dahej mukt mithila

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शुक्रवार, 23 जून 2017

वरक - परिछन

वरक - परिछन 

जु चलियौ  यौ   दूल्हा ससुर अंगना  | 
नव  साजल   सुमंगल  मंडप  अंगना   || 
                          आजु चलियौ------
परिछन    अयली   सासू     सुनयना   | 
  आजु हियरा जुरायल  निरखि नयना  | |   
                        आजु चलियौ -----
माथे  मणि मौर  , तन शोभे  पिताम्बर  | 
छवि     अवलोकू      नवल    बहिना    || 
                           आजु चलियौ ------
जेहने     धीया  , ओहने   वर   सुन्दर  | 
आजु   भेल   हमरो   सुफल    सपना  || 
                          आजु चलियौ ------
"रमण"  सखी जन  परीछन  चलली  | 
कने  धीरे - धीरे  बाजा  बजारे  बजना 
                         आजु चलियौ------

लेखक -
 रेवती रमन झा "रमण "

बुधवार, 21 जून 2017

कनियाँ परिछन गीत

|| कनियाँ  परिछन  गीत || 


धीरे -  धीरे       चलियो   कनियाँ 
हम  सब   परिछन  अयलों    ना  | 
आबो      बिसरू    अपन  अंगना 
 हमरा    अंगना    अयलों    ना   || 
                    धीरे - धीरे  ------
लाउ  हे कलश जल , चरण पखारू 
अंगना     कनियाँ    अयली   ना   | 
शुभ - शुभ    गाबू   मंगल     चारु 
अंगना     कनियाँ    अयली   ना  || 
                        धीरे - धीरे  ------
  माय के बिसरू  कनियाँ ,बाबू के बिसरू 
हे   सुमिरु   सासू    जी   के   ना   | 
बिसरू        आबो     अपन     नैहर 
अहाँ     सासुर     अयलो     ना     || 
                           धीरे - धीरे  ------
महल अटारी कनियाँ  ,बिसरू भवनमा 
से      चीन्ही     लीय        ना  | 
" रमण "       टुटली         मरैया  
अहाँ      चीन्ही      लीय        ना  || 
                    धीरे - धीरे  ------

लेखक - 
रेवती रमण झा "रमण "

दहेज़ मुक्त मिथिला 60 किलोमीटर के दौड़ में धावक केर संग देलैथ हुनक संगिनी

मंगलवार, 6 जून 2017

लालदाइक चिठ्ठी

||  लालदाइक  चिठ्ठी || 
 रचैता - रेवती रमण झा " रमण "
 लाल दाई हम ई  चिठ्ठी 
लिखि  रहल  छी आमक  गाछी सँ  || 
कलकतिया  केरवी  कृष्ण भोग 
बम्बइ  बिज्जू करपुरिया  पर 
पातक छाया  सँ  फुदकि -फुद्कि 
कोकिल  अछि  अपन अलाप दैत 
कचकि  उठल  मोर ह्रदय अहाँ  बिनू 
ओकर करुण - पिपासी  सँ  || 
               लाल दाई --  लिखि रहल --
पपीहा गबैत , के अछि बुझैत 
ओ  कोन  दर्द मे  अछि  व्याकुल 
की पती  विरह में  पात -पात 
अति विरहाकुल 
दू टूक  करेजी  हमर भेल 
देखि ओकर प्रवल  अभिलाषी सँ || 
                 लाल दाई --  लिखि रहल --
तोता आ मैनाक बिवाद 
अछि चलि  रहल , तोता कहल 
सुन  रे  मैना ,  ई सत्य थीक 
हो नारी  या  पुरुष  जाति 
प्रीत  जोड़ी  , जे लैत  तोरि  
ओ  मानव छली  तँ  नर्क पौत 
मरियो कउ  जायत   जँ  काशी सँ  || 
            लाल दाई --  लिखि रहल --
बुल - बुल  प्रेमक जे हर्ष - विषाद 
की थीक  स्वाद  ?
वर गीत , प्रीत के गाबि  रहल 
सुख पाबि रहल  
 अछि  तरुण  तरुणियाँ  पत - दल  में 
सप्तम स्वर पंचम कल - रव सँ  || 
              लाल दाई --  लिखि रहल --
निम् कदम्ब इमली छाया तर 
बैसल पथ कउ  नित पाँतर  में
अहाँक  कुसल हम हेरि -  हेरि 
सदिखन  पूछैइत 
नित  अहींक  ग्राम - निवासी  सँ || 
            लाल दाई --  लिखि रहल --
                         -:-


बुधवार, 31 मई 2017

बजरंग - बत्तसी मैथिली हनुमान चालीसा से

बजरंग - बत्तसी 

             मैथिली हनुमान चालीसा से -
 ॥ छंद  ॥ 
जय  कपि काल  कष्ट  गरुड़हि   ब्याल- जाल 
केसरीक   नन्दन   दुःख भंजन  त्रिकाल के  । 
पवन   पूत  दूत    राम , सूत  शम्भू  हनुमान  
बज्र  देह  दुष्ट   दलन ,खल  वन  कृषानु के  ॥ 
कृपा   सिन्धु   गुणागार , कपि  एही  करू  पार 
दीन  हीन  हम  मलीन,सुधि  लीय  आविकय । 
"रमण "दास चरण आश ,एकहि चित बिश्वास 
अक्षय  के काल थाकि  गेलौ  दुःख गाबि कय ॥ 
|| दोहा || 
वंदऊ  शत  सुत  केशरी  सुनू   अंजनी  के  लाल  | 
विद्द्या बुधि आरोग्य बल दय  कय  करू निहाल  || 
||  चौपाई || 
जाहि  पंथ  सिय  कपि तंह  जाऊ  | रघुवर   भक्त    नाथे  हर्षाऊ  ॥ 
यतनहि धरु रघुवंशक  लाज । नञि एही सनक कोनो भल काज ॥ 
श्री   रघुनाथहि   जानकी  जान ।  मूर्छित  लखन  आई हनुमान  ॥ 
बज्र  देह   दानव  दुख   भंजन  ।  महा   काल   केसरिक    नंदन  ॥ 
जनम  सुकारथ  अंजनी  लाल । राम  दूत  कय   देलहुँ   कमाल  ॥ 
रंजित  गात  सिंदूर    सुहावन  ।  कुंचित केस कुन्डल मन भावन ॥ 
गगन  विहारी  मारुति  नंदन  । शत -शत कोटि हमर अभिनंदन ॥ 
बाली   दसानन दुहुँ  चलि गेल । जकर   अहाँ  विजयी  वैह   भेल  ॥ 
लीला अहाँ के अछि अपरम्पार ।  अंजनी    लाल    करु  उद्धार   ॥ 
जय लंका विध्वंश  काल मणि  । छमु अपराध सकल दुर्गुन गनि॥
  यमुन   चपल  चित  चारु तरंगे  । जय हनुमंत  सुमति   सुख गंगे ॥  
हे हनुमंत  सकल गुण  सागर  ।  युगहि चारि कपि  कैल उजागर ॥ 
अंजनि   पुत्र  पताल  पुर  गेलौं  । राम   लखन  के  प्राण   बचेलों  ॥ 
पवन   पुत्र  अहाँ   जा  के  लंका । अपन  नाम  के  पिटलों  डंका   ॥ 
यौ  महाबली  बल  कउ  जानल ।अक्षय कुमारक प्राण निकालल ॥ 
हे  रामेष्ट   काज  वर  कयलों  । राम   लखन  सिय  उर  में लेलौ  ॥ 
फाल्गुन  सखा  ज्ञान गुण सार ।  रुद्र    एकादश    कउ  अवतार  ॥ 
हे  पिंगाक्ष  सुमति  सुख  मोदक । तंत्र - मन्त्र  विज्ञान  के  शोधक ॥ 
अमित विक्रम छवि सुरसा जानि । बिकट  लंकिनी  लेल पहचानि ॥ 
उदधि क्रमण गुण शील निधान।अहाँ सनक नञि कियो वुद्धिमान ॥ 
सीता  शोक   विनाशक  गेलहुँ । चिन्ह  मुद्रिका  दुहुँ   दिश  देलहुँ ॥ 
लक्षमण  प्राण   पलटि  देनहार  ।  कपि  संजीवनी  लउलों  पहार ॥ 
दश   ग्रीव दपर्हा  ए कपिराज  ।   रामक  आतुरे   कउलों   काज  ॥ 
कपि   एकानन  ह्यो  पंचानन   |  जय हनुमंत   जयति  सप्तानान || 
यौ महाबली जग  दुख   मोचन  | दीव्य  दरश लय व्याकुल लोचन || 
वर गुण निधान विद्या-बुधि खान |अहाँ सनक नञि कियो हनुमान|| 
बिनु हनुमंत जुगुति  नञि  राम |  बिनु हरि  कृपा  कतय सुखधाम  || 
जतय अहाँ  मंगल तेहि  दुवारि | करुण कथा  कते  कहल पुकारी  || 
  यश  जत  गाऊ   वदन संसार  |  कीर्ति  योग्य नञि पवन कुमार  ||  
केशरी कंत  विपति  वर  भार  |  वेगहि  आबि  रमण   करू  पार  ||
प्रभु मन  बसिया  यौ  बजरंगी | कुमतिक  काल  सुमति के संगी  || 
सुनू कपि कखन हरब दुख मोर | बाटे   जोहि   भेलहुँ  हम   थोर  ||  
॥ दोहा ॥  
प्रात काल  उठि जे  जपथि ,सदय धरथि  चित ध्यान । 
शंकट   क्लेश  विघ्न  सकल  , दूर  करथि   हनुमान  ॥ 

रचैता -
रेवती रमण झा " रमण "
ग्राम - पोस्ट - जोगियारा पतोर
आनन्दपुर , दरभंगा  ,मिथिला
मो 09997313751

सोमवार, 22 मई 2017

बजरंग - बत्तसी

बजरंग - बत्तसी 
             मैथिली हनुमान चालीसा से -


 ॥ छंद  ॥ 
जय  कपि कल  कष्ट  गरुड़हि   ब्याल- जाल 
केसरीक  नन्दन  दुःख भंजन  त्रिकाल के  । 
पवन  पूत  दूत    राम , सूत शम्भू  हनुमान  
बज्र देह दुष्ट   दलन ,खल  वन  कृषानु के  ॥ 
कृपा  सिन्धु   गुणागार , कपि एही करू  पार 
दीन हीन  हम  मलीन,सुधि लीय आविकय । 
"रमण "दास चरण आश ,एकहि चित बिश्वास 
अक्षय  के काल थाकि  गेलौ  दुःख गाबि कय ॥ 
|| दोहा || 
वंदऊ  शत  सुत  केशरी  
सुनू   अंजनी  के  लाल  | 
विद्द्या बुधि आरोग्य बल 
दय  कय  करू निहाल  || 
||  चौपाई || 
जाहि  पंथ  सिय  कपि तंह  जाऊ  | रघुवर   भक्त    नाथे  हर्षाऊ  ॥ 
यतनहि  धरु  रघुवंशक  लाज  । नञि एही सनक कोनो भल काज ॥ 
श्री   रघुनाथहि   जानकी  ज्ञान ।   मूर्छित  लखन  आई हनुमान  ॥ 
बज्र  देह   दानव  दुख   भंजन  ।  महा   काल   केसरिक    नंदन  ॥ 
जनम  सुकरथ  अंजनी  लाल ।  राम  दूत  कय   देलहुँ   कमाल  ॥ 
रंजित  गात  सिंदूर    सुहावन  ।  कुंचित केस कुन्डल मन भावन ॥ 
गगन  विहारी  मारुति  नंदन  । शत -शत कोटि हमर अभिनंदन ॥ 
बाली   दसानन दुहुँ  चलि गेल । जकर   अहाँ  विजयी  वैह   भेल  ॥ 
लीला अहाँ के अछि अपरम्पार ।  अंजनी    लाल    कर    उद्धार   ॥ 
जय लंका विध्वंश  काल मणि  । छमु अपराध सकल दुर्गुन गनि॥
  यमुन चपल  चित  चारु तरंगे  । जय  हनुमंत  सुमित  सुख गंगे ॥  
हे हनुमान सकल गुण  सागर  ।  उगलि  सूर्य जग कैल उजागर ॥ 
अंजनि  पुत्र  पताल  पुर  गेलौं  । राम   लखन  के  प्राण  बचेलों  ॥ 
पवन   पुत्र  अहाँ  जा  के  लंका । अपन  नाम  के  पिटलों  डंका   ॥ 
यौ  महाबली  बल  कउ  जानल ।  अक्षय कुमारक प्राण निकालल ॥ 
हे  रामेष्ट   काज  वर  कयलों  । राम   लखन  सिय  उर  में लेलौ  ॥ 
फाल्गुन  साख  ज्ञान गुण सार ।  रुद्र    एकादश    कउ  अवतार   ॥ 
हे  पिंगाक्ष सुमित सुख मोदक । तंत्र - मन्त्र  विज्ञान  के  शोधक ॥ 
अमित विक्रम छवि सुरसा जानि । बिकट  लंकिनी  लेल पहचानि ॥ 
उदधि क्रमण गुण शील निधान।अहाँ सनक नञि कियो वुद्धिमान ॥ 
सीता  शोक   विनाशक  गेलहुँ । चिन्ह  मुद्रिका  दुहुँ   दिश  देलहुँ ॥ 
लक्षमण  प्राण  पलटि  देनहार ।  कपि  संजीवनी  लउलों  पहार ॥ 
दश   ग्रीव दपर्हा  ए कपिराज  ।  रामक  आतुरे   कउलों   काज  ॥ 
कपि  एकानन  हयो  पंचानन   जय हनुमंत  जयति  सप्तानन  || 
वर्ण सिन्दूर  देह दुख   मोचन  | दीव्य  दरश लय व्याकुल लोचन || 
गुण  निधान कपि मंगल कारी | दुष्ट दलन  जय - जय  त्रिपुरारी || 
बिनु हनुमंत एता  नञि  राम | बिनु हरि  कृपा  कतय सुखधाम  || 
जतय अहाँ  मंगल तेहि  दुवारि | करुण कथा  कते  कहल पुकारी  || 
  यश जत  गाऊ   वदन संसार  |  कीर्ति  योग्य नञि पवन कुमार  ||  
केशरी कंत  विपति  वर  भार  |  वेगहि  आबि  रमण   करू  पार  ||
प्रभु मन  बसिया  यौ  बजरंगी | कुमतिक  काल  सुमति के संगी  || 
सुनू कपि कखन हरब दुख मोर | बाटे   जोहि   भेलहुँ  हम   थोर  ||  
॥ दोहा ॥  
प्रात काल  उठि जे  जपथि ,सदय धराथि  चित ध्यान । 
शंकट   क्लेश  विघ्न  सकल  , दूर  करथि   हनुमान  ॥ 
रचैता -
रेवती रमण झा " रमण "
ग्राम - पोस्ट - जोगियारा पतोर
आनन्दपुर , दरभंगा  ,मिथिला
मो 09997313751

मंगलवार, 9 मई 2017

|| दहेज़ आगिलगुआ ||


हेज़ आगिलगुआ  , कहू  जायत कहिया 
जे     नै     कराबय    दहेजक     रुपैया   | 
हमर  घरे  बिलटिगेल  , दैया  गए   दैया  ||
दहेज़ आगिलगुआ -------- हमर  घरे  ---   
बेटा       खरीदने      छी ,  दैया    उल्हना  | 
देखबैया    या    गाड़ी ,  देखबैया   गहना ||  
नाच     नचौने    अइ  ,  यौ   बाबू   भैया   | 
हमर    घरे   बिलटिगेल  , दैया  गए दैया  ||
दहेज़  आगिलगुआ -------- हमर घरे  ---    
तिल  भरि  के लूरि  नञि,अछी अप ढंगही | 
हम्मर त  हम्मर , नञि सइंयो  के सगही  || 
कयने    कलमुँहीं  , कमाल   छै  गे   मैया  | 
हमर   घरे   बिलटिगेल  , दैया   गए  दैया  ||
  दहेज़     आगिलगुआ -------- हमर  घरे  ---
 देलैन    नञि   कान   बात , बेचनाक   बाबू |
"रमण "    दुख    अते , कते   हम     सुनाबू
चारु   कात   ताकी  , नञि   एको  सहैया  |
हमर   घरे   बिलटिगेल  , दैया   गए  दैया  ||
 दहेज़     आगिलगुआ -------- हमर  घरे  ---
रचित 
रेवती रमण झा " रमण "
ग्राम - पोस्ट - जोगियारा पतोर
आनन्दपुर , दरभंगा  ,मिथिला
मो 09997313751

शुक्रवार, 5 मई 2017

बहुभाषाविद मिथिला के युगपुरुष डॉ० सुभद्र झा के सत्रहवाँ पुण्यतिथि 13 /05/2017

मैथिली साहित्य महासभा (ट्रस्ट) और विद्यापति डॉ० सुभद्र झा प्रेरणा मंच के तत्वावधान में बहुभाषाविद मिथिला के  युगपुरुष डॉ० सुभद्र झा के  सत्रहवाँ पुण्यतिथि पर पुष्पांजलि, संगोष्ठी एवं कवी सम्मलेन के  आयोजन  हुनकर  पुण्यतिथि 13 मई 2017 के  माध्यमिक शिक्षक संघ मधुबनी में दिन के 12 बजे से आयोजन अछि ,  
      संगोष्ठी में डॉ० झा के कृतित्व और व्यक्तित्व पक्ष पर मिथिला के दिग्गज विद्वान द्वारा विचार राखल जयत ।  हिनकर  कृतित्व पक्ष पर डॉ० रामदेव झा, पंडित चंद्र नाथ मिश्र "अमर", डॉ शशिनाथ झा, श्री श्याम दरिहरे, डॉ कमला कान्त भंडारी, डॉ शंकरदेव झा, श्री अशोक कुमार ठाकुर अपन वक्तव्य  देता । व्यक्तित्व पक्ष पर डॉ भीम नाथ झा, डॉ उमाकांत झा, डॉ धीरेन्द्र नाथ मिश्र, डॉ योगानन्द झा, डॉ० श्रीशंकर झा, डॉ खुशीलाल झा, श्री उदय शंकर झा "विनोद" डॉ महेंद्र मलंगिया और डॉ विघ्नेश चंद्र झा सहित अन्य गणमान्य विद्वान् अपन - अपन विचार  रखता । 
          अहि  कार्यक्रम में मैथिली अकादमी पटना निदेशक कमलेश झा, कांग्रेस प्रवक्ता श्री प्रेम चंद्र झा, बीजेपी बिहार प्रवक्ता विनोद नायरायण झा, सांसद हुकुव नारायण यादव, समीर महासेठ, रामप्रीत पासवान, सुमन महासेठ, घनश्याम ठाकुर सहित कई अन्य राजनितिज्ञ और समाजसेवी सेहो  भाग लेता ।  कार्यक्रम के  अध्यक्षता कमला कान्त झा जी करता ।  कार्यक्रम के  परिकल्पना मैसाम के संस्थापक सदस्य संजय झा " नागदह" द्वारा कायल गेल  अच्छी ।  अहि  कार्यक्रम के संयोजक  पंडित श्री कमलेश प्रेमेंद्र और मैसाम  के अध्यक्ष उमाकांत झा बक्शी एवं  संस्था के संस्थापक सदस्य विजय झा , ब्रजेश झा , संजीव झा और राम कुमार  झा , सब  बुद्धिजीवि से आग्रह केला  की कार्यक्रम में आबि के  सफल बनाबी ।  संजय झा " नागदह"  कहला   की डॉ सुभद्र झा  एक ऐहन   मिथिला का विद्वान छैथि  जे  विद्यापति और मैथिली भाषा के  विश्व पटल पर पहुँचाबै  काम केला हन  |   

शनिवार, 29 अप्रैल 2017

बजरंग -विनय , मैथिली हनुमान चालीसा से

          बजरंग -विनय 













बहक  काज  सुगम सँ कयलो 
हमर   अगम    कीय  भेलै  यौ  | 
रहलौं   अहिंक  शरण में हनुमंत 
जीवन   कीय  भसिअयलै    यौ  || 
          सबहक   ----हमर ---   २ 
क़डीरिक  वीर सनक  जीवन ई 
मंद   बसात    नञि झेलल  यौ  | 
हम दीन , अहाँ   दीनबन्धु  छी 
तखन  कीयक  अवडेरल  यौ   || 
         सबहक   ----हमर ---   २ 
अंजनी लाल , यौ  केशरी  नंदन 
जग  में कियो  अपन  नञि यौ  | 
एक  आश ,  विश्वास   अहाँक  
वयस   हमर   झरि  गेलै  यौ  || 
        सबहक   ----हमर ---   २ 
मारुति  नंदन , काल  निकंदन 
शंकर  स्वयम   अहाँ   छी  यौ  | 
"रमण "क  जीवन करू सुकारथ 
दया  निधान  कहाँ   छी   यौ 
सबहक   ----हमर ---   २ 
      रचित -
 रेवती रमण झा "रमण "




सोमवार, 24 अप्रैल 2017

तिलक के हटाबू ,एही मिथिला सँ नाम

 || दहेज़ || 
गीत 
सुनू   यौ   बरागत  हमर   अच्छी   प्रणाम  | 
 तिलक  के हटाबू  ,एही  मिथिला सँ  नाम  ||  
                     सुनू  यौ --- तिलक  के ---
कानय   कुमारि  कन्या ,  सीथे  उघारि क | 
 सिन्दूरक छी  भुखलि , कहल   पुकारि क ||  
हम    निर्धन   के  बेटी , छी धर्मक गुलाम | 
तिलक  के  हटाबू,  एही  मिथिला सँ  नाम  || 
                    सुनू  यौ --- तिलक  के ---
मिथिला में जन्म बेटिक,अभिशाप भेलआइ | 
कतेको   प्राण   हत्याक , पाप   भेल   आइ  || 
आई कतय गेल  कृष्ण ,आ कतय गेल  राम |  
तिलक   के  हटाबू, एही  मिथिला सँ  नाम  || 
                        सुनू  यौ --- तिलक  के ---
तिलक  प्रथा  मिथिला  में , जाधरि  रहत  | 
अहाँ  सभक  आँखि ,  सतत   नोरे  बहत  || 
सुख   नञि  भेटत , निन्द   होयत   हराम  | 
तिलक  के  हटाबू ,एही मिथिला सँ  नाम  || 
                       सुनू  यौ --- तिलक  के ---
 "रमण " कहैत अछि , सब सँ  सुनि  लिय  | 
एक   प्रश्न  - उत्तर  बिचारि  कउ   दिय  || 
सोन   सनक    बेटा   के , बेचै  छी    चाम  | 
तिलक  के  हटाबू ,एही मिथिला सँ  नाम  || 
                      सुनू  यौ --- तिलक  के ---
रचना कार - 
रेवती रमण झा " रमण "
ग्राम - पोस्ट - जोगियारा पतोर
आनन्दपुर , दरभंगा  ,मिथिला
मो 09997313751

शनिवार, 22 अप्रैल 2017

मोर वयस नादान यौ

||  मोर वयस नादान  यौ  || 

गीत 
साठी  वरष  के छथि मोर प्रियतम  
 मोर        वयस        नादान      यौ | 
हमरा  सनक  अभागलि   जग   में 
             दोसर  नञि   भगवान  यौ  || 
                      हमरा सनक ----
बाबू     यदि   एहन   वर   लयलनि 
कोना  पसन्द  माय  वर कयलनि  | 
आँखि     नोरायले  पाथर  पसिझल 
देखि    कय    कन्या - दान   यौ  || 
                       हमरा सनक ----
जखन   साजि   कोवर घर  गेलौं   
हुनका   देखि   ओतय  मुरझयलों | 
बाबूक    वयस   रहैत  त   की छल 
बाबा  के    कटलनि   कान    यौ  || 
                         हमरा सनक ----
हँसि   कय  उठ  लनि  अंग  लगौलनि 
अपन   प्रेम    सबटा      दरसौलनि  | 
"रमण "  हुनक  आलिङ्गन   परसब  
बिना     सुपारिक     पान       यौ  || 
                       हमरा सनक ---- 
रचना कार - 
रेवती रमण झा " रमण "
ग्राम - पोस्ट - जोगियारा पतोर
आनन्दपुर , दरभंगा  ,मिथिला
मो 09997313751

शुक्रवार, 21 अप्रैल 2017

सुपुरुषक पतीक शिक्षा आ कुपुरुष पतीक शिक्षा

 || सुपुरुषक पतीक शिक्षा || 
 || गीत ||
हे     अर्ध       चन्द्र   ,  हे   अर्धागिन
  ग्रही   में  सुख स्वर्गक छवि  राखी  || २

किछु    माय हमर  अनुचित   बजती
बाबु   जँ   हमर   किछुओ    बजता  |
विष  - वचन ,अमृत बुझि पान करब
 बिनु    अपराधहुँ    तारन     करता  ||
प्रति  अंग  अपन प्रतिपल   कोमल
अमृत   मधुसिक्त   अघर   राखी   ||
                         हे अर्ध   चन्द्र ----
उठि      भोरे     आँगन   -  घर    अहाँ
दय  वादनि , निपि कय  झल कायब |
थोर      बहुँ   नोने , थोर    बहुँ    तेले
हूलसति    मानस  के  घर   जायब  ||
अध खिलित   अघर  मुस्कान   भरल
नहुँये  सँ    मधुर      बचन    भाषी  ||
                        हे  अर्ध  चन्द्र ----
दुख     में   धैरज  , सुख  में   शीतल
आज्ञा      कारी    सदिकाल     रही  |
नैहर     के  सुख  सब  बिसरि अपन
सासुर  में   सागहुँ   खा  कय   रही   ||
एक   प्राण  अधार   प्रिया   प्रियतम
ई "रमण " अहाँक    तखन   साखी

                    हे  अर्ध  चन्द्र ----
 ||  कुपुरुष  पतीक  शिक्षा  || 
|| गीत || 
हे   सूर्य   मुखी  , हे  चन्द्र   मुखी 
     छी  घर  अहाँक , जहिना राखी  ||  २ 
ई  माय  हमर  जँ  किछु  बजती   
बाबू   जँ  हमर  किछुओ बजता  | 
अहाँ    तारन - मारन  सतत करी 
जहिना रखबैन  , ओहिना रहता  ||  
ई   गौओं    हमरा    वारि     दीय  
हम  सतत  अहीँक  रहब साखी || 
                               हे सूर्य -----
अहाँ    क्रोध करी , अहाँ  कलह करी  
हन - हन , पट -पट  सब ठाम करी | 
अहाँ     गारि    पढ़ी  , वे  बात  लड़ी  
   अहाँ   नाम अपन  सब  गाम  करी   || 
सब  वचन  अहाँक  हम  श्रवण करब
छी  मोन   अहाँक   जहिना  भाषी  ||
                                हे सूर्य -----
गहि "रमण " अहाँक  चरणारविन्द
कर   जोरि   कहैछथि   जोरे    सँ  |
झूठहुँ      बाजब    विश्वास   करब
सब   अहाँक   टपा टप    नोरे  सँ   ||
हम  विमुख  अहाँ  सँ  होयब  कोना
जीवनक   हमर     छी     बैसाखी  ||
                                   हे सूर्य -----
रचित :-

रेवती रमण झा "रमण "
ग्राम - पोस्ट - जोगियारा पतोर
आनन्दपुर , दरभंगा  ,मिथिला
मो 09997313751

मंगलवार, 18 अप्रैल 2017

जय कुल बोरनि माता

जय - जय  मैया , जय कुल तारणि  
             जय  कुल  बोरनि  माता  |  
शान्ति कुटीर करू पावन  अम्बे  
                                          हे  कलि  पूज्य  बिधाता  ||     जय - जय --
 कट - कट दसन , अधर पट -पट करू 
          टप - टप   पिपनी  नोरे  | 
थर - थर गात , अरुण दुहूँ  लोचन  
                                     बचन     श्रवित     इनहोरे  ||      जय - जय --
वासर   रैन , चैन  नहि   कहियो  
      निसदिन   नाचथि   नंगे   | 
गाबथि हँसथि  बिलसि  मुख मोदित 
                                         रुदन        बिकट     बहुरंगे  ||         जय - जय --
भाग्य  रेख  वर  पावि  तेहि  निज 
       से    आखर   मोहि   मेंटू  |
"रमण " प्रणाम प्रथम  हे  नागिन 
                                    भाभट      पूर्ण      समेटू   ||         जय - जय --
रचना कार - 
रेवती रमण झा " रमण "
ग्राम - पोस्ट - जोगियारा पतोर
आनन्दपुर , दरभंगा  ,मिथिला
मो 09997313751