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(एकमात्र संकल्‍प ध्‍यान मे-मिथिला राज्‍य हो संविधान मे) अप्पन गाम घरक ढंग ,अप्पन रहन - सहन के संग,अप्पन गाम-अप्पन बात में अपनेक सब के स्वागत अछि!अपन गाम -अपन घरअप्पन ज्ञान आ अप्पन संस्कारक सँग किछु कहबाक एकटा छोटछिन प्रयास अछि! हरेक मिथिला वाशी ईहा कहैत अछि... छी मैथिल मिथिला करे शंतान, जत्य रही ओ छी मिथिले धाम, याद रखु बस अप्पन गाम - अप्पन बात ,अप्पन मान " जय मैथिल जय मिथिला धाम" "स्वर्ग सं सुन्दर अपन गाम" E-mail: apangaamghar@gmail.com,madankumarthakur@gmail.com mo-9312460150

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शुक्रवार, 27 अक्टूबर 2017

छठि मैया आ डूबैत-उगैत सूरुजके पूजा महत्व


छठि मैया आ डूबैत-उगैत सूरुजके पूजा के महत्व 


छैठ परमेश्वरी के पूजा समस्त मिथिलावासी लेल अति प्राचिन पारंपरिक पूजन समारोह थीक। सामूहिक रूपमें बेसीतर महिला लेकिन गोटेक पुरुष व्रतधारी सभ संग अनेको प्रकारके पकवान व ऋतुफल संग संध्याकालीन सूर्यकेँ हाथ उठाय नमस्कार अर्पण करैत पुनः उषाकाल भोरहरबेसँ छठि परमेश्वरी (उगैत सूरज) केर दर्शन लेल व्रतधारी करजोड़ि ठरल जलमें ठाड़्ह इन्तजार करैत छथि। सूर्योदय उपरान्त पुनः विभिन्न पकवान व ऋतुफल भरल डालासँ हाथ उठाय नमस्कार अर्पण करैत छठि मैयाके व्रतकथा सुनैत ओंकरी आ ललका बद्धी - ठोप लगबैत व्रतधारी अपन समस्त परिजनकेँ भगवान्‌केर शुभाशीर्वाद हस्तान्तरित करैत छथि। यैह पूजाके छैठक संज्ञा देल जैछ। क्रमशः मिथिला व आसपासके क्षेत्रसँ शुरु भेल ई पूजा आब समस्त संस्कृतिमें प्रवेश पाबि रहल अछि। आस्थाक बहुत पैघ उदाहरण थीक ई पूजा आ समस्त मनोवाञ्छित फल प्रदान करनिहैर शक्तिशाली छठि मैयाक पूजा लेल के आस्थावान्‌ उद्यत नहि होइछ आइ! 

व्रती (साधक) अत्यन्त कठोर नियम एवं शुद्ध आचार-विचार संग निर्जला व्रत करैत छथि आ शरदकालमें ठरल जलमें ठाड़्ह भऽ व्रती सूर्यकेँ जल-फलसँ हाथ उठबैत विशेषार्घ्यसँ पूजा करैत छथि, पूजा काल सेहो विशेष रहैत छैक। सच पूछू तऽ छठि मैयाके पूजा-अर्चनाके विधान देखि हम सभ नहि सिर्फ प्रभावित रहैत छी, बल्कि एकदम कल जोड़ि शरणापन्न अवस्थामें सेहो रहैत छी जे कहीं एको रत्ती गड़बड़ नहि हो नहि तऽ कखनहु साधनामें विघ्न पड़ि जायत आ तेकर दुष्परिणाम व्रतधारी एवं समस्त परिजन पर पड़त। बहुत गंभीर भावनासँ पूर्णरूपेण शरणागत बनि एहि पूजा में साधना करबाक महत्त्व छैक। लेकिन एतेक गंभीरताके रहस्य कि? कि बात छैक जे व्रत एतेक कठोर करय पड़ैत छैक? डूबैत सूरजके पूजा किऐक? आउ प्रयास करैत छी जे एहि समस्त रहस्य पर सँ पर्दा उठाबी। कम से कम आजुक नवतुरिया (हमरा समेत) लेल ई एक शोधक विषय अछि आ एहिमें सावधानीपूर्वक हम सभ मनन करैत आगू देखी!

सभसँ पहिने छठि मैया के थिकी? वा छठि मैया सूरजरूपमें कोना? 

बहुत रोचक प्रसंग कहल गेल छैक - कहियो नारद ऋषि व्यामोहित (नारी रूपमें आकर्षित) भेल छलाह। भगवान्‌ विष्णुकेँ मायासँ नारदकेँ एहि तरहक अवस्थाक प्राप्ति भेल छलन्हि आ कहल गेल छैक जे ई ताहि समय भेल छलन्हि जखन नारदजी कोनो कुण्ड (सरोवर)में संध्या करबाक लेल प्रवेश केने छलाह आ ताहि समय भगवान्‌के मायास्वरूपा एक नारी ओहि सरोवरमें अपन अंग-प्रत्यंग प्राच्छालन करैत रहलीह आ व्यामोहित नारदजी अपन संध्याके (सूर्य एवं गायत्री उपासना) बिसरि बस ओहि नारीके माया-दर्शनमें लागि गेल छलाह। हिनकर भगवान्‌के मायामें एहि तरहें व्यामोहित देखि सूर्य के सेहो हँसी लागि गेल छलन्हि जाहि कारणे सूर्यास्त सँ किछु समय उपरान्त धरि हुनक अस्त नहि भेलन्हि आ नारदके व्यामोहन छूटिते सूर्यक उपस्थिति देखि सभ बात बूझय में आबि गेलन्हि, तखनहि नारद सूर्यकेँ नारीरूप प्राप्त करबाक शाप देलाह जे बादमें प्रभुजीके मध्यस्थ कयलापर विमोचन करैत केवल एक दिवस लेल कायम राखल गेल, कार्तिक मासक षष्ठी (छठम) तिथिकेँ जेकर समय तेसर संध्या (सूर्यास्तसँ एक पहर पहिले) समय सँ अगिला संध्या याने भोरक सूर्योदय काल के एक पहर उपरान्त धरि नारी स्वरूपमें रहबाक बात तय भेल जिनका भगवान्‌ विष्णु छठि मैयाक शक्तिस्वरूपा नाम व वर प्रदान कयलन्हि। मिथिलामें यैह देवीक उपासना लेल पूर्वकालमें योगी-ऋषि द्वारा प्रजाकेँ उपदेश कैल गेल आ आदिकालसँ हिनक उपासनाक एक निश्चित विधान अनुरूप छठि मैयाक आराधना चलैत आबि रहल अछि। 

छठि मैयाक पूजाक महत्त्व कि?

सूर्यक परिचय सर्वविदित अछि। बिना सूर्य सभ सून्न! विज्ञान - ज्ञान - मान - आन - शान - सभ सूर्यके चारू कात, केन्द्रमें केवल सूर्य! नवग्रह, नक्षत्र, भूमण्डल, पंचतत्त्व, उर्जा, पोषण... हर बात के जैड़में सूर्य! सूर्यक उपासना संसार में आस्तिक-नास्तिक सभ करैछ। मिथिलामें जतय पुरुषवर्ग लेल संध्योपासनामें सूर्यकेँ जलक अर्घ्यसँ नित्य पूजा करैक विधान अछि, तहिना सूर्य नमस्कार समान प्रखर योग-साधना, नारीवर्गलेल सेहो नित्य तुलसी एवं सूर्यकेँ जलार्घ्य देबाक परंपरा रहल अछि। सूर्यकेँ भगवान्‌ मानल जायमें किनको कोनो आपत्ति कहियो नहि रहल अछि। नित्य समयसँ उदय, समयसँ अस्त, दिन व रातिक निर्धारण, अग्नि-वायु-वर्षा-मौसम आ समस्त अवयव जे जीवन लेल आवश्यक अछि तेकर दाता - चक्रवर्ती राजा के संज्ञा देल जाइछ सूर्यकेँ। ओ चाहे मनुष्यलोक हो वा आदित्य-वसु वा कोनो अन्य लोक; सभक राजा सूर्य! प्रत्यक्ष देवता के अधिपति सूर्य! साक्षात्‌ नारायण के - त्रिलोकस्वामीके प्रतिनिधित्व करनिहार सूर्य! हिनकर पूजा तऽ लोक नित्य करैत अछि। तखन यदि एक दिन (कार्तिक षष्ठी) हिनक विशेष रूप छठि मैया साक्षात्‌ शक्तिके भंडारिणी हम मानवलोककेर सोझां रहती तऽ के कृपापात्र बनय लेल नहि चाहत! अत: छठि मैयाके आराधना समस्त सखा-परिजन-राष्ट्र लेल कल्याणकारक होइछ। 

सूर्यकेँ प्रतिदिन प्रातः काल अर्ध्य देलासँ आ प्रणाम कएला सँ आयु, विद्या, यश आ बल के वृद्धि होइत अछि ।

आदित्यस्य नमस्कारं ये कुर्वन्ति दिने-दिने ।

चत्वारि तस्य वर्धन्ते आयुर्विद्या यशोबलम्‌ ॥


छठि मैयाके व्रतकेर नियम कि?




एहि व्रतमें तीन दिनक कठोर उपवास कैल जाइत अछि। चतुर्थी दिन पवित्र पोखैर वा नदीक जलसँ स्नान करैत एक बेर खयबाक परंपरा अछि जेकरा नहाय-खायके संज्ञा देल जाइछ। पञ्चमी दिन उपवास करैत सन्ध्याकाल लवणरहित गुड़सहित खीरसँ खरना कैल जैछ। षष्ठी दिन निर्जल व्रत राखि सूर्यास्त सँ पहिले एवं कतेको जगह सूर्यास्तक बाद पोखरि वा नदीके पवित्र घाट पर जलमें ठाड़्ह भऽ पकवान एवं फलादिक डालासँ अस्त होइत सूर्य जे आब शक्ति-स्वरूपा छठि मैयाक रूपमें परिणत भऽ गेल रहैत छथि तिनका प्रणाम कैल जाइछ, समस्त बन्धु-बान्धवके कुशलता एवं कल्याण लेल प्रार्थना कैल जाइछ, मनोवाञ्छित फल व व्रतक निष्ठापूर्वक सफलता एवं चरणमें अटूट भक्ति लेल प्रार्थना कैल जाइछ। पुनः उदयकालिक सूर्य याने छठि मैयाकेँ विभिन्न प्रकारक पकवान एवं ऋतुफलके डाला आदिसँ हाथ उठाय नमस्कार अर्पित करैथ व्रतक कथा श्रवण कैल जाइछ। 


छठि मैयाक व्रत कथा

एक छलाह राजा प्रियव्रत जिनक पत्नीक नाम मालिनी छलन्हि। राजा रानी नि:संतान होयबाक कारणे बहुत दु:खी छलाह। महर्षि कश्यप द्वारा पुत्रेष्ठि यज्ञ करौलन्हि, फलस्वरूप मालिनी गर्भवती भेलीह मुदा नौ महीना बाद जखन ओ बालक के जन्म देलीह तऽ ओ मृत अवस्थामें छल। एहिसँ राजा प्रियव्रत बहुत दुःखी भऽ आत्महत्या लेल उद्यत भेलाह। तखनहि एक देवी प्रकट होइत अपन परिचय षष्ठी देवीके रूपमें दैत पुत्र वरदान देनिहैर कहैत हुनका सँ अपन पूजा-अर्चनामें लीन होयबाक लेल उपदेश केलीह। राजा देवीकेर आज्ञा मानि कार्तिक शुक्ल षष्टी तिथि केँ देवी षष्टीकेर पूजा कयलन्हि जाहिसँ हुनका पुत्र-धनके प्राप्ति भेलन्हि। ताहि दिन सँ छठिक व्रतक अनुष्ठान चलि रहल अछि।

एक दोसर मान्यता अनुसार भगवान श्रीरामचन्द्र जी जखन अयोध्या वापसी कयलाह तखन राजतिलक उपरान्त सियाजी संग कार्तिक शुक्ल षष्ठी तिथिकेँ सूर्य देवताकेर व्रतोपासना कयलन्हि आ ओहि दिनसँ जनसामान्य में ई पावैन मान्य बनि गेल और दिनानुदिन एहि पावैनक महत्त्व बढैत चलि गेल जाहिमें पूर्ण आस्था एवं भक्तिक संग ई पावैन मनाओल जाय लागल।



 प्रवीण नारायण चौधरी

 के कलमसँ --









शनिवार, 14 जनवरी 2017

तिला संक्राइत - मिथिला लेल तिल-चाउर बहब

प्रवीण चौधरी ‘किशोर-


तिला संक्राइत - मिथिला लेल तिल-चाउर बहब!

मकर संक्रान्तिके शुभ अवसरपर समस्त जनमानस लेल शुभकामना!
      
मकर संक्रान्ति के त्योहार मोक्ष लेल प्रतिबद्धता हेतु होइछ - निःस्वार्थ सेवा - निष्काम कर्म करैत मुक्ति पाबैक लेल शपथ-ग्रहण - संकल्प हेतु एहि पावनिक महत्त्व छैक।

जेना माय के हाथ तिल-चाउर खाइत हम सभ मैथिल माय के ई पुछला पर जे ‘तिल-चाउर बहमें ने..?’ हम सभ इ कहैत गछैत छी जे ‘हाँ माय! बहबौ!’ आ इ क्रम तीन बेर दोहराबैत छी - एकर बहुत पैघ महत्त्व होइछ। पृथ्वीपर तिनू दृश्य स्वरूप जल, थल ओ नभ जे प्रत्यक्ष अछि, एहि तिनूमें हम सभ अपन माय के वचन दैत तिल-चाउर ग्रहण करैत छी। एक-एक तिल आ एक-एक चाउरके कणमें हमरा लोकनिक इ शपथ-प्रण युगों-युगोंतक हमरा लोकनिक आत्म-रूपके संग रहैछ। बेसी जीवन आ बेसी दार्शनिक बात छोड़ू... कम से कम एहि जीवनमें माय के समक्ष जे प्रण लेलहुँ तेकरा कम से कम पूरा करी, पूरा करय लेल जरुर प्रतिबद्ध बनी।

आउ, एहि शुभ दिनक किछु आध्यात्मिक महत्त्वपर मनन करी:  
१. मकर संक्रान्ति मानव जीवन के असल उद्देश्य के पुनर्स्मरण हेतु होइछ जाहि सँ मानव लेल समुचित मार्गपर अग्रसर होयबाक प्रेरणा के पुनर्संचरण हेतु सेहो होइछ। धर्म, अर्थ, काम आ मोक्ष के पुरुषार्थ कहल गेल अछि - जे जीवन केर आधारभूत मौलिक माँग या आवश्यकता केर द्योतक होइछ। एहि सभमें मोक्ष या मुक्ति सर्वोच्च पुरुषार्थ होइछ। श्रीकृष्ण गीताके ८.२४ आ ८.२५ में दू मुख्य मार्गकेर चर्चा केने छथि - उत्तरायण मार्ग आ दक्षिणायण मार्ग। एहि दू मार्गकेँ क्रमशः ईशकेर मार्ग आ पितरकेर मार्ग सेहो कहल गेल छैक। अन्य नाम अर्चिरादि मार्ग आ धुम्रादि मार्ग अर्थात्‌ प्रकाशगामिनी आ अंधकारगामिनी मार्ग क्रमशः सेहो कहल जैछ।
    उत्तरायण मार्ग ओहि आत्माके गमन लेल कहल गेल छैक जे निष्काम कर्म करैत अपन शरीर केर उपयोग कयने रहैछ। तहिना जे काम्य-कर्म में अपन शरीरकेँ लगबैछ, ताहि आत्माकेँ शरीर परित्याग उपरान्त दक्षिणायण मार्ग सऽ गमनकेर माहात्म्य छैक। उत्तरायण मार्गमे गमन केँ मतलब ईश्वर-परमात्मामे विलीन होयब, जखन कि दक्षिणायणमे गमन केँ मतलब कर्म-बन्धनकेर चलते पुनः जीवनमे प्रविष्टि सँ होइछ। मकर संक्रान्ति एहि मुक्तिक मार्ग जे श्रीकृष्ण द्वारा गीतामे व्याख्या कैल गेल अछि ताहि केँ पुनर्स्मरण कराबय लेल होइछ।  
२. सूर्यक उत्तरगामी होयब शुरु करयवाला दिन - जेकरा उत्तरायण कहल जैछ। अन्य लोकक लेल ६ महीना उत्तरायण आ बाकीक ६ महीना दक्षिणायण कहैछ।
३. पुराण के मुताबिक, एहि दिन सूर्य अपन पुत्र शनिदेवकेर घर प्रवेश करैत छथि, जे मकर राशिक स्वामी छथि। चूँकि पिता आ पुत्र केँ अन्य समय ढंग सऽ भेंटघांट नहि भऽ सकल रहैत छन्हि, तैं पिता सूर्य औझका दिन विशेष रूप सऽ अपन पुत्र शनिदेव सऽ भेटय लेल निर्धारित केने छथि। ओ वास्तवमें एक मास के लेल पुत्र शनिदेवके गृह में प्रवेश करैत छथि। अतः यैह दिन विशेष रूप सऽ स्मरण कैल जैछ पिता-पुत्रके मिलन लेल।
    माहात्म्य: सूर्यदेव कर्म केर परिचायक आधिदेवता छथि, तऽ शनिदेव कर्मफल केर परिचायक आधिदेवता! मकर संक्रान्ति एहेन दिवसकेर रूपमे होइछ जहिया हम सभ निर्णय करैत छी हमरा सभकेँ कोन मार्ग पर चलबाक अछि - सूर्य-देव द्वारा प्रतिनिधित्व कैल निष्काम-कर्म (प्रकाशगामिनी) या फेर शनि-देव द्वारा प्रतिनिधित्व कैल काम्य-कर्म (अन्धकारगामिनी)।

४. यैह दिन भगवान्‌ विष्णु सदाक लेल असुरक बढल त्रासकेँ ओकरा सभकेँ मारिकय खत्म कयलाह आ सभक मुण्डकेँ मंदार पर्वतमे गाड़ि देलाह।
    माहात्म्य: नकारात्मकताक अन्त हेतु एहि दिनकेर विशेष महत्त्व होइछ आ तदोपरान्त सकारात्मकताक संग जीवनक प्रतिवर्ष एक नव शुरुआत देबाक दिवस थीक मकर संक्रान्ति।

५. महाराज भागिरथ यैह दिन अत्यन्त कठोर तपसँ गंगाजीकेँ पृथ्वीपर अवतरित करैत अपन पुरखा ६०,००० महाराज सगरक पुत्र जिनका कपिल मुनिक आश्रमपर श्रापक चलतबे भस्म कय देल गेल छलन्हि - तिनकर शापविमोचन एवं मोक्ष हेतु मकर-संक्रान्तिक दिन गंगाजल सँ आजुक गंगासागर जतय अछि ताहि ठामपर तर्पण केने छलाह आ हिनक तपस्याकेँ फलित कयलाक बाद गंगाजी सागरमें समाहित भऽ गेल छलीह। गंगाजी पाताललोक तक भागिरथकेर तपस्याक फलस्वरूप हुनकर पुरुखाकेँ तृप्तिक लेल जाइत अन्ततः सागरमें समाहित भेल छलीह। आइयो एहि जगह गंगासागरमे आजुक दिन विशाल मेला लगैछ, जाहिठाम गंगाजी सागरमे विलीन होइत छथि, हजारों हिन्दू पवित्र सागरमे डुबकी लगाबैछ आ अपन पुरुखाकेँ तृप्ति-मुक्ति हेतु तर्पण करैछ।
       माहात्म्य: भागिरथ केर प्रयास आध्यात्मिक संघर्षक द्योतक अछि। गंगा ज्ञानक धाराक द्योतक छथि। नहि ज्ञानेन सदृशम्‌ पवित्रमिह उद्यते! पुरुखाक पीढी-दर-पीढी मुक्ति पबैत छथि जखन एक व्यक्ति अथक प्रयास, आध्यात्मिक चेतना एवं तपस्या सऽ ज्ञान प्राप्त करैछ।

६. आजुक दिनकेर एक आरो अत्यन्त महत्त्वपूर्ण सन्दर्भ भेटैछ जखन महाभारतक सुप्रतिष्ठित भीष्म पितामह एहि दिवस अपन इच्छा-मृत्युक वरदान पूरा करय लेल इच्छा व्यक्त कयलाह। हुनक पिता हुनका इच्छामृत्युकेर वरदान देने छलखिन, ओ एहि पुण्य दिवस तक स्वयंकेँ तीरकेर शय्यापर रखलाह आ मकर संक्रान्तिकेँ आगमनपर अपन पार्थिव शरीर छोड़ि स्वर्गारोहण कयलाह। कहल जैछ जे उत्तरायणमें शरीर त्याग करैछ ओ पुनर्जन्मकेर बंधन सँ मुक्ति पबैछ। अतः आजुक दिन विशेष मानल जैछ अन्य दुनिया-गमन करबाक लेल।

माहात्म्य: मृत्यु उत्तरायणके राह अंगीकार कयलापर होयबाक चाही - मुक्ति मार्गमें। ओहि सऽ पहिले नहि! आत्माकेर स्वतंत्रता लेल ई जरुरी अछि। एहिठाम उत्तरायणक तात्पर्य अन्तर्ज्योतिक जागरण सऽ अछि - प्रकाशगामिनी होयबाक सऽ अछि।

एहि शुभ दिनक अनेको तरहक आन-आन माहात्म्य सब अछि आ एहि लेल विशेष रुचि राखनिहार लेल स्वाध्याय समान महत्त्वपूर्ण साधन सेहो यैह संसारमे एखनहु उपलब्ध अछि। केवल शुभकामना - लाइ-मुरही-चुल्लौड़-तिलवा आ तदोपरान्त खिच्चैड़-चोखा-घी-अचाड़-पापड़-दही-तरुआ-बघरुआक भौतिकवादी दुनिया मे डुबकी लगबैत रहब तऽ मिथिलाक महत्ता अवश्य दिन-प्रति-दिन घटैत जायत आ पुनः दोसर मदनोपाध्याय या लक्ष्मीनाथ गोसाईंक पदार्पण संभव नहि भऽ सकत।

अतः हे मैथिल, आजुक एहि पुण्य तिथिपर किऐक नहि हम सभ एक संकल्प ली जे मिथिलाकेँ उत्तरायणमे प्रवेश हेतु हम सभ एकजूट बनब आ अवश्य निष्काम कर्म सऽ मिथिला-मायकेर तिल-चाउरकेँ भार-वहन करबे टा करब। जेना श्री कृष्ण अर्जुन संग कौरवकेर अहं समाप्त करय लेल धर्मयुद्ध वास्ते प्रेरणा देलाह, तहिना मिथिलाक सुन्दर इतिहास, साहित्य, संगीत, शैली, भाषा, विद्वता एवं हर ओ सकारात्मकता जेकरा बदौलत मिथिला कहियो आनो-आनो लेल शिक्षाक गढ छल तेकरा विपन्न होइ सऽ जोगाबी। जीवन भेटल अछि, खेबो करू... मुदा खेलाके बाद बहबो करियौक। मातृभूमि आ मातृभाषाक लेल रक्षक बनू। मिथिला मायकेर तरफ सँ तिल-चाउर हमहुँ खा रहल छी, जा धरि जीवन रहत ता धरि बहब, फेरो जन्म लेबय पड़त सेहो मंजूर - आ फेरो बहब तऽ मिथिलाक लेल बही यैह शुभकामनाक संग, मकर संक्रान्ति सँग जे नव वर्षक शुरुआत आइ भेल अछि ताहि अवसर पर फेर समस्त मैथिल एवं मानव समुदाय लेल मंगलकेर कामना करैत छी।
जय मैथिली! जय मिथिला!

ॐ तत्सत्‌!




मंगलवार, 10 जनवरी 2017

दहेज मुक्त मिथिलाक अन्तर्राष्ट्रीय संयोजक संग साक्षात्कारः सृष्टि दैनिक




हेज मुक्त मिथिला - नेपाल तथा भारत मे संयुक्त रूप सँ कार्यरत मिथिला समाज मे दहेज प्रथाक विरोध मे अभियानरूप मे चलयवला संस्थाक अन्तर्राष्ट्रीय संयोजक प्रवीण नारायण चौधरी संग साक्षात्कारः

१. अपने सभक संस्था समाज सँ दहेज उन्मूलनक लेल कोन ढंग सँ काज कय रहल अछि?
उ. दहेज मुक्त मिथिला मूल रूप सँ सोसल मीडिया सँ आरम्भ भेल एकटा क्रान्ति थीक। एकर लक्ष्य छैक जे वर्तमान शिक्षित युवा पीढी केँ एहि प्रथाक दोष पर बेसी सँ बेसी चर्चा करबाक लेल उकसायल जाय - आर एकर नकारात्मक स्वरूप सँ दूरी बनेबाक लेल प्रेरित कैल जाय। हलांकि आब ई अभियान सोसल मीडिया सँ यथार्थ धरातलपर सेहो उतैर चुकल अछि ठाम-ठामपर। भारतक मुम्बई, दिल्ली, गुआहाटी, मधुबनी, दरभंगा, सहरसा, पटना, जमशेदपुर, बनारस, कानपूर, राँची सहित अनेको ठाम तथा नेपाल मे विराटनगर, राजविराज, लहान, जनकपुर, बीरगंज, काठमांडु, इनरुवा, भारदह आदि स्थान मे एहि अभियान सँ जुड़ल लोकसब जमीनपर सेहो एकरा उतारलैन अछि। मुख्य रूप सँ "माँगरूपी दहेज केर प्रतिकार" हेतु 'आत्मसंकल्प' लेब एहि अभियानक कार्यरूप होएछ। समाजक हरेक उमेर केर लोक सँ माँगरूपी दहेज नहि लेब नहि देब, न अपन धिया-पुता मे लेब या देब आ नहिये एहेन माँगिकय लेल गेल दहेज केर विवाहोत्सव मे सहभागी बनब - ई संकल्प लियाओल जाएछ। तहिना जे कियो बिना मांगरूपी दहेज केर विवाह करैथ हुनकर यशगान करब, समाज मे हुनकर इज्जत-प्रतिष्ठा बढेबाक लेल समारोहपूर्वक सम्मान देबाक काज सेहो दहेज मुक्त मिथिला द्वारा कैल जाएछ। एकर अतिरिक्त मैथिली भाषा व मिथिलाक धरोहर संरक्षणार्थ आम जागृति करैत अप्रत्यक्ष रूप सँ सेहो दहेज प्रथाक कूरीतिपर प्रकाश दैत पुनः आत्मसंकल्प लेबाक प्रेरणा देल जेबाक काज एहि संस्था-अभियान द्वारा कैल जाएछ।
२. दहेज केँ कोन ढंग सँ परिभाषित करैत अछि?
उ. दहेजक परिभाषा विवाह पूर्व माँग करब, शर्त राखब, जबरदस्ती करब, बेटीवलाक आर्थिक क्षमता सँ बाहर जाय कोनो तरहक विध-व्यवहार पूरा करबाक धौंस देब, आदि केँ मानैत छी। ई सब बात एक्के टा 'माँग' जे वरपक्ष कन्यापक्षपर बलजोरी थोपैत अछि, तेकरे दहेज कहल जाएत छैक। संवैधानिक भाषा मे सेहो दहेजक परिभाषा यैह छैक। बाकी स्वेच्छा सँ कन्यापक्ष अपन कन्याक विवाह लेल केहेन घर-वर करत आर ताहि लेल कतेक खर्च करत, भले नगदे अपन जमाय-बेटी केँ कियैक नहि गानत, कतबो साँठ आ भार - उपहार आदि कियैक नहि साँठत, ई सब दहेज केर रूप मे हम सब नहि गानैत छी। तैँ, कियो टकाक बलपर बेमेल विवाह कराबय, ओतय बेटीवलाक सेहो दोख देखैत छी। लेकिन नीति सँ बान्हल जतय-कतहु स्वेच्छा सँ कोनो तरहक लेन-देन भेल अछि तेकरा हम सब दहेज एकदम नहि मानैत छी आर समाजक नीति-नियतिपर छोड़ि मात्र माँगरूपी दहेजक प्रतिकार लेल जनजागरण हमरा सभक अभियान अछि।
३. एहि संस्थाक सांगठनिक स्वरूप कि छैक?
उ. ओना तऽ आर संस्था जेकाँ ईहो भारत व नेपाल जतय-जतय मैथिल (मिथिलावासी) समाज रहैत अछि ओहि सब ठाम काज करबाक लेल दिल्ली आ राजविराज दुइ ठाम पंजीकृत रहैत कार्यकारिणी समितिक संग कार्यरत अछि, लेकिन सोसल मीडिया सँ जन्म भेल एहि संस्थाक संगठन सँ बेसी 'अभियान'रूप मे स्थापित होयबाक बात बेसी महत्वपूर्ण छैक। अहाँ कतहु रहू, दहेज मुक्त मिथिलाक अभियान संग जुड़िकय एकर नारा केँ अपनेबाक लेल समाजक हरेक वर्ग, जाति, धर्म, समुदायक लोक केँ प्रेरित कय सकैत छी। एहि वास्ते अहाँ स्वायत्तशासी संगठन अपन क्षेत्र लेल स्वयं गठन कय सकैत छी। सदस्यता बाँटि सकैत छी। समाज मे भऽ रहल दहेज मुक्त विवाह केँ सम्मान देबाक अछि। दहेजक माँग भेल शिकायत भेटलापर माँग कएनिहार पक्ष सँ वार्ता करैत आपस मे बुझारत करा सकैत छी। जरुरत पड़ल तऽ पीड़ित पक्ष लेल न्यायिक प्रक्रिया सेहो चला सकैत छी। लेकिन मुख्य रूप सँ माँगरूपी दहेज विरुद्ध आत्मसंकल्प लियेबाक काज करैत अपन समाजक लोक केँ एहि कूप्रथा सँ दूर करू, दहेज मुक्त मिथिलाक यैह टा आह्वान अछि। फिलहाल, पहिने कहल हरेक स्थान पर एकटा संयोजक, राष्ट्रीय स्तर पर एकटा कार्यकारिणी द्वारा संस्थाक समस्त सरोकार रेख-देख कैल जाएछ।
४. जाहि तरहें समाज मे दहेज कोढी समान खतरनाक चर्मरोग जेकाँ पसैर गेल छैक, तेहेन स्थिति मे एकर अन्तिम निदान संभव बुझा रहल अछि? जँ हँ त कोना?
उ. संसार मे कोनो प्रथा पहिने समाज केँ सही दिशा मे बढेबाक लेल आरम्भ होएत छैक। दहेज प्रथा सेहो बेटीधन प्रति पैतृक संपत्ति सँ प्राकृतिक हक देबाक जेकाँ विधान सँ व्यवहृत होएत देखाएत अछि। माय-बापक अर्जित संपत्ति सँ बेटीक हक केँ मूर्त-सम्पत्तिक रूप मे नहि दय ओकरा दहेजरूपी अमूर्त सम्पत्ति मे देबाक सोच पूर्व मे प्रारंभ कैल गेल जेना हम मानैत छी। शास्त्र सेहो स्त्रीधन केर चर्चा करैत अछि, हलाँकि ओ एतेक न्युन आर गुप्त होएत अछि जे आँटाक लोइया मे नुकाकय देल जेबाक विधान कहल गेल अछि आर एहि पर मात्र कन्याक अधिकार होयबाक बात सेहो उल्लेख अछि। लेकिन कालान्तर मे भौतिकतावादक बढैत असैर सँ आइ ई कोढी समान रोग जेकाँ पसैर गेल अछि। जे दहेज आशीर्वादक रूप मे केकरो बेटा केँ ओकर सासूर सँ भेटैत छलय, जेकरा लोक-समाज केँ हकारिकय देखेबाक चलन-चलती छलय, से आइ एहेन कुरूप अवस्था मे चलि गेल अछि जे कतेको बेटीक बाप केँ साकिम बना देलक, कतेको बेटी स्वयं दहेजक बेदीपर बलि चढा देल गेल, कतेको बेटीक जन्म सँ पहिनहि ओकर भ्रूणहत्या कय दैत अछि, जाहि नारीक नारित्व सँ मानव समाजक सृष्टि चलैत अछि तेकरे आइ एहि दुर्दशा मे राखल जा रहल अछि से हम सब देखि रहल छी। तखन एकर निदान सेहो क्रमशः संभव होएत हम देखि रहल छी। स्वेच्छाचारिताक विकास सँ मात्र ई कूप्रथाक अन्त हम देखि रहल छी। एहेन परिवार मे कथमपि कुटमैती नहि कैल जाय जतय माँगरूपी दहेजक व्यवहार लेल कन्यापक्षपर दबाव देल जाय। कन्यापक्ष केँ सेहो यदि अपन सम्पत्तिक दंभ सँ कोनो वर केँ पैसे-दहेजे बले बियैह देबाक मनसा देखी तऽ ओहेन कन्याक संग कदापि अपन बेटाक कुटमैती तय नहि करी। स्वयं शुद्ध रही, मात्र शुद्ध लोक संग कुटमैती तय करबाक मनोबल संग दुइ आत्मा केँ परिणय सूत्र मे बन्हबाक कठोर संकल्प लेब आवश्यक अछि। दहेज लोभी केँ वा दहेज दंभी केँ दरबज्जा पर प्रवेश तक निषेध करब आवश्यक अछि। स्वेच्छा सँ न्युनतम खर्च मे बिना कोनो बाह्याडंबर विवाह करबाक प्रचलन केँ प्रवर्धन सँ एहि कूप्रथाक अन्त होयत। समाज मे दहेज लेनिहारक प्रशंसा त कोनो हाल मे नहि हो, ओकरा जतेक दूसल-फटकारल जाय ओतेक कम हो, तखनहि लोक केँ एहि कूप्रथा सँ मोहभंग होयत।
दहेज मुक्त मिथिला हरेक समाज सँ अपील करैत अछि जे बेसी किछु नहि, मात्र एकटा निगरानी समिति बनाबी आर अपन समाज मे भऽ रहल कुटमैतीक तथ्यांक राखी। दहेज मुक्त विवाह कएनिहार केँ सार्वजनिक सभा द्वारा यशगान करी, सम्मान प्रदान करी। एकर सकारात्मक प्रभाव दूरगामी अछि आर कूप्रथा सँ निजात दियाबयवला अछि।
५. नवतुरिया मे दहेजक लेन-देन प्रति केहेन मानसिकता देखैत छियैक?
उ. नवतुरिया मे दहेज प्रतिष्ठाक विषय नहि बनि एकटा कूप्रथाक रूप मे प्रचलित भऽ रहल अछि, ई उत्साहवर्धक अछि। दहेज मुक्त मिथिालक लक्ष्य मे सेहो मात्र नवतुरिया सँ बेसी चर्चा चलेबाक आर संकल्प लियेबाक मूल बात निहित अछि। आइ बेटा आ बेटी केँ लोक समान रूप सँ शिक्षा दय रहलैक अछि। तथापि किछु एहेन वर्ग-समुदाय एखनहु छैक जे बेटी केँ मात्र घरायसी काजक वस्तु बुझि ओकरा शिक्षा सँ वंचित रखैत छैक। ओहि ठाम समस्या एखनहु विकराल छैक।
६. दहेज कूप्रथा उन्मुलन हेतु समाजक अगुआ सब केँ कोन ढंग सँ आगाँ एबाक आवश्यकता छैक?
उ. समाज सब सँ पहिने दहेजक प्रदर्शन देखब बन्द करय। दहेज मे आयल साँठ आ उपहार सब नितान्त व्यक्तिगत थिकैक से बुझि ओहि मे अपना लेल आनन्द आ भोज-भातक लोभ सँ दूर करय। बरियातीक आमंत्रण भेटलोपर कन्यापक्षक बाध्यता आ सीमितता केँ कदर करय। खस्सी केँ जान जाय आ खबैया केँ स्वादे नहि - ई कहबी अनुरूप अपन मानवता केँ बेइज्जती अपने सँ नहि करय।
समाजक अगुआ केँ टोल-समिति आ गाम-समिति केर तर्ज पर वैवाहिक सम्बन्ध कायम होयबाक निगरानी समिति बनेनाय अत्यन्त आवश्यक अछि। समाज जँ चाहत तऽ ओ अपना केँ दहेज मुक्त कय सकैत अछि। पहिने सेहो जे समाजक बात केर अवहेलना करय ओकरा समाज बारि दैत छलय। समाजक दंड विधान सब तरहक मानवीय अपराध केँ अन्त करबाक सर्वसुलभ उपाय होएछ। ई बात समाजक अगुआ बुझय। आइ ई कूप्रथा मात्र आ मात्र समाज केर उल्टा दिशा मे नियम चलेबाक दुष्परिणाम थीक, आर एहि गलती केँ सुधार करय लेल समाजहि केँ आगू आबय पड़त।
७. संस्थाक उद्देश्य प्राप्ति तथा आरो व्यापक बनेबाक लेल आगामी कार्ययोजना कि सब अछि?
उ. युग अनुरूप अपन व्यक्तिगत आवश्यकताक पूर्ति करबाक प्राथमिकता केँ ध्यान दैत बचल समय मात्र हम सब समाज लेल खर्च करैत छी। तथापि, समाज लेल चिन्तन करब हमरा लोकनिक फर्ज थीक आर ताहि सँ ई अभियान संभव भऽ सकल अछि। आगामी समय मे - सामूहिक विवाह करायब, वैवाहिक परिचय सम्मेलन करायब, संगठन केँ मूर्तरूप मे आरो विस्तार देब, गाम-गाम मे निगरानी समिति बनबायब मुख्य रूप सँ ऊपर अछि। बाकी साल भैर मे पैघ-पैघ समारोह, गोष्ठी, सेमिनार, आदि मे जेना दहेज मुक्त मिथिला निर्माणार्थ चर्चा होएत अछि से यथावत् रहत।
अन्त मे एकटा अनुरोध करब, जतेक लोक हमर ई विचार पढलनि अछि ओ तऽ संकल्पित निश्चिते टा होएथ - संगहि जतेक दूर धरि संभव होएन, कृपया एहि अभियान केँ स्वेच्छाचारिताक धर्म अनुरूप प्रसार करैथ। कन्यादान बड पैघ यज्ञ थीक, एहि मे जतेक बेसी संभव होएन ततेक परोपकार करैत अपन जीवनक सार्थकता केँ बढबैथ। आभारी छी अहाँक जे ई अवसर देलहुँ। धन्यवाद।

प्रवीण नारायण चौधरी

सोमवार, 13 अप्रैल 2015

अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली कवि सम्मेलन-२०१५ भव्यतापूर्वक संपन्न

अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली कवि सम्मेलन-२०१५ भव्यतापूर्वक संपन्न

विराटनगर मे आयोजित एक दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय कवि सम्मेलन - २०१५ समारोहपूर्वक संपन्न कैल गेल। एहि सम्मेलन मे मैथिली भाषा ओ मिथिला संस्कृतिक कवि एवं अभियानी लोकनीक ४ पीढीक प्रत्यक्ष सहभागिता देखल गेल। खुल्ला आमंत्रण मे आयोजित एहि कार्यक्रम मे भारत ओ नेपाल सँ करीब १३० मैथिली कवि तथा ५० केर आसपास अभियानी लोकनिक उपस्थिति छल। नेपालक काठमांडु, रौतहट, जनकपुर, लहान, राजविराज, विराटनगर आदि सँ अनेको कवि लोकनिक सहभागिता रहल, तहिना भारतक सहरसा, दरभंगा, मधुबनी, राँची, पुर्णिया, दिल्ली, कानपुर, कोलकाता, अररिया सँ सहभागी भेला। कार्यक्रमक सीधा प्रसारण लाइव स्ट्रीमिंग द्वारा यूट्युब, स्काइप, जूम तथा मैथिली जिन्दाबाद केर वेब पेज सँ कैल गेल छल। अन्य देश यथा सउदी अरब, कतार आ भारतक विभिन्न भाग सँ स्रष्टा लोकनिक अनलाइन प्रस्तुति सेहो कैल गेल छल। एहि कार्यक्रमक देखबाक ओ सुनबाक आनन्द इन्टरनेट द्वारा प्राप्त केलनि।
     ज्ञात हो जे मैथिली भाषा मे स्रष्टा केवल आरक्षित जाति या वर्ग धरि नहि अछि आ अपन मातृभाषा सँ प्रेम हरेक मैथिलीभाषी मे बरोबरि अछि - एहि बात लेल ई समारोह - अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन 'स्वत: प्रमाणम् परत: प्रमाणम्' बनि संसारक समक्ष एकटा अनुपम उदाहरण प्रस्तुत केलक। केकरो मातृभाषा पर कदापि कोनो एक जाति भले ओ कतबो उच्च-बौद्धिक स्तरक कियैक नहि मानल जाय तेकर निजी वा आरक्षित भाषा नहि बनि सकैत अछि ई बात काल्हिक मैथिलीभाषी स्रष्टाक सर्वजातीय महाकुम्भ द्वारा पुन: स्थापित भेल।
    प्राज्ञ रमेश रंजन, प्रज्ञा परिषद् सदस्य, नेपाल संगीत तथा नाट्य प्रज्ञा प्रतिष्ठान, काठमांडु तथा सुप्रसिद्ध मैथिली गीतकार सियाराम झा सरस केर संयुक्त प्रमुख आतिथ्य तथा मैथिली सेवा समितिक अध्यक्षा डा. एस. एन. झा केर अध्यक्षता मे संपन्न एहि समारोहक प्रथम सत्र मे 'मैथिलीक वर्तमान अवस्था - राज्यक योगदान आ उपेक्षा' विषय पर केन्द्रित रहल। एहि सत्र मे लगभग ६५ वक्ता द्वारा विचार प्रस्तुति करैत ई स्पष्ट कैल गेल जे राज्य पर निर्भरता मैथिली भाषा लेल खतरनाक सिद्ध होयत, तैँ अखण्ड सनातनी सिद्धान्त अनुसार एहि भाषाकेँ सुरक्षित आ संवर्धित रखबाक लेल 'स्वयंसेवा आ स्वसंरक्षण'क सिद्धान्त मात्र कारगर होयत।
     दोसर सत्र मे देश-विदेश सँ पधारल कविक सहभागिता संग मुदा समयक चाप मे कवि-गोष्ठी केर आयोजन कैल गेल छल। एहि सत्रक अध्यक्षता सहरसा सँ आयल मैथिली कवि शिरोमणि अरविन्द मिश्र निरज कएलनि आ हुनकहि सुपुत्री मैथिलीक सुप्रसिद्ध युवा-पीढीक कवियित्री श्वाती साकम्भरीक सुन्दर सनक प्रस्तुतिक संग शुरु भेल छल। सभ कविक सहभागिता करेबाक प्रयास करितो दरभंगा, सहरसा, काठमांडु आ राँचीक वरिष्ठ कवि लोकनिक प्रस्तुति नहि करायल जा सकल। युवा पीढी लेल खास प्राथमिकता देबाक आ सब केँ समेटबाक सिद्धान्त पर आयोजित एहि कार्यक्रम मे बेसी रास सहभागिता युवा-युवती केँ देल गेल। दरभंगा सँ आयल सुप्रसिद्ध हास्य कवि जय प्रकाश जनक द्वारा करीब ४ महत्त्वपूर्ण प्रस्तुति दैत उपस्थित दर्शक केँ बेर-बेर हँसबाक लेल मजबूर कैल गेल। ताहि समय कार्यक्रमक विशिष्ट अतिथि भारतीय राजदूतावासक विराटनगर कैम्प अफिसकेर प्रमुख श्री पी के चालिया कार्यक्रम मे उपस्थित भऽ चुकल छलाह, ओहो जनकक कविता सुनि भरपुर आनन्द उठौलनि। तहिना बहुभाषिक कवि-गोष्ठी सेहो नाममात्र लेल कैल जा सकल, जाहि मे एक नेपाली भाषाक कविता अनेको सम्मान सँ सम्मानित विभूति श्री सुमन पोखरेल द्वारा आ तहिना उर्दूक मशहूर शायर अलानीन मियाँ बेचैन केर गजल आ शेरो-शायरी उर्दू मे प्रस्तुत कैल गेल छल। भागलपुर आ पटना विश्वविद्यालयक संग मिथिला विश्वविद्यालय सँ शोधार्थी छात्र लोकनिक नीक उपस्थिति एहि सत्र मे देखल जा सकल। मिथिलाक वर्तमान समाजिक अवस्था आ इतिहासगानक अतिरिक्त क्रान्तिक आवाज सँ भरल रहल ई सत्र आ खास बात यैह जे अधिकतम उपस्थित कवि लोकनि केँ समेटल जा सकल छल।
      पुन: तेसर सत्र मे मैथिली गजलक सुन्दर प्रस्तुति संग कार्यक्रमक प्रमुख अतिथि आ प्रसिद्ध गीतकार सियाराम झा सरस द्वारा कैल गेल छल। हिनक अतिरिक्त पवन नारायण, सुनील पवन, दिया चौधरी, प्रीति झा, धीरेन्द्र प्रेमर्षि, सुभाषचन्द्र झा, देवांशी चौधरी, भावना चौधरी, अम्बिका चौधरी तथा प्रवीण नारायण चौधरी द्वारा विभिन्न स्वादक मैथिली गीत प्रस्तुत कैल गेल। अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली कवि सम्मेलन-२०१५ द्वारा घोषित सम्मान पत्र सहरसा मे पत्रकारिता करैत मैथिली भाषा ओ मिथिला संस्कृति प्रति समर्पित योगदान करनिहार कन्हैयाजी, कुमार आशीष आ सुभाषचंद्र झा केँ भारतीय राजदूतावास अधिकारी श्री पी के चालियाक हाथ सँ सम्मान देल गेल। एहि कार्यक्रम मे सहभागी लोकनि केँ प्रशस्ति पत्र प्रदान कैल गेल। एहि कार्यक्रमक मध्य मे मैथिली जिन्दाबाद डट कम - समाचार पोर्टलक उद्घाटन कैल गेल छल। तहिना मिथिला डायरेक्ट्री २०१५ केर विमोचन मंचासीन अतिथि लोकनि द्वारा कैल गेल छल। संगहि काञ्चीनाथ झा किरणकेँ समर्पित मिथिलाक्षर किरण फोन्ट्स केर विमोचन मैथिली फाउन्डेशनक संस्थापक कौशल कुमारक उपस्थिति मे रमेश रंजन व धीरेन्द्र प्रेमर्षि द्वारा कैल गेल छल।
        दिल्ली सँ विशिष्ट अतिथि अमरनाथ झा, संजीव सिन्हा, विमलजी मिश्र, अखिलेश मिश्र, सुनील पवन - कानपुर सँ विशिष्ट अतिथि मिथिलाँचल महासभाक संस्थापक श्री रविनाथ मिश्र, अध्यक्ष अमित झा आ प्रवक्ता अनिल झा, सहरसा सँ शिक्षाविद् अभिमन्यु खाँ, समाजसेवी सुमन समाज, अभियानी अमित आनन्द, कुन्दन मिश्र, दिलीप कुमार चौधरी, आदि, सुपौल सँ विशिष्ट अतिथि तथा मैथिली कविता-कथा-नाटक केर सर्वविदित स्रष्टा अरविन्द कुमार ठाकुर, मधुबनी सँ सदरे आलम गौहर, दीपनारायण विद्यार्थी, दरभंगा सँ डा. मंजर सुलेमान, उदय शंकर मिश्र, राम कुमार, चन्द्रेश, परवा, बुढाभाइ आदि, पुर्णिया सँ गिरिन्द्रनाथ, चिन्मय ना. सिंह, अररिया सँ सुधीरनाथ मिश्र, कोलकाता सँ कवि-कथाकार-अभियानी उमाकान्त झा बक्शी आ अखिल भारतीय मिथिला पार्टीक महासचिव रत्नेश्वर झा, काठमांडु सँ आयोजनक प्रेरक-संरक्षक धीरेन्द्र प्रेमर्षि, लहान सँ अर्जुन प्रसाद गुप्ता 'दर्दीला', प्रिन्स कृष्णा सिंह, नारायण मधुशाला, राजविराज सँ कवियित्री साधना झा, विद्यानन्द बेदर्दी, निराजन झा, केशव कर्ण आ प्रा. अमरकान्त झा, जनकपुर सँ प्रेम नारायण झा, विराटनगर सँ वसुन्धरा झा आ अन्य कतेको गणमान्यक उपस्थिति रहल छल। तहिना विदेश सँ अनलाइन बिन्देश्वर ठाकुर, अब्दुल रज्जाक, अशरफ राइन, बेचन महतो, भोगेन्द्र राज साह 'विराज', मनोज साण्डिल्य आदिक उपस्थिति आ प्रस्तुति देल गेल छल। एहि कार्यक्रम केँ लाखों इन्टरनेट यूजर मैथिल घरे बैसल आनन्द लैत रहला आ फेसबुक द्वारा स्वस्फूर्त फोटो आ समाचार शेयर करबाक लाइन लागल रहल।
            कार्यक्रमक समीक्षात्मक प्रस्तुति मे प्रमुख अतिथि सियाराम झा सरस तथा रमेश रंजन द्वय कहलनि जे कवि सम्मेलन मे प्रस्तोताक संख्या छाइनकय समावेश कैल जेबाक चाही, आ समस्त नव-पीढीक कवि-स्रष्टा लोकनि हेतु प्रशिक्षण-कार्यक्रमक संचालन सेहो हेबाक चाही। लेकिन उत्साहित युवाक हर डेग केँ हम बुजुर्ग पीढी प्रोत्साहित करैत कमी-कमजोरी केँ दूर करबाक लेल मार्गदर्शक केर भूमिका निर्वाह करी। कार्यक्रम मे नेपाली भाषाक प्राज्ञ दधिराज सुवेदी मैथिली भाषा एकमात्र संयुक्त आधार नेपाल आ भारत बीच रहबाक बात कहलनि। तहिना करुणा झा, स्वागताध्यक्ष अपन छोट स्वागत मन्तव्य मे दहेज मुक्त मिथिला नित्य छोट-छोट डेग उठबैत आबि रहबाक भावना रखैत आगन्तुक अतिथि लोकनिक भव्यापूर्ण स्वागत केलनि। कार्यक्रमक संचालन किसलय कृष्ण ओ कार्यक्रम संयोजक प्रवीण नारायण चौधरी संयुक्त रूपे केलनि। बेसी सँ बेसी वक्ता-कवि आदिक सहभागिता करबितो कतेको नामी-गिरामी आ आवश्यक प्रस्तुति छूटि जेबाक त्रुटि सेहो भेल, जेकरा भविष्य मे क्रमश: सुधारोन्मुख बनेबाक बात आयोजक दहेज मुक्त मिथिलाक समस्त सदस्य स्वीकार केलनि
विराटनगर, 
प्रवीण नारायण चौधरी

गुरुवार, 9 अप्रैल 2015

अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली कवि सम्मेलन-२०१५: सहभागिताक ताजा अपडेट - विराट नगर

अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली कवि सम्मेलन-२०१५:  सहभागिताक ताजा 

अपडेट - विराट नगर

भारत सँ मुख्य अतिथि सुप्रसिद्ध गीतकार सियाराम झा सरस राँची सँ, जमशेदपुर सँ श्यामल सुमन आबि रहला अछि। संग मे १ गोट कवि आरो अयबाक जानकारी करौलनि अछि।
दरभंगा सँ परम आदरणीय कवि व अभियानी शिरोमणि डा. बुचरु पासवान, डा. मंजर सुलेमान, प्रो. उदय शंकर मिश्र, रामकुमार झा, चन्द्रेश, चन्द्रमोहन झा परबा, चन्द्रशेखर झा बुढाभाइ सेहो आबि रहला अछि।
एहि सँ पहिनहि महान हास्य कविसम्राट जयप्रकाश जनक आ महाभियानी कवि मणिकान्त झा संग अशोक मेहता आदि सेहो आबि रहला अछि।
सहरसा सँ अरविन्द मिश्र निरज, स्वाति शाकम्भरी, रामचैतन्य धीरज, भोगेन्द्र शर्मा निर्मल, सुभाषचन्द्र झा, किसलय कृष्ण, शैलेन्द्र शैली पहिनहि पुष्टि कैल सूची मे छथि।
पटना विश्वविद्यालय, मैथिली विभागक शोधार्थी - नरेश कुमार, विनीत कुमार लाल, रमण कान्त चौधरी, सरोज मंडल, पुरुषोत्तम चौधरी, रश्मि कुमारी, संजीब कुमार, संजय कुमार पासवान, श्याम रूप चौधरी आबि रहला अछि।
भागलपुर विश्वविद्यालय, मैथिली विभागक शोधार्थी - पंकज कुमार आ निक्की प्रियदर्शिनी आबि रहला अछि।
मिथिला विश्वविद्यालय, मैथिली विभागक शोधार्थी - सुरेश पासवानक नेतृत्व मे आबि रहला अछि, पूर्ण सूची प्रतिक्षीत...!
सुपौल सँ कवि अरविन्द ठाकुर आबि रहला अछि।
पटना सँ कमल मोहन चुन्नूक संग पंकज जी आबि रहला अछि।
मधुबनी सँ दीप नारायण विद्यार्थी आबि रहला अछि।
राजविराज सँ करुणा झा, मीना ठाकुर, साधना झा, श्याम सुन्दर यादव पथिक, देवेन्द्र मिश्र, शुभचन्द्र झा, विद्यानन्द बेदर्दी, निराजन झा, सत्येन्द्र नाथ चौधरी अयबाक पुष्टि केलनि अछि।
लहान सँ अर्जुन प्रसाद गुप्ता दर्दीला, नारायण मधुशाला, जीबछ यादव उदासी, प्रिन्स मेहता आबि रहला अछि।
जनकपुर सँ विजय दत्त मणि, काशीकान्त झा, प्रेम विदेह ललन, दिगम्बर झा दिनमणि सहित अपुष्ट आरो कवि लोकनि आबि रहला अछि।
रौतहट सँ श्याम शेखर झा आबि रहला अछि।
काठमांडु सँ धीरेन्द्र प्रेमर्षि स्वयं आयोजक ११ तारीख समय सँ पहुँचबाक पुष्टि कएलनि अछि। मुख्य अतिथि प्राज्ञ परिषद् सदस्य, नेपाल संगीत तथा नाट्य प्रज्ञा प्रतिष्ठान - श्री रमेश रंजन - मिथिलाक चेतन भगत छथिये।
दुबइ सँ प्रभात राय भट्ट नेपाल आबि कार्यक्रम मे सहभागी बनता। अनलाइन कतार सँ विन्देश्वर ठाकुर आ अशरफ राइन, दुबइ सँ भोगेन्द्र राज साह आदि केर प्रस्तुति संभव होयत। तहिना आरो किछु भारत तथा नेपाल सहित अन्य देश सँ अनलाइन प्रस्तुति हेबाक संभावना अछि। कार्यक्रम लाइव स्ट्रीमिंग मार्फत सब देश मे अनलाइन देखल जा सकत।
विराटनगर सँ दयानन्द दिग्पाल यदुवंशी, अजित झा, कर्ण संजय, राम नारायण सुधाकर, आदि रहबे करता।
झापा सँ कन्दर्प नारायण लाल सेहो औता। मुदा हिनकर फोन कतेको बेर लगेलाक बादो लागि नहि रहल अछि। मैसेज द्वारा जानकारी देल गेल छनि।
कविक अतिरिक्त अभियानी लोकनिक सहभागिता:
पुर्णियाँ सँ गिरिन्द्रनाथजी आ चिन्मयजी औता। आरो अपुष्ट सहभागिताक अपेक्षा अछि।सहरसा सँ कन्हैयाजी, कुमार आशीष, सुभाषचन्द्र झा, महिषी (सहरसा) सँ अमित आनन्द, आदरणीय अभिमन्यु खाँ, कुन्दन मिश्र, विजय महापात्रा, सुमन समाज, दिलीप कुमार चौधरी, दरभंगा सँ श्याम सुन्दर झा, वैद्य ओ. पी. महतो, मुजफ्फरपुर सँ ९९% संभावनाक संग संजय मिश्रा जी....
कानपुर सँ मिथिलाँचल महासभाक प्रतिनिधि आदरणीय रवि नाथ बाबु, अनिल भाइ व अमित भाइ आबि रहला अछि।
दिल्ली सँ कवि विमलजी मिश्र, अखिलेशजी, अमर नाथ बाबु, संजीव सिन्हा जी आ कौशल कुमार जी - तहिना सहरसा-दिल्ली संयुक्त केर प्रतिनिधित्व करैत आदरणीय विमल कान्त बाबु सेहो दिल्ली सँ आबि रहला अछि।
मधुबनी सँ पवन नारायण, शुभ नारायण झा, संगीत टोलीक संग आबि रहला अछि।
साईंचरण फिल्म्स केर प्रतिनिधि आ अभियानी भाइ रमानाथ झा मैथिली फिल्म्स केर विषय पर प्रस्तुतिक संग आबि रहला अछि।
एकर अतिरिक्त अहाँ सब कियो आबिये रहल छी, मुदा पुष्टि अवश्य करू जे व्यवस्था मे कोनो त्रुटि नहि हो। 

विशेष - संपर्क नंबर -
प्रवीण नारायण चौधरी - ९८५२०२२९८१, 
डा. सुरेन्द्र नारायण मिश्र - ९८४२०७७५५५,
 डा. एस. एन. झा - ९८४२०२३७३८

बुधवार, 14 जनवरी 2015

तिला संक्राइत - मिथिला लेल तिल-चाउर

मकर संक्रान्ति - तिला संक्राइत - मिथिला लेल तिल-चाउर बहब!

मकर संक्रान्तिके शुभ अवसरपर समस्त जनमानस लेल शुभकामना!
      
मकर संक्रान्ति के त्योहार मोक्ष लेल प्रतिबद्धता हेतु होइछ - निःस्वार्थ सेवा - निष्काम कर्म करैत मुक्ति पाबैक लेल शपथ-ग्रहण - संकल्प हेतु एहि पावनिक महत्त्व छैक।

     जेना माय के हाथ तिल-चाउर खाइत हम सभ मैथिल माय के ई पुछला पर जे ‘तिल-चाउर बहमें ने..?’ हम सभ इ कहैत गछैत छी जे ‘हाँ माय! बहबौ!’ आ इ क्रम तीन बेर दोहराबैत छी - एकर बहुत पैघ महत्त्व होइछ। पृथ्वीपर तिनू दृश्य स्वरूप जल, थल ओ नभ जे प्रत्यक्ष अछि, एहि तिनूमें हम सभ अपन माय के वचन दैत तिल-चाउर ग्रहण करैत छी। एक-एक तिल आ एक-एक चाउरके कणमें हमरा लोकनिक इ शपथ-प्रण युगों-युगोंतक हमरा लोकनिक आत्म-रूपके संग रहैछ। बेसी जीवन आ बेसी दार्शनिक बात छोड़ू... कम से कम एहि जीवनमें माय के समक्ष जे प्रण लेलहुँ तेकरा कम से कम पूरा करी, पूरा करय लेल जरुर प्रतिबद्ध बनी।

आउ, एहि शुभ दिनक किछु आध्यात्मिक महत्त्वपर मनन करी:  

१. मकर संक्रान्ति मानव जीवन के असल उद्देश्य के पुनर्स्मरण हेतु होइछ जाहि सँ मानव लेल समुचित मार्गपर अग्रसर होयबाक प्रेरणा के पुनर्संचरण हेतु सेहो होइछ। धर्म, अर्थ, काम आ मोक्ष के पुरुषार्थ कहल गेल अछि - जे जीवन केर आधारभूत मौलिक माँग या आवश्यकता केर द्योतक होइछ। एहि सभमें मोक्ष या मुक्ति सर्वोच्च पुरुषार्थ होइछ। श्रीकृष्ण गीताके ८.२४ आ ८.२५ में दू मुख्य मार्गकेर चर्चा केने छथि - उत्तरायण मार्ग आ दक्षिणायण मार्ग। एहि दू मार्गकेँ क्रमशः ईशकेर मार्ग आ पितरकेर मार्ग सेहो कहल गेल छैक। अन्य नाम अर्चिरादि मार्ग आ धुम्रादि मार्ग अर्थात्‌ प्रकाशगामिनी आ अंधकारगामिनी मार्ग क्रमशः सेहो कहल जैछ।

उत्तरायण मार्ग ओहि आत्माके गमन लेल कहल गेल छैक जे निष्काम कर्म करैत अपन शरीर केर उपयोग कयने रहैछ। तहिना जे काम्य-कर्म में अपन शरीरकेँ लगबैछ, ताहि आत्माकेँ शरीर परित्याग उपरान्त दक्षिणायण मार्ग सऽ गमनकेर माहात्म्य छैक। उत्तरायण मार्गमे गमन केँ मतलब ईश्वर-परमात्मामे विलीन होयब, जखन कि दक्षिणायणमे गमन केँ मतलब कर्म-बन्धनकेर चलते पुनः जीवनमे प्रविष्टि सँ होइछ। मकर संक्रान्ति एहि मुक्तिक मार्ग जे श्रीकृष्ण द्वारा गीतामे व्याख्या कैल गेल अछि ताहि केँ पुनर्स्मरण कराबय लेल होइछ।  

२. सूर्यक उत्तरगामी होयब शुरु करयवाला दिन - जेकरा उत्तरायण कहल जैछ। अन्य लोकक लेल ६ महीना उत्तरायण आ बाकीक ६ महीना दक्षिणायण कहैछ।

३. पुराण के मुताबिक, एहि दिन सूर्य अपन पुत्र शनिदेवकेर घर प्रवेश करैत छथि, जे मकर राशिक स्वामी छथि। चूँकि पिता आ पुत्र केँ अन्य समय ढंग सऽ भेंटघांट नहि भऽ सकल रहैत छन्हि, तैं पिता सूर्य औझका दिन विशेष रूप सऽ अपन पुत्र शनिदेव सऽ भेटय लेल निर्धारित केने छथि। ओ वास्तवमें एक मास के लेल पुत्र शनिदेवके गृह में प्रवेश करैत छथि। अतः यैह दिन विशेष रूप सऽ स्मरण कैल जैछ पिता-पुत्रके मिलन लेल।

माहात्म्य: सूर्यदेव कर्म केर परिचायक आधिदेवता छथि, तऽ शनिदेव कर्मफल केर परिचायक आधिदेवता! मकर संक्रान्ति एहेन दिवसकेर रूपमे होइछ जहिया हम सभ निर्णय करैत छी हमरा सभकेँ कोन मार्ग पर चलबाक अछि - सूर्य-देव द्वारा प्रतिनिधित्व कैल निष्काम-कर्म (प्रकाशगामिनी) या फेर शनि-देव द्वारा प्रतिनिधित्व कैल काम्य-कर्म (अन्धकारगामिनी)।

४. यैह दिन भगवान्‌ विष्णु सदाक लेल असुरक बढल त्रासकेँ ओकरा सभकेँ मारिकय खत्म कयलाह आ सभक मुण्डकेँ मंदार पर्वतमे गाड़ि देलाह।

माहात्म्य: नकारात्मकताक अन्त हेतु एहि दिनकेर विशेष महत्त्व होइछ आ तदोपरान्त सकारात्मकताक संग जीवनक प्रतिवर्ष एक नव शुरुआत देबाक दिवस थीक मकर संक्रान्ति।

५. महाराज भागिरथ यैह दिन अत्यन्त कठोर तपसँ गंगाजीकेँ पृथ्वीपर अवतरित करैत अपन पुरखा ६०,००० महाराज सगरक पुत्र जिनका कपिल मुनिक आश्रमपर श्रापक चलतबे भस्म कय देल गेल छलन्हि - तिनकर शापविमोचन एवं मोक्ष हेतु मकर-संक्रान्तिक दिन गंगाजल सँ आजुक गंगासागर जतय अछि ताहि ठामपर तर्पण केने छलाह आ हिनक तपस्याकेँ फलित कयलाक बाद गंगाजी सागरमें समाहित भऽ गेल छलीह। गंगाजी पाताललोक तक भागिरथकेर तपस्याक फलस्वरूप हुनकर पुरुखाकेँ तृप्तिक लेल जाइत अन्ततः सागरमें समाहित भेल छलीह। आइयो एहि जगह गंगासागरमे आजुक दिन विशाल मेला लगैछ, जाहिठाम गंगाजी सागरमे विलीन होइत छथि, हजारों हिन्दू पवित्र सागरमे डुबकी लगाबैछ आ अपन पुरुखाकेँ तृप्ति-मुक्ति हेतु तर्पण करैछ।
       माहात्म्य: भागिरथ केर प्रयास आध्यात्मिक संघर्षक द्योतक अछि। गंगा ज्ञानक धाराक द्योतक छथि। नहि ज्ञानेन सदृशम्‌ पवित्रमिह उद्यते! पुरुखाक पीढी-दर-पीढी मुक्ति पबैत छथि जखन एक व्यक्ति अथक प्रयास, आध्यात्मिक चेतना एवं तपस्या सऽ ज्ञान प्राप्त करैछ।

६. आजुक दिनकेर एक आरो अत्यन्त महत्त्वपूर्ण सन्दर्भ भेटैछ जखन महाभारतक सुप्रतिष्ठित भीष्म पितामह एहि दिवस अपन इच्छा-मृत्युक वरदान पूरा करय लेल इच्छा व्यक्त कयलाह। हुनक पिता हुनका इच्छामृत्युकेर वरदान देने छलखिन, ओ एहि पुण्य दिवस तक स्वयंकेँ तीरकेर शय्यापर रखलाह आ मकर संक्रान्तिकेँ आगमनपर अपन पार्थिव शरीर छोड़ि स्वर्गारोहण कयलाह। कहल जैछ जे उत्तरायणमें शरीर त्याग करैछ ओ पुनर्जन्मकेर बंधन सँ मुक्ति पबैछ। अतः आजुक दिन विशेष मानल जैछ अन्य दुनिया-गमन करबाक लेल।

माहात्म्य: मृत्यु उत्तरायणके राह अंगीकार कयलापर होयबाक चाही - मुक्ति मार्गमें। ओहि सऽ पहिले नहि! आत्माकेर स्वतंत्रता लेल ई जरुरी अछि। एहिठाम उत्तरायणक तात्पर्य अन्तर्ज्योतिक जागरण सऽ अछि - प्रकाशगामिनी होयबाक सऽ अछि।

एहि शुभ दिनक अनेको तरहक आन-आन माहात्म्य सब अछि आ एहि लेल विशेष रुचि राखनिहार लेल स्वाध्याय समान महत्त्वपूर्ण साधन सेहो यैह संसारमे एखनहु उपलब्ध अछि। केवल शुभकामना - लाइ-मुरही-चुल्लौड़-तिलवा आ तदोपरान्त खिच्चैड़-चोखा-घी-अचाड़-पापड़-दही-तरुआ-बघरुआक भौतिकवादी दुनिया मे डुबकी लगबैत रहब तऽ मिथिलाक महत्ता अवश्य दिन-प्रति-दिन घटैत जायत आ पुनः दोसर मदनोपाध्याय या लक्ष्मीनाथ गोसाईंक पदार्पण संभव नहि भऽ सकत।

अतः हे मैथिल, आजुक एहि पुण्य तिथिपर किऐक नहि हम सभ एक संकल्प ली जे मिथिलाकेँ उत्तरायणमे प्रवेश हेतु हम सभ एकजूट बनब आ अवश्य निष्काम कर्म सऽ मिथिला-मायकेर तिल-चाउरकेँ भार-वहन करबे टा करब। जेना श्री कृष्ण अर्जुन संग कौरवकेर अहं समाप्त करय लेल धर्मयुद्ध वास्ते प्रेरणा देलाह, तहिना मिथिलाक सुन्दर इतिहास, साहित्य, संगीत, शैली, भाषा, विद्वता एवं हर ओ सकारात्मकता जेकरा बदौलत मिथिला कहियो आनो-आनो लेल शिक्षाक गढ छल तेकरा विपन्न होइ सऽ जोगाबी। जीवन भेटल अछि, खेबो करू... मुदा खेलाके बाद बहबो करियौक। मातृभूमि आ मातृभाषाक लेल रक्षक बनू। मिथिला मायकेर तरफ सँ तिल-चाउर हमहुँ खा रहल छी, जा धरि जीवन रहत ता धरि बहब, फेरो जन्म लेबय पड़त सेहो मंजूर - आ फेरो बहब तऽ मिथिलाक लेल बही यैह शुभकामनाक संग, मकर संक्रान्ति सँग जे नव वर्षक शुरुआत आइ भेल अछि ताहि अवसर पर फेर समस्त मैथिल एवं मानव समुदाय लेल मंगलकेर कामना करैत छी।
  जय मैथिली! जय मिथिला!
ॐ तत्सत्‌!
  









प्रवीण चौधरी ‘किशोर’

सोमवार, 1 दिसंबर 2014

मिथिला विभूति स्मृति समारोह - दिल्ली

   
                काल्हि दिनांक ३० नवम्बर दिल्लीक फिक्की अडिटोरियम मे मिथिला विभूति स्मृति समारोह भव्यताक संग मनाओल गेल। एहि कार्यक्रमक आयोजन भारतक एक सर्वथा पुरान आ मजगुत संस्था 'अखिल भारतीय मिथिला संघ' द्वारा कैल गेल। मैथिली कार्यक्रम एतेक भव्य रूप मे आयोजनक एकटा शिखर उदाहरण एकरा कहल जा सकैत अछि। जाहि तरहक गहिंर विचारधारा आ विकासवादी नीति संग कार्यक्रम केर आयोजन कैल गेल ताहि हेतु अध्यक्ष विजय चन्द्र झा व समस्त आयोजक समितिक दूरदर्शिता झलकि रहल छल। जखन कि कार्यक्रम मे मैथिलीक जे रस आ तत्त्व सामान्यतया भेटैत छैक तेकर घोर कमी बुझायल, तथापि विकासवादी परिवर्तन हेतु देखल गेल सपना मे पुरान आ पौराणिक विचारधारा तथा नीति केर प्रयोग किछु निहित व मिश्रित संदेश पठबैत प्रतीत भेल।

         कार्यक्रमक प्रमुख अतिथि भाजपा केर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, दिल्ली भाजपा केर प्रभारी एवम् राज्यसभाक माननीय सांसद श्री प्रभात झा छलाह। संगहि मिथिला-मैथिली आन्दोलनक वरिष्ठतम् पुरोधा डा. बैद्यनाथ चौधरी 'बैजु', मधुबनी सँ माननीय सांसद श्री हुकुमदेव नारायण यादव, झंझारपुर सँ माननीय सांसद श्री विरेन्द्र कुमार चौधरी, मधेपुरा (सहरसा) सँ माननीय सांसद श्री राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव, वरिष्ठ मैथिली साहित्यकार डा. गंगेश गुंजन, गुवाहाटी सँ मैथिली-मिथिला केर ध्वजावाहक श्री प्रेमकान्त चौधरी, गाँधीनगर (गुजरात) सँ डा. महादेव झा, अर्थशास्त्री एवं भारतीय अर्थ सेवा अधिकारी डा. संजीव मिश्रा, दरभंगा सँ कम्युनिस्ट पार्टी नेता तथा मैथिली-मिथिलाक वरिष्ठ सेनानी राम कुमार झा, मिथिला संस्कृतिविद् शंकर कुमार झा केर विशिष्ट आतिथ्य एवं आयोजक संस्थाक अध्यक्ष विजय चन्द्र झा केर अध्यक्षता मे संपन्न एहि भव्य कार्यक्रम केर उद्घाटन सत्र संपन्न भेल। तहिना मैथिली गीत-संगीत केर शिखरपुरुष पंडित हरिनाथ झा, मिथिलाक लता स्वरकोकिला रंजना झा एवं सुप्रसिद्ध सिने कलाकार सह गायिका अंजु झा उर्फ रंगीली भौजी द्वारा विद्यापति सांगीतिक संध्या सँ कार्यक्रमक दोसर आ अन्तिम सत्र संपन्न कैल गेल। सांगीतिक संध्यामे विशिष्ट उपस्थिति सुप्रसिद्ध कत्थक नर्तकी नलिनी चौधरीक छल।
           उद्घाटन सत्र मे उपरोक्त मंचस्थ वक्ता लोकनि द्वारा मैथिली-मिथिलाक चर्चा कम मुदा अखिल भारतीय मिथिला संघक विशाल इतिहास पर बेसी केन्द्रित देखायल। युवा शक्ति केँ पूर्ण रूप मे नकारैत काल्हिक कार्यक्रमक प्रथम सत्र 'अपन पीठ - अपनहि सँ ठोकू', 'मुन्डे-मुन्डे मतिर्भिन्ना' व 'मैथिल अहंकार केर चरम प्रदर्शन' जेकाँ लागल। एकत्रित अपार भीड विभोर छलाह, विचारमंथन सँ हृष्ट-पुष्ट मुदा मैथिली लोकगीतक अकाल सँ प्यासल दर्शक लिलोह आ हताश बुझेलाह। एक बेर तऽ एना लागल जे कविता वाचनक कोनो कार्यक्रम नहियो रहैत 'राजनैतिक प्रतिद्वंद्वी' लोकनि स्वयं ई खानापूर्ति कय देता - एहि लेल पूर्व सांसद महाबल मिश्राक तुक्का, सांसद पप्पू यादव केर हिन्दी भाषण बीच मैथिलीक फकरा आ मुख्य अतिथि प्रभात झा द्वारा पप्पुगान कवितात्मक तथा कव्वाली शैली मे युगलबंदीक बेजोड प्रस्तुति केलक।
          सांसद हुकुमदेव नारायण यादव द्वारा राखल बात जरुर मैथिल केँ अपन जैड मजगुती हेतु खेत केँ जोति-कोरि समतल बनाय कतहु पाइन खसेला सँ संपूर्ण खेत एक रंग पटेबाक उद्धरण संग अत्यन्त प्रेरणास्पद छल। मैथिली केर प्रयोग जँ हम सब अपनहि नहि करी, हरेक कामकाज लेल संवैधानिक भाषा मैथिलीक प्रयोग नहि करब तऽ भाषणे टा मे मैथिली बचेबाक ढोंग सँ कि होयत - एक महत्त्वपूर्ण चुनौती भरल संदेश देलनि सांसद यादव। अर्थशास्त्री डा. संजीव मिश्रा द्वारा देल गेल संबोधन मे मैथिली व मिथिलाक सनातन संरक्षण हेतु बाजार बनेबाक अत्यन्त प्रेरक संदेश छल। जहिना मधुबनी पेन्टिंग आइ संसार मे मिथिलाक पताका फहरा रहल अछि, तहिना आरो-आरो विन्दु पर मैथिली केर ब्रान्डिंग जरुरी अछि डा. मिश्रा कहलनि। मुख्य अतिथि द्वारा अत्यन्त भावुक संदेश देल गेल जे जाति-पाति सँ ऊपर उठि अपन भाषा व संस्कृति संग आत्मसम्मानक अनुभूति कयला सँ मिथिलाक असल विकास होयत।
          कार्यक्रम मे मंच ओ दर्शक बीच सेहो युगलबंदी होइत तखन नजरि पडल जखन मिथिला-मैथिली आन्दोलनक वरिष्ठतम अभियंता डा. बैद्यनाथ चौधरी बैजु केँ मंच पर आसन ग्रहण हेतु उद्घोषणा एवं सम्मानक घोषणा कैल गेल। एहि उद्घोषणाकक तुरन्त बाद दर्शक दीर्घा सँ युवा मैथिलक समूह 'मिथिला राज्य निर्माण सेना'क सेनानी लोकनि द्वारा 'मिथिला राज्य जिन्दाबाद', 'बैजु बाबु जिन्दाबाद' केर नारा लगायल गेल। एहि तरहक वातावरण सँ खौंझाइत सभा-अध्यक्ष विजय चन्द्र झा द्वारा आपत्ति जनायल गेल। ओ अपन उद्गार प्रकट करैत कहलनि जे कोनो जिन्दाबाद या मुर्दाबाद एहि मंचक परंपरा नहि रहल, संस्थाक नीति राज्य निर्माण प्रति अलग अछि, जाहि विचारधारा सँ डा. बैद्यनाथ चौधरी बैजु व मिथिला राज्य अभियानी लोकनि केँ बेर-बेर अवगत करायल जा चुकल अछि। जाबत मिथिलाक समस्त जनसमुदाय द्वारा एहि दिशा मे स्वीकृति नहि भेटत, ताबत धरि एहि संस्थाक आयोजन मे मिथिला राज्य पर चर्चा नहि कैल जायत। मिथिलाक सबसँ बेसी गरिमामयी संस्थाक रूप मे रहल अखिल भारतीय मिथिला संघ केर मंच सब दिन सर्वपक्षीय सम्मेलन हेतु प्रसिद्ध रहल अछि। एहि मंच पर किनको लेल जिन्दाबाद वा मुर्दाबाद करबाक परंपरा नहि रहल अछि - सेहो स्पष्ट करैत अध्यक्ष विजय चन्द्र झा 'विकास हेतु प्रतिबद्धता'क नारा मात्र संस्थाक उद्देश्य रहल से कहलनि। कतेको रास प्रधानमंत्री, कतेको रास उपराष्ट्रपति, विभिन्न दलक नेता आ मंत्री केर साझा स्थल आ कतेको दशक सँ मैथिली तथा मिथिला लेल कैल गेल अनेको महत्त्वपूर्ण कार्य मात्र लक्ष्य अछि जाहि दिशा मे सब कियो एकजुट बनबाक धारणा राखल गेल।
        सांसद पप्पू यादव द्वारा कैल गेल संबोधन मे मात्र फोटो टा मे मिथिलाक सब विभूति केँ समेटब मुदा यथार्थ मे आइयो मिथिला मे जातीय विभेद चरम पर रहबाक कठोर टिप्पणी कैल गेल। पूर्ण समावेशिक समाजक निर्माणक दिशा मे कोनो उपलब्धिमूलक कार्य नहि करब मिथिला आन्दोलनक सब सँ पैघ कमजोरी रहबाक बात स्पष्ट कैल गेल। ओ समाजक अगुआवर्ग आ ब्रह्म केँ जाननिहार ब्राह्मणक बाहुल्यता मात्र रहबाक सच पर आंगूर उठबैत चेतौनी भरल संदेश देलनि जे कथनी एवं करनी मे एकता सँ मिथिलाक पिछडापण जरुर दूर होयत। मिथिला राज्यक सपना आम जनवर्गीय सहभागिता सँ संभव होयत अन्यथा ई सपने रहि जायत।
         दर्शक-दीर्घा मे एक मिश्रित वातावरणक सृजना भेल आ बुद्धिजीवी तर्क करैत देखेलाह जे स्वयं सांसद आ सामाजिक नेतृत्वकर्ता रहैत - मिथिलाक धरतीपुत्र होयबाक आत्मगौरव सँ वंचित जे अपनहि भाषा मे नहि बाजय ओ स्वयं बेईमान होयबाक संदेश दैत अछि; मंच केँ पूर्ण रूप मे राजनीतिक ओ जातिवादी विचारधारा सँ मात्र अपन निजी स्वार्थपूर्ति आ सत्तासुख लेल आइयो पिछडल केँ पिछडल रखैत अछि। पप्पु यादवक बेवाक टिप्पणी जे उपस्थित दर्शक बीच ९५% ब्राह्मण मात्र रहबाक सच्चाई मिथिलामे विद्यमान वर्तमान सामाजिक समरसताक असल रूप प्रदर्शित करैत अछि। एकर कारण कतहु न कतहु पैछला २००-३०० वर्षक सामंतवादी युगक जहर अछि जे समाजक हर वर्ग बीच एकता नहि होमय दय रहल अछि। तर्क चलि रहल छल जे एहि बीमारी वा कमजोरी केँ दूर करबाक भार पुन: एक नेतृत्वकर्ता अपना पर नहि लय पुन: ब्राह्मणवर्ग पर किऐक दैत छथि, कि ई काज एक राजनेता व मिथिलाक धरतीपुत्रक रूप मे पप्पु यादव सहित पिछडा समाजक नेतृत्वकर्ताक अपनो नहि जे हर वर्ग केँ एकताक सूत्र मे बान्हथि? कम सऽ कम पप्पुजी जिनका मे लोक मिथिला राज्यक मुख्यमंत्री होयबाक दर्शन करैत अछि, जिनक विद्वताक चर्चा कतेको उच्चवर्गीय नेता सँ बहुत ऊपर गानल आ मानल जाइछ, तिनकर राजधर्म मे एहि तरहक जातिवादी कूचर्चा कतहु सँ शोभा नहि पबैत अछि। ओ स्वयं सशंकित छथि तऽ समाज केँ एकताक सूत्र मे केना बान्हल जा सकत? प्रश्न गंभीर अछि, मिथिला पुनर्निर्माणक एहि महान शत्रु केँ दमन जरुरी अछि। अपनहि नेता अनकर हाथे जातिवादिताक दमनपूर्ण नीति मे बिकाइत अछि, बिहार प्रति गर्व होइत छैक, मिथिला प्रति ओ स्वयं निराश अछि। एतेक तक जे पप्पूजी द्वारा देल गेल हिन्दी मे भाषण सँ कतेको लोक हूटिंग तक केलनि जेकरा अन्त मे अध्यक्ष विजय चन्द्र झा द्वारा हुनकर वात्सल्यप्रेमक भावसँ आदेश दैत संंसदभवन मे मैथिली बाजि दु-भषिया सबहक नौकरी बचेबाक बात कहि सान्त्वना देल गेल।
        मंच पर अफरातफरी सँ गंभीर दर्शक दीर्घा समारोह सँ बेसी महत्त्वपूर्ण कार्य करैत देखेलाह। आपसी घमर्थन आ बहस मे बड पैघ मर्म आबि रहल छल। जरुरत तऽ एहि बातक छैक जे ब्राह्मण केँ एकाधिकार वा मिथिला निर्माणक पेटेन्ट नहि सौंपि, मैथिली भाषा व मिथिला संस्कृति लेल स्वयं सर्जक बनि फेर सँ लोरिक, सलहेश, दीनाभद्री आदि जनवर्गीय लोकदेवता समान रक्षक बनैथ। जिनकर जे मातृभूमि अछि ओ वगैर कोनो जातीयताक भावना मात्र सच्चा मातृभूमिपुत्र बनि मिथिला निर्माण लेल सोचब तखन सनातनकालीन मिथिलाक रक्षा हेबे टा करतैक। मिथिला पुनर्निर्माणक प्रतिबद्धता प्रकट कैल जाय, एकर लोक-संस्कृतिक रक्षा कैल जाय, एकर सर्वकालीन विकास लेल पूर्वाधार निर्माणक बात हो, गैर-ब्राह्मणवर्ग केँ मिथिला-मैथिली पर जन्मसिद्ध अधिकार होयबाक स्वयंसिद्ध तथ्य प्रकट कैल जाय - एहि समस्त बातक वातावरण बनयबाक लेल मंच पर मिथिलाक पंच पाण्डव सांसदक संग जानकीरूपी रंजिता रंजन केर जिम्मेवारी राम कुमार झा द्वारा देल गेल।
           मंच उद्घोषक एवं मिथिलाक एक महान सृजनशील स्रष्टा किसलय कृष्णक जतेक प्रशंसा कैल जाय ओ कम होयत कारण एहि समारोहक असल मर्म हुनकर सुन्दर उद्घोषण द्वारा बेर-बेर सबकेँ ललकारैत रहल छल। अधिकारवादी संग नेतृत्वकर्ता पर जिम्मेवारी केँ आत्मसात करबाक उद्बोधन हुनक उद्घोषणक विशेषता छल। जखन कि आयोजन पक्ष अपन निश्चित विचारधारा सँ सीमित परिस्थिति बनबैत रहलाह तथापि कुशल उद्घोषण सँ किसलय कृष्ण नहि मात्र मंचासीन विभूति केँ परंच उपस्थित दर्शक व विभिन्न ठाम सँ आयल अन्य-अन्य विभूति लोकनि केँ सेहो तत्परता संग मिथिला पुनर्निर्माण प्रति जागृति पयबाक आह्वान कैल गेल। उद्घोषणाक क्रममे क्रमश: डा. राजेन्द्र विमल, डा. मनोरंजन झा, धीरेन्द्र प्रेमर्षि, अजित आजाद आ स्वयंरचित विभिन्न कवितांश राखि कार्यक्रम मे उपस्थित डा. देव शंकर नवीन, अक्षय कुमार चौधरी, प्रो. अमरेन्द्र झा, विमलकान्त झा, अमरनाथ झा, प्रवीण नारायण चौधरी, ललित नारायण झा, कौशल कुमार, राहुल कुमार राय, संजय झा नागदह, विमल जी मिश्र, प्रो. विद्यानन्द मिश्र, कामनानन्द मिश्र आदिक योगदानक चर्चाक संग-संग उपस्थिति हेतु स्वागत-अभिनन्दन-उद्गार प्रकट कैल गेल।
       डा. बैद्यनाथ चौधरी बैजु एहि कार्यक्रमक किछु मिश्रित प्रतिक्रियावादी माहौल सँ किछु आहत बुझेला। ओ अपन संछिप्त संबोधन मे मैथिली साहित्य ओ भाषा प्रति अगाध-अविस्मरणीय योगदान देनिहार ५ गोट 'ठाकुर' नामधारी केँ मोन पारलनि। ज्योतिरिश्वर ठाकुर, विद्यापति ठाकुर, कर्पुरी ठाकुर, ब्रज मोहन ठाकुर तथा डा. सी. पी. ठाकुर केर नाम लैत ओ समस्त दर्शक सँ समर्पित भावना सँ अपन पहिचान प्रति सतर्क रहबाक आह्वान केलनि। संगहि अखिल भारतीय मिथिला संघ द्वारा निर्धारित सब सीमा-देवाल सँ ऊपर उठि सुप्रसिद्ध मैथिली गीतकार सियाराम झा सरसक नारा 'एकमात्र संकल्प ध्यान मे - माँ मैथिली संविधान मे' कहैत वर्तमान समाधान हेतु संघर्षक नारा 'भीख नहि अधिकार चाही - हमरा मिथिला राज्य चाही' केर गर्जना कयलनि। एहि घोषणा सँ आह्लादित प्रेक्षागृह करतलध्वनि सँ गुंजायमान भऽ गेल।
          ज्ञात हो जे एहि समारोह द्वारा परंपरानुरूप एहि बेर ४ गोट स्रष्टा-अभियानी लोकनि केँ 'मिथिला विभूति सम्मान' सँ सम्मानित कैल गेल, जाहि मे श्री प्रेम कान्त चौधरी (गुवाहाटी), डा. महादेव झा (गाँधीनगर), श्री सुधिकान्त झा (नई दिल्ली) आ श्री प्रकाश झा (मैलोरंग) छथि। एहि महा-समारोहक सफलतम आयोजन हेतु दिन-राति एक कयनिहार डा. विद्यानन्द ठाकुर, ऋषि कुमार झा 'मलंगिया', प्रकाश झा, शंभुनाथ मिश्र, डा. ममता ठाकुर, राधानाथ झा, रौशन कुमार झा, संजीब झा व संस्थाक समस्त सदस्यगण सहित मैलोरंग टीम सक्रिय छलाह।
           सांगीतिक संध्याक सत्र मे कत्थक नर्तकी नलिनी चौधरी द्वारा विद्यापति गीत पर भाव नृत्यक प्रस्तुति सँ भेल। तदोपरान्त हरिनाथ झा, रंजना झा व अंजू झा केर सुमधुर विद्यापति गीत केर प्रस्तुति कैल गेल। एहि सत्रक संचालन मैथिली संगीत व मिथिला संस्कृतिक विशिष्ट जानकार विद्वान् शंकर कुमार झा द्वारा कैल गेल। कार्यक्रमक कमजोरी कही आ कि क्रान्तिकारी डेग, गीत-संगीतक प्रस्तुति बीच विद्वानक लंबा उद्बोधन आ मात्र विद्यापति-गीतक प्रस्तुति सँ आयोजित सांगीतिक संध्यामे लोक-उत्साह केर प्रत्यक्ष हत्या होइत प्रतीत भेल। स्वयं विद्यापतिक अवधारणा विरुद्ध जनवाणी यानि मैथिली लोक-गीतक एकहु टा प्रस्तुति नहि करबाक आयोजन-नीति सँ एहि सत्रक दुर्दशा भेल जेना लागल। सांगीतिक संध्या मे गीत तथा संचालन बीच सुर एवं तालक कमी सँ दर्शक-दीर्घा मे समस्त अपेक्षित जोश समाप्त प्राय भेला सँ दोसर सत्र मरहन्ना सन बनि गेल छल। अन्त-अन्त मे सब छान-पग्घा केँ तोडैत हरिनाथ झा द्वारा 'हे गे बुधनी माय', 'जुल्फीवाली कनिया कमाल करैत छी' गाबि जोश अनबाक प्रयास कैल गेल परंच ताबत धरि दर्शकदीर्घा मे मात्र सुन्दर-सुन्दर कुर्सी सब श्रोतारूप मे देखा रहल छल।
           कार्यक्रमक अन्त मे संस्थाक अध्यक्ष व मंचक अध्यक्ष द्वारा गायक हरिनाथ झा, गायिकाद्वय रंजना एवं अंजू संग मंच-संचालक किसलय कृष्ण केँ प्रतीक चिह्न दय सम्मानित कैल गेलनि, धरि समस्त म्युजिसियन लोकनि मुह तकैत छूछ सम्मान सँ विभूषित भेलाह। मैथिली मंच पर संगीत देनिहारक कोनो पूछ नहि होयबाक भावना सँ आहत कीबोर्ड पर शानदार प्रदर्शन करनिहार हँसमुख शशि मात्र अपन विहुँसैत मौन प्रतिक्रिया दैत एहि रिपोर्टक लेखक प्रवीण केँ हृदय छलनी-छलनी कय देलाह।
Pravin Narayan Choudhary 
ke  kalam san 

शुक्रवार, 22 अगस्त 2014

विद्यापतिधाम - सहरसा



विद्यापतिधाम - सहरसा

        प्रो. मायानन्द मिश्र स्मृति समारोह - सहरसा मे दर्शन देला मिथिलाक असली जनकरूप 'भोगेन्द्र शर्मा' जी! हिनकर तस्वीर आर हिनकर कठोर तपस्या सँ सृजित 'विद्यापतिधाम' केर तस्वीर अपने सब लेल राखि रहल छी। 

कार्यक्रम केर उद्घोषक श्री किसलय कृष्ण जी सँ हिनक पूर्ण परिचय भेटल, तेकर बाद विशेष परिचय आदरणीय विमल कान्त बाबु केर मुखारवृन्द सँ स्पष्ट भेल - संपूर्ण सभा मे एतेक महत्त्वपूर्ण मुदा अति-साधारण भाव-भंगिमाक संग भोगेन्द्र जी केँ देखि साक्षात् कोनो देवताक दर्शन भऽ रहल छल से बुझलहुँ।

हिनकर परिचय - साधारण मजदूरी सँ अपन जीवन निर्वाह करनिहार एक स्वाभिमानी मिथिला चिन्तक, अयाची, अपन जीवननिर्वाहक अन्य कार्यक अलावे निरन्तर मैथिली लेखन मे रत आ मिथिला तथा मैथिलीक लेल अपन सर्वस्त निछावड करय लेल तैयार व्यक्तित्व केर नाम भेल 'श्री भोगेन्द्र शर्मा'। विभिन्न सभा और स्वाध्याय, श्रुति आधारित मिथिला इतिहास सँ सुनल सुप्रसिद्ध नाम - विद्यापति, सलहेश, लोरिक, दीना-भद्री, गार्गी, भारती, मंडन, अयाची सहित विभिन्न अन्य ऐतिहासिक नाम सँ प्रभावित होइत ठानि लेला जे सहरसा आसपास एकटा एहन कीर्ति करब जे सबहक लेल दर्शनीय आ अनुकरणीय हो। एहि तरहें एक्कहि स्थल पर समस्त मिथिला विभूति केर मूर्ति स्थापित करैत ओहि जगह केर नाम देलनि 'विद्यापतिधाम'। हिनकर दोसर परिचय छन्हि जे फूहर गीत हिन्दी वा भोजपुरी कियो जँ बजा रहल छथि तऽ असगरे आन्दोलन ठाइन दैत छथिन। मात्र मैथिलीक माधुर्य सँ समस्त आवोहवा मे हवन होइत रहबाक चाही। हमर बेर-बेर प्रणाम अछि हिनका!!

जगह लगभग तैयार भऽ गेल छैक। बहुत जल्दी एकर उद्घाटन होमय जा रहल छैक। भोगेन्द्र जी केर एहि समर्पण आ दृढसंकल्प सँ महान कीर्ति करबाक सोच सहरसा, मधेपुरा, सुपौल वा जतय कतहु लोक सुनलनि, केओ प्रभावित होइ सँ नहि बचलाह। हम सब तऽ एहन-एहन असल मिथिला जनक केँ पाबि कृतार्थ भऽ रहल छी। आशा अछि जे एहने स्वसंकल्प केर महान मनिषी लोकनि एक बेर फेर मिथिला केँ पूर्व समृद्ध रूप मे आनि देता।
Pravin Narayan Choudhary 


शनिवार, 19 जुलाई 2014

मिथिला राज्य किऐक?

मिथिला राज्य किऐक?

   
 भारत स्वतंत्र भेलाक बाद संघीय गणतांत्रिक राष्ट्र बनल, केन्द्र तथा राज्य सरकार द्वारा संविधान केर शासन सँ देश संचालित हेबाक निर्णय भेलैक। मिथिला भारतक अभिन्न हिस्सा आदिकालीन इतिहास, पूर्ण संस्कृति, संपन्न आ विकसित भाषा, लोकसंस्कृति, विशिष्ट पहिचान सहित केर क्षेत्र रहल अछि। इतिहास मे 'मिथिलादेश, बज्जिप्रदेश, तिरहुत, विदेहराज्य, आदि' नाम सँ सुविख्यात मिथिला केँ राज्य (प्रान्त) रूप मे मान्यता पेबाक माँग लगभग १९०५ ई. सँ कैल जाइत रहल अछि। अन्ततोगत्वा १९१२ ई. बिहार नाम सँ एक प्रान्त विभिन्न संस्कृति केँ एकत्रित रूप मे ब्रिटीश भारत मे बनल जाहि मे मिथिला क्षेत्र केँ सेहो गाँथि देल गेल।

एक तरफ बर्बर अंग्रेजी हुकुमत सँ परतंत्र भारत स्वाधीनताक संग्राम लडि रहल छल तऽ दोसर दिशि भारतीय दर्शन, मूल्य, मान्यता आ पहिचानक विशिष्टताकेँ नष्ट करबाक लेल भिन्न‍-भिन्न तरहक शासनादेश पारित होइत छल। एहि बीच मिथिलाक आदिकालीन इतिहास पर मध्यकालीन भारतक मगध सम्राज्य केर वर्चस्व केँ थोपैत बंग प्रान्त सँ इतर बिहार प्रान्त जाहि मे मिथिला, मगध, कोसल (उडीसा), झारखंड, भोजपुर केँ इकट्ठा राखल गेल। राजनैतिक रूप सँ चेतनशील जनमानस बिहार सँ अलग उडीसा आर झारखंड पाबि चुकल अछि, मुदा निरंतर संघर्षरत मिथिला विद्वान् समाज द्वारा उठायल गेल पृथक मिथिला राज्य केर माँग आइ धरि अधर मे लटकल अछि।

बिहार निर्माणक सौ वर्ष पूरा भऽ चुकल अछि। मिथिला लिपि विलुप्त, मैथिली भाषा मृत्युक कगार पर, मिथिला क्षेत्रीय पौराणिक धरोहर मटियामेट, लोकसंस्कृति पर पलायनक खतरनाक जहरीला दंश सँ लहुलुहान मिथिलावासी अपनहि सँ अपन पहिचान बदलबाक घृणित अवस्था मे प्रवेश पाबि चुकल अछि। जाहि मैथिली भाषाक ओज विश्व केर अन्य भाषा केँ सेहो समुचित मार्गदर्शन केलक, आइ वैह मैथिली विपन्न सृजनशीलता सँ रुग्ण अछि। बहुत देरी सँ भारतीय संविधान द्वारा एहि भाषा केँ सम्मान देल गेल, मुदा एहि नाममात्र सम्मान सँ क्रियात्मक योगदान हाल धरि नगण्य राखि केवल मिथिलाक पहिचान केँ नष्ट करबाक खतरनाक षड्यन्त्र बुझाइत अछि, हर तरहें मानू 'बिहारी उपनिवेशवाद' केँ जबरदस्ती मिथिला पर लादल गेल हो। समय-समय पर राजनीतिक विचार-विमर्शमे मिथिला राज्य केर निर्माण सन्दर्भ उपरोक्त चिन्ता केँ मनन कैल गेल अछि, मुदा हर बेर मिथिलाक विरुद्ध निर्णय सँ अवस्था जस केँ तस बनल अछि, बरु दिन-ब-दिन आरो बेसी चिन्तनीय बनल जा रहल अछि।

१९४७ ई. मे भारतक स्वतंत्रता प्राप्ति भेला पर स्वशासन मे प्रवेश राष्ट्र केर नीति-निर्माता राज्य गठन हेतु विचार-विमर्श शुरु केलनि। भाषा तथा भौगोलिक पहिचान केर आधार पर राज्य बनेबाक निर्णय बहुत पहिनहि सँ रहल, एहि आधार मे आरो नव नीति जेना राज्यक निर्माण जँ लोकहित मे होइ, राष्ट्रक अखण्डता पर असर नहि पडैक, जनभावना अनुरूप नव राज्य बनय; मोटामोटी एहि नीति संग नया राज्य केर निर्माणक निर्णय कैल गेल छल। भारतक विभिन्न भाग मे राज्य बनेबाक लेल आन्दोलन सबहक परिणाम जे सरकार द्वारा राज्य पुनर्गठन आयोग केर गठन कैल गेल। नव अधिनियम पास कैल गेल। किछु नव राज्य सेहो बनायल गेल। मुदा मिथिलाक माँग केँ 'जनभावना अनुरूप' नहि कहि १९५६ मे नकारल गेल। नकारबाक लेल एक महत्त्वपूर्ण कारण इहो छल जे 'मैथिली भाषा' केँ भारतीय भाषाक मान्यता प्राप्त सूची मे ताहि दिन स्थान नहि छल, माँग मात्र उच्च शिक्षित वर्ग द्वारा उठाओल गेल छल, नहि कि आम जनमानसक एहेन कोनो इच्छा अछि, बिहार मे रहितो एहि क्षेत्रक विशेष ध्यान राखल जा सकैत छैक, आदि आधार पर मिथिला राज्य अस्वीकारल गेल छल।

परिणाम सोझाँ अछि जे मिथिलावासी मैथिलीभाषी मैथिल आइ बिहारी बनि अपनहि भूमि सँ पलायन करय लेल मजबूर छथि आर मिथिलाक समस्त लोकसंस्कृति विलोपान्मुख बनि गेल अछि। लोकपलायनक विस्फोट एहि क्षेत्र लेल अभिशाप प्रमाणित भऽ चुकल अछि। एहि जहरक प्रभाव लगभग मिथिलाक मृत्यु तय कय देने अछि।

जँ मिथिला राज्य केर गठन नहि होयत तऽ एकरा बचेनाय असंभव अछि, कारण बिहार मे आर्थिक उपेक्षा सँ लैत आधारभूत संरचनाक विकास सेहो पूर्णरूपेण ठप्प पडि गेल अछि, बिहारक समस्त बजट विनियोजन मात्र पटना आ दक्षिणी बिहारक क्षेत्र मे केन्द्रित अछि। मिथिला क्षेत्र मे जेहो मिल, उद्योग, व्यवसाय आर आर्थिक आधार सब छल तेकरा क्रमश: क्षय कैल जा चुकल अछि, जे जातीय सौहार्द्रता सँ सामाजिक विकास केर स्वस्फूर्त संरचना सब छल ओ सब बिहारी जातिवादी राजनीति केर भुमरी मे चौपट भऽ चुकल अछि। आइ मिथिला लोकविहीन आ आपसी ईर्ष्या-द्वेष सँ भरल समाज संग अपन भविष्य लेल कुहैर-कुहैर कानि रहल अछि।

मिथिला राज्य एकमात्र समाधान, कारण स्वशासनक अधिकार भारतीय गणतंत्र केर संविधान द्वारा न्यायसंगत मानल गेल छैक। मिथिला क्षेत्रक भरपूर विकास लेल मिथिलाक अपन सरकार, अपन कोष, अपन योजना आ मिथिलाक अपनहि लोकनेता बनैत कल्याण कय सकैत अछि। आउ, सिलसिलेवार नजरि दी किछु महत्त्वपूर्ण विन्दु पर:

१. राज्य पुनर्गठन आयग जे भारत सरकार द्वारा गठित छलए करीब ६० साल पूर्व अपन रिपोर्ट मे कहलकैक जे मैथिली भाषा संविधानक अष्टम् अनुसूची मे दर्ज नहि अछि ताहि हेतु मिथिला राज्यक निर्माण संभव नहि अछि।

२. २२ दिसम्बर, २००३ केँ मैथिली संविधानक अष्टम् अनुसूची मे स्थान प्राप्त कएलक, तकर बाद मिथिला राज्य केर निर्माणक मार्ग संवैधानिक रूप मे प्रशस्त भऽ चुकल अछि।

३. मैथिली भाषा-भाषी जनसंख्या जकर संख्या भाषाई आधार पर बनल राज्य यथा कश्मीरी, मणिपुरी, पंजाबी, आसामी, मलयाली, कन्नड सँ बहुत बेसी अछि।

४. हमरा सबसँ बेसी भाषा बजनिहार केवल हिन्दी, उर्दू, तेलगु, मराठी, तमिल तथा बंगला भाषाभाषी अछि। एहि हिसाब सऽ संपूर्ण देश मे सातम बहुसंख्यक भाषाभाषी समूह हम सब छी। भारतीय संविधान केर अन्तर्गत प्रदत्त अधिकारक तहत त्वरित कार्रबाई कय हमरा सब अलग राज्य केर अधिकारी छी, परन्तु हमरा सबकेँ एहि अधिकार सँ वंचित राखल गेल अछि।

५. मिथिला राज्य केर पक्ष मे एकटा और महत्त्वपूर्ण विन्दु मैथिली भाषाकेँ विशिष्ट वर्णमाला अछि जे तिलकेश्वरस्थान महादेव मन्दिर २०३ AD मे वर्णित अछि। ई देश केर कुनु भाषा सँ पुरान भाषा अछि, परन्तु हिन्दी (देवनागरी) आ बंगला मिथिलाक्षर सँ बादक वर्णमाला अछि।

६. आधुनिक प्रजातांत्रिक देश केर पहिल शर्त कल्याणकारी राज्यक रूप छैक, तकर आधार प्राथमिक शिक्षा जे मातृभाषा मे हेबाक चाही। आधुनिक भारतक ओ राज्य जकर प्राथमिक शिक्षा अपन मातृभाषाक माध्यम मे छैक से सब रूपे विकसित राज्यक श्रेणीमे आबि गेल अछि। परन्तु मिथिलाक अन्दर जतय प्राथमिक शिक्षाक माध्यम हिन्दी अछि ओतय स्कूलक ड्राप-आउट देशे नहि अपितु संसार मे सबसँ बेसी अछि। ओहि ड्राप-आउट (बीच मे पढाई छोडनिहार) केँ रोकबा लेल राज्य सरकार आ केन्द्र सरकार आर्थिक प्रोत्साहन दऽ रहल छैक। लेकिन कोनो सरकार लग एकर स्थायी इलाज जे प्राथमिक शिक्षा अपन मातृभाषा मे हेबाक चाही तकर योजना नहि अछि। एकर उदाहरण बिहार सरकार द्वारा एक लाख शिक्षक केर नियुक्तिक सन्दर्भ विधान परिषद् मे शिक्षा मंत्री द्वारा निर्लज्जतापूर्वक देल स्वीकारोक्ति अछि जे मैथिली शिक्षक केर नियुक्तिक प्रावधान सरकार लग नहि अछि।

७. किछु भ्रान्ति जे भाषाई आधारपर मिथिला राज्यक गठन सँ जे हिन्दीभाषी छथि से कमजोर हेतैक, से सम्पूर्ण रूपेण भ्रामित करयवला सोच अछि। किऐक तऽ देशक आबादीक एकटा पैघ हिस्सा अगर निरक्षर आ अविकसित रहत तऽ वैश्विक शक्ति बनेक भारतक अवधारणा हास्यास्पद भऽ जायत। ठीक एकर उनटा मिथिला राज्यक गठन सँ ओकर प्राथमिक शिक्षा केर माध्यम मातृभाषा बनत, जाहि सँ मिथिलाक विकासक संग देशक विकास हेतैक।

८. आजादी केर लगभग ७० वर्ष भऽ गेल मुदा मिथिला मे एकोटा बडका औद्योगिक युनिट नहि लागल, उनटे ब्रिटिश कालक सम्पूर्ण उद्योग-धंधा बन्द कय देल गेल जकर दुष्प्रभाव ई भेल जे मिथिला सस्ता आ अकुशल श्रमिक आपूर्तिक क्षेत्र मे परिणति पाबि गेल। एहि तरहें एतुका जोन-बोनिहारकेँ देशक विभिन्न भागमे प्रवासक दौरान सब तरहक अपमान, गारि आ गंभीर शोषण केर सामना करय पडैत छैक।

९. कृषि क्षेत्र केँ एकटा व्यापक षड्यंत्रक तहत बर्बाद कएल गेल। मिथिलाक कृषिक सन्दर्भ मे राज्य सरकार आ केन्द्र सरकार केर योजना बनौनिहार एतुका प्राकृतिक-भौगोलिक अवस्था केँ नजरअन्दाज कएलन्हि। सडक तथा रेल मार्गक निर्माण एवं बाढि नियंत्रण केर नाम पर मिथिलाक मूल पूँजी जलस्रोत जे विभिन्न हिमाली नदी सँ प्राप्त होएत रहल तेकर सबहक प्राकृतिक बहाव केँ तोडि-मोडि स्वस्फूर्त जल-सिंचन, जल-भंडारण आदि केँ ध्वस्त कय देल गेल।

१०. जलस्रोतक समुचित दोहन नहि कय अदूरदर्शी योजना सँ जनहित केँ बड पैघ अप्रत्यक्ष नोकसानी देल गेल। आइ मिथिला मे भूमिगत जलस्तर तक घटि गेल अछि, मिथिला सँ मत्स्य-कृषि गायब भऽ चुकल अछि, पनबिजली, सिंचाई, सेहो सुव्यवस्थापित नहि अछि। एहि सँ जनजीवन दूरगामी प्रभाव सँ प्रभावित भेल अछि। यदाकदा प्रकृति विरुद्ध कार्य भेलाक दुष्परिणाम बाँध टूटनाय सँ जल-प्रलय केर रूप मे महाविनाशकारी बाढि तथा बाढिजनित विभिन्न प्रकोप सँ जनसमुदाय क्षति केँ भोगैत छथि।

११. १९म शताब्दी धरि मिथिला चाउरक सबसँ पैघ उत्पादक आ निर्यातक केन्द्र छल। मात्र मयानमार (वर्मा) मिथिला सँ बेसी धान उपजबैवला देश छल। तकरा एकटा सुनियोजित षड्यंत्रक तहत बर्बाद कएल गेल।

१२. आइ एतेक वृहद जनसंख्याक पालन-पोषणक आधार नहिये कृषि अछि आ नहिये उद्योग अछि। एतेक पैघ जनसंख्या पलायन लेल मजबूर अछि। अकुशल श्रमिक द्वारा भेजल गेल पैसा पर जीवन-यापन करैक लेल मजबूर अछि।

१३. एकर एकमात्र कारण राजनेता तथा अफसरशाहीक औपनिवेशिक सोच आ क्रियाकलाप अछि जकर एकटा उदाहरण मिथिलाक बैंकिंग प्रणाली अछि। क्रेडिट डिपोजिट रेशियो मे मिथिलांचलक बैंक मे जमा कएल पैसा मिथिलाक विकास मे नहि लागि कऽ मुम्बई आ दिल्लीक स्टाक एक्सचेन्ज मे जाइत अछि। एकर अर्थ अविकसित गरीब मिथिलाक लोकक पाइ विकसित राज्यक आगाँक विकास लेल खर्च कएल जाइत अछि। ई एहन निर्धन क्षेत्रक निवासीक घोर शोषणक उदाहरण अछि।

१४. मिथिलाँचलक अवाम एखन तक कोनो उग्रवाद, अतिवाद आ माओवाद सँ प्रभावित नहि भेल अछि। कि भारत सरकार एहि शांतिवादी-सहिष्णुवादी समुदायकेँ निरन्तर आर्थक शोषण सँ उग्र आन्दोलनक रास्ता पर जेबाक लेल मजबूर कय रहल अछि?

१५. सुगौली संधि (१८१६) मे मिथिलाँचलक हृदयकेँ दू फाड कऽ देलक, हलाँकि हालहि नेपाल गणतंत्र मे परिणति पाबि नव संविधान बनेबाक प्रक्रिया अन्तर्गत संघीयताक स्थापना लेल प्रयासरत अछि आ ओतहु मिथिला राज्य केर स्थापनाक माँग वर्तमान संविधान सभा द्वारा विचाराधीन अछि।

१६. पछिला संसदक विभिन्न सेशन मे ०६.१२.२०१० सँ १३.१२.२०१० तक १९२ घंटाक धरना कार्यक्रम संपन्न भेल अछि आ हाल धरि हरेक सेशनक प्रथम दिन रूटीन धरना द्वारा मिथिला राज्य केर माँग निरन्तरता मे राखल जा रहल अछि।

१७. पन्द्रहम लोकसभा अन्तर्गत दरभंगा सँ सांसद कीर्ति झा आजाद द्वारा मिथिला राज्यक माँग लेल प्राइवेट मेम्बर बिल "बिहार झारखंड रिआर्गेनाइजेशन बिल" सेहो संसदक पटल पर राखल जा चुकल अछि।

१८. सोलहम लोकसभा जे देश भरि द्वारा सांस्कृतिक राष्ट्रवाद केर विशाल समर्थन प्राप्त केलक अछि ताहि मे ५ लोकसभा सदस्य द्वारा मैथिली भाषा मे शपथ-ग्रहण करैत मिथिला राज्यक माँग केँ अग्रसर कैल गेल अछि आ दर्जनों सांसद एहि लेल अपन समर्थन स्वीकारोक्ति देने छथि।

सूचनार्थ:अखिल भारतीय मिथिला राज्य संघर्ष समिति विभिन्न मैथिली भाषा-भाषीक संगठनक समुच्चय अछि। ई तमाम राजनैतिक दल तथा समाजिक संगठन कय मिथिला राज्यक एजेन्डा पर कार्य करैक लेल आग्रह करैत अछि।

Pravin Narayan Choudhary