dahej mukt mithila

(एकमात्र संकल्‍प ध्‍यान मे-मिथिला राज्‍य हो संविधान मे) अप्पन गाम घरक ढंग ,अप्पन रहन - सहन के संग,अप्पन गाम-अप्पन बात में अपनेक सब के स्वागत अछि!अपन गाम -अपन घरअप्पन ज्ञान आ अप्पन संस्कारक सँग किछु कहबाक एकटा छोटछिन प्रयास अछि! हरेक मिथिला वाशी ईहा कहैत अछि... छी मैथिल मिथिला करे शंतान, जत्य रही ओ छी मिथिले धाम, याद रखु बस अप्पन गाम - अप्पन बात ,अप्पन मान " जय मैथिल जय मिथिला धाम" "स्वर्ग सं सुन्दर अपन गाम" E-mail: apangaamghar@gmail.com,madankumarthakur@gmail.com mo-9312460150

apani bhasha me dekhe / Translate

सोमवार, 28 नवंबर 2011

-----कनियाँ बनाम बाबा-----


ओ अपन अथबल मायक कोढ़
आ आन्हर बापक करेज बेचिक'
बेसाह' चाहैत अछि
सनकल कनियाँक लेल
एक रत्ती मुस्की!

तें पितामहक पिताहम केर किनल
माटिक तर में गाडल
संचित पितारिया तमघैल
बेचिक' कीन' चाहैत अछि
अपन 'मैरिज डे' पर
कनियाँ के देबाक लेल उपहार
लाइफ टाइम सिम आ मोबाइल

आ ओम्हर खाट पर पड़ल
खोखिआइत वृध्द्र पितामह
ओहि तमघैल कें बन्हकी राखि
किन लेब' चाहैत छथि
एक डिब्बा च्यवनप्राश
आ' काटि लेब' चाहैत छथि
हाड़ कंपबैत
एही बेरुक जाड़!

----------गीत----------





की हिन्दू आ की मुसलमान
एके शोणित, एके परान
मिथिलाक माटी पर रहनिहार
बस, एक बात हम मानै छि !

मंदिर पूजा, मस्जिद पूजी
प्रार्थना करी आ नमाज पढ़ी
गीता पढ़ी ली आ कुरान पढ़ी
अल्लाह कही, सियाराम कही
पोथी अनेक अछि सूत्र एक
बस, एक मन्त्र हम जाने छि
हम मिथिला केर छि, मैथिल छि!

सभकें भेटइ रोजी-रोटी
आ सभहक वाणी कें आदर
सभहक चलबा ले बाट रहय
नहीं बाट रहय एत्ते पातर
हम सभ सिनेह केर भूखल छि
हम एतबही सभदिन माँगै छि
हम मिथिला केर छि, मैथिल छि!

हम मैथिल छि,हम भारत केर
भारतक करेजा केर टुकड़ी
देसक माला केर एक फूल
ई बात ने कहियो हम बिसरी
आजादी दशक, प्राण हमर
से सभ दिन सँ हम मानै छि
हम मिथिला केर छि, मैथिल छि!


-------निर्वासन-----


कत' रहब
आ कोना रहब
धरती-गगन
आकी चान पर रहब?

जंगलक झोंझ!
पहाड़क खोह!!
वसुन्धराक सोन्हि!!!
आकी समुन्द्रक लहरी में रहब?

सगरो सँ खेहारल जाएब
लुक्का सँ झरकाओल जाएब
बिढनी सँ बिन्हाओल जाएब
फत्रा में बझाओल जाएब
पिजरा में बैसाओल जाएब

पूछबै से किएक यौ भाई?
तं अहींक डीह-डाबराक
बीत भरी जमीन
हडपी लेबक लेल
वा आड़ी काटी-कटी
डसैत रहबाक लेल
दसो दिगंत में
दियाद-बाद बनिक'
ठाढ़ रहत दुर्योधन!


यहां बिकते हैं दूल्हे,क्या बोली लगाएंगे आप!





सहरसा.दहेज लेना या देना दोनों कानून की नजरों में भले ही जुर्म हों लेकिन मिथिलांचल की धरती पर इसे सरेआम ठेंगा दिखाया जा रहा है। जीवन मूल्यों को ताक पर रख दिया गया है। बोलियां लग रही हैं, इंसान बिक रहे हैं। मिथिला पंचांग के मुताबिक, नवंबर 2011 से जून 2012 तक विवाह के 49 दिन हैं। सो, एक बार फिर से दूल्हों की बिक्री जोरों पर है।

लडक़ों का रेट

आज की तारीख में लडक़ों का रेट इस प्रकार है। आइएएस-आईपीएस 25 से 35 लाख, डाक्टर-इंजीनियर 15 से 20 लाख, एलआईसी डीओ 10 से 13 लाख, बैंक में कार्यरत कर्मचारी पांच से आठ लाख, किरानी बाबू- दारोगा बाबू पांच से सात लाख, सिपाही जी तीन से चार लाख, सबों के लिए गाड़ी अनिवार्य है। बेरोजगार लडक़ों को भी डेढ़ से दो लाख, पिताजी नौकरी में हो तो दर बढ़ जाया करता है। जमीन भी है तो सोने पे सुहागा। इसी तरह स्टाफ रिपोर्टर का अधिक तो मुफस्सिल संवाददाताओं का कम। पत्रकार के पिता नौकरी में हैं और अच्छी खासी जमीन भी है तो फिर बल्ले-बल्ले।

...और लड़की चाहिए हीरोइन जैसी
सबसे दुखद व आश्चर्यजनक पहलू यह है कि पढ़े-लिखे लडक़े भी अपने पिता द्वारा दहेज मांगे जाने का विरोध नहीं कर पाते। उन्हें भी हीरोइन जैसी लडक़ी चाहिए गाड़ी अलग से। बहरहाल, हाल के वर्षो में लडक़ों की कीमतों में गजब की उछाल आयी है। स्वाभाविक है लडक़ी के पिता को ठंड में भी पसीना चू रहा है।

कब-कब है विवाह का शुभ लग्न
नवंबर : 21, 23, 25, 27 व 30 दिसंबर: 1, 5, 9 व 11 जनवरी: 12, 18, 19, 20, 23, 25, 27 व 29 फरवरी: 2, 3, 8, 9, 10, 15, 16, 17, 19, 23, 24 व 29 मार्च: 1, 8, 9 व 12

शनिवार, 26 नवंबर 2011

दहेज़ मुक्त मिथिला बनाबू@प्रभात राय भट्ट

समाजक कलंक बनल अछि तिलक दहेज़ //
की जाने लोग कोना करैया एकरा परहेज //२

बेट्टा बनल अछि मालजाल बाप बनल पैकारी
दहेजक आईगमें जईर रहल अछि बहु बेट्टी बेचारी
समाजमे दहेजक रोग लागल अछि बड भारी
जौं उपचार नहीं करब तेह फ़ैल  ज्यात महामारी
समाजक कलंक बनल अछि तिलक दहेज़ //
की जाने लोग कोना करैया एकरा परहेज //२

बेट्टी जन्म लईते बाप माथ पैर हाथ धरैय
बेट्टीक ब्याह कोना करब चिंतामें डुबल रहैय
शिशु हत्या  करैया   कियो भ्रूण हत्या करैया
आईग लागल दहेजक बेट्टी जईर जईर मरैय
समाजक कलंक बनल अछि तिलक दहेज़ //
की जाने लोग कोना करैया एकरा परहेज //२

मैथिल ललना पैढ़लिख भोगेलैथ विद्द्वान
मुदा दहेज़ छै अपराध ई किनको नहीं ज्ञान
मांगी दहेज़ किये करैतछी बेट्टी बहुक अपमान
करू आदर्श ब्याह यौ ललना बढ़त अहांक शान
समाजक कलंक बनल अछि तिलक दहेज़ //
की जाने लोग कोना करैया एकरा परहेज //२

उठू जगु मैथिल ललना बढ़ू आब आगू
तिलक दहेजक विरुद्ध एक अभियान चलाबू
मैथिलि बैदेही जानकीके भ्रूण हत्या सं बचाबू
उठू जगु मैथिल दहेज़ मुक्त मिथिला बनाबू
समाजक कलंक बनल अछि तिलक दहेज़ //
की जाने लोग कोना करैया एकरा परहेज //२

रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट