dahej mukt mithila

(एकमात्र संकल्‍प ध्‍यान मे-मिथिला राज्‍य हो संविधान मे) अप्पन गाम घरक ढंग ,अप्पन रहन - सहन के संग,अप्पन गाम-अप्पन बात में अपनेक सब के स्वागत अछि!अपन गाम -अपन घरअप्पन ज्ञान आ अप्पन संस्कारक सँग किछु कहबाक एकटा छोटछिन प्रयास अछि! हरेक मिथिला वाशी ईहा कहैत अछि... छी मैथिल मिथिला करे शंतान, जत्य रही ओ छी मिथिले धाम, याद रखु बस अप्पन गाम - अप्पन बात ,अप्पन मान " जय मैथिल जय मिथिला धाम" "स्वर्ग सं सुन्दर अपन गाम" E-mail: apangaamghar@gmail.com,madankumarthakur@gmail.com mo-9312460150

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सोमवार, 15 सितंबर 2014

मिथिला म- मैथिलीक मौलिक अधिकारक रक्षाक लेल शुभारम्भा कलश यात्रा दहेज़ मुक्त मिथिलाक अगुवाई में डेल्ही सं

मिथिला - मैथिलीक  मौलिक अधिकारक  रक्षाक लेल  शुभारम्भ  कलश यात्रा ,  दहेज़ मुक्त मिथिलाक  अगुवाई में  देल्ही  सं
Pravin Narayan Choudhary- 
हम एक बेर फेर समस्त दिल्लीवासी गंभीर एवं प्रतिबद्ध मिथिला-मैथिली प्रेमीजन केँ हार्दिक धन्यवाद देबय चाहब जे अपने लोकनिक सहयोग सँ एतेक भव्यता संग काल्हिक कार्यक्रम संपन्न भेल। एक तऽ मानव ताहू पर सँ अनेको तरहक भौतिक भोग-व्यसन सँ रोगग्रस्त कमजोर मानसिकताक शिकार हम प्रवीण एवं समस्त आयोजन पक्ष कतेको प्रकारक त्रुटिपूर्ण प्रस्तुति केने होयब, ताहि सब लेल अपने लोकनि क्षमा करब। किछु महत्त्वपूर्ण घोषणा सब करबाक छल, किछु अभियानक जानकारी सब देबाक छल, लेकिन कार्यक्रम अपन गति मे चलि देबाक कारणे हमरा वश मे किछु नहि रहि सकल। तैँ बेर-बेर मात्र क्षमायाचना टा करब। जे किछु त्रुटि भेलैक ताहि लेल आगाँ आरो सुन्दरता संग सुधार अनैत दिन-ब-दिन बेहतरी केर दिशा मे हम सब बढब से विश्वास बढि गेल।
आयोजन पक्षक मित्र लोकनि!
    
      अहाँ सबहक ऋण सँ ऊऋण हम कहियो नहि भऽ सकब। अमरनाथजी केर निरंतर सहयोग, डिजाइनिंग सहित कार्यक्रम लेल अत्यन्त महत्त्वपूर्ण मानल जायवला सामरिक सहयोग एवं प्रखरता-ओजस्वी संचालन करैत पुन: समीक्षा तक अपनेक संग अविस्मरणीय रहल। संजीव भाइ द्वारा बौद्धिक-वैचारिक आ अतिथिक सूची निर्धारण करैत 'कमल संदेश' केर कार्यालय पर्यन्त संयोजन हेतु उपलब्ध करेनाय - ओह शब्द नहि अछि जे हम धन्यवाद कय सकी। बस, आह्लादित हृदय सँ हमर स्नेह स्वीकार करब। कौशलजी केर सह-संयोजन मानू जेना प्रवीणक दोसराइत बनि सब बागडोर सम्हारलैन, आ केहन हमर स्मृति जे अहाँक अभियान पर जे चर्चा करेबाक छल वैह मनमस्तिष्क सँ बाहर चलि गेल। लेकिन याद राखब, जगज्जननी मैथिली केर कृपा, हम अहाँक हरेक सपना केँ साकार करबाक लेल आइये आ एखनहि सँ प्रण करैत छी। किछु समय देल जाउ। पहिने सँ दिमाग मे जे सब रहल से सब शालीनतापूर्वक संपन्न भेल आ आब मिथिलाक्षर फोन्ट विकास मे यथाशीघ्र निश्चित प्रगति आनि सकब, से गछैत छी। दिसम्बर २०१४ धरि ई कार्य पूरा करबायब, अहाँ निश्चिन्त रहू। हमर 'दि बेस्ट एफोर्ट्स' एहि विन्दु पर आगामी समस्त कार्यक्रम - भ्रमण, अभियान मे ई योजना शामिल रहत। आइ प्रामिस यू! प्रकाश भाइ, मैलोरंग - अहाँक सृजनशील आ क्रान्तिकारी योजना निर्माण हमर मनक बात करैत प्रमुख अतिथिक चुनाव सुझाव मे सहयोग केलक - सहभागिता हेतु अपनेक हर प्रयास नमन योग्य भेल।
फेसबुक केँ धन्यवाद - जे भाइ नरेन्द्र मिश्र संग भेट करौने छल। भाइ अपन संस्थान 'साईंधाम' केर दर्शन करबैत गछने छलाह जे कहियो अहाँ सब मिथिला लेल एतहु अभियान संचालित करू। ओ जहिना एतेक बात कहलैन, तहिये सँ दिमाग मे चलि रहल छल। सब मित्रवर्गकेँ कहने रही जे मिथिला-मैथिली प्रति अगाध सिनेह रखनिहार नरेन्द्र भाइजी केँ हम सब जोडिकय स्वयंसेवा सँ अपन मातृभूमि-मातृभाषा सहित संस्कृति-साहित्य-समाज लेल आगू बढब। ठीक तहिना भगवतीक कृपा सँ एहि बेर संभव भेल। भाइकेँ एक बेर फोन करिते सांगोपाँग तैयार आ तत्पर रहैत सहयोग देबाक वचन देलनि। काल्हि कार्यक्रम मे हुनक स्वैच्छिक योगदान सँ कार्यक्रम स्थल, साज-सज्जा, अतिथि-सत्कार (जलपान सहित) सहयोग लेल पूरा कार्यालय एवं साईंधाम केर अधिकारीवर्ग केँ तैयार अवस्था मे उपलब्ध करौलनि। साईंधाम केँ हृदय सँ धन्यवाद आ आभार प्रकट करैत नरेन्द्र भाइजीक एतेक पैघ सहयोग प्रति बेर-बेर नमन करय चाहब।
कम समय मे सोचल एहि कार्यक्रम एकमात्र महादेव केर प्रेरणा सँ साक्षात् जगज्जननी मिथिला धिया सिया एवं गौरीक कृपा सँ संभव भेल। किछु भाइ लोकनि नहि आबि पेला। शेफालिका माय आ निवेदिता बहिन केर अनुपस्थिति बड कचोटलक। लेकिन आदित्य भूषण मिश्र संग हुनक एक मित्र स्वयं सियारूप मे आबि कार्यक्रमरूपी शिव केँ शव होमय सँ बचबैत स्वयं पूर्ण कार्यक्रम अवधि भरि लेल शक्तिस्वरूपा अन्नपूर्णा बनि विराजमान रहली आ मैथिली नहि बुझितो ओ आनन्दमग्न होइत अपनो एक प्रस्तुति हिन्दी मे पूर्ण मर्मसँ भरल प्रस्तुत केलीह। कविश्रेष्ठ मैथिलक कमी नहि रहल। मनीष झा बौआभाइ, आदित्य भाइ, नितेश कर्ण, किशन कारीगर, जगदानन्द झा मनु भाइ... रामानाथ बाबु, विमल बाबु, विजय काका, विजय जेट भाइ, संजय नागदह भाइ... मस्त वातावरण मे मैथिली जिन्दाबाद - मिथिला जिन्दाबाद होइत रहल। बिजली गूल भेलाक बाद कवि लोकनिक उत्साह एहेन चरम पर छल जे मोमबत्तीक रौशनी मे सेहो कविता वाचन चलैत रहल। अन्त मे बिजली केँ फेर आबय पडलैन।
     
अक्षय बाबु केर आलेख लेल देल समय - बहुत कमे समय मे दिन-राति एक करैत समस्त संवैधानिक सन्दर्भ पर प्रकाश दैत हम मिथिलावासीक मौलिक अधिकार पर प्रकाश देबाक एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण आलेखक प्रस्तुति ऐतिहासिक भेल। एहि विषय पर गंभीर कार्य करैत जाहि तरहें सुझाव देल गेल से मनन एवं अनुकरण योग्य अछि। डा. देवशंकर नवीन - हमरा लोकनिक मार्गदर्शक - हिनक प्रमुख आतिथ्य कार्यक्रम लेल पूर्ण चन्द्रमाक शीतल - निश्छल चाँदनीक समान छल। ऋतेशजी एवं शिशिर बाबु संग नीलमाधव चौधरी सर केर सरस प्रोत्साहित करयवला उपस्थिति आ राखल गेल आलेख पर टिप्पणी सारगर्भित छल। नाउ एण्ड देन - मिथिला मेन - दहेज मुक्त मिथिलाक प्रथम संरक्षक महोदय कृपानन्द सर केर अध्यक्षता कार्यक्रम केर पूर्णता हेतु मोहर लगेबाक काज केलक। तहिना परम आदरणीय वरिष्ठ विकासवादी अभियानी आ हमरा लोकनिकेँ सदिखन आशीर्वाद सँ प्रेरित करनिहार अखिल भारतीय मिथिला संघ केर अध्यक्ष श्री विजय चन्द्र झा केर उपस्थिति मिथिलाक भीष्म पितामह समान छल। ऋषि मलंगिया भाइ केर सहयोगी - प्रेरक वचन सँ डेग-डेग उठबैत मात्र ४ दिन मे कार्यक्रम केँ सफलता संग संपन्न कैल जा सकल। नीरज पाठक, रामचन्द्रजी, हेमन्त भाइ, प्रसुन प्रशान्त, मिहिर बाबु - हम कतेक नाम गनाउ।
दिल्ली मे आब बुझाइते नहि अछि जे अपन निजी गाम नहि हो। अहाँ सबहक उर्जा सँ हमर उर्जा हजारो गुना बढि गेल अछि। सुनील पवन जी द्वारा कलश यात्राक प्रथम चरण लेल जोश-भरल मदैद - विश्वास राखू, अहाँक हर सपना पूरा होयत आ मिथिला-मैथिली लेल ई देन कदापि कियो बिसरि नहि सकत।

गुरुवार, 11 सितंबर 2014

मैथिली महायात्रा शुभारंभोत्सव २०१४


हकार:-------------------




मैथिली महायात्रा शुभारंभोत्सव २०१४

समय: ४ बजे सायं काल स' 
 
दिनांक: १३ सितम्बर २०१४ (शनि दिन)

स्थान: साईं धाम, प्रसाद नगर (टैंक रोड पार्किंग)

राजेंद्र प्लेस मेट्रो स्टेशन के समीप, नई दिल्ली 
 
दूरभाष: ०११ - २५७५०५३१ / ३२
 आयोजक:  -



     दहेज़ मुक्त मिथिला नेपाल एवम् भारत संयुक्त , कृपया ध्यान 
देब जे 'मैथिली भाषासेवी' - चाहे साहित्य, समाज, संस्कृति, कला,
 रंगकर्म, लेखनी, पत्रकारिता, शिक्षण, प्रशिक्षण, कोनो क्षेत्र मे जुडल 
लोक एहि कार्यक्रम मे अनिवार्यरूप सँ भाग लेब।


  सीमित सहभागिता संग संचालित एहि कार्यक्रम मे भाग लेनिहार
 अपन नाम, नंबर पहिने जरुर पोस्ट/मैसेज करी। संगहि, जे कियो अपन
  प्रस्तुति देबाक लेल इच्छुक होइ ओ अपन आलेख, विचार, कविता,


कथा, पहिने सँ पोस्ट करी

बुधवार, 10 सितंबर 2014

अति आवश्यक सूचना: (समस्त मैथिल समाज संग मानव समाज लेल)


अति आवश्यक सूचना: 

(समस्त मैथिल समाज संग मानव समाज लेल)


दहेज मुक्त मिथिला एक आन्दोलन थीक जे सभक जबान पर आबि गेल अछि। निरंतर प्रयास सऽ युवा लगायत अभिभावक वर्ग में सेहो एहि आन्दोलन के सार्थकता जोर पर अछि। एहेन कोनो दिवस नहि जे केओ एहि सन्दर्भे अपन जिज्ञासा नहि पठबैथ। सभ के कहब छन्हि जे हुनका सऽ जतेक संभव होयत से सहयोग देब। हमर जबाब सदिखन एकहि:-


१. अपनेक सहज सामर्थ में जे अछि से करू।

२. जाहिठाम रहैत छी, ओहिठाम एक कार्यसमिति निर्माण करू।

३. अपने जाहि गाम के छी ओहि गामक किछु बड़-बुजुर्ग आ युवा-युवती के जोड़ैत एक समिति निर्माण करू।

४. काज बहुत रास नहि - एकदम छोट - जे - अपनेक इलाका में सम्पन्न भेल दहेज मुक्त विवाह केनिहार के सूची निर्माण करैत संस्था द्वारा सम्मान करबाक अवसर बनाउ, विवाह-योग्य वर व कन्या के परिचय संकलन करैत संस्था के वेबसाइट www.dahejmuktmithila.org पर 

प्रोफाइल निर्माण करू, एकर अलावे जे गाम या ठाम में छी ताहि ठामक धरोहर के उपेक्षा दूर करबाक लेल प्रयास करू। समिति के एक प्रमुख व्यक्ति के नाम संस्था के बैनर/पुस्तिका में प्रविष्ट करबाओ।

५. एकर अलावे अपनेक सल्लाह आ सुझाव सऽ निम्न उद्देश्य के पूर्ति तरफ ध्यान दियौक:

*समाजक मूल दुश्मन ‘लैंगिक विभेद’ अन्त करबाक अछि।

*असाक्षरता दूर करबाक अछि, खास कऽ के महिलावर्ग में पूर्ण साक्षरता के विशेष पहल करबाक अछि।

*दहेज मुक्त समाज निर्माण में दहेज के त्याग करनिहार के सम्मान जरुरी, नहि तऽ दहेज लेनिहार दहेज के स्टेटश सिम्बल मानैत समाज में प्रदूषण नित्य बढा रहल छथि आ वर्गीय विभेद के सृजन सेहो कय रहल छथि, से सावधान।

*आजुक २१म शताब्दी में दुनिया के बेटी कतेक आगू चलि गेल... लेकिन जाहि समाज में दहेज प्रथा के प्रभाव अछि, लोक बेटीके शिक्षा कम आ दहेज इन्तजाम में मजबूरी बेसी पड़ैत छथि, एहि तरहें समाज अन्य दहेज मुक्त समाज के अपेक्षा पिछड़ैत अछि।

*स्वेच्छाचार के स्वागत हो - जे अपन इच्छा सऽ नीक घर आ वर के चक्कर में घूमैत छथि आ लूटबैत छथि, हुनका पर केवल दया सऽ भरल एक दृष्टि दी आ हाथ जोड़ि ईश्वर सऽ प्रार्थना करी।

*बहुत रास तथाकथित इन्जिनियर आ एम.बी.ए./एम.सी.ए. आ आधुनिक अनेको तरहक डिग्री लैत इन्तजार में छथि जे केम्हरो सऽ केओ भोलाभाला बेटीवाला आबि किछु माल-खजाना सेहो दैथ आ घर के सुशीला-पुनीता सेहो दैथ... तदोपरान्त असलियत में लोभ के संजाल में फंसा ओहि बेटीवाला के तरह-तरह के मांग सऽ परेशान राखैथ, नहि पूरा भेला पर भोली-मुनियां के सब मिलि प्रताड़ित करैथ... एहेन समाज के दुश्मन के पहचान करू आ सतर्क करू सभके। सावधान।

*हमर सभ के प्रयास में दहेज मुक्त विवाह लेल सहजता हो ताहि के इन्तजाम कैल गेल अछि - www.dahejmuktmithila.org आ www.mithilashaadi.com, https://www.facebook.com/groups/dahejmuktmithila/ पर प्रोफाइल अपलोड/अपडेट करू - तदनुसार जोड़ी के खोजी करू। मुदा सावधान - बहुत रास ढोंगी बाजैत किछु आर आ करैत किछु आर अछि... ताहि हेतु दहेज मुक्त मिथिला के समिति संग सम्पर्क करैत मात्र अन्तिम निर्णय करू अन्यथा संस्था के जिम्मेवारी नहि होयत।

*एको शहर - एको गाम बाकी नहि हो... एहि अभियान संग जुड़य लेल अहाँके सद्‌प्रयास के जरुरैत अछि।
 


     
   https://www.facebook.com/groups/dahejmuktmithila/doc/374593335884737/ एहि पर देखू आ अपन सल्लाह सऽ एकरा आरो पुख्ता करू। 


*अपन परिवार के दहेज मुक्त बनाउ, स्वतः दुनिया दहेज मुक्त बनत। बेसी आडंबर के सेहो बहिष्कार करू। संछिप्त विवाह 

प्रक्रिया आ आवश्यक विध-व्यवहार के पालन हो। आदर्श विवाह प्रारूप सेहो उपलब्ध अछि।

सधन्यवाद!

दहेज मुक्त मिथिला परिवार

सोमवार, 8 सितंबर 2014

दहेज धनक चास्नी

कविता @
दहेज धनक चास्नी भल्ही तु चाख।
मुद्दा ह्रदय मे मनबता तु राख।।
परिश्रम सं जुनी धन कमएबेतखने प्राणी
 तु महान कहेबेबेटा बेच बेच कमएले
 टाका दहेजक नाम पैर देले डाकाई केहन छौ
 तोहर शाखधनक चास्नी भल्ही तु चाख।
मुद्दा ह्रदय मे मनबता तु राख।।
कियो मारी रहल छे सीता के
कियो जारी रहल छे गीता के
हृदय विह्बल चीत चीत्कार
अकर्म्निष्ठ अपराधी के धिकार
जारी सीता के बनएले राखधनक
 चास्नी भल्ही तु चाख।
मुद्दा ह्रदय मे मनबता तु राख।।
चाहे गाम हुए कि शहर सगरो
मच्च्ल दहेजक कहरप्रताण्डित भ् रहल सीता
गीताजरी रहल अछ
सृष्टिक चीताबन्द अछ मृत समाजक वाक धनक
 चास्नी भल्ही तु चाख।
मुद्दा ह्रदय मे मनबता तु राख।।


Prabhat Ray Bhatt

शनिवार, 6 सितंबर 2014

अनंत पूजा

अनंत पूजा 
 
    अनंत भगवान विष्णु सृष्टि के आरंभ में चैदह लोकक 'तल, अतल, वितल, सुतल, तलातल, रसातल, पाताल, भू, भुवः, स्वः, जन, तप, सत्य, मह' केर रचना कयने छलाह । अहि सभ लोकक पालन करबाक हेतु स्वयं 14 रूप में प्रकट भेलाह जाहि सौं अनंत प्रतीत होमेय लगलाह।

        ताहि कारणे अनंत पूजा के दिन एक गोट पात्र में दूध, मधु, दही, घी और गंगाजल मिला क्षीर सागरक निर्माण कयल जैत अछि । फेर कचका ताग सौं बनल चैदह गिठ्ठह वाला अनंत सूत्र सौं भगवान अनंत के क्षीर सागर में ताकल जैत अछि । 



पूजाक पश्चात अहि ताग के अनंत भगवानक स्वरूप मानि पुरूष अपना दाहिना बांहि पर और स्त्री बाम बांहि पर अनंत के धारण करैत छथि।

मान्यता इहो अछि जे युधिस्ठीर के अप्पन राज पाट अहि उपास सौं पुनः प्राप्त भेल छलन्हि।

अनंतक चैदहो गिठ्ठह में प्रत्येक गिठ्ठह एक एक लोकक प्रतीक होइत अछि जकर रचना भगवान विष्णु केने छलाह। अहि प्रत्येक गिठ्ठह में भगवानक ओहि चैदह रूपक वास मानल जैत अछि जे चौदह लोक में वास करैत छथि।

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