dahej mukt mithila

(एकमात्र संकल्‍प ध्‍यान मे-मिथिला राज्‍य हो संविधान मे) अप्पन गाम घरक ढंग ,अप्पन रहन - सहन के संग,अप्पन गाम-अप्पन बात में अपनेक सब के स्वागत अछि!अपन गाम -अपन घरअप्पन ज्ञान आ अप्पन संस्कारक सँग किछु कहबाक एकटा छोटछिन प्रयास अछि! हरेक मिथिला वाशी ईहा कहैत अछि... छी मैथिल मिथिला करे शंतान, जत्य रही ओ छी मिथिले धाम, याद रखु बस अप्पन गाम - अप्पन बात ,अप्पन मान " जय मैथिल जय मिथिला धाम" "स्वर्ग सं सुन्दर अपन गाम" E-mail: apangaamghar@gmail.com,madankumarthakur@gmail.com mo-9312460150

शनिवार, 30 अप्रैल 2011

अंदाज ए मेरा: बरगद और मैं....

अंदाज ए मेरा: बरगद और मैं....: "सेकंड, मिनट, घंटा, दिन, महीना, और साल.....। न जाने कितने कैलेंडर बदल गए पर मेरे आंगन का बरगद का पेड वैसा ही खडा है अपनी शाखाओं और टहनियों क..."

शुक्रवार, 29 अप्रैल 2011

पुरस्कार

हमरा इ सूचित करैत अपार हर्ख भए रहल अछि जे मैथिलीक एक मात्र गजलक ब्लाग " अनचिन्हार आखर" http://anchinharakharkolkata.blogspot.com/नव शाइर के प्रोत्साहित आ पुरान शाइरक निन्न तोड़बाक लेल एकटा तुच्छ मुदा भावना सँ ओत-प्रोत पुरस्कार अहाँ लोकनिक माँझ लाबि रहल अछि जकर नाम "गजल कमला-कोशी-बागमती-महानंदा" रखबाक नेआर अछि।
इ पुरस्कार दू चरण मे पूरा कएल जाएत जकर विवरण एना अछि--------
पहिल चरण-----------हरेक मास मे प्रकाशित गजल, रुबाइ, कता, फर्द, समीक्षा, आलोचना, समालोचना, इतिहास ( गजल, रुबाइ, कता, फर्द आदिक) मे सँ एकटा रचना चूनल जाएत जे सालक बारहो मास चलत (साल मने १ जनवरी सँ ३१ दिसम्बर) ।
एहि तरहें चयन कर्ता लग अंतिम रूप सँ बारह रचना प्राप्त हेतन्हि।
दोसर चरण------ चयनकर्ता अंतिम रुप सँ मे प्राप्त रचना के ओकर भाव, व्याकरण आदिक आधार पर एकटा रचना चुनताह, जे अंतिम रुप सँ मान्य हएत आ ओकरे इ पुरस्कार देल जाएत।

रचना चुनबाक नियम-------------

१) रचना अनिवार्य रुपें "अनचिन्हार आखर" पर प्रकाशित होएबाक चाही। जँ कोनो रचनाकारक रचना अन्य द्वारा प्रस्तुत कएल गेल छैक सेहो मान्य हएत।

२) रचना मौलिक होएबाक चाही। जँ कोनो रचनाक अमौलिकता पुरस्कार प्राप्त भेलाक बाद प्रमाणित हएत तँ रचनाकार सँ अबिलंब पुरस्कार आपस लए लेल जाएत आ भविष्य मे एहन घटना के रोकबाक लेल " अनचिन्हार आखर"http://anchinharakharkolkata.blogspot.com/ कानूनी कारवाइ सेहो कए सकैत अछि।
३) रचना चयन प्रकिया के चुनौती नहि देल जा सकैए।
४) एहन रचनाकार जे मैथिलीक रचना के अन्य भाषाक संग घोर-मठ्ठा कए लिखैत छथि से एहि पुरस्कारक लेल सवर्था अयोग्य छथि, हँ ओहन रचनाकार जे मैथिली आ अन्य भाषा मे फराक-फराक लिखैत छथि तिनकर रचना के पुरस्कार देल जा सकैए, बशर्ते कि ओ अन्य पात्रता रखैत होथि।

५) पहिल चरणक प्रकिया हरेक मासक ५ सँ १० तारीखके बीच आ दोसर चरण हरेक तिला-संक्रान्ति के पूरा कएल जाएत।

६) एहि पुरस्कारक चयन पूर्णतः आन-लाइन होएत ।

७) रचनाकार कोनो देशक नागरिक भए सकैत छथि।

८) " अनचिन्हार आखर"क संस्थापक एहि पुरस्कार मे भाग नहि लए सकैत छथि।
९) पुरस्कार राशिक घोषणा बाद मे कएल जाएत।

गुरुवार, 28 अप्रैल 2011

मित्र-बंधु-बहिन सभ

एहि में दू मत नहि जे फेशबुक सऽ आन्दोलन के पूर्ण परिचालन भऽ सकैछ, लेकिन आधार-स्तम्भके निर्माण, कार्यक्रम योजना, कार्यकर्ताके खोज - इ सभ कार्य समाजिक संजालरूपी फेशबुक पेज सऽ सेहो संभव छैक।

आब जेना दहेज मुक्त मिथिलाके उदाहरण लेल जाय - भेलै कि जे किछु मित्र सभ आपसमें गप करैत समय मिथिला ऊपर दहेज के बढावा वा पोषण करैक आरोप लगाबैछ - आरोप कि - जे वास्तविकता अछि से बात करैछ आ ताहि अनुरूप दोसर मित्र ओहि विन्दुपर किछु करबाक लेल बात करैछ... एवम्‌ प्रकारेन बहुत मित्र-बंधु-बहिन लोकनि जुटैत छथि आ फेशबुक पर दहेज के धज्जी उड़ैछ। प्रश्न उठैछ - कि वास्तवमें युवा के हृदयमें परिवर्तन आबि रहल छैक? कि जेना इ थोड़ेक युवा उत्साहित छथि दहेजके दानवके भगाबय लेल, तहिना हर गाम आ घर-शहर-नगरमें युवा सब आतुर छथि अपन समाजके एहि दानव सऽ छुटकारा दियाबैक लेल? सुन्दर विन्दु अछि इ दहेज एवं एकर समर्थन कोन रूपें हेवाक चाही, कोन प्रकार के विरोध होयबाक चाही आ युवा लोकनिक इच्छाके सार्थकता दैक लेल किछु कार्य सेहो हेबाक चाही। बस निर्णय होइछ जे किऐक नहि धरातलपर एहि मूहिम के उतारल जाय। आ तदनुसार क्रमबद्ध रूपमें एहि मूहिम के निरंतरता वैह फेशबुक परका मित्र-बंधु-बहिन सभ देवय लगलथि। एक मोर्चा के निर्माण भऽ गेल। किछु प्रतिबद्ध सदस्य सेहो बनि गेला।

आ, चूँकि बाहुल्य सदस्य सभ दहेज विरोध के सुन्दर स्वरूप सौराठके सभागाछीवाला परिकल्पनाके पुनरुत्थान एवं पुनर्जीवित करैत होयबाक चाही - अतः वर्तमान मूहिम जे अछि से सौराठके पुनरुत्थान हेतु सेहो सक्रिय होयत, प्रथमतः एहि परंपराके लेल लड़त आ ताहि संग-संग जे केओ बिना दहेज लेन-देन आदर्श विवाह करैत छथि, हुनका लोकनिक यशगान करनै एहि बेरके योजनामें शामिल भेल। संगहि दहेज मुक्त मिथिलाके अपन एक पोर्टल निर्माण कैल जायत जाहि ऊपर दहेज मुक्त विवाह केनिहार के ऊपर विभिन्न रिपोर्ट आ आगू इच्छूक व्यक्ति सभ जे दहेज मुक्त विवाह करता तिनक पूर्ण परिचय सेहो उपलब्ध कराओल जायत। संगहि मासिक वा अर्धमासिक बूलेटिन जे दहेज मुक्त मिथिला के कोन काज पृथ्वीपर भऽ रहल छैक तेकर जानकारी उपलब्ध कराओल जायत। अन्य कार्यमें दहेज मुक्त मिथिलाके तरफ सऽ गाम-गाम आ शहर-शहर एहेन कैम्पेनिंग होयत जाहिमें दहेज मुक्त विवाह केनिहार के यशगान एवं आम जनमानसके जागृति हेतु विभिन्न कार्यक्रम आदि समाहित होयत। सदस्यता अभियान लेल सेहो प्रत्येक गाम आ शहरमें एक प्रमुख के चुनाव आ तदनुसार एक स्थानीय कमिटीके गठन करैत शाखा विस्तार कयल जायत। पुनः दहेज मुक्त मिथिला के तरफ सऽ सामूहिक विवाह, सौराठके तर्जपर सभागाछी विभिन्न जगह पर लगौनै, जागृतिमूलक सांस्कृतिक कार्यक्रम, सभा आयोजन, अन्य सम्बोधन आदि कैल जायत। एहि संस्थाके राजनीति सऽ कुनु लेना देना नहि रहत मुदा कानून विरुद्ध कतहु किनको ऊपर अत्याचार भेलापर सामाजिक नियमके अनुरूप ओहि प्रकार के अत्याचार विरुद्ध लड़ाई सेहो लड़त। दहेज मुक्त विवाह केनिहार लोक सभके यशगान-सम्मान आदि करैत अन्य व्यक्तिमें सेहो एहि प्रकारके वातावरणके सृजना कैल जाय से मुख्य लक्ष्य रहत।

वर्तमान में इ संस्था पंजीकरण प्रक्रियामें अछि - एकर सदस्यता हेतु एखन स्थानीय कर्मठ कार्यकर्ता श्री प्रकाश चन्द्र चौधरी के व्यक्तिगत खाताके प्रयोग कैल जा रहल छैक, जेकर विवरण दहेज मुक्त मिथिला नामके ग्रुपपर उपलब्ध अछि। सदस्यताके चारि प्रकार राखल गेल छैक - संरक्षक सदस्य (५१०१/-), संस्थापक सदस्य (२१०१/-), आजीवन सदस्य (५०१/-) आ साधारण सदस्य (१५१/-) - सदस्य के जिम्मेवारी, अधिकार आदिके नियमन्‌ होयबाक बाकी छैक, जे क्रमशः कानून-विधान अनुरूप हेतैक। कार्यकारिणीके गठन सेहो पूर्ण प्रजातान्त्रिक मूल्य के अनुरूप हेतैक। पदके लोभ एहेन होइत छैक जे संस्थाके जन्म सऽ पहिने एकरा मारयके फेर में पड़ैत देखल गेलैक अछि। ताहि हेतु एहि बेर जेना-तेना सौराठ सभाके आयोजन तक एक एडहॅक कमिटी बनाके कार्य सम्पादित कैल जाय, आ तेकर बाद एक आमसभाके आयोजन करैत ओहिठाम विधान अनुरूप निर्वाचन प्रणाली द्वारा कार्यकारिणीके गठन होयत से विचार अछि।

एतेक कार्य मुख्यतः फेशबुक सऽ सम्पादित भेल - आब धरातल पर कि-कि होइछ इ देखबाक अछि।

हरिः हरः!!
 
प्रवीन  नारायण  चौधरी
 
 
 

बुधवार, 27 अप्रैल 2011


हाबड़ा पुल तोरा देखैबो @प्रभात राय भट्ट


पेन्ह्नेछे मेक्सी हाथ में पेप्सी,
तू लागैछे बड़ा सेक्सी गे,२ 
हाँ हाँ सेक्सी गे बड़ा सेक्सी गे २
आइग जिका धध्कई छे तू ,
बिजुली जिका चमकै छे तू ,
हवा में उड़इ छो तोहर दुपटा,
चल न चल गोरी कलकाता २
हाबड़ा पुल तोरा देखैबो,     
कलकाता के शयर करैबो,
रस से भरल रस्गुला खिलेबो,
ठनका जिका ठंकई छे तू ,
बदरा जिका बरषई छे तू ,
पारी जिका रम्कई छे तू ,
बात बात में पढाई छे गाईर,
राख तू राख अपन जोवन सम्हईर,२
रूप तोहर देखि भेलै बबाल,
तोहर दीवाना समूचा नेपाल,
अजबे गजबे छौ चाल ढाल,
कमर में खोसने छे तू रुमाल,
जर जुवान के बाते छोर,
बुढ्बो भेल तोरा लेल बेहाल,
कोई कहै छौ आई लव यु,
कोई कहै छौ हेलो सेक्सी हाउ आर यु,
रचनाकार:प्रभात राय भट्ट 

सोमवार, 25 अप्रैल 2011

आब अप्पन कहू की बिचार भेल

  प्रिय बंधुगन आय ग्रुपक सफलता के देखैत बहुत ख़ुशी होइत छले,
जे हम सभ मिल के जे एक छोट छिन्ह सपना देखने छलों से आय अपन राह पर अग्रसर भो रहल अछि.....

खुशिक संगे संग बहुत रास गप एहनो अछि जहीं सँ ह्रदय बहुत दुखाबैत अछि..

ह्रदय के द्रवित करै बला एहने एक आर गपक हमरा पता चलल... दहेज़ मुक्त मिथिला के एक बहुत जिम्मेदार सदस्य जिनका सँ हम सभ बहुत आस राखैत छलों (फिलहाल नाम नै कहब) पता चलल जे

अगला महिना हुनकर छोट भाई के विवाह छैन...१९ मई , सुईंन के आश्चर्य करब जे ओ अपन भाई के 1,५००००/- (एक लाख पचास हजार ) दहेज़ लेना छलाह....

आब अहिं सब कहू हम सभ मिल के की की सपना देखैत छलों आ की भे रहल अछि ???

 एहि तरहक सभ सदस्यसँ हम अपील करे चाहब  जे अपनेक झूठ - मुठ  आशाक एहि संस्था "दहेज़ मुक्त मिथिला" के कुनू जरुरत नै छैक... जिनका मोन में एहि तरहक भावना अछि कृपा के कs एहि ग्रुप सँ बाहर जेबाक कस्ट करी...

यदि हमर गप किनको खराब लागत ते तहि लेल छमा चाहब.....

आगू और  सूनू की भेल  ------
Pravin Narayan चौधरी  जितमोहनजी! ओ जे केओ होइथ हुनका लेल एतेक अपील बहुत आँखि खोलयवाला होयबाक चाही। लेकिन नाम खोलबैक तखन ने आरो लोक सभ एहेन मिथ्याचार करनिहार के पहचान करतैक? आ, कहीं अहाँ के गलत जानकारी भेल होय... ओहो बात स्पष्ट भऽ जेतैक। जे-जेना, अपने एहि बातके पूरा स्पष्ट लिखियौक।


 Pravin Narayan Choudhary वाह जीतमोहनजी!! बहुत सुन्दर प्रकरण बुझैछ आ लगैछ जे इहो एक रिकार्ड बनल एहि दहेज मुक्त मिथिलाके मूहिम के... ग्रेट सिम्प्ली!! जे लेलाह आ रिटर्न करताह ओहो बहुत सभ्य लोक छथि आ हम हुनका केवल एहि लेल नमन्‌ करवैन जे अपने लोकनिक मान राखिके लड़कीवालाके लेल पाइ वापस करय लेल तैयार छथि। वीर पुरुष हुनक सार के सेहो नमन्‌ - अहाँ सदिखन अहिना वीरतापूर्वक दहेजके दानव सँग लड़ैत रही से प्रार्थना। जय मैथिली! जय मिथिला!

Jitmohan Jha  भैया इ बात पूरा स्पष्ट अछि, हम सब हुनका सँ संपर्क में छी संगे ओ गछने छलाह जे लेल गेल दहेज़ रूपी पाई १,५००००/- ओ बेटी पक्ष बला के वापस करता... एहि मुहीम में हुनक खिलाफ खुद हुनकर सार हमरा संग ठार छैथ.. ओ एता धरी हमरा कहला जे जाधरी ओ हमरा स्टं...प पेपर पर लिख के नै देता आ ओई पर बेटी बला के दस्खत नै देखेता हम पछा नै छोर्बैन...
तहि लेल जखन ओ इ बात स्विकारैत छैथ ते हमरा बुझला सँ हुनकर नाम सार्वजानिक केनाय ठीक नै हेत...
तहि लेल हम छमा चाहब... कारण हमरा सभ के किनको भावना के ठेस नै पहुचेबाक चाही....

 आब  ओऊ  मुद्दा के  बात  पर  की  ई उछित   थिक   नै,   कियक  नै  की  अहन सब  अहैसे  पहिने मिथिला  से  बहार  छलो जे
 नाजेर नै   परल  की  अहाँ सब   के , टोल परोस  , गामा  घर  मे ई  बात  नै  छैक
की  अहाँ सब  एक   दोसर  के  खिलाप   किछ  कहै  नै  सकैत  छी या अहाँ  सब के  डर होय्या ,अगर होय्या  त  से किय  होय्या  , से  कियक  की  कारन  छैक , आई जै  किछ  कारन  छल  ताहि दुरे  ई गप्प  उठायल  गेल  कियक  ई  गप्प  मदन  ठाकुर  के  छोट  भाई  के  बियाह  छियान  ताहि दुवारे  या मदन ठाकुर  कुनुक  कर्मक  नै छैथि ताहि दुवारे , की  किनका  घर  में  बियाह  नै  होयत  अछि  ई गप्प  छुपल  छैक ,  से  बताऊ या और  कुनो कारन  छैक
 हम  मिथिला के संतान छी ताहि  दुवारे , या   हम '' दहेज़  मुक्त  मिथिला  '' के सदस्य आई  १०  दिन  से  भेलो  ताहि दुवारे की जाही  कारन  अपनेक  सबहक  समक्ष  शर्म से  किछ  नीच  लागैत  छी , की  ना यो ,   मुद्दा  नै  हमर  गर्व  से  हमर  गर्दन  आई उच्च  अछि  ,  जे  हम  लड़की  बाला के   रुपैय   वापस  करब  आ  दहेज़  मुक्त  मिथिला  बनायब   हमर  ई  कसम  और  अपनेक  सबहक  वादा अछि , चाहे हमारा अपन परिवार , टोल परोस , या गावं  से नाता तोरे  परे ,  यदि  अपनेक  सबहक  सहयोग  रहत  त , ई कदम  हम उठारहल छी  आगू  से  मगर  अहुंके  उठायब परत  अप्पन  कदम  , पछु  से , दहेज़  मुक्त  मिथिला के लेल , की तैयार  छी  अपन गर्दन  उच्चय देखाबैक लेल  ता अहं सब  कसम खाऊ , और  वादा  करू , मिथिला के खातिर ,
मदन कुमार ठाकुर
पट्टीटोल, कोठिया 
भैरव स्थान , झंझारपुर 
मधुबनी बिहार 847404
और कहब त कहू अहि पर
9312460150

दहेज़ मुक्त मिथिला


सुरसा जोंका/ फ़ैल रहल छैक/ सोंसे देश

बरद जोंका/ अपन सपूत के / बेचि रहल


दहेज़ केर/ लगेलक दांव पर /आँखिक नोर


बिकल खेत/
झोपड़ी आ मड़ैया/ बेटीक लेल

ख़तम करू/ ई महामारी कए/ लियो शपथ


जन्म लेलों ये/ जों मिथिलांचल में/ उतारू क़र्ज़


जों छि मैथिल/ दहेज़ मुक्त मिथिला/ से जुड़ि जाऊd

गुरुवार, 21 अप्रैल 2011

फेर एक बेर महिला शक्ति आएल आगू...

माथ पे घोघ, मोनक उत्साह आ हाथ में मतदाता पहचान पत्र, जी हाँ हम गोप कए रहल छि बिहार के पंचायत चुनाव के जतय पहिल बेर नबकी बहुरिया भी बुध दिनक वोट में अपन योगदान देलक। कैक टा ते एहनो बहुरिया रहे जे पहिल बेर अपन देहरी नांघलक रहे। नबकी बहुरिया के देखय के लेल जबनका के साथ-साथ बुढ्वो शामिल रहे। पहिल बेर समाज के बंधन के तोि कए लोकतंत्र के चौखट पर पहुंचल बहुरिया कए देखि के ते एही लागि रहल ये जे बदलाव के बयार दलान गुजरैत गाम-घोर तक पहुंची गेल ये।


बिहार में भेल पहिल चरण के मतदान में हरेक जगह ई दृश्य देखय लेल भेट जायत रहे, हरेक बूथ पर मरद से बेसी औरते के भीड़ देखल जाय रहे। भोरे से सबटा बूथ पर महिला के लम्बा लाइन देखय ले मिल जायत रहे जाही में हरेक उम्र के महिला शामिल रहे। उत्साह में कोनो कमी नै महिला सब से गोप केलाs पर ओ कहलखिन से रोजे ते परिवार के समय देते छि किया नै आय हम अपन समाज लए समय दी। हाँ सब खुश बड़ रहे कियाकि वोटे के बहाना हुनका सब के गाम घोर के गली आ चौबटिया जे देखय लए मिल गेल। मुदा हम ते एही कहब की बिहार बदैल रहल ये जाही में महिला के योगदान के हम नै भुला सकय छि।

मंगलवार, 19 अप्रैल 2011

कक्का हमर उचक्का

कक्का हमर उचक्का ।

( होली पर हास्य कविता)
ओंघराइत पोंघराइत हरबड़ाइत धड़फराइत धांई दिसा
बान्हे पर खसलाह कक्का हमर उचक्का
बरजोरी देखी मुस्की मारैतकाकी मारलखिन दू-चारि मुक्का।।

धिया-पूता हरियर पीयर रंग सॅं भिजौलकनिबड़की काकी
हॅसी क घिची देलखिन धोतीक देका पिचकारी
मे रंग भरने दौगलाह हमर कक्का
अछैर पिछैर के बान्हे पर खसलाह कक्का हमर उचक्का।।

होरी खेलबाक नएका ई बसंतीउमंग
ततेक गोटे रंग लगौलकनि मुॅंह भेलैन बदरंग
के देखैत मातर कक्का बजलाह आई
होरी खेलाएब हम अहींक संग।।

कक्का के देखैत मातर काकी निछोहे परेलीह
आ बजलीहहोरी ने खेलाएब हम कोनो
अनठीयाक संगजल्दी बाजू के छी अहॉं
नहि त मुॅंह छछारि देबघोरने छी आई हम करिक्का रंग।।

भाउजी हम छी अहॉक दुलरूआ दिअर
होरी खेला भेल छी हम लाल पिअरआई
त भैयओ नहि किछू बजताह जल्दी होरी
खेलाउएहेन मजा फेर भेटत नेक्सट ईअर।।

सुहर्दे मुॅंहे मानि जाउ यै भौजी
नहीं त करब हम कनि बरजोरीहोरी मे
त अहॉ जबान बुझाइत
छीलगैत छी सोलह सालक छाउंड़ी।।

आस्ते बाजू अहॉक भैया सुनि लेताह
कहता किशन भए गेल केहेनउचक्का
केम्हारो सॅ हरबड़ाएल धड़फराएल औताह
छिनी क फेक देताह हमर पिनी हुक्का।।

आई ने मानब हम यै भाउजी
फुॅसियाहिक नहि करू एक्को टा बहन्ना
आई दिउर के भाउजी लगैत अछि कुमारि छांउड़ी
रंगअबीर लगा भिजा देब हम अहॉक नएका चोली।।

ठीक छै रंग लगाउ होरी मे करू बरजोरी
आई बुरहबो लगैत छथि दुलरूआ डिअर
ई सुनि पुतहू के भाउजी बुझि होरी खेलाई लेल
बान्हे पर दौगल अएलाह कक्का हमर उचक्का।।

लेखक:- किशन कारीगर ।

सोमवार, 18 अप्रैल 2011

नजैर

नजैर

नजैर
बचा क नजैर सँ देखइ छि ,
देखि ने आहाँ डेरा क देखइ छि !

जखनो देखइ छि मुदा नबे लगइ छि,
तैं नित नजैर सँ नुका क देखइ छि !

सोझा मैं अबितौं बाटे तकैई छि ,
नजैर में अहींक छाहीं देखइ छि !

नजरे सौं सबटा खेरहा करैईत छि,
चप्पे मुदा हम सबटा देखइ छि !

आहाँ रूपक किताबो पढ़ई छि,
जुनी सोंचू गलत नजर सौं देखइ छि!

सनेहक आपेक्षि

विकाश झा

शनिवार, 16 अप्रैल 2011

दहेज मुक्त मिथिला (स्थानीय सौराठ विकास समिति )

उपस्थित सदस्यगण! श्रेष्ठ, मित्र एवं अनुज!!

हार्दिक स्वागत एवं अभिनन्दन!

आजुक मिटिंग निरंतरता में अछि आ आब मैथिलीके मिथिलाक चौरी सऽ निकलि दहेज मुक्त मिथिलाके एहि दलानपर अपने लोकनिक पुनः स्वागत अछि। हमरा लोकनि लगभग हर विन्दुपर चर्चा कयलहुँ आ बहुतो रास बातके निर्णय कयलहुँ। सौभाग्य हमरा लोकनिक जे एहि मिटिंगमें श्री कृपानन्द झा सर के अध्यक्षता भेटल। श्रेष्ठ संरक्षक लोकनिक सान्निध्य भेटल। मुद्दा पर आबी।

१. सौराठ सभा के पुनरुत्थान करब से निर्णय लेल।
२. दहेज मुक्त मिथिला स्थानीय सौराठ विकास समिति एवं अन्य संस्थासभ संग मिलिके सहकार्य करब से निर्णय लेल।
३. दहेज मुक्त मिथिलाके स्वतंत्र संगठन बनायब से निर्णय लेल।
४. दहेज मुक्त विवाह के प्रोत्साहन देब से निर्णय लेल।
५. संगठन विस्तारके क्रममें स्थानीय एवं बाहरी सदस्य सभ के जोड़ब से निर्णय भेल। स्थानीय जिम्मेवारी सऽ लऽ के विभिन्न जगहके जिम्मेवारी सदस्य लोकनि सहर्ष स्वीकार कयलाह, जेकर सूची अलग सऽ पेश कयल जायत।
६. सदस्यता शुल्क संरक्षक सदस्य - ५१०१/-, संस्थापक सदस्य - २१०१/-, आजीवन सदस्य ५०१/- एवं साधारण सदस्य १५१/- राखब से निर्णय लेल।
७. सौराठ उपरान्त दहेज मुक्त विवाह समग्र मिथिलावासी हेतु बिना कोनो जाति-पाँति के भेदभाव रखने केवल मैथिली भाषाभाषीके लेल भारत तथा नेपालके विभिन्न स्थानपर सभा-आयोजना करब से निर्णय लेल।
८. सदस्य सभ के-कोना सदस्यता ग्रहण करता से निर्णय लेल, जेकर अलगे लिस्ट बनाओल जायत, सदस्यता शुल्क तत्काल श्री प्रकाश चौधरीजी के खाता संख्या ११३०२५९४५०२ - खाताधारक: प्रकाश चन्द्र चौधरी, बैंक: स्टेट बैंक अफ ईण्डिया, रहिका शाखा में कैल जाय से निर्णय भेल।
९. संगठन विस्तारके क्रममें स्थानीय नागरिक सभके सदस्यता अभियान हेतु कार्यकर्ता परिचालन, प्रचार-प्रसार हेतु आवश्यक पहल एवं आगामी २२ मई के सौराठमें सौराठ विकास समिति संग मिटिंग से निर्णय भेल।
१०. सौराठके सफलता हेतु कार्यक्रम २०-२९ जून, २०११ धरि सदस्य सभके सक्रिय योगदान सऽ स्थानीय सौराठ विकास समिति संग सहकार्य करैत सभामें एक शिविर तथा मंच दहेज मुक्त मिथिलाके तरफ सऽ होयत से निर्णय भेल।

एकर अलावे अनेको विन्दुपर सभ आदरणीय सदस्य सभक विचार भेटल आ ताहि विचार के एक बेर फेर सऽ समेटैक लेल इ थ्रेड के निर्माण कयल गेल, आब अपने लोकनि अपन-अपन विचार आ मिटिंगके संस्मरणके नीचां कमेन्टके रूपमें पोस्ट करी से आग्रह करैत फोरम के खोलैत छी।

धन्यवाद! जय मैथिली! जय मिथिला!!
परवीन नारायण  चौधरी

शुक्रवार, 15 अप्रैल 2011

ट्रेन के टक्कर में एक दर्जन घायल...


बिहार के समस्तीपुर-बरौनी रेलखंड के कोरबद्धा गाम के पास गुरुवार के साँझ में ७बजे के करीब आउटर सिग्नल पर पटरी टूटै से दोनों सोझा से आबि रहल बरौनी-ग्वालियर आर गंगासागर एक्सप्रेस ट्रेनें आपस में भीड़ गेल। जैइसे दोनों ट्रेन के आधा दर्जन बोगी क्षतिग्रस्त भए गेल। ई घटना में करीब एक दर्जन लोग घायल भेल जिनका तुरंते समस्तीपुर रेलवे अस्पताल में भर्ती करायल गेल।
समस्तीपुर से चारि किलोमीटर दूर घटना स्थल पर काफी भीड़ जुमैड़ गेल आ खूब बवाल काटलक। राति के करीब नौ बजे रेलवे के अधिकारी घटना स्थल पर पहुंचल आ घायल के हाल-चाल पुछलक।

गुरुवार, 14 अप्रैल 2011

चुनावी बयार...

गाँव के इलेक्शन पर हाइकू के कविता बनाबै के प्रयास केलो ये देखल जाओं...
मुखिया -:
चुनाव लेल
पहिरे लागल ये
खादी कुरता

सरपंच-:
बुझायल जों
महिमा चुनाव के
गेल बोराय

पंच-:
दारु,टका सों
ख़रीदे रहल ये
सबटा वोट

वार्ड-सदस्य -:
चुनावी नैया
पार करय लेल
जोड़ैत हाथ

जनता-:
पाँच साल के
निकालैत छिकार
ये बुधियार

शनिवार, 9 अप्रैल 2011

महाकवि के निधन पर वीरान भेल मुजफ्फरपुर...

मुजफ्फरपुर सुनसान लागि रहल ये जिम्हर देखियो उम्हरे शोक आ शंताप के माहौल ये। अनाथ भए गेल सोंसे देश कियाकि महाकवि आचार्य जानकीवल्लभ शाश्त्री जी के निधन भए गेल। शुक्रवार के हुनकर सम्मान में शोकसभाएं आयोजित कए के श्रदांजलि दए वाला के ताँता लागल रहय।साथ ही साथ सरकार से ओ महाकवि के देशरत्ना से विभूषित करय के मांग जोर पकड़य लागल ये।'ऊपर-ऊपर पी जाते हैं, जो पीने वाले होतें हैं जेइसन अमर पंक्ति से समाज के वंचित लोगेन के प्रति अपन वेदना के उड़ेलइ वाला महाकवि के निधन से भारतीय साहित्य के बहुत पैघ क्षति पहुंचल ये।
[055[4].jpg]हुनकर दिवंगत आत्मा के चिरशांति आ दुःख के ई घडी में हुनकर परिजन के धैर्य धारण करय के क्षमता प्रदान करय के लेल इश्वर से प्रार्थना करल गेल।महाकवि के आत्मा के शांति के लेल कैकटा विद्वान् आ नेता हुनकर घोर पहुंचल। महाकवि आचार्य जानकीवल्लभ शाश्त्री जी जन्म 5 जनवरी सन 1916 के औरंगाबाद के मैगरा गाम मे भेल छलन्हि. करीब सत्तर साल पहिने मुजफ्फरपुर अएला के बाद एहिठाम बसि गेलखिन्ह. एहिठाम रामदयालु सिंह कॉलेज,आरडीएस कॉलेज हिन्दी के विभागाध्यक्ष सेहो रहलखिन्ह। हुनकर निधन से सोंसे साहित्य जगत अनाथ भए गेल ये,मुदा उम्र के तकाजा कहियो आ होनी जिनकर बुलावा आबय छैक हुनका जाय से कियो नै रोकि सकय अछि।
हिनकर रचना हिनकर प्रसिद्ध रचना मे मेघगीत,अवन्तिका,राधा,श्यामासंगीत,एक किरण: सौ झाइयां,दो तिनकों का घोंसला,इरावती,कालीदास,अशोक वन, सत्यकाम..आदि प्रसिद्ध अछि।
साहित्य जगत हुनकर निधन से अनाथ ते भए ही गेल ये साथ ही साथ हुनकर कमी के साहित्य जगत कहियो पूरा कए सकत की नै ई एकता सोचनिये विषय अछि।

गुरुवार, 7 अप्रैल 2011

दहेज़ मुक्त मिथिला

             दहेज़ मुक्त मिथिला
जन - जन  के  अबैत अछि आबाज ,
दहेज़ मिटाओ यो  मिथिला के राज |
गुजराल   बुढ     पूरानक      बात ,
नव युवक रखैया आई अपन आगाज ||
         दहेज़  मुक्त मिथिला  बनाऊ आब -
जुग बितल आयल नव जमाना ,
संस्कृति बचाऊ सब  मारैया ताना |
कोट    - कचहरी वियाह करैया ,
कन्यादान के    आब    बुझैया ||
नव युवक मंगैया आब अपन  जबाब
       दहेज़  मुक्त मिथिला  बनाऊ आब -
अहिना चलत ज ई  जोड़  - जमाना ,
की - की नै करत नव युबक  अपन बहाना |
बात मानू सब खाऊ मिल किरियो ,
बेटा - बेटी  में लेब नै  दू टा कोरियो  ||
नब युवक के देखू  आयल  राज
       दहेज़  मुक्त मिथिला  बनाऊ आब -
गाम - गाम में रह्त ई शान ,
बेटा नै बेचीलैथी छैथि निक इंशान |
दोसरक घर के भीख ज़ोउ मांगब ,
भीख मांगा के  नाम  से  जानब ||
नव युबक बात पर राखु आब नाज
      दहेज़  मुक्त मिथिला  बनाऊ आब -
छी परदेशी या  कउनु सहरी ,
सुनू पुकार  आई  मिथिला  के |
जों संस्कृति छोरी गेला ओ ,
संतान कहओता ओ दोगला के |
नव युबक बात के नै मनाब खाराप
    दहेज़  मुक्त मिथिला  बनाऊ आब -

जय मैथिल , जय  मिथिला
मदन कुमार ठाकुर
 


देलौ हम पेटकुनिया@प्रभात राय भट्ट


देलौ हम पेटकुनिया@प्रभात राय भट्ट

तिनगो बेट्टी देख कनियाँ,
देलौं हम पेटकुनियां,
डाक्टर कहैय अल्ट्रासाउंडमें,
फेर अछि बेट्टीये  यए,
बड मुस्किल स करपरत निर्वाह,
कोना हयात बेट्टीक व्याह,
चलू कनियाँ करादैछी एबोर्सन,
हम नए लेब आब एतेक टेंसन,
रूईक जाऊ!!रूईक जाऊ!!रूईक जाऊ!!
मईट स जन्म लेलक सीता,
करेजा स सट्लक जनक पिता,
हम अहाँक कोईखक सन्तान,
किया करैत छि हमर अबसान,
जनक छैथ मिथिलाक पिता,
बेट्टी इहाँ के सब सीता,
किया करैत छि बाबा अहाँ चिंता,
बेट्टा बेट्टी में नए छै कोनो भिन्ता,
भैया संग हमहू स्कुल जेबई,
मोन लगाक पढ़ाई करबई,
डाक्टर इंजिनियर पाईलट बनबई,
जगमे अहाँक नाम रोशन करबई,

रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

बुधवार, 6 अप्रैल 2011

दुल्हे पीयोलक जहर@प्रभात राय भट्ट


दुल्हे पीयोलक जहर@प्रभात राय भट्ट

व्याह क्याक पिया घर गेलौं,
मोन में सुन्दर सपना सजेलौं,
सासुर घरके स्वर्ग समझलौं,
डोली चैढ पिया घर एलौं,
हर्षित मन केकरो नए देखलौं,
गिद्ध नजैर स सब हमरा देखलक,
झाड़ू बारहैन स स्वागत केलक ,
बाप किया नए देलकौ तिलक,
जरल परल जूठकुठ खियोलक,
सपना सबटा भेल चकनाचूर,
सास भेटल बड़ा निठुर,
ठनका जिका ठंकैय ससूर,
बात बात में चंडाल जिका
आईंख देख्बैय भैंसुर,
जेकरा साथै लेलौं सात फेरा
ओहो रहैय मर स दूर,
जाधैर बाप देतौने रुपैया ,
सूत बिछाक आँगनमें खटिया,
कल्पी कल्पी केलों गोरधरिया,
कतय स बाप हमर देत रुपैया,
बाबु यौ हम अहाँक राजदुलारी,
छालों हम म्याके प्यारी ,
विधाता लिखलन केहन विधना,
किया रचौलक एहन रचना,
नरक स बतर जीवन हम जीबैत छि,
आईंखक नोर घुईट घुईट पिबैत छि,
दूल्हा मगैछौ फटफटिया आ सोनाके चैन,
नए देभि त छीन लेतौ हमर सुखचैन,
बेट्टीक हालत देख बाप धैल्क हाथ माथ,
 चैन फटफटिया लक आएब हम साथ
सासूर घुइर जो बेट्टी रख बापक मान,
सपना भेल सबटा चकनाचूर,
सास सासूर भेटल बड़ा निठुर,
मालजाल जिका बन्ह्लक देवर,
ननद उतारलक गहना जेवर,
मुग्ड़ी स माईर माईर
बडकी दियादिन देखौलक तेवर,
पिजड़ा में हम फसल चीडैया,
कटल रहे हमर पंख  पंखुड़िया ,
पकैर धकैर दुल्हे पियोलक जहर,
 छटपट हम छटपटएलौं  कतेक प्रहर,
पत्थरके संसारमें कियो
नए सुनलक हमर चीत्कार,
प्राण निकलैत हम मुक्त भेलौं,
छोइड दलों यी पापी संसार,

रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

मंगलवार, 5 अप्रैल 2011

श्रीराम भजन अमृतवाणी

       श्री राम  भजन  अमृतवाणी 

१. श्री  हनुमान चालीसा
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     २.   कों नहीं जानत  है जग में
       कपी संकट मोचन नाम तिहारो

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३. श्री संकट मोचन

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४. मंगल भवन अमंगल हरी

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5.   श्री राम चन्द्र कृपाल  भाजुमन हरण भय ---

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६. मुझे अपनी सरन  में लेलो राम लेलो राम

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७. ओ पालन  हरे  निर्गुण ओ नियरे

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८.  कभी राम बनके कभी  स्याम  बनके  चली  आना -

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jnakpur wali bhauji


हे यए जनकपुरवाली भौजी सुनु नए कने,

कहिया स: हम एकटा बात छि मोनमें धयने,
अहाँक बोहीन लगैय दुतियाँक चाँद सन,

कोमल कोमल देह हुनक लगैय मखान सन,
लाल लाल ठोर हुनक लगैय मीठा पान सन,

अहाँक बोहीन भौजी लगैय बड़ा बेजोर,
हुनक रूप देख मोन में हमरा उठल हिलोर,
अन्हार घर में बोहीन अहाँक करिय इजोर,
गगनमे जेना चम् चम् चमकईय चानचकोर,

देख्लौ अहाँक बोहीन के हम जहिया स:
पढाई में मोन लगैय नए हमर तहियाँ स:
मुश्किल स भरहल अछि जिनगीक निर्वाह,
बढ़ाऊ बात आगू करादिया हमर विवाह,

अंग अंगमें सजायेब हुनका हिरा मोती के गहना,
खन खन खन्कौती ओ हाथमें नेपालक कंगना,
अहाँ बोहीनके डोली चढ़ा लायेब अपन अंगना,
ओ बनती हमर सजनी हम बनब हुनक सजना,

 रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट
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सोमवार, 4 अप्रैल 2011

हिंदू नववर्ष विक्रम संवत २०६८, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा की हार्दिक शुभ मंगलकामना...

समस्त मैथिल आ मिथिलांचल के मिथिला मंच के तरफ से हिंदी नव वर्ष के हार्दिक शुभकामना।साथ ही साथ नवरात्री के मंगलमय शुभकामना,हम मिथिलामंच के तरफ से समस्त मिथिलांचल, मैथिल आ देश विदेश में जतेक भी मैथिल बसल ये हुनकर स्वास्थ,सुख आ समृधि के माँ भगवती से कामना करैत छि। आशा ये की अहाँ सबहक़ जीवन में ई साल नबका उमंग भरे।

Hindu New Year

हिंदी नव वर्षक के अखनो धैर उत्तर प्रदेश, उत्तरांचल, बिहार, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़, हरियाणा आओर महाराष्ट्र में मान्यता दैत अछि। मुदा हम सब ग्रोगेरियन यानी अंग्रेजी कलेंडर के अनुसार अपन काज धंधा करैत छि। ई बेर हिंदी वर्ष २०६८ अंग्रेजी कलेंडर के अनुसार दिनांक 4 अप्रैल, 2011 के पडल ये। ई दिन मूल रूप से चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, अमावस्या में चैत्र माह के बाद के दिन के मानल जाय ये। हिंदी नव वर्षक कलेंडर चंद्र-सौर प्रणाली के अनुसार काज करय ये। जाही कारन अखनो धैर हम सब सूर्योदय आ चंद्रोदय के सटीक भविष्यवाणी कs सकय छि।
चैत्रक नवरात्रि या बसंतक नवरात्रि, नव वर्ष के पहिल दिन से शुरू होयत ये. ई नवरात्रि श्री राम नवमी पे समाप्त होए ये. जकरा श्री राम नवरात्र के रूप में जाने जाय ये।

पहाडों वाली मां....

http://www.atulshrivastavaa.blogspot.com/
डोंगरगढ  की मां  बम्‍लेश्‍वरी देवी  
(मेरी यह पोस्‍ट पिछले साल अक्‍टूबर महीने में प्रकाशित हो चुकी है। इसे आज से शुरू हो रहे चैत्र नवरात्रि के मौके पर फिर से प्रकाशित कर रहा हूं। मां बम्‍लेश्‍वरी मंदिर के इतिहास, पौराणिक महत्‍व और मां की महिमा का बखान करती यह पोस्‍ट आपके समक्ष फिर से प्रस्‍तुत है।)
जय माता दी। राजनांदगांव जिले के डोगरगढ़ में स्थित है मां बम्लेश्वरी देवी का मंदिर। हर साल नवरात्रि के मौके पर मां के दरबार में बड़ा मेला लगता है। दूर दूर से लोग मां के दर्शन को आते हैं। मां से मनोकामना मांगते हैं। और मां सबकी मनोकामना पूरी भी करती  है। छत्तीसगढ़ राज्य की सबसे ऊंची चोटी पर विराजित डोंगरगढ़ की मां बम्लेश्वरी का इतिहास काफी पुराना है। वैसे तो साल भर मां के दरबार में भक्तों का रेला लगा रहता है लेकिन लगभग दो हजार साल पहले माधवानल और कामकंदला की प्रेम कहानी से महकने वाली कामावती नगरी में नवरात्रि के दौरान अलग ही दृश्य होता है। छत्तीसगढ़ में धार्मिक पर्यटन कस सबसे बड़ा केन्द्र पुरातन कामाख्या नगरी है जो पहाड़ों से घिरे होने के कारण पहले डोंगरी और अब डोंगरगढ़ के नाम से जाना जाता है। यहां ऊंची चोटी पर विराजित बगलामुखी मां बम्लेश्वरी देवी का मंदिर छत्तीसगढ़ ही नहीं देश भर के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केन्द्र बना हुआ है। हजार से ज्यादा सीढिय़ां चढ़कर हर दिन मां के दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु आते हैं और जो ऊपर नहीं चढ़ पाते उनके लिए मां का एक मंदिर पहाड़ी के नीचे भी है जिसे छोटी बम्लेश्वरी मां के रूप में पूजा जाता है। अब मां के मंदिर में जाने के लिए रोप वे भी लग गया है। 
वैसे तो मां बम्लेश्वरी के मंदिर की स्थापना को लेकर कोई स्पष्ट  प्रमाण नहीं है पर जो तथ्य सामने आए हैं उसके मुताबिक  उज्जैन के राजा विक्रमादित्‍य को मां बगलामुखी ने सपना दिया था और उसके बाद डोंगरगढ़ की पहाड़ी पर कामाख्या नगरी के राजा कामसेन ने मां के मंदिर की स्थापना की थी। एक कहानी यह भी है कि राजा कामसेन और विक्रमादित्य के बीच युद्ध में राजा विक्रमादित्य के  आव्हान पर उनके कुल देव उज्जैन के महाकाल कामसेन की सेना का विनाश करने लगे और जब कामसेन ने अपनी कुल देवी मां बम्लेश्वरी का आव्हान किया तो वे युद्ध के मैदान में पहुंची, उन्हें देखकर महाकाल ने अपने वाहन नंदी से उतर कर मां की शक्ति को प्रमाण किया और फिर दोनों देशों के बीच समझौता हुआ। इसके बाद भगवान शिव और मां बम्लेश्वरी अपने अपने लोक को विदा हुए। इसके बाद ही मां बम्लेश्वरी के पहाड़ी पर विराजित होने की भी कहानी है। यह भी कहा जाता है कि कामाख्या नगरी जब प्रकृति के तहत नहस में नष्ट हो गई थी तब डोंगरी में मां की प्रतिमा स्व विराजित प्रकट हो गई थी। सिद्ध महापुरूषों और संतों ने अपने आत्म बल और तत्व ज्ञान से यह जान लिया कि पहाड़ी में मां की प्रतिमा प्रकट हो गई है और इसके बाद मां के मंदिर की स्थापना की गई।
      
प्राकृतिक रूप से चारों ओर से पहाड़ों में घिरे डोंगरगढ़ की सबसे ऊंची पहाड़ी पर मां का मंदिर स्थापित है। पहले मां के दर्शन के लिए पहाड़ों से ही होकर जाया जाता था लेकिन कालांतर में यहां सीढिय़ां बनाई गईं और मां के मंदिर को भव्य स्वरूप देने का काम लगातार जारी है। पूर्व में खैरागढ़ रियासत के राजाओं द्वारा मंदिर की देखरेख की जाती थी बाद में राजा वीरेन्द्र बहादुर सिंह ने ट्रस्ट का गठन कर मंदिर के संचालन का काम जनता  को सौंप दिया। अब मंदिर में जाने के लिए रोप वे की भी व्यवस्था हो गई है और मंदिर ट्रस्ट अस्पताल धर्मशाला जैसे कई सुविधाओं की दिशा में काम कर रहा है। मंदिर में आने वाले श्रद्धालु मां के दिव्य स्वरूप को देखकर यहीं रूक जाने को लालायित रहते हैं। मां के मंदिर में आस्था के साथ हर रोज हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। सिर्फ छत्तीसगढ़ ही नहीं, देश के कई हिस्सों से मंदिर में लोग आते हैं और मां से आशीर्वाद मांगते हैं। आम दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या तो फिर भी कम होती है लेकिन नवरात्रि के मौके पर मां के मंदिर में हर दिन लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। मां के दरबार में आने वाला हर श्रद्धालु खुद को भाग्यशाली समझता है और मां के दर्शन कर लौटते वक्त उसके जेहन में अगली बार फिर आने की लालसा जग जाती है।

डोंगरगढ़ में मां बम्लेश्वरी  के दो मंदिर हैं। एक मंदिर पहाडी के नीचे है और दूसरा पहाड़ी के ऊपर। पहाडी के नीचे के मंदिर को बड़ी बमलई का मंदिर और पहाड़ी के नीचे के मंदिर को छोटी बमलई का मंदिर कहा जाता है।

मां बम्लेश्वरी  मंदिर को  लेकर कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां

00   एतिहासिक और धार्मिक  नगरी डोंगरगढ़ में मां बम्लेश्वरी के दो मंदिर विश्व प्रसिद्ध हैं। एक मंदिर 16 सौ फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित है जो बड़ी बम्लेश्वरी के नाम से प्रसिद्ध है। समतल पर स्थित मंदिर छोटी बम्लेश्वरी के नाम से विख्यात है।

00   ऊपर विराजित मां और नीचे विराजित मां को एक दूसरे की बहन कहा जाता है। ऊपर वाली मां बड़ी और नीचे वाली छोटी बहन मानी गई है।

00   सन 1964 में खैरागढ़ रियासत के भूतपूर्व नरेश श्री राजा वीरेन्द्र बहादुर सिंह ने एक ट्रस्ट की स्थापना कर मंदिर का संचालन ट्रस्ट को सौंप दिया था।

00   मां बम्लेश्वरी देवी शक्तिपीठ का इतिहास लगभग 2200 वर्ष पुराना है। डोंगरगढ़ से प्राप्त भग्रावेशों से प्राचीन कामावती नगरी होने के प्रमाण मिले हैं। पूर्व में डोंगरगढ़ ही वैभवशाली कामाख्या नगरी कहलाती थी।

00   मंदिर के पुराने पुजारी और जानकार बताते हैं कि राजा विक्रमादित्य को माता ने स्वप्‍न  दिया था कि उन्हें यहां की पहाड़ी पर स्थापित किया जाए और उसके बाद उन्होंने मंदिर का निर्माण कराया। ऐसा भी कहा जाता है कि राजा विक्रमादित्य के स्वप्‍न के बाद मंदिर का निर्माण राजा कामसेन ने कराया था।

00   मां बम्लेश्वरी मंदिर के इतिहास को लेकर कोई स्पष्ट  तथ्य तो मौजूद नहीं है, लेकिन मंदिर के इतिहास को लेकर जो पुस्तकें और दस्तावेज सामने आए हैं, उसके मुताबिक डोंगरगढ़ का इतिहास मध्यप्रदेश के उज्जैन से जुड़ा हुआ है।

00   मां बम्लेश्वरी को मध्यप्रदेश के उज्जैयनी के प्रतापी राजा विक्रमादित्य की कुल देवी भी कहा जाता है।

00   ऐसी किवदंती है कि राजा वीरसेन की कोई संतान नहीं थी। वे इस बात से दुखी रहते थे। कुछ पंडितों की सलाह पर राजा वीरसेन और रानी महिषमतिपुरी मंडला गए। वहां पर उन्होंने भगवान शिव और देवी भगवती की आराधना की। उन्होंने वहां एक शिवालय का निर्माण भी कराया। इसके एक साल के भीतर रानी गर्भवती हुई और उसे पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। पुत्र का नाम मदनसेन रखा गया।  इसके बाद राजा वीरसेन ने पुत्र रत्न प्राप्त होने को शिव और भगवती की कृपा मानकर मां बम्लेश्वरी के नाम से डोंगरगढ़ में मां बम्लेश्वरी का मंदिर बनवाया।

00  इतिहासकारों और विद्वानों ने इस क्षेत्र को कल्चूरी काल का पाया है लेकिन अन्य उपलब्ध सामग्री जैसे जैन मूर्तियां यहां दो बार मिल चुकी हैं, तथा उससे हटकर कुछ मूर्तियों के गहने, उनके वस्त्र, आभूषण, मोटे होठों तथा मस्तक के लम्बे बालों की सूक्ष्म मीमांसा करने पर इस क्षेत्र की मूर्ति कला पर गोंड कला का प्रमाण परिलक्षित हुआ है।

00  यह अनुमान लगाया जाता है कि 16 वीं शताब्दी तक  डूंगराख्या नगर गोंड राजाओं के अधिपत्‍य में रहा। यह अनुमान भी अप्रासंगिक  नहीं है कि गोंड राजा पर्याप्त समर्थवान थे, जिससे राज्य में शांति व्यवस्था स्थापित थी। आज भी पहाड़ी में किले के बने हुए अवशेष बाकी हैं। इसी वजह से इस स्थान का नाम डोंगरगढ़ (गोंगर, पहाड़, गढ़, किला) रखा गया और मां बम्लेश्वरी का मंदिर चोटी पर स्थापित किया गया।

अन्य जानकारियां

00   एतिहासिक और धार्मिक स्थली डोंगरगढ़ में कुल 11 सौ सीढिय़ां चढऩे के बाद मां के दर्शन होते हैं।

00   यात्रियों की सुविधा के लिए रोपवे का निर्माण किया गया है। रोपवे सोमवार से शनिवार तक सुबह आठ से दोपहर दो और फिर अपरान्ह तीन से शाम पौने सात तक चालू रहता है। रविवार को सुबह सात बजे से रात सात बजे तक चालू रहता है। नवरात्रि के मौके पर चौबीसों घंटे रोपवे की सुविधा रहती है।

00   बुजुर्ग यात्रियों के लिए कहारों की भी व्यवस्था पहले थी पर रोपवे हो जाने के बाद कहार कम ही हैं।
00   मंदिर के नीचे छीरपानी जलाशय है जहां यात्रियों के लिए बोटिंग की व्यवस्था भी है।

00   डोंगरगढ़ में मां बम्लेश्वरी के दो मंदिरों के अलावा बजरंगबली मंदिर, नाग वासुकी मंदिर, शीतला मंदिर,  दादी मां मंदिर भी हैं।

00  मुंबई हावड़ा मार्ग पर राजनांदगांव से डोंगरगढ़ जाते समय राजनांदगांव में मां पाताल भैरवी दस महाविद्या पीठ मंदिर है, जो अपनी भव्यता के चलते दर्शनीय है। जानकार बताते हैं कि विश्‍व के सबसे बडे शिवलिंग के आकार के मंदिर में मां पातालभैरवी विराजित हैं। तीन मंजिला इस मंदिर में पाताल में मां पाताल भैरवी, प्रथम तल में दस महाविद़़यापीठ और ऊपरी तल पर भगवान शंकर का मंदिर है।
00  मां बम्लेश्वरी मंदिर में ज्योत जलाने हर वर्ष देश और विदेशों से हजारों श्रद्धालु आते हैं। हालत यह है कि मंदिर में वर्तमान में ज्योत के लिए जो बुकिंग कराई जा रही है है, वह वर्ष 2015 के क्वांर नवरात्रि के लिए है।

00   ट्रस्ट समिति अस्पताल संचालित करती है। अब मेडिकल कालेज खोले जाने की भी योजना है।

00   मंदिर का पट सुबह चार बजे से दोपहर एक बजे तक और फिर दोपहर दो बजे से रात 10 बजे तक खुला रहता है। रविवार को सुबह चार बजे से रात दस बजे तक मंदिर लगातार खुला रहता है।
00   नवरात्रि के मौके पर मंदिर का पट चौबीसों घंटे खुला रहता है।

डोंगरगढ़ कैसे पहुंचे

00   डोंगरगढ़ के लिए ट्रेन और सड़क मार्ग दोनों ओर से रास्ता है।

00   मुबई हावड़ा रेल मार्ग पर हावड़ा की ओर से राजधानी रायपुर के बाद डोंगरगढ़ तीसरा बड़ा स्टेशन है। बीच में दुर्ग और राजनांदगांव रेलवे स्टेशन पड़ता है।

00   रायपुर से डोंगरगढ़ की रेल मार्ग से दूरी लगभग 100 किलोमीटर है।

00   राजनांदगांव जिला मुख्यालय से डोंगरगढ़ की रेल मार्ग से दूरी 35 किलोमीटर है।
00   सड़क  मार्ग से डोंगरगढ़ के लिए राजनांदगांव जिला मुख्यालय से दूरी 40 किलोमीटर है और नेशनल हाईवे में राजनांदगांव से नागपुर की दिशा में जाने के बाद 15 किलोमीटर की दूरी पर तुमड़ीबोड गांव से डोंगरगढ़ के लिए पक्की सड़क मुड़ती है जो सीधे डोंगरगढ़ जाती है।

00  डोंगरगढ़ रेलवे स्टेशन जंक्शन की श्रेणी में आता है। यहां सुपर फास्ट ट्रेनों को छोड़कर सारी गाडियां रूकती हैं, लेकिन नवरात्रि में सुपर फास्ट ट्रेनें भी डोंगरगढ़ में रूकती हैं।
00  डोंगरगढ़ जाने वाले यात्रियों के लिए रायपुर से लेकर राजनांदगांव तक यात्री बसों और निजी टैक्सियों की व्यवस्था रहती है।

00  डोंगरगढ़ के लिए निकटस्थ हवाई अड्डा रायपुर के माना में स्थित है।

00   डोंगरगढ़ में यात्रियों की सुविधा के लिए ट्रस्ट समिति द्वारा मंदिर परिसर में धर्मशाला का निर्माण किया गया है। रियायती दर पर यहां कमरे मिलते हैं। मुफ्त में भी धर्मशाला के हाल में रूकने की व्यवस्था है।

00   यात्रियों के लिए रियायती दर पर भोजन की व्यवस्था भी रहती है। ट्रस्ट द्वारा मंदिर के नीचे और बीच में केंटीन संचालित है।

00   नवरात्रि पर विभिन्न संगठनों द्वारा नि:शुल्‍क भंडारा की व्यवस्था भी की जाती है।

00   डोंगरगढ़ में यात्रियों की सुविधा के लिए होटल और लाज भी उपलब्ध है।

00   डोंगरगढ़ आने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए राज्य सरकार के पर्यटन विभाग ने तुमड़ीबोड के पास मोटल बनाया है।

00  डोंगरगढ़ चारों ओर से पहाड़ों से घिरा हुआ है और पहाड़ों पर हरियाली यहां मन मोह लेती है।

00   डोंगरगढ़ में एक पहाड़ी पर बौद्ध धर्म के लोगों का तीर्थ प्रज्ञागिरी स्थापित है। यहां भगवान बुद्ध की विशालकाय प्रतिमा स्थापित है।

00  डोंगरगढ़ में वर्ष भर छत्तीसगढ़ी देवी भक्ति गीतों की शूटिंग होते रहती है और प्रदेश के अलावा बाहर के कलाकार यहां लगातार आते रहते हैं।http://www.atulshrivastavaa.blogspot.com/