dahej mukt mithila

(एकमात्र संकल्‍प ध्‍यान मे-मिथिला राज्‍य हो संविधान मे) अप्पन गाम घरक ढंग ,अप्पन रहन - सहन के संग,अप्पन गाम-अप्पन बात में अपनेक सब के स्वागत अछि!अपन गाम -अपन घरअप्पन ज्ञान आ अप्पन संस्कारक सँग किछु कहबाक एकटा छोटछिन प्रयास अछि! हरेक मिथिला वाशी ईहा कहैत अछि... छी मैथिल मिथिला करे शंतान, जत्य रही ओ छी मिथिले धाम, याद रखु बस अप्पन गाम - अप्पन बात ,अप्पन मान " जय मैथिल जय मिथिला धाम" "स्वर्ग सं सुन्दर अपन गाम" E-mail: apangaamghar@gmail.com,madankumarthakur@gmail.com mo-9312460150

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रविवार, 22 सितंबर 2013

उठो मिथिला के अमर सपूतो


उठो मिथिला के अमर सपूतो
 पुनः मिथिला का निर्माण करो,

जन-जन के जीवन में फिर से नई स्फूर्ति, नव प्राण भरो,
नया प्रात है नई बात है नई किरण है ज्योति नई है,
नई उमंगें नई तरंगे नई आस है साँस नई है,
युग-युग के मुरझे सुमनों में नई-नई मुसकान भरो,
उठो मिथिला के अमर सपूतो 
पुनः मिथिला का निर्माण करो !

डाल-डाल पर बैठ विहग कुछ नए स्वरों में गाते हैं,
गुन-गुन-गुन-गुन करते भौरे मस्त हुए मँडराते हैं,
नवयुग की नूतन वीणा में नया राग नवगान भरो,
कली-कली खिल रही इधर वह फूल-फूल मुस्काया है,
धरती माँ की आज हो रही नई सुनहरी काया है,
नूतन मंगलमयी ध्वनियों से गुंजित जग-उद्यान करो,
उठो मिथिला के अमर सपूतो 

पुनः मिथिला का निर्माण करो !

माँ दुर्गा और माँ जानकी का पावन मंदिर, यह संपत्ति तुम्हारी है,
तुम में से हर बालक इसका रक्षक और पुजारी है,
शत-शत दीपक जला ज्ञान के, नवयुग का आह्वान करो,
जन-जन के जीवन में फिर से नई स्फूर्ति, नव प्राण भरो,
उठो मिथिला के अमर सपूतो

 पुनः मिथिला का निर्माण करो !

शनिवार, 21 सितंबर 2013

समस्त परिवार सदर आमंत्रित छी

अपनेक ----
समस्त परिवार सदर  आमंत्रित  छी 




           दिल्ली में अक्टूबर' - नवंबर  अवीते  विद्यापति पर्व समारोह की धूम मच जैत  अछि , दिल्ली  एन सी आर के कोन- कोन में विद्यापति पर्व समारोह वा  मिथिला महोत्सव बहुत  धूम - धाम के संग  मनायल  जय़त अछि . अहि समय  में "विद्यापति पर्व समारोह - 2013 " भजनपुरा और करावल नगर के नजदीक लोनी में दिनांक 1 अक्टूबर 2013 को मनायल  जारहल अछि .

इ  ध्यान में रखइ के  कि अगिला  दिन 2 अक्टूबर कऐ  महात्मा गाँधी के जन्मदिनक अवकाश रहैक के  कारन  1 अक्टूबर के  मैथिल लोग  भरी  रैत  विद्यापति पर्व समारोहक  और मिथिला महोत्सवक  पूरा आनंद  उठाबैथी  बिना  कोनो  चिंता- फिकर के  |



धन्यवाद !

अपनेक  दर्शनक  अभिलाषी   ---
विद्यापति पर्व समारोह !
आयोजक : मिथिला सेवा समिति (पंजी), लोनी गाजियाबाद।

स्थान - ई ब्लाक पार्क, लाला बाग़, पुलिस चौकी के सामने, लोनी, गाजियाबाद।
नजदीक - करावल नगर , दिल्ली ,
नजदीकी मेट्रो :- शास्त्री पार्क मेट्रो स्टेशन।

शनिवार, 14 सितंबर 2013

भगवानकेँ जे नीक लगनि


बाबा भोलेनाथक विशाल मन्दिर। मुख्य शिवलिंग आ समस्त शिव परिवारक भव्य आ सुन्दर मूर्ति। साँझक समय एक-एक कए भक्त सब अबैत आ बाबाक स्तुति वन्दना करैत जाएत। एकटा चारि बर्खक नेना आबि बाबा दिस धियानसँ देखैत। ताबएतमे एकटा भक्त आबि बाबाक सोंझाँ श्लोक, कर्पुर गौरं करुणावतारं.... सुना कए चलि गेला
दोसर भक्त आबि, नमामी शमसान निर्वा..... सुनाबए लगला। एनाहिते आन आन भक्त सब सेहो किछु ने किछु मन्त्र श्लोक प्राथनासँ बाबा भोलेनाथकेँ मनाबेएमे लागल। ई सब देख सुनि ओहि नेनाक वाल मोन सोचए लागल, हम की सुनाबू ? हमरा तँ किछु नहि अबैत अछि ? कोनो बात नहि एलहुँ तँ किछु नहि किछु सुनाएब तँ जरुर।
ई सोचैत नेना अप्पन दुनू कल जोरि, आँखि मुनि धियानक मुदरामे पढ़ लागल, अ आ इ ई उ ऊ ए ऐ ओ औ अं अः क ख ग घ..........
नेनाकेँ ई पढ़ैत देख पुजारी बाबासँ नहि रहल गेलनि। ओ कनीक काल धियानसँ सुनला बाद नेना सँ पूछि बैसला, बौआ ई अ आ किएक पढ़ि रहल छी ?
जकरा देखू किछु ने किछु मन्त्र पढ़ि कए जाइए, हमरा तँ अओर किछु अबिते नहि अछि, तेँ अ आ पढ़ि रहल छी। भगवानकेँ जे नीक लगनि एहिमे सँ छाँति लेता। 
*****
जगदानन्द झा ‘मनु’  

गुरुवार, 12 सितंबर 2013

गजल

आइ किछु मोन पडलै फेरसँ किए
भाव मोनक ससरलै फेरसँ किए

टाल लागल लहासक खरिहानमे
गाम ककरो उजडलै फेरसँ किए

आँखि खोलू, किए छी आन्हर बनल
नोर देशक झहरलै फेरसँ किए

चान शोभा बनै छै गगनक सदति
चान नीचा उतरलै फेरसँ किए

"ओम" जिनगी अन्हारक जीबै छलै
प्राण-बाती पजरलै फेरसँ किए
(दीर्घ-ह्रस्व-दीर्घ-दीर्घ)-(ह्रस्व-दीर्घ-दीर्घ)-(दीर्घ-दीर्घ-ह्रस्व-दीर्घ)
(फाइलातुन-फऊलुन-मुस्तफइलुन) - १ बेर प्रत्येक पाँतिमे

रविवार, 8 सितंबर 2013

दहेज़ और ओकर कुप्रथा के निवारण


दहेज़ और ओकर कुप्रथा के निवारण

जखन कतौ दहेज़ पर सार्वजनिक चर्चा होइत अछी त देखबा में अबैत अछी जे सब केओ अपन मत शक्तिशाली ढंग सँ दहेज़ के विरोधे में राखैत छैथ | मुदा अश्चार्यक बात छैक जे दहेज़-प्रथा घटै के बदला में बढिए रहल छैक | एकर कारन इ छैक जे आरम्भे सँ हम सब अहि प्रथा के नै त ठीक जकां बुझै के प्रयास कैलियै आ ने ओकर सही निवारण कै सकलियै | फलतः जे प्रथा समाज में एक नीक उद्देश्य सँ आरम्भ कैल गेल छल से विकृत भ का दानव के रूप ल क हमरा सभक सोझां में मुह बौने ठाढ़ अछी | और हमर इ शशक्त मत अछि जे जावत तक हम सब एही प्रथा के ठीक जकां संबोधित नै करबैक तावत तक एही प्रथा के सही संसोधन नहीं कैल जा सकैत अछी | केवल वार्ता, जुलूस, और आन्दोलन सब एक अरन्यरोदने साबित भ सकैत अछी जाकर प्रमाण इ जे घत्बा के बदला इ प्रथा दिन-दिन बढिए रहल अछि |

प्राचीन समय सँ हिन्दू समाज में दहेज़ प्रथा कहियो नहीं छलैक | 'दहेज़' शब्द तक हमरा संस्कृत के उपज नहीं लागैत अछि | जतेक पौराणिक ग्रन्थ छैक कोनो में दहेज़ के वर्णन नै छैक | इ प्रथा आरम्भ भेल ब्रिटिश सरकार के कानून सँ और शनै शनै विकृत रूप धारण कै लेलक | सन १७९३ में लार्ड कार्नवालिस के समय में "परमानेंट सेटलमेंट ऑफ़ बंगाल" के नियम पारित भेलैक, जाकर फल इ भेलैक जे लोग सब के भूमि के स्वामी बनै के अधिकार भेट गलैक | एही सँ पूर्व सरकार पूरा भूमि के मालिक छलैक और लोग सब मात्र ओहि भूमि पर बसैत छल एवं ओकर उपयोग करैत छल | एही कानून सँ एक और विकृत परंपरा, जमींदारी, के प्रादुर्भाव भेलैक | एकरा बाद अंग्रेज सब एक और कानून पारित किलक जाही सँ स्त्री के संपत्ति के अधिकार सँ वंचित कै देल गेल| एकर फलस्वरूप लोग अपना बेटी के भेंट के रूप में धन, कैंचा, सोना, इत्यादी विदा काल में देबै लग्लै जाही पर केवल आ केवल स्त्री के अधिकार छलैक | कालांतर में इ व्यवस्था दहेज़ के रूप में प्रचलित भ गलैक | एखनो तक एही में कोनो दोष नहीं आयल रहैक और एक प्रकार सँ ई व्यवस्था स्त्री के बहुत हद तक आर्थिक स्वतंत्रता प्रदान करैत छलैक | 

मुदा जेना जेना लोग पश्चिमी शिक्षा प्राप्त करैत गेल और भौतिकवाद के प्रचार-प्रसार होइत गेलै, तेना तेना वर-पक्ष के तरफ सँ दहेज़ के मांग बढ़ल गेलै | अहि दिशा में भारत सरकार सेहो कम दोषी नहीं अछि | अहि प्रथा के ठीक करै हेतु भारतीय सन्दर्भ में समाधान नहीं खोजि क हमर नेता लोगनि ऊंट जक पश्चिम दिस मूड़ी उठा क पश्चिमी संधर्भ में हल निकालै के प्रयास में छोट रास्ता अप्नौलनि और दहेज़ के सोझे गैर-कानूनी बना देलखिन| फेर सँ ओहे संकट स्त्री संग लागु भ गलैक जे अंग्रेज के समय छलैक | स्त्री त पहिने सा संपत्ति के अधिकार सँ वंचित छली, आब वो स्त्री-धन सँ सेहो वंचित होमय लगली | आब दहेज़ अपन असली रूप में उजागर भेल | वर एवं वर-पक्ष के ई बात स्वाभाविक रूप सँ कचोटे लगलैन जे एक स्त्री खली हाथ हुनका घर अबैन आ अपन पति के संपत्ति में आधा के साह्भागी बनी जाय | फलस्वरूप दहेज़ के आब मांग उठे लागल और दिनों-दिन जोर पकरे लागल | दहेज़ के रूप आब विकृत होमय लागल | 

पुनः सर्वोच्य न्यायालय के एक नियम पारित भेल जकर अनुसार स्त्री के अपन पैत्रिक संपत्ति में बराबर के अधिकार भेट गेलै | बिना ई सोचने जे एकर समाज पर की असर परतैक, अनेको नियम बिना सोचने-बुझने पारित भेल गेल | फलाफल भेलैक जे दहेज़ प्रथा समाप्त होई के बदला उग्रतर होइत गेल और अंततः दानव के रूप ल लेलक |

हाले में एक और कानून संसद द्वारा पारित भ रहल अछि जकर अनुसार स्त्री के नै सिर्फ अपन पति के संपत्ति में बल्कि अपन पति के पुस्तैनी संपत्ति में सेहो हिस्सा भेटतै, डाइवोर्स लेला पर | कियो व्यक्ति अंदाज लगा सकैत छैथ जे एकर दूरगामी परिणाम समाज पर की परतैक ? कनेक कल्पना कै के देखिऔ | एकटा लड़का विवाह क क एक लड़की के अपना घर आनैत छैथ | तीन साल तक ( जे की न्यूनतम अवधि मानल गेल अछि नवका क़ानून में डाइवोर्स के लेल) ओ लड़की घर में कोहराम मच्बै छैथ | तकर बाद डाइवोर्स फाइल करैत छैथ ( जे महिला के फाइल केला सा आसानी सँ भेट जतैक) और अलग भ क अपन पति और हुनक पुरूखा के लगभग आधा संपत्ति ल क चलि दैत छैथ | जों कियो वर व वर के पिता गंभीरता सँ अहि पर विचार करैथ, त एहेन सम्भावना के देखैत की ओ अपन बालक के विवाह बिना मोट दहेज़ लेने करता? की एहेन कानून सब सँ दहेज़ के दानव और भयानक नै बनतै ? कतेक लोग हेता जे सब बात जनैत अपन आ अपन परिवार के भविष्य दाऊ पर लगेता ? हम अपन विवाह में एकौ रूपया तिलक व दहेज़ नै लेलौ | एते तक जे हम अपन विवाह के खर्च संपूर्ण रूप सँ अपने केलौ | मुदा आब हमरो एकै टा बालक अछि | और हम आई-काल्हि के हालत देख क गंभीर सोच में पड़ल छि जे अपन पुत्रक विवाह बिना मोट दहेज़ लेने केना क दबैक कोनो एहन लड़की सँ जे खली हाथ आबय और हमर संपत्ति के स्वामिनी बनी जाय ? और जहिया ओकर मोन होई तहिया हमारा बेटा सँ डाइवोर्स ल क हमर मेहनत सँ अरजल संपत्ति आधा बैंट क ल लिया | की अहि तरहक कानून दहेज़ के और प्रश्रय नै दैत छैक? सब सँ आग्रह अछि जे भावना में नै धरातल पर उतरि क सोचैथ | 

आब कानी समग्र रूप सँ हिन्दू विवाह अधिनियम, दहेज़ उन्मूलन कानून एवं स्त्री के संपत्ति के अधिकार पर ध्यान दिऔ | अगर कोनो स्त्री चाहे त अपन पैत्रिक संपत्ति में सँ अपन हिस्सा आसानी सँ ल सकैत अछि | अपन पति एवं ओकर पुस्तैनी संपत्ति में सेहो हिस्सा ल सकैत अछि | लेकिन कोनो स्त्री सँ कोनो पुरुष कोनो हाल में किछु नै हासिल क सकैत छैथ | बहुत घटना एहन होमय लगलैक अछि जाही में देखल गलैक अछि जे किछु स्त्री केवल धन के लोभ में विवाह के अपन पेशा बना लेलक अछि | संगे भाई-बहिन के सम्बन्ध में जे माधुर्य छलैक सेहो बहुत ठाम खट्टा भेल जा रहल अछि | अगर अहिना कानून बनैत रहल आ भाषण चलैत रहल त जल्दिये ओहो दिन निश्चय आयत जहिया रक्षाबंधन और भरदुतिया के पावैन सेहो उठि जायत |

तखन दहेज़ रुपी दानव के कोना समाप्त कैल जाय ? हमरा विचार सँ दहेज़ के कानूनी अधिकार घोषित क स्त्री के ओकर पैत्रिक संपत्ति के हिस्सा के बराबर दहेज़ दै के व्यवस्था कैल जाय और एकरा बाद ओकरा अपन पति के संपत्ति पर सेहो अधिकार देल जाय | मुदा पति के पुरूखा के संपत्ति पर ओकर अधिकार नै हेबाक चाही | संगे, लड़का और लड़की के पूर्ण स्वतंत्रता एवं दायुत्वा अपन विवाह के लेबक चाही | जाबे धरी माता-पिता लड़का और लड़की के विवाह ठीक करैत रह्थीन ताबे धरी दहेज़ उन्मूलन मात्र सपने त रहत |