मंगलवार, 26 नवंबर 2013
सोमवार, 25 नवंबर 2013
सफल रहल हारिस रावत के पुतला दहन - delhi
काइल सीता मैया आ सम्पूर्ण मिथिला के अपमान के विरोध में मिथिला राज्य निर्माण सेना के आवाहन पर दिल्ली और राष्ट्रिय राजधानी क्षेत्र स एकत्रित मैथिल भाई बंधू के कोटिशः धन्यवाद। करीब 2:30 पर जत्था कॉफ़ी हाउस स जंतर मंतर लेल बिदा भेल। पूरा cp सर्किल के घुमैत बाबा खरक सिंह मार्ग स होइत जत्था जंतर मंतर पहुंचल। ओतय पुलिस के भारी बंदोबस्त छल। मिरानिसे के सेनानी द्वारा जबरदस्त प्रतिरोध कैल गेल। बैरिकेड के त एक बेर तोरि देल गेल। परन्तु पुनः पुलिस और जमा भ गेल। किछु लोक के मत छल जे एतहिये पुतला दहन क देल जै। परन्तु इ हमरा सब के मंज़ूर नै छल। एक बेर जखन मिरानिसे हरीश रावत के घर पर पहुँचबाक घोषणा क देने छल तखन त जेना तेना ओतय पहुँचबाक छल।
तखन इ निर्णय अपना में भेल जे पुलिस के चकमा द के 5-5 के संख्या में अलग अलग रूप स सेनानी सब हरीश रावत के घर पर पहुंची आ फेर अचानक धावा द दी। बस फेर की धीरे धीरे हम सब ओतय पहुँच लगलौ।
करीब 4:30 के करीब हम सब तीन मूर्ती लेन में छलौ। ओकरा बगले में प्रधानमंत्री आवास अछि। आला दर्ज़ा के सुरक्षा के इंतजाम छल। जखने हम सब हरीश रावत के घर के गेट पर पहुँचल की चारू दिस स करीब सौ पुलिस बला घेर लेलक। मुदा टखने ANI के रिपोर्टिंग टीम ओतय पहुँच गेल। ओ कवर कर लागल। फेर भिसन गर्जना भेल। नाराबाजी स पूरा क्षेत्र गुंजि गेल। और पुलिस पहुंचल। हरीश रावत के सुरक्षा में तैनात ACP के ज्ञापन देल जाइत छल की तखने सेना के लोक पुनः जोरशोर स नारा लगब लागल। बस फेर की छल ओकर गेट के सामने सेना के लोक सब ज़मीन पर बैस गेल। इ देख पुलिस दस्ता हमरा सब के अरेस्ट क लेलक। ओकरे प्रतीक्षा छल। पुलिस गारी में जखन हमरा सब के ल के निकलल पूरा रास्ता , जंतर मंतर तक, हम सब पुलिस के गारी के तिरपाल के फारि के नारा लगबैत गेलौ। जंतर मंतर पर हमरा सब के छोरी देल गेल। फेर ओतय नारेबाजी हेब लागल।
अंततः करीब 9 बजे राइत में घर के लेल बिदा भेलौ आ 11:30 बजे घर पहुंचल।
सही में काइल के दिन एतिहासिक छल। आब कोशिश इ हेबाक चाही जे जेहेन मैथिल एकता काइल भेल ओकरा कोना कायम राखल जै? आगाँ के कार्यक्रम के लेल इ एकता कोना मिथिला राज्य आन्दोलन के गति देत??
जय मिथिला जय मिरानिसे।
हरीश रावत के वयान पर मिथिलावासी सहित हिन्दू धर्म से जुड़े लोगो ने किया विरोध प्रदर्शन
नई दिल्ली जंतर मंतर सहित हरीश रावत के निवास पर रविवार को मिथिलावासी सहित अन्य ने भी किया जमकर विरोध प्रदर्शन जिसमे अखिल भारतीय मिथिला संघ, मिथिला राज्य निर्माण सेना , विस्व मैथिल परिषद् ,मिथिला सेवा समिति,अखिल भारतीय मिथिला पार्टी, जन जागृति मंच सहित कई मिथिला के संस्था एक साथ मिलकर हरीश रावत का वयान कि सोनिया गांधी भी विदेशी है और भारत में पूजी जाने बाली माता सीता भी विदेशी है इस बात पर आक्रोश जताया . रावत को ये नहीं पता कि माता सीता का भारत कि भौगोलिक क्षेत्र सीतामढ़ी के पुनौराधाम में अवतरित हुई थी / हमारे देवी देवताओं कि तुलना सोनिया गांधी से किया जाना बहुत ही शर्मनाक बात है / हरीश रावत इतिहास और रामायण जैसे ग्रन्थ का पढ़ना बहुत जरुरी है /
अभिल भारतीय मिथिला संघ के अध्यक्ष ने ज्ञापन देते हुए कहा कि वो मीडिया के सामने जिस तरह ऐसी वयान दिया उसी तरह मिडिया के सामने माफ़ी मांगे नहीं तो मिथिलावासी सहित देश कि हिन्दू धर्म जुड़े समुदाय के साथ - साथ माता सीता भी कभी माफ़ नहीं करेंगे / इसके लिए रावत को सात दिनों का समय दिया जाता है , अगर माफ़ी माँगा तो ठीक नहीं बड़े पैमाने पर जन आंदोलन किया जाएगा-
नई दिल्ली जंतर मंतर सहित हरीश रावत के निवास पर रविवार को मिथिलावासी सहित अन्य ने भी किया जमकर विरोध प्रदर्शन जिसमे अखिल भारतीय मिथिला संघ, मिथिला राज्य निर्माण सेना , विस्व मैथिल परिषद् ,मिथिला सेवा समिति,अखिल भारतीय मिथिला पार्टी, जन जागृति मंच सहित कई मिथिला के संस्था एक साथ मिलकर हरीश रावत का वयान कि सोनिया गांधी भी विदेशी है और भारत में पूजी जाने बाली माता सीता भी विदेशी है इस बात पर आक्रोश जताया . रावत को ये नहीं पता कि माता सीता का भारत कि भौगोलिक क्षेत्र सीतामढ़ी के पुनौराधाम में अवतरित हुई थी / हमारे देवी देवताओं कि तुलना सोनिया गांधी से किया जाना बहुत ही शर्मनाक बात है / हरीश रावत इतिहास और रामायण जैसे ग्रन्थ का पढ़ना बहुत जरुरी है /
अभिल भारतीय मिथिला संघ के अध्यक्ष ने ज्ञापन देते हुए कहा कि वो मीडिया के सामने जिस तरह ऐसी वयान दिया उसी तरह मिडिया के सामने माफ़ी मांगे नहीं तो मिथिलावासी सहित देश कि हिन्दू धर्म जुड़े समुदाय के साथ - साथ माता सीता भी कभी माफ़ नहीं करेंगे / इसके लिए रावत को सात दिनों का समय दिया जाता है , अगर माफ़ी माँगा तो ठीक नहीं बड़े पैमाने पर जन आंदोलन किया जाएगा-
आँखों देखा हाल -
Post by Sanjay Jha.
गुरुवार, 21 नवंबर 2013
आब नै चुप रहव - चल्लू डेल्ही
मिथिला राज्य निर्माण सेना केर द्वारा २४ नवम्बर क दिन के २ बजे कॉफ़ी हाउस दिल्ली स हरीश रावत के घर तक जत्था मार्च करत और हरीश रावत के घर के सामने हरीश रावत के पुतला दहन करत तथा अपन विरोध दर्ज करत | सब मैथिल भाई बहिन और मिथिला संस्था स आग्रह जे बेसी स बेसी संख्या में आबि क अपन घोर विरोध दर्ज करी | दिल्ली में रहै वाला सब मैथिल स आग्रह जल्दी स संपर्क करू और अई आंदोलन में अपन सहयोग करू | राजेश झा-08607817171 संजय कुमार- 09910644894 कमलेश मिश्र - 9560437000 , मदन ठाकुर -9312460150 ,
ई एहन शब्द बजल कोनो -?
चमचागिरी आ चाटुकारिता के एकटा सीमा होइत अछि , हद भा गेल सीता मैया के सेहो ई विदेशी मूल के कहि रहल अछि , सर्वविदित अछि अदौकाल सं जकर प्रमाणिक इतिहास अछि जे माँ सीताक जन्म सीतामढ़ी जिला अंतर्गत पुनौरा धाम मे भेल अछि , तिनका विदेशी मूल के कही एकर तुलना सोनिया गाँधी से क रहल छथि ई पाखान्द्शिरोमानी हरीश रावत , रावत जी ज क इतिहास पदु आ अपन वक्तव्य के वापस लिय , सरिपहुं ई हरेक मैथिलक मुहं पर थापर समान थिक जे हमर धरोहर माँ समान सीता मैया के सोनिया सन महिला सं तुलना कायल गेल अछि | एकरा हम व्यक्तिगत रूपेण अपन संस्था मिथिला राज्य निर्माण सेना के तरफ सं घोर निंदा करैत छी , अगर अहाँ सब हमरे जकाँ लागैत अछि त आऊ coffe हाउस रवि दिन २ बजे अपरान्ह आ एही कुकृत्य के लेल हरीश रावत के पुतला दहन कायल जाय आ हिनका ई वक्तव्य के वापस लेबा पर मजबूर करू |
एहन चमचा शिरोमणि के की कायल जाय ,
कालिख पोअति चुगला बनायल जाय ,
आऊ सब मिलि एकर पुतला दहन करी ,
मैथिल होयबाक किछु त स्वाभिमान करी ,
जा तक रहत एहन एहन लोक जेना की रावत ,
मैथिलि अपमानित होइत रहत ....... तावत
आऊ सब मिलि देखाऊ अपन त|गत |
एहन चमचा शिरोमणि के की कायल जाय ,
कालिख पोअति चुगला बनायल जाय ,
आऊ सब मिलि एकर पुतला दहन करी ,
मैथिल होयबाक किछु त स्वाभिमान करी ,
जा तक रहत एहन एहन लोक जेना की रावत ,
मैथिलि अपमानित होइत रहत ....... तावत
आऊ सब मिलि देखाऊ अपन त|गत |
Calling Mata Sita a foreigner by Sh. Harish Rawat, a Congress leader shows the fall of knowledge and intellectual levels of our leaders. It seems that he doesn't has a basic knowledge of Indian history. The Ramayana Period in Pauranic history has not any concept of Nepal. The birth place of Sita is Sitamrhi, a District town of Bihar, which Sh. Rawat would not be knowing I am sure. Sh Rawat has hurt the sentiment of crors of people. I strongly condemn his statement, calling Mata Sita a foreigner. He should apologies for his crime.
हरिश रावत तोहर ओकात कि छउ तकर थाह तोरा 24 के पता चलतउ । माता सिताके अपमानित कैला के बाद रावण एहन प्रतापि राजाके नाश भ गेल तु कोन खेत के मूली छे रे रावत...24 november ke din ke 2 bje Coffee house,CP Delhi enay nay bisru.....CP s harish Rawat ke ghar tak march kel jet ekar bad putla Dahan-
हिन्दू धर्म के ठेकेदार और ठीकेदारी लेने वाली संगठने चुप क्यूँ हैं l क्या उन्हें काठ मर गया है, या संज्ञा सुन्यता मे है ?
आखिर राम की राजनीति चमकाने वाले और इलेक्शन के समय ८४ कोशी यात्रा करनेवालों की जड़ता कब टूटेगी ?
माता सीता का यह अपमान, कब तक सहेगा हिंदुस्तान ?
आखिर राम की राजनीति चमकाने वाले और इलेक्शन के समय ८४ कोशी यात्रा करनेवालों की जड़ता कब टूटेगी ?
माता सीता का यह अपमान, कब तक सहेगा हिंदुस्तान ?
ऐसे नेता देश को क्या विकास के राह पर ले कर जाएंगे जिनको इतिहास पता ही नहीं है, सीता माता विदेशी कैसे?????
जब सीता माता थी तब इंडिया, भारत, हिंदुस्तान, या नेपाल ही नहीं बना था, उस समय तो मिथिला राज्य हुआ करता था, क्या सही में अज्ञानी नेताओ के संख्या जयादा होगया है इस देश में ?
जब सीता माता थी तब इंडिया, भारत, हिंदुस्तान, या नेपाल ही नहीं बना था, उस समय तो मिथिला राज्य हुआ करता था, क्या सही में अज्ञानी नेताओ के संख्या जयादा होगया है इस देश में ?
कांग्रेस के हरीश रावत ने आज मुझे अर्थात बिहार खास कर मिथिला की बेटी को विदेशी कहा है। तिरहुत सरकार लक्ष्मेश्वर सिंह ने कांग्रेस को पहला दान देकर सही में रावत जैसे लोगों को देशभक्त बना दिया।
कानी कानी दुःख कतेक कहियौ रौ मिथिला के ललना
रावण बनी दुःख रावत देलकौ कि तू सब रहबै अहिना ?
जौ बुझैत छै माता हमरा एक जूट हो तू सब
छौ तोरा बुझ हमरे सप्पत एक जूट हो तू सब
२४ नवम्बर क दिन के २ बजे कॉफ़ी हाउस से हरीश रावत के घर तक जत्था मार्च करत और हरीश रावत के घर के सामने अपन विरोध दर्ज करत | सब मैथिल भाई बहिन और मिथिला संस्था स आग्रह जे बेसी स बेसी संख्या में आबि क अपन घोर विरोध दर्ज करी |
रावण बनी दुःख रावत देलकौ कि तू सब रहबै अहिना ?
जौ बुझैत छै माता हमरा एक जूट हो तू सब
छौ तोरा बुझ हमरे सप्पत एक जूट हो तू सब
२४ नवम्बर क दिन के २ बजे कॉफ़ी हाउस से हरीश रावत के घर तक जत्था मार्च करत और हरीश रावत के घर के सामने अपन विरोध दर्ज करत | सब मैथिल भाई बहिन और मिथिला संस्था स आग्रह जे बेसी स बेसी संख्या में आबि क अपन घोर विरोध दर्ज करी |
Gopal Jha हरीश को इतिहास की जानकारी लेनी होगी की जहां माता सीता का जन्म हुआ वह स्थान आज भी भारत में है सत्ता के नशे में झूठ बोलने से सच नहीं हो जाती माता सीता का जन्म सीतामढ़ी में है और मैं सीतामढ़ी वासी होने के नाते इस बयान का घोर निंदा करता हूँ
ई कांग्रेस त मैथिला के खा गेलभाई 1.अंग्रेज मिथिलाक दू भाग मे बटलक ,आजादि के बाद cong. सरकार अङि मुद्दा पर चूप रहल..2.नेपाल स हर साल जे पईन छोरल जोईत अछि जहि स मिथिला मे हर साल भंयकर बाईढ आवैत अछि cong.के देन छि 3.आब राबत कहैत अछि जे सिता माता बिदेसी छलिह..
आब कहु कि -२ सुनई लेल बांकी अच्छी - ?
आब नै चुप रहव - चल्लू डेल्ही
सोमवार, 18 नवंबर 2013
साम- चकेबा पर्व - (NOIDA )
साम- चकेबा पर्व - नोएडा
के शुभ अबसर पर शिव शक्ति सोसैटी (सेक्टर ७१ नॉएडा ) दुवारI साम- चकेबा पर्व के आयोजन , मुन्ना शर्मा आ विशम्भर ठाकुर जी के अध्यक्षता में कैल गेल छल , जाही में विशेस मुख्य अतिथि सबके दोपटा से सम्मानित कैल गेलनि ,
श्री महेश शर्मा (विधायक- नॉएडा ) नेपाल सन - प्रवीण नारायण चौधरी (अन्तर रास्ट्रीय दहेज़ मुक्त मिथिला ) मैथिला राजय निर्माण सेना- के सह सहयोगी राजेश झा जी , मिथिला वाशी सोसाइटी के महा सचिव - संजय झा , मदन ठाकुर दहेज़ मुक्त मिथिला (देल्ही -प्रभारी ) अनिल झा जी , खेला नन्द झा , जिनकर मुख्य उदेश छल , बिहार मिथिलांचल के बिकाश और मिथिलाक परम परा और धरोहर के सयम रखनए , अहि साम - चकेबा पर्व के संचलन श्री महेश शर्मा (विधायक- नॉएडा )के दुरा दीप प्रजुलित आ पात्रिका बिमोचन संग साम -चकेबा मूर्ति के अपन ठेहुन से तोरैत उपरांत मिथिलाक परम- परा के निर्वाह करैत , अपन मुखार -बिंदी से मिथिलाक अनेको धरोहर के बखान केलैथि , ओही के बात आमोद झा मुजिकल ग्रुप के जरिया , सांस्कृतिक कार्य- करम के सुरुवात के गेल जाही में मुख्य गायिका कुमकुम मिश्रा , कल्पना जी के संग अनेको गायक - गायिका सब उपस्थित भेल छला ,
श्री महेश शर्मा (विधायक- नॉएडा ) नेपाल सन - प्रवीण नारायण चौधरी (अन्तर रास्ट्रीय दहेज़ मुक्त मिथिला ) मैथिला राजय निर्माण सेना- के सह सहयोगी राजेश झा जी , मिथिला वाशी सोसाइटी के महा सचिव - संजय झा , मदन ठाकुर दहेज़ मुक्त मिथिला (देल्ही -प्रभारी ) अनिल झा जी , खेला नन्द झा , जिनकर मुख्य उदेश छल , बिहार मिथिलांचल के बिकाश और मिथिलाक परम परा और धरोहर के सयम रखनए , अहि साम - चकेबा पर्व के संचलन श्री महेश शर्मा (विधायक- नॉएडा )के दुरा दीप प्रजुलित आ पात्रिका बिमोचन संग साम -चकेबा मूर्ति के अपन ठेहुन से तोरैत उपरांत मिथिलाक परम- परा के निर्वाह करैत , अपन मुखार -बिंदी से मिथिलाक अनेको धरोहर के बखान केलैथि , ओही के बात आमोद झा मुजिकल ग्रुप के जरिया , सांस्कृतिक कार्य- करम के सुरुवात के गेल जाही में मुख्य गायिका कुमकुम मिश्रा , कल्पना जी के संग अनेको गायक - गायिका सब उपस्थित भेल छला ,
संस्कृत कार्य करम के बाद बिधि पुरबका बिंदा बन और चुगला के जरयाल गेल , और समदोन गबैत आ फेर अगिला साल साम- चकेबा के अबेय के गीत गबैत सब माय - बोहीन अपन डाला लाके अपन - अपन घर- अगन गेली
( नोट - डेल्ही एन सी आर में ई प्रथम स्थल अच्छी जतय मिथिला के संस्कृति के गरीमा बढबैत अपन पहचान आ संस्कारक संग ई शुभ अबसर पर शिव शक्ति सोसैटी (सेक्टर ७१ नॉएडा ) दुवारI साम- चकेबा पर्व के आयोजन आए ६ वर्ष सन मनाबैत छैथि , अहि द्वारे कहल जैत अच्छी , जतय मैथिल ओतय मिथिला
जय मैथिल - जय मिथिला )
बुधवार, 6 नवंबर 2013
छठि मैया आ डूबैत-उगैत सूरुजके पूजा
छठि मैया आ डूबैत-उगैत सूरुजके पूजा
छैठ परमेश्वरी के पूजा समस्त मिथिलावासी लेल अति प्राचिन पारंपरिक पूजन समारोह थीक। सामूहिक रूपमें बेसीतर महिला लेकिन गोटेक पुरुष व्रतधारी सभ संग अनेको प्रकारके पकवान व ऋतुफल संग संध्याकालीन सूर्यकेँ हाथ उठाय नमस्कार अर्पण करैत पुनः उषाकाल भोरहरबेसँ छठि परमेश्वरी (उगैत सूरज) केर दर्शन लेल व्रतधारी करजोड़ि ठरल जलमें ठाड़्ह इन्तजार करैत छथि। सूर्योदय उपरान्त पुनः विभिन्न पकवान व ऋतुफल भरल डालासँ हाथ उठाय नमस्कार अर्पण करैत छठि मैयाके व्रतकथा सुनैत ओंकरी आ ललका बद्धी - ठोप लगबैत व्रतधारी अपन समस्त परिजनकेँ भगवान्केर शुभाशीर्वाद हस्तान्तरित करैत छथि। यैह पूजाके छैठक संज्ञा देल जैछ। क्रमशः मिथिला व आसपासके क्षेत्रसँ शुरु भेल ई पूजा आब समस्त संस्कृतिमें प्रवेश पाबि रहल अछि। आस्थाक बहुत पैघ उदाहरण थीक ई पूजा आ समस्त मनोवाञ्छित फल प्रदान करनिहैर शक्तिशाली छठि मैयाक पूजा लेल के आस्थावान् उद्यत नहि होइछ आइ!
व्रती (साधक) अत्यन्त कठोर नियम एवं शुद्ध आचार-विचार संग निर्जला व्रत करैत छथि आ शरदकालमें ठरल जलमें ठाड़्ह भऽ व्रती सूर्यकेँ जल-फलसँ हाथ उठबैत विशेषार्घ्यसँ पूजा करैत छथि, पूजा काल सेहो विशेष रहैत छैक। सच पूछू तऽ छठि मैयाके पूजा-अर्चनाके विधान देखि हम सभ नहि सिर्फ प्रभावित रहैत छी, बल्कि एकदम कल जोड़ि शरणापन्न अवस्थामें सेहो रहैत छी जे कहीं एको रत्ती गड़बड़ नहि हो नहि तऽ कखनहु साधनामें विघ्न पड़ि जायत आ तेकर दुष्परिणाम व्रतधारी एवं समस्त परिजन पर पड़त। बहुत गंभीर भावनासँ पूर्णरूपेण शरणागत बनि एहि पूजा में साधना करबाक महत्त्व छैक। लेकिन एतेक गंभीरताके रहस्य कि? कि बात छैक जे व्रत एतेक कठोर करय पड़ैत छैक? डूबैत सूरजके पूजा किऐक? आउ प्रयास करैत छी जे एहि समस्त रहस्य पर सँ पर्दा उठाबी। कम से कम आजुक नवतुरिया (हमरा समेत) लेल ई एक शोधक विषय अछि आ एहिमें सावधानीपूर्वक हम सभ मनन करैत आगू देखी!
सभसँ पहिने छठि मैया के थिकी? वा छठि मैया सूरजरूपमें कोना?
बहुत रोचक प्रसंग कहल गेल छैक - कहियो नारद ऋषि व्यामोहित (नारी रूपमें आकर्षित) भेल छलाह। भगवान् विष्णुकेँ मायासँ नारदकेँ एहि तरहक अवस्थाक प्राप्ति भेल छलन्हि आ कहल गेल छैक जे ई ताहि समय भेल छलन्हि जखन नारदजी कोनो कुण्ड (सरोवर)में संध्या करबाक लेल प्रवेश केने छलाह आ ताहि समय भगवान्के मायास्वरूपा एक नारी ओहि सरोवरमें अपन अंग-प्रत्यंग प्राच्छालन करैत रहलीह आ व्यामोहित नारदजी अपन संध्याके (सूर्य एवं गायत्री उपासना) बिसरि बस ओहि नारीके माया-दर्शनमें लागि गेल छलाह। हिनकर भगवान्के मायामें एहि तरहें व्यामोहित देखि सूर्य के सेहो हँसी लागि गेल छलन्हि जाहि कारणे सूर्यास्त सँ किछु समय उपरान्त धरि हुनक अस्त नहि भेलन्हि आ नारदके व्यामोहन छूटिते सूर्यक उपस्थिति देखि सभ बात बूझय में आबि गेलन्हि, तखनहि नारद सूर्यकेँ नारीरूप प्राप्त करबाक शाप देलाह जे बादमें प्रभुजीके मध्यस्थ कयलापर विमोचन करैत केवल एक दिवस लेल कायम राखल गेल, कार्तिक मासक षष्ठी (छठम) तिथिकेँ जेकर समय तेसर संध्या (सूर्यास्तसँ एक पहर पहिले) समय सँ अगिला संध्या याने भोरक सूर्योदय काल के एक पहर उपरान्त धरि नारी स्वरूपमें रहबाक बात तय भेल जिनका भगवान् विष्णु छठि मैयाक शक्तिस्वरूपा नाम व वर प्रदान कयलन्हि। मिथिलामें यैह देवीक उपासना लेल पूर्वकालमें योगी-ऋषि द्वारा प्रजाकेँ उपदेश कैल गेल आ आदिकालसँ हिनक उपासनाक एक निश्चित विधान अनुरूप छठि मैयाक आराधना चलैत आबि रहल अछि।
छठि मैयाक पूजाक महत्त्व कि?
सूर्यक परिचय सर्वविदित अछि। बिना सूर्य सभ सून्न! विज्ञान - ज्ञान - मान - आन - शान - सभ सूर्यके चारू कात, केन्द्रमें केवल सूर्य! नवग्रह, नक्षत्र, भूमण्डल, पंचतत्त्व, उर्जा, पोषण... हर बात के जैड़में सूर्य! सूर्यक उपासना संसार में आस्तिक-नास्तिक सभ करैछ। मिथिलामें जतय पुरुषवर्ग लेल संध्योपासनामें सूर्यकेँ जलक अर्घ्यसँ नित्य पूजा करैक विधान अछि, तहिना सूर्य नमस्कार समान प्रखर योग-साधना, नारीवर्गलेल सेहो नित्य तुलसी एवं सूर्यकेँ जलार्घ्य देबाक परंपरा रहल अछि। सूर्यकेँ भगवान् मानल जायमें किनको कोनो आपत्ति कहियो नहि रहल अछि। नित्य समयसँ उदय, समयसँ अस्त, दिन व रातिक निर्धारण, अग्नि-वायु-वर्षा-मौसम आ समस्त अवयव जे जीवन लेल आवश्यक अछि तेकर दाता - चक्रवर्ती राजा के संज्ञा देल जाइछ सूर्यकेँ। ओ चाहे मनुष्यलोक हो वा आदित्य-वसु वा कोनो अन्य लोक; सभक राजा सूर्य! प्रत्यक्ष देवता के अधिपति सूर्य! साक्षात् नारायण के - त्रिलोकस्वामीके प्रतिनिधित्व करनिहार सूर्य! हिनकर पूजा तऽ लोक नित्य करैत अछि। तखन यदि एक दिन (कार्तिक षष्ठी) हिनक विशेष रूप छठि मैया साक्षात् शक्तिके भंडारिणी हम मानवलोककेर सोझां रहती तऽ के कृपापात्र बनय लेल नहि चाहत! अत: छठि मैयाके आराधना समस्त सखा-परिजन-राष्ट्र लेल कल्याणकारक होइछ।
सूर्यकेँ प्रतिदिन प्रातः काल अर्ध्य देलासँ आ प्रणाम कएला सँ आयु, विद्या, यश आ बल के वृद्धि होइत अछि ।
आदित्यस्य नमस्कारं ये कुर्वन्ति दिने-दिने ।
चत्वारि तस्य वर्धन्ते आयुर्विद्या यशोबलम् ॥
छठि मैयाके व्रतकेर नियम कि?
एहि व्रतमें तीन दिनक कठोर उपवास कैल जाइत अछि। चतुर्थी दिन पवित्र पोखैर वा नदीक जलसँ स्नान करैत एक बेर खयबाक परंपरा अछि जेकरा नहाय-खायके संज्ञा देल जाइछ। पञ्चमी दिन उपवास करैत सन्ध्याकाल लवणरहित गुड़सहित खीरसँ खरना कैल जैछ। षष्ठी दिन निर्जल व्रत राखि सूर्यास्त सँ पहिले एवं कतेको जगह सूर्यास्तक बाद पोखरि वा नदीके पवित्र घाट पर जलमें ठाड़्ह भऽ पकवान एवं फलादिक डालासँ अस्त होइत सूर्य जे आब शक्ति-स्वरूपा छठि मैयाक रूपमें परिणत भऽ गेल रहैत छथि तिनका प्रणाम कैल जाइछ, समस्त बन्धु-बान्धवके कुशलता एवं कल्याण लेल प्रार्थना कैल जाइछ, मनोवाञ्छित फल व व्रतक निष्ठापूर्वक सफलता एवं चरणमें अटूट भक्ति लेल प्रार्थना कैल जाइछ। पुनः उदयकालिक सूर्य याने छठि मैयाकेँ विभिन्न प्रकारक पकवान एवं ऋतुफलके डाला आदिसँ हाथ उठाय नमस्कार अर्पित करैथ व्रतक कथा श्रवण कैल जाइछ।
छठि मैयाक व्रत कथा
एक छलाह राजा प्रियव्रत जिनक पत्नीक नाम मालिनी छलन्हि। राजा रानी नि:संतान होयबाक कारणे बहुत दु:खी छलाह। महर्षि कश्यप द्वारा पुत्रेष्ठि यज्ञ करौलन्हि, फलस्वरूप मालिनी गर्भवती भेलीह मुदा नौ महीना बाद जखन ओ बालक के जन्म देलीह तऽ ओ मृत अवस्थामें छल। एहिसँ राजा प्रियव्रत बहुत दुःखी भऽ आत्महत्या लेल उद्यत भेलाह। तखनहि एक देवी प्रकट होइत अपन परिचय षष्ठी देवीके रूपमें दैत पुत्र वरदान देनिहैर कहैत हुनका सँ अपन पूजा-अर्चनामें लीन होयबाक लेल उपदेश केलीह। राजा देवीकेर आज्ञा मानि कार्तिक शुक्ल षष्टी तिथि केँ देवी षष्टीकेर पूजा कयलन्हि जाहिसँ हुनका पुत्र-धनके प्राप्ति भेलन्हि। ताहि दिन सँ छठिक व्रतक अनुष्ठान चलि रहल अछि।
एक दोसर मान्यता अनुसार भगवान श्रीरामचन्द्र जी जखन अयोध्या वापसी कयलाह तखन राजतिलक उपरान्त सियाजी संग कार्तिक शुक्ल षष्ठी तिथिकेँ सूर्य देवताकेर व्रतोपासना कयलन्हि आ ओहि दिनसँ जनसामान्य में ई पावैन मान्य बनि गेल और दिनानुदिन एहि पावैनक महत्त्व बढैत चलि गेल जाहिमें पूर्ण आस्था एवं भक्तिक संग ई पावैन मनाओल जाय लागल।
सदस्यता लें
संदेश (Atom)












