dahej mukt mithila

(एकमात्र संकल्‍प ध्‍यान मे-मिथिला राज्‍य हो संविधान मे) अप्पन गाम घरक ढंग ,अप्पन रहन - सहन के संग,अप्पन गाम-अप्पन बात में अपनेक सब के स्वागत अछि!अपन गाम -अपन घरअप्पन ज्ञान आ अप्पन संस्कारक सँग किछु कहबाक एकटा छोटछिन प्रयास अछि! हरेक मिथिला वाशी ईहा कहैत अछि... छी मैथिल मिथिला करे शंतान, जत्य रही ओ छी मिथिले धाम, याद रखु बस अप्पन गाम - अप्पन बात ,अप्पन मान " जय मैथिल जय मिथिला धाम" "स्वर्ग सं सुन्दर अपन गाम" E-mail: apangaamghar@gmail.com,madankumarthakur@gmail.com mo-9312460150

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मंगलवार, 17 दिसंबर 2013

मिथिला राज्य आंदोलन के निमित्त, दु-शब्द - संजय झा “नागदह”

मिथिला राज्य आंदोलन के निमित्त, दु-शब्द - संजय झा “नागदह” 5 दिसंबर २०१३, जंतर मंतर, नई दिल्ली

मिथिला राज्य आंदोलन के निमित्त, दु-शब्द - संजय झानागदह” 5 दिसंबर २०१३, जंतर मंतर, नई दिल्ली
 मिथिलानगरी नमस्तुभ्यं ,नमस्तुभ्यं मिथिलावासिने माता सीता नमस्तुभ्यं , जन्मभूमि नमस्तुते !!राम जी लक्ष्मण जी सँ कहने छथि:-अपि स्वर्णमयी लंका मे लक्ष्मण रोचते, जननी जन्म भूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी एहन सुंदर लंका नगरी जे स्वर्ण सँ बनल अछि मुदा हमरा कनिको नइ सोहाइत अछि, कियाक जन्मदाता जन्मभूमि स्वर्गो सँ बढ़ि अछि  आ वोहू मे जतय माँ लक्ष्मी, सरस्वती, आदि शक्ति माता सीता के रूप मे पृथ्वी सँ अवतरित भेलीह जगह अछि मिथिला

सबहक इच्छा होइत छनि जे मरणोपरांत स्वर्ग के प्राप्ति करी जखन कि हमारा अनुकूले जे सब पूर्व जन्म मे पुण्य अर्जित केने छथि हुनके जन्मटा एही मिथिला नगरिया मे अछि, कारन कि आदिमाता अन्यत्र अवतरित सकैत छथि ? एतहि जाहि भूमिमार्ग सँ अवतरित भेलीह पुनः ओहि मार्ग सँ पृथ्वी मे समाहित गेलीह

एहन सुंदर मिथिलाधाम में जन्म लेलापरान्तो हमरा लोकनिकेँ मिथिलावासी रहितहुँ बिहारी कह पड़ैत अछि हमरसभक पूर्बज सेहो बहूत प्रयास केलाह सतत सेहो लागल छथि मुदा एखनधरि प्रयास असफल रहल  हमर सभक जे संस्कार अछि जे ताहि अनुकूल अपन पूर्वजकेँ अर्थात जे हमरा सँ श्रेष्ठ  छथि वा छलाह हुनक प्रयास के सत-सत नमन करैत हमारा लोकनिक   कर्तव्य अछि, जे अपन  देवता, पितर, सभक अधूरा आस वा टुटल आसकेँ पूरा करबाक यथासाध्य कमरतोड़ मेहनत ' अपन इतिहास, भूगोल, संस्कृति,संस्कार,विधि,व्यवहार,पौराणिक धरोहरकेँ क्रमबद्ध रूपे प्रशाशनिक तरीका सँ रक्षा करवाक लेल यथासाध्य सामूहिक रूप सँ प्रयास करवाक चाही   

        

बुधवार, 11 दिसंबर 2013

बीते 100 सालोँ मे मिथिला के प्रति बिहार का रवैया :

Mithila Against BIHAR



 बीते 100 सालोँ मे मिथिला के प्रति बिहार का रवैया :

1. बिहार मेँ दो एयरपोर्ट गया और पटना मेँ, पूर्णियामे नाम
मात्र का एयरपोर्ट। जब बिहार मे किसी जगह एयरपोर्ट
नहीँ था उस समय दरभंगा मे था पर आज ? पटना एयरपोर्ट
पर उतरने वाले अधिकतर यात्री उत्तरी मिथिला केँ होते हैँ पर
उत्तरी मिथिला मे एक भी एयरपोर्ट नही जहां से लोग
यात्रा कर सकेँ, क्योँ ?

2. बिहार के राज्य गीत और राज्य प्रार्थना मेँ
   मिथिला को कोइ जगह नहीँ क्या मिथिला,बिहार मेँ नहीँ है ?

3. बिहार के गया और मोतिहारी मेँ नये केद्रीय
विश्वविद्यालय बनेँगेँ, क्या पूर्णिया/ मुजफ्फरपुर इस लायक
नहीँ हैँ ?

4. बिहार सरकार ने आजतक भारत सरकार से मिथिला मे
बाढ़ की समस्या को नेपाल के समक्ष उठाने
को नही कहा है, क्योँ ? उत्तरी मिथिला मेँ बाढ़ का निदान
नहीँ हो सका है, क्योँ ?

5. आजतक कोशी पर डैम नहीँ बन सका है अगर ये डैम बन
जाता तो मिथिला बिहार को 24 घंटे बिजली उपलब्ध
कराता! क्या ये नहीँ बनना चाहिये ?

6. बिहार के पटना, गया और हाजीपुर मेँ लो फ्लोर बसेँ
चलेँगी क्या दरभंगा/ भागलपुर/कटिहार इस लायक नहीँ हैँ ?

7. मैथिली बिहार की प्रमुख भाषा है, मैथिली बिहार
की एकमात्र क्षेत्रीय भाषा है जो भारतीय संविधान
की अष्टम अनुसूचीमे शामिल है तो फिर आज तक इसे बिहार
की दूसरी राजभाषा का दर्जा क्योँ नहीँ ? यहां ये
बताना जरुरी है की मैथिली नेपाल की द्वितीय
राष्ट्रभाषा है!

8. बिहार सरकार भोजपुरी फिल्मोँ को कर मेँ छूट देती हैँ पर
मैथिली फिल्मोँ को नहीँ, क्योँ ?

9. मिथिला मेँ आजतक प्रारंभिक शिक्षा मैथिली मेँ
देनी नहीँ शुरु की गयी,क्योँ ?

10. बिहार सरकार उर्दू, बांग्ला के
शिक्षकोँ की नियुक्ति कर रहीँ पर मैथिली के
शिक्षकोँ की नहीँ, क्योँ ?

11.  जो IIIT दरभंगा के लिए था उसे नीतीश कुमार छीन कर
बिहटा स्थानांतरित कराये, क्योँ ? 

12. 2008 के कोसी पीड़ितोँ को आजतक न्याय नहीँ मिल
सका है, क्योँ ? 

13. मिथिला क्षेत्र मे नये उद्योग धंधे लगाने की बात
तो छोड़िये जितने भी पुराने जूट मिल, पेपर मिल, चीनी मिल
आदि थे वे सारे क्योँ बंद हो गये ?

14. नीतीश कुमार मिथिला क्षेत्र मेँ होने वाले हर इक
सभा मेँ ये कहते हैँ की मिथिला के विकास के बिना बिहार
का विकास नहीँ हो सकता तो फिर उन्होँने मिथिला के
विकास के लिए अब तक क्या किया ?

   कितने कारण गिनाऊ, बिहार के मिथिला के प्रति उदासीन
के ? अब तो बिहार पर विश्वास ही नहीँ है, बीते 100
सालोँ मे धोखा, धोखा और सिर्फ धोखा!
 
     अब आप बताइये बिहारी मित्रोँ क्योँ न करु पृथक
मिथिला राज्य की मांग ?"

शनिवार, 7 दिसंबर 2013

विवाह पंचमी: शुभकामना संदेश






विवाह पंचमी:

 शुभकामना संदेश

आजुक तिथि अगहन इजोरिया पंचमी,

 त्रेतामे औझके दिन मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीरामकेर 

विवाह जनकनन्दिनी सीता संग भेल छलन्हि। 

  श्री मैथिली पुत्र प्रदीपजी लिखैत छथि:
मिथिला के धिया सिया जगतजननि भेली,
धरनी बनल सुरधाम हे!
धन्य मिथिक भूमि घर-घर ऋषि-मुनि,
दूलहा जगतपति राम हे!!
गंगा बहथि जतय कोसी रहथि ततय,
कमला-गंडकके बथान हे!
हिमगिरिके घर गौरीके नैहर
शिवजी भेला मेहमान हे!!
एहि तरहें कविश्रेष्ठ नहि मात्र जगज्जननी सियाकेँ अपन गरिमामय रचनामे समेटलनि 

बल्कि समस्त मिथिला-महिमाकेँ सेहो वर्णन कयलनि अछि। 
          स्नेहलता  
राम आ सीताक विवाहपर हजारों गीत रचने छथि। ओ मिथिलाक वैशिष्ट्यकेर वर्णन करैत कहने छथि:
अपना किशोरीजी केर टहल बजेबय - आहो राम - टहल बजेबय
यौ हम मिथिले मे रहबय -२
हमरा न चाही चारू धाम यौ हम मिथिलेमे रहबय!!
साग पात खोंटि-खोंटि दिवस गमेबय -

 आहो राम - दिवस गमेबय
यौ हम मिथिले मे रहबय,
हमरा न चाही सुख आराम -

 यौ हम मिथिले मे रहबय!!
        तहिना रामचरितमानसमे सियाजीक विवाह-प्रसंगकेर वर्णन करैत
गोस्वामीजी लिखैत छथि:-
जेहि सोभा नीच घर सोहा, तेहि देखि सुरनायक मोहा!

          कहब छन्हि जे रामजीक विवाहक अवसरपर देवलोककेर राजा स्वर्गाधिपति इन्द्र जखन मिथिला अबैत छथि तँ गामक बाहर बसनिहार सामान्य सेवक-वर्गक घरक ऐश्वर्य देखि मोहित भऽ जनकक अंगना आ विवाहस्थल बुझि ओतहि प्रवेश करैत छथि..... मुदा विवाहमण्डप नहि देखि अपन सन्देह जे आखिर राजाक अंगना यैह थीक तँ विवाह कतय भऽ रहल अछि पूछलापर ई पबैत छथि जे ओ घर तँ मात्र एक सेवकवर्गक छल। मिथिलाक सम्पन्नताकेँ दिग्दर्शन एक पाँतिमे एना होइछ। 

         आइ ओ मिथिला राज्य एतेक गरीब बनि गेल अछि जे करोडों लोक ओतयसँ पलायन कय गेल अछि। ताहि हेतु एक बेर फेरसँ मिथिलावासी जनककालीन ऐश्वर्यपूर्ण मिथिला राज्यक माँग एहि भारतवर्षमे कय रहल छथि। पुन: गौरवबोधक संग प्राचिन मिथिला प्राप्त हो, ताहि लेल स्वराज्यक माँग कैल जा रहल अछि। भारतीय गणतंत्रमे ई संविधानसम्मत मिथिलाराज्य चाही। विवाहपंचमीकेर शुभ अवसरपर समस्त आस्थावान भारतीयसँ मिथिलाक गरिमाक रक्षा लेल एहि औचित्यपूर्ण माँगकेर समर्थनक आशाक अपेक्षा मिथिलावासी करैत अछि।

- प्रो. उदय शंकर मिश्र 


मैथिलि विवाह  गीत  एतय सन डोनलोड करू - 
http://maithilaurmithila.blogspot.in/2010/03/mp3.html

सोमवार, 2 दिसंबर 2013

जन्तर-मन्तरपर ५ दिसम्बर अयबाक अपील सन्दर्भमे:

जन्तर-मन्तरपर ५ दिसम्बर अयबाक अपील सन्दर्भमे:   


मिथिला लेल प्राइवेट मेम्बरकेर बिल - संसदमे!

जाहि लेल ५ दिसम्बर बेसी संख्यामे जुटबाक अनुरोध कैल जा रहल अछि तेकर भूमिका स्पष्ट करब जरुरी बुझाइछ। 

सरकार द्वारा कानून बनेबाक लेल जे विधेयक बहस करबा लेल संसदमे राखल जाइछ तेकरा गवर्नमेन्ट बिल कहल जाइछ (वेस्टमिन्स्टर सिस्टम - जेकरा भारतीय संविधानसेहो अनुसरण करैछ) आ जे कैबिनेटसँ इतर सरकारक सहयोगी वा विरोधी पक्षक सदस्य द्वारा राखल जाइछ तेकरा प्राइवेट मेम्बर बिल मानल जाइछ। १९४७ केर तुरन्त बाद जखन मिथिला राज्यक माँग भारतीय संसदमे पास नहि भेल आ फेर राज्य गठन आयोग द्वारा सेहो १९५६ मे आरो-आरो नव राज्य गठन होयबा समय सेहो एकरा नकारल गेल तेकर बादसँ आधिकारिक बहस भारतीय संसदमे एहिपर नहि भेल अछि। ताहि लेल दरभंगासँ भाजपा संसद कीर्ति झा आजाद एहि विषयपर गंभीरतापूर्ण संज्ञान लैत बौद्धिकतासँ भरल ऐतिहासिकता आ उपलब्ध दस्तावेज सबकेँ समेटने अपना दिशिसँ मिथिलाक अस्मिताक रक्षा लेल डेग उठौलनि आ एहि क्रममे हुनका द्वारा प्रस्तुत बिल "बिहार झारखंड पुनर्संयोजन विधेयक २०१३" (The Bihar Jharkhand Reorganization Bill, 2013) संसदमे बहस लेल प्रस्तावित कैल गेल अछि। विधान अनुरूप कोनो बिलपर बहस लेल राष्ट्रपतिक मंजूरी आवश्यक रहनाय आ फेर समुचित तारीख दैत एहिपर बहस केनाय आ यदि सदन एकरा मंजूर करैत अछि तँ संविधानमे प्रविष्टि केनाय - यैह होइछ प्राइवेट मेम्बर बिल।

जेना ई बुझल अछि जे मिथिला राज्यक माँग भारतक स्वतंत्रता व ताहू सँ पूर्वहिसँ कैल जा रहल अछि - कारण बस एकटा जे "मिथिला अपना-आपमे परिपूर्ण इतिहास, भूगोल, संस्कृति, भाषा, साहित्य, संसाधन, समाजिकता आ सब आधारपर राज्य बनबाक लेल औचित्यपूर्ण अछि" आ भारतीय गणतंत्रमे राज्य बनबाक जे आधार छैक तेकरा पूरा करैत अछि.... दुर्भाग्यवश अंग्रेजक समयमे प्रान्त गठन करबा समय मिथिला लेल पूरा अध्ययनक बावजूद बस किछेक खयाली कल्पनासँ एकरा मिश्रितरूपमे 'बिहार' राज्य संग राखि देल गेल छल, मुदा बिहारसँ पहिले उडीसाक मुक्ति (१९३६) आ फेर झारखंडक मुक्ति (२०००) मे कैल गेल यद्यपि मिथिलाक माँग ताहू सबसँ पुरान रहितो एहिठामक लोकसंस्कृतिक संपन्नता आ लोकमानसक सहिष्णुताकेँ कमजोरी मानि बस सब दिन संग रहबाक लेल अनुशंसा कैल गेल... परञ्च जे विकास करबाक चाही से नहि कैल गेल, जे पोषण करबाक चाही सेहो नहि कैल गेल... उल्टा जेहो पूर्वाधार एहिठाम विकसित छल तेकरो धीरे-धीरे मटियामेट कय देल गेल। बिहारक शासनमे सब दिन मिथिला क्षेत्र उपेक्षित रहि गेल। एक तऽ प्रकृतिक प्रकोप जे बाढिक संग-संग सूखाक दंश, ऊपरसँ कोनो वैज्ञानिक वा विकसित प्रबंधन नहि कय बस दमन आ उपेक्षाक चाप थोपि मिथिलाक लोकमानसकेँ आन-आन राज्य जाय सस्ता मजदूरी आ चाकरीसँ जीवन-यापन करबाक लेल बाध्य कैल गेल। परिणामस्वरूप एहि ठामक विकसित आ सुसभ्य परंपरा सब सेहो ध्वस्त भेल, लोकसंस्कृतिक मृत्यु होमय लागल आ आब मिथिला मात्र रामायणक पन्नामे नहि रहि जाय से डर बौद्धिक स्तरपर स्पष्ट होमय लागल। तखन तऽ जे विधायक (जनप्रतिनिधि) एहिठामसँ चुनाइत छथि आ केन्द्र व राज्यमे जाइत छथि हुनकहि पर भार रहल जे मिथिलाकेँ कोना संरक्षित राखि सकता - लेकिन जाहि तरहक नीतिसँ मिथिलाकेँ विकास लेल सोचल गेल ताहिसँ उपेक्षा आ पिछडापण नित्यदिन बढिते गेल। हालत बेकाबू अछि, लोकपलायन चरमपर अछि, शिक्षा, उद्योग, कृषि, प्रशासन सब किछु चौपट देखाइत अछि। बिना राज्य बनने कोनो तरहक सुधारक गुंजाइश न्यून बुझाइछ।

हलाँकि भारतमे लगभग ३०० सँ ऊपर प्राइवेट मेम्बर बिल आइ धरि आयल, ताहिमे सँ बिना बहस केने कतेक रास गट्टरमे फेका गेल तऽ लगभग १४ टा विधानक रूपमे सेहो स्वीकृति पौलक। एहि बिलक भविष्य जे किछु होउ से फलदाता बुझैथ, लेकिन एक सशक्त-जागरुक चेतनशील मैथिलक ई कर्तब्य बुझापछ जे अपन राजनैतिक अधिकार लेल एना हाथ-पर-हाथ धेने नहि बैसैथ आ अपन अधिकार लेल आवाज धरि जरुर उठबैथ। यदि भारतीय गणतंत्रमे मिथिलाक मृत्यु तय छैक तऽ भारतक भविष्यनिर्माता सब जानैथ, लेकिन एक "मैथिल" लेल अपन भागक कर्तब्य निर्वाह करबाक जरुरत देखैत अपील कैल जा रहल अछि जे जरुर बेसी सऽ बेसी संख्यामे जन्तर-मन्तरपर ओहि बिलकेर समर्थन लेल राजनैतिक समर्थन जुटेबाक उद्देश्यसँ आ मिथिला राज्य संयुक्त संघर्ष समिति द्वारा राखल गेल धरनामे सद्भाव-सौहार्द्रसंग सहभागिता लेल सेहो हम सब पहुँची। अपन अधिकार लेल संघर्ष करहे टा पडैत छैक, बैसल कतहु सँ कोनो सम्मान वा स्वाभिमान प्राप्त नहि भऽ सकैत छैक, ई आत्मसात करैत हम सब एकजुटता प्रदर्शन करी।

याद रहय - ५ दिसम्बर, २०१३, स्थान जन्तर-मन्तर, समय दिनक १० बजेसँ।

रविवार, 1 दिसंबर 2013

गजल @ जगदानन्द झा 'मनु'


करेजामे अपन हम की बसेने छी
अहाँकेँ नामटा लिख-लिख नुकेने छी

बितैए राति नै  कनिको कटैए दिन
अहाँकेँ बाटमे     पपनी सजेने छी

हमर ठोरक हँसीकेँ    देख नै हँसियौ
अहाँ हँसि लिअ दरद तेँ हम दबेने छी

हमर जीवन अहाँ बिनु नै छलै जीवन
मनुक्खसँ देवता     हमरा बनेने छी

निसा ई गजलमे आँखिक अहीँकेँ ‘मनु’
बुझू नै हम  महग   ताड़ी चढ़ेने छी

(बहरे हजज, मात्रा क्रम – १२२२-१२२२-१२२२)

जगदानन्द झा ‘मनु’