dahej mukt mithila

(एकमात्र संकल्‍प ध्‍यान मे-मिथिला राज्‍य हो संविधान मे) अप्पन गाम घरक ढंग ,अप्पन रहन - सहन के संग,अप्पन गाम-अप्पन बात में अपनेक सब के स्वागत अछि!अपन गाम -अपन घरअप्पन ज्ञान आ अप्पन संस्कारक सँग किछु कहबाक एकटा छोटछिन प्रयास अछि! हरेक मिथिला वाशी ईहा कहैत अछि... छी मैथिल मिथिला करे शंतान, जत्य रही ओ छी मिथिले धाम, याद रखु बस अप्पन गाम - अप्पन बात ,अप्पन मान " जय मैथिल जय मिथिला धाम" "स्वर्ग सं सुन्दर अपन गाम" E-mail: apangaamghar@gmail.com,madankumarthakur@gmail.com mo-9312460150

शुक्रवार, 4 फ़रवरी 2011

उद्वोधन

कहियो पूर्णिमा सन आलोकित,
मैथिल, मिथिला आ
मैथिली,
घोर अन्हरियामे हराओल अ,
किछ दूर
टिमटिमाइत तारा सन,
किछ मिटैल पगडण्डी,
रि-धुरिमे ओझराल अ,
सभ्यातक सूर्य,
कहिया परिचयके
बदलि देलक,
किछ आभासो नै भेल,
मुदा !
जहन-जहन पा
छू तकैत छी,
ह्रदयमे कि
छु उथल-पुथल,
बहरा
लेल व्याकुल अ,
मुदा !
भीतरे-भीतर घु
टि जाइत अ,
स्व
च्छन्दता- स्वतंत्रता नै अ,
अपन अहंग,
सैहबी डोरीमे ब
न्हाए,
जाबी लगौने,
बरद जका
ऑफिसक दाउनमे लागल छी,
अपन सहजता-सरलतास
डेराइ,
जे पाछू नै भ जा ,
अपन परिचयस
भगैत,
नव परिचय बना
बैमे लागल छी,
मुदा !
ओ स्वर्णिम गौरव गाथा,
कोना लिखब,
माता-पिता आ
पूर्वजक प्रति श्रद्धा बिनु,
भा
षाक प्रेम सिनेह बिनु,
कोन रंगस
रंगब
अपन कैनवासके
…..
कोन गीतस
सजैब
अपन जीवनके ……
मुदा !
हम सुतल नै
छी,
मरल नै
छी,
जागल
छी,
हमर अल्हड़ता, हमर सहजता,
हमर नम्रता
हमर परिचय अ,
सभ्यातक आलोकस
आलोकित,
आब हम समर्थवान छी,
किक ने अपन समृद्धि,
अपन परिचयके
सींची,
अतीत त
स्वर्णिम छल,
आब आ
आ आबैबला काल्हि,
के
सेहो स्वर्णिम बनाबी,
गोटे मिली कऽ,
एक दोसरके
मैथिलीक रपान कराबी.

pankajjha23@gmail.com
http://pankajjha23.blogspot.com/

2 टिप्‍पणियां:

मदन कुमार ठाकुर ने कहा…

bahut nik pankaj ji

हमर अल्हड़ता, हमर सहजता, हमर नम्रता
हमर परिचय अइ,
सभ्यातक आलोकसँ आलोकित,
आइ आब हम समर्थवान छी,

पंकज कुमार झा ने कहा…

@धन्यवाद मदन जी, आब समय के संग चलैत ज्ञान, विज्ञान आ तकनीकक प्रयोग कै सब गोटे मिली क मैथिल मिथिला मैथिलीक लेल किछ निक करी येह प्रार्थना अई ईश्वर स ....