dahej mukt mithila

(एकमात्र संकल्‍प ध्‍यान मे-मिथिला राज्‍य हो संविधान मे) अप्पन गाम घरक ढंग ,अप्पन रहन - सहन के संग,अप्पन गाम-अप्पन बात में अपनेक सब के स्वागत अछि!अपन गाम -अपन घरअप्पन ज्ञान आ अप्पन संस्कारक सँग किछु कहबाक एकटा छोटछिन प्रयास अछि! हरेक मिथिला वाशी ईहा कहैत अछि... छी मैथिल मिथिला करे शंतान, जत्य रही ओ छी मिथिले धाम, याद रखु बस अप्पन गाम - अप्पन बात ,अप्पन मान " जय मैथिल जय मिथिला धाम" "स्वर्ग सं सुन्दर अपन गाम" E-mail: apangaamghar@gmail.com,madankumarthakur@gmail.com mo-9312460150

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गुरुवार, 30 जुलाई 2015

मधुबनी( मिथिला) पेंटिंग

Sunit Thakur -
माँ जानकी और भगवान श्री राम के  विवाह सअ शुरू भेल इ कला ,आब पूरा संसार में प्रसिद्द भअ गेल अछि ! मिथिला के बहुत गाम जेना
राटी,जितवारपुर,मंगरौनी आदि , अहि कला के प्रति समर्पित अछि !पहिने इ कला उच्च जाति के महिला द्वारा दीवार पर कायल जाइत छल ! लेकिन समय के साथ साथ जाति के बंधन टूटल, आ मिथिला पेंटिंग दीवार स कपड़ा और कैनवास पर उतरि गेल अछि ! आजुक आधुनिक युग में अखनो चित्र में भरल गेल रंग , घरेलु चीज़ ,जेना हरैद,केराक पात ,पीपर छाल,दूध,सिन्दूर ,काजर ,हरियर पात आदि सअ बनायल जाइत अछि !
1934 में मिथिला क्षेत्र में एक टा भूकंप आयल छल! तत्कालीन सब - डिविजनल अधिकारी विलियम जे आर्चर अपन पत्नी मिल ड्रेड के साथ क्षेत्र के भ्रमण के दौरान ,ढहल दीवार पर सुन्दर चित्रकारी देखि दंग रहि गेला !विलियम अहि विलक्षण चीज़ के फोटो खींच कअ , लेख व् फोटो के माध्यम सअ पूरा दुनिया के अहि कलाकृति सअ पहिल बेर परिचय करेलैथ ! आजादी के पश्चात भारतीय हस्तकला बोर्ड के निदेशक पुपुल जयकर , मधुबनी भाष्कर कुलकर्णी के भेजी कअ अहि कला के नमूना सब मंगवेलैथ और देश विदेश के प्रतिनिधि सब के देखेलैथ ! मिथिला पेंटिंग के अंतर्राष्ट्रीय ख्याति दियाबय में "ललित नारायण मिश्रा" जीक बहुत पैघ योगदान छैक ! पहिल बेर 1970 में , जगदम्बा देवी के राष्ट्रीय पुरष्कार देल गेल !1975 में जगदम्बा देवी के पद्मश्री और सीता देवी के राष्ट्रीय पुरष्कार देल गेल ! अहि के बाद तअ गंगा देवी, महासुंदरी देवी, गोदावरी दत्त, शांति देवी, विभा दास आदि प्रतिभावान महिला सब के नाम के डंका पूरा दुनिया में बाजय लागल !फ्रांस, जर्मनी, अमेरिका और जापान में अहि कला के विशेष प्रचार प्रसार भेल !1988 में जापान के हासेगावा में मिथिला लोकचित्र कला म्यूजियम स्थापना भेल ! 
फ्रांस के विश्वप्रसिद्ध पेंटर "पाब्लो पिकासो" महासुन्दरी देवी के पेंटिंग स प्रभावित भअ हुनका पत्र लिखने रहैथ “लोग हमरा पैघ कलाकार बुझैत छैथ, लेकिन जखन हम अपनेक कला देखैत छी, तअ पाबैत छी कि अहाँ हमरा सअ पैघ कलाकार छी " !

मंगलवार, 28 जुलाई 2015

कलाम सर

आजुक रामायणक राम चलि गेलाह,
इंसानियतके एगो भगवान चलि गेलाह.

लिखि अन्तरिक्षमे भारतक नाम,
विज्ञानक सुच्चा हनुमान चलि गेलाह.

गुमान करए जनिका पर सगरो जमाना,
ओ ज्ञानी-श्रष्टा-महान चलि गेलाह.

साओनक मासमे झहरि रहल नैना,
अपन दुलरुआ कलाम चलि गेलाह.

सोमवार, 27 जुलाई 2015

अपन मिथिला देश

घुइर चलू घुइर चलू मैथिल
अपन मिथिला देश
बाट जोहै छथि माए मिथिला,
आँचर मे लऽ स्नेहक सनेश।
उजइर पुजइर गेल छै ओकर
सभटा खेत पथार
गाम घर सभ भक्क पड़ल छै
डिबिया बाती नै जरै छै
देख ई दशा
माए मिथिला के फाटै छै कुहेश ।...
जाहि धरा पर बहैत अछि
सात सात धार
आई ओहि धरा के छाती अछि सुखाएल
खाए लेल काइन रहल अछि नेन्ना भुटका
माइर रहल छथि माए मिथिला चित्कार ।
देखू देखू हे मिथिलावाशी केहन आएल काल
देब भूमि तपोभूमि
आई बनल आतंकक अड्डा
जतऽ कहियो पशु पंछियोँ वाचैत छल शास्त्र
आई ओहि धरा सँ सुना रहल अछि बम बारुदक राग ।
हे मैथिल!
दोसरक नगरी रौशन केलौँ
छोइड़ अपन देश
आबो जँ नै आएब मिथिला
तऽ भऽ जाएत मिथिला डीह
कुहैर कुहैर क कहैथ माए मिथिला ई..
चलू चलू यौ मैथिल अपन मिथिला देश
फेर सँ बनेबै ओहने मिथिला
देखतै देश विदेश..जय मिथिला

गुरुवार, 23 जुलाई 2015

किया अतेक प्रदेश रहैछी


सुनु योव मिथिलाक लाल कहैछी,
किया अतेक प्रदेश रहैछी ।
मायक आंचर  सब दिन भीजैय,
नीत आंहांक बाट जोहैय,
सोंचैय आइ बोवा एता,
खूब कमाक ढोवा लोवता,
पर हम कोड़ी कि करब
आब त" किछ दिम मे हम मरब,
किया नय बाबू घर अबै छी,
सुनु योव मिथिलाक लाल कहोछी,
किया  अतेक प्रदश रहै छी॥
बोवा बूच्चि नीत कनैय,
हाटक दिन क" बाट तकैय,
कहैय आई बाबू औता ,
झोरा मे खूब सनेश लोता,
आई त' हम खूब खाएब,
बाबू के संग खेलाएब,
कन्हा प बैस घूमअ जाएब,
सांझ क बोवा खूब कनैय,
कैन्ते-कैन्ते शूईत रहैय,
नीत व वतबे काज करैय,
कीया ओकर बच्पन छिनै छी'
सुनु योव मिथिलाक लाल कहै छी'
कियि अतैक प्रदेश लहै छी॥
शुनूयोव सजनी कि कहैय,
भितरे भितरे उ' घूटैय,
निरजान फोटो सं बात करैय,
बैमान बालम किया नइ अबै छी,
पिया मिलन ले' हम तरसै छी,
सुनू योव मिथिलाक लाल कहै छी,
किया अतैक प्रदेश रहै छी॥
बड कमेलों बड कमेलों ,
कौरी ले मिथिला संन देश  गमेलों,
दलानक दिया नित जरैय,
आब नय कियो संगतूरिया बैसैय,
काठक कूर्सि सेहो कनैय,
बूरहः बाबू जी बस मोन रहै य,
मने-मन वहो कनैय,
हे बिधाता आगूक जिनगी कोना जैत,
कि लालक कांधा नसिब नय हैत,
आंहा ले जे खून पसिना बहोलक,
अंगूरी पकैर"क" उ चलोलक,
कन्हा  प' बैठा "क' मेला घुऽमोलक,
आइ उ' कान्हा झूइक गेल ,
आंहाक साथ किया छूइट गेल,
कि "ई' सबहक किछ मोल नय छी,
सूनू योव मिथलाक  लाल कहैछी,
किया अतैक प्रदेश रहै छी॥
प्रदेशिक दूखक सूनोलों बानी,
नय हम कवि नय कोनो ग्यानी,
टूटल-फुटल श्ब्द के जोइर देब,
किछ गलत कहलों त माफि देब,
दूनू हाथ जोइर प्रथना करैछी,
सूनू यव मिथिलाक लाल कहै छी,
किया अतैक प्रदेश रहै छी"॥?