dahej mukt mithila

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शुक्रवार, 22 मई 2026

आप रामायण पढ़ते हो न? राम जी तो किसी को नहीं मारते थे बिना वजह।

 जेल में बंद कैदी रोज़ रामायण पढ़ता था… एक दिन जेलर को पता चला कि उसने अपराध क्यों किया था।

1. सीतापुर जेल की बैरक नंबर 7  

सीतापुर जिला जेल। ऊँची दीवारें, लोहे की सलाखें और सन्नाटा। बैरक नंबर 7 में 42 कैदी थे। उन्हीं में एक था कैदी नंबर 2911 — राघव शुक्ला। उम्र 38 साल, दुबला-पतला, दाढ़ी बढ़ी हुई, आँखें हमेशा नीचे।  

राघव की पहचान थी रामायण। सुबह 4 बजे उठता, नहाकर जेल के मंदिर वाले कोने में बैठ जाता। फटी-पुरानी रामायण खोलता और पाठ करता। आवाज़ धीमी पर साफ। "मंगल भवन अमंगल हारी, द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी।"  

दूसरे कैदी हँसते। "पंडित, रामायण पढ़ने से सजा कम नहीं होगी। 20 साल काटने हैं तुझे।"  

राघव जवाब नहीं देता। पाठ खत्म करके वो रामायण को माथे से लगाता और वापस बैरक में।  

जेलर थे अविनाश सिंह। 50 साल के, कड़क अफसर। 25 साल की नौकरी में हर तरह के कैदी देखे थे। पर राघव अजीब था। न लड़ाई, न गाली, न भागने की कोशिश। बस रामायण।  

2. अपराध क्या था?  

राघव की फाइल में लिखा था — "धारा 302, हत्या। 2019 में लखनऊ के गोमतीनगर में बिल्डर विजय अग्रवाल की हत्या। पत्नी और 2 साल की बेटी के सामने गोली मारी। कोर्ट ने उम्रकैद दी।"  

जेलर अविनाश को हैरानी होती। जो आदमी रामायण पढ़ता है, वो एक परिवार के सामने खून कैसे कर सकता है? उन्होंने पुराने सिपाही शिवराम से पूछा।  

"साहब, ये आदमी कोर्ट में भी चुप था। वकील नहीं किया। खुद कहा — हाँ, मैंने मारा। बस।"  

"क्यों मारा, ये नहीं बताया?"  

"ना साहब। जज ने भी पूछा। बोला — वजह मत पूछिए। सजा दे दीजिए।"  

अविनाश की उलझन बढ़ गई।  

3. जेल में रामराज  

राघव 3 साल से जेल में था। धीरे-धीरे उसने बैरक का माहौल बदल दिया। जो कैदी गाली देते थे, वो अब धीरे बोलते। रामायण के बाद राघव सबको एक चौपाई का मतलब समझाता।  

"कर्म प्रधान विश्व रचि राखा, जो जस करहि सो तस फल चाखा।"  

"मतलब, भाई, जो करोगे वही भरोगे। गाली दोगे तो गाली मिलेगी। प्रेम दोगे तो प्रेम।"  

छोटू नाम का 19 साल का लड़का चोरी में आया था। राघव ने उसे अक्षर सिखाए। अब छोटू रामायण पढ़ लेता था।  

जेल में लड़ाई हो जाती तो वार्डन बुलाते — "पंडित को बुलाओ।" राघव दो लाइन बोलता, और मारपीट रुक जाती।  

जेलर अविनाश देखते रहते। सोचते, "अगर ये आदमी बाहर होता तो कितने घर बचा लेता। पर इसने एक घर उजाड़ दिया। क्यों?"  

4. बेटी की चिट्ठी  

2025 की मार्च। होली का दिन। जेल में कैदियों को घर से चिट्ठी मिलती है। राघव को कभी चिट्ठी नहीं आई थी।  

पर उस दिन एक लिफाफा आया। भेजने वाली — "अनन्या अग्रवाल, क्लास 6, सेंट मैरी स्कूल, लखनऊ।"  

जेलर चौंक गए। अग्रवाल... वही विजय अग्रवाल की बेटी?  

नियम था, जेलर चिट्ठी पढ़कर देते हैं। अविनाश ने लिफाफा खोला।  

*अंकल,  

आप मुझे जानते नहीं। मैं अनन्या हूँ। पापा विजय अग्रवाल की बेटी।  

मम्मा कहती हैं आपने मेरे पापा को मार दिया। पुलिस अंकल ने भी यही कहा।  

पर मैं आपसे नफरत नहीं करती।  

क्योंकि मम्मा रात को रोती हैं। वो कहती हैं, "तेरे पापा अच्छे आदमी नहीं थे।"  

नानी कहती हैं, "राघव अंकल ने तेरी जिंदगी बचाई थी।"  

मैं बहुत कन्फ्यूज हूँ।  

आप सच बताओगे? आपने पापा को क्यों मारा?  

आप रामायण पढ़ते हो न? राम जी तो किसी को नहीं मारते थे बिना वजह।  

प्लीज जवाब देना।  

अनन्या*  

अविनाश का हाथ काँप गया। उन्होंने चिट्ठी राघव को दी।  

राघव ने चिट्ठी पढ़ी। पहली बार उसकी आँखें भर आईं। उसने चिट्ठी को माथे से लगाया और जेलर से बोला, "साहब, क्या मैं इसे जवाब दे सकता हूँ?"  

"हाँ। पर पहले मुझे बताओ, सच क्या है?"  

राघव चुप रहा। फिर बोला, "साहब, कल सुंदरकांड का पाठ पूरा होगा। उसके बाद बताऊँगा। 7 साल से इस दिन का इंतज़ार कर रहा था।"  

5. सुंदरकांड और खुलासा  

अगली सुबह। जेल के मंदिर में सुंदरकांड। राघव ने पाठ किया। जेलर अविनाश भी बैठे।  

पाठ खत्म हुआ। राघव जेलर के कमरे में आया। "साहब, बैठ जाऊँ?"  

"हाँ राघव। अब बताओ।"  

राघव ने लंबी साँस ली। "साहब, मैं लखनऊ में ड्राइवर था। विजय अग्रवाल के यहाँ। 8 साल काम किया। वो बिल्डर था, पर आदमी नहीं था।"  

"मतलब?"  

"साहब, विजय अग्रवाल की बीवी यानी मिसेज कविता बहुत शरीफ थीं। बेटी अनन्या तब 2 साल की थी। पर विजय शराब पीकर दोनों को मारता था। कई बार मैंने बीच-बचाव किया। नौकरी जाने का डर था, पर चुप नहीं रह पाया।"  

"फिर एक दिन?"  

"5 मार्च 2019। होली का दिन था। विजय नशे में था। कविता मैडम ने तलाक माँगा। विजय ने कहा — 'तलाक दे दूँगा, पर पहले तुझे और तेरी बेटी को जान से मारूँगा। इंश्योरेंस का पैसा मिलेगा।'"  

राघव की आवाज भर्रा गई। "उसने पिस्तौल निकाली। मैडम डरकर कमरे में भागीं। अनन्या पालने में सो रही थी। विजय पालने की तरफ बढ़ा। बोला — 'पहले इसे निपटाता हूँ।'"  

"मैं किचन में था। सब सुन रहा था। मेरे पास कुछ नहीं था। विजय ने ट्रिगर पर उंगली रखी। साहब, उस वक्त मुझे रामायण की वो लाइन याद आई — 'परहित सरिस धर्म नहिं भाई। पर पीड़ा सम नहिं अधमाई।'"  

"दूसरों की भलाई से बड़ा धर्म नहीं। और दूसरों को दुख देने से बड़ा पाप नहीं।"  

"मैं दौड़ा। गेट के पास विजय की लाइसेंसी रिवॉल्वर पड़ी थी। मैंने उठाई। वार्निंग दी — 'साहब, रुक जाओ। बच्ची को मत मारो।' वो हँसा — 'तू ड्राइवर, मुझे रोकेगा?' उसने पालने पर गोली चला दी।"  

राघव चुप हो गया।  

"फिर?" जेलर ने पूछा।  

"फिर मैंने गोली चला दी साहब। एक गोली। सीधे छाती में। विजय वहीं गिर गया।"  

"अनन्या बच गई?"  

"हाँ साहब। गोली पालने के बगल से निकली। मैं दौड़कर अनन्या को उठाया। कविता मैडम बेहोश थीं। मैंने पुलिस को फोन किया। कहा — 'मैंने मारा है। आ जाओ।'"  

6. कोर्ट में चुप्पी क्यों?  

"राघव, तुमने कोर्ट में ये सब क्यों नहीं बताया? सेल्फ डिफेंस था। सजा कम हो जाती।"  

राघव हँसा, फीकी हँसी। "साहब, कविता मैडम की हालत खराब थी। पुलिस ने उनसे पूछा तो वो डर गईं। विजय का परिवार बहुत पावरफुल था। उन्होंने कहा — 'अगर मैं गवाही दूँगी तो ये लोग मेरी बेटी को मार देंगे।'"  

"मैंने मैडम से कहा — 'आप चुप रहो। अनन्या को बड़ा करना है। मैं संभाल लूँगा।' साहब, एक माँ को अपनी बच्ची के लिए झूठ बोलना पड़े, इससे बड़ा पाप नहीं। मैंने वो पाप अपने सिर ले लिया।"  

"पर तुम तो 20 साल के लिए अंदर हो गए।"  

"साहब, बाहर रहकर भी मैं कौन सा आजाद था? हर रात सोचता — काश 2 सेकंड पहले पहुँच जाता, तो गोली ही न चलती। जेल में कम से कम राम जी के पास हूँ।"  

7. जेलर का धर्मसंकट  

अविनाश सन्न रह गए। फाइल में "हत्या" लिखा था। पर असल में ये "रक्षा" थी।  

उन्होंने SP साहब को फोन किया। "सर, केस री-ओपन हो सकता है क्या?"  

"अविनाश, 7 साल हो गए। कोर्ट का फैसला है। अब क्या कर सकते हैं?"  

"सर, नई गवाही है। बच्ची की चिट्ठी है।"  

SP चुप। "देखता हूँ। पर उम्मीद मत रखना।"  

उधर राघव ने अनन्या को जवाब लिखा।  

*बेटी अनन्या,  

तुम्हारे पापा को मैंने मारा, ये सच है। पर क्यों मारा, ये भी सच है।  

उस दिन होली थी। रंग की जगह खून बह जाता अगर मैं न रोकता।  

तुम पालने में थी। तुम्हारे पापा नशे में थे। वो तुम्हें मारने वाले थे।  

मैंने राम जी से पूछा — क्या करूँ? उन्होंने कहा — 'बच्ची को बचा।'  

बस मैंने वही किया।  

मुझे सजा मिली। पर तुम्हें जिंदगी मिली। मुझे कोई पछतावा नहीं।  

तुम अपनी मम्मा का ख्याल रखना। खूब पढ़ना। और हाँ, रामायण जरूर पढ़ना। उसमें हर सवाल का जवाब है।  

तुम्हारा,  

राघव अंकल*  

8. कविता का आना  

चिट्ठी के 15 दिन बाद सीतापुर जेल के गेट पर एक औरत आई। साड़ी, आँखों में चश्मा, साथ में 9 साल की बच्ची।  

गेट पर एंट्री — "कविता अग्रवाल, अनन्या अग्रवाल। कैदी 2911 से मुलाकात।"  

जेलर अविनाश ने स्पेशल इजाजत दी। मुलाकात वाले कमरे में राघव आया। सामने कविता और अनन्या।  

कविता फूट पड़ी। "राघव भैया... मुझे माफ कर दो। मैंने कायरता की। आपकी जिंदगी खराब कर दी।"  

राघव ने हाथ जोड़े। "मैडम, आप माँ हो। माँ से बड़ा कोई धर्म नहीं। आपने सही किया।"  

अनन्या दौड़कर राघव के पैरों में गिर गई। "अंकल, थैंक यू। आपने मुझे बचाया।"  

राघव ने उसे उठाया, सिर पर हाथ फेरा। "बेटा, थैंक यू मत कहो। तुम खुश रहो, यही मेरी सजा काट देगा।"  

कविता ने एक फाइल निकाली। "साहब, ये मेरा बयान है। 7 साल बाद ही सही, पर अब सच बोलूँगी। कोर्ट में दूँगी। राघव भैया बेकसूर हैं।"  

9. केस री-ओपन  

कविता के बयान से हड़कंप मच गया। मीडिया में खबर — "ड्राइवर ने मालिक को क्यों मारा? 7 साल बाद खुला राज।"  

हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया। री-ट्रायल का आदेश। अनन्या भी कोर्ट में बोली, "अंकल ने मुझे बचाया। मैंने देखा था।"  

पुराने नौकरों ने भी गवाही दी — "साहब बीवी-बच्ची को मारते थे।"  

बैलिस्टिक रिपोर्ट से साबित हुआ कि पहली गोली विजय ने चलाई थी, पालने की तरफ।  

6 महीने केस चला। 2026 की जनवरी। जज ने फैसला सुनाया   

"राघव शुक्ला ने अपराध नहीं, कर्तव्य किया। सेल्फ डिफेंस और नाबालिग की रक्षा। कोर्ट इन्हें बाइज्जत बरी करती है। 7 साल की सजा के लिए राज्य सरकार मुआवजा दे।"  

कोर्ट में तालियाँ बज गईं। राघव चुप था। उसकी आँखों में आँसू थे।  

10. आजादी और रामायण  

26 जनवरी 2026। सीतापुर जेल का गेट। राघव बाहर आया। हाथ में वही फटी रामायण। सामने अनन्या, कविता, जेलर अविनाश, और पूरी बैरक नंबर 7।  

छोटू दौड़कर आया। "पंडित जी, अब कौन रामायण पढ़ाएगा?"  

राघव हँसा। "तू पढ़ाएगा। मैंने तुझे सिखाया न?"  

जेलर अविनाश ने सैल्यूट किया। "राघव, माफ करना। मैंने तुम्हें कैदी समझा। तुम तो असली जेलर हो — जिसने सबको बुराई की जेल से आजाद किया।"  

राघव ने पैर छुए। "साहब, आपने मुझे बेटी की चिट्ठी दी। वरना मैं सच लेकर मर जाता।"  

11. नया जीवन  

राघव अब लखनऊ में कविता के घर के पास ही रहता है। अनन्या उसे "बड़े पापा" बुलाती है।  

उसने "रामायण सेवा ट्रस्ट" खोला है। जेल में बंद कैदियों को रामायण बाँटता है। कानून की क्लास देता है — "सेल्फ डिफेंस क्या है, चुप रहने से क्या नुकसान है।"  

हर मंगलवार सीतापुर जेल जाता है। बैरक नंबर 7 में सुंदरकांड होता है। अब पाठ छोटू करता है।  

कविता ने कहा, "भैया, आप हमारे साथ रह लो।"  

राघव मना कर देता। "नहीं मैडम। मैं पास रहूँगा, पर साथ नहीं। दुनिया को लगना चाहिए कि आपने एहसान चुकाया। पर मैंने तो धर्म निभाया था, एहसान नहीं।"  

12. जेलर की डायरी  

अविनाश सिंह अब DIG हैं। उनकी टेबल पर एक रामायण रखी रहती है। उस पर राघव ने लिखा है —  

"साहब, वर्दी का रंग खाकी है, पर काम राम जी वाला है। सही को सही कहने से मत डरना।"  

अविनाश नए जेलरों को ट्रेनिंग देते हैं। पहला लेसन — "हर कैदी अपराधी नहीं होता। कभी-कभी वो राम होता है, जिसे सीता बचाने के लिए रावण मारना पड़ा। फर्क बस इतना है कि त्रेता में राम को राज मिला, कलयुग में जेल।"  

आखिरी चौपाई  

राघव अब भी रोज रामायण पढ़ता है। अनन्या पास बैठकर सुनती है। जब वो चौपाई आती है — "परहित सरिस धर्म नहिं भाई", अनन्या पूछती है, "बड़े पापा, इसका मतलब क्या है?"  

राघव उसकी सिर पर हाथ फेरता है। "बेटा, मतलब ये कि अगर किसी की जान बचाने के लिए तुम्हें सजा भी मिले, तो वो सजा नहीं, पूजा है।"  

अनन्या मुस्कुराती है। खिड़की से सूरज की रोशनी राघव की रामायण पर पड़ती है। 7 साल जेल की दीवारों ने जो सोना छिपा रखा था, वो अब दुनिया के सामने चमक रहा था।  

क्योंकि अपराध वो नहीं जो कानून की किताब में लिखा हो। अपराध वो है जो इंसानियत की किताब के खिलाफ हो। और राघव ने इंसानियत की किताब कभी बंद नहीं की।  


रविवार, 10 मई 2026

ॐ यज्ञोपवीत धारण एवं विसर्जन: मंत्र, विधि आ महत्व

 ॐ यज्ञोपवीत धारण एवं विसर्जन: मंत्र, विधि आ महत्व 


सनातन धर्म में १६ संस्कारक वर्णन भेटैत अछि, जकरा में 'उपनयन' यानी 'यज्ञोपवीत संस्कार' कए अत्यंत पवित्र आ अनिवार्य मानल गेल अछि। यज्ञोपवीत केवल सूतक ताग मात्र नहि अछि, बल्कि ई ज्ञान, कर्म, आ उपासना कए प्रतीक थिक। शास्त्रक अनुसार, वैदिक रीतिक संग यज्ञोपवीत धारण कएला सँ मनुष्य कए नव जन्म (द्विजत्व) भेटैत अछि।

आजुक एही आलेख में हम सब जानब वाजसनेयी आ छन्दोग पद्धति कए अनुसार यज्ञोपवीत धारण करबाक मंत्र, ओकर विधि, आ प्राचीन जनेऊ विसर्जन मंत्र कए बारे में।

 यज्ञोपवीत धारण मंत्र

जनेऊ धारण करबाक काल अपन-अपन शाखा (वाजसनेयी वा छन्दोग) कए अनुसार मंत्रक जप करबाक विधान अछि।

 वाजसनेयी पद्धति कए यज्ञोपवीत मंत्र

 ॐ यज्ञोपवीतं परमं पवित्रं प्रजापतेर्यत्सहजं पुरस्तात्।

आयुष्यमग्र्यं प्रतिमुञ्च शुभ्रं यज्ञोपवीतं बलमस्तु तेजः।।


 छन्दोग पद्धति कए यज्ञोपवीत मंत्र

ॐ यज्ञोपवीतमसि यज्ञस्य त्वोपवीतेनोपनह्यामि।

 यज्ञोपवीत धारणक शास्त्रीय विधि

जनेऊ बदलबाक समय वा धारण करबाक काल सर्वप्रथम अहि मंत्र सँ संकल्प कs विनियोग कएल जाइत अछि:

 विनियोगः

प्रजापतिऋषिर्गायत्रीछन्दो विश्वदेवा देवता यज्ञोपवीत परिधाने विनियोगः।

मंत्र: ॐ यज्ञोपवीतमसि यज्ञस्यत्वापवीते नोपनह्यामि।।

अभिमंत्रित करबाक विशेष विधि:

ऊपरोक्त मंत्र सँ अभिमंत्रित कएलाक पश्चात, हाथ में जल लs कs यज्ञोपवीत कए दुनू हाथक मध्य (बीच में) राखि, गायत्री आ सावित्री मंत्र सँ मंत्रित कए लेबाक चाही।

गायत्री मंत्र:

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ॐ

सावित्री मंत्र:

ॐ भूः ॐ भुवः ॐ स्वः ॐ महः, ॐ जनः ॐ तपः ॐ सत्यम्। ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ॐ आपो ज्योतिरसोऽमृतं ब्रह्म भूर्भुवः स्वरोम्।

नियम: एही दुनू मंत्र कए तीन-तीन बेर पढ़ि कs शुद्ध मन सँ जनेऊ धारण करी।

. प्राचीन यज्ञोपवीत विसर्जन मंत्र

जखन जनेऊ पुरान (जीर्ण) भऽ जाए, टूटि जाए वा सूतक-पातक कए बाद ओकरा बदलबाक हो, तखन पुरना जनेऊ कए उतारबाक काल एही मंत्रक जप कएल जाइत अछि:

यज्ञोपवीतं यदि जीर्णवन्तं विद्यादिवेद्यं परब्रह्मतत्त्वम्।

आयुष्यमग्र्यं प्रतिमुञ्च शुभ्रं यज्ञोपवीतं विसृजन्तु तेजः।।

चारू युग में यज्ञोपवीत कए स्वरूप

शास्त्रक अनुसार, समय (युग) कए संग यज्ञोपवीत कए धातु आ स्वरूप में परिवर्तन भेल अछि, जकर वर्णन एही श्लोक में अछि:

कृते पद्ममयं सूत्रं त्रेतायां कनकोद्भवम्।

द्वापरे रजतं प्रोक्तं कलौ कार्प्पाससम्भवम्।।

सतयुग (कृतयुग): कमल के डंटी कए सूत सँ बनल यज्ञोपवीत।

त्रेतायुग: सोनाक (कनकोद्भवम्) यज्ञोपवीत।

द्वापरयुग: चांदीक (रजतं) यज्ञोपवीत।

कलियुग: कपासीक सूत (कार्प्पाससम्भवम्) सँ बनल यज्ञोपवीत।

निष्कर्ष

यज्ञोपवीत धारण कएनाइ केवल धार्मिक कर्मकांड नहि, बल्कि ई स्वास्थ्य, सदाचार आ अनुशासित जीवनक आधार थिक। मिथिलांचल आ सनातन संस्कृतिक ई अनमोल धरोहर हमरा सब कए संस्कारवान बनबैत अछि। आशा अछि जे ई मंत्र आ विधि अहाँक दैनिक पूजा-पाठ आ संस्कारक संवर्द्धन में सहायक सिद्ध हैत।

जय मिथिला, 

अहि आलेख में शास्त्रीय आ पारंपरिक मान्यता आदि कए संकलन कएल गेल अछि। जँ अहाँ लोकनि कए कतहु कोनो त्रुटि बुझाय वा अहि विषय पर कोनो तर्कसंगत सुझाव हो, तँ कमेंट बॉक्स में अपन विचार अवश्य साझा करी ताकि एकरा आओर समृद्ध कएल जा सके।"

मंगलवार, 28 अप्रैल 2026

बिहारी एकता ज़िंदाबाद, JusticeForPandavKumar

 


Justice for Pandav Kumar 🙏

#JusticeForPandavKumar

देश के किसी भी कोने में हादसा हो, सबसे पहले जान गंवाने वाला अक्सर मेहनतकश बिहार का बेटा होता है। लेकिन दिल्ली में हुई हालिया घटना कोई साधारण अपराध नहीं—यह एक जघन्य हेट क्राइम है।

पांडव कुमार की हत्या सिर्फ इसलिए कर दी गई क्योंकि वे अपनी मातृभाषा में बात कर रहे थे।

यह सिर्फ एक व्यक्ति की हत्या नहीं,

👉 हमारी पहचान पर हमला है

👉 हमारी भाषा पर हमला है

👉 हमारे सम्मान और अधिकारों पर हमला है

अब समय आ गया है कि बिहार का हर व्यक्ति एकजुट हो!

✊ अपनी आवाज उठाइए

✊ न्याय की मांग कीजिए

✊ ऐसी घटनाओं के खिलाफ खुलकर खड़े होइए

अगर आज हम चुप रहे, तो कल किसी और पांडव कुमार की बारी होगी।

बिहारियों, जागो! अपनी पहचान और सम्मान की रक्षा के लिए एकजुट हो जाओ।

🙏 न्याय के लिए आवाज बनो, डर के लिए नहीं।

#JusticeForPandavKumar

#StopHateCrime

#BihariEkta

#DelhiPolice

#DelhiGovernment

शनिवार, 7 मार्च 2026

मिथिलावासी जागू, नहिं त देर भ' जायत। सम्पूर्ण मिथिला राज्य लेल संघर्ष के बिगुल बजाऊ।

 बिहार संग साजिश 


मिथिला के फेर दू फाङ करबाक केन्द्रक कुचक्र 

बिहार सँ मिथिला आ' मैथिली विरोधी नीतीश कुमार राज्य सभा जा रहल छथि। मुदा जावत बीजेपी आ' जदयू के तलाक नहिं हएत तावत मिथिला राज्य बननाय सपना रहत।

एम्हर केन्द्र सरकार बिहार आ' बंगाल के राज्यपाल एहेन शख्स के बना रहल अछि जकरा राजनीति सँ कम मतलब।  एडमिनिस्ट्रेशन आ' खुफिया विभागक गठजोङ मिथिला सँ अलग " सीमांचल " राज्य बनबय चाहैत अछि, जे केन्द्र शासित राज्य रहत।एहि राज्य मे बिहार आ' बंगाल सँ किछु किछु हिस्सा काटि कय बनायल जाइत। मतलब बिहार के 3 टुकड़ी मे बाँटल जाइत, सीमांचल, मिथिला आ' मगध।

सीमांचल सबसँ पहिने बनत । सीमांचल आ' मिथिला क्षेत्र के घोर विरोध आ' संघर्ष के कारण टूटल-फूटल मिथिला राज्य बनत। बचल हिस्सा मगध बनि के रहि जायत।

         बीजेपी आ' आर एस एस चिकेन नेक कोरिडोर के डर देखा ई कुकृत्य करय जा रहल अछि।

हमरा सम्पूर्ण मिथिला चाही, विभाजित नहिं।

       ई भनक त हमरा 2022-23 मे लागि गेल रहय जखन गृहमंत्री अमित शाह  एहि इलाका आबि सभा मे सीमांचल शब्द के महिमामंडन केने रहथि। यएह कारण छल जे अखिल भारतीय मिथिला राज्य  संघर्ष समिति के संकल्प मिथिला राज्य पदयात्रा-2023 जे दरभंगा सँ शुरू होय वाला छल ओकरा हम ( एहि पदयात्राक संयोजक ) आ' प्रो० अमरेन्द्र झा सहमति बना किशनगंज के छोट सनक गाम " करूआमणि " सँ शुरू केने रही।दरभंगा सँ शुरू होयवाला पदयात्रा नेपाल, भारत आ' बंगलादेश सँ सटल गाम करूआमणि सँ शुरू भेल। हमरा आ' हमरा पदयात्री दल के उत्साहवर्धन लेल डा० बैद्यनाथ चौधरी  बैजू, मित्र प्रो० उदय शंकर मिश्र, पं० विनोद झा दरभंगा सँ हमरा सब संग करूआमणि( जिला-किशनगंज ) आयल रहथि।एतय रात्रि विश्राम कय एहि गाम के सैकङों स्त्री-पुरुष आ' युवा संग पदयात्राक साक्षी रहथि। एहि पदयात्राक दौरान एकोटा मैथिल एहेन नहिं भेटला जे मिथिला राज्य विरोधी होइथ, अपितु हुनका ह्रदय मे दरभंगा-मधुबनी के मैथिल  सँ बेसी मिथिला आ' मैथिली बसल अछि।

      मिथिलावासी जागू, नहिं त देर भ' जायत। सम्पूर्ण मिथिला राज्य लेल संघर्ष के बिगुल बजाऊ।

"एकहिं संकल्प अछि ध्यान मे,

मिथिला राज्य हो संविधान  मे।".                                                                                                                     @Shishir Kumar Jha 

शुक्रवार, 27 फ़रवरी 2026

यज्ञोपवीत संस्कार के प्रमुख बिंदु:

 


 यज्ञोपवीत (जनेऊ) धारण करने का मुख्य मंत्र "ॐ यज्ञोपवीतं परमं पवित्रं..." है। यह मंत्र शरीर को पवित्रता, बल और तेज प्रदान करने के लिए जनेऊ धारण करते समय पढ़ा जाता है। यह एक पवित्र सूत्र है, जो ब्रह्मा, विष्णु और महेश के प्रतीक के रूप में धारण किया जाता है। 

यज्ञोपवीत मंत्र:

ॐ यज्ञोपवीतं परमं पवित्रं प्रजापतेर्यत्सहजं पुरस्तात्।

आयुष्यमग्र्यं प्रतिमुञ्च शुभ्रं यज्ञोपवीतं बलमस्तु तेजः॥

हिंदी अर्थ:

यज्ञोपवीत अत्यंत पवित्र है, जिसे प्रजापति (ईश्वर) ने स्वाभाविक रूप से सबसे पहले स्थापित किया था। यह आयु को बढ़ाने वाला, अग्रगण्य (श्रेष्ठ), शुभ्र (स्वच्छ) और पवित्र करने वाला है। हे यज्ञोपवीत, मुझमें बल (शक्ति) और तेज (ऊर्जा) प्रदान करो। 

धारण करने की प्रक्रिया (संक्षेप में):

बाय कंधे के ऊपर से और दाएँ हाथ के नीचे से जनेऊ धारण किया जाता है।

इस प्रक्रिया के दौरान ऊपर दिए गए मंत्र का उच्चारण किया जाता है। 

पुरानी जनेऊ उतारने का मंत्र:

ॐ यज्ञोपवीतं पुराणं जरजरं कश्यपोद्भवम्।

त्यजामि ब्रह्मनिर्मितं नित्यं सात्त्वगुणात्मकम्॥

अर्थ: मैं इस पुराने और जर्जर यज्ञोपवीत को त्याग करता हूँ। 

यज्ञोपवीत (जनेऊ) संस्कार, जिसे उपनयन संस्कार भी कहते हैं, हिंदू धर्म के 16 संस्कारों में से एक अत्यंत महत्वपूर्ण संस्कार है, जो बालक को ज्ञान, अनुशासन और द्विज (दूसरा जन्म) के रूप में प्रतिष्ठित करता है। यह अनुष्ठान ब्राह्मण (8 वर्ष), क्षत्रिय (11 वर्ष) और वैश्य (12 वर्ष) के लिए होता है, जिसमें गुरु गायत्री मंत्र की दीक्षा देते हैं। 

यज्ञोपवीत संस्कार के प्रमुख बिंदु:

अर्थ और महत्व: 'उपनयन' का अर्थ है 'गुरु या ज्ञान के समीप ले जाना'। यह पवित्र धागा धारण करने के बाद ही बालक को वेदों और विद्या के अध्ययन का अधिकार मिलता था, जिससे उसे 'द्विज' यानी दूसरा जन्म मिला माना जाता है।

तीन सूत्र: जनेऊ में तीन धागे होते हैं, जो ऋषि ऋण, देव ऋण और पितृ ऋण के प्रतीक हैं, जिन्हें धारण करके मनुष्य अपने कर्तव्यों का स्मरण रखता है।

विधि: यह संस्कार एक विद्वान पंडित द्वारा किया जाता है। इसमें मुंडन, गणेश पूजन, हवन, और गायत्री मंत्र का उपदेश मुख्य हैं। जनेऊ को बाएं कंधे के ऊपर और दाईं बांह के नीचे धारण किया जाता है।

उद्देश्य: इस संस्कार के बाद बालक को ब्रह्मचर्य का पालन करना होता था और यह नैतिक जीवन, विद्या अध्ययन व आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक है।

परंपरा: यह प्राचीन काल से चली आ रही एक महत्त्वपूर्ण परंपरा है, जो अब सामान्यतः विवाह के पूर्व या कम उम्र में की जाती है। 

यह संस्कार व्यक्ति को अनुशासन, जिम्मेदारी और सात्विक जीवन जीने के लिए प्रेरित करता है, जो सनातन संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है।

गुरुवार, 26 फ़रवरी 2026

शादियों में एक नई रस्म का जन्म हुआ है हल्दी रस्म।

     


 विवाह में हल्दी रस्म या फिजूल खर्ची अमीरों के चक्कर में बेचारा गरीब पीs रहा है  आज कल ग्रामीण परिवेश में होने वाली शादियों में एक नई रस्म का जन्म हुआ है हल्दी रस्म। हल्दी रस्म के दौरान हजारों रूपये खर्च कर के विशेष डेकोरेशन किया जाता है, उस दिन दूल्हा या दुल्हन विशेष पीत (पीले) वस्त्र धारण करते हैं कुछ पूर्व इस हल्दी रस्म का प्रचलन  के ग्रामीण क्षेत्रों में कहीं पर भी देखने को नहीं मिलता था, लेकिन पिछले दो-तीन साल से इसका प्रचलन बहुत तेजी से ग्रामीण क्षेत्र में बढ़ा है। पहले हल्दी की रस्म के पीछे कोई दिखावा नहीं होता था, बल्कि तार्किकता होती थी। पहले ग्रामीण क्षेत्रों में आज की तरह साबुन व शैम्पू नहीं थे और ना ही ब्यूटी पार्लर था।  इसलिए हल्दी के उबटन से घिसघिस कर दूल्हे-दुल्हन के चेहरे व शरीर से मृt चमड़ी और मेल को हटाने, चेहरे को मुलायम और चमकदार बनाने के लिए हल्दी, चंदन, आटा, दूध से तैयार उबटन का प्रयोग करते थे। ताकि दूल्हा-दुल्हन सुंदर लगे। इस काम की जिम्मेदारी घर-परिवार की महिलाओं की थी। लेकिन आजकल की हल्दी रस्म मोडिफाइड, दिखावटी और मंहगी हो गई है। जिसमें हजारों रूपये खर्च कर डेकोरेशन किया जाता है। महंगे पीले वस्त्र पहने जाते है। दूल्हा दुल्हन के घर जाता है और पूरे वातावरण, कार्यक्रम को पीताम्बरी बनाने के भरसक प्रयास किये जाते हैं। यह पीला ड्रामा घर के मुखिया के माथे पर तनाव की लकीरें खींचता है जिससे चिंतामय पसीना टपकता है।

    पुराने समय में जहां कच्ची छतों के नीचे पक्के इरादों के साथ दूल्हा-दुल्हन बिना किसी दिखावे के फेरे लेकर अपना जीवन आनंद के साथ शुरू करते थे, लेकिन आज पक्के इरादे कम और दिखावा और बनावटीपन ज्यादा होने लगा है। 

       आजकल देखने में आ रहा है कि ग्रामीण क्षेत्र में आर्थिक रूप से असक्षम परिवार के लड़के भी इस शहरी बनावटीपन में शामिल होकर परिवार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ा रहे है। क्योंकि उन्हें अपने छुट भईए नेताओं, वन साइड हेयर कटिंग वाले या लम्बे बालों वाले सिगरेट का धुंआ उड़ाते दोस्तों को अपना ठरका दिखाना होता है। इंस्टाग्राम, फेसबुक आदि के लिए रील बनानी है। बेटे के रील बनाने के चक्कर में बाप की कर्ज़ उतरने में ही रेल बन जाती है।

        ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे घरों में फिजूल खर्ची में पैसा पानी की तरह बहाया जाता है जिनके मां-बाप ने हाड़-तोड़ मेहनत और पसीने की कमाई से पाई-पाई जोड़ कर मकान का ढांचा खड़ा किया लेकिन ये नवयौवन लड़के-लड़कियां बिना समझे अपने मां-बाप की हैसियत से विपरीत जाकर अनावश्यक खर्चा करते हैं। 

        जिन परिवारों की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं हो उन परिवारों के बच्चों को मां-बाप से जिद्द करके इस तरह की फिजूल खर्ची नहीं करवानी चाहिए। आजकल काफी जगह यह भी देखने को मिलता है कि बच्चे (जिनकी शादी है) मां-बाप से कहते है आप कुछ नहीं जानते, आपको समझ नहीं है, आपकी सोच वही पुरानी अनपढ़ों वाली रहेगी, यह कहते हुए अपने माता-पिता को गंवारू, पिछड़ा, थे तो बौझ्अ बरगा हो कहते हैं। मैं जब भी यह सुनता हूं सोचने को विवश हो जाता हूं, पांव अस्थिर हो जाते हैं। बड़ी चिंता होती हैं कि आज युवा किस दिशा में जा रहे हैं।

      आज किसी को चींटी के पैरों के घूंघरू की आवाज सुनने की फुर्सत नहीं है क्योंकि सब-के-सब फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर पर खुद को बढ़ा-चढ़ाकर कर परोसते हैं, दिखावटीपन की चासनी में आकंठ डूबे हैं 

इस तरह की फिजूलखर्ची वाली रस्म को रोकने का प्रयास करें....!!!

मंगलवार, 27 जनवरी 2026

सामान्य वर्ग (General Category) कौन हैं ?

 *कौन है सामान्यवर्ग?* 

आओ बताता - हूँ ... .     


      प्रधानमंत्री जी या मुख्यमंत्री  जी ध्यान से सुनिएगा...

सामान्य वर्ग (General Category) कौन हैं ?

*सामान्य वर्ग ( भूमिहार, लाला(कायस्थ) जैन , ब्राह्मण , राजपूत , बनिया )*

जिस व्यक्ति पर एट्रोसिटी_एक्ट 89 के तहत बिना इन्क्वारी के भी कार्यवाई की जा सकती है, वो सामान्य वर्ग है‼️

जिसको जाति सूचक शब्द इस्तेमाल करके बेखौफ गाली दी जा सकती है, वो सामान्य वर्ग है‼️

देश में आरक्षित 131 लोकसभा सीटो और 1225 विधानसभा सीटो पर चुनाव नही लड़ सकता है, लेकिन वोट दे सकता है, वो सामान्य वर्ग है‼️

जिसके हित के लिए आज तक कोई आयोग नही बना, वो सामान्य वर्ग है‼️

जिसके लिए कोई सरकारी योजना न बनी हो,

वो  सामान्य वर्ग है‼️

जिसके साथ देश का संविधान भेदभाव करता है, वो सामान्य वर्ग है‼️

मात्र जिसको सजा देने के लिए NCSC और NCST का गठन किया गया वो सामान्य वर्ग है‼️

मात्र जिसे सजा देने के लिए हर जिले में विशेष SC-ST न्यायालय खोले गए हैं, वो अभागा सामान्य वर्ग है‼️

जो स्कूल में अन्य वर्गों के मुकाबले चार गुनी फीस दे कर अपने बच्चों को पढाता है, वो बेसहारा सामान्य वर्ग है‼️

नौकरी, प्रमोशन, घर allotment आदि में जिसके साथ कानूनन भेदभाव वैध है वो बेचारा सामान्य वर्ग है‼️

सरकारों व सविधान द्वारा सबसे ज्यादा प्रताड़ित किया जाने वाला वो सामान्य वर्ग है‼️

सबसे ज्यादा वोट देकर भी खुद को लुटापिटा ठगा सा महसूस करने वाला वो सामान्य वर्ग है‼️

सभाओं में फर्श तक बिछा कर एक अच्छी सरकार की चाह में आपको सत्ता सौंपने वाला वो सामान्य वर्ग है ‼️

देश हित मे आपका तन मन धन से साथ देने वाला वो सामान्य वर्ग है‼️

इतने भेदभाव के बावजूद भी,

धर्म की जय हो,अधर्म का नाश हो प्राणियों में सद्भावना हो,विश्व का कल्याण हो की भावना जो रखता है,वो सामान्य वर्ग है‼️

सबका साथ सबका विकास में हमारी स्थिती क्या है ? विचार अवश्य करें‼️

समस्त सामान्य वर्ग परिवारों की तरफ से भारत सरकार को समर्पित ...

अगर आपको उपरोक्त बातें सही लगी हो तो कम से कम 5 सामान्य वर्ग के लोगों को शेयर करें । 

ये बात माननीय प्रधानमंत्री जी ,राष्ट्रपति जी व मुख्यमंत्री जी तक अवश्य पहुँचनी चाहिए....

इस पोस्ट को लिखने व बनाने मे बहुत ही ज्यादा मेहनत (परिश्रम) लगा है, शेयर अवश्य करें। 🚩🙏🙏🙏

Jay Siya Ram 

शनिवार, 24 जनवरी 2026

जतिन दा


शरीर से मांस का एक-एक कतरा गल चुका था। पसलियां बाहर आ गई थीं। हिलने-डुलने तक की ताकत नहीं बची थी।

जब अंग्रेजों ने देखा कि यह 25 साल का लड़का टूट नहीं रहा, तो उन्होंने जबरदस्ती नाक में नली ठूंसकर दूध पिलाने की कोशिश की। वह नली खाने की नली की जगह फेफड़ों में चली गई।

दूध फेफड़ों में भर गया। वो तड़पते रहे, खून की उल्टियां करते रहे, लेकिन अनशन नहीं तोड़ा।

13 सितंबर 1929 को लाहौर जेल में एक क्रांतिकारी ने अपने प्राण त्याग दिए। 63 दिन... जी हाँ, 63 दिन तक बिना अन्न का एक दाना खाए।

इतिहास के पन्नों में अक्सर हम भगत सिंह की फांसी की बात करते हैं, लेकिन उस साथी को भूल जाते हैं जिसने भगत सिंह की बाहों में दम तोड़ा था।

आज हम बात कर रहे हैं *'यतींद्र नाथ दास' की, जिन्हें दुनिय जतिन दा*' के नाम से जानती थी।

पेशे से वो बम बनाने में माहिर थे, लेकिन उनका हथियार बना उनका अपना शरीर।

वो चाहते तो माफी मांग सकते थे, खाना खा सकते थे। लेकिन मांग सिर्फ एक थी - "भारतीय राजनीतिक कैदियों के साथ जानवरों जैसा सलूक बंद करो।"

अंग्रेजों को लगा कि भूख इसे तोड़ देगी। लेकिन उन्हें नहीं पता था कि यह शरीर मिट्टी का नहीं, फौलाद का बना है।

जब *जतिन दा* की हालत बिगड़ने लगी, तो अंग्रेजों ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं। जेल के डॉक्टर और सिपाहियों ने उन्हें दबोच लिया। नाक से नली डाली। दर्द से वो चीखते रहे, लेकिन उनका संकल्प नहीं डिगा।

उनकी शहादत की खबर जब बाहर आई, तो पूरा देश रो पड़ा था। कहा जाता है कि जब उनका शव लाहौर से कलकत्ता ले जाया जा रहा था, तो हर स्टेशन पर हजारों लोग फूल लेकर खड़े थे। कलकत्ता में उनकी अंतिम यात्रा में 6 लाख से ज्यादा लोग शामिल हुए।

सुभाष चंद्र बोस ने खुद उनके पार्थिव शरीर को कंधा दिया था।

लेकिन आज? आज कितने लोग उस 63 दिन की तपस्या को याद करते हैं?

मरते वक्त जतिन दा ने कहा था, "मैं कोई साधु नहीं हूँ, मैं बस एक साधारण इंसान हूँ जो अपने देश की गरिमा के लिए मरना चाहता है।"

आजादी चरखे से आई या बिना खड्ग-ढाल के, यह बहस का विषय हो सकता है। लेकिन यह सच है कि आजादी की नींव में जतिन दा जैसे नौजवानों की गल चुकी हड्डियां गड़ी हैं।

हमें यह आजादी खैरात में नहीं मिली, इसके लिए किसी ने अपनी जवानी के 63 दिन भूखे रहकर कुर्बान किए हैं।

हर भारतीय का कर्तव्य है कि वो जाने कि जिस हवा में वो सांस ले रहा है, उसकी कीमत क्या थी।

इस जानकारी को साझा करें ताकि आने वाली पीढ़ियां जान सकें कि असली 'हीरो' कौन थे।

यह पोस्ट केवल उन भूले-बिसरे नायकों को नमन करने के लिए है, Vande Mataram, Bharat Mata ki Jai 

गुरुवार, 22 जनवरी 2026

बुरा मत मानना ।

    अरिजीत सिंह को सलमान खान ने अपनी फ़िल्म सुल्तान के गाने "जग घुमेया" से निकाल दिया था। सोनू निगम जैसे दिग्गज को काफ़ी समय तक काम नहीं मिला। विवेक ओबेरॉय इंडस्ट्री से गायब कर दिए गए। मगर इन्होंने कभी नहीं कहा होगा कि -" मैं हिन्दू हूँ, इसलिए मुझे काम नहीं मिल रहा। "

और एक ये जज़्बाती क़ौम है । ......

मुसलमानों, बुरा मत मानना । एहसान-फ़रामोशी को आपमें से ज़्यादातर ने अपनी पहचान बना लिया है।

उधर उस्मान ख़्वाजा ऑस्ट्रेलिया से माल निचोड़ कर कह रहा है कि ऑस्ट्रेलिया में मेरे साथ भेदभाव हुआ।

अजहरुद्दीन मैच फ़िक्सिंग की सज़ा होने पर कहता है कि मैं मुस्लिम हूँ, इसलिए मुझे फँसाया गया है। एक हामिद अंसारी भी है। ताऊ को उपराष्ट्रपति बना दिया गया था। जीवन भर नाम-शोहरत कमाई, अंत में कह दिया—भारत हमारे लिए unsafe मुल्क है।

इसी कड़ी में अब A. R. रहमान भी जुड़ गए हैं। कहते हैं कि मैं मुसलमान हूँ, इसलिए मुझे इस मुल्क में काम नहीं मिल रहा है। 

ग्रो अप यार। तुम्हारे गाने सुन-सुन कर हम बड़े हुए हैं। एक दौर सबका आता है। कल तुम्हारा था, आज किसी और का है। कल किसी और का होगा। सलमान, शाहरुख, आमिर भी तो मुसलमान हैं.... ! बिना धर्म देखे इनको स्टार बनाया है इस देश के लोगों ने। 

अपनी वर्थ प्रूव करो, मेहनत संघर्ष करो। जहाँ से खा रहे हो उस जगह को विक्टिम कार्ड खेल कर बदनाम मत करो।

ऐसी लोगों को शायरी की भाषा में एहसास फरामोश कहते हैं। और देसी भाषा में कहते हैं - गद्दार।

बुधवार, 26 नवंबर 2025

संविधान दिवस

     प्रिय       देशवासियों, 

   
 नमस्ते! 
   
 26 नवंबर हर भारतीय के लिए बहुत गौरवशाली दिन है। इसी दिन 1949 में संविधान सभा ने भारत के संविधान को अंगीकार किया था। इसलिए एक दशक पहले, साल 2015 में NDA सरकार ने 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया था। 
   
 हमारा संविधान एक ऐसा पवित्र दस्तावेज है, जो निरंतर देश के विकास का सच्चा मार्गदर्शक बना हुआ है। ये भारत के संविधान की ही शक्ति है जिसने मुझ जैसे गरीब परिवार से निकले साधारण व्यक्ति को प्रधानमंत्री के पद पर पहुंचाया है। संविधान की वजह से मुझे 24 वर्षों से निरंतर सरकार के मुखिया के तौर पर काम करने का अवसर मिला है। मुझे याद है, साल 2014 में जब मैं पहली बार संसद भवन में प्रवेश कर रहा था, तो सीढ़ियों पर सिर झुकाकर मैंने लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर को नमन किया। साल 2019 में जब चुनाव परिणाम के बाद मैं संसद के सेंट्रल हॉल में गया था, तो सहज ही मैंने संविधान को सिर माथे लगा लिया था। 
   
 संविधान दिवस पर हम डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद समेत उन सभी महान विभूतियों का स्मरण करते हैं, जिन्होंने भारत के संविधान के निर्माण में अपना अहम योगदान दिया है। डॉक्टर बाबासाहेब अम्बेडकर की भूमिका को भी हम सभी याद करते हैं, जिन्होंने असाधारण दूरदृष्टि के साथ इस प्रक्रिया का निरंतर मार्गदर्शन किया। संविधान सभा में कई प्रतिष्ठित महिला सदस्य भी थीं, जिन्होंने अपने प्रखर विचारों और दृष्टिकोण से हमारे संविधान को समृद्ध बनाया। 
   
 साल 2010 में जब संविधान के 60 वर्ष हुए थे, तब मैं गुजरात का मुख्यमंत्री था। हमने संविधान के प्रति कृतज्ञता और निष्ठा प्रकट करने के लिए एक प्रयास किया। 2010 के उस साल में गुजरात में ‘संविधान गौरव यात्रा’ निकाली गई थी। इस पवित्र ग्रंथ की प्रतिकृति को एक हाथी के ऊपर रखकर मैंने उस भव्य यात्रा की अगुवाई की थी। 
   
 जब संविधान के 75 वर्ष पूरे हुए, तो ये हमारी सरकार के लिए ऐतिहासिक अवसर बनकर आया। हमें देशभर में विशेष अभियान चलाने का सौभाग्य मिला। संविधान के 75 वर्ष होने पर हमारी सरकार ने संसद का विशेष सत्र आयोजित किया और राष्ट्रव्यापी जागरूकता अभियान भी चलाया। ये अभियान जन-भागीदारी का बड़ा उत्सव बन गया। 
   
 इस वर्ष का संविधान दिवस कई कारणों से विशेष है:
यह वर्ष सरदार पटेल जी और भगवान बिरसा मुंडा जी की 150वीं जयंती का है। सरदार पटेल जी के नेतृत्व और सूझबूझ ने देश का राजनीतिक एकीकरण सुनिश्चित किया। ये सरदार पटेल जी की ही प्रेरणा है जिसने हमारी सरकार को जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 की दीवार गिराने के लिए प्रेरित किया। आर्टिकल 370 हटने के बाद वहां भारत का संविधान पूरी तरह लागू हो गया है और लोगों को संविधान प्रदत्त सभी अधिकार मिले हैं।
 
   
 भगवान बिरसा मुंडा जी का जीवन आज भी हमें जनजातीय समुदाय के लिए न्याय, गरिमा और सशक्तिकरण सुनिश्चित करने की प्रेरणा देता है। इस साल हम वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने का उत्सव भी मना रहे हैं। वंदे मातरम् हर दौर में प्रासंगिक रहा है। इसके शब्दों में हम भारतीयों के सामूहिक संकल्प की गूंज निरंतर सुनाई देती रही है। इस वर्ष हम श्री गुरु तेग बहादुर जी की शहादत के 350वें वर्ष को भी मना रहे हैं। उनका जीवन और शहादत की गाथा आज भी हमें प्रेरित करती है। 
   
 इन सभी का जीवन हमें उस कर्तव्य को सर्वोपरि रखने की प्रेरणा देता है, जिसे हमारे संविधान ने भी सबसे अहम बताया है। हमारे संविधान का आर्टिकल 51A मौलिक कर्तव्यों को समर्पित है। ये कर्तव्य हमें सामाजिक और आर्थिक प्रगति प्राप्त करने का रास्ता दिखाते हैं। महात्मा गांधी ने हमेशा नागरिकों के कर्तव्यों पर बल दिया था। वे मानते थे कि जब हम ईमानदारी से कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं, तो हमें अधिकार भी स्वत: मिल जाते हैं। 
   
 देखते ही देखते इस सदी के 25 वर्ष पूरे हो चुके हैं। अब आने वाला समय हमारे लिए और भी महत्वपूर्ण है। साल 2047 तक आजादी के 100 वर्ष हो जाएंगे। साल 2049 में संविधान निर्माण के 100 वर्ष पूरे हो जाएंगे। हम आज जो नीतियां बनाएंगे, जो निर्णय लेंगे, उसका प्रभाव आने वाले वर्षों पर...आने वाली पीढ़ियों पर पड़ेगा। हमारे सामने विकसित भारत का लक्ष्य है इसलिए हमें राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों को सर्वोपरि रखते हुए ही आगे बढ़ना है। 
   
 हमें राष्ट्र के प्रति, समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वाह करना होगा। देश ने हमें कितना कुछ दिया है। इसके लिए हम सबके मन में कृतज्ञता का भाव होना चाहिए। जब हम इस भावना से जीवन जीते हैं, तो कर्तव्य अपने आप जीवन का स्वभाव बन जाता है। अपना कर्तव्य पूरा करने के लिए हमें अपने हर काम को पूरी क्षमता और पूरी निष्ठा से करने का प्रयास करना होगा। हमारा हर कार्य संविधान की शक्ति बढ़ाने वाला हो। हमारा हर कार्य देशहित से जुड़े उद्देश्यों को पूरा करने वाला हो। हमारे संविधान निर्माताओं ने जो सपने देखे थे, उन्हें पूरा करने का दायित्व हम सबका है। जब हम अपने काम को कर्तव्य की भावना के साथ करेंगे तो देश की सामाजिक और आर्थिक प्रगति कई गुना बढ़ जाएगी। 
   
 संविधान ने हमें मतदान का अधिकार दिया है। एक नागरिक के तौर पर हमारा कर्तव्य है कि मतदान का कोई अवसर छोड़े नहीं। हमें 26 नवंबर को स्कूलों में, कॉलेजों में उन युवाओं के लिए विशेष सम्मान समारोह आयोजित करने चाहिए, जो 18 वर्ष के हो रहे हैं। हमें उन्हें यह महसूस कराना चाहिए कि वे अब केवल छात्र या छात्रा नहीं, बल्कि नीति निर्माण की प्रक्रिया के सक्रिय सहभागी हैं। स्कूलों में हर वर्ष 26 नवंबर को फर्स्ट-टाइम वोटर्स का सम्मान करने की परंपरा विकसित होनी चाहिए। जब हम इस तरह युवाओं में जिम्मेदारी और गर्व का भाव जगाएंगे, तो वे जीवनभर लोकतंत्र के मूल्यों के प्रति समर्पित रहेंगे। यही समर्पण एक सशक्त राष्ट्र की नींव बनता है। 
   
 आइए, इस संविधान दिवस पर हम अपने महान राष्ट्र के कर्तव्यनिष्ठ नागरिक के रूप में अपने दायित्वों का पालन करने का संकल्प दोहराएं। ऐसा करके ही हम विकसित और सशक्त राष्ट्र के निर्माण में अपना अहम योगदान दे सकेंगे। 
   
   
 आपका, 
नरेन्द्र मोदी

मंगलवार, 25 नवंबर 2025

SIR से संबंधित कुछ फैक्ट् हैं जो आम जनता को शायद नहीं पता हैं:

 आजकल एक नया प्रोपेगेंडा चलाया जा रहा है कि देश भर में SIR के कारण BLO पर काम का काफी प्रेशर है और SIR के कारण BLO आत्महत्या तक कर रहे हैं.

लेकिन SIR से संबंधित कुछ फैक्ट् हैं जो आम जनता को शायद नहीं पता हैं:

1. SIR की समय सीमा 4 नवंबर 2025 से लेकर 4 दिसंबर 2025 तक यानि कि एक महीना है.

2. एक महीना में एक BLO को 1000 से 1200 वोटर्स से मिलने का टास्क दिया गया है.

अब अगर मान लें कि एक परिवार में 3 से 4 वोटर हैं तो एक BLO को एक महीने में 1000/4 = 250 परिवार से मिलने का टास्क दिया गया है.

अब 250 को अगर 30 दिन से भाग दे दें तो ये कुल 250/30 = 8 से 9 परिवार प्रतिदिन होते हैं.

अब फिर, यदि एक परिवार के साथ बिताया गया एवरेज समय आधा घण्टा (30 मिनट) भी मान लिया जाए तो ये कुल मिलाकर 4 से 5 घण्टे होते हैं.

जबकि सरकारी नियमानुसार ही किसी भी ड्यूटी का ऑफिशियल समय कम से कम 8 घंटे होते हैं.

इससे आप खुद ही समझ सकते है कि SIR में BLO पर कितना प्रेशर है.

और हाँ... इसमें हमें ये भी नहीं भूलना चाहिए कि एक बूथ के सारे मतदाता एक ही जगह या मुहल्ले में मौजूद रहते हैं न कि पूरे शहर या राज्य में फैले रहते हैं.

असल में ऐसा नैरेटिव गढ़ने वाले लोग ये बात भूल जाते हैं कि हम अब ऐसे युग में हैं जहां सूचना की व्यापक पहुंच लोगों की जेब तक है और जनता अब समझदार हो चुकी है.

अगर अपवादस्वरूप किसी BLO ने आत्महत्या की है तो उसका कारण कुछ और होगा SIR नहीं.... 

वास्तव में SIR कोई "प्रेशर" नहीं एक "टास्क" है...

SIR देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए जरूरी है, SIR से देश में अवैध रूप से रह रहे घुसपैठियों की पहचान सुनिश्चित की जा रही है. इसलिए एक जागरूक भारतीय नागरिक होने के नाते SIR में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लीजिए और SIR को सफल बनाने की जिम्मेदारी हम सबकी है.

बुधवार, 19 नवंबर 2025

आजकल भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार मतदाता सूची विशेष प्रगाढ़ निरीक्षण(SIR)

*नोएडा-61 विधानसभा के सभी सम्मानित मतदाताओं से अपील* 


पहले तो ट्विटर/फेसबुक/ इंस्टाग्राम/व्हाट्सएप के माध्यम से जुड़े हुए सभी महानुभावों को नमस्कार और प्रणाम,,,,,,, आप सभी को ज्ञात है कि आजकल भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार मतदाता सूची विशेष प्रगाढ़ निरीक्षण(SIR)  के तहत सभी बीएलओ और उनके सहयोगी( BLA-2) आपके घर में जिन लोगों के वोट बने हुए हैं उन सभी मतदाताओं के दो-दो  गणना प्रपत्र देकर जा रहे हैं तो मैं आप सभी लोगों से अपील करना चाहूंगा कि इस गणना प्रपत्र को गंभीरता से ले और सभी जो BLO  और उनके सहयोगी जो इस अभियान में लगाए गए हैं उनकी सहायता करें। कुछ लोग इस मतदाता गणना प्रपत्र को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं तो मैं उनको बता दूं कि अगर गणना प्रपत्र भरकर जमा नही करेंगे तो उनका नाम वोटर लिस्ट से हट जाएगा और उन्हें अपना वोट दुबारा बनवाने के लिए उपखंड अधिकारी( SDM ) के सामने पेश होना पड़ेगा और आपको ज्यादा समस्या आएगी बहुत सारी परेशानियां उठानी पड़ेगी। इसलिए 30 नवम्बर से पहले पहले आप अपने वोट की जानकारी लेकर इस कार्यवाही को पूर्ण करें।

इसलिए इस मतदाता गणना प्रपत्र में क्या-क्या भरा जाना है उसकी थोड़ी जानकारी मैं यहां दे देता हूं ।

1. सबसे पहले जिन व्यक्तियों के वोट बने हुए हैं उनके लिए दो-दो गणना प्रपत्र BLO द्वारा आपके घर पर पहुंच रहे है।

2. प्रत्येक मतदाता की दो-दो नवीनतम फोटो पासपोर्ट साइज की आवश्यकता होगी। प्रपत्र पर जो फोटो दी गई है उस पर फोटो नहीं चिपकाए  बल्कि उसके पास ही लिखा गया है की (नवीनतम फोटो यहां चिपकाए) तो आप फोटो वही चिपकाए। 

3. प्रपत्र के तीन भाग हैं एक ऊपर का भाग है। इसमें में जो मतदाता है उसकी जन्मतिथि ,मोबाइल नंबर ,आधार संख्या ,पिता का नाम, पिता का EPIC नम्बर (वोटर पहचान पत्र)माता का नाम ,माता का EPIC नंबर और पति या पत्नी का नाम लिखना होता है।

4. नीचे वाले जो दो कॉलम है अगर वह आपको समझ में आए तो बढ़िया है अगर नहीं आए तो कोई बात नहीं  BLO साहब वह खुद भर देंगे।

5. उसके बाद जो साक्षर है वह अपना साइन करेगा और जो साक्षर नहीं है वह अपने बाएं हाथ के अंगूठे का निशान लगाएगा।

6. अंतिम में ,मैं  आप लोगों से केवल इतना ही निवेदन करूंगा कि आप अगर कुछ भी ना कर पाओ तो जब भी BLOसाहब आए तो उन्हें आपका आधार कार्ड ,EPIC  नंबर ,फोटो यह सारी चीज उपलब्ध करवा दो तो भी बहुत सहायता हो जाती है

7. उसके अलावा यदि किसी को अपना नया वोट बनवाना है तो BLO फॉर्म -6 मांगे और उसे भर कर तुरंत जमा कर दे। साथ ही आपका कोई एड्रेस चेंज हो गया है पहले पोलिंग स्टेशन कहीं और था तो आप BLO से फार्म संख्या 8 मांगें व उसे भी भरकर गणना प्रपत्र के साथ ही जमा कर दें।

8. यदि कोई व्यक्ति नोएडा में रहता है और उसका वोट नोएडा के बाहर  देश के किसी अन्य क्षेत्र में है तो वह फॉर्म-8 भरकर, उसमें पूर्व में जो वोट है उसकी जानकारी एवं जहां नया बना है वहां की जानकारी भरकर BLO को दे नोएडा में वोट स्थानांतरित हो जाएगा।

9. *फॉर्म-6 व फॉर्म-8 भरने के लिए BLO  मना नही कर सकता। यदि BLO आपको भ्रमित करता है कि ये SIR अभियान के बाद में होगा तो इसकी शिकायत चुनाव आयोग को तुरंत करें।*

10. इसके अलावा अगर कोई भी समस्या आ रही है तो आपके आसपास राजनीतिक पार्टियों के कार्यकर्ता होंगे उनसे सहायता ले  सकते है, पूरी जानकारी नोएडा सेक्टर -19 सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय के प्रथम तल पर चुनाव आयोग के कार्यालय से भी प्राप्त कर सकते है। 

11. नोएडा-61 विधानसभा के सभी  मतदाताओं की सुविधा के लिए  हेल्पलाइन नम्बर 9217207199 जारी किया गया है

धन्यवाद

गुरुवार, 9 अक्टूबर 2025

"करवा चौथ के प्रचलन - Ashok Mishra

 विषय : "करवा चौथ के प्रचलन", मिथिलांचल में सेहो तेज़ी सँ हाबी भ रहल। 


आजुक समय में मिथिलांचल में “करवा चौथ” के परंपरा सेहो धीरे-धीरे बहुतहिं तेज़ी सँ हाबी भ’ रहल अछि। पहिने मिथिला में ई प्रथा नै छल। मिथिलाक स्त्री सभक अपन अनेक लोकपर्व रहैत छनि - जेना कि शामा-चकेवा, मधुश्रावणी, जीतिया, छठि, तिला संक्रांति, तुलसी विवाह इत्यादि जेकर मूल भावना सेहो पति-पत्नीक प्रेम, निष्ठा आ दीर्घायु स’ जुड़ल अछि। 

      एहन पवित्र भाव मिथिला संस्कृति में सदिखन रहैत आएल अछि। हम “करवा चौथ”क खूब सम्मान करैत छी, कारण हर परंपरा अपन विश्वासक प्रतीक होइत अछि। 

      संस्कृति के आदान-प्रदान कथमपि खराब नै छैक, धरि अपन जड़ि सँ कटि क कोनो आर परंपरा में पूर्णतः डूबि गेनाई व ओहि के अहम हिस्सा बना लेनाई, हमर व्यक्तिगत विचार सँ मिथिलाक "सांस्कृतिक हानि" अछि। 

      दोसरक संस्कृति, परम्परा वा व्यवहार सँ किछु अपनायब एहि दिशि इंगित करैत अछि जे, हमर जे सनातन परम्परा अछि, ओ पूर्ण नहि अछि। ओहि में किछु नव जोड़बाक आवश्यकता अछि। जबकि मिथिला अपन साँस्कृतिक विरासत आ परम्पराक सङ्गे पूर्ण अछि, कोनहुँ अन्यक जरुरैत नहि अछि। 

      चिंता एहि बातक अछि जे मिथिला समाज अपन मौलिक संस्कार, लोकगीत, लोकव्रत आ रीति-रिवाज छोड़िकेँ दोसर प्रदेशक संस्कृति सँ अत्यंत प्रभावित भ’ रहल अछि। मिथिला के लोग अपन संस्कृति के छोड़ि वा बिसरि क अन्य जगहक संस्कृति अपना रहल छथि। 

      अपन पहचान बचेनाई बहुत जरूरी अछि, नहि तँ भावी पीढ़ी मिथिलाक मूल लोकपरंपरा सँ बिल्कुल अनभिज्ञ रहि जाएत। मिथिला केवल एकटा भूभाग नहि, बल्कि एकटा जीवंत संस्कृति के प्रतीक अछि। मिथिला संस्कृति अपन मर्यादा, मातृशक्ति के सम्मान, मधुर वाणी, खान-पान, आध्यात्मिकता, प्रकृति सँ संलग्नता, लोकसंस्कृति आ जीवन दर्शन लेल प्रसिद्ध अछि। 

      अतएव, ई अति आवश्यक अछि जे अपन लोकपर्व, लोकभाषा आ परंपरा केँ स्नेहपूर्वक सहेजि क राखी, जकरा सँ अप्पन मिथिलाक गौरव सदा अमर रहत। 

      चिंतन - चलू कनी काल लेल मानलौं जे, पति के लेल आर अपन भाग सौभाग्यक लेल कोनो पावनि केनाई कोनो अधलाह नै छै। मुदा, ओहि पति परमेश्वर के माय बाप के गाईर पढ़नाई आर पति के हरदम दुत्कारैत रहनाई कथमपि ठीक नै छैक। कियौ माए बहिन पति लेल कोनहु पर्व करै छथि, त हुनका सॅं हमर विनम्र निवेदन अछि जे अपन पतिदेव केॅं कदर सेहो निष्ठा भाव सॅं करथि।       

शनिवार, 4 अक्टूबर 2025

ट्रेड डील

अमेरिका की व्यापार शर्तों (ट्रेड डील) के सामने भारत क्यों नहीं झुकता?

यह एक बहुत ही खतरनाक खेल है। अगर हम झुक गए, तो देश खत्म हो गया समझो।

अमेरिकी दृष्टिकोण के पीछे नम्रता नहीं, बल्कि एक छिपी हुई गंदी राजनीति है।

एक ऐसा शर्तों भरा क्लॉज है, जिसे भारत ने छूने से भी इनकार कर दिया है।

ट्रंप रोज दबाव बनाते हैं, लेकिन भारत मजबूती से खड़ा है।

सब पूछते हैं, भारत अमेरिका की सभी शर्तों पर हस्ताक्षर क्यों नहीं करता?

तो चलिए, इस बात को विस्तार से समझते हैं...

साल 2030 तक भारत-अमेरिका के बीच व्यापार का लक्ष्य 500 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का सपना है।

अच्छा लगता है ना? लेकिन उस सपने के पीछे एक शर्त थी... *जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) बीज/फसलें।*

अमेरिका ने कहा – *साइन करो।*

भारत ने कहा – *नहीं, कभी नहीं।*

क्योंकि यह सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्वतंत्रता का सवाल है।

GM बीज कोई साधारण बीज नहीं, यह तो एक सॉफ्टवेयर है।

पेटेंट वाला सॉफ्टवेयर... एक बार बोओ, तो हमेशा पैसे देते रहो।

फिर आपकी फसल आपकी नहीं रहती, वह *बीज के मालिक* की हो जाती है।

वह बीज का मालिक कौन है, जानते हैं? *Monsanto Ltd.*

हां, वही Monsanto कंपनी, जिसने Agent Orange बनाया था और अब उसका नया नाम है *Bayer Ltd.*

कंपनी का नाम बदला, लेकिन जहर वही है।

1960 के दशक में, अमेरिका पूरी दुनिया को गेहूं सप्लाई करता था।

लेकिन अब क्या देता है?

• GM मक्का

• GM सोया

• GM कैनोला

• GM कपास

ये सब *“राउंडअप रेडी”* फसलें हैं।

GM से खरपतवार मर जाते हैं, लेकिन फसल जिंदा रहती है! क्योंकि वह केमिकल रेसिस्टेंट होती है।

अमेरिका में आज 95% मक्का GM है। सोया का भी यही हाल है।

और यह सब कहां जाता है? सीधे लोगों के भोजन में।

1990 के बाद से अमेरिका में...

o मोटापा दोगुना हो गया,

o किशोरों में डायबिटीज तेजी से बढ़ा,

o बांझपन,

o डिप्रेशन,

o कैंसर,

o हृदय रोग, लिवर की बीमारियां।

*यह सब "संयोग" है या "अंजाम"?*

और इनका "इलाज" क्या है?

*दवाइयां:*

o स्टैटिन्स

o मेटफॉर्मिन

o एंटी-डिप्रेसेन्ट्स

o ओजेम्पिक

*यह इलाज नहीं — सब्सक्रिप्शन है!*

आप जियो, लेकिन हमेशा दवाइयों पर निर्भर रहो।

*Big Food आपको बीमार करता है।*

*Big Pharma आपको जिंदा रखता है।*

*Big Insurance आपको सब कुछ चुकवाता है।*

और आपको जानकर हैरानी होगी कि…

इन तीनों के मुख्य शेयरधारक कौन हैं?

• Vanguard

• BlackRock

• State Street

और वही लोग निवेश करते हैं...

• खाने में

• दवाइयों में

• न्यूज नैरेटिव में

इसलिए भारत ने *साफ मना कर दिया* और फिर क्या हुआ?

*ट्रंप के ट्वीट्स:*

• पाकिस्तान के साथ मधुर संबंध दिखाना

• पश्चिमी मीडिया का भारत विरोधी रुख

*विपक्ष की आवाज:*

• मोदी सरकार असफल रही

लेकिन कोई यह नहीं कहता कि... *क्यों?*

*क्योंकि यह “ट्रेड डील” नहीं, भारत को बीमार बनाने की योजना है।*

अगर भारत अमेरिका की इस "ट्रेड डील" पर साइन करता है, तो क्या खोएगा?

• हमारे किसान

• हमारे बीज

• हमारी मिट्टी का स्वाभिमान

• हमारा भविष्य

ये खलनायक कौन हैं?

*कृषि क्षेत्र में:*

• Bayer (Monsanto)

• ADM

• Cargill


*खाद्य क्षेत्र में:*

• Nestlé

• PepsiCo

• Kraft


*फार्मा क्षेत्र में:*

• Pfizer

• Johnson & Johnson

• Merck


*बीमा क्षेत्र में:*

• United Health


और इन सबके पीछे कौन है?

वही महंगे निवेशक,

वही डॉलर!

वही खतरनाक योजना।

अगली बार जब कोई पूछे:

अमेरिका की शर्तें मान लेने में क्या हर्ज है?

तो उन्हें कहो:

आप अपने घर के बच्चों को खिलाओगे, या उनकी फैक्ट्रियों को?

यह एंटी-अमेरिका नहीं है, यह है:

• मिट्टी के पक्ष में

• सत्य के पक्ष में

• भविष्य के पक्ष में

और अगर किसी को लगता है कि *भारत सिर उठा रहा है*, तो लगने दो

क्योंकि अगर हम उनकी शर्तों पर साइन कर लेंगे, तो सिर्फ एक करार नहीं खोएंगे... बल्कि अपने पैरों तले की जमीन खो देंगे।

यह लेख पढ़कर सभी को समझना चाहिए कि अमेरिका की दादागिरी के खिलाफ पूरी दुनिया में सिर्फ *एक ही आदमी* लड़ रहा है और उसे सपोर्ट करना हमारा राष्ट्रीय कर्तव्य है। 🙏

यह लेख वाकई आंखें खोल देने वाला है और जिसकी आंखें खुल गई हों, वह एक बार जरूर शेयर करे। 🙏जय माताजी की!🚩🚩

मंगलवार, 9 सितंबर 2025

गलती ढूंढ के दिखाइए


1- कुरान सिर्फ मारने का नहीं बल्कि तड़पा-तड़पाकर मारने का आदेश देती है !! 

2- स्क्वाड्रन लीडर अजय आहूजा को 12 घंटे से ज्यादा समय तक टॉर्चर करके मारा गया !

3- कैप्टन सौरभ कालिया के साथ हुई नृशंसता को लिखने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं !

4- पृथ्वीराज चौहान को अंधा करके मारा गया !

5- पृथ्वीराज चौहान की पत्नी संयोगिता को नग्न कर बलात्कार करने के लिये वहशी दरिंदों के बीच  फेंक दिया गया और मरने तक दरिंदे उसका रेप करते रहे

6- गुरु अर्जुनदेवजी को गर्म तवे पर बैठाने के बाद उन पर खौलती हुई रेत डालकर मारा गया !

7- गुरु तेगबहादुर जी की नृशंस हत्या कैसे की गई बताने की जरूरत नहीं !

8- भाई मतिदास जी को लकड़ी के दो पाटों में बांधकर ऊपर से नीचे आरी से चीरा गया !

9- भाई सतीदास को बड़े कड़ाह में खौलते तेल में डुबाकर मारा ,

10- भाई दयाला जी को रुई में लपेटकर जिन्दा जलाया !

11- गुरु गोविंद जी के दो मासूम साहिबजादों को जिंदा ही दीवार में चुनवा दिया गया !

12- बाबा बंदा बहादुर को उनकी खाल नोंचते हुए पंजाब से दिल्ली लाने के बाद मारा गया, उनके मुँह में उनके ही बच्चे का दिल ठूँस दिया गया !

13- छत्रपती संभाजी महाराज को, 65 दिन हाल-हाल करके उनकी चमडी छिलकर, उनका वध किया गया !

14- जिस सोच ने सैंकड़ों साल तक ऐसी नृशंसताएँ कीं, उसी सोच ने 1990 में कश्मीर के सैंकड़ों हिन्दुओं के सिर में रॉड ठोककर मारा !

15- अभी अभी हाल ही में, फरवरी 2020 में, #अंकित_शर्मा को 2 घंटे से ज्यादा समय तक चाकू के 400 वार करके मारा गया !

लेकिन... फिर भी अगर आपको ऐसा लगता है कि मेरे जैसे लोग नफरत फैला रहे हैं और मोदी जी के आने के बाद हिन्दू-मुस्लिम भाईचारा खत्म हो गया है तो...

आपको भगवान भी नहीं बचा सकते ! 

हम व्यक्तिगत  तौर पर किसी भी पार्टी के खिलाफ नही है लेकिन यदि कुछ bjp में अच्छा लगता है है वो तो वो सिर्फ उसकी धर्म को बचाने के लिए नीतियों जो आज तक कोई भी सरकार नही कर सकी 

ये मैसेज है जिन्हें आप सही दृष्टिकोण से समझोगे तो जानोगे महंगाई और तेल के दाम से इतना फ़र्क़ नही पड़ता जो जब पड़ेगा जब हम ऐसे राजा को शासन करने का मौका गवां देंगे जिसने धर्म की रक्षा के लिए  महत्वपूर्ण कदम उठाये है

  *1 - मोदी राम मंदिर बनवाता है...*

_तो मोदी IIT, IIM or AIIMS भी बनवाता है !_

2 -मोदी लाकडाउन लगाता है...*

_तो मोदी फ्री राशन ओर 20 लाख करोड़ का राहत पैकेज भी देता है !_

*3 - मोदी ताली, थाली बजवाता है...*

_तो मोदी वैक्सीन भी बनवाता है !

*4 - मोदी दिये मोमबत्ती जलवाता है...*

_तो मोदी 18000 गांव में बिजली पहुंचाता है !_

*5 - मोदी स्टैचू आफ युनिटी बनवाता है...*

_तो मोदी वार मैमोरियल भी बनवाता है !_

*6 - मोदी भाजपा कार्यालय बनवाता है...*

_तो मोदी नया संसद भवन भी बनवाता है !_

*7 - मोदी रोहिंग्याओ को भगाता है...*

_तो मोदी कश्मीरी पण्डितो को बसाता है !_

*8 - मोदी 10 लाख का सूट बूट पहनता है...*

_तो उनकी निलामी करके सारा पैसा चैरीटी भी करता है !_

*9 - मोदी राफेल खरिदता है...*

_तो मोदी ब्रहम्मोस बेचता भी है  !

*10 - मोदी तेजस को PPP माडल पे चलाता है...*

_तो मोदी गतिमान ओर बुलेट ट्रेन भी चलाने को बोलता है  !_

*11 - मोदी कुछ स्टेशन PPP माडल पर करता है...*

_तो डेडीकेटेड़ फ्रेट कारिड़ोर (DDFC) भी बनवाता है  !_

*12 - मोदी अगर टोल टैक्स वसूल करता है....*

_तो मोदी 14 लेन हाईवे, ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस वे,अटल टनल, बोगीबिल‌ ब्रिज भी बनवाता है  !_

*13 - मोदी पैट्रोल-डिजल महंगा करता है...*

_तो मोदी ईरान का 43000 करोड़ भी चुकाता है          ओर आपात स्थिति के लिए फ्यूल रिजर्व सैन्टर भी बनाता है !_

*14 - मोदी सिलेंड़र महंगा करता है....*

_तो मोदी 7 करोड़ गरीबो को फ्री सिलेंडर भी देता है  !_

*15 - मोदी स्वच्छ भारत मिशन चलाता है....*

_तो मोदी 12 करोड़ शोचालय भी बनवाता है  !_

*16 - मोदी CAA, NRC, CAB लेके आता है....*

_तो मोदी पाकिस्तान विस्थापितो को भारत में बसाता है  !_

*17 - मोदी चाईना की कम्पनीयो को भगाता है....*

_तो मोदी आत्मनिर्भर भारत , मेक इन इंडिया भी लेके आता है  !_

*18 - मोदी नोटबंदी करता है...*

_तो मोदी डिजिटल पेमेंट, नयी करंसी लेके आता है  !_

*19 - मोदी चाईना की ऐप्स बंद करता है...*

_तो मोदी स्वदेसी नाविक सैटेलाईट लेकर आता है  !_

*20 - चाईना पाकिस्तान आंख दिखाता है...*

_तो मोदी डोकलाम, ओर सर्जिकल स्ट्राईक कराता है  !_

*21 - मोदी अगर खुद को हिंदू कहता है....*

_तो कांग्रेसियो,TMC को भी घाट-घाट,मंदिर-मंदिर घुमाता है  !_

*उपरोक्त तथ्यों में से कोई एक भी गलत है अथवा अतिशयोक्ति से भरा हुआ है तो आप को चैलेंज है कि साबित करें और गलती ढूंढ कर दिखाएं*

वरना मान लें कि

👉 *शताब्दियों बाद भारत को‌* *कोई सनातनी राजा मिला है*... 

*पैट्रोल -डीजल में बिक जायेंगे* *इतनी छोटी नही हस्ती हमारी*....

*बाकी जिसे विरोध करना है करने दीजिए:*

*ॐ - जरा बारिश तेज़ हुई तो* *लोग आसमान को दोष देते हैं* । 

*ॐ - लोगों को दुख दर्द मिलता है* *तो भगवान को दोष देते हैं*। 

*ॐ - नाकामयाब होते हैं तो किस्मत को दोष देते हैं। 

ॐ - जमीन जायदाद कम मिलती है तो माँ बाप को दोष देते हैं

फिर मोदी जी तो  इंसान ही है* 🙏

🙌हमारा राष्ट्र हमारी जिम्मेदारी 

🤝जन-जन की हो भागीदारी 

🐚मेरा धर्म मेरा गर्व मेरा अभिमान

🚩सनातन बचाऔ, सनातन बढ़ाओ 

🙏🙏 अगर सहमत तो आप इस सन्देश को अपनो को भेजिए और हिंदुत्व के सच्चे सारथी बनिये - 🙏🙏

उत्तर प्रदेश में योगी जी को मुख्यमंत्री लम्बे समय तक रहना बहुत जरूरी है और भारत में प्रधानमंत्री जी श्री नरेंद्र मोदी जी की बहुत आवश्यकता है। सावधान सारे भ्रष्टाचारी एक हो रहे है।

*कम से कम पांच ग्रुप मैं जरूर भेजे*

*कुछ लोग नही भेजेंगे*

*लेकिन मुझे यकीन है आप जरूर भेजेंगे*

शनिवार, 6 सितंबर 2025

डोनाल्ड ट्रंप, अपनी सोशल मीडिया पर चिल्लाया: "भारत पर 50% टैरिफ लगाऊंगा!

जब अमेरिका का एक बड़ा नेता, डोनाल्ड ट्रंप, अपनी सोशल मीडिया पर चिल्लाया: "भारत पर 50% टैरिफ लगाऊंगा!"

 


यूरोपियन यूनियन ने शोर मचाया, जापान ने बैठकर सौदा करने की कोशिश की, और चीन ने सीधा पलटवार कर दिया।

लेकिन भारत?

बस शांत। न कोई भाग-दौड़, न वॉशिंगटन की तरफ दौड़, न कोई हड़बड़ी वाली मीटिंग। सिर्फ सन्नाटा...

क्यों....?

क्योंकि अमेरिका के साथ खेला हो गया..

टैरिफ के मार से भारत की "आह" तक नहीं निकली.. 

क्यों? क्या मोदी का घमंड था? या अंधा देशभक्ति का जोश?

नहीं...

बिलकुल नहीं...!! ये तो एक लंबी, गहरी साजिश थी,

जो 11 साल पहले शुरू हुई थी।

साल 2014....

मोदी प्रधानमंत्री बने ही थे, तभी NSA अजीत डोभाल ने उनसे कहा, "सर, अगर भारत सुपरपावर बनना चाहता है, तो अमेरिका का दबाव सहने की तैयारी करनी पड़ेगी।

असली दुश्मन चीन नहीं, बल्कि हमारी कमजोरियां हैं – डॉलर की जकड़न, तेल पर दूसरों का कब्जा, और हथियारों की निर्भरता।"

मोदी ने पूछा, "तो क्या करें?"

डोभाल ने जवाब दिया, "खतरे से दूर रहना है अमेरिका से दुश्मनी नहीं। लेकिन भारत पहले खाड़ी और अफ्रीका के देशों से दोस्ती बढ़ाये। अपनी नौसेना मजबूत करे, और अपना बाजार को हथियार बनाये।"

बस, योजना शुरू हो गई। जैसे कोई योद्धा अपना कवच गढ़ता है, वैसे ही साल दर साल ये चलती रही।

शुरुआत 2014 में 'मेक इन इंडिया' से। 

फिर 2015 में कतर से गैस का सौदा दोबारा तय किया। 2016-17 में UPI और GST लाए, जो डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ बने।

2018 में ईरान पर अमेरिकी पाबंदी आई, तो हमने अपना सिस्टम बनाया जो पाबंदी से बचाए। 

2019 में इलेक्ट्रॉनिक्स पॉलिसी – अब सिर्फ जोड़ना नहीं, बल्कि पार्ट्स खुद बनाना। 2020 में PLI स्कीम, 1.97 लाख करोड़ की।

2021 में तेल का रिजर्व स्टॉक। 2022 में INS विक्रांत जहाज, UAE और ऑस्ट्रेलिया से व्यापार समझौते।

2023 में UPI को विदेश से जोड़ा, रुपए में व्यापार शुरू। 2024 में अग्नि-V मिसाइल टेस्ट, कतर से 20 साल का गैस डील, और चाबहार बंदरगाह।

और 2025 में सर्विस एक्सपोर्ट 387.5 अरब डॉलर तक पहुंचा, अमेरिका का 25% टैरिफ आया, लेकिन असर? जीरो।

ये घमंड नहीं था, भाई।

ये कवच था – मजबूत, अटूट।

2013 में GDP 1.86 ट्रिलियन डॉलर थी, 

2025 में 4.19 ट्रिलियन – दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था। PPP में 17.65 ट्रिलियन। रफ्तार 6-8%। गरीबी आधी हो गई। FDI 300 अरब$ से ऊपर।

हां, रास्ता कठिन था। टैक्स भारी पड़े, दर्द हुआ। लेकिन ये आग की परीक्षा थी, जो स्टील को मजबूत बनाती है। अब टैरिफ हमारी जंजीर नहीं, बल्कि हमारी ढाल से टकराते हैं।

वो पुराना भारत, जो अमेरिका के आगे झुकता था, वो खत्म हो चुका। यहां कोई राजा का नुमाइंदा नहीं, कोई कठपुतली नहीं।

अब हम अपनी चाय पीते हैं, अपने जहाज गिनते हैं, अपने समंदर की रखवाली करते हैं, और अपनी कमाई पर किसी की दया नहीं मांगते।

मोदी को गालियां मिलेंगी, आलोचना होगी।

लेकिन ये कवच भारत का है।

और अब सवाल पश्चिम से है: "जब भारत नहीं झुकेगा, तो तुम्हारा अगला दांव क्या होगा, साहब?"

क्योंकि उस इटालियन पप्पू से वोट-चोरी की कितनी भी नौटंकी करा लो मोदी ना तो रुकने वाला ना तो भारत अब झुकने वाला है।

अगर लेख समझ नहीं आया तो दोष मेरा नहीं आपका है , क्योंकि पप्पू को फॉलो करते करते आपकी बुद्धि का स्तर भी वही रह गया है थोड़ा उसको विकसित करो । क्योंकि मुझे नहीं लगता इससे आसान भाषा में किसी को भी कुछ बताया जा सकता हो ।

कमेंट में जय हिन्द लिखना न भूलें...

जय हिन्द.... 🇮🇳