अरिजीत सिंह को सलमान खान ने अपनी फ़िल्म सुल्तान के गाने "जग घुमेया" से निकाल दिया था। सोनू निगम जैसे दिग्गज को काफ़ी समय तक काम नहीं मिला। विवेक ओबेरॉय इंडस्ट्री से गायब कर दिए गए। मगर इन्होंने कभी नहीं कहा होगा कि -" मैं हिन्दू हूँ, इसलिए मुझे काम नहीं मिल रहा। "
और एक ये जज़्बाती क़ौम है । ......
मुसलमानों, बुरा मत मानना । एहसान-फ़रामोशी को आपमें से ज़्यादातर ने अपनी पहचान बना लिया है।
उधर उस्मान ख़्वाजा ऑस्ट्रेलिया से माल निचोड़ कर कह रहा है कि ऑस्ट्रेलिया में मेरे साथ भेदभाव हुआ।
अजहरुद्दीन मैच फ़िक्सिंग की सज़ा होने पर कहता है कि मैं मुस्लिम हूँ, इसलिए मुझे फँसाया गया है। एक हामिद अंसारी भी है। ताऊ को उपराष्ट्रपति बना दिया गया था। जीवन भर नाम-शोहरत कमाई, अंत में कह दिया—भारत हमारे लिए unsafe मुल्क है।
इसी कड़ी में अब A. R. रहमान भी जुड़ गए हैं। कहते हैं कि मैं मुसलमान हूँ, इसलिए मुझे इस मुल्क में काम नहीं मिल रहा है।
ग्रो अप यार। तुम्हारे गाने सुन-सुन कर हम बड़े हुए हैं। एक दौर सबका आता है। कल तुम्हारा था, आज किसी और का है। कल किसी और का होगा। सलमान, शाहरुख, आमिर भी तो मुसलमान हैं.... ! बिना धर्म देखे इनको स्टार बनाया है इस देश के लोगों ने।
अपनी वर्थ प्रूव करो, मेहनत संघर्ष करो। जहाँ से खा रहे हो उस जगह को विक्टिम कार्ड खेल कर बदनाम मत करो।
ऐसी लोगों को शायरी की भाषा में एहसास फरामोश कहते हैं। और देसी भाषा में कहते हैं - गद्दार।
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