dahej mukt mithila

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शुक्रवार, 18 मार्च 2011

अभय कान्त झा दीपराज के मैथिली गीत -

          बेटी   के   दहेज़  के भार..........

बनल   असह्य   संताप   समाजक,   बेटी   के   दहेज़  के भार |
भैया - बाबू   गोर   लगैत   छी,    बंद    करू    ई    अत्याचार ||

जे     बेटी     जननी    समाज    के,    मूल    प्रेम - स्नेह    के |
अपमानक   हम   पातक  
लैत  छी,   ओहि  बेटी  के  देह  के ||
अपन   मान   सँ  हम   अविवेकी,  अपने  कयलौं   दुर्व्यवहार |
भैया - बाबू   गोर   लगैत   छी,    बंद    करू    ई    अत्याचार || १ ||

बड़  ज्ञानी,  बड़  शिष्टाचारी,  मानव  बनि   हम   जन्म   लेलौं |
नीति - न्याय  के  परिभाषा  हम  कयलौं,  बड़  सद्कर्म केलों ||
सब   यश   पर   भारी   ई अपयश,  संतानक  कयलौं व्यापार |
भैया - बाबू   गोर   लगैत   छी,    बंद    करू    ई    अत्याचार || २ ||

जेहि   बेटी   में   दुर्गा - कमला   और   सीता   के   वास  अहि |
ओ   बेटी   अपना   नैहर   पर   बोझ   बनल,   उपहास   अहि ||
एहन  पातकी - पापी  छी  हम,  हाँ,  एहि पातक पर धिक्कार |
भैया - बाबू   गोर   लगैत   छी,    बंद    करू    ई    अत्याचार || ३ ||

बेटी   के   अपमानक   ई   विष,   उपटा   देलक   जों  ई  फूल |
हमर - अहाँ  के,  सबहक  आँगन  में  नाचत  विनाश के शूल ||
संकट  ई  गंभीर  भेल  अब,  करिऔ  एहि  पर  तुरत  विचार |
भैया - बाबू   गोर   लगैत   छी,    बंद    करू    ई    अत्याचार || ४ ||

आइ अगर ई व्यथा हमर अछि,  काल्हि अहाँ के  ई अभिशाप |
एक - एक कय पेरि रहल अछि,  सबके  एहि  ज्वाला के दाप ||
सबहक गर्दन, शान्ति और सुख, काटि रहल अछि ई तलवार |
भैया - बाबू   गोर   लगैत   छी,    बंद    करू    ई    अत्याचार || ५ ||

बनल   असह्य   संताप   समाजक,   बेटी   के   दहेज़  के भार |
भैया - बाबू   गोर   लगैत   छी,    बंद    करू    ई    अत्याचार ||

                          रचनाकार- अभय दीपराज 

3 टिप्‍पणियां:

मदन कुमार ठाकुर ने कहा…

बनल असह्य संताप समाजक, बेटी के दहेज़ के भार |
भैया - बाबू गोर लगैत छी, बंद करू ई अत्याचार ||
बनल असह्य संताप समाजक, बेटी के दहेज़ के भार |
भैया - बाबू गोर लगैत छी, बंद करू ई अत्याचार ||
ehan - ehan lekhak rahait hamr mithila me ee hal kiyak achhi ki ahiwat par gour ka sakait chhi apnek sab ----

Abhay Deepraaj ने कहा…

Madan Jee, Samaaj kranti ke prateekshaa mein ta achhi kintu......Abhay....

anand kumar mishra ने कहा…

bahut nik jha ji shai lek likh pathak gan ke sujhav delo