dahej mukt mithila

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गुरुवार, 16 जून 2011

एकटा उड़नखटोला कक्का छै@प्रभात राय भट्ट



एकटा उड़नखटोला कक्का छै,
सकल्सुरत स भोलाभाला, 
मुदा एकनंबर उचका छै,
सत्य कहैत हुनका बड तित लगैय,
झूठ बोलैत बड मीठ लगैय,
भीतर स छैथ ओ बिलकुल खाली,
झूठमुठमें हैंस हैंस क मारैय ताली,
घरमें छथि दू दुगो घरवाली,
मुदा हुनका मोन परैय छोटकी साली,
धुवा धोती में लगाबैय टिनोपाल,
सिल्क कुरता पैर छीट लालेलाल,
कान्हा पैर रखैय मखमल के रुमाल,
अजब गजब छै हुनक चालढाल,
सुइत उईठ भोरे भोरे करैया मधुपान,
गप मारी मारी खाय पिबैय चायपान,
चाहे दिन भैर हुनका भेटे नै जलपान ,
मुदा सैद्खन मस्त रहैय करैमे धुम्रपान,
झुठमुठ क करैया ओ रोजगारी,
चौक चौराहा बैठ क मारैय पिहकारी,

रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

मिथिला दर्शन भाग - ६

पूर्णिया -
उत्तर बिहार में एकटा प्राकृतिक आ जल संपदा से भरपूर जिला छल पूर्णिया। एही जिला के प्राकृतिक सुन्दरता देखे बला ये। गरीब के दार्जलिंग के नाम से प्रसिद्ध ई जिला कैकटा मिथिला के सपूत पैदा करलक ये। पूर्णिया जिला के स्थापना१९५१ में भेल छल। फणीश्वर नाथ रेनू संका बड़का लेखक याह माटि से जनमल ये। कुल मीलाके अहाँ ई कही सकय छी प्रकृति के गोद में बसल कलाकार के जिला छल ई पूर्णिया।

इतिहास -
हिन्दू धर्म के इतिहास में पूर्णिया जिला के महत्व बड़ पैघ अछि। एहन मानल जाय ये की शुरुवात में एही जिला के विस्तार पूरब में अनस आ पश्चिम में पुन्द्रा तक रहे।
महाभारत में भी भीम के विजय अभियान के दौरान एही जिला के किछु वर्णन आएल छल
। एहन कहल जाय ये की भीम मुंगेर आ पूर्णिया के किछु जगह पर अपन विजय अभियान के क्रम में आयल रहे। बुद्ध के जीवनकाल से भी एही जिला जुडल ये कियाकि एतोका कुछ जगह से अखनो धैर बुद्ध अवशेष भेटल ये। आज़ादी के लड़ाई में ते एही जिला के खासम-खास योगदान रहे १९४२ के क्रांति में एही जिला के कैकटा वीर सपूत अपन देश के लेल जान कुर्बान के देलक।

भूगोल - 
गरीब के दार्जलिंग के नाम से प्रसिद्द एही जिला के उत्तर में अररिया, दक्षिण में कटिहार आ भागलपुर, पश्चिम में पश्चिम बंगाल के दिनाजपुर आ बिहार के किशनगंज जिला आ पूरब में सहरसा आ मधेपुरा जिला छल। जिला के कुल क्षेत्रफल ३,२०२ वर्गकिलोमीटर अछि। पूर्णिया जिला में पानी के भरपूर मात्र छल आ हिमालय से निकले बला नदी के कारण हरेक साल एही जिला के भयंकर तबाही के सामना करय ले पड़य ये। एतोका माटि जलोढ़ आ चिक्कैन छल मुदा पश्चिम के किछु भाग में अहाँक बलुआहा माटि देखय ले भेट जाएत। एता औसत वर्षा १२०० मिलीमीटर से १४०० मिलीमीटर तक होए ये। जिला के तापमान ३१ से ४५ डिग्री सेल्सियस तक अछि। पूर्णिया जिला के मुख्य फसल जुट आ केला अछि।


जनसंख्या आ शिक्षा -

२००१ के जनसँख्या के अनुसार पूर्णिया जिला के जनसँख्या २,५४३,९४२ छल जाही में जाही में पुरुष के जनसँख्या १,३२८,४१७ आ १,२१५,५२५ छल। साक्षरता के प्रतिशत एता ३५.१०% छल जाही में पुरुष के प्रतिशत ४५.६३% आ महिला के प्रतिशत २३.४२% छल।

प्रशासनिक विभाग -

पूर्णिया जिला में ४ टा अनुमंडल, १४ टा प्रखंड, २५१ टा पंचायत, १२९६ टा गाँव आ २७ टा पुलिस स्टेशन छल।
अनुमंडल - पूर्णिया, बैसी, बनमनखी, आ धमदाहा छल ।
प्रखंड - पूर्वी पूर्णिया, कृत्यानंद नगर, बनमनखी, कस्वा, अमौर, बैंसी, बैसा, धमदाहा, बरहारा कोठी,  भवारुपौली,नीपुर, दगरुआ, जलालगढ़, आ श्रीनगर छल।
प्रमुख नदी-  एतोका प्रमुख नदी कोशी, महानंदा, सुवारा काली आ कोली नदी छल।

पर्यटन स्थल -

कामाख्या मंदिर - जिला मुख्यालय से १४ किलोमीटर दूर आ तीन टा गाम रहुआ, माज़रा, आ भवानीपुर के सीमान पर बनल माँ कामाख्या के मंदिर हिन्दू के लेल बहुताहीं आस्था के जगह छल। दूर दूर से लोग एता माँ कामाख्या के दर्शन के लेल आबय ये। कहल जाय ये की एता अहाँ माँ कामाख्या से जे मांगब तकरा माँ कामाख्या तुरत्ते पूरा कए दए ये ताहि लेल दूर-दूर से आबय बला भक्त के एता भीड़ लागल रहय ये।

गंगा दार्जलिंग रोड -  ब्रिटिश काल में पूर्णिया से बेगुसराय होएत दार्जलिंग तक एकटा सड़क जाय छल जाकर गंगा दार्जलिंग रोड कहल जाय ये। ब्रिटिश काल के पूर्णिया जे लगभग २५० साल पुरान अछि  में ई रोड प्राकृतिक सुदरता के अभूतपूर्व नज़र से भड़ल छल। ई रोड पूर्णिया के लाइन बाज़ार, ततमा टोली, आता मिल, आ पोलिटेक्निक चौक से जुडैत अछि। सबसे अद्भुत आ आश्चर्य के गोप ई जे एही सड़क पर स्वतंत्रता के पचास साल बादो तक एकटा लकड़ी के पुल छल जे की पूरा भारत में अपना आप में पहिल राष्ट्रीय राजमार्ग पर बनल लकड़ी के पुल छल।

पूरन देवी मंदिर या काली मंदिर - जिला मुख्यालय से तीन किलोमीटर दूर ई मंदिर में माँ काली के एकटा भव्य आ आकर्षक मूर्ति अस्थापित अछि। लोग के लेल अगाध आस्था से भरल एही मंदिर में अहाँ हरेक दिन भीड़ देखि सके छी। दीवाली में एतोका काली-पूजा देखय बला होए ये।

पूर्णिया के बाघनगर - अररिया के दक्षिण पश्चिम में बसल ई गाँव एतिहासी महत्व राखय ये। किछु दिन पहिने एता खुदाई में एकटा गुफा के अन्दर से किछु प्राचीन सिक्का भेटल रहे। संगे एता किछु ईंट सेहो भेटल जे की पुरातत्व के अनुसार काफी पुरान अछि।

बलदियाबारी - जिला के दक्षिण में आ नवाजगढ़ से आधा किलोमीटर दूर एही जगह एतिहासिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण अछि। १७५६ में भेल शौकत जंग आ सिराजुदौला के बीच भेल जंग के एही गाम गवाह अछि।

बंदर झुला -  किशनगंज से करीब ३९ किलोमीटर दूर नेपाल के सीमा से सटल एही गाम में पुरातत्व विभाग के तरफ से करल गेल खुदाई में भगवान् विष्णु के एकटा पूर्ण स्वरुप निकलल रहे जे की करिया संगमरमर से बनल अछि। एटोका लोग एही मूर्ति के कन्हैया कहय ये। एहिठाम हरेक साल एही मूर्ति के पास एकटा छोट सनक मेला सेहो लगय ये।

बरहरा कोठी -  बरहरा कोठी प्रखंड मुख्यालय छल, एकर नाम कोठी एही लेल पड़ल कियाकि ब्रिटिश के जमाना में एता एकटा अंग्रेज के कोठी रहे। एता एकटा शंकर भगवन के प्रसिद्द मंदिर सेहो छल। एही मंदिर के भगवान् के नाम बाबा बरनेश्वर छैथ। दक्षिण मुख्यालय से ई जगह २ किलोमीटर दूर अछि।

कमलपुर - बरहरा कोठी प्रखंड के अंतर्गत आबय बाला ई गाँव अपन नाम कए चरितार्थ करैत छैथ। एही गाँव में कोका एक तरह के कमल के एकटा बड़का तलब छल जाही में कोका फुल भरल रहे छैक।

बरीजनगढ़ - बहादुरगंज पुलिस स्टेशन से ८ किलोमीटर दक्षिण में बसल एही गाम में एकटा पुरान किला के अवशेष ये। जेना की नाम से स्पस्ट ये की एही गाम के राजा बरिजन के रहे जे राजा बेनु के भाई रहे। किला के अन्दर एकटा पोखैर सेहो छल।

बथनाहा - ई गाम दू टा मंदिर के लेल प्रसिद्ध अछि एकटा महादेव आ दोसर दुर्गा। दुनु टा मंदिर हिन्दू धर्म के दुनु पैघ भगवान के छल जे गाँव बला के लेल महान आस्था के लिए जानल जाए ये।

बेनुगढ़ - करीब एक एकड़ के क्षेत्र में फैलल एही जगह में एकटा उजड़ल किला छल। ई किला राजा असुर के भाई बेनु के छल। एही किला के भव्यता के अंदाजा एही बात से लागायल जाय सकय ये की एक एकड़ में अखनो धैर एकर जीर्ण शीर्ण अवशेष बचल ये।

चकला - जेना की नाम से सिद्ध होए ये ई गाम बैलगाड़ी, टमटम आ एहने आर गाड़ी जाही में लकड़ी के चक्का उपयोग में आबय ये के निर्माण के लेल प्रसिद्ध अछि। गाम के लोग के मुख्य जीविका के साधन चक्का बनानाय ये। संगे एतोका लोग घी आ मख्खन पे बेसी निर्भर रहय ये।

धरहरा -  जिला के एकदम से पश्चिम में रानीगंज से १९ किलोमीटर दक्षिण में बसल ई गाम महाभारत काल के साक्ष्य ये। कहल जाय ये की एहिठाम अपन भक्त प्रह्लाद आ सनातन धर्म के रक्षा के लेल भगवान विष्णु नरसिंह अवतार लेलक रहे आ राजा हरिनाकश्यप के वध केलक रहे। एहिठाम एकटा इंडिगो के कारखाना आ एकटा पुराना किला सेहो छल ई पुराना किला के सतलगढ़ के किला कहल जाय ये।

फारबिसगंज -
भट्टा बाज़ार के बाद ई जगह पूरा पूर्णिया जिला के सबसे पैघ बाज़ार अछि। व्यवसायी के गढ़ एही जगह में कैकटा बड़ा-बड़ा व्यावसायिक केंद्र छैक। एही जगह हरेक साल नवम्बर आ दिसम्बर में एता एकटा भव्य मेला लागय ये। संगही एता एकटा प्रसिद्ध पोखैर सेहो छल जे सुल्तानपोखैर के नाम से जानल जाय ये।

जलालगढ़ - जिला मुख्यालय से १३ किलोमीटर उत्तर में बसल ई गाँव एकटा जीर्ण शीर्ण आ उजड़ल किला के लेल जानल जाय ये। कोशी के कछार पर बसल एही किला के दिवार के बनावट एहन ये की ई नेपाल से आबय बाला दुश्मन से एकर रक्षा करैत छल। खगरा राज परिवार के पहिल राजा सैयद मोह्हमद जलालुद्दीन के लेल बनायल एही किला के सुन्दरता ओ समय में केहन हेता एकर वर्णन अहाँ अखुनका किला देख के लगाय सके छिये। अपना आप में वास्तुकला के एकटा अद्भुत नज़ारा पेश करय ये ई किला।

किशनगंज - एही जगह के साक्ष्य महाभारत काल में देखय ले भेट जाएत, एहन कहल जाए ये की अपन विजय यात्रा के क्रम में भीम एही जगह पर आएल रहे आ ओतोका शक्तिशाली राजा कर्ण आ मोददिरी के युध्य में हराय के राजा पुनद्रस के दए देलक रहे। एहनो मान्यता ये की महाभारत में पांडव के १२ बरस के अग्यात्वास में ओ राजा बिराट के कहल पर किछु दिन एता बितेलक रहे। एहिठाम ठाकुरगंज के पास एकटा बड़का सनक तालाब छल जकरा भटड़ौला कहल जाये ये छल कहल जाय ये की एही तालाब के उपयोग पांडव के धर्मपत्नी द्रोपदी करैत रहे। किशनगंज से मात्र ७-८ किलोमीटर दूर राजा बिराट के जन्स्थल सेहो छल जाकर किचकाबाढ़ के नाम से जानल जाय छल एहिठाम बरौनी स्नान के काल में एकटा भयंकर मेला सेहो लागय छल।

कुरसेला - कुरसेला कुरु+शिला के अपभ्रंश छल जकर मतलब होए ये पहाड़ी क्षेत्र जे राजा कुरु के राज्य क्षेत्र में पड़य ये। एता से मात्र ६ किलोमीटर दूर एकटा पहाड़ी क्षेत्र छल जेकरा बटेश्वर पहाड़ी कहल जाय ये एता एकटा शंकर भगवन के मंदिर सेहो छल। विक्रमशिला विश्वविद्यालय के किछु हिस्सा एही पहाड़ी से सटल ये।
कुरसेला क्षेत्र यहो ले प्रसिद्ध अछि कियाकि ई जगह मशहूर चित्रकार श्री अवधेश कुमार सिंह(एम्.पी.) के जन्मस्थान सेहो छल। राधाकृष्णन के समय में हिनकर पेंटिंग के प्रदर्शनी दिल्ली में लागल रहे। श्री सिंह एकटा पैघ चित्रकार के साथ-साथ बड़का समाजसेवी आ दानी सेहो रहे बिनोवा भावे के चालायल भूदान आन्दोलन में इ अपन करीब ४,००० एकड़ जमीन दान कए देलक रहे। श्री सिंह के देहानवास १९५८ में भए गेल। तकर बाद एकर जवान बेटा दिनेश कुमार सिंह केंद्र में मंत्री रहल आ बिहार के विकाश में अहम् योगदान देलक हुनकर योगदान के बिहार आ कुरसेला के लोग कहियो नै बिसरत।

लालबाबू - १४ किलोमीटर मैदान के अंत में बनल एकटा ईदगाह मुश्लिम लोग के लिए अगाध आस्था के जगह ये। हरेक ईद आ बकरीद के दिन एता मुसलमान के जमावड़ा लागय ये आ बहुत पैघ संख्या में लोग नमाज़ अदा करय ये। एही जगह १८५७ के विद्रोह में ११ दिसम्बर १८५७ के भागलपुर के कमिश्नर युल के संग एतोका लोग के साथ भयानक जुद्ध भेल रहे।

मदनपुर - अररिया से १० किलोमीटर ई गाम में शंकर भगवान् के एकटा मंदिर छल एही मंदिर के महादेव के भगवान् मदनेश्वर कहल जाए ये, हरेक शिवरात्रि में एता बड़का मेला लागय ये जाहि में दूर-दूर से भक्त सब आबय ये।

मनिहारी -  ई गाम के किस्सा महाभारत काल से जुडल ये एहन कहल जाय ये की महाभारत के समय में भगवान् कृष्ण के एकटा कीमती मणी( एकटा आभूषण में उपयोग आबय बाला रत्ना) एता हराए गेल रहे ताहि से एकर नाम मनिहारी यानि मणी हराए गेल पड़ि गेल। एहिठाम राजा बिराट के जमाना के एकटा गौशाला सेहो छल जाही में एता कला पत्थर से शंकर भगवान् के शिवलिंग बनल ये।

सरसी - जिला मुख्यालय से २९ किलोमीटर उत्तर में बसल ई गाँव में शंकर भगवान् के एकटा मंदिर आ एकटा ईदगाह छल। एहिठाम इंडिगो प्लान्टर के एकटा उजडल कोठी सेहो छल। ई कोठी अपन जमाना में यूरोपियन के लेल एकटा प्रसिद्ध कोटि रहे।

ठाकुरगंज - एहिठाम महाभारत काल के राजा बिराट के महल के किछु पत्थर भेटल रहे एहन कहल जाए ये की असली बिराटनगर याह छल नै की नेपाल बला(एहन भ्रान्ति छल), महाभारत के पांडव के अज्ञातवास के काल में राजा बिराट पांचो पांडव के अपन महल में शरण देलक रहे। एही गाम ई बात के निशानी छल।

आदमपुर - एही जगह पर एकटा दुर्गा माता के विशाल मंदिर छल। नवरात्री के दिन एता पैघ मेला लागय ये। दूर-दूर से लोग एता आबय ये आ माँ के पूजा करय ये। एहन कहल जाए ये की एता मांगल मनोकामना तुरन्त माँ पूरा कए दए ये।

बुधवार, 15 जून 2011

मिथिला दर्शन भाग - ५

पश्चिमी चंपारण -
बिहार के तिरहुत प्रमंडल में बसल ई जिला मिथिला क्षेत्र में आबय ये एहिठाम भोजपुरी भाषा के खास पकड़ ये तखनो ई क्षेत्र मिथिला के कहाबै ये
। चंपारण जिला के अर्थ एकर नामे से पता चलि जाए ये चंपा-अरण्य = मने चंपा के पेड़ से घिरल जंगल। एही जिला के मुख्यालय बेतिया ये। बिहार के ई जिला अपन भोगोलिक विशेषता आ इतिहास के लेल खास प्रसिद्ध अछि। याह ओ जिला ये जतय से महत्मा गाँधी अपन सत्याग्रह शुरू कैलक रहे। एही जिला में महत्व यहो लेल बेसी ये कियाकि एही जिला के पाँच टा ब्लाक से अंतररास्ट्रीय सीमा खुलय ये।

इतिहास -

एही जिला के इतिहास बहुत पुरान अछि एही जिला के बाल्मीकि नगर में जगत जननी माँ सीता के शरणस्थली के रूप में देखल जाए ये जाही से ई पता लागय ये की ई जिला रामायण काल से अस्तित्व में छल। राजा जनक के समय में ई क्षेत्र तिरहुत प्रदेश के अंग रहे जे बाद में वैशाली के हिस्सा बनि गेल। आजातशत्रु के वैशाली जीतलाs के बाद एही पर मोर्य वंश, कण्व वंश, शुंग वंश, कुषाण वंश आ गुप्त वंश के राज रहल। ७५० से ११५५ तक चंपारण पर पाल वंश के राज रहल तकरा बाद एही जिला राजा नरसिंहदेव के हाथ में चलि गेल। तकर किछु दिन बाद ई जिला बंगाल के गयासुद्दीन, फेर गज सिंह, धुरुम सिंह आदि आदि राजा एही पर राज्य करलक। एकर अंतिम राजा हरेन्द्र सिंह के कोनो पुत्र नै होए के कारण जिला के व्यवस्था नाय्यिक सरक्षण में चलि गेल। जे आय धैर चलल आबि रहल ये। अंग्रेज के समय में १८६६ में चंपारण के स्वतंत्र इकाई बना देलक, आ बाद में प्रशासनिक सुविधा के लेल एकरा १९७२ में एकरा बांटी के पूर्वी चंपारण आ पश्चिमी चंपारण कए देल गेल।

भूगोल -

एही जिला के उत्तर में नेपाल, दक्षिण में गोपालगंज, पूरब में पुर्विचामरण आ पश्चिम में उत्तरप्रदेश के दू टा जिला पडरौना आ देवरिया से जुडैत छैक। जिला के क्षेत्रफल ५२२८वर्ग किलोमीटर अछि जे बिहार के सब जिला में सबसे पैघ जिला अछि। एही जिला के पाँच टा ब्लाक अंतरराष्ट्रीय सीमा से सेहो जुड़य ये, जाही में बगहा-१, बगहा-२, गौनहा, मैनाटांड, रामनगर, आ सिकटा प्रखंड अछि जेकर करीब ३५ किलोमीटर तक उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व तक नेपाल के साथ सटल ये। एतोका जलवायु आन जिला के मुकाबला में कनिकटा शीतल ये कियाकि एहिठाम हिमालय से एतय सीधा हवा आबय ये। औसत तापमान ४२डीग्री सेल्सियस ये आ औसत वर्षा १४० मिलीमीटर ये।

जनसँख्या आ शिक्षा - 
२००१ के जनसँख्या के अनुसार एही जिला के कुल आबादी 
३०,४३,४६६ अछि, जाही में पुरुष के जनसँख्या १६००८३९ आ महिला के जनसंख्या १४४२६२७ ये। जिला में जनसँख्या के प्रतिशत ३९.६३% अछि।

प्रशासनिक विभाग -
एही जिला में तीन टा अनुमंडल, १८ टा प्रखंड, ३१५ टा पंचायत आ १४८३ टा गाँव छल।
अनुमंडल - बेतिया, बगहा, आ नरकटियागंज।
प्रखंड - गौनहा, चनपटिया, जोगापट्टी, ठकराहा, नरकटियागंज, नौतन, पिपरासी, बगहा-१, बगहा-२, बेतिया, बैरिया, भितहा, मधुबनी, मझौलिया, मैनाटांड, रामनगर, लौरिया,आ सिकटा।
प्रमुख नदी- सदावाही गंडक, सिकरहना एवं मसान एहिठाम के प्रमुख नहीं छल एकर अलावा पंचानद, मनोर, भापसा, कपन आदि एतोका बरसाती नदी छल।

पर्यटन स्थल -

बाल्मिकीनगर राष्ट्रीय उद्यान एवं बाघ अभ्यारण्य - लगभग ८८० वर्ग किलोमीटर में पसरल ई क्षेत्र बिहार के एकमात्र राष्ट्रया उधान छल से नेपाल के राजकीय चितवन नेशनल पार्क से सटल अछि। बेतिया से ८० किलोमीटर दूर बल्मिकिनगर के ई राष्ट्रीय उधान के भीतर ३३५ वर्गकिलोमीटर के हिस्सा में १९९० में देश के १८वा बाघ अभ्यारण बनायल गेल रहे। हिरण, चीतल, साँभर, तेंदुआ, नीलगाय, जंगली बिल्ली जेहन जंगली पशु के अलावा एकसिंगी गैडा आऔ‍र जंगली भैंसा भी एही उधान में देखल जाए सकय रहे।

बाल्मिकीनगर आश्रम और गंडक परियोजना - बाल्मीकि उधान के एकटा छोड़ पर बसल ई आश्रम के महर्षि बाल्मीकि के आश्रम कहल जाय ये। कहल जाय ये की भगवान राम जखन माँ सीता के त्याग केलखिन रहे ते माता सीता एही आश्रम के शरण लेलक रहे। एहिठाम सीता अपन दू टा बेटा 'लव' आ 'कुश' के जन्म देलखिन रहे। याह ओ पावन जगह ये जाहिठाम महर्षि बाल्मीकि हिन्दू के महाकाव्य रामायण के रचना कैलक रहे। आश्रम से सटल बिहार के बहुद्देशीय परियोजना गंडक नदी के बांध सेहो ये जतेs बिहार के लेल १५ मेगावाट के बिजली उत्पादन होए ये। एता से निकालल गेल नाहर से चंपारण आ उत्तर-प्रदेश के कैकटा जिला में सिंचाई होए ये। एतोका दृश्य बाद मनमोहक छल, बांध के से गिरैत पानि के कल-कल आवाज बहुत मधुर आ सुखद लागय ये। एहिठाम बेतिया राजा के बनायल शिव-पारवती के मंदिर सेहो देखे बला ये।

त्रिवेणी संगम - बाल्मिकी नगर से पाँच किलोमीटर दूर एक तरफ नेपाल के त्रिवेणी गाम आ दोसर तरफ चंपारण के भैंसालोटन गाम के बीच ई संगम के त्रिवेणी संगम के नाम से जानल जाय ये। एहिठाम गंडक के साथ सोहना आ पंचानंद नदी के मिलन होए ये। श्रीमदभागवतपुराण के अनुसार एहिठाम भगवान विष्णु के प्रिय भक्त 'गज' आ 'ग्राह' के लड़ाई शुरू भेल रहे जकर अंत हाजीपुर के कोनाहरा घाट पर भेल रहे। हरिहर क्षेत्र के जेना ही एता हरेक साल माघ के संक्रांति के दिन बड़ा जबरदस्त मेला लगय ये जेकर भव्यता देखे बला होए ये।

बावनगढी - त्रिवेणी संगम से ८ किलोमीटर दूर बगहा प्रखंड के दरवाबारी गाँव के पास ई गाँव बसल ये जते बावनगढ़ी किला के खँडहर मौजूद छल। जेनाकी नाम से पता लागय ये एही किला में ५२ टा महल रहे। ई जगह तिरपन बाज़ार के नाम से सेहो जानल जाय ये। ई गाँव बावन टा महल आ तिरपन टा बाज़ार के अनोखा समूह छल मुदा सरकार के उदासीनता आ पुरात्तव विभाग के लचर व्यवस्था के कारण एही महल के इतिहास अखनो दबल ये।

भिखना ठोढी - जिला के उत्तर में गौनहा प्रखंड में बसल भिखना टोढी नरकटियागंज-भिखना टोढी रेलखंड के अंतिम स्टेशन अछि। नेपाल के सीमा पर बसल ई छोट सनक जगह अपन प्राकृतिक सुन्दरता के लेल प्रसिद्ध अछि। जाड़ के महिना में एहिठाम हिमालय के उज्जर-उज्जर छोटी आ अन्नपूर्ण श्रेणी साफ़ नज़र आबय ये। एतोका शांत वातावरण के मज़ा इंगलैंड के राजा जार्ज पंचम सेहो लेलक रहे। एहिठाम ब्रिटिश काल के पुरनका बंगला आ ठहरे के जगह कैकटा जगह अछि। अगर एक शब्द में एही जगह के वर्णन करी ते अहाँ कही सकय छि जे ई जगह मिथिला के कश्मीर अछि।

भितहरवा आश्रम - 
गौनहा प्रखंड के भितहरवा गाम में एकटा छोट सनक घर से महात्मा गाँधी अपना चंपारण सत्यागढ़ के शुरवात कैलक रहे। याह घर के आय भीतहरवा आश्रम कहाबै ये। गाँधी के आ स्वतंत्रता के आदर करय बला के लेल ई घर कोनो काशी-काबा से कम नै ये।

रामपुरवा का स्तंभ  - भीतहरवा आश्रम से कनिकटा दूर रामपुरवा गाम में सम्राट अशोक के बनायल दू टा स्तम्भ ये। दुनु टा स्तम्भ शीर्षरहित अछि। ई स्तम्भ के उपरका सिंह बला हिस्सा कलकत्ता के संग्रहालय में आ वृषभ(सांढ) बला हिस्सा के दिल्ली के संग्रहालय में राखाल गेल ये।

अशोक स्तंभ - नंदनगढ़ के एक किलोमीटर दूर लौरिया प्रखंड में २३०० वर्ष पुरान सिंह के मुंह बला एकटा स्तम्भ अछि जेकरा अशोक स्तम्भ कहल जाय ये। ३५ फीट ऊँचा ई स्तम्भ के आधार ३५ फीट आ कपाड़ २२ इंच अछि। ई विशाल स्तम्भ मौर्या काल के मुर्तिकाल के शानदार कलाकारी के नमूना अछि। एकर बेहतरीन कलाकृति आ जबरदस्त पोलिस एकर सुन्दरता में चार चाँद लगा रहल ये। २३०० साल भेला के बाद भी एही स्तम्भ में अखनो धैर जुंग नै लागल ये जे ई साबित करय ये की प्राचीन काल के कला के पारखी आ कलाकार के तुलना आय नै कराल जाय सकय ये।

सुमेश्वर का किला -  रामनगर प्रखंड में समुन्द्र ताल से २,८८४ फीट के ऊंचाई पर बसल सुमेश्वर के पहाड़ पर खड़ा ढलान पर बनल सुमेश्वर के किला आब खंडहर बनि चुकल ये। नेपाल के सीमा पर बनल ई किला आब खंडहर में ते जरुर बदैल गेल ये मुदा अन्तेपुरवाशी के पानि के जरुँरत के लेल पत्थर के काटि के बनायल कुण्ड के अखनो देखल जाय सकय ये। एता से हिमालय के पर्वत श्रेणी के मनमोहक आ विहंगम दृश्य अहाँ देख सकय छी। एता से हिमालय के प्रसिद्ध धौलागिरि, गोसाईंनाथ एवं गौरीशंकर के धवल शिखर के साफ़ देखल जाय सकय ये।

वृंदावन - बेतिया से १० किलोमीटर दूर ई जगह पर १९३७ में ऑल इंडिया गाँधी सेवा संघ का वार्षिक सम्मेलन भेल रहे। जाही में गाँधी जी सहित राजेंद्र प्रसाद आऔर जे.बी. कृपलानी सेहो हिस्सा लेलक रहे। गांधीजी के शिक्षा पर आधारित एता एकटा बेसिक स्कूल सेहो चल रहल ये।

सरैयां मान (पक्षी विहार) - बेतिया से ६ किलोमीटर दूर सरैयाँ के शांत परिवेश में एता एकटा प्राकृतिक झील बसल ये जे कैकटा प्रवासी पक्षी के प्रवाश जगह अछि। झील के कात में कैकटा जामुन के गाछ लागल ये, कहल जाय ये की जामुन के फल ई झील में खूब गिरय ये जाही से एकर पानि में खूब बेसी पाचक क्षमता ये। ई जगह एतोका स्थानीय लोग के लेल पिकनिक के जगह सेहो अछि।

नंदनगढ़ और चानकीगढ़ - लौरिया प्रखंड के नंदनगढ़ आ नरकटियागंज प्रखंड के चानकीगढ़ अपना आप में प्राकृतिक सुन्दरता के एकटा अद्भुत उदहारण अछि। एहिठाम नन्द वंश आ चाणक्य के बनायल महल के अवशेष सेहो अछि जे आब टीला जोंक देखाए पड़य ये। एहिठाम बुद्ध के भी बहुत साक्ष्य देखे ले भेट जाएत। एता तक की नंदनगढ़ के टीला का भगवान् बुद्ध के अस्थि अवशेष पर बनल स्तूप सेहो कहल जाए ये।




मंगलवार, 14 जून 2011

मिथिला दर्शन भाग - ४

सीतामढी

बिहार के तिरहुत प्रमंडल में बसल सीतामढ़ी मिथिला के एकटा पैघ शहर आ जिला सेहो थीक।११ दिसम्बर १९७२ में मुजफ्फरपुर से अलग भाए के ई एकटा स्वतंत्र जिला बनल।
बिहार के उत्तर आ गंगा के मैदानी भाग में बसल एही जिला नेपाल के सीमा से सटल अछि। जगत जननी मैया सीता के जन्मस्थली एही जिला अछि। एतोका मुख्य भाषा बज्जिका अछि मुदा हिंदी आ उर्दू भी प्रमुखता से बाजल जाय ये। एतोका संस्कृति के झलक रामायण में सेहो भेटैत अछि।

इतिहास -

एही जिला के स्थान हिन्दू धर्म में बहुत पैघ अछि। त्रेता जुग में राजा जनक के बेटी आ भगवान् राम के अर्धांगिनी देवी सीता के जन्म एही जिला के पुनौरा गाम में भेल रहे। एहन कहल जाय ये की सीता जी के जन्म स्थल पर हुनकर वियाह के बाद राजा जनक  भगवान् राम आ सीता जी के मूर्ति लगाउल रहे। करीब पाँच सौ साल पहिने अयोध्या के एकटा संत बीरबल दास एही मूर्ति के खोजलक जकर बाद नियमित रूप से एकर पूजा पाठ शुरू भेल। एही स्थान आय जानकी कुंड के नाम से जानल जाए ये।

भूगोल -

गंगाक उत्तरी मैदान में बसल सीतामढ़ी जिला के समुन्द्रतल से औसत ऊंचाई लगभग ६७ मीटर अछि। २२९४ वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल बला एही जिला के सीमा नेपाल से सटल ये। अंतरराष्ट्रीय सीमा के कुल लम्बाई १० किलोमीटर अछि। एकर दक्षिण में मुजफ्फरपुर, पशिम में पूर्वी चंपारण, आ पूरब में शिवहर,दरभंगा आ मधुबनी जिला अछि। खूब उपजाऊ आ समतल जमीन रहलो के कारण ई बिहार आ भारत के एकटा पिछड़ा जिला अछि कियाकि हरेक साल एकरा भंयंकर बाढ़ के त्रासदी के झेलय पड़य ये। सीतामढ़ी में औसत वर्षा ११०० मिलीमीटर से १३०० मिलीमीटर तक होए ये आ औसत तापमान ३२ से ४१ डिग्री तक होए ये।

जनसंख्या आ शिक्षा -

२००१ के जनगणना के अनुसार एही जिला के जनसँख्या २६६९८८७ अछि जे राज्य के कुल जनसँख्या के ३.२२% अछि। साक्षरता के दर एता मात्र ३८.४६% अछि।

प्रशासनिक विभाग -

सीतामढ़ी में तीन टा अनुमंडल, १७ टा प्रखंड आ १७ टा राजस्व सर्किल ये। सीतामढ़ी नगर परिषद् के अलावा एही जिला में ४ टा नगर पंचायत अछि। जिला के २७३  पंचायत में ८३५ टा गाम अछि।
अनुमंडल - सीतामढ़ी सदर, पुपरी, आ बेलसंड
प्रखंड -  बथनाहा, परिहार, नानपुर, बाजपट्टी, बैरगनिया, बेलसंड, रीगा, सुरसंड, पुपरी, सोनबरसा, डुमरा, रुन्नी सैदपुर, मेजरगंज, पुरनिया, सुप्पी, परसौनी, बोखरा, आ चौरौत अछि
प्रमुख नदी - बागमती, लखनदेई आ अधवारा समूह प्रमुख अछि

पर्यटन स्थल -

जानकी मंदिर - सीतामढ़ी रेलवे स्टेशन से डेढ़ किलोमीटर दूर बनल एही मंदिर जगत जननी मैया सीता के जन्म स्थल अछि, एही मंदिर के राजा जनक जे सीता के पिताजी रहथिन बनेलक रहे। एही मंदिर में भगवान् राम के संगे माता सीता आ लक्ष्मण के मूर्ति सेहो ये। जानकी मंदिर के नाम से प्रसिद्द एही मंदिर मिथिला ही नाञ मुदा समस्त भारत के लेल धार्मिक स्थान अछि।

जानकी कुंड -  सीतामढ़ी से ५ किलोमीटर पश्चिम में पुनौरा गाम में बनल जानकी मंदिर में पश्चिम में एही कुंड ये कहल जाय ये की इन्द्र देव के खुश करय के लेल राजा जनक खुद अपन हाथ से हल चलेलक रहे जाहि काल में देवी सीता माटि में गड़ल भेटल रहे। जानकी मंदिर के साथ-साथ एही कुंड के बहुत महत्व अछि।

हलेश्वर स्थान -  जिला से ३ किलोमीटर उत्तर पश्चिम में बसल एही स्थान पर राजा जनक अपन पुत्रेष्टि यज्ञ के संपन्न केलाs के बाद एता शंकर भगवान् के एकटा मंदिर बनेलक रहे जे हलेश्वर स्थान के नाम से प्रसिद्ध अछि।

पंथ पाकड़ -  सीतामढ़ी जिला से ७ किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में बहुत पुरान एकटा पाकैड़ के गाछ छल, कहल जाय ये की ई गाछ रामायण काल से एता ये। एहन मानल जाय ये की देवी सीता के जनकपुर से अयोध्या लाय जाय के काल में भगवान् राम हुनका पालकी से उतरि के एही गाछ के तोर में विश्राम के लेल रुकल रहे

बगही मठ -  सीतामढ़ी से ७ किलोमीटर उत्तर पश्चिम में बसल बगही मठ हिन्दू धर्म के पूजा-पाठ आ यज्ञ के लेल बहुत प्रसिद्ध अछि, एही मठ में १०८ टा कमरा बनल ये जे यज्ञ आ यजमान  के रहय के लेल बनाएल गेल ये।

देवकुली(ढेकुली) -  एहन मानल जाए ये की पांडव के पत्नी द्रोपदी के जन्म एही थम भेल रहे। सीतामढ़ी से १९ किलोमीटर पश्चिम में बसल ढेकुली गाम में एही लेल ते प्रसिद्ध छेबे करय संगे संग एही ठाम शंकर भगवान् के एकटा बहुताहिं प्राचीन मंदिर सेहो छल, महाशिवरात्रि के दिन एहिठाम बड़ा भयंकर मेला लगय ये।

बोधायन सर -  संस्कृत के महा व्य्करनाचर्या पाणिनी के गुरु महर्षि बोधायन एही ठाम बैसी की कैकटा काव्य के रचना केलेंन ये। लगभग ४० साल पहिने मिथिला के महान संत आ जगत गुरु महर्षि देवराहा बाबा एही ठाम एकटा बोधायन मंदिर के निर्माण कैलक रहे जाहि के बाद से एही जगह प्रसिद्ध भए गेल।

शुकेश्वर स्थान -  जिला से २६ किलोमीटर दूर एही जगह हिन्दू धर्म के महान संत सुखदेव मुनि के पूजा अर्चना के स्थान अछि। संगही एहिठाम शंकर भगवान् जे की शुकेश्वरनाथ कहाबै ये के विशाल मंदिर सेहो ये।

गोरौल शरीफ -  सीतामढ़ी से २६ किलोमीटर दूर ई जगह मुसलमान के लेल बिहार में बिहारशरीफ आ फुलवारीशरीफ के बाद सबसे बेसी लोकप्रिय आ पवित्र स्थल अछि। एही जगह में मुसलमान के एकटा पैघ पीर के मजार अछि, एही ठाम समस्त समुदाय के लोग अपन अपन मनोकामना लाय के जाय ये पूरा भए के आबय ये।

सभागाछी ससौला - सीतामढ़ी से २० किलोमीटर पश्चिम में बसल एही ठाम हरेक साल मैथिल ब्रह्मण से सम्मलेन होए ये, हरेक साल एही ठाम ब्राह्मण सबहक वियाह होए ये, कहल जाय ये की एहिठाम मिथिला के दूर दराज के क्षेत्र से ब्राह्मण लोकिन अपन वर आ कन्या के लए के आबय ये आ सामूहिक रूप से वियाह समपन्न करय ये।

पुपरी -   एहिठाम शंकर भगवान् के रूप बाबा नागेश्वर नाथ के मंदिर अछि, एहन कहल जाय ये की एही ठाम खुद भगवान् शंकर अपन नागेश्वर रूप में स्थपित भेल रहे।

सोमवार, 13 जून 2011

मिथिला दर्शन भाग - ३

मधुबनी - 
 दरभंगा प्रमंडल के एकटा प्रमुख शहर आ जिला छल मधुबनी। मधुबनी आ दरभंगा के मिथिला संस्कृति के द्विध्रुव मानल जाए ये। एतोका मुख्या भाषा मैथिलि आ हिंदी अछि। विश्वप्रसिद्ध मिथिला पेंटिंग आ मखान के लेल ई जिला विश्व भर में जानल जाय ये। एही जिला के गठन १९७२ में दरभंगा के विभाजन के बाद भेल रहे। मधुबनी के नामे सुनि के लागय ये जे एतोका लोग के वाणी बेसी मीठ छल ताहि दुवारे एकर नाम मधु+बानी राखल गेल ये मुदा किछु लोग के कहनाय ये की एहिठाम पहिने मोध(मधु) बहुत बेसी बनय रहे ते दुवारे से एकर नाम मधु-बन पड़ल।

इतिहास - १९७२ में बिहार के अन्य जिला के संगे मधुबनी जिला के निर्माण भेल। पहिने ई दरभंगा जिला के उपखंड रहे विभाजन के बाद ई जिला बनल। एहिठाम प्रगेतिहसिक काल के अवशेष देखे लए भेट जाएत जाही से पता लागैत ये की ई जगह बहुत प्राचीन अछि। एहनो कहल जाए ये की पांडव अपन अज्ञातवास में किछु समय एतो बितेलक रहे। १८५७ के विद्रोह में भी एही जिला अपन बड़ योगदान देलक रहे आ महात्मा गाँधी के खादी के लेल भी एही जिला प्रसिद्द ये एही ठाम के खादी जग प्रसिद्द अछि, मधुबनी जिला के कला के केंद्र कहि सकय छी, कियाकि विश्व प्रसिद्द मिथिला पेंटिंग के जनक एही जिला अछि।

भूगोल - मधुबनी के उत्तर में नेपाल, दक्षिण में दरभंगा, पूरब में सुपौल आ पश्चिम में सीतामढ़ी जिला छल। जिला के कुल क्षेत्रफल ३५०१ वर्ग किलोमीटर अछि संगही एही जिला भूकंप क्षेत्र के ५ नो. जोन में सेहो पड़य ये। एहिठाम नदी के प्रमुखता अछि आ बरसात के दिन ते बूझिये मधुबनी जिला के लेल काल अछि हरेक साल एही जिला के बाढ़ि के भयंकर तबाही के झेलय ये। पूरा जिला के माटि समतल आ उपजाऊ छल आ एता औसत बारिश १२७३ मिमी होएत अछि।
एहीठाम के प्रमुख नदी कमला, करेह, बलान, भूतही बलान, गेहुंआ, सुपेन, त्रिशुला, जीवछ, कोशी आऔर अधवारा समूह अछि। करीब करीब सबटा नदी बरसाति के दिन अपन भयंकर रूप में रहय अछि आ हरेक साल भयंकर तबाही सेहो आनैत अछि।
प्रशासनिक विभाजन - मधुबनी जिला में ५ टा अनुमंडल, २१ टा प्रखंड, ३९९ टा पंचायत आ ११११ टा गाम अछि
। संगही एही जिला में १८ टा थाना आ २टा जेल सेहो छल। मधुबनी जिला २ टा संसदीय क्षेत्र आ ११ टा विधान सभा क्षेत्र में बटल ये।
अनुमंडल- मधुबनी, बेनीपट्टी, झंझारपुर, जयनगर आ फुलपरास अछि।
प्रखंड- मधुबनी सदर (रहिका),पंडौल, बिस्फी, जयनगर, लदनिया,लौकहा, झंझारपुर, बेनीपट्टी, बासोपट्टी, राजनगर, मधेपुर, अंधराठाढ़ी, बाबूबरही, खुटौना, खजौली, घोघरडीहा, मधवापुर, हरलाखी, लौकही, लखनौर, आ फुलपरास अछि।

जनसँख्या आ शिक्षा -
२००१ के जनसँख्या के अनुसार मधुबनी के जनसंख्या ३,५७५,२८१ अछि
। जाही में पुरुष के जनसँख्या १,८४०,९९७ आ महिला के जनसँख्या १,७३४,२८४ अछि। एहिठाम साक्षरता के प्रतिशत ४१.९७% अछि जाही में पुरुष के प्रतिशत ५६.७९ आ महिला प्रतिशत २६.२५ अछि।


पर्यटन स्थल -

राजनगर  - मधुबनी जिला के लेल एकटा एतिहासिक महत्त्व बला स्थान छल राजनगर। राजनगर के  महाराजा रामेश्वर सिंह बसेलक रहे, पहिने ई दरभंगा के उप-राजधानी सेहो रहे। ओ एहिठाम एकटा विशाल नौलखा मंदिर करेलक रहे मुदा १९३४ में आएल भूकंप के कारण एकरा काफी क्षति पहुंचल। ई महल में एकटा प्रसिद्ध आ जागृत काली देवी के मंदिर सेहो छल। राजनगर, मधुबनी जिला मुख्यालय स करीब ७ किलोमीटर उत्तर में ये। ओना १९३४ के भूकंप स एही ईमारत क काफी क्षति पहुंचल मुदा अखनो धैर ओकर अवसेष एता देखय लए भेट जाएत।

सौराठ -  मधुबनी-जयनगर रोड पर बसल एही गाम में सोमनाथ महादेव के मंदिर छल। ई जगह मिथिलांचल आ मैथिल ब्रह्मण के लेल बड़ महत्वपूर्ण अछि। हरेक साल एता मैथिल ब्रह्मण के सभा लागए ये जाही ठाम सब गोटे के सामूहिक विवाह होए अछि। एही गाम में रहय बला पंजीकार मैथिल ब्रह्मण के वंशावली के रिकार्ड राखय छैक जाही से विवाह में हुनका बड़ सुविधा आ सहयोग भेटय ये।

कपिलेश्वरनाथ - 
मधुबनी से ९ किलोमीटर दूर एही जगह पर हिन्दू के अगाध आस्था के प्रतिक कपिलेश्वर शिव मंदिर अछि। हरेक सोम दिन आ साओन के महिना में एता बड़ भीड़ रहय छैक आ बड़ा भयंकर मेला सेहो लगय ये।

उचैठ - बेनीपट्टी प्रखंड में थुमने नदी के कात बसल ई गाम में माँ भगवती के एकटा विशाल मंदिर अछि। कहल जाए ये की एहिठाम संस्कृत के महाकवि आ विद्वान कालिदास के देवी से आशीर्वाद भेटल रहे।

भवानीपुर - पंडौल प्रखंड मुख्यालय से ५ किलोमीटर दूर एही गाम में उगरनाथ शिव मंदिर अछि। मैथिलि के महान कवी विद्यापति से ई मंदिर जुड़ल ये। एहन कहल जाए ये की विद्यापति शंकर भगवान् के अनन्य भक्त रहे ओ एही मंदिर में शंकर भगवान् के नियमित रूप से पूजा करय रहे जकर बाद ओकर भक्ति से प्रसन्न भए के खुद भगवान् शंकर हुनकर लग उगना के रूप में एला आ हुनकर सेवा केलखिन।

बलिराज गढ़ - जिला मुख्यालय से करीब ३४ किलोमीटर उत्तर-पूर्व में मधुबनी-लौकहा सड़क के कात बसल एही गाम में एकटा प्राचीन किला के भग्नावेश छल जे ३६५ बीघा में पसरल ये। एकर किला के देबार एते मोट ये की जेना लागय ये एही पर होए के कैकटा रथ आराम से गुजैर जाएत हेता। ई जगह भारत के पुरातत्व विभाग के अधीन अछि जाही कारन से एकर किछु कर्मचारी एकर देखभाल करय ये। एता सालाना रामनवमी के अवसर पर चैती दुर्गा के विशाल पूजनोत्सव के आयोजन होए छैक। एहि जगह के दू बेर खुदाई सेहो भेल ये मुदा नीक जोंक खुदाई नै भेला से एतोका इतिहास के बारे में नीक जोंका नै कहल जाए सकय ये ओना किछु लोग के माननाय ये जे बलिराज गढ़ मिथिला के राजधानी भए सकय ये कियाकि जनकपुर के महल सब काफी नया छल। ओना ठीक से किछु नै कहल जाए सकय ये कियाकि बलिराज गढ़ अखनो धैर एकटा व्यापक आ पैघ खुदाई के इन्तेजार में ये।