dahej mukt mithila

(एकमात्र संकल्‍प ध्‍यान मे-मिथिला राज्‍य हो संविधान मे) अप्पन गाम घरक ढंग ,अप्पन रहन - सहन के संग,अप्पन गाम-अप्पन बात में अपनेक सब के स्वागत अछि!अपन गाम -अपन घरअप्पन ज्ञान आ अप्पन संस्कारक सँग किछु कहबाक एकटा छोटछिन प्रयास अछि! हरेक मिथिला वाशी ईहा कहैत अछि... छी मैथिल मिथिला करे शंतान, जत्य रही ओ छी मिथिले धाम, याद रखु बस अप्पन गाम - अप्पन बात ,अप्पन मान " जय मैथिल जय मिथिला धाम" "स्वर्ग सं सुन्दर अपन गाम" E-mail: apangaamghar@gmail.com,madankumarthakur@gmail.com mo-9312460150

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शुक्रवार, 11 मार्च 2011

मेरे सपनो का बिहार.......!

हाल के कुछ बर्षो में हुए सामाजिक एवं आर्थिक परिवर्तन के बाद हर बिहारी एक नए विकसित बिहार का सपना बुनने लगा है.  मेरा भी सपना है एक नए बिहार के सृजन का, जहाँ  साक्षरता दर शत-प्रतिशत हो. जहाँ समाज का स्वरुप ऐसा हो कि सभी वर्गों के लोगो को सामान अधिकार मिले. जहाँ समाज के लोग जाति, वर्ण, रंग, भेद की संकीर्ण भावना से ऊपर उठकर आपस में भाई-चारे और सामंजस्य की भावना रखे. जहाँ माता- पिता अपने बेटा और बेटी में फर्क ना समझे  तथा  उन्हें सामान रूप से शिक्षा ग्रहण करने का अवसर दे. जहाँ राज्य के हरेक गाँव में बुनियादी सुविधाओं जैसे स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, विजली, पानी, सड़क, यातायात आदि का विकास हो. जहाँ राज्य में कानून व्यवस्था इतनी चुस्त-दरुस्त हो ताकि अपराधियों के अपराध  का फ़न हमेशा दबा रहे और लोग भयमुक्त होकर सडको पर घूम सके. राज्य में राष्ट्रीय राजमार्गो का विस्तार हो ताकि परिवहन व्यवस्था सुलभ हो सके. जहाँ राज्य में लघु एवं कुटीर उद्योग को प्रोत्साहन मिले ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगो को रोज़गार मिल सके,  साथ ही साथ राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों का ज्यादा से ज्यादा निवेश हो ताकि विकास की गति को पंख लग सके. हमें राज्य के सभी ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर को अक्षुण रखना होगा और इसे विकसित करना होगा ताकि पर्यटन उद्योग को बढ़ावा मिल सके. जहाँ राज्य के सभी जिलो में व्यावसायिक संस्थान खुले, आईटी पार्क का निर्माण हो और शौपिंग मॉल खुले. 
                                                                               इनके अलावा भ्रष्टाचार को रोकने का रोकथाम करना होगा और इसके लिए जरुरत इस बात की है की राज्य का हरेक व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी समझे तथा अपने-अपने कर्त्तव्य का निर्वाह करते हुए दुनिया के सामने बिहार का  नया  दमकता चेहरा पेश करे और खुद को 'बिहारी' कहने और कहलवाने पर गौरान्वित महसूस करे.

मै अपने सपनो को कुछ पंक्तियों के द्वारा प्रस्तुत करना चाहूँगा.........!!



प्रजातंत्र की जननी, जग को दिया अहिंसा का सन्देश,
ज्ञान का दीप जलाने वाला, विश्व का गुरु था यह प्रदेश.
बुद्ध  और महावीर ने जग को दिया अहिंसा का सन्देश, 
जग जननी जानकी माता की, जन्मभूमि है अपना यह प्रदेश.

साक्षी रहा अपना विहार, पालवंश और लिच्छवी की शान का,
साहित्य बना दर्पण, दिनकर विद्यापति के गान का.
मंगल पाण्डेय, वीर कुवर सिंह के अनुपम बलिदान का,
जीरादेई उदगम स्थल प्रथम नागरिक के सम्मान का.

पुण्य भूमि है यह, यहाँ राम ने किया अहिल्या का उद्धार,
बापू ने था ख़त्म किया चंपारण में अंग्रेजो का अत्याचार.
 जातिवाद, नक्सलवाद और घोटालो की है हमें दरकार,
हर क्षेत्र में बिहार आगे बढ़े, नेता  भी हो अगर ईमानदार.

शोषण मुक्त रहे सब जनता, मिटे भय, भूख और भ्रष्टाचार,
कहे गर्व से 'बिहारी' है हम, मेरे सपनो का यही बिहार.



पाठको से आग्रह है कि कृपया अपनी प्रतिक्रिया जरुर लिखे.
आप सभी लोगो को यह जान कर ख़ुशी होगी कि मेरे इस पोस्ट का कुछ भाग
 'हिंदुस्तान' अख़बार में दिनांक 09 मार्च 2011  को 'सौ साल के संकल्प' पृष्ठ पर प्रकाशित हुआ था(patna edition).


 मेरे और पोस्ट पढने के लिए आप मेरे ब्लॉग पर जा सकते है. उस पेज का लिंक मै आप लोगो को नीचे दे रहा हु जिसे आप खुद देख सकते है.


                       Chandan Jha Blog

शुक्रवार, 4 मार्च 2011

आयल गामक याद-

आयल  गामक याद-    



मदन कुमार ठाकुर
कोठिया पट्टीटोल
झंझारपुर (मधुबनी)
बिहार - ८४७४०४
MO  -९३१२४६०१५०


   एक समयक बात छल , हम दिल्लीसँ गाम गेल छलहुँ, हमर काका  के   बेटा सेहो २६ सालक बाद गाम आयल छलथि ! हुनका सोझाँ देखि कs मन बढ  हर्षित भेल, जेना एकटा मरल प्राणीमे जान अबैत अछि, ओहिना हम अपनाकेँ महसूस करैत छलहुँ ! ई बात हमर जन्मसँ   किछ  पहिनेक छी ! भैयाक मुखसँ सुनल ई वास्तविक कहानी छी !

       हम भैयासँ पुछलियनि जे अहाँ अपन जीवनक यथार्थ कथा सुनाउ , अहाँ गामसँ केना भागलहुँ आऽ केना गामक याद  आयल कोना  मोन पड़ल, से हम अहाँसँ जानए चाहैत छी !


    भैयाक मुखसँ निकलल बास्तविक सच ई अछि !-----
हम आठ सालक छलहुँ, बाबू काका सभ स्कूल जाय के लेल  बरम बार  कहइ छलथि, तँ हम आन गाम भागि जाइत छलहुँ ! एहिना सभ दिन कुनू न कुनू बहाने कतहु ने कतहु चलि जाइत छलहुँ !
  
        एक दिन स्कुलक खातिर काका आओर बाबू बड़ मारि मारलथि,   हम स्कुल  जाया काल में   किताब कॉपी लए स्कुल चलि गेलहुँ, ओम्हरसँ अबैत काल किताब कोपीकेँ एगो बोनमे फेक देलियैक आर गाम छोरि देलियैक ! भगिते - भगिते विदेश्वरस्थान एलहुँ, पटना बला बसक पाछाँमे हम लटकि गेलहुँ। जतए  कण टेक्टर  टोकैत छल ओतय हम उतरि जाइत छलहुँ ! एहिना कऽ कए पटना पहुँचि गेलहुँ,

            पटना जाइत जाइत हमरा भूख बहुत जोर लागि गेल छल ! हम एकटा मारवाड़ी होटलक सामने गेलहुँ, जाऽ कए ठार भऽ गेलहुँ ! हमरा जेबमे एकोटा फुटल कौरी नञि छल, जे हम भोजन करितहुँ, आधा घंटा हम होटलक सामने ठार छलहुँ, तँ ओकर मालिक कहलक, जे "बेटा तोहार के भूख लागल बा का?" हम चुप - चाप मूड़ी डोलाऽ देलियनि। ओऽ हमरा रोटी आर तरकारी देलक, हम भरि पेट भोजन केलहुँ ! बादमे कहलियनि, जे हमरा होटलमे नोकरी देब की ? ओऽ हमरा ८५ रुपैया महिनाक हिसाबसँ नोकरी पर रखलक ! हम होटलमे तीन मास काज केलहुँ, ओतय एक दिन कारीगरसँ झगड़ा भऽ गेल, तँ हम स्टेसन पर आबि कए बैसि गेलहुँ, ओतय आठ घंटा बैसल छलहुँ ! चारिटा आदमी सेहो बैसल छलथि, ओऽ आपसमे बात करैत छलथि, जे गुजरातमे बड़ नीक नोकरी भेटैत छैक, से सभ आदमी ओतय चलितहुँ ! हम ई बात अपन कानसँ सुनलहुँ आर हुनका सभकेँ कहलियनि, हमहूँ अपने सभक संग चली? लेने जाएब ? ओ सब कहलथि, चलू। किए नञि लऽ जाएब !

           हुनका सभक संग गुजरात पहुचलहुँ, ओइठाम सभ आदमी कपड़ा छपाई केर कंपनीमे काज पकड़लहुँ ! ओतय हमरा १६० रुपैआ महिनाक हिसाबसँ तनखा भेटए लागल ! दिन , महिना , साल बीति गेल, हम सेहो २० सालक भऽ गेलहुँ ! सोचलहुँ जे गाम चलि जाइत छी, ओतय बाबू काकाकेँ कह्बनि, विवाह दान कराऽ देताह, आऽ गामेमे रहब, खेती बारी करब ! फेर एक दिन अचानक मोन पड़ल, जे हमरा बाबु आऽ काका बड़ मारि मारलथि, आऽ घरसँ भगा देलथि। हम गाम नञि जायब !

            समय बितल गेल, अचानक एक दिन दरभंगाक एक व्यक्ति भेटलाह, पुछलथि, जे अपनेक घर कतए भेल ? हम अपन घरक पता बिसरि गेल छलहुँ ! केवल अपन गामक नाम बतेलियनि आऽ बाबुक नाम ! ओऽ कहलथि, जे ओहि गाममे तँ १९८७ मे बड़ बाढ़ि आयल छल, ओहि गाममे बहुत लोक भसिया गेल, कतेक घर सेहो उजरि गेल ! पता नञि अहाँक घरक की भेल ! हम कहलियनि, जे हमरो घर फूसेक छल ! पता नञि, ओहो भासि गेल की ठीक अछि ! सुनि कऽ बड़ दुःख भेल, सोचलहुँ, आब की कएल जाय ! ओहि व्यक्तिसँ पुछलियनि ! जबाब भेटल, जे अहाँ एतहि विवाह दान कs लियऽ, हमरा एकटा सुपुत्री अछि हुनकेसँ ! 


         ओहिठाम विवाह केलहुँ, दुटा संतान सेहो उत्पन्न भेल, लक्ष्मी आर आनंद ! दुनुकेँ अएलासँ हमरा अपन परिवार , अपन घर , अपन गाम सभ बेर-बेर याद   आबए लागल, मुदा करब तँ करब की ! दुनुटा आठ आर छः सालक भऽ गेल छल ! ओऽ सभ बेर-बेर पुछैत छल, जे हमर बाबा आऽ मैयाँ कतए छथि ! हम मोनमे मात्र ईएह सोची, जे माई आर बाबु आब कतए हेथिन आऽ कोना ई जीबैत हेताह ! जेना हम लक्ष्मी आऽ आनंदक लेल जान प्राण दैत छी, तहिना हमरो माई आर बाबु हमरा लेल प्राण दैत हेताह ! नञि, हमरासँ बड़का भूल भेल, जे हम अपन गामकेँ त्यागलहुँ ! मोनमे मात्र माञि आर बाबुक याद अबैत छल ! जे बाबु केना हेताह, माई हमर कतए हेतीह ! पता नञि काका आऽ काकी कतय हेताह, बेर-बेर मोनमे ईएह खयाल अबैत छल ! सोचलहुँ जे एक महिनाक छुट्टी लए गामसँ घूमि आबी ! आऽ सभ धिया-पुताकेँ सेहो घुमा देबए ! जे कमसँ कम गामक याद तँ अबिते रह्तए !

             सभ परिवार मिलि कए हम दरभंगा पहुचलहुँ ! ओतयसँ टेकर कऽ कए बिदेश्वर स्थान पहुचलहुँ, ओतयसँ हम ई नञि जानैत छलहुँ, जे हमर गाम किमहर अछि आऽ हम कतय जायब , हम की करब ! ओतय बाबा बिदेश्वरक पोखरिमे स्नान केलहुँ आऽ बाबाकेँ सेहो प्रणाम केलहुँ ! सभ बच्चा सभकेँ भूख सेहो लागि गेल छल ! सोचलहुँ जे गामक पवित्र भोजन चूडा दही चीनी होइत छञि, से ग्रहण करी ! भोजन केलाक उपरांत होटल मालिकसँ पुछलियनि, जे यौ हमरा पट्टीटोल जेबाक अछि, से हम केना जाएब ! ओऽ हमरा कहलथि जे अहिठामसँ रिक्सा भेटत, ओऽ अहाँकेँ घर तक छोड़ि देत ! हम सभ रिक्सापर बैसलहुँ, रिक्सा बाला भरि रस्ता ईएह पुछैत छल, जे मालिक अहाँक कोन टोल घर अछि ! जबाब किछु नञि भेटैत छल, जे हम रिक्साबाला के कहबइ !

           जौँ जौँ हम अपन घरक दिस जाइत छलहुँ, किछु नञि किछु याद जरुर अबैत छल ! रिक्सा बालासँ बस केवल ईएह कहैत छलहुँ, जे कनिक दूर घर आर अछि ! अपन घरक लग जखन गेलहुँ तँ छोटका काका नज़र पड़लाह, हम हुनका चीन्हि गेलियनि, मुदा हमरा ओऽ नञि चीन्हि सकलाह। किएक तँ २६ साल भऽ गेल छल ओऽ बहुत जरुरी काजसँ हाथमे टेंगारी लए जाइत छलथि ! कनेक दूर जखन आगू गेलहुँ, देखलहुँ जे ओऽ फूसिक घर ओहि दिशामे अछि जाहि दिशामे हमरा सभ किछु यादि छल ! सभ ठीक-ठाकसँ याद आबए लागल !
    
        हम जखन दलान पर पहुंचलहुँ, सब हमरा दिस घुरि-घुरि कए देखैत छल, जे ई व्यक्ति अपन परिवारक संग के थिकाह ! हम रिक्सा बालाकेँ पाइ दऽ देलियनि आऽ एकटा छोट छीन  बुच्चीसँ पुछलियनि, अपन बाबुक नाम लऽ कए, जे हुनकर घर कोन छियनि। ओऽ बुच्ची कहलथि जे ईएह छियनि हुनकर घर !

     देखलो   अंगनामे कन्नारोहट होइत छल, सभ जोर-जोरसँ कनैत छल, काकी यै काकी, हमरा छोड़ि कऽ कतय चलि गेलहुँ ! आँगन जखन पहुंचलहुँ, देखलहुँ, ओऽ लाश ओऽ मुर्दा हमर माइक छी ! हम अपन आपकेँ सम्हारि नञि सकलहुँ ! जोर-जोरसँ कानए लगलहुँ! लक्ष्मी आर आनंद पुछलक, जे पापा अहाँ किए कनैत छी ! हम कहलियनि, जे ई अहाँक दादी माइ छथि। ई अपना सभकेँ छोड़ि कए चलि गेलीह। बहुत गलती भेल जे हम एको दिन पहिने किएक नञि अएलहुँ ! हमरा आसमे हमर माइ आइ अपन प्राण त्याग कऽ लेलक ! हम बहुत अभागल छी, हम बहुत पापी छी, जे हम अपन माइ बाबुकेँ बात नञि मानलहुँ, हमरासँ आइ बहुत अपराध भेल ! हम आइ कतहु के नञि रहलहुँ ! एतबामे बाबु आऽ काका सभ क्यो बाँस काटि कए आबि गेलाह, माइक अंतिम संस्कार करबाक लेल ....

                                             (     समाप्प्त )

मंगलवार, 1 मार्च 2011

प्रेम से बोले , बाबा भोले नाथ की -----

आजू नाथ  एक  वरत  महा सुख लागत है  -



हे भोला नाथ  कखन  हरव  दुःख  मोर --


जिसका  नाथ  भोले नाथ वो अनाथ  कैसे ----


( प्रेम से बोले बाबा  भोले नाथ की -----)

                                                      ऐ गणेश  के  मम्मी ------

( प्रेम से बोले बाबा  भोले नाथ की -----)

ऐ गणेश  बबुवा




( प्रेम से बोले बाबा  भोले नाथ की -----)

 हरी ॐ  नमह शिवाय


( प्रेम से बोले बाबा  भोले नाथ की -----)
                                        
   मैथिलि   भक्ति   विडिओ   सोंग   भोला   बाबा  के   नचारी 

पूजा के  हेतु  शंकर आयल  छी हम पुजारी



( प्रेम से बोले बाबा  भोले नाथ की -----)

MAITHILI  BHAKTI   VIDIO SONG  BHOLA  BABA KE  NACHARI

बाबा यो  डमरू के  बोल अनमोल  लगैया



( प्रेम से बोले बाबा  भोले नाथ की -----)

MAITHILI  BHAKTI   VIDIO SONG  BHOLA  BABA KE  NACHARI

 बसहा पर  चट्हल छैथि  बमभोला -----



( प्रेम से बोले बाबा  भोले नाथ की ----२ -)

रविवार, 27 फ़रवरी 2011

अभय कान्त झा दीपराज कृत - चक्रधर स्तुति

  









               चक्रधर स्तुति

राम बन कब ? आओगे, प्रभु कृष्ण बन कब ? आओगे |
अपने  भक्तों को भला प्रभु ,  कब  तलक ?  तरसाओगे ||

दस नहीं प्रभु ,  अनगिनत  हैं ,  शीश,  रावण  के  यहाँ |
कंस   भी   प्रभु  अनगिनत  हैं,  दृष्टि  जाती   है   जहाँ ||
क्षीर - सागर,   शेष - शैय्या,  छोड़ प्रभु कब ?  धाओगे |
अपने  भक्तों को भला प्रभु ,  कब  तलक ?  तरसाओगे ||१ ||

हर   तरफ   अंधेर   और   अन्याय   का   शासन  हुआ |
धर्म,    रानी   द्रोपदी    और    पाप,   दुःशासन   हुआ ||
चीर बन तुम दीन को प्रभु , फिर न क्या ? अपनाओगे |
राम बन कब ? आओगे, प्रभु कृष्ण बन कब ? आओगे ||२ ||

धेनु  -  धरती   और   गंगा,   कष्ट   से   सब   त्रस्त  हैं |
दुर्जनों   के   ज़ुल्म   से   प्रभु ,   भक्त   तेरे   पस्त   हैं ||
बन के सावन की घटा क्या ?  प्रभु न इन  पर छाओगे | 
अपने  भक्तों को भला प्रभु ,  कब  तलक ?  तरसाओगे || ३ ||

जिस  प्रकृति  के  और  कृति  के,  आप प्रभु आधार हों |
दुर्दशा  क्यों  उसकी ?   जिसके   आप   पालनहार  हों ||
क्या ?  हमें  प्रभु  गोद  में,  लेकर  न फिर समझाओगे |    
राम बन कब ? आओगे, प्रभु कृष्ण बन कब ? आओगे ||४ ||

चक्रधर,  फिर  चक्र  लेकर  आओ  प्रभु ,  अवतार  लो |
धर्म   की   रक्षा   करो   प्रभु ,   पाप   को   संहार   लो ||
वर्ना ,   कैसे ?   नाथ,   दीनानाथ,   तुम   कहलाओगे |
अपने  भक्तों को भला प्रभु ,  कब  तलक ?  तरसाओगे ||५ ||


राम बन कब ? आओगे, प्रभु कृष्ण बन कब ? आओगे |

अपने  भक्तों को भला प्रभु ,  कब  तलक ?  तरसाओगे ||


                रचनाकार - अभय दीपराज

शनिवार, 26 फ़रवरी 2011

मधेपुरा में ई वर्ष खुलत मेडिकल कॉलेज

राज्य के स्वास्थ मंत्री अश्रि्वनी कुमार चौबे कहलखीन जे सरकार अगला वित्तीय वर्ष में बिहार में मधेपुरा सहित चार मेडिकल कालेज खोले ले जा रहल ये | एकरा लेल केंद्र सरकार से एमसीआई के नियम में लचीलापन आनए के आग्रह करल गेल ये|
स्वास्थ चेतना यात्रा के क्रम में बुधवार के रात सहरसा पहुंचल स्वास्थ मंत्री श्री चौबे जी स्थानीय परिसदन में पत्रकारों से भेल बातचीत में बतेलखीन जे सहरसा में तैयार आइसीयू कक्ष के तीन माह के अन्दर चालू करै के आदेश सिविल सर्जन आज़ाद हिंद प्रसाद के दा देल गेल ये| ओ कहलखीन जे बिहार में मेडिकल कालेज, अस्पताल आ चिकित्सक के ढेर कमी ये| जबकि नियमतः ५० लाख के आबादी पे एक टा मेडिकल कालेज होबाक चाही|
ई हिसाब से बिहार में कम स कम २० टा मेडिकल कालेज होना चाही |
मुदा, आईठाम ६ टा सरकारी आ ३ टा मेडिकल कालेज ये|
राज्य सरकार अगला वित्तीय वर्ष में इंदिरा गांधी आर्युविज्ञान संस्थान के अलावा पावापुरी, बेतिया एवं मधेपुरा में मेडिकल कालेज खोले के निर्णय लेलक ये| सहरसा सदर अस्पताल में डाक्टर के कमी के बारे पे पुछला पर चौबे जी कहलखिन जे पूरा राज्ये में चिकित्सक के कमी ये आ नौ हज़ार डाक्टर ते तुरंते चाही| सरकार ई लेल जोर शोर से काज का रहल ये|
चौबे जी कहलखीन जे राज्य सरकार २२ मार्च से तिन करोड़ ६५ लाख बच्चा
के स्वास्थ जाँच शुरू करै ले जाय रहल ये | ई बच्चा के स्वास्थ जाँच में बाद सबटा के स्वास्थ कार्ड भी देल जायत| आ १६ बर्ष तक के बच्चा के स्वास्थ के जिम्मा राज्य सरकार लेत|