आनंद झा
लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं.
सभी संदेश दिखाएं
आनंद झा
लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं.
सभी संदेश दिखाएं
बुधवार, 16 मई 2012
की हौऊ तों कमजोर भ गेलह
›
की हौऊ तों कमजोर भ गेलह नांगरी कटा क गाम बिसरलह अप्पन भाषा आ ठाम बिसरलह मिथिला के पहिचान बिसरलह बैमानी पोरी पोर भ गेलह की ..............
बुधवार, 9 मई 2012
हे मिथिला तूं कानय नै
›
हे मिथिला तूं कानय नै जानय छी तोरा बड़ दुःख होई छौ लेकिन नोर खासबय नै हे मिथिला ........................... हमहूँ तोहर कर्जदार छी अपने कर्...
सोमवार, 9 अप्रैल 2012
अपन महिष कुरहैरिये नाथब हम्मर अपने ताल
›
धरती के आकास कहब , आ अकास के पाताल अपन महिष कुरहैरिये नाथब हम्मर अपने ताल धरती ....................................................... च...
शनिवार, 18 फ़रवरी 2012
चल रइ बौआ गाम पर
›
चल रइ बौआ गाम पर चढलें किये लताम पर कहबय चल कक्का के जा क बैसल छथिन्ह दालान पर चल .............................. ...... उम्हर एमह...
1 टिप्पणी:
शुक्रवार, 17 फ़रवरी 2012
हिला दही सौंसे दुनियां के, उखरल खुट्टा गैर क
›
बरका बरका बात करइ सब ,छोटका के के पुछतयी सब परेलई छोरी छारी क ,मिथिला ले के सोचतयी सुन रऊ बुआ सुन गे बुच्ची ,करही किछ विचैर क हिला दही स...
2 टिप्पणियां:
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें