dahej mukt mithila

(एकमात्र संकल्‍प ध्‍यान मे-मिथिला राज्‍य हो संविधान मे) अप्पन गाम घरक ढंग ,अप्पन रहन - सहन के संग,अप्पन गाम-अप्पन बात में अपनेक सब के स्वागत अछि!अपन गाम -अपन घरअप्पन ज्ञान आ अप्पन संस्कारक सँग किछु कहबाक एकटा छोटछिन प्रयास अछि! हरेक मिथिला वाशी ईहा कहैत अछि... छी मैथिल मिथिला करे शंतान, जत्य रही ओ छी मिथिले धाम, याद रखु बस अप्पन गाम - अप्पन बात ,अप्पन मान " जय मैथिल जय मिथिला धाम" "स्वर्ग सं सुन्दर अपन गाम" E-mail: apangaamghar@gmail.com,madankumarthakur@gmail.com mo-9312460150

शुक्रवार, 30 मार्च 2012

मैथिलि--काव्य: Natak:"JAGU"---Ank-1, Drishya-1

मैथिलि--काव्य: Natak:"JAGU"---Ank-1, Drishya-1:
अंक प्रथम:    दृश्य:प्रथम      समय: राइत
(दलानक दृश्य , अषाड़क अन्हरिया राइत, लालटेन जरैत, दलान पर चिंतित मुद्रा मे नारायण टहलैत| नेपथ्य मे प्रसूति पीड़ा सँ लक्ष्मी कराहैत , थोड़े देर बाद बच्चाक जन्म आ कनबाक ध्वनि )
लाल काकी : (रुदन करैत प्रवेश ) रे नारायनमा ! रे नारायनमा !!
नारायण : की भेलई माए? की भेलई ??
लाल काकी: तोहर कर्म फुटि गेलौ रौ ! ई कुलक्षणी नामक लक्ष्मी चारीम बेटी कें जन्म देलकौया रौ ! अरे देव रौ देव !! कओन मुखे एकर पाएर हमर घर मे पड़ल रौ देव ! बेटी के बाहिड़ लगा देलकौ रौ देव !!
कोना क' चारिटा बेटी के विआहबाए रौ नारायणमा  ? देहो बिकीन लेबा' तइयो नै पार लगतौ रौ ! तोड़ा कहने छलिऔ दोसर विआह क' ले' --एहि मौगिया सँ तोड़ा बेटा नै हेतौ , मुदा , तू नै मानलाए हमर बात ! आब वंश कओना चलतौ रौ नारायणमा ?(जोड़ जोड़ सँ छाती पिटैत)
नारायण :(माए के बुझबैत ) माए! माए!! ई अहाँ किदौन कहाँ दून कियाक बजैत छी ?--एहि मे लक्ष्मी कें कोन दोष थिक ? ई त' भगवतिक कृपा ! एखन लक्ष्मी प्रसूति पीड़ा मे छथि , हुनका ऊपर एहन असहनीय  दुर्वचनक बाण नै चलाऊ !!
लाल काकी:(खौझा' क बजैत ) त' तोहर की मुन ? फूल-पान ल' आरती उतारीयनि!!
नारायण: हँ माए हँ ! लक्ष्मी आई फेर एक लक्ष्मी कें जन्म देलिहाए | माए! अहाँ जनैत छी --कन्यादान सभ सँ पैघ यज्ञ थिक | सौभाग्यवश: भगवतिक कृपा सँ हमरा चारिटा यज्ञक फल भेटबाक अवसर भेटलाए | अहाँ जुनि व्यर्थ चिंतित हौ |
      (विष्णुदेवक प्रवेश )
विष्णुदेव :लाल काकी , एना कियाक खौंझाएल छी ?
लाल काकी: ई लक्ष्मी रानी फेर बेटी बिएलिहाए !!
विष्णुदेव: ई त' हर्षक गप थिक ! बेटी के जन्म --बुझू साक्षात् लक्ष्मी के जन्म !! एहि मे एतेक खौंझेबाक कोन .....
लाल काकी:(बीचे मे टोकैत) हाँ ...हाँ ...., 'दोसरक घर जरैत छै त' तमाशा देखबाअ मे बड्ड नीक लगैत छै ...मुदा ,जखन अपन घर जरैत छै त' आगिक दाह बुझि पड़ैत छै |' अपना बेटी नै अछि ने , दूटा बेटे अछि --ताँए एहन गप निकलैया....
नारायण: माए....! अहाँ चुप रहब की नै ? (विष्णुदेव के)-- भाई , क्षमा करब ! माएक गप के जुनि .....
विष्णुदेव: .....भाई ! ई की करै छी ? अहाँक माए हमरो माए | हम काकी कें दुःख बुझि सकैत छीयनि ! मुदा मनुष्य की क' सकैत अछि .....??
 (लाल काकी के बुझबैत ) काकी जुनि खौंझाऊ ! कने सोचू !  पहिल- जे अहूँ  त' बेटी छी ! जौं बेटी नै  हेती त' बेटा-बेटी के जन्म के देत ?? दोसर स्त्री भ' स्त्री के प्रति दुर्यव्यव्हार , इ उचित नै थिक !
तेसर- बेटा-बेटी कें जन्म स्त्री द्वारा निर्धारित नै होइत अछि | विज्ञानं बतबैया कि बेटी-बेटा कें निर्धारण पुरुष दवारा होइत अछि |--ताँए जँ  नारायण भाई कें चारिटा बेटी भेलनि त' एहि मे लक्ष्मी भौजी कें कोनो दोष नै | ...ओ त' साक्षात् लक्ष्मी छथि |.....काकी !अहाँ के त' पाँच टा पुतौहु छथि --काएटा  लग मे रहि सेवा करै छथि ? एक लक्ष्मी भौजी छथि जेँ तन-मन-धन सँ अहाँक सेवा मे समर्पित रहैत छथि |....चलु ,एहि समय हुनका अहाँक जरुरत छन्हि | सास आ माए मे कोनो अन्तर नै होइत छै |
(लाल काकी अन्दर जाईत छथि )
    पर्दा खसैत अछि ......प्रथम दृश्य के समाप्ति |||

1 टिप्पणी:

veerubhai ने कहा…

सुन्दरम मनोहरं .आभार आपका .