शहर में सदस्यता अभियान चलेबाक जरुरत अछि.
         

           ओना बिना राजनीतिक भेने सेहो सफलता भेटइ छै मुदा शनैः शनैः (एक बात और अगर झारखण्ड, विदर्भ, तेलंगाना, पूर्वांचल या और कोनो राज्यक मांग गैर राजनीतिक होईत त शायद अहि पर कार्यवाई सम्भव नहीं छल, झारखण्ड, तेलंगाना बनी गेल शीघ्रहि विदर्भ और उ.प में सेहो छोट - छोट राज्य बनी जायत कियाक ता हर पार्टी अपन नफा नुकसान देखति कार्यवाई करैत अछि से त आहाँ सभ लोकनि ज्यादा समझदार/जानकार छी). 

अंत में - उपरोक्त विचार किछु ग्रामीण जनमानस और हमर अपन अछि हमर विचार स अगर किनको तकलीफ या ठेस पहुँचनि त हैम क्षमाप्रार्थी छी। — 


सोमवार, 20 जनवरी 2014

हमरा चाही मिथिला राज

जय मिथिला 
जय मिरानिसे
        

बस एक मात्र संकल्प ध्यान में , मिथिला राज्य होई संबिधान में.


   मिथिला राज्य निर्माण सेना द्वारा आयोजित राष्ट्रिय संगोष्ठी में अपन उपस्थिति देनिहार हर मिथिला प्रेमी भाई बहिन के बहुत धन्यवाद। अपने सब के उपस्थिति इतिहास बनेलक। आगू और सक्रिय सहयोग के अपेक्षा मिरानिसे राखैत अछि।
कार्यक्रम के दू सत्र में नियोजित कैल गेल छल। प्रथम सत्र मिरानिसे के सांगठनिक संबोधन स सम्बंधित छल। 


मुंबई,गोहाटी,नेपाल और मिथिला क्षेत्र स आयल मिरानिसे के सदस्य अपन बात रखला। सब के केवल एक आवाज-हमरा चाही मिथिला राज। मिरानिसे स सहयोग केनिहार जे बहुत भाई किछु अपरिहार्य व्यस्तता के कारण नै आबि सकला हुनको आभासी उपस्थिति रहल।

   द्वितीय सत्र मिथिला राज्य के मुद्दा पर राजनीतिक एकीकरण लेल राखल गेल छल। दलगत भावना स ऊपर उठि के मिथिला राज्य लेल अपन प्रतिबद्धता सुनिश्चित करबाक समय मिरानिसे हर दल स सम्बद्ध राजिनितिग्य के देलक। इ कठोर सत्य अछि जे आमंत्रित वक्ता में स केवल बीजेपी के सांसद और विधायक गण न केवल अपन उपस्थिति दर्ज करेला बल्कि पुरजोर तरीका स मिथिला राज्य मांग के समर्थन केला। कांग्रेस ,राजद ,जेडीयू स गछ्ला बादो वक्ता नै आयला। निर्दलीय सदस्य पप्पू यादव सेहो सत्र के संबोधित केला। एहेन सांकेतिक घटना के बादो मिरानिसे अपन सूत्र वाक्य - समर्थन द रहल व्यक्ति के समर्थन आ विरोध क रहल व्यक्ति के विरोध - स एखन धरि सटल अछि।

   
 आदरणीय प्रभात झा जी आन्दोलन के लेल हर तरहक सहयोग देबाक वचन देला। भाई कीर्ति झा आज़ाद त मिथिला राज्य के लेल सदैव अपना स्तर स कार्य क रहला है। पुनः अपन जोशगर उदबोधन स नव उर्जा के संचरण केला। भाई गोपाल ठाकुर( विधायक बेनीपुर) ,भाई संजय सरावगी( विधायक दरभंगा शहरी) और भाई संजीव झा ( पूर्व विधायक सहरसा) सब तरहक सहयोग के वचन देला और कार्यक्रम के अंत तक रहि मिरानिसे के मान बढौला।

     

शेफालिका जी और कुमुद जी द्वारा सेहो मिथिला राज्य के समर्थन कैल गेल।
कार्यक्रम के दौरान मैथिली पुस्तक प्रदर्शनी के सेहो व्यवस्था छल। मिरानिसे के नवीन वेबसाइट mrns.in के सेहो लोकार्पण भेल। मधुबनी जिला परिषद् सदस्य भारत भूषण जी, बिजय झा भोला भाई आ मो. कलीम भाई द्वारा मिथिला राज्य के समर्थन कैल गेल।
कार्यक्रम के औपचारिक शुरुआत जय जय भैरवि के सामूहिक गायन और समाप्ति वन्दे मातरम द्वारा कैल गेल।

पुनः सब के कोटिशः धन्यवाद। जय मिथिला जय मिरानिसे