dahej mukt mithila

(एकमात्र संकल्‍प ध्‍यान मे-मिथिला राज्‍य हो संविधान मे) अप्पन गाम घरक ढंग ,अप्पन रहन - सहन के संग,अप्पन गाम-अप्पन बात में अपनेक सब के स्वागत अछि!अपन गाम -अपन घरअप्पन ज्ञान आ अप्पन संस्कारक सँग किछु कहबाक एकटा छोटछिन प्रयास अछि! हरेक मिथिला वाशी ईहा कहैत अछि... छी मैथिल मिथिला करे शंतान, जत्य रही ओ छी मिथिले धाम, याद रखु बस अप्पन गाम - अप्पन बात ,अप्पन मान " जय मैथिल जय मिथिला धाम" "स्वर्ग सं सुन्दर अपन गाम" E-mail: apangaamghar@gmail.com,madankumarthakur@gmail.com mo-9312460150

apani bhasha me dekhe / Translate

शनिवार, 11 जून 2011

मिथिला दर्शन भाग -२

दरभंगा -

उत्तर बिहार में बागमती नदी के कोनटा पर बसल ई जिला मिथिला के लेल एकटा एतिहासिक आ मह्तवपूर्ण जिला अछि। दरभंगा शब्द के अर्थ संस्कृत भाषा के 'द्वार-बंग' या फारसी के भाषा 'दर-ए-बंग' यानी बंगाल के दरवाजा के मैथिली रूपांतरण ये। एहनो कहल जाय ये की मुग़ल काल में एकटा व्यापारी दरभंगी खान एही शहर के बसेलक रहे जाहि कारण से एकर नाम दरभंगा पड़ि गेल। दरभंगा शहर के विकाश सोलहवीं सदी में मुग़ल व्यापारी के ऐनाय से भेल। अपन प्राचीन आ बौधिक परम्परा के लेल एही शहर खूब प्रसिद्ध ये। एकर अलावा प्राचीन भारत के जानल मानल राजा लक्ष्मीश्वर सिंह, ललित नारायण आ कामेश्वर सिंह  के जन्म आ कर्मस्थल सेहो अछि। संगे एहिठाम के आम आ मखान मिथिला के साथ-साथ सोंसे देश में प्रसिद्ध अछि।

इतिहास -

दरभंगा शहर के विवरण महाभारत आ रामायण में भेटैत ये। वैदिक स्त्रोत के अनुसार एही शहर बिहार के सबसे पुरान शहर अछि। दरभंगा शहर १६ वीं सदी में दरभंगा राज के राजधानी छल।१८४५ ईस्वी में ब्रिटिस सरकार दरभंगा के सदर अनुमंडल बनाs देलक आ १७६४ ईस्वी में दरभंगा शहर नगर निकाय बनि गेल।
एही जगह पर पुरातन काल से ही राजा के शासन छल विदेह के राजा मिथि के बाद मगध के राजा मौर्या, शुंग, कण्व, आऔर गुप्त शासक के राज छल, १३वीं सदी में एही पर बंगाल के किछु मुसलमान शासक सेहो राज केलेन। जाही में बंगाल के शासक हाजी शमसुद्दीन इलियास एही क्षेत्र के मिथिला आ तिरहुत क्षेत्र में बाटि देलक
उत्तरी भाग जाही में दरभंगा, मधुबनी, आ समस्तीपुर जिला आयल तकर सत्ता राजा कामेश्वर सिंह के भेटल। तकर बाद राजा देवसिंह, शिवसिंह, पद्मसिंह, हरिसिंह, नरसिंहदेव, धीरसिंह, भैरवसिंह, रामभद्र, लक्ष्मीनाथ, कामसनारायण राजा भेल। एही काल के राजा कलाकार आ विद्वान के बेसी प्राथिमिकता दैत रहे। खास कए के पान, मखान, विद्या, आ मधुर बोल के कारन एही ठाम के एकटा प्रचलित श्लोक अछि,
पग-पग पोखर, पान मखान
सरस बोल, मुस्की मुस्कान
विद्या-वैभव शांति प्रतीक
ललित नगर दरभंगा थिक
अपन गौरवशाली अतीत आ अद्भुत संस्कृति के लेल प्रसिद्ध ई जिला आय राजनितिक कारण से उपेक्षित अछि।

भूगोल -
दरभंगा जिला के क्षेत्रफल २,२७९ वर्ग किलोमीटर अछि। दरभंगा के उत्तर में मधुबनी, दक्षिण में समस्तीपुर, पूरब में सहरसा आ पश्चिम में मुजफ्फरपुर आ सीतामढ़ी जिला ये। सोंसे जिला में समतल आ उपजाऊ जमीन अछि मुदा वनप्रदेश कोनो नै अछि। एही इलाका में हिमालय से बहय बला नदी के अधिकता अछि, एतौका पर्मुख नदी कमला, बागमती, कोशी, करेह आर अधवारा अछि। एही समस्त नदी हरेक साल एता बाढ़ी आनय ये जाही हरेक साल बहुत जान आ माल के हानि होए ये। एही ठाम औसत वर्षा ११४२ से ११४४ मिलीमीटर होए अछि।

जनसँख्या आ शिक्षा -  २०११ के जनगणना के अनुसार एही जिला के कुल जनसँख्या ३२,८५,४९३ छल जाही में शहरी क्षेत्र में २,६६,८३४ आ देहाती क्षेत्र में ३०,१८,६३९ छल। एही ठाम के साक्षरता दर ३५.४२% अछि जाही में पुरुष आ महिला के शिक्षा के प्रतिशत क्रमशः ४५.३२% आ २४.५८% अछि।

प्रशासनिक विभाग -

दरभंगा जिला में ३ टा अनुमंडल, १८ टा प्रखंड, ३२९ पंचायत, १.२६९ गाँव, आ २३ टा थाना छल।

अनुमंडल - दरभंगा सदर, बेरौल, बेनीपुर ।
प्रखंड -  दरभंगा, बहादुरपुर, हयाघाट, हनुमाननगर, बहेरी, केवटी, सिंघवारा, जाले, मणिगाछी, ताराडिह, बेनीपुर, अलीनगर, बिरौल, घनश्यामपुर, कीरतपुर, गौरा-बौरम, कुशेश्वरस्थान, कुशेश्वरस्थान (पूर्व) अछि।
प्रमुख नदी - एहिठाम के प्रमुख नदी कमला, बागमती, कोशी, करेह आर अधवारा अछि।

पर्यटन स्थल -

दरभंगा राज परिसर एवं किला - दरभंगाक महाराज सब के कला, साहित्य आ संस्कृति के संरक्षक के रूप में गिनल जाय ये। स्वर्गीय महेश ठाकुर के द्वारा स्थापित दरभंगा राज किला-परिसर आब एकटा आधुनिक पर्यटक स्थल आ शिक्षा के केंद्र बनि चुकल ये। विशाल, भव्य, आ वाश्तुकला के शानदार नमूना से बनल एतोका महल आ मंदिर अखनो धैर प्राचीन काल के कला के कहानी कहैत ये। भिन्न-भिन्न महाराज के बनायल महल में नरगौना महल, आनंदबाग महल आ बेला महल मुख्य ये। राज के पुस्तकालय आ ललितनारायण मिथिला विश्वविद्यालय आ कैकटा आरो दोसर दोसर महल संस्कृत विश्वविद्यालय के लेल उपयोग में लैल जाए रहल ये।

महाराजा लक्ष्मिश्वर सिंह संग्रहालय  -   १६  सितम्बर १९७७ में दरभंगा के तत्कालीन जिलाधिकारी एही संग्रहालय के स्थापना केलखिन। एहिठाम अहाँक प्राचीन आ दुर्लभ कलाकृति के विशाल संग्रह भेटत। सोम दिन टा के छोडि के सप्ताह के हरेक दिन एही संग्रहालय खुलैत ये जाही में प्रवेश निः शुल्क अछि।

चंद्रधारी संग्रहालय - रंती-ड्योढी (मधुबनी) के स्वर्गीय चंद्रधारी सिंह के दान करल गेल कलात्मक आ दुर्लभ वस्तु के दरभंगा शहर के मानसरोवर झील के कात ७ दिसंबर १९५७ के एकटा संग्रहालय में राखल गेल। एहिठाम अहाँक के हाथी दाँत, सोना आ चाँदी के बनल हथियार आ दरभंगा महाराज के अद्भुत प्राचीन निशानी देखय ले भेटत। एही संग्रहालय के दुर्लभ वस्तु सब के ओकर उपयोग के अनुसार ११ टा कमरा में राखल गेल ये। ई संग्रहालय में प्रवेश निःशुल्क अछि।

श्यामा मंदिर - दरभंगा स्टेशन से करीब १ किलोमीटर दूर पर बसल मिथिला विश्वविद्यालय के अंगना में बनल एही मंदिर कला के अद्भुत नमूना अछि। सन १९३३ ईस्वी में एही काली मंदिर के दरभंगा के राजा बनोलक रहे। एही मंदिर के निर्माण दरभंगा राज परिवार के निजी कब्रिस्तान पर काएल गेल ये। एतोका लोग में एही मंदिर के बड़ आस्था अछि कहल जाय ये एता पूजा केने से अहाँक मनोवांछित फल भेटत।

होली रोजरी चर्च - 
दरभंगा रेलवे स्टेशन से १ किलोमीटर उत्तर में स्थित एही चर्च इसाई पादरी के प्रसिक्षण के लेल बनल रहे। १८९७ में आयल भूकंप से एही चर्च के काफी नुकसान पहुंचल छल आ जाही लेल एही में प्रार्थना सेहो बंद भए गेल रहे, बाद में एकर पुनर्निर्माण भेल आ २५ दिसंबर१९९१ से एही चर्च में पुनः प्रार्थना शुरू भए गेल। चर्च के बाहर ईसा मसीह के एकटा प्रतिमा सेहो बनल छल जे बहुत ही मोहक आ करुणामय लागय छल। एही जगह हरेक साल ७ अक्टूबर के एकटा विशाल मेला के आयोजन सेहो होए अछि जे आनंद मेला के नाम से प्रसिद्ध ये।

मस्जिद एवं मकदूम बाबा की मजार-  दरभंगा रेलवे स्टेशन से २ किलोमीटर दूर दरभंगा टावर के पास बनल मस्जिद शहर के मुसलमान के लेल सबसे पैघ पूजा के स्थल अछि। एइ के पास एकटा सूफी संत मकदूम बाबा के मजार सेहो छल जे हिन्दू आ मुसलमान दुनु के लेल आदरणीय अछि। शुक्र दिन एहिठाम अहाँ भरी संख्या में भीड़ देखि सके छी।

भीख सलामी मजार - दरभंगा रेलवे स्टेशन से १ किलोमीटर दूर गंगासागर के किनार पर बसल एही मजार मुसलमान आ हिन्दू दुनु के लेल आस्था के प्रतीक अछि। रमजान के दिन एही ठाम १२ से १६ दिन के विशाल मेला लगय ये।

कंकाली मंदिर - दरभंगा रेलवे स्टेशन से दू किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में स्थित ई मंदिर दरभंगा महाराज के किला में क्षेत्र में बनल ये। खास कए के ई मंदिर शक्ति आ सिद्धि से जुडल लोग के लेल ये।

मनोकामना मंदिर - विश्विद्यालय परिसर के ठीक पाछा बनल एही मंदिर नौरंग पेलेस में ये। संगमरमर से बनल एही मंदिर में छोट मुदा अद्भुत आ अतुलनीय भगवान् बजरंगबली के मूर्ति स्थापित अछि। मंगल दिन एता बेसी भीड़ रहय ये।

सती स्थान - दरभंगा महाराज पुल से एक किलोमीटर पश्चिम में बनल ई स्थान एकटा सम्शान में स्थित अछि। महाराजा रामेश्वर सिंह जे खुद भी एकटा पैघ तांत्रिक रहे रोज राति के ओ एहिठाम तंत्र सिद्धि ले जाए रहे। एहिठाम पूर्व रेल मंत्री ललित नारायण मिश्रा के पिताजी हिरानंदन मिश्रा के समाधी सेहो अछि। लोग हरेक शुक्र आ सोम दिन एही ठाम पूजा पाठ लए आबए ये।

नवादा दुर्गा स्थान - मजकोरा नवादा रोड पर बसल एही मंदिर में दुर्गा जी के विशाल प्रतिमा अवस्थित ये। हरेक दिन एही मंदिर में कम से कम सौ टा लोग जरुर आबय ये दुर्गा पूजा में एही जगह के रौनक देखय बला रहय ये।

नेवारी - बेरैल से १३ किलोमीटर दूर ई जगह राज लोरिक के प्राचीन किला के लेल प्रसिद्द अछि।

महिमा महादेव स्थान छपरार - दरभंगा से १० किलोमीटर दूर ई जगह कमला नदी के कात में बसल ये। एता कमला नदी के कात में एकटा शिव मंदिर बनल ये जतय कातिक आ माघ महिना में बड़ा जबरदस्त मेला लगय ये।

कुशेश्वरस्थान शिवमंदिर एवं पक्षी विहार - समस्तीपुर-खगड़िया रेललाईन पर हसनपुर रोड से २२ किलोमीटर दूर कुशेश्वर स्थान अछि जतय रामायण काल के एकटा शिव-मंदिर सेहो छल। एही मंदिर हिन्दू के आस्था के प्रतीक अछि। कुशेश्वर स्थान के आस-पास ७०१९ एकड़ जलप्लावित क्षेत्र के वन्यजीव सरंक्षण अधिनियम के तहत पक्षी अभ्यारण घोषित कए देल गेल ये। एही क्षेत्र में स्थानीय पक्षी के संगे साईबेरियाई, नेपाल, भूटान, पाकिस्तान, आ अफगानिस्तान जैसन पडोसी देश के पक्षी के तादात बहुत बेसी छल। एही जगह मुख्य रूप से ललसर, दिघौच, माइल, नकटा, गैरी, गगन, अधानी, हरियल, चाहा, करन, रतवा, गैबर जैसन पक्षी एता देखि सकय छी, मुदा आब पक्षी के अवैध तस्करी आ शिकार के कारण आब एकर संख्या काफी घटल ये। एही ठाम के अहाँक के कैकटा एहन पक्षी देखाय जाएत जे अंतर्राष्ट्रीय पक्षी संरक्षण निदेशालय के अनुसार पूरा विश्व में काफी कम अछि।

अहिल्यास्थान  -  जाले प्रखंड में कमतौल रेलवे स्टेशन से ३ किलोमीटर दक्षिण में स्थित ई स्थान त्रेता युग के निशानी थीक। कहल जाय ये की अयोध्या जाय के काल में भगवान् श्रीराम पत्थर से बनल शापग्रस्त अहिल्या के उद्धार एही स्थान पर कैलक रहे। हरेक साल रामनवमी (चैत) आ विवाह पंचमी ( अगहन) के एता जबरदस्त मेला लागय ये जाही में रामलीला के साथ साथ कैकटा अन्य प्रकार नाटक के आयोजन होए ये।

गौतमस्थान -  कमतौल से ७ किलोमीटर दूर ब्रह्मपुर के गौतम ऋषि के स्थान मानल जाए ये। एही ठाम गौतम सरोवर आ संगे एकटा मंदिर सेहो बनल अछि। संगे ब्रह्मपुर गाम खादी के लेल भी काफी प्रसिद्ध अछि एही ठाम अहाँ विभिन्न तरह के खादी के वस्त्र किनी सकय छी।

मरकंडा - मैनगाछी रेलवे स्टेशन से ५ किलोमीटर दक्षिण में बसल एही गाम एकटा प्राचीन मंदिर के लेल प्रसिद्ध अछि जकर नाम बानेश्वरनाथ अछि।

शुक्रवार, 10 जून 2011

मिथिला-दर्शन भाग - १

सहरसा
मिथिला के उत्कृष्ठता के बढ़ाबै बला जिला छल "सहरसा" . मंडन मिश्र आ लक्ष्मी नाथ गोसाई के जन्म आ कर्म स्थल अछि ई जगह। एकर स्थापना एक अप्रेल १९५४ कए काएल गेल । कोशी के पूर्वी हिस्सा में बसल एही जिला हरेक साल बिहार के शोक मानल जाय बला कोशी नदी के कोप के शिकार होए ले पड़य ये। प्रकृति के कोप कहियो आ की विधना केर रीत सहरसा के बनावटे एहने ये की प्राकृतिक आपदा से हरदम ई जिला प्रभावित रहय ये।

इतिहास -
पहिने सहरसा क्षेत्र अन्गुत्तरप कहाबै रहे आ उत्तर बिहार के प्रसिद्ध वैशाली जनपद के सीमा पर बसल रहे
। मगध साम्राज्य के काल में एही ठाम बौध के किछु चिन्ह सेहो भेटल ये। सहरसा जिला के बिराटपुर, बुधियागढ़ी, आ मठाई जेहन जगह पर बुद्ध चिन्ह भेटल ये । सातवी सदी में जखन आदि गुरु शंकराचार्य भारत भ्रमण पर निकलल रहे तखन ओ सहरसा जिला के महिषी गाम सेहो आएल रहे। कहल जाए ये की जखन आदि  गुरु शंकराचार्य ओतोका प्रसिद्ध विद्वान मंडन मिश्र जी के शास्त्रार्थ में हरा देलक तखन हुनकर पत्नी आ महा विदुषी "विदुषी भारती" शंकराचार्य के शास्त्रार्थ के लेल चुनौती देलक आ हुनका शास्त्रार्थ में पराजीत कए देलक।

भूगोल -
सहरसा जिला कोशी प्रमंडल आ जिला के मुख्यालय अछि । एकर उत्तर में मधुबनी आ सुपौल, दक्षिण में खगड़िया, पूरब में मधेपुरा, आ पश्चिम में दरभंगा आ समस्तीपुर जिला बसल ये। जिला के क्षेत्रफल १,६६१.३वर्ग किलोमीटर ये। बिहार के शोक कहल जाय बला कोशी नदी एही ठाम से मुख्य रूप से गुजरै ये आ हरेक साल बाढ़ से भयंकर तबाही सेहो आनय ये।

एहिठाम के मुख्य नदी ये - कोशी आ धेमरा
मुख्य शहरी क्षेत्र ये - सहरसा, सिमरी बख्तियारपुर, महिषी, सोनबरसा राज, सौरबाजार, आऔर नौहट्टा

जनसँख्या -
२०११ के जनगणना के अनुसार सहरसा जिला के जनसँख्या १५,०६,४१८ छल जाही में शहरी क्षेत्र आ देहाती क्षेत्र के जनसँख्या क्रमशः १,२४,०१५ आ १३,८२,४०३ छल।

प्रशाशनिक विभाग -
प्रशासनिक विभाजनः
सहरसा जिले के अंतर्गत २ अनुमंडल एवं १० प्रखंड अछि।
अनुमंडल - सहरसा सदर (७ प्रखंड) आ सिमरी बख्तियारपुर ( ३ प्रखंड)
सहरसा अनुमंडल में आबए बला प्रखंड - कहरा, सत्तर कटैया, सौर बाज़ार, पतरघट, महिषी, सोनबरसा राज, आ नौहट्टा।
सिमरी बख्तियारपुर अनुमंडल में आबए बला प्रखंड - सिमरी बख्तियारपुर, सलखुआ, आ बनमा ईटहरी।

पर्यटन स्थल -

तारा स्थान (महिषी) - सहरसा से १६ किलोमीटर दूर महिषी गाम में बसल तारा स्थान प्राचीन काल से ही लोग सबहक श्रद्धा के केंद्र रहल ये। एहीठाम सती मूर्ति के रूप में एकटा यन्त्र पर स्थित ये। तंत्राचार्य के अनुसार महर्षि वसिष्ठ एही ठाम महाविद्या तारा के उपासना केलैन रहे जाही से प्रशन्न भए के माँ तारा एता विराजमान भेल। एहिठाम माँ तारा के संगे एकजटा आ नील सरस्वती के मूर्ति के सेहो पूजा होए ये।

मंडन-भारती स्थान (महिषी) -
महिषी प्रखंड में स्थित ई जगह  अद्वैतवाद  के सबसे पैघ प्रवर्त्तक शंकराचार्य आ मंडन मिश्र आऔर हुनकर पत्नी भारती के बीच होएल शास्त्रार्थ के गवाह अछि। कहल जाए ये की हिंदुत्व के स्थापना के लेल जगतगुरु शंकराचार्य भारत भ्रमण पर निकलल रहे जाही अभियान में ओ महिषी भी एला रहे जताs ओ शास्त्रार्थ में मंडन मिश्र के हराs देलक रहे तखन मंडन मिश्रक कनिया विदुषी भारती हुनका से ई कहि के हुनका से शास्त्रार्थ करलक जे कनिया ते पति के अर्धांगिनी होए ये मने आधा शारीर अखन ते अहन खाली आधा शारीर के हरेलों ये आब अहाँ हमरा से शास्त्रार्थ करू आ इतिहास गवाह ये एही शास्त्रार्थ में ओ विदुषी कन्या जगतगुरु शंकराचार्य के हराs देलक रहे।

सूर्य मंदिर (कन्दाहा) - बारहवी शताब्दी में राजा नरसिंह देव एही मंदिर के निर्माण करेलक रहे। मिथिला ही नाञ मुदा संपूर्ण बिहार आ भारत में एही मंदिर प्रशिद्ध  ये। सूर्य मंदिर में ग्रेनाईट के शिलालेख पर भगवान् सूर्य के मूर्ति ये जे सात घोड़ा से जुतल रथ में सवार ये। कहल जाए ये की एकटा क्रूर मुग़ल राजा कलापहाड़ एही मंदिर कए खंडित कए देलक रहे जकर बाद मिथिला में भगवान् आ प्रसिद्ध संत लक्ष्मी नाथ गोसाई एकर जीर्णोधार केलैन।

चंडिका स्थान (विराटपुर) - सोनबरसा ब्लाक में बसल बिराटपुर गाम माँ चंडी के बहुत ही प्राचीन मंदिर के लेल प्रसिद्ध अछि। एही गाम महाभारत काल के राजा बिराट के नाम के साथ जुड़ल अछि। कहल जाए ये की निर्वासन के काल में पांडव एहीठाम बारह बरस तक रहल छल। तांत्रिक आ वैदिक लोग सबहक मतानुसार धमहरा घाट के कात्यायनी मंदिर आ महिषी के तारा मंदिर के साथ एकटा समबाहु त्रिभुज बनाबै ये जे की सिद्धि के लेल अति महत्वपूर्ण अछि। नवरात्र में एहिठाम के महत्व बेसी भए जाय ये एते एही समय बिजली देवी के पूजा होए ये। कारु खिरहरी मंदिर - कोशी नदी के तट पर बसल करू खिरहरी मंदिर मिथिला के लेल एकटा भयंकर आस्था के प्रतीक अछि। कहल जाए ये की गाय के प्रति ओकर अगाध प्रेम आ आस्था के लेल हुनका शंकर भगवान् से देवत्व प्राप्त भए गेल रहे ताहि लेल करू खिरहर के गाय के दूध चढ़य ये। महिषी ब्लाक से दू किलोमीटर दूर महपुरा गाम के कोशी के तटबंध पर हिनकर मंदिर अवस्थित ये। मुदा आब हाल में ही बिहार सरकार भी करू खिरखरी मंदिर के एतिहासिक पर्यटक स्थल बनाबै के घोषणा करलखिन ये।
लक्ष्मीनाथ गोंसाई स्थल (बनगाँव) - मिथिला के एकटा महान कवी आ महान संत लक्ष्मीनाथ गोंसाई के अवशेष के एकटा बोड गाछ के पास सरंक्षित काएल गेल ये। हिनक महिमा से आय बनगांव दिन दूना राति चौगुना तरक्की कए रहल ये। एक से एक पैघ आइ.आई.टी. आई.एस आ आई.पी.एस एही गाम मिथिला के देलक ये। मिथिला के लेल ई बहुत ही पैघ आश्था के प्रतीक अछि।
देवन वन शिव मंदिर - नौहट्टा ब्लाक के साहपुर मंझौल में स्थित एही मंदिर में एकटा शिवलिंग स्थापित अछि। कहल जाय ये की एही शिवलिंग के स्थापना १०० इशापुर्व में महाराजा शालिवाहन केलैन रहे। एही जगह के वर्णन श्री पुराण में भी भेटल ये। मिथिला के प्रमुख पावनि-त्यौहार में जितिया के बाद पैघ स्थान अछि कहल जाय ये की महाराजा शालिवाहन के बेटा के नाम जितिया रहे जाही से लोग एही पर्व के मनाबै अछि। प्राचीन समय में देवन वन कोशी के प्रकोप के कारण टूटी गेल रहे जकरा बाद में ग्रामीण सब ओ बचल अवशेष पर नबका मंदिर ठार करलक।
शिव मंदिर(नौहट्टा) - जिला के नौहट्टा प्रखंड में स्थित शिव मंदिर आस्था के महान संगम अछि एही मंदिर के उंचाई ८० फीट छल।१९३४ में आएल भूकंप के कारण ई मंदिर क्षतिग्रस्त भए गेल रहे जकरा बाद में श्रीनगर एस्टेट के राजा श्रीनानंद सिंह जी एकर पुनर्निर्माण कैलक रहे। संगे संग एही गाम माधो सिंह के कब्र के लेल भी प्रसिद्द अछि, माधो सिंह लादरी घाट के लड़ाई में शहीद भए गेल रहे जकर याद में एही कब्र के निर्माण भेल, एही कब्र पर हिन्दू आर मुशलमान दुनु गोटे प्रसाद चढ़ाबै अछि।
दुर्गा मंदिर (उदाही) - जिला के कहरा गाम में स्थित एही मंदिर के मिथिला के लेल खास महत्व अछि। कहल जाय ये की एही गाम के सोन लाल झा के साक्षात् दुर्गा जी स्वपन में दर्शन देलक आ एही जगह के खुदाई के लेल कहलक, खुदाई के क्रम में दुर्गा जी के विशाल आ सुन्दर प्रतिमा भेटल जकरा गाम बला सब स्थापित कए के मंदिर के निर्माण कए देलक। दूर दूर से गाम से लोग एही मंदिर के दर्शन लेल आबय ये। कहल जाय ये की एही मंदिर में दुर्गा देवी सबहक मनोकामना पूर्ण करय ये ।

मतस्यगंधा मंदिर (सहरसा) - सहरसा जिला में बंजर आ पानी से भरल रहय बला जगह में पर्यटन के लेल विकशित कराल गेल जकर नाम मत्स्यगंधा भेल। एही जगह पर माँ काली के एकटा भव्य मंदिर अछि जकरा रक्त काली के नाम से जानल जाय ये, एही ठाम मिश्र के पिरामिड के जोंका एकटा मंदिर बनल ये जाही में दुर्गा के ६४ रूप के मूर्ति अवस्थित अछि एकरा चौसठ योगिनी के नाम से जानल जाय ये, मान्यता के अनुसार कोलकाता के बाद दोसर चौसठ योगिनी एही ठाम ये। बिहार सरकार भी पर्यटन के लेल एकरा विकसित कए रहल ये जाही योजना के एता एकटा पैघ टूरिस्ट काम्प्लेक्स बनेलक ये।




रविवार, 5 जून 2011

बाबुजी छैथ बड होसियार@प्रभात राय भट्ट

हमर बाबुजी छैथ  बड होसियार,
हुनका सन कियो नै बुधियार,
लेनदेनमें छैथ ओ बड माहिर ,
भला अर्थ स: संसार चलैय,
ई बातों छै जग जाहिर,
हम कहैछी बी.ए.एम्.ए.पढ़दीय,
बाबु कहैछैथ बस आब रहदीय,
आई.ए.पैढ़ लेलौ ई की कम अछि?
हम कोण पढ़ल लिखल ?
मुदा शिक्षा मंत्री बनल अछि,
पि.ए. स:सभटा काज कराबैछी,
साइनके जगह औठाछाप लगाबैछी,
काज करू एहन जैमे पाए नै लागे,
बैसल बैसल अपार धन सम्पति घर आबे,
बात हमर सुन बेट्टा,बन तहूँ हमरा सन नेता,
फेर देख जिन्दगी में चमत्कार भजेतौं,
हमरा संग संग तोरो उधार भजेतौं,
जो मंदिर,मस्जिद में आईग लग्बादे,
गिरजा घर,बौध गुम्बा पर डोजर चल्बादे
ई सब करिहे राईत के अन्हार में,
दू चाईर गो हिन्दू के गिरादीहे ईनारमें,
फेर देख हिन्दू मुस्लिम में लडाई भजेतई,
हमरा नेता सभक बड़का कमाई भजेतई,
भलेही मंदिर मस्जिद के आईग बुईझ जेतई,
मुदा धर्म मजहब केर आईग लागले रहतई,
अनेरो घुमैत रहिहे गामेगाम टोला टोला,
साथ वोकरे दिहे जेकर छै बोलबाला,
वोट बैंक बैढ़ जेतौं भजेबें तहूँ हमरा सन नेता,

रचनाकार:प्रभात राय भट्ट

शुक्रवार, 3 जून 2011

एतेक चंचल तू किये@प्रभात राय भट्ट

एतेक चंचल तू किये
भेले रे मनमा,
भभर में हम फसल छि
तोहरे करनमा,
हमरा जे नै भावे 
ओतह करेछे  तू परिक्रमा ,
कह कोना हेतई
हमरो दिन सुदिनमा,
राईत दिन साझ सबेरे
रहैछे तू अपने फेरे,
निक बेजाई किछु नै सोचे
मस्त रहैछे तू अनेरे,
जालमे तोरा फसलछि
केने छे तू केहन काबू,
कियो जाईन नए सकल
रे मनमा तोहर जादू,
क जाईत छे तू एहन काम,
भ ज्यात छि हम बदनाम,
सूक्षम अतिसूक्षम रूप तोहर,
कियो देख नै सकैय तोरा,
निक काज में प्रसंसा
बेजाय में उलहन परे मोरा,
हम तारा स दूर दूर भागी,
मुदा साथ नए छोड़े तोहर छाया,
हमरा काया के भीतर,
पसरल छौ तोहर महामाया,
रे मनमा कोना हम समझाऊ,
तू हवा स तेज बुझाइतछें,
जते हम सम्झाबी तोरा,
ओत्बें तू बहकल जाईछें,
क्षण में महल माकन बनबैछे,
होस अबैत सभटा गिरबैछे,
कखनो राजा कखनो रंक,
कखनो जोगी कखनो भोगी,
हम तोहर की तू हमर ??

रचनाकार:प्रभात राय भट्ट

गुरुवार, 2 जून 2011

मातृभाषा@प्रभात राय भट्ट

मिथिलावासी बोल बोलू मेची स: महाकाली,
हिंदी उर्दू इंग्लिस चाहे बोलू आऔर नेपाली,
मुदा सब स अनमोल रत्न अछि अपने मातृभाषा,
किया तुलल छि कर पैर मातृभाषा के दुर्दशा,
जन्म लैत कान स:सुनलौ मैथिलि स्वर मधुर,
मैथिलि स्वर मधुर सुनीक नाईच उठैय मयूर ,
सरस सरल ममता सा भरल अछि माएक बोली,
जेना आमक गाछी में कु कु कु कुह्कैय कोयली,
मथिली भाषा आ मिथिलाक जीवनशैली स:
उत्तपन भेल अछि मिथिलाक विराट संस्कृति,
मनमोहक आ मनोरम अछि मिथिलाक प्रकृति,
गंगा हिमालय कोशी गण्डकी के मध्य्भूमि,
हराभरा जंगल एतिहासिक नदी के संगम,
अछि प्रेम प्राग सुन्दर अनमोल अनुपम,
हिंदी उर्दू इंग्लिस बोली चाहे अओर बोलू नेपाली,
माए के माथक टिकुली अछि मैथिलि बोली,
टिकुली बिनु सुन्दर नै लागत माएक सृंगार,
अपने हाथे किये करैत छि माएके सृंगारक ऊजार,

रचनाकार:प्रभात राय भट्ट