dahej mukt mithila

(एकमात्र संकल्‍प ध्‍यान मे-मिथिला राज्‍य हो संविधान मे) अप्पन गाम घरक ढंग ,अप्पन रहन - सहन के संग,अप्पन गाम-अप्पन बात में अपनेक सब के स्वागत अछि!अपन गाम -अपन घरअप्पन ज्ञान आ अप्पन संस्कारक सँग किछु कहबाक एकटा छोटछिन प्रयास अछि! हरेक मिथिला वाशी ईहा कहैत अछि... छी मैथिल मिथिला करे शंतान, जत्य रही ओ छी मिथिले धाम, याद रखु बस अप्पन गाम - अप्पन बात ,अप्पन मान " जय मैथिल जय मिथिला धाम" "स्वर्ग सं सुन्दर अपन गाम" E-mail: apangaamghar@gmail.com,madankumarthakur@gmail.com mo-9312460150

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शनिवार, 8 अगस्त 2015

केना देश महान हेतैय


ज छोट छोट सन बातके ल क,
रोजे नया बबाल हेतैय।
आतंकवादी के फाँसी यो पर जॅ,
अना नित नया सवाल हेतैय।।
फेर केना देश महान हेतैय!!
बाजल जॅ किछु साहरुख सलमान,
ओहु पर अना घमासान हेतैय।
सर्वोच्च न्यायालय क फैसला पर जॅ,
परैत केकरो शकक निगाह हेतैय।।
फेर केना देश महान हेतैय!!
जॅ निरथ॔क बातचीत मे,
सबहक समय बर्बाद हेतैय।
फेसबुक आ वाटसाॅप पर,
हिन्दू मुस्लिम मे गाईरम गाईर हेतैय।।
फेर केना देश महान हेतैय!!
"छी कियो हिन्दू छी कियो मुस्लिम,
राष्ट्र धम॔ के मान करू।
निरदोषक जे प्राण हरैया,
उकरा नहि छमादान करु।
नाम आतंक जेकर कोनो धम॔ नहि,
सब मिली ऐकर नीदान करु।"
राजनीति मे जॅ तुचछ बिचार हेतैय।।
फेर केना देश महान हेतैय!!

कविता ने गीत लिखै छी

ने कविता ने गीत लिखै छी।
ने मिठगर ने तीत लिखै छी।।
     सत्य लिखै छी व्यथा लिखै छी।
     अपने अप्पन कथा लिखै छी।।
पुन्य लिखै छी पाप लिखै छी।
मुनि सँ भेटल श्राप लिखै छी।।
       विरह वियोग विलाप लिखै छी।
        शोक दर्द सन्ताप लिखै छी।।
श्रमिक जन्म अभिषाप लिखै छी।
दु:ख प्रारब्धक पाप लिखै छी।।
        जन्म मृत्यु संसार लिखै छी।
        ब्रह्म वेद आधार लिखै छी
स्वर्ग लिखै छी नर्क लिखै छी।
 अप्पन अप्पन तर्क लिखै छी।।
         अर्थ लिखै छी व्यर्थ लिखै छी।
          बेचल कलम अनर्थ लिखै छी।
 राजा के सम्मान लिखै छी।
धनबल के गुणगान लिखै छी।।
        " बक्शी" व्यर्थ प्रतिवाद करै छी।
           हम कोनो अपराध करै छी।।

शनिवार, 18 जुलाई 2015

आऊ सूनु कने बात हमर....

ऊ सूनु कने बात हमर..... 2
नै पकरू अहाँ कान हमर,
कहै छि हम आई कनी अप्रियगर,
मुदा पिबहे पडत क्रोधक जहर,
अहंकार आ क्रोध के,
कंठे में धरु,
अहाँ आब नीलकंठ बनू,
जेकरा पुजैत एलहूँ सब दिन,
वैह महादेव बनू अहाँ,
ध्यान करू,
कनि ज्ञान करू,
विज्ञानक अहाँ संग धरु,
परंपरा के बुझु अहाँ,
तर्क तथ्य स तौलू अहाँ,
कसौटी पर कसलाक बादे,
ओकरा अहाँ अंगीकार करू,
अंध मोहि ध्रितराष्ट्र जँका,
आ  गांधारी ने बनू अहाँ,
हिसाब करू,
कनी विचार करू,
अलग अलग विधा स साक्षात करू,
अध्यन करू,
निर्माण करू,
श्रीजनात्मक्ताक अहाँ आयाम बनू,
तास छोडू,
भाँग छोड़ू,
बिना बात के बात छोड़ू,
अपन बड़ाई के राग छोड़ू,
दलानक बैसार छोड़ू,
राजनीत के कौचर्य छोड़ू,
आब समय नै भोज भात के,
आब समय अई समय संग चलै के,
उच्च अध्यन में पाई लगाऊ,
व्यपार बाणिज्य स हाथ मिलाऊ,
अपन सहजता अपन शरलता,
अपन दर्शन के और बढ़ाऊ,
इतिहास में नै,
आब बर्तमान के,
अपन कर्मठता स सजाऊ,
विज्ञान के ज्ञाता बनू,
दर्शन में छलहूँ अग्रणी,
आब विज्ञानक बारी अई,
पूजा पाठ के विज्ञान स जोरू,
नियम निष्ठा के स्वास्थ्य स जोरू,
तहने टा कल्याण हैत,
जहने पान माछ मखान स उबरब,
खेबा टा के सिर्फ बात ने करब,
साँस साँस में ध्यान करब,
आ बात बात में विज्ञान,
गणित गणित के  चर्चा में,
तकनिकक आधुनिकता में,
समय अपन पूरा बितैब,
कनी याद करू,
सीता उठाबै छलीह शिव धनुष,
आ अहाँ दबल छि दहेज़क  दुर्बलता  स,
गाम गाम नशा में डूबल,
कुंठा के निक्षेप स भरल,
आरोप आ प्रत्यारोप स उबरु,
अपना के अहाँ कला स जोरू,
आब समय विश्रामक नै अई,
आब परिश्रम के अई जरूरत,
जनक के गीते टा नै गाऊ,
फेर जनक जँका विज्ञानक हर चलाऊ.
ज्ञानक मटकुर में सीता निकलतिह,
लक्ष्मी स भरपूर धरती,
राम पुरुषार्थ स्वयं औताह,
सीता के वरन करतामे
कतौ दुख के बास नै हैत,
सबहक मोन निर्मल भ जैत,
माता पिता ने डेरैल रहताह,
बाल बच्चा के पढैल करताह,
गाम गाम में हैत विज्ञानक चर्चा,
हर्षित मोन मे
By Pawan Kumar Jha

बुधवार, 15 जुलाई 2015

अहाँ बिनाकs जिनगी !!

अहाँ बिनाकs जिनगी !!
किए हमरा अहाँ एतेक तड़पबैत छी ,
ई तड़प आब हमरा सहल नई जाइय !
ई जिनगी दू दिनके अछि , बस
अहाँ बेगर हमरा जियल नई जाइय !!
अहाँ किए हमर दिल सँ दूर भगैत छी ,
दूर जाक हमर दिल दुःखा रहल छी !
प्रेमकs वादा भुइल रहल छी ,
बिच बाट पs किया साथ छोइड़ रहल छी !!
केने छलौं वादा अहाँ वादा सात जनमके,
जीवनसाथी बनब हम जनम - जनमके !
किए वचन तोइड रहल छी ,
हमरा छोइडक अहाँ कत जारहल छी !!
हमरा सँ की भेल एहन गल्ति जँ ,
अहाँ गेलौं हमर दिल तोइडक !
हम जिय नई सकब अहाँ बिन रहिक ,
किए गेलौं अहाँ हमरा अकेला छोइडक !!
किए हमरा अहाँ एतेक तड़पबैत छी ,
ई तड़प आब हमरा सहल नई जाइय !
हम अही पs आश लगौने छी , बस
अही पर आश लगौने छी

रविवार, 12 जुलाई 2015

कास हम आहांक दिवाना रैहतौं

मोन परैया आहांक नसीली अखि ,
                आहांक रसीली होंट,
                 आहांक ई मुस्कान ,
 कास हम आहांक दिवाना रैहतौं  !

याद आबैया आहांक कोयल सन आवाज,
                   आहांक हिरनी सन चाईल ,
                   आहांक पतली कमर ,
 कास हम आहांक दिवाना रैहतौं  !

नजर आबैया आहांक नाकक नथुनियां ,
                    आहांक पैरक पैजुनियां ,
                    आहांक हाथक चुरी ,
कास हम आहांक दिवाना रैहतौं

राइत राइत भइर आबैं छी अहीं सपना मे ,
नींद नहिं होइया आब हमरा अंगना में ,
आहॉ ई किया नहि बुझलियै जे
कास हम आहांक दिवाना रैहतौं

शनिवार, 11 जुलाई 2015

चुटकुल्ला

रिजल्ट निकलला के बाद लड़का�� अपेक्षा लड़की के रिजल्ट जाय्दा बढ़िया छल....

प्रभाकर चौधरी नबल सं : नबल हमरा तऽ होय या की हम बड़की पोखेर में डूईब कऽ मरी जय.....

नबल : धुरी जी महराज आहा हमरा कहे छी , हमर बाबु कहेत छथि जे रोउ बौउया आब तुहूँ सल्बार
सूट पहिरल कर तऽ तोरो देख कऽ पास कऽ देतो...

रावरी देवी रिक्शा में पैर बाहर कऽ-कऽ बैसल छल...

रिक्शा ड्राइवर - पैर अंदर कऽ लिय मैडम....

रावरी देवी- नै, रस्ता में नीतीश मिलत त ओकरा लात मरबाक या कैल हम भाल्पट्टी बजार जा रहल छलो तऽ ओ हमरा आंखी   मारी कऽ भागी गेल छल....

पं ताराकांत झा

पं ताराकांत झा
.
मैथिल मंच द्वारा सम्पूर्ण मैथिल के एक मंच पर आनय के प्रेरणास्रोत....हमरा सब सन हजारों मैथिल के मिथिला राज्य के लेल जागरूक करयवला महान विभूति छलथि स्व. पं. ताराकांत झा....
.
हुनक स्वप्न रहनि सम्पूर्ण मैथिल के एक मंच पर जोडि मिथिला राज्य के निर्माण लेल रूद्र आँदोलन कय क अपन अधिकार...अपन "मिथिला राज्य" हासिल करी |
.
आजुक दिन में "भीख नहि अधिकार चाही, हमरा मिथिला राज्य चाही" जे नारा अछि ओ हिनके देल छनि....
विडंबना अछि जे नारा सबगोटे के याद छनि मुदा हिनका लोक बिसरि रहल छनि मात्र एक साल में...

जय मिथिला....
जय जय मैथिल.....

तैयारी छै जयबा लेल

तैयारी छै जयबा लेल।

वयस मारलक चारिम थापड़। आन्हर आँखि कान भेल पाथर।
नहि सूनी नहि देखी आब। करू नीक बा खून - ख़राब।
नेता लूटू, खाउ, पकाऊ। जाति - जाति कें खूब लड़ाऊ।
धर्मक ठेकेदार कहाऊ। खूब अधर्म के पाठ पढाऊ।
बेचू बेटा‚ लिए दहेज़। खाउ कन्यागतक करेज।
पुत्रवधू के आगि लगाउ ।राम राम सत चिता सजाउ।
पूर्वज के करिऔ गुणगान। हम छी मैथिल‚ हम महान।
भाई- भाई मे करू लड़ाई। घर घराड़ी बाँटू आई।
दीन हीन सँ खेत लिखाउ। संस्कार के पाठ पढ़ाउ।
माय बाप के करिऔ भिन्न। स्वयं पलंग पर सुखक निन्न।
एक दोसर के खींचू टांग। आगाँ बढ़य ने अपन समांग।
नहि भेटय जँ सहजहि भांग। करू विदेशी दारूक मांग।
उपजत सहजहिं गप्पक खेती। खूब बघारू अप्पन सेठी।
बना लिऔ मिथिला के नर्क। "विजय" के की पड़तै फर्क।
सकारात्मक "विजय" भेल। तैयारी छै जयबा लेल।

मोन करैया गामे रैहतौं

मोन करैया गामे रैहतौं












पिपरक छांव आ आमक गाछी।
मोन परैया मिथिला क माटी।।
बैठल बांधि मचान रहितौं,
मोन करैया गांम रहितौं।
गांमक खेत पोखैर खऽता।
मोन परैया बच्चा बच्चा।।
बच्चा बनि ने सयान रहितौं,
मोन करैया गांम रहितौं।
शहरक शोर आ शहरक राती।
मोन परैया सांझक बाती।।
देखैत रातिक चांन रहितौं,
मोन करैया गांम रहितौं।
आपन दुःख कहु की यौ भैया।
भोंकल जेना हिया मे कोनो सुईया।।
हमहु अपन ने आन रहितौं,
मोन करैया गांम रहितौं।

शुक्रवार, 10 जुलाई 2015

कोबरक रुसनाई









मऽन पड़ल हमहूँ छलौं रुसल
कोहबर घर में भईर दिन घुसल
सभकियो  मनेलक
सभ कियो जगेलक
कोर्थू वाली  सरोहजनी देली  आवाज
ठाकुरजी की चाहीं, कथिलाऽ छैथ नाराज
शंकरलोहार सँ रसगुल्ला आयल, आशापुर सँ  पेरा
उज्जैना सँ जिलेबी आयल, बहेड़ा सँ केरा
हरिपट्टी सँ मामा एलाह
हाबीबुआर सँ गामा एलाह
बिसरा गेल  किया नाराज भेलौं
कोन बात पर मौनी महाराज भेलौं
भईर गाम खबर इ पसरल
कारी मिशर के जमाय किया रुसल
कनियाक कननाई देखल नञि गेल
रसगुल्ला मिठाई छोड़ल नञि गेल
भुखले भईर दिन हालत छल पस्त
मुदा शंकरलोहारक रसगुल्ला छल मस्त













C A PAWAN KUMAR JHA 

गुरुवार, 9 जुलाई 2015

मिथिला नगरी देश हमर

मिथिला नगरी देश हमर
मिथिला नगरी देश हमर अछि
सुन्दर आ विशाल यौ ।
अप्पन भाषा भेष हमर अछि
दुनियामे कमाल यौ ।।
मिथिला सन पावन धरती
आओर कोनो ने धाम यौ ।
एहन रिति–प्रीति कतऽ
पावए दोसर ठाम यौ ।।
मठ–मंदिरकऽ छवि कि कहु
देखति आँखि रसाएत यौ ।
भक्त जनक अछि मेला लागल
देखू साँझ परात यौ ।।
भक्ति भाव सँ मन भरल अछि
बच्चा आओर जुवान यौ ।
राम सीताकऽ सुमिरन कए
निकलैत अछि सब काम यौ ।।
धन्य अछि मैथिल, धन्य अछि
मिथिला नगर यौ ।
सीताकऽ पवित्रता सँ सिँचल अछि
सागर यौ ।।
धनुषक्षेत्र आ गंगासागरकऽ
शुद्ध जल कमाल यौ ।
अन्न बस्त्र सँ भरल नगरी
दुःखक कोन सवाल यौ ।।
महछि मैथिल, मिथिला अप्पन
देश अछि कमाल यौ ।
नै जायब हम काशी तिर्थ
अपने नगर विशाल यौ ।।











सी ए पवन कुमार झा 

कठजीब

कठजीब

मोन मे माया, भारी काया,
आहां सदखन ओझरायल छी।
कहै छी संगी किछ अधलाहे,
आहां बहुत भरमायल छी।
घोर अनथ॔ भ रहल अहिठाम,
आहां तैयौ ऊंधायल छी।
लुट खसोट बबाल मचल या,
आहां तैयौ अलसायल छी।
दुल्हा बनि आहां बिका रहल छी,
किछु पैसा क लोभ मे।
तैयौ आत्म सम्मान नय जागेऽ,
केहन आहां कठजीब छी।
मै बहिनक सम्मान लुटैया,
अहिठाम आंखिक आगु मे।
तैयौ बनि निरजीब रहैछी, 
नय बल आहां केर बाजु मे।
नय जागब त और धकियाअत,
गिरब गत॔ के सागर मे।
कहाऽ पवन सुनू यौ संगी,
नय आहां ऐना कठजीब बनु।
हार मांसक देह बनल या,
आऽबो आहां अधीर बनु।
भागि पराय मरैय सब पापी,
आहां एहेन हुंकार भरु।

 C A  PAWAN KUMAR JHA