रविवार, 8 सितंबर 2013
शुक्रवार, 6 सितंबर 2013
मिथिलाक जिला आ महत्व
मिथिलाक जिला आ महत्व
आई मिथिलाक जिला "सीतामढ़ी " के चर्चा।
सीतामढी के माँइट में तिरहुत और मिथिला क्षेत्र के संस्कृति के गंध भेटत। इ भूभाग के देवी सीता के जन्मस्थली तथा विदेह राजक अंग हेबाक गौरव प्राप्त अईछ। इ स्थानक सम्बन्ध त्रेता युग सँ मानल जाइत अईछ । धार्मिक और पौराणिक ग्रन्थ मे सेहो एकर उल्लेख अईछ । त्रेता युग में राजा जनक के पुत्री एवं भगवान राम के पत्नी देवी सीताक जन्म पुनौरा में भेल छल, कहल जाइत अईछ कि मिथिला में एक बेर दुर्भिक्ष के स्थिति उत्पन्न भ गेल छल . पुरोहित और पंडित सब मिथिला के राजा जनक के अपने क्षेत्र के सीमा में हल चलेबाक सलाह देलैन। सीतामढ़ी के पूनौरा नामक स्थान पर जखन राजा जनक खेत में हर जोतैत छला त ओहि समय धरती सँ सीताक जन्म भेलैन। सीता जी के जन्म के कारण ई नगर के नाम पाहिले सीतामड़ई, फेर सीतामही और कालांतर में सीतामढ़ी पड़ल। एहन जनश्रुति अईछ कि सीताजी के प्रकाट्य स्थल पर हुनक विवाह पश्चात राजा जनक भगवान राम और जानकी के प्रतिमा लगावला। लगभग ५०० वर्ष पूर्व अयोध्याक एक संत बीरबल दास ईश्वरीय प्रेरणा पावि ओइ प्रतिमाक खोजा और ओकर नियमित पूजन आरंभ केला। प्राचीन काल मे सीतामढी तिरहुत के अंग छल । ई क्षेत्र में मुस्लिम शासन आरंभ होब तक मिथिला के शाशन छल। 1908 ईस्वी में तिरहुत मुजफ्फरपुर जिला के हिस्सा छल। स्वतंत्रता पश्चात 11 दिसंबर 1972 क सीतामढी के स्वतंत्र जिला के दर्जा भेटल, जेकर मुख्यालय सीतामढ़ी बनल।
दार्शनिक स्थल:-
- जानकी स्थान और उर्बीजा कुंड
-पुनौरा और जानकी कुंड
-हलेश्वर स्थान
-पंथ पाकड़
-बगही मठ
-देवकुली (ढेकुली): द्रोपदी के जन्म स्थली मानल जाइत अईछ
-गोरौल शरीफ
-शुकेश्वर स्थान
-बोधायन सर
-सभागाछी ससौला
साहित्यकार:-
रामधारी सिंह `दिनकर', रामवृक्ष बेनीपुरी, लक्षमी नारायण श्रीवास्तव,डॉ रामाशीष ठाकुर, डॉ विशेश्वर नाथ बसु, राम नन्दन सिंह,पंडित बेणी माधव मिश्र, मुनि लाल साहू, सीता राम सिंह, रंगलाल परशुरामपुरिया,हनुमान गोएन्दका, राम अवतार स्वर्ङकर, पंडित उपेन्द्रनाथ मिश्र मंजुल,पंडित जगदीश शरण हितेन्द्र,ऋषिकेश,राकेश रेणु, राकेश कुमार झा, बसंत आर्य,राम चन्द्र बिद्रोही, माधवेन्द्र वर्मा, उमा शंकर लोहिया, गीतेश, इस्लाम परवेज़, बदरुल हसन बद्र,डॉ मोबिनूल हक दिलकश आदि
गुरुवार, 5 सितंबर 2013
प्रिय दमुमि राष्ट्रीय अध्यक्ष महोदय,

सितम्बर ५, २०१३.
प्रिय दमुमि राष्ट्रीय अध्यक्ष महोदय,
हमरा लोकनि दहेज मुक्त मिथिला नाम परिकल्पनाकेँ सफलतापूर्वक स्थापित कयला उपरान्त अपनेक सक्षम नेतृत्वमें बेहतरी दिसि उन्मुख छी, एहि सँ हमरा लगायत सभक हृदयमें चारू कात प्रसन्नता दृष्टिगोचर भऽ रहल अछि। विगतमें सेहो हमरा लोकनि हरेक समाजमें एक जागरण अभियान रूपमें दहेज विरुद्ध स्वैच्छिक संकल्प सभाक आयोजन लेल प्रतिबद्ध रही, आब जखन हमरा लोकनिक ई संस्था समस्त भारतमें कार्य करबाक लेल पंजीकृत भऽ चुकल अछि तखन मिथिलावासी होइथ वा मिथिलेतरवासी, सभक समाजमें छोट-छोट सभा द्वारा संकल्प अभियान केँ सक्रियतापूर्वक चलेबाक आवश्यकताक पूर्ति सहजता संग वैह समाजक सक्रिय सहयोग सँ कैल जा सकैत छैक, बस हमरा लोकनि केवल लीड धरि दी। जेना महाराष्ट्रक समिति उर्जावान् लोककेर समूह सँ भरल अछि आ आगामी गणेश चतुर्थीमें पुन: समुचित बैनर सहित हमरा लोकनि जन-जागृति करय लेल जा रहल छी... तऽ एहेन में हमर प्रस्ताव ईहो अछि जे किऐक नऽ छोट-छोट संकल्प सभाक आयोजन हर जुडल सदस्य द्वारा मुंबई सहित अन्यत्र सेहो कैल जाय? एकर प्रारूप अत्यन्त सहज आ मर्मस्पर्शी होयत, केवल कोनो एक सदस्य द्वारा एक छुट्टीक दिन एक छोट सभा मार्फत कम से कम ५०-१०० परिवारक लोककेँ आमन्त्रित करैत स्वैच्छिक संकल्प करबैत दहेज विरुद्ध संकल्प ली:
१. हम माँगरूपी दहेज नहि लेब नहि देब।
२. अपन धियापुताक विवाह पर्यन्तमें माँगरूपी दहेज नहि लेब नहि देब।
३. एहेन कोनो वैवाहिक कार्यक्रम जाहिमें माँगरूपी दहेजक लेन-देन कैल गेल अछि ताहिमें सहभागी सेहो नहि होयब।
आ एहि तरहें संस्थाक सदस्यता प्रदान करैत हमरा लोकनि आगू बढैत चलब। यैह अवधारणाक अनुरूप दहेज मुक्त मिथिला अपन योगदान समाजकेँ प्रदान करैत असीम सफलता सेहो पायत आ समाजमें दहेजरूपी दानवक प्रतिकार बड पैघ स्तरतक कय सकत से आशा अछि।
कृपया अपने आ समस्त राष्ट्रीय व क्षेत्रीय कार्यकारिणी हमर एहि छोट प्रस्तावपर विचार दैत अमल करबाक लेल मुहिमकेँ गतिशीलता प्रदान करब से आत्मविश्वास अछि।
अपनेक विश्वासी,
प्रवीण नारायण चौधरी
https://www.facebook.com/groups/dahejmuktmithila/doc/374593335884737/
गजल
कहियो तँ हमर घरमे चान एतै
नेनाक ठोर बिसरल गान गेतै
निर्जीव भेल बस्ती सगर सूतल
सुतनाइ यैह सबहक जान लेतै
मानक गुमान धरले रहत एतय
नोरक लपटिसँ झरकिकऽ मान जेतै
सुर ताल मिलत जखने सभक ऐठाँ
क्रान्तिक बिगुलसँ गुंजित तान हेतै
हक अपन "ओम" छीनत ताल ठोकिकऽ
छोडब किया, कियो की दान देतै
(दीर्घ-दीर्घ-ह्रस्व-दीर्घ)-(ह्रस्व-दीर्घ-दीर्घ-दीर्घ)-(ह्रस्व-दीर्घ-दीर्घ)
(मुस्तफइलुन-मफाईलुन-फऊलुन)- प्रत्येक पाँतिमे एक बेर
गजल
कहियो तँ हमर घरमे चान एतै
नेनाक ठोर बिसरल गान गेतै
निर्जीव भेल बस्ती सगर सूतल
सुतनाइ यैह सबहक जान लेतै
मानक गुमान धरले रहत एतय
नोरक लपटिसँ झरकिकऽ मान जेतै
सुर ताल मिलत जखने सभक ऐठाँ
क्रान्तिक बिगुलसँ गुंजित तान हेतै
हक अपन "ओम" छीनत ताल ठोकिकऽ
छोडब किया, कियो की दान देतै
(दीर्घ-दीर्घ-ह्रस्व-दीर्घ)-(ह्रस्व-दीर्घ-दीर्घ-दीर्घ)-(ह्रस्व-दीर्घ-दीर्घ)
(मुस्तफइलुन-मफाईलुन-फऊलुन)- प्रत्येक पाँतिमे एक बेर
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